Silver Rate Today: आज का चांदी का भाव! लगातार छठे दिन गिरावट, जानिए आज 1 किलो सिल्वर का ताजा भाव

Silver Price Today: अगर आप चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमत में 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद चांदी का भाव घटकर 2,21,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गया है। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र है, जब चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

बाजार के जानकारों के अनुसार, 10 जुलाई से अब तक चांदी की कीमत में कुल 15,500 रुपये प्रति किलोग्राम यानी करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निवेशक वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव पर नजर बनाए हुए हैं, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा में हल्की तेजी दर्ज की गई। वायदा कारोबार में चांदी 1,618 रुपये (0.75%) बढ़कर 2,18,021 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

दिल्ली में 1 किलो सिल्वर ₹2,35,100

अगर आप आज चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जान लेना आपके लिए जरूरी है। आज दिल्ली में चांदी की कीमत ₹235.10 प्रति ग्राम और ₹2,35,100 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। दिल्ली देश के सबसे बड़े सर्राफा बाजारों में से एक है। यहां चांदी की मांग हमेशा ऊंची रहती है। निवेश के साथ-साथ लोग चांदी का इस्तेमाल आभूषण, बर्तन, सजावटी सामान, सिक्के और उपहार के रूप में भी बड़े पैमाने पर करते हैं। इसी वजह से दिल्ली में चांदी की कीमतों पर निवेशकों और खरीदारों की लगातार नजर रहती है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर समय-समय पर बदलते रहते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले अपने शहर का ताज़ा रेट जरूर जांच लेना चाहिए। यदि आप निवेश या व्यक्तिगत उपयोग के लिए चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अधिकृत ज्वेलर्स या सर्राफा बाजार से मौजूदा कीमत की पुष्टि करने के बाद ही खरीदारी करें।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : 21 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स की शुरुआत कमजोर रहने की संभावना है। क्योंकि शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी करीब 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

20 जुलाई को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क गिरावट के साथ बंद हुए। जून तिमाही के नतीजों के बाद प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली और मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार का मूड खराब कर दिया। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 442.93 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,708.52 पर और निफ्टी 95.80 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,238.50 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी लगभग 24,141 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी मार्केट में कमजोर शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाज़ारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। गिफ्ट निफ्टी 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं, जापान के निक्केई में 2.28 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट टाइम्स भी 0.53 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंग सेंग में 0.39 फीसदी की कमजोरी नजर आ रही है। वहीं, ताइवानी बाजार में 3.04 फीसदी की तेजी दिख रही है। कोस्पी करीब 3.73 फीसदी भाग गया है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.34 फीसदी की तेजी नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को वॉल स्ट्रीट के तीनों प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 307.16 अंक या 0.59% गिरकर 51,839.26 पर आ गया, S&P 500 में 14.41 अंक या 0.19% की गिरावट हुई और यह 7,443.28 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 12.17 अंक या 0.05% गिरकर 25,508.07 पर बंद हुआ।

डॉलर इंडेक्स

मंगलवार को अमेरिकी डॉलर एक हफ्ते के उच्चतम स्तर के आस-पास आ गया है। बाजार मध्य पूर्व से मिल रहे विरोधाभासी संकेतों के बीच उलझन में है। एक तरफ इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो रही हैं,तो दूसरी तरफ़ युद्धविराम की उम्मीदों से कुछ राहत भी मिल रही है। फिलहाल US डॉलर इंडेक्स 100.96 पर दिख रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

10-साल और 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड में बहुत कम बदलाव हुआ है और यह क्रमशः 4.58% और 4.20% पर दिख रहे हैं।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसी में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। मलेशियन रिंगित सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी है, जिसमें 0.108% की बढ़त हुई है। इसके बाद चीनी रेनमिनबी में 0.087% की बढ़ोतरी हुई है। सिंगापुर डॉलर में 0.023% की मामूली बढ़त दिख रही है। जबकि फिलीपीन पेसो में 0.006% की मामूली बढ़त के साथ लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। जापानी येन में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।

दूसरी ओर दक्षिण कोरियाई वॉन सबसे कमजोर करेंसी है। इसमें 0.264% की गिरावट आई है। इसके बाद इंडोनेशियाई रुपिया का नंबर रहा, जो 0.15% गिरा है। ताइवान डॉलर में 0.081% की गिरावट आई है,जबकि थाई बहत 0.056% कमजोर हुआ है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

20 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,121 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,312 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

 

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Silver Gold Price:चढ़ गया सोने-चांदी का भाव, क्या अब भी कर रहे है सही मौके की तलाश, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय की राय

Silver Gold Price: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 21 जुलाई को सुबह के कारोबार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दरअसल, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता से सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिला। हालांकि भले ही US में ज़्यादा ब्याज दरों की उम्मीदों ने बढ़त को सीमित रखा। COMEX सोना $4,041 प्रति औंस के इंट्राडे हाई को छूने के बाद 0.34% बढ़कर $4,029.60 प्रति औंस हो गया, जबकि COMEX चांदी 0.13% बढ़कर $57.145 प्रति औंस हो गई।

