हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के बिना भी भारत ने Commonwealth Games में जीते 39 मेडल

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कई मुख्य खेल जैसे कि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के ना होने के बावूजद भी भारत ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दम दिखाया और 39 मेडल पाकर अंकतालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। ऐसा माना जा रहा था जहां भारत के सफलतम वैश्विक खेल नदारद है वहां मेडल तालिका में भारत अंकतालिका में शीर्ष दस देशों में आ जाए तो बड़ी बात होगी।

टेबल टेनिस में भी सिर्फ पुरुष और महिला के टीम मैच हