इस विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने प्राइवेट बैंकों में घटाया निवेश, आईटी शेयरों को पोर्टफोलियो से किया बाहर

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का भारत के प्राइवेट बैंकों पर भरोसा घटा है। उसने अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से निफ्टी आईटी इंडेक्स को हटा दिया है। उसने कहा है कि बाजार की रफ्तार बढ़ाने वाला कोई फैक्टर नहीं दिख रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, इनफ्लेशन और मानसून से जुड़े रिस्क बाजार के लिए बड़े चैलेंज दिख रहे हैं।

शेयरों से कमाई के लिहाज से स्थितियां चुनौतीपूर्ण

Bernstein ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को लेकर टेंशन कम हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें भी काफी नीचे आ गई हैं। लेकिन, शेयर बाजार से कमाई के लिहाज से स्थितियां मुश्किल दिख रही हैं। कई बड़े सेक्टर बड़ी चुनौतियां का सामना कर रहे हैं। मौके मार्केट में सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों में हैं।

निफ्टी के लिए 26000 को टारगेट को बनाए रखा

बर्नस्टीन ने 1 जुलाई को जारी रिपोर्ट में ये बातें बताई हैं। उसने कहा है, “इंडिया में मार्केट के रिटर्न का आउटलुक अब भी मुश्किल दिख रहा है।” हालांकि, इस साल के अंत तक निफ्टी के 26,000 के टारगेट में उसने बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से निफ्ली करीब 8-9 फीसदी चढ़ सकता है।

पोर्टफोलियो से इन शेयरों को किया बाहर

ब्रोकरेज फर्म ने अपने पोर्टफोलियो में हाल में हुए बदलाव के तहत ICICI Bank, IndusInd Bank और निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों को बाहर कर दिया है। हालांकि, उसने Axis Bank और Zydus Life के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि उसने फाइनेंशियल शेयरों में इस साल की शुरुआत में अपना निवेश घटाया था। इस सेक्टर को लेकर अब भी उसका एप्रोच सेलेक्टिव है।

प्राइवेट बैंकों में पहले जैसी ग्रोथ नहीं दिख रही

बड़े प्राइवेट बैंकों के बारे में बर्नस्टीन ने कहा है कि इनमें पहले की साइकिल जैसी ग्रोथ विजिबिलिटी और गवर्नेंस प्रीमियम नहीं दिख रहा। सरकारी बैंकों से प्रतियोगिता बढ़ रही है और शॉर्ट टर्म में रीरेटिंग की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। उसने कहा है कि उसने इस साल खराब प्रदर्शन की वजह से आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड को पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है।

डेटा सेंटर ईकोसिस्टम में दिख रहे मौके

शेयर बाजार के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बर्नस्टीन के इंडिया पोर्टफोलियो ने इस साल 1.1 फीसदी रिटर्न दिया है। यह इस दौरान निफ्टी के 6.7 फीसदी के निगेटिव रिटर्न से बेहतर है। उसने कहा है कि बाजार की मौजूदा स्थितियों में सीमित मौके दिख रहे हैं। ये मौके डेटा सेंटर ईकोसिस्टम और इमर्जिंग मैन्युफैक्चरिंग थीम में दिख रहे हैं। ये मौके ज्यादातर स्मॉलकैप स्टॉक्स तक सीमित हैं, जिससे मार्केट के कुल रिटर्न पर इनका असर पड़ने की संभावना नहीं है।

आंखें खुली तो चेहरे पर बैठा था चमगादड़, कुछ दिन तो आराम से कटे, फिर यही जीव बना युवक के लिए काल

Canada: कभी-कभी एक छोटी-सी घटना जिंदगी के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है, यह कोई नहीं जानता। ऐसा ही एक मामला कनाडा से आया है। दरअसल, यहां का एक 11 साल का लड़का अपनी फैमिली के साथ 2024 में ऑन्टारियो के एक कॉटेज में घूमने गया था। यहां पर सोते समय उसके नाक और मुंह पर एक चमगादड़ बैठ गया। जिसे उसने अपने हाथों से हटा दिया। फिर उसके पिता ने इस जीव को किसी तरह पकड़कर कॉटेज से बाहर निकाल दिया। चूंकि लड़के के चेहरे पर चोट या काटने के कोई निशान नहीं थे और ना ही किसी तरह का लक्षण दिख रहा था तो उसके माता-पिता ने उसे डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी नहीं समझा। बीबीसी ने यह जानकारी ‘कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल’ पर छपी रिपोर्ट के हवाले से दी है।

19 दिन बाद दिखें लक्षण

लेकिन इस मामले के 19 दिन बाद, लड़के के चेहरे पर सुन्नपन और सूजन महसूस होने लगी। ‘कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल’ में बताया गया है कि इसके बाद परिवार उसे इमरजेंसी इलाज के लिए क्लिनक ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसके लक्षणों का पता लगाने की कोशिश की।

शुरुआत में, लड़के को एंटीवायरल दवा दी गई, जिसका इस्तेमाल हर्पीज वायरस से होने वाले संक्रमण के इलाज में किया जाता है। उन्हें लगा कि उसे ‘बेल्स पाल्सी’ हो सकता है, जिसमें चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियां कुछ समय के लिए लकवाग्रस्त (पैरालिसिस) हो जाती हैं।

इसके बाद वह लगातार दो बार अस्पताल गया; पहली बार उसे ‘हर्पीस जिंजिवोस्टोमेटाइटिस’ (मुंह और मसूड़ों का वायरल इन्फेक्शन) होने का शक जताया गया, और फिर अगले दिन वह तब वापस आया जब उसके चेहरे का दाहिना हिस्सा कमजोर पड़ गया था। इस दौरान उसे 39°C (102°F) बुखार हो गया, साथ ही उसे कुछ भी निगलने में दिक्कत, उलझन और ऐसी चीजें दिखाई देने लगीं जो असल में नहीं थीं (विजुअल हैलुसिनेशन)। उस दिन उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। जर्नल के अनुसार, उसे इंट्यूबेट किया गया और बच्चों के इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती कराया गया।

जिसके बाद, कनाडा के मैनिटोबा विश्वविद्यालय के बाल रोग एवं बाल स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने चमगादड़ के कारण होने वाले रेबीज वायरस का प्रबल संदेह जताया। कुछ दिनों बाद, एक टेस्ट के दौरान इसकी पुष्टि हुई। वहीं, हॉस्पिटल में भर्ती होने के 17 दिन बाद लड़के की मृत्यु हो गई।

कनाडा में रेबीज से अब तक 28 मौतें हुईं

बता दें कि कनाडा में रेबीज का संक्रमण बहुत कम होता है। कैनेडियन वेटरनरी मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, 1924 से अब तक देश में रेबीज से इंसानों की 28 मौतें हुई हैं।

एसोसिएशन की वेबसाइट के अनासर, “रेबीज की यह कम दर बड़े पैमाने पर चल रहे टीकाकरण कार्यक्रमों की वजह से है, और अगर इन कार्यक्रमों को जारी नहीं रखा गया तो बीमारी के दोबारा फैलने का खतरा है।”

अगर कोई इंसान सीधे तौर पर चमगादड़ के संपर्क में आता है, तो उसे रेबीज के लिए ‘पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस’ (यानी रेबीज वाले जानवर के संपर्क में आने के तुरंत बाद दिया जाने वाला मेडिकल इलाज) की जरूरत होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार लक्षण दिखने के बाद यह संक्रमण लगभग हमेशा जानलेवा साबित होता है।

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‘मेक इन इंडिया’ को रफ्तार! जापानी PM और पीएम मोदी करेंगे 35,000 करोड़ के मारुति सुजुकी के चौथे प्लांट का उद्घाटन, खरखौदा बनेगा ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब

Maruti Suzukicar plant in Haryana: ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे। यह भारत में मारुति सुजुकी का चौथा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जिसे देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खरखौदा प्लांट में मारुति सुजुकी कंपनी और उससे जुड़े सप्लायर नेटवर्क सहित कुल निवेश करीब 35,000 करोड़ रुपये का है। यह देश में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक है।

यह उद्घाटन भारत और जापान के बीच गहरी होती आर्थिक साझेदारी को भी दिखाता है, क्योंकि मारुति सुजुकी भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जापानी निवेश के सबसे सफल उदाहरणों में से एक है। खरखौदा यूनिट से कंपनी को अपने लंबे समय के प्रोडक्शन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत करेगा।

10 लाख वाहनों की होगी बढ़ोतरी

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह चालू होने पर यह प्लांट मारुति सुजुकी की सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 10 लाख गाड़ियों तक बढ़ा देगा, जिससे यह कंपनी के सबसे बड़े प्रोडक्शन सेंटर्स में से एक बन जाएगा। यह प्लांट आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाओं से लैस होगा। खरखौदा यूनिट से कंपनी को अपने लंबे समय के प्रोडक्शन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत करेगा।

यह उद्घाटन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है। भारत ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स के लिए ग्लोबल प्रोडक्शन बेस बनने का लक्ष्य रख रहा है। उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष की मौजूदगी भारत-जापान के बीच इंडस्ट्रियल सहयोग, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी के क्षेत्र में रणनीतिक महत्व को भी उजागर करती है।

21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद

इस परियोजना से 21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। जबकि ऑटो कंपोनेंट, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और अन्य सहायक उद्योगों में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत और जापान के बीच आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। मारुति सुजुकी को भारत में जापानी निवेश की सबसे सफल कहानियों में गिना जाता है। यह नया प्लांट दोनों देशों के सहयोग को और नई ऊंचाई देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि खरखौदा प्लांट के शुरू होने से भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी इससे बड़ा बल मिलेगा। जानकारों का कहना है कि यह नया प्लांट न केवल हरियाणा में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि वैश्विक ऑटोमोबाइल मार्केट में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।

जापान की प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत

जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे। यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।

राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे। तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े।

