कैमरे की कला के पुरोधा थे गणपत राव पवार, फोटोग्राफर एसोसिएशन ने किया भावपूर्ण स्मरण

कैमरे की कला के पुरोधा थे गणपत राव पवार, फोटोग्राफर एसोसिएशन ने किया भावपूर्ण स्मरण

Photographer Ganpat Rao Pawar

देवास। 19 अगस्त को 'विश्व फोटोग्राफी दिवस' के अवसर पर देवास फोटोग्राफर एसोसिएशन द्वारा देवास स्टेट के प्रथम फोटोग्राफर, चित्रकार एवं बहुआयामी कलाकार स्वर्गीय श्री गणपत राव पवार का भावपूर्ण स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

लक्ष्मीपुरा स्थित श्री क्षत्रिय मराठा समाज पब्लिक ट्रस्ट के समाज भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्व. श्री पवार के व्यक्तित्व, कला-साधना और फोटोग्राफी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें देवास के फोटोग्राफी जगत का मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत बताया।

 

कला-साधना और तकनीक का कठिन दौर

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा स्व. श्री गणपत राव पवार के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

 

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार श्री अरविंद त्रिवेदी ने कहा कि लगभग एक शताब्दी पूर्व फोटोग्राफी आज की तरह सहज और अत्याधुनिक तकनीक से संपन्न नहीं थी। उस दौर में कांच के नेगेटिव तैयार करना और विशेष तकनीकों से तस्वीरों को आकार देना अपने आप में एक कठिन साधना थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में पवार साहब ने फोटोग्राफी को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि कला और साधना के रूप में अपनाया। अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर उन्होंने देवास में फोटोग्राफी को एक विशिष्ट पहचान दिलाई।

 

बहुआयामी व्यक्तित्व और कलात्मक विरासत

मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री रमेश भावसार ने स्व. श्री पवार से जुड़े आत्मीय संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन में वे राजबाड़ा स्थित श्री पवार के घर जाया करते थे और उन्हें स्नेह से ‘आबा’ कहकर संबोधित करते थे। श्री पवार के सबसे छोटे पुत्र प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं तबला वादक श्री अनिल पवार उनके मित्र हैं।

 

श्री भावसार ने रेखांकित किया कि गणपत राव पवार साहब का व्यक्तित्व किसी एक विधा तक सीमित नहीं था। वे फोटोग्राफी के साथ-साथ मूर्तिकला, लेखन और भजन गायन में भी पारंगत थे। उन्होंने इस कला परंपरा को अपने परिवार में रोपा, जिसे उनके चौथे पुत्र स्वर्गीय प्रेमराव पवार ने आगे बढ़ाया। श्री पवार की कलात्मक प्रतिभा का सम्मान न केवल देवास में, बल्कि इंदौर, उज्जैन सहित संपूर्ण मालवा क्षेत्र में था। आज भी उनके परिवार के सदस्य अपनी रचनात्मकता से इस विरासत को समृद्ध कर रहे हैं।

Photographer Ganpat Rao Pawar

तकनीक के दौर में कला का संदेश

वक्ताओं ने कहा कि आज फोटोग्राफी भले ही डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में पहुंच चुकी है, लेकिन एक बेहतरीन तस्वीर के पीछे की दृष्टि, धैर्य और कल्पनाशीलता का महत्व आज भी कायम है। स्व. गणपत राव पवार का जीवन नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि तकनीक बदल सकती है, लेकिन कला के प्रति समर्पण और साधना कभी पुरानी नहीं होती।

 

विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित श्री पवार के पुत्र श्री माणिक राव पवार ने अपने पिता के संघर्षों और देवास का नाम रोशन करने के उनके प्रयासों को याद किया।

 