कीमती धातुओं का बाजार 2 अलग-अलग वजहों को बैलेंस कर रहा है। एक तरफ, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से सोने जैसे सेफ़-हेवन एसेट्स की मांग को सपोर्ट मिल रहा है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह उम्मीद मज़बूत हो रही है कि US फ़ेडरल रिज़र्व इस साल के आखिर में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

सोने के लिए तेल क्यों ज़रूरी है

US और ईरान के बीच बीच-बचाव की कोशिशों की खबरों से कुछ समय के लिए सीज़फ़ायर की उम्मीद बढ़ने के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आई। ब्रेंट क्रूड 0.4% गिरकर $88.87 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US WTI क्रूड $82.47 के करीब ट्रेड कर रहा था।

हालांकि, यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा सऊदी अरब पर नेवल ब्लॉकेड की धमकी देने के बाद जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी भी बढ़े हुए हैं, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों की चिंता बढ़ गई है। US और ईरान के बीच नए मिलिट्री हमलों ने भी बाज़ारों को किनारे पर रखा है।

कच्चे तेल की ज़्यादा कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। अगर महंगाई ज़्यादा बनी रहती है, तो फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज़ दरों को ज़्यादा समय तक बनाए रख सकता है या फिर से दरें बढ़ा सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसका असर आमतौर पर सोने जैसे बिना ब्याज़ वाले एसेट्स पर पड़ता है।

फेड की उम्मीदों ने बुलियन की बढ़त को रोका

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP, कायनात चैनवाला के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,020 प्रति औंस के करीब है, जबकि सिल्वर $57 प्रति औंस से ऊपर रिकवर हो गया है, लेकिन बढ़त सीमित है क्योंकि मार्केट ने साल के आखिर तक कम से कम एक और फेडरल रिजर्व रेट हाइक को काफी हद तक तय कर लिया है।

उन्होंने कहा कि US पॉलिसीमेकर्स के सख्त कमेंट्स और तेल की कीमतों में हालिया तेजी ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है, जिससे जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से बीच-बीच में मिल रहे सपोर्ट के बावजूद बुलियन की अपील कम हो गई है।

आखिर कहां तक जाएगी कीमतें

LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट, जतीन त्रिवेदी ने कहा कि US में नरम महंगाई के आंकड़ों से गोल्ड में रिकवरी हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मजबूत US डॉलर और फेड रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदों को लेकर चिंताएं बढ़त को रोक रही हैं। घरेलू बाज़ार में, उन्हें MCX गोल्ड के लिए तुरंत सपोर्ट के तौर पर ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम दिख रहा है, जबकि आने वाले सेशन में ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम एक अहम रेजिस्टेंस लेवल हो सकता है।

इस बीच, चांदी ने हाल के निचले स्तरों से उबरने के बाद ज़्यादा मज़बूती दिखाई है, हालांकि दोनों कीमती धातुएं ग्लोबल तेल बाज़ारों में हो रहे बदलावों, पश्चिम एशिया संघर्ष और US मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदों के प्रति सेंसिटिव बनी हुई हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 100 प्वाइंट से ज्यादा नीचे फिसला है। FIIs की कैश और वायदा दोनों में भी बिकवाली दिखी। इधर एशिया में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। US INDICES भी कल ऊपरी स्तरों से फिसले।

इस बीच ईरान पर लगातार 10वें दिन अमेरिकी अटैक जारी है। ईरान का भी पड़ोसी देशों पर जवाबी हमला जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा-अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए ईरान को भारी कीमत चुकानी होगी। इधर हॉर्मूस के बाद अब बाब-अल-मंदेब फ्रंट भी खुला। हूती विद्रोहियों ने RED SEA में सऊदी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई। वहीं क्रूड 88 डॉलर के पार निकला है।

Stocks to Watch : मंगलवार 21 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 15 स्टॉक्स, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch : मंगलवार, 21 जुलाई का कारोबारी सत्र कई शेयरों के लिए अहम रहने वाला है। कुछ कंपनियों ने दमदार तिमाही नतीजे पेश किए हैं, जबकि कुछ ने बड़े कॉर्पोरेट ऐलान किए हैं। वहीं, कई कंपनियों पर डिविडेंड, मैनेजमेंट बदलाव, नए प्रोडक्ट और विस्तार योजनाओं का असर दिख सकता है। ऐसे में इन 15 शेयरों पर बाजार की खास नजर रहने की उम्मीद है।

Paytm

फिनटेक कंपनी Paytm ने जून तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 79% बढ़कर ₹220 करोड़ हो गया, जबकि मर्चेंट GMV 31% बढ़कर ₹7.1 लाख करोड़ पहुंच गया। वहीं, मार्च तिमाही के मुकाबले भी कंपनी का मुनाफा 20% बढ़ा है।