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तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने PM मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की।

15 अगस्त को भारत खेलेगा श्रीलंका से 2 टेस्ट मैचों की अहम सीरीज

भारत श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट मैच 15 अगस्त को गाले में खेलेगा। इस सीरीज का दूसरा टेस्ट 23 अगस्त को कोलंबो के स्टेडियम में खेला जाएगा। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में जगह बनाने के लिए दोनों ही टीमों को अपने बचे 9 मैचों में से 7 मैच जीतने है। इस लिहाज से यह सीरीज बहुत अहम हो जाती है।


भारत को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के चक्र में 9 मैचों में 4 जीत और 4 हार मिली है और एक मैच ड्रॉ हुआ है। इस कारण भारत का जीत प्रतिशत अंक तालिका में 48.15 है और वह पांचवे स्थान पर है। वहीं श्रीलंका छठवें स्थान पर है और उसका जीत प्रतिशत 44.44 है। श्रीलंका की टीम वेस्टइंडीज दौरे पर है और उसको पहले टेस्ट में पारी की हार मिली है।

भारत चाहेगा कि यह 2 टेस्ट जीतकर न्यूजीलैंड के खिलाफ घसियाली पिच के लिए गुंजाइश रखे। अगर न्यूजीलैंड में सीरीज हार भी जाते हैं तो बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी भारत को अपने घर में खेलनी है। हालांकि घर पर भी भारत का रिकॉर्ड हाल में बहुत अच्छा नहीं रहा है।

वहीं श्रीलंका के लिए एक और हार फिर भले ही वह कैरिबियाई दौरे पर हो या फिर भारत के खिलाफ टीम को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की दौड़ से बाहर कर देगी।  इस कारण यह सीरीज दोनों टीमों के लिए अहम है।

भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय श्रीलंका की स्पिन की मुफीद पिचें है। अगर इस दौरे पर टीम को जीत की आशा रखनी है तो स्पिन कोच साइराज बहुतुले को काफी काम करने होंगे।

ऑक्सफोर्ड MBA ग्रेजुएट ने छोड़ी नौकरी, गांव में एवोकाडो उगाकर कमाए 8 लाख

आखिर क्या वजह है कि कोई व्यक्ति विदेश में मिली शिक्षा और कॉर्पोरेट की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर गांव में खेती करने का फैसला करता है? जयपाल नाइक के लिए यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि कॉर्पोरेट की एक जैसे रूटीन से परेशान और गांव की जिंदगी के प्रति बढ़ते लगाव के कारण धीरे-धीरे हुआ बदलाव था।

उनका सफर लंदन से शुरू हुआ, जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग में MBA किया। इसके बाद उन्होंने हीथ्रो एयरपोर्ट के कस्टम्स डिपार्टमेंट में और फिर हैदराबाद में कॉर्पोरेट नौकरी की। इतने अच्छे करियर के बावजूद, धीरे-धीरे उनका ध्यान हैदराबाद से लगभग 45 किलोमीटर दूर अपने गाँव, डेबडागुडा की ओर मुड़ने लगा।

क्या खेती से होने वाली कमाई, समय के साथ कॉर्पोरेट नौकरी से मिलने वाली स्थिर आय की बराबरी कर सकती है?

जयपाल को इसका जवाब कई सालों की कोशिशों, नुकसान और बदलावों के बाद मिला। ’30Stades’ के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “एक साल बाद मैंने नौकरी छोड़ दी क्योंकि मुझे 9-से-5 वाली कॉर्पोरेट जिंदगी का एक जैसापन पसंद नहीं आ रहा था। मैंने खेती में अपने परिवार का साथ देने का फैसला किया।”

उस समय, उनका परिवार पारंपरिक खेती करता था और केमिकल का इस्तेमाल करके मक्का, ज्वार, सब्जियां और अरहर की दाल उगाता था। लेकिन, बढ़ती लागत और अस्थिर कीमतों की वजह से मुनाफा कम हो रहा था। उन्होंने बताया, “बाजार में कीमतें अस्थिर थीं और खेती की लागत बढ़ती जा रही थी, जिससे मुनाफ़े पर असर पड़ रहा था। मिट्टी में केमिकल का इस्तेमाल करना अब फ़ायदेमंद नहीं रह गया था।”

जब आमदनी कम होने लगी, तो जयपाल ने बागवानी में दूसरे विकल्पों पर विचार करना शुरू किया। लेकिन उन्होंने देखा कि कई पारंपरिक फल उगाने वाले किसान पहले से ही ज़्यादा सप्लाई और कीमतों में भारी गिरावट के कारण नुकसान उठा रहे थे। उन्होंने कहा, “यह साफ़ था कि विदेशी फलों की खेती करना सही रहेगा क्योंकि इसमें कॉम्पिटिशन कम है और मांग ज़्यादा है।”

2013 में, उन्होंने एवोकाडो की खेती की दिशा में अपना पहला बड़ा कदम उठाया। उन्होंने इज़राइल से 200 ‘हस’ (Hass) एवोकाडो के पौधे 1,200 रुपये प्रति पौधे की दर से मंगवाए। यह प्रयोग नाकाम रहा। उन्होंने याद करते हुए कहा, “हस एवोकाडो ठंडी जलवायु के लिए उपयुक्त होते हैं और 30°C से ज़्यादा तापमान में जीवित नहीं रह सकते। तेलंगाना में ये पौधे ठीक से नहीं पनपे और सारा निवेश डूब गया।”

इस झटके के बाद, वह सिविल कॉन्ट्रैक्टिंग के काम में लौट आए, लेकिन COVID-19 महामारी के दौरान वह काम भी बंद हो गया। इसके बाद वह फिर से खेती की ओर मुड़े, लेकिन इस बार बेहतर प्लानिंग और हालात की बेहतर समझ के साथ। जयपाल ने बताया कि एवोकाडो इसलिए खास थे क्योंकि भारतीय बाज़ार अभी विकसित हो रहा था, जबकि पारंपरिक फलों के मामले में अक्सर ज़्यादा सप्लाई के कारण कीमतें गिर जाती हैं।

पौधों के बीच जगह की समस्या के बावजूद, बागान के पौधे अच्छी तरह से पनपे और लगातार बढ़ते रहे। शुरुआत में, हर पेड़ से लगभग 5 से 10 किलो फल मिलते थे। शुरुआती बिक्री एक एक्सपोर्टर के जरिए होती थी जो उपज को कुवैत भेजता था। उन्होंने याद करते हुए कहा, “मैंने अपने एक दोस्त के ज़रिए इन्हें कुवैत भेजा, जो एक एक्सपोर्टर था।”

एक दुर्घटना के कारण एक्सपोर्ट रुकने पर, जयपाल ने घरेलू बाजार में बिक्री शुरू कर दी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर लगभग 250 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचना शुरू किया, जहां मांग स्थिर बनी रही। जैसे-जैसे बागान के पेड़ बड़े हुए, पैदावार में काफ़ी सुधार हुआ। उन्होंने बताया, “अब, जब पौधे अपने छठे साल में हैं, तो पैदावार बढ़कर लगभग 20 किलो प्रति पेड़ हो गई है।”

1.2 एकड़ ज़मीन पर फल देने वाले लगभग 250 पेड़ों से उन्हें एवोकाडो से सालाना लगभग 8 लाख रुपये की कमाई होती है। उन्होंने आगे कहा, “यही ऑर्गेनिक एवोकाडो खेती की मुख्य खूबी है। इससे प्रति एकड़ अच्छा मुनाफ़ा मिलता है और जैसे-जैसे पेड़ बड़े होते हैं, पैदावार भी बढ़ती जाती है।”

उनके खेती के मॉडल में एक अहम बात ऑर्गेनिक खेती है। वह केमिकल वाले फ़र्टिलाइज़र और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि गाय के गोबर, गोमूत्र, नीम की खली और ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। जयपाल ने बताया, “आप 1 किलो ऑर्गेनिक एवोकाडो को ₹1,000 प्रति किलो के भाव से भी बेच सकते हैं। वहीं, केमिकल का इस्तेमाल करके उगाए गए एवोकाडो से ₹100 प्रति किलो भी नहीं मिलते। केमिकल से पैदावार तो बढ़ सकती है, लेकिन इससे कीमत कम हो जाती है, साथ ही मिट्टी को नुकसान पहुxचता है और लागत भी बढ़ती है।”

वे मंडियों या बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय, फसल कटने से पहले ही WhatsApp और सोशल मीडिया के ज़रिए सीधे ग्राहकों को अपना माल बेचते हैं। खेती के साथ-साथ जयपाल ने नर्सरी का बिज़नेस भी शुरू किया है। वे एवोकाडो के पौधे बेचते हैं; बल्ब वैरायटी के पौधे ₹300 और पिंकर्टन वैरायटी के पौधे ₹400 में मिलते हैं। वे हर साल 5,000 से 10,000 पौधे बेचते हैं, जिससे उनकी कमाई में लगभग ₹5 लाख का योगदान होता है।

जयपाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि खेती में कामयाबी सिर्फ़ फ़सल चुनने से नहीं, बल्कि प्लानिंग, बाज़ार की समझ और स्थानीय हालात के हिसाब से काम करने से मिलती है। उन्होंने कहा, “खेती में कामयाबी का मतलब सिर्फ़ कोई विदेशी फल उगाना नहीं है। इसका मतलब है बाज़ार की मांग के हिसाब से फ़सल चुनना, स्थानीय मौसम के अनुकूल ढलना और लागत कम रखते हुए ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा कमाना।”

उन्होंने यह भी माना कि विदेशी फलों की खेती में शुरुआत में जोखिम होते हैं, लेकिन उनका कहना था कि जो लोग डटे रहते हैं, उन्हें लंबे समय में बहुत फ़ायदा हो सकता है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “विदेशी फलों की खेती में शुरू में ज़्यादा जोखिम होता है, लेकिन लंबे समय में मिलने वाला फ़ायदा काफ़ी ज़्यादा हो सकता है।”