आयोजन, सम्मान एवं आभार

भूमिका एवं परिचय: कार्यक्रम की भूमिका स्व. श्री पवार के पौत्र श्री अमित राव पवार ने रखी। अतिथि परिचय एसोसिएशन के मार्गदर्शक श्री राजू पुराणिक ने दिया तथा अतिथियों का स्वागत श्री प्रवीण चौहान, मुकेश नागर एवं प्रदीप श्रीवास्तव ने किया।

 

सम्मान एवं प्रदर्शनी: इस अवसर पर वरिष्ठ फोटोग्राफर श्री राजेंद्र व्यास एवं मोहन सिंह राजपूत को सम्मानित किया गया तथा उनके द्वारा लगाई गई छायाचित्र प्रदर्शनी का सभी उपस्थितजनों ने अवलोकन किया।

 

संचालन एवं आभार: कार्यक्रम का सफल संचालन एसोसिएशन के संयोजक श्री देवेंद्र गौड़ ने किया एवं आभार प्रदर्शन एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री जितेंद्र शर्मा ने माना।

 

प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम में मराठा समाज अध्यक्ष सुभाष शिंदे, अशोक सोमानी, शर्मिला काटे, बाला पलसे, उमेश निम्बारकर, सुरेश जायसवाल, मुकेश दरबार, प्रदीप नाथ सहित बड़ी संख्या में फोटोग्राफर, समाजजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

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कभी-कभी किसी छोटी-सी परेशानी का हल ऐसी जगह से मिल जाता है, जिसके बारे में हमने सोचा भी नहीं होता। उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने गए शुभांग बोरकर का जूता गूम गया। सामने 1000 से ज्यादा जूते चप्पल थे। ऐसे में उसके लिए अपना जूता खोजना बेहद मुश्किल भरा था। इस पर उसने AI की मदद से और कुछ ही देर में उसका जूता मिल भी गया।

 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो को Shubhang borkar नाम के शख्स ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में वो उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाहर दिखाई देने वाले जूतों के ढेर के बीच अपना जूता ढूंढने की कोशिश करते नजर आते हैं। यहां इतने ज्यादा जूते रखे हुए थे कि यह समझना मुश्किल था कि इनमें उनका जूता आखिर कौन सा है?

जूते की फोटो लेकर ChatGPT से मांगी मदद

शुभांग ने अपने जूतों की फोटो और जूतों के ढेर की तस्वीर ChatGPT के साथ शेयर की। उन्होंने AI को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह उज्जैन के महाकाल मंदिर आए हैं और बाहर रखे ढेर सारे जूतों में से अपना जूता पहचानना मुश्किल हो रहा है।

 

वीडियो के मुताबिक, ChatGPT ने जूतों की तस्वीर को देखकर उनसे कुछ सवाल पूछे। जूते के रंग, डिजाइन और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर AI ने तस्वीर में उनके जूते को पहचानने में मदद की। 

 

आमतौर पर लोग ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब जानने, लिखने-पढ़ने, जानकारी हासिल करने या किसी काम में मदद लेने के लिए करते हैं। बहरहाल जूता ढूंढने जैसे रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी हैरान हैं।

 

PM Surya Ghar: अब 60 सेकंड में पता चलेगा सोलर लगाने का पूरा खर्च और सब्सिडी! सरकार ने लॉन्च किया नया डिजिटल टूल

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ को बढ़ावा देने सरकार एक बड़ा प्लान लेकर आई है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने इसके लिए एक खास डिजिटल टूल ‘Get Solar in 60 Secs’ लॉन्च किया है। इस इंटरेक्टिव प्लेटफॉर्म की मदद से देश के नागरिक अब सिर्फ 1 मिनट के भीतर अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगाने का पूरा गणित समझ सकते हैं।

इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 50 लाख से ज्यादा घर अपनी बिजली खुद बनाने में सक्षम हो चुके हैं। इस नए डिजिटल टूल से सोलर सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।

कैसे काम करता है ‘Get Solar in 60 Secs’ टूल?