Rallis India

टाटा ग्रुप की एग्री-इनपुट कंपनी Rallis India का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 31.6% बढ़कर ₹125 करोड़ हो गया। कंपनी का रेवेन्यू 6.8% बढ़कर ₹1,022 करोड़ और EBITDA 23.3% बढ़कर ₹185 करोड़ रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन 15.7% से बढ़कर 18.1% हो गया, जिससे बेहतर परिचालन और मजबूत प्रोडक्ट मिक्स का फायदा दिखा।

Emcure Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Emcure Pharmaceuticals को बड़ी मंजूरी मिली है। कंपनी के को-मार्केटेड ब्रांड Poviztra को CDSCO ने हरी झंडी दे दी है। यह दवा MASH नाम की गंभीर लिवर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होगी। इसका उपयोग उन वयस्क मरीजों के लिए होगा, जिनमें लिवर फाइब्रोसिस F2-F3 स्टेज तक पहुंच चुका है।

Sobha

रियल एस्टेट कंपनी Sobha ने जून तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा ₹14 करोड़ से बढ़कर ₹51 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 50% बढ़कर ₹1,278.1 करोड़ पहुंच गया। EBITDA भी ₹23.7 करोड़ से बढ़कर ₹77.6 करोड़ हो गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 2.8% से बढ़कर 6.1% पर पहुंच गया।

Canara HSBC Life

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी Canara HSBC Life Insurance का प्रदर्शन भी अच्छा रहा। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 20.3% बढ़कर ₹28.1 करोड़ हो गया। नेट प्रीमियम भी 23.8% बढ़कर ₹2,047.5 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹1,653.4 करोड़ था।

SML Mahindra

कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी SML Mahindra का मुनाफा इस बार थोड़ा घटा है। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 5.1% गिरकर ₹64 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 13.2% बढ़कर ₹957 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 4.7% घटकर ₹100.1 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन भी 12.4% से घटकर 10.5% पर आ गया।

Sammaan Capital

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी Sammaan Capital ने अपने कुछ बॉन्ड वापस खरीदने का फैसला किया है। कंपनी की सिक्योरिटीज इश्यूअंस एंड इन्वेस्टमेंट कमेटी ने कैश टेंडर ऑफर को मंजूरी दे दी है। इसके तहत कंपनी 2027 में मैच्योर होने वाले 35 करोड़ डॉलर के सोशल बॉन्ड्स में से 1.8 करोड़ डॉलर तक के बॉन्ड वापस खरीदेगी।

Technocraft Industries

इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल कंपनी Technocraft Industries ने महाराष्ट्र के मुरबाड में स्थित अपनी फैब्रिक यूनिट का प्रोडक्शन 20 जुलाई से बंद कर दिया है। कंपनी का कहना है कि खराब बाजार और लगातार हो रहे नुकसान की वजह से यह फैसला लिया गया है। हालांकि, गारमेंट्स कारोबार और यार्न डिवीजन पहले की तरह चलते रहेंगे। साथ ही कंपनी की सहायक इकाई Technosoft Engineering Projects ने जापान की नई कंपनी Technosoft Integrated Solutions K.K. में 100% हिस्सेदारी खरीदी है। इससे कंपनी विदेशों में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है।

Unitech

रियल एस्टेट कंपनी Unitech ने कहा है कि उसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर युधवीर सिंह मलिक का कार्यकाल 20 जुलाई को खत्म हो गया है। उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने की थी। कंपनी का कहना है कि नए चेयरमैन और एमडी की नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

Bharat Gears

ऑटो कंपोनेंट कंपनी Bharat Gears ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर ₹1 का फाइनल डिविडेंड प्रस्तावित किया है। इसके लिए 6 अगस्त 2026 रिकॉर्ड डेट तय की गई है। हालांकि, डिविडेंड पर अंतिम फैसला 13 अगस्त को होने वाली AGM में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद होगा।

Suzlon Energy

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Suzlon Energy 28 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी। नतीजों से पहले FII ने अपनी हिस्सेदारी 23.85% से बढ़ाकर 24.15% कर ली है। वहीं, म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी भी 4.87% से बढ़कर 6.47% हो गई है।

DP Abhushan

ज्वेलरी कंपनी DP Abhushan का जून तिमाही में मुनाफा 77% बढ़कर ₹64.45 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 58% बढ़कर ₹853.63 करोड़ और EBITDA 70% बढ़कर ₹93.99 करोड़ रहा। कंपनी जल्द गुजरात के दाहोद और मध्य प्रदेश के जबलपुर में नए शोरूम भी खोलेगी।

Atul

केमिकल कंपनी Atul Ltd. ने सीनियर मैनेजमेंट में बदलाव किया है। डॉ. प्रभाकर चेबिय्यम के रिटायर होने के बाद डॉ. धवल वाशी को फार्मास्यूटिकल्स कारोबार का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया है। वहीं, विनय देसाई को भी सीनियर मैनेजमेंट टीम में शामिल किया गया है।