Monsoon Heavy Rain Alert: यूपी, बिहार, दिल्ली समेत इन 20+ राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान का अलर्ट! 8 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

Monsoon Heavy Rain Alert: मौसम विभाग(IMD) के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर आज सुबह 08:30 बजे एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इसके अगले 2-3 दिनों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है। मानसून की मुख्य ट्रफ लाइन इस समय उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी में बने इस लो-प्रेशर एरिया के केंद्र तक गुजर रही है। दक्षिण गुजरात से लेकर कर्नाटक तट तक एक अपतटीय ट्रफ भी सक्रिय है। इन मजबूत प्रणालियों के कारण देश भर में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है।

इन क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी ने चेतावनी दी है कि कुछ राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है:-

दक्षिण गुजरात क्षेत्र और कोंकण: 2 से 5 जुलाई के दौरान अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट।

सौराष्‍ट्र और कच्‍छ: 2 से 4 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश की संभावना।

पश्चिम मध्य प्रदेश और ओडिशा: 3 और 4 जुलाई को मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका।

मध्य महाराष्ट्र: 3 से 5 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी।

क्षेत्रवार मौसम का पूरा पूर्वानुमान और अलर्ट (2 से 8 जुलाई 2026)

1- उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी राज्य)

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: 2 जुलाई को व्यापक बारिश के बाद 3-4 जुलाई को हल्की से छिटपुट बारिश होगी लेकिन 5 से 8 जुलाई के बीच एक बार फिर यहां भारी बारिश का नया दौर शुरू होगा। 2 जुलाई को पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 2 से 7 जुलाई के बीच और पूर्वी यूपी में 2 से 8 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं 3-4 जुलाई को दोनों क्षेत्रों में गरज-चमक की स्थिति रहेगी।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: उत्तराखंड में 2 से 8 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। 2-3 जुलाई को बहुत भारी और 4-8 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। हिमाचल में 2-3 जुलाई और 5-6 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 2-3 जुलाई और 7-8 जुलाई को व्यापक बारिश के साथ भारी बारिश हो सकती है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 2 से 6 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश और 7-8 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। पश्चिमी राजस्थान में 2 जुलाई को 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वाल (आंधी) और धूल भरी आंधी चलने की चेतावनी है जबकि 5-7 जुलाई के बीच यहां भारी बारिश हो सकती है।

आंधी-तूफान का अलर्ट: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 2 से 8 जुलाई के दौरान 40-50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

2- मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ)

मध्य प्रदेश: पूरे राज्य में 2 से 8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। पश्चिम मध्य प्रदेश में 2 जुलाई और 5-8 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 3-4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 3-4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: दोनों क्षेत्रों में 2 और 3 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 4 से 8 जुलाई और विदर्भ में 4 व 7-8 जुलाई को भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 2 और 3 जुलाई को इस पूरे क्षेत्र में तेज आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट है।

3- पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल)

बिहार: बिहार में 2 से 4 जुलाई और 7-8 जुलाई को छिटपुट से लेकर भारी बारिश होगी जबकि 5 और 6 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक रूप से भारी बारिश का अनुमान है। 2 जुलाई और 5-6 जुलाई को यहां तेज आंधी चलने की भी संभावना है।

झारखंड: 4 से 8 जुलाई के बीच झारखंड में व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है।

ओडिशा: लो-प्रेशर एरिया के कारण ओडिशा में 2 जुलाई को बहुत भारी बारिश, 3 और 4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश तथा 7-8 जुलाई को पुनः भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: गंगीय पश्चिम बंगाल में 4-5 जुलाई को बहुत भारी बारिश तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 7-8 जुलाई को भारी बारिश होने की उम्मीद है।

4- पश्चिम भारत (गुजरात, कोंकण और गोवा)

गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा: इन क्षेत्रों में 2 से 8 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश जारी रहेगी। गुजरात क्षेत्र और कोंकण में 2 से 5 जुलाई के दौरान कुछ जगहों पर मूसलाधार बारिश होगी, जबकि गुजरात क्षेत्र में 6 से 8 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

सौराष्‍ट्र और कच्‍छ: 2 से 4 जुलाई तक अत्यधिक भारी बारिश के बाद 5-6 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 7-8 जुलाई को भारी बारिश होने की संभावना है।

मराठावाड़ा: 3 जुलाई को यहां भारी बारिश की संभावना है जिसके बाद 4 से 8 जुलाई के बीच मौसम थोड़ा धीमा रहेगा।

5- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश)

तटीय कर्नाटक: 2 से 8 जुलाई के दौरान लगातार बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: केरल और माहे में 3 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 4 से 8 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहेगी। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 से 8 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश: तेलंगाना में 2 जुलाई को व्यापक बारिश और 2-4 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 2 से 5 जुलाई के बीच भारी बारिश हो सकती है।

तेज हवाओं का अलर्ट: कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा क्षेत्र में 2 से 8 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

6- पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय और त्रिपुरा)