इस टूल का इस्तेमाल करना बेहद आसान है। यूजर को बस कुछ बेसिक जानकारियां दर्ज करनी होंगी:

स्टेप 1: अपना नाम, फोन नंबर, राज्य और जिले का नाम चुनें।

स्टेप 2: स्लाइडर की मदद से अपने पिछले महीने का बिजली बिल और स्वीकृत लोड डालें।

स्टेप 3: इसके बाद यह टूल तुरंत आपके घर के हिसाब से सही सोलर प्लांट क्षमता (kW), लगने वाली कुल लागत, सरकार से मिलने वाली सब्सिडी और मिलने वाले बैंक लोन व उसकी ब्याज दर का पूरा हिसाब दे देगा।

यह टूल आपको जीवनभर में होने वाली अनुमानित बचत का आंकड़ा भी दिखाएगा।

व्हाट्सएप पर वेंडर्स से सीधा संपर्क और AI चैटबॉट ‘SUNtosh’

यह प्लेटफॉर्म पीएम सूर्य घर योजना के तहत रजिस्टर्ड सर्टिफाइड वेंडर्स की लिस्ट भी दिखाता है। यूजर सीधे व्हाट्सएप या कॉल के जरिए वेंडर से संपर्क करके सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

इसके अलावा, सरकार ने हाल ही में 4 जून 2026 को ‘SUNtosh’ नाम का एक व्हाट्सएप-बेस्ड AI चैटबॉट भी लॉन्च किया है। यह चैटबॉट यूजर्स को सब्सिडी, एप्लीकेशन प्रोसेस और आम समस्याओं के हल की रियल-टाइम जानकारी सीधे व्हाट्सएप पर उपलब्ध कराता है।

पैसों की बचत के साथ पर्यावरण के लिए भी बेहद खास है यह स्कीम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फरवरी 2024 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाना और उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना। वित्त वर्ष 2026-27 तक 30 GW रूफटॉप सोलर क्षमता हासिल करना। अपने लाइफटाइम में यह योजना 1,000 अरब यूनिट क्लीन पावर पैदा करेगी और 72 करोड़ टन CO2 उत्सर्जन को कम करेगी।

नोएडा का ये OTT स्टार्टअप हरियाणवी-भोजपुरी कंटेंट के दम पर चमका! 2 साल में 6.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

STAGE OTT Platform: भारत में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बात होती है, तो ज्यादातर लोग नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम का नाम लेते हैं। लेकिन इस बीच देश के रीजनल ‘बोली आधारित’ ओटीटी प्लेटफॉर्म STAGE ने चुपके से एक ऐसा बड़ा मार्केट कब्जा लिया है, जिसे बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘निश’ (Niche) समझकर छोड़ देते थे।

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY24 से FY26 के बीच STAGE के रेवेन्यू में 6.3 गुना का जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 150% रहा है।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल वीडियो और ओटीटी मार्केट में बड़े दिग्गजों के बीच STAGE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारतीय ओटीटी मार्केट में STAGE की हिस्सेदारी 1.6% पर पहुंच गई है। STAGE ने अपनी शुरुआत हरियाणवी और राजस्थानी बोलियों से की थी, लेकिन अब यह मॉडल 6 भाषा क्षेत्रों में फैल चुका है।

STAGE के सह-संस्थापक और सीईओ विनय सिंघल ने कहा, ‘भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और 1,900 से ज्यादा बोलियां हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने सिर्फ 5-6 भाषाओं के लिए कंटेंट बनाया। बाकी सबको ‘निश’ कह दिया गया। जबकि देश में ओटीटी पर आधा कंटेंट क्षेत्रीय भाषाओं में देखा जा रहा है। हमने सिर्फ देश की असली संस्कृति को सम्मान देकर प्लेटफॉर्म बनाया है।’

99% कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से, विज्ञापन का कोई चक्कर नहीं