BlueStone Jewellery

ज्वेलरी कंपनी BlueStone Jewellery का जून तिमाही में घाटा 80% घटकर ₹6.9 करोड़ रह गया। कंपनी की आय 50% बढ़कर ₹736.8 करोड़ और EBITDA 94% बढ़कर ₹107.7 करोड़ हो गया। EBITDA मार्जिन भी 11.3% से बढ़कर 14.6% पर पहुंच गया।

IndiGo

एविएशन कंपनी IndiGo ने CFM International के साथ बड़ा समझौता किया है। कंपनी 510 Airbus A320neo विमानों के लिए 1,000 से ज्यादा LEAP-1A इंजन खरीदेगी। यह सौदा एयरलाइन के भविष्य के विस्तार और बेड़े को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

ये कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करेंगी

शेयर बाजार में लिस्टेड कई बड़ी कंपनियां मंगलवार, 21 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Adani Energy Solutions, Adani Total Gas, Bajaj Auto, Bandhan Bank, Indian Hotels Company, JSW Infrastructure, Mahindra & Mahindra Financial Services, TVS Motor, IndiaMART InterMESH, Trident, Gabriel India, Hatsun Agro Product, Cyient DLM, E2E Networks, Sagility और TVS Holdings जैसी कंपनियां शामिल हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

गोल्ड पर ईरान युद्ध का कितना असर पड़ा? अब खरीदें या बेचने में भलाई, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: जुलाई की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव था। ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली एसेट की ओर रुख करते हैं। हालांकि, यह तेजी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मुनाफावसूली बढ़ने के साथ सोने की कीमतों में फिर गिरावट आ गई।

युद्ध के तनाव के अलावा अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों ने भी सोने के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव पैदा किया।

जुलाई में सोने की चाल कैसी रही?

MCX पर 1 जुलाई को सोने का भाव करीब ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम था। सिर्फ दो कारोबारी सत्र में यह बढ़कर ₹1,47,650 पर पहुंच गया। यानी करीब 4.1% की तेजी आई।

लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बाजार ने युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का नए सिरे से आकलन किया। इसका असर यह हुआ कि 17 जुलाई तक सोना गिरकर ₹1,40,550 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। 20 जुलाई को सोने में हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली। इसका भाव फिर ₹1,41,850 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

अगर लंबी अवधि की बात करें, तो 29 जनवरी को सोने ने ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम (करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस) से ऊपर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद 30 जून तक इसमें करीब 30% की गिरावट आ चुकी थी और भाव करीब ₹1.40 लाख (करीब 3,960 डॉलर प्रति औंस) तक आ गया।

युद्ध के बावजूद सोना क्यों कमजोर पड़ा?

Augmont की हेड ऑफ रिसर्च रेनिशा चैनानी का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद इस महीने सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया, जो जून के आखिर के बाद का सबसे निचला स्तर है।

उनके मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। इससे बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग से ज्यादा असर ब्याज दरों की चिंता का पड़ा।

अभी खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

Geojit Investments के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च हरीश वी का कहना है कि युद्ध से जुड़े जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही सोने की कीमतों में शामिल हो चुका है। अब निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि ब्याज दरों, महंगाई और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद पर ज्यादा है।

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, वे फिलहाल होल्ड कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों को तेजी के दौरान खरीदारी करने के बजाय कीमतों में गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

‘घबराकर बेचने की जरूरत नहीं’

रेनिशा चैनानी का कहना है कि अभी होल्ड की रणनीति बेहतर रहेगी। जिन लोगों ने पहले से निवेश किया हुआ है, वे बाजार की मौजूदा उतार-चढ़ाव वाली स्थिति का इंतजार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशक 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास गिरावट आने पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि फिलहाल घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ाता है या कच्चे तेल की कीमतों में और तेज उछाल आता है, तो सोने की कीमतें 3,900 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

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Bitcoin Price Today: बिटकॉइन एक साल में 45% क्रैश हुआ, एक्सपर्ट्स बोले – अभी दूर रहने में ही भलाई

Bitcoin Price Today: क्रिप्टो बाजार में सोमवार को दबाव देखने को मिला। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन करीब 1.63% टूटकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई फिर बढ़ी, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।

एक साल में 45% क्रैश हुआ

बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 6 महीने में यह 30.05% गिर चुका है। वहीं, 1 साल में बिटकॉइन 45.44% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में इसने 87.77% का रिटर्न जरूर दिया है। लेकिन, इसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए यह बेहद कम है।

बिटकॉइन की कीमत गिरने की 5 बड़ी वजह

1. अमेरिका-ईरान तनाव : बिटकॉइन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ने से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। वे क्रिप्टो से पैसा निकालकर सोना और डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं। इसका असर बिटकॉइन पर भी साफ दिखा।

2. कच्चा तेल महंगा : तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया। महंगा तेल मतलब महंगाई बढ़ने का खतरा। अगर महंगाई बढ़ती है, तो ब्याज दरें भी लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। यही डर क्रिप्टो बाजार पर भारी पड़ रहा है।