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 से 8 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी जिसमें 2 से 4 जुलाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट है।

असम और मेघालय में 3 और 4 जुलाई को भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

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स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

The image shows a young ascetic and a photograph of Swami Vivekananda in saffron robes

Vivekananda Mahasamadhi Diwas: कुछ तिथियां केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना को झकझोरने वाली स्मृतियां बन जाती हैं। 4 जुलाई ऐसी ही एक तिथि है। वर्ष 1902 के इसी दिन बेलूर मठ में एक युवा संन्यासी ने ध्यानावस्था में अपनी अंतिम सांस ली और महासमाधि को प्राप्त हुए।ALSO READ: पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

उनकी आयु मात्र उन्तालीस वर्ष थी, किंतु उस अल्प जीवन में उन्होंने जो वैचारिक ज्योति प्रज्वलित की, वह आज भी भारत के पथ को आलोकित कर रही है। इसलिए स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिवस है।

 

यह स्वयं से पूछने का दिन है कि क्या हम उस भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसका स्वप्न स्वामी जी ने देखा था। महापुरुषों का जाना शून्य अवश्य छोड़ता है, किंतु यदि उनके विचार जीवित रहें तो वह शून्य निराशा नहीं बनता, प्रेरणा बन जाता है। स्वामी विवेकानंद भी ऐसे ही युगपुरुष थे।

उनका शरीर 4 जुलाई 1902 को शांत हुआ, पर उनकी वाणी, उनका आत्मविश्वास और उनका राष्ट्रदर्शन आज भी करोड़ों भारतीयों के मन में धड़कता है। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि दुःख का नहीं, संकल्प का दिवस है।

 

अपने जीवन के अंतिम दिन भी उन्होंने विश्राम को नहीं, बल्कि कर्म को चुना। उन्होंने शिष्यों के साथ वेद, संस्कृत और शिक्षा पर चर्चा की, मठ के भावी कार्यों पर विचार किया और भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया। इसके बाद संध्या के समय ध्यान में लीन होकर उन्होंने महासमाधि ग्रहण की। यह दृश्य केवल एक संन्यासी के जीवन का अंत नहीं था, यह कर्म, ज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय का अंतिम संदेश था। 

 

उन्होंने अपने जीवन से मानो यह कह दिया कि मनुष्य का मूल्य उसके जीवन की अवधि से नहीं, बल्कि उसके जीवन की दिशा से निर्धारित होता है। आज जब उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें स्मरण करते हैं, तो सबसे पहले उनके उस आग्रह को याद करना चाहिए कि भारत का पुनर्निर्माण केवल भवनों, उद्योगों और योजनाओं से नहीं होगा, वह जागृत मनुष्य से होगा।

उनका विश्वास था कि यदि प्रत्येक भारतीय अपने भीतर निहित शक्ति को पहचान ले, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने बार-बार कहा कि प्रत्येक आत्मा दिव्य है। यही विचार भारतीय आत्मविश्वास का सबसे बड़ा आधार है।

 

आज का भारत निस्संदेह अनेक उपलब्धियों के साथ आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, चिकित्सा, नवाचार और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

यह गर्व का विषय है। किंतु स्वामी विवेकानंद शायद आज भी यही प्रश्न पूछते, क्या हमारी संवेदनाएं भी उतनी ही विकसित हुई हैं, जितनी हमारी तकनीक? क्या हमारी प्रगति के केंद्र में मनुष्य है? क्या समाज में बढ़ती कटुता, वैमनस्य और असहिष्णुता उस भारत की पहचान हो सकती है जिसकी कल्पना उन्होंने की थी?

 

विवेकानंद ने धर्म को कभी विभाजन का माध्यम नहीं माना। उनके लिए धर्म का अर्थ था मनुष्य के भीतर निहित श्रेष्ठता का जागरण। उन्होंने सेवा को साधना बनाया और करुणा को आध्यात्मिकता का सर्वोच्च रूप बताया। वे कहते थे कि जिस समाज में भूख, अशिक्षा और अभाव हो, वहां सबसे बड़ी पूजा पीड़ित मनुष्य की सेवा है।

इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर यदि हम केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित रह जाएं और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति अपने दायित्व को भूल जाएं, तो यह उनके विचारों के साथ न्याय नहीं होगा। उनके अंतिम वर्षों में एक चिंता बार-बार दिखाई देती है।

 

भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है। वे चाहते थे कि युवा केवल रोजगार की तलाश करने वाले न बनें, बल्कि राष्ट्र के चरित्र- निर्माता बनें आत्मविश्वास, अनुशासन, निःस्वार्थ सेवा और निर्भीकता यही उनके संदेश का सार था। आज जब युवा पीढ़ी अभूतपूर्व अवसरों और जटिल चुनौतियों के बीच खड़ी है, तब विवेकानंद जी की वाणी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है। उनका विश्वास था कि शक्तिशाली राष्ट्र वही बनता है, जिसके नागरिक चरित्रवान हों। 

 