जहाँ कई ऐप्स विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वहीं STAGE पूरी तरह से ‘सब्सक्रिप्शन-ओनली’ मॉडल पर काम करता है। FY26 में कंपनी की कुल कमाई का 99.2% हिस्सा केवल यूजर सब्सक्रिप्शन से आया है। Q1 FY27 में कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 80.3% हिस्सा पुराने यूजर्स के रिन्यूअल और रिएक्टिवेशन से आया है। FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 30.4% था, जो दिखाता है कि यूजर्स को इसका कंटेंट बेहद पसंद आ रहा है।

AI के इस्तेमाल से कंटेंट बनाना हुआ सस्ता

STAGE ने अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है। एआई की मदद से ओरिजिनल शोज और मूवीज का प्रोडक्शन टाइम और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। इससे उन भाषाओं/बोलियों में भी कंटेंट बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो गया है, जहां पहले पारंपरिक तरीके से काम करना नामुमकिन माना जाता था।

Stocks to Watch: हुंडई से ऑयल इंडिया तक, 20 अगस्त को इन 10 शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर

Stocks to Watch: गुरुवार, 20 अगस्त के कारोबार में कई कंपनियों से जुड़ी बड़ी खबरें आई हैं। कहीं कीमतें बढ़ाने का ऐलान हुआ है, कहीं डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट तय हुई है। कुछ कंपनियों ने फंड जुटाने, नए CEO की नियुक्ति और बड़े ऑर्डर जैसी घोषणाएं भी की हैं। ऐसे में 20 अगस्त के कारोबार में इन शेयरों पर निवेशकों की करीबी नजर रह सकती है।

Hyundai Motor India

ऑटो कंपनी Hyundai Motor India सितंबर 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतें 1% तक बढ़ाएगी। कंपनी ने इसकी वजह महंगा कच्चा माल, बढ़ता ऑपरेटिंग खर्च और वैश्विक अनिश्चितता बताई है।

Hexaware Technologies

आईटी सर्विसेज कंपनी Hexaware Technologies ने कहा कि उसके सिस्टम या ग्राहकों के डेटा में सेंध लगने का कोई भरोसेमंद सबूत नहीं मिला है। यह बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया, जिनमें एक हैकर ग्रुप ने कुछ कर्मचारियों की जानकारी लीक होने का दावा किया था।

HEG

ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड बनाने वाली HEG को NCLT की मंजूरी मिल गई है। डिमर्जर के बाद HEG Graphite अलग लिस्टेड कंपनी बनेगी। HEG के शेयरधारकों को हर 1 शेयर पर 1 HEG Graphite शेयर मिलेगा।

Aditya Infotech

सिक्योरिटी और सर्विलांस प्रोडक्ट्स बनाने वाली Aditya Infotech ने 1,500 करोड़ रुपये तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी यह रकम पब्लिक इश्यू, QIP या दूसरे मंजूर तरीकों से जुटा सकती है। इसके लिए शेयरधारकों और रेगुलेटरी मंजूरी की जरूरत होगी।

HDFC Life Insurance

प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life को IRDAI से बड़ी मंजूरी मिली है। रेगुलेटर ने विभा पडलकर को अगले पांच साल के लिए फिर से MD और CEO नियुक्त करने की अनुमति दे दी है। उनका नया कार्यकाल 12 सितंबर 2026 से शुरू होगा।

Oil India

महानवरत्न सरकारी कंपनी Oil India ने 4 सितंबर 2026 को फाइनल डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट तय की है। यह डिविडेंड FY26 के लिए है। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर इसका भुगतान किया जाएगा।

Kolte-Patil Developers

रियल एस्टेट कंपनी Kolte-Patil Developers ने ऋषिकेश परांडेकर को नया CEO नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 24 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। कंपनी को उम्मीद है कि इससे बिजनेस की अगली ग्रोथ रणनीति को गति मिलेगी।

Fedbank Financial Services

NBFC कंपनी Fedbank Financial Services 25 अगस्त की बोर्ड बैठक में 2,500 करोड़ रुपये तक जुटाने पर विचार करेगी। यह रकम NCD समेत दूसरे डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए जुटाई जा सकती है।