3. फेड की ब्याज दर : निवेशकों को लग रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा। कुछ लोगों को तो यह भी उम्मीद है कि साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर बिटकॉइन जैसी जोखिम वाली एसेट्स के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

4. अहम स्तर पार न कर पाना : बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के बीच का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कई ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। बिकवाली बढ़ी और कीमत 63,500 डॉलर के करीब पहुंच गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी का संकेत दे रहे हैं।

5. खरीद से ज्यादा बिकवाली : एक अच्छी बात यह है कि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार पैसा आ रहा है। इसका मतलब बड़े निवेशकों की दिलचस्पी अभी खत्म नहीं हुई है। लेकिन दूसरी तरफ, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। इसलिए खरीदारी का असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा और बिटकॉइन दबाव में बना हुआ है।

बिटकॉइन के लिए अहम लेवल क्या हैं?

Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल का कहना है कि कि बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर का स्तर पार करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद मुनाफावसूली बढ़ी और कीमत नीचे आ गई।

उनके मुताबिक, अगर बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे जाता है, तो यह 62,300 से 61,800 डॉलर तक फिसल सकता है। अब बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही चीजें आगे बिटकॉइन की दिशा तय कर सकती हैं।

क्या अब बिकवाली थम रही है?

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं। Glassnode के ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली शायद अपने आखिरी दौर में है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार को सहारा मिला है। हालांकि, तेजी आते ही कई निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। यही वजह है कि बिटकॉइन अभी भी अपने 50 महीने के मूविंग एवरेज यानी करीब 65,900 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या सलाह है?

Pi42 के को-फाउंडर और सीईओ अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार पैसा आना अच्छी बात है। इससे पता चलता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है। उनके मुताबिक, बाजार इस समय एक हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर से गुजर रहा है। यानी आगे की तेजी से पहले यह सामान्य ठहराव हो सकता है।

वहीं, Giottus के सीईओ विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं आता, तब तक थोड़ा-थोड़ा निवेश करना और ज्यादा जोखिम लेने से बचना बेहतर रणनीति होगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Today: चांदी 6 दिन में ₹15500 सस्ती हुई, सोने का बढ़ा दाम

Gold Silver Price Today: पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना ₹1,400 चढ़कर करीब ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सोमवार को चांदी ₹1,000 सस्ती हो गई और यह लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रही।

सोने का ताजा भाव

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना सोमवार को ₹1,46,900 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम था। यानी एक दिन में सोने की कीमत ₹1,400 बढ़ गई।

चांदी में लगातार छठे दिन गिरावट

दूसरी ओर, चांदी की कीमत ₹1,000 घटकर ₹2,21,500 प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,22,500 प्रति किलो था।

अगर 10 जुलाई से अब तक की बात करें, तो चांदी की कीमत में कुल ₹15,500 यानी करीब 6.5% की गिरावट आ चुकी है।

क्यों बढ़ा सोने का भाव?

बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने सस्ते भाव पर सोने की खरीदारी शुरू की। इसी वजह से कीमतों में रिकवरी देखने को मिली।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले सकारात्मक संकेत और डॉलर में नरमी की वजह से सोने को समर्थन मिला। डॉलर कमजोर होने पर विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना कुछ सस्ता हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर करीब 2% की बढ़त के साथ 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है।

कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता

भूराजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। WTI क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।

हालांकि बाद में ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिलने के बाद तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई। जानकारों का कहना है कि अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जा सकता है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका की ब्याज दरों और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

MCX गोल्ड पर एक्सपर्ट की राय

वहीं, LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी एंड करेंसी) जतीन त्रिवेदी का कहना है कि MCX पर सोने में करीब ₹900 की तेजी आई है और यह ₹1,41,850 के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड 3,975 डॉलर के सपोर्ट से उछलकर करीब 4,020 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।

उनके मुताबिक, जून के नरम अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से सोने को शुरुआती समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से आने वाले महीनों में महंगाई फिर बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सितंबर या दिसंबर में एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

गोल्ड के लिए अहम लेवल

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगे कच्चे तेल की वजह से फिलहाल सोने की तेजी सीमित रह सकती है। तकनीकी स्तर पर MCX गोल्ड के लिए ₹1,40,000 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, ₹1,42,500 निकट अवधि का अहम रेजिस्टेंस स्तर हो सकता है।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

‘नारायण मूर्ति की बात सुनकर ज्यादा घंटे किया ऑफिस में काम, फिर भी 5% मिली हाइक, डेलॉइट के कर्मचारी ने 10 साल बाद छोड़ी नौकरी

लगभग एक दशक तक, अर्जुन सिंह (पहचान छिपाने के लिए नाम बदला गया है) को लगता था कि वे अपना पूरा करियर डेलॉइट (Deloitte) में ही बिताएंगे। हैदराबाद के रहने वाले इस टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल ने कॉलेज से निकलते ही इस बड़ी कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वे कंपनी के उस मज़बूत लॉन्ग-टर्म विज़न से सहमत थे, जिसमें कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ने की बात कही जाती है।