पुण्यतिथि का वास्तविक अर्थ यही है कि हम महापुरुष के अधूरे कार्यों को अपना दायित्व मानें। यदि हम केवल पुष्प अर्पित कर लौट आएं, तो स्मरण अधूरा रह जाएगा। किंतु यदि हम अपने जीवन में ईमानदारी, सेवा, आत्मानुशासन और राष्ट्रहित को स्थान दें, तो वही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। महापुरुषों को सबसे अधिक सम्मान शब्दों से नहीं, आचरण से मिलता है।

 

आज समाज अनेक प्रकार के विभाजनों, स्वार्थों और तात्कालिक हितों से जूझ रहा है। ऐसे समय में विवेकानंद का संदेश हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र केवल संविधान या सीमाओं से नहीं बनता, वह अपने नागरिकों के चरित्र, विश्वास और पारस्परिक सम्मान से बनता है

 

यदि समाज का नैतिक आधार कमजोर पड़ जाए, तो आर्थिक समृद्धि भी लंबे समय तक टिक नहीं सकती। इसलिए उन्होंने शक्ति और करुणा, आधुनिकता और आध्यात्मिकता, विज्ञान और संस्कार इन सभी के संतुलन पर बल दिया। 4 जुलाई हमें यह भी सिखाती है कि मृत्यु महापुरुषों की यात्रा का अंत नहीं होती।

दीपक बुझ सकता है, पर उसकी लौ असंख्य दीपों में जीवित रहती है। स्वामी विवेकानंद की लौ आज भी हर उस शिक्षक में जलती है जो शिक्षा को संस्कार से जोड़ता है, हर उस युवा में जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता, हर उस सैनिक, किसान, वैज्ञानिक, चिकित्सक और श्रमिक में जो अपने कर्म को राष्ट्रसेवा का माध्यम मानता है। वे हर उस भारतीय में जीवित हैं जो अपने अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों का स्मरण करता है।

 

स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि हमें शोकाकुल नहीं, उत्तरदायी बनाती है। यह हमें स्मरण कराती है कि भारत का भविष्य केवल सरकारों या नीतियों से नहीं बनेगा, वह तब बनेगा जब प्रत्येक भारतीय अपने भीतर सोई हुई चेतना को जगाएगा। जिस दिन सेवा हमारे स्वभाव का हिस्सा होगी, चरित्र हमारी पहचान होगा और राष्ट्रहित हमारे निर्णयों का आधार बनेगा, उसी दिन विवेकानंद के स्वप्नों का भारत साकार होने लगेगा। 

 

4 जुलाई इसलिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक मौन प्रश्न है, जो हर भारतीय से पूछती है, क्या हमने उस ज्योति से कुछ प्रकाश लिया, जिसे स्वामी विवेकानंद अपने पीछे छोड़ गए थे? यदि इस प्रश्न का उत्तर हमारे कर्मों में दिखाई दे, तभी उनकी पुण्यतिथि का वास्तविक अर्थ सिद्ध होगा और वही उनके प्रति हमारी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।ALSO READ: Vivekananda Quotes: दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं स्वामी विवेकानंद के ये 10 अनमोल विचार

(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने इस सीमेंट स्टॉक की रेटिंग को किया अपग्रेड, जानें क्या है टारगेट प्राइस

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने गुरुवार, 2 जुलाई को अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (Ambuja Cements Ltd) को उसकी पिछली रेटिंग “मार्केट परफॉर्म” से “आउटपरफॉर्म” में अपग्रेड किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत के दो सबसे बड़े सीमेंट प्रोड्यूसर के बीच वैल्यूएशन का अंतर अब टिकाऊ नहीं रहा। अपग्रेड के बावजूद, बर्नस्टीन ने अंबुजा सीमेंट्स पर अपना प्राइस टारगेट ₹542 प्रति शेयर से घटाकर ₹486 कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से 16% की बढ़त की संभावना है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा, अल्ट्राटेक सीमेंट के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रही है, भले ही यह कैपेसिटी के हिसाब से देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट प्रोड्यूसर बन गई है।

बर्नस्टीन के अनुसार, अल्ट्राटेक की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹3.6 लाख करोड़ है और इसकी सीमेंट कैपेसिटी 206 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जबकि श्री सीमेंट की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹90,000 करोड़ है और इसकी कैपेसिटी 69 MTPA है। इसकी तुलना में, अंबुजा की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹1.2 लाख करोड़ है, जबकि इसकी कैपेसिटी 109 MTPA है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा की वैल्यू अभी लगभग एक नया ग्रीनफील्ड सीमेंट प्लांट बनाने की लागत के बराबर है, जो कंपनी के स्केल या कमाई की क्षमता को नहीं दिखाता है। बर्नस्टीन को उम्मीद है कि अंबुजा की चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और ऑपरेशनल सुधारों से आगे चलकर अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट दोनों के साथ प्रति टन EBITDA का अंतर कम करने में मदद मिलेगी।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि आने वाले सालों में मजबूत एग्जीक्यूशन से री-रेटिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि कंपनी बड़ी कंपनियों के साथ प्रॉफिट का अंतर कम कर रही है।