Dr Lal PathLabs

डायग्नोस्टिक कंपनी Dr Lal PathLabs ने उज्बेकिस्तान में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। उसकी दुबई स्थित सब्सिडियरी ने ताशकंद में नई कंपनी बनाई है। नई इकाई में उसकी 70% हिस्सेदारी होगी।

EMS

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी EMS राजस्थान के कोटा में 190.86 करोड़ रुपये के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट की L1 बिडर बनी है। यह प्रोजेक्ट राज्य के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग की ओर से दिया गया है।

Ramco Systems

एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर कंपनी Ramco Systems की अमेरिकी इकाई को नया अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिला है। Pem-Air अपने इंजन MRO ऑपरेशंस के लिए कंपनी का AI आधारित एविएशन सॉफ्टवेयर अपनाएगी। इससे उसके इंजन मेंटेनेंस का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन होगा।

IPO Returns: इस साल 5 छोटे IPO ने किया बड़ा धमाका, 149% तक चढ़े स्टॉक्स

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

IDL टोकन के लिए $1 अरब तक का इंश्योरेंस कवर की तैयारी, Infinity DAO का दावा

AI से जुड़े DeFi प्लेटफॉर्म Infinity DAO ने अपने IDL टोकन और पूरे इकोसिस्टम के लिए करीब 1 अरब डॉलर का इंश्योरेंस कवर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि अगर यह बीमा कार्यक्रम मंजूर होकर लागू हो जाता है, तो यह डिजिटल एसेट सेक्टर में रिस्क मैनेजमेंट और संस्थागत भरोसे के लिहाज से बड़ा कदम हो सकता है।

कंपनी के मुताबिक, इस बीमा व्यवस्था की पॉलिसी, अंडरराइटिंग शर्तें और कवरेज लिमिट ब्रिटेन के एक एक्सपर्ट्स क्रिप्टो इंश्योरेंस सिंडिकेट के साथ तैयार की जा रही हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

किन जोखिमों को मिलेगा कवर?

Infinity DAO के मुताबिक प्रस्तावित बीमा योजना पांच बड़े जोखिमों को कवर करेगी। इसमें खास परिस्थितियों में IDL टोकन डिफॉल्ट प्रोटेक्शन, प्लेटफॉर्म या इकोसिस्टम में बीमित डिफॉल्ट की स्थिति में सुरक्षा, साइबर अपराध और डिजिटल एसेट चोरी से बचाव शामिल है।

इसके अलावा डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स (D&O) से जुड़े कानूनी दावों का कवर और यूजर्स, स्टेकहोल्डर्स व प्लेटफॉर्म के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी योजना है।

Polygon पर चलता है IDL टोकन

IDL, Infinity DAO का यूटिलिटी टोकन है, जो Polygon ब्लॉकचेन पर काम करता है। कंपनी का कहना है कि उसका सिस्टम ड्यूल-टोकन स्ट्रक्चर और AI आधारित इकोनॉमिक मॉडल पर बना है। इसका मकसद टोकन इमिशन, लिक्विडिटी और सिस्टम की लंबी अवधि की स्थिरता को संभालना है।

कंपनी के प्रोटोकॉल वर्जन 1.2 में Quantum Emission Matrix, Flux Liquidity Shield, Velocity Recycle Core, HyperGuard Lock और Infinity Sustainability Protocol जैसे मॉड्यूल शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि ये सिस्टम लिक्विडिटी मैनेजमेंट, स्टेकिंग और रिवॉर्ड मैकेनिज्म को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करते हैं।

क्रिप्टो में इंश्योरेंस क्यों अहम है?