लेकिन कंपनी में 10 साल बिताने के बाद, यह सीनियर कंसल्टेंट बुरी तरह थक-हारकर (बर्नआउट की स्थिति में) और सिर्फ़ पांच प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी के साथ नौकरी छोड़कर चला गया। अपने फ़ैसले के बारे में बात करते हुए, 30-35 साल की उम्र के इस टेक प्रोफेशनल ने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि बर्नआउट, उम्मीदों का असलियत से दूर होना और मेहनत व इनाम के बीच बढ़ती दूरी ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जबकि वे सालों से कंपनी के प्रति वफ़ादार रहे थे।

सिंह ने कहा, “मैंने नारायण मूर्ति की कही बातों से भी ज़्यादा घंटे काम किया, फिर भी मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और सैलरी में सिर्फ़ पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी मिली।” उन्होंने इन्फोसिस के को-फ़ाउंडर का ज़िक्र किया, जिनके 70 घंटे के वर्क-वीक (हफ़्ते में 70 घंटे काम) वाले बयान ने वर्क कल्चर पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी। उन्होंने आगे बताया कि कई बार वे हफ़्ते में 74 घंटे तक काम करते थे।

कई प्रोफेशनल्स के उलट, जो कुछ सालों में कंपनियां बदलते रहते हैं, सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी डेलॉइट (Deloitte) छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “जब आप युवा होते हैं, तो सीनियर लीडर्स को देखकर यह सोचना आसान होता है कि ‘एक दिन, मैं भी उनकी जगह हो सकता हूं।'”

सिंह के अनुसार, जब वे एक फ्रेशर के तौर पर शामिल हुए, तो डेलॉइट का पार्टनरशिप मॉडल और एक ही ऑर्गनाइज़ेशन में पूरा करियर बिताने की संभावना उन्हें काफी आकर्षक लगी। समय के साथ, सीखने के मौके, बड़े क्लाइंट प्रोजेक्ट्स, प्रमोशन और सीनियर साथियों से मिली मेंटरशिप ने उन्हें कंपनी में बने रहने के लिए काफी वजहें दीं।

उन्होंने कहा, “आप पहले ही दिन यह तय नहीं करते कि आपको कहीं 10 साल तक रहना है। आप हर साल वहां बने रहने का फैसला करते हैं।”सिंह का मानना ​​है कि कंसल्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती ज़रूरी नहीं कि क्लाइंट का काम ही हो, बल्कि टाइट डेडलाइन, कम स्टाफ वाले प्रोजेक्ट्स और बिलिंग वाले काम के अलावा अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों का मेल है।

उनके अनुसार, जिन प्रोजेक्ट्स के लिए असल में छह महीने में छह लोगों की ज़रूरत होती है, उनसे अब कॉम्पिटिशन के दबाव के कारण कम समय में छोटी टीमों द्वारा पूरा किए जाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा, “अचानक छह लोगों की जगह चार लोग हो जाते हैं और समय सीमा भी पांच महीने की हो जाती है।”

हालांकि क्लाइंट के काम का अपना दबाव होता था, लेकिन सिंह ने कहा कि कर्मचारियों से इंटरनल पहलों, हायरिंग गतिविधियों, प्रपोज़ल बनाने और प्रैक्टिस-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी योगदान देने की उम्मीद की जाती थी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कर्मचारी पदानुक्रम (hierarchy) में ऊपर बढ़ते हैं, ऐसे कामों में भाग लेने की उम्मीद और मज़बूत होती जाती है।

सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे आप रैंक में ऊपर बढ़ते हैं, इस तरह के ‘मुफ़्त’ काम (बिना बिलिंग वाले काम) और भी ज़्यादा होते जाते हैं।” सिंह के अनुसार, बर्नआउट (काम के तनाव से पूरी तरह थक जाने) की एक बड़ी वजह काम से अलग न हो पाना था। उन्हें याद है कि वे सोशल गैदरिंग के दौरान भी काम के फ़ोन कॉल लेते थे, कई काम के डिवाइस साथ रखते थे और ऑफ़िस के समय के बाद भी उपलब्ध रहते थे।

सिंह ने कहा कि कंसल्टिंग मॉडल अक्सर ऐसा माहौल बनाता है जहां कर्मचारियों को क्लाइंट की डेडलाइन, अंदरूनी कमिटमेंट और बिज़नेस बढ़ाने की कोशिशों के बीच लगातार तालमेल बिठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह होता है कि काम ज़िंदगी के ज़्यादातर हिस्सों पर हावी होने लगता है।

उन्होंने कहा, “आप हर समय काम में ही लगे रहते हैं।”हालांकि लंबे समय तक काम करना मुश्किल था, लेकिन सिंह ने कहा कि उन्हें ज़्यादा निराशा इस सोच से होती थी कि बहुत ज़्यादा मेहनत करने पर भी इनाम में बहुत मामूली फ़र्क ही मिलता था। उनके अनुसार, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में अक्सर उतनी ही बढ़ोतरी होती थी, जितनी उन साथियों की होती थी जो काम और निजी ज़िंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखते थे।

उन्होंने कहा, “इस साल लोगों की सैलरी में 5 परसेंट से भी कम बढ़ोतरी हुई।” उन्होंने यह भी कहा कि औसत और बेहतरीन परफॉर्मेंस के बीच का अंतर अक्सर बहुत कम लगता था। “जब काम की पहचान या तारीफ़ नहीं होती, तो इंसान थककर हार मान लेता है (बर्नआउट)।”

उन्होंने क्लाइंट के लिए डिटेल्ड प्रपोज़ल तैयार करने के लिए टेक्निकल स्टाफ़ पर डेलॉइट की निर्भरता की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि इसके बजाय डेडिकेटेड सेल्स टीमों को यह काम संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता। सिंह ने कहा, “बदलाव किसी एक बुरे प्रोजेक्ट या मुश्किल मैनेजर की वजह से नहीं आया। यह धीरे-धीरे हुआ।”

समय के साथ, उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या उसी रास्ते पर चलते रहने से उन्हें अपने करियर के अगले चरण में वे अनुभव मिल पाएंगे जिनकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद सिंह हैदराबाद की एक दूसरी कंपनी में शामिल हो गए। उनके अनुसार, नई भूमिका में बेहतर सैलरी तो मिलती ही है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि उन्हें अपने समय और वर्क-लाइफ़ बैलेंस पर ज़्यादा कंट्रोल मिलता है।

पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें डेलॉइट में बिताए अपने दस सालों का कोई अफ़सोस नहीं है। “बल्कि, उन दस सालों ने मुझे अनुभव, आत्मविश्वास और नज़रिया दिया, जिससे मुझे यह समझ आया कि अब एक अलग रास्ता चुनने का सही समय आ गया है।” सिंह के लिए, नौकरी छोड़ने का मतलब किसी सपने को छोड़ना नहीं था। इसका मतलब यह समझना था कि 22 साल की उम्र में सफलता की जो परिभाषा उनके मन में थी, वह 35 साल की उम्र में वैसी नहीं रही।

‘नारायण मूर्ति की बात सुनकर ज्यादा घंटे किया ऑफिस में काम, फिर भी 5% मिली हाइक, डेलॉइट के कर्मचारी ने 10 साल बाद छोड़ी नौकरी

लगभग एक दशक तक, अर्जुन सिंह (पहचान छिपाने के लिए नाम बदला गया है) को लगता था कि वे अपना पूरा करियर डेलॉइट (Deloitte) में ही बिताएंगे। हैदराबाद के रहने वाले इस टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल ने कॉलेज से निकलते ही इस बड़ी कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वे कंपनी के उस मज़बूत लॉन्ग-टर्म विज़न से सहमत थे, जिसमें कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ने की बात कही जाती है।

लेकिन कंपनी में 10 साल बिताने के बाद, यह सीनियर कंसल्टेंट बुरी तरह थक-हारकर (बर्नआउट की स्थिति में) और सिर्फ़ पांच प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी के साथ नौकरी छोड़कर चला गया। अपने फ़ैसले के बारे में बात करते हुए, 30-35 साल की उम्र के इस टेक प्रोफेशनल ने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि बर्नआउट, उम्मीदों का असलियत से दूर होना और मेहनत व इनाम के बीच बढ़ती दूरी ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जबकि वे सालों से कंपनी के प्रति वफ़ादार रहे थे।

सिंह ने कहा, “मैंने नारायण मूर्ति की कही बातों से भी ज़्यादा घंटे काम किया, फिर भी मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और सैलरी में सिर्फ़ पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी मिली।” उन्होंने इन्फोसिस के को-फ़ाउंडर का ज़िक्र किया, जिनके 70 घंटे के वर्क-वीक (हफ़्ते में 70 घंटे काम) वाले बयान ने वर्क कल्चर पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी। उन्होंने आगे बताया कि कई बार वे हफ़्ते में 74 घंटे तक काम करते थे।

कई प्रोफेशनल्स के उलट, जो कुछ सालों में कंपनियां बदलते रहते हैं, सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी डेलॉइट (Deloitte) छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “जब आप युवा होते हैं, तो सीनियर लीडर्स को देखकर यह सोचना आसान होता है कि ‘एक दिन, मैं भी उनकी जगह हो सकता हूं।'”

सिंह के अनुसार, जब वे एक फ्रेशर के तौर पर शामिल हुए, तो डेलॉइट का पार्टनरशिप मॉडल और एक ही ऑर्गनाइज़ेशन में पूरा करियर बिताने की संभावना उन्हें काफी आकर्षक लगी। समय के साथ, सीखने के मौके, बड़े क्लाइंट प्रोजेक्ट्स, प्रमोशन और सीनियर साथियों से मिली मेंटरशिप ने उन्हें कंपनी में बने रहने के लिए काफी वजहें दीं।

उन्होंने कहा, “आप पहले ही दिन यह तय नहीं करते कि आपको कहीं 10 साल तक रहना है। आप हर साल वहां बने रहने का फैसला करते हैं।”सिंह का मानना ​​है कि कंसल्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती ज़रूरी नहीं कि क्लाइंट का काम ही हो, बल्कि टाइट डेडलाइन, कम स्टाफ वाले प्रोजेक्ट्स और बिलिंग वाले काम के अलावा अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों का मेल है।

उनके अनुसार, जिन प्रोजेक्ट्स के लिए असल में छह महीने में छह लोगों की ज़रूरत होती है, उनसे अब कॉम्पिटिशन के दबाव के कारण कम समय में छोटी टीमों द्वारा पूरा किए जाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा, “अचानक छह लोगों की जगह चार लोग हो जाते हैं और समय सीमा भी पांच महीने की हो जाती है।”

हालांकि क्लाइंट के काम का अपना दबाव होता था, लेकिन सिंह ने कहा कि कर्मचारियों से इंटरनल पहलों, हायरिंग गतिविधियों, प्रपोज़ल बनाने और प्रैक्टिस-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी योगदान देने की उम्मीद की जाती थी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कर्मचारी पदानुक्रम (hierarchy) में ऊपर बढ़ते हैं, ऐसे कामों में भाग लेने की उम्मीद और मज़बूत होती जाती है।

सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे आप रैंक में ऊपर बढ़ते हैं, इस तरह के ‘मुफ़्त’ काम (बिना बिलिंग वाले काम) और भी ज़्यादा होते जाते हैं।” सिंह के अनुसार, बर्नआउट (काम के तनाव से पूरी तरह थक जाने) की एक बड़ी वजह काम से अलग न हो पाना था। उन्हें याद है कि वे सोशल गैदरिंग के दौरान भी काम के फ़ोन कॉल लेते थे, कई काम के डिवाइस साथ रखते थे और ऑफ़िस के समय के बाद भी उपलब्ध रहते थे।

सिंह ने कहा कि कंसल्टिंग मॉडल अक्सर ऐसा माहौल बनाता है जहां कर्मचारियों को क्लाइंट की डेडलाइन, अंदरूनी कमिटमेंट और बिज़नेस बढ़ाने की कोशिशों के बीच लगातार तालमेल बिठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह होता है कि काम ज़िंदगी के ज़्यादातर हिस्सों पर हावी होने लगता है।

उन्होंने कहा, “आप हर समय काम में ही लगे रहते हैं।”हालांकि लंबे समय तक काम करना मुश्किल था, लेकिन सिंह ने कहा कि उन्हें ज़्यादा निराशा इस सोच से होती थी कि बहुत ज़्यादा मेहनत करने पर भी इनाम में बहुत मामूली फ़र्क ही मिलता था। उनके अनुसार, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में अक्सर उतनी ही बढ़ोतरी होती थी, जितनी उन साथियों की होती थी जो काम और निजी ज़िंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखते थे।

उन्होंने कहा, “इस साल लोगों की सैलरी में 5 परसेंट से भी कम बढ़ोतरी हुई।” उन्होंने यह भी कहा कि औसत और बेहतरीन परफॉर्मेंस के बीच का अंतर अक्सर बहुत कम लगता था। “जब काम की पहचान या तारीफ़ नहीं होती, तो इंसान थककर हार मान लेता है (बर्नआउट)।”

उन्होंने क्लाइंट के लिए डिटेल्ड प्रपोज़ल तैयार करने के लिए टेक्निकल स्टाफ़ पर डेलॉइट की निर्भरता की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि इसके बजाय डेडिकेटेड सेल्स टीमों को यह काम संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता। सिंह ने कहा, “बदलाव किसी एक बुरे प्रोजेक्ट या मुश्किल मैनेजर की वजह से नहीं आया। यह धीरे-धीरे हुआ।”

समय के साथ, उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या उसी रास्ते पर चलते रहने से उन्हें अपने करियर के अगले चरण में वे अनुभव मिल पाएंगे जिनकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद सिंह हैदराबाद की एक दूसरी कंपनी में शामिल हो गए। उनके अनुसार, नई भूमिका में बेहतर सैलरी तो मिलती ही है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि उन्हें अपने समय और वर्क-लाइफ़ बैलेंस पर ज़्यादा कंट्रोल मिलता है।

पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें डेलॉइट में बिताए अपने दस सालों का कोई अफ़सोस नहीं है। “बल्कि, उन दस सालों ने मुझे अनुभव, आत्मविश्वास और नज़रिया दिया, जिससे मुझे यह समझ आया कि अब एक अलग रास्ता चुनने का सही समय आ गया है।” सिंह के लिए, नौकरी छोड़ने का मतलब किसी सपने को छोड़ना नहीं था। इसका मतलब यह समझना था कि 22 साल की उम्र में सफलता की जो परिभाषा उनके मन में थी, वह 35 साल की उम्र में वैसी नहीं रही।