अंबुजा सीमेंट्स पर 46 एनालिस्ट की कवरेज है, जिनमें से 33 ने स्टॉक पर “बाय” रेटिंग दी है, 10 ने “होल्ड” कहा है, जबकि तीन अन्य ने “सेल” रेटिंग दी है।

अंबुजा सीमेंट्स के शेयर अभी गुरुवार को 1.7% बढ़कर ₹426.5 पर ट्रेड कर रहे हैं। स्टॉक अपने 52-हफ़्ते के हाई ₹624 से 32% नीचे है। 2027 में अब तक स्टॉक 24% नीचे आ चुका है।

Dividend Stocks: महिंद्रा ग्रुप की 5 कंपनियां देंगी ₹110 तक का डिविडेंड, नहीं हैं शेयरहोल्डर तो आज, 2 जुलाई को आखिरी मौका

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Bhaari Barish Alert: यूपी, बिहार समेत इन राज्यों के लिए अगले 48 घंटे भारी! मानसून यहां पूरा छा गया, हैवी बारिश का ये अलर्ट आया

Bhaari Barish Alert: देश भर में मानसून ने अपनी रफ्तार बेहद तेज कर दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 2 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश को कवर कर लिया है। इसके साथ ही 5 दिन देर से ही सही मानसून ने दिल्ली में भी एंट्री कर ली है। यूपी में मानसून के पूरी तरह छा जाने के साथ ही मौसम विभाग ने बिहार समेत देश के कई राज्यों के लिए अगले 48 घंटे बेहद भारी बताए हैं।

IMD ने कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 2 दिनों के भीतर मानसून के दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों और राजस्थान में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

अगले 2 दिन: इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक, आगामी दो दिनों के दौरान तटीय और पश्चिमी भारत के हिस्सों में आफत की बारिश हो सकती है। आईएमडी ने अगले 48 घंटों के लिए नीचे दिए गए क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है:-

उत्तर प्रदेश: 2 जुलाई को मानसून के पूरे राज्य में छा जाने के बाद यहां बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

तटीय कर्नाटक

गुजरात

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

अगले 3 दिन: मध्य भारत और पहाड़ी राज्यों में रहेगा ऐसा ही मौसम

आईएमडी ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि अगले 3 दिनों के दौरान देश के मध्य, पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में भी मौसम का मिजाज काफी आक्रामक रहेगा। इन क्षेत्रों में भी भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज होने का अनुमान है:-

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ

ओडिशा

सौराष्ट्र और कच्छ

शनिवार तक बिहार और पूर्वोत्तर समेत इन राज्यों में हैवी रैन

मौसम विभाग के अनुसार, बिहार सहित देश के कई अन्य हिस्सों में शनिवार तक लगातार भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी। इस दायरे में आने वाले राज्य हैं:-

बिहार और झारखंड

उत्तर प्रदेश (पूरे राज्य में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा)

जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख

केरल (केरलम) और माहे

आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना

पूर्वोत्तर क्षेत्र के हिस्से

ISRO के सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बादलों का महासागर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के INSAT-3DS सैटेलाइट से जारी थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरों में मानसून की एक बेहद हैरान करने वाली और नाटकीय प्रगति दर्ज की गई है। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों में निम्नलिखित बड़ी बातें सामने आई हैं। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में पश्चिम बंगाल से लेकर सीधे जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई लगभग 1,500 किलोमीटर लंबी एक लगातार सक्रिय रेन बैंड यानी बादलों की विशाल पट्टी साफ दिखाई दे रही है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मानसूनी बादल अलग-अलग या छितराए हुए नहीं हैं, बल्कि वे एक लंबी कतार में आपस में जुड़े हुए हैं। यह देश में एक बेहद सक्रिय मानसून परिसंचरण शुरू होने का सीधा संकेत है। ये विशालकाय बादल अपने साथ भारी मात्रा में नमी लेकर चल रहे हैं जो एक साथ देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश कराने की क्षमता रखते हैं।

दो तरफ की मानसूनी हवाओं का मिलन, उत्तर भारत में रफ्तार तेज

सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी साफ हुआ है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही दिशाओं से आने वाली नमी से लदी हवाएं इस समय उत्तर भारत के आसमान पर आकर आपस में मिल रही हैं। इसके कारण मानसून की ट्रफ लाइन अब अपनी सामान्य स्थिति की ओर खिसकने लगी है, जिसने मैदानी इलाकों में लगातार और भारी बारिश के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बना दी हैं।

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देश के सबसे सूखे जून महीनों में से एक का सामना करने के बाद मानसून ने उत्तर भारत में यह जोरदार वापसी की है। इस बढ़ी हुई मानसूनी सक्रियता की वजह से ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहले से ही व्यापक रूप से भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, व्यापक बारिश और आंधी-तूफान के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी हरियाणा के कुछ इलाकों में प्रवेश कर चुका था, जिसके बाद अब इसने रफ्तार पकड़ ली है।