क्रिप्टो बाजार में निवेशकों के सामने साइबर अटैक, ऑपरेशनल गड़बड़ी और डिजिटल एसेट चोरी जैसे जोखिम बने रहते हैं। ऐसे में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कुछ तय परिस्थितियों में इन जोखिमों को कम करने का काम कर सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ऐसा बीमा टोकन की कीमत गिरने या निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं देता। कवरेज सिर्फ पॉलिसी में तय शर्तों के दायरे तक ही सीमित होता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

7 improvements Skoda Slavia facelift gets over its predecessor

7 improvements Skoda Slavia facelift gets over its predecessor
7 improvements Skoda Slavia facelift gets over its predecessor

The Skoda Slavia has received its first facelift in India since its launch in 2021. The facelift has given it a slightly revamped exterior and interior design, while also introducing a new automatic gearbox and some comfort and convenience features. Here are all the improvements the new Skoda Slavia facelift offers.

New automatic transmission

The 1.0L TSI engine Slavia facelift is offered with a new 8-speed AT

The Skoda Slavia facelift continues with the 115hp, 1.0-litre direct-injection turbo-petrol and the 150hp, 1.5-litre direct-injection turbo-petrol engines. However, the smaller engine is offered with a new 8-speed torque converter automatic transmission (AT) which replaces the predecessor’s 6-speed AT. The 1.0L TSI is also offered with a 5-speed manual transmission, while the larger 1.5L TSI engine gets a 7-speed dual-clutch automatic transmission (DCT) only. 

Rear seat massager

Top-spec Slavia facelift gets a massager on the rear outboard seats

A massage function has been added to the rear outboard seats of the Slavia facelift, making it the only sedan in its segment to offer such a feature. It borrows this rear seat massager feature from the Skoda Kushaq, which is also the only midsize SUV in India with such a feature. On the Slavia facelift, Skoda will be offering this feature on the top-spec Prestige and Monte Carlo trims.

Larger digital driver’s display

It gets a larger 10.25-inch digital driver’s display with the facelift

With the facelift, Skoda is replacing the predecessor’s 8-inch digital driver’s display, which featured massive bezels around it, with a newer 10.25-inch unit. This screen, along with showing the digital feed of the speedometer and tachometer, will also offer turn-by-turn navigation. However, the 10.25-inch driver’s display will be offered only on the Prestige and Monte Carlo trims, while the mid-spec Signature and Sportline will continue with the smaller 8-inch display, and the entry-spec Classic and Classic+ will sport analogue dials with a multi-information display (MID). 

New 360-degree camera and front parking sensors

Skoda has yet to reveal which variants will be equipped with these new features

The Skoda Slavia facelift also gets a 360-degree camera and new front parking sensors in addition to the rear parking sensors, which are definitely expected to make navigating tight lanes and parking in tight spaces easier. However, Skoda has yet to reveal which variants these features will be offered in. 

Improved AC performance

Skoda now uses a variable-geometry compressor to boost the AC performance

One of the major criticisms of the Slavia was the climate control performance, which the manufacturer claims to fix with the facelifted model. What Skoda has done is replace the previous model’s fixed-geometry AC compressor with a variable-geometry unit, thereby making the climate control more powerful than before.

Introduces a Google Cloud-based AI assistant 

The AI assistant provides real-time information and enables hands-free controls

While the 10.1-inch touchscreen infotainment system is the same as before, it gets a more modern user interface and gets an AI companion powered by Google Cloud’s Automotive AI Agent. Skoda says that the AI assistant is “developed to recognise Indian English accents” and “provides real-time access to information via voice commands and enables hands-free control of music, calls, climate settings and other functions.”

New exterior lighting elements

Lighting elements in the DRLs, fog lamps and taillights have been revamped

Skoda Slavia facelift headlight
Skoda Slavia facelift taillight
 

With the facelift, Skoda has made some design changes to the Slavia, including fresh lighting elements. At the front, the headlight housing is the same, but is offered with segmented LED DRLs. The front fog lamps have also been redesigned to have a pixel-like shape. Like the headlights, the taillight housing is the same as the older model, but it sports new LED elements that make it look sharper and more modern than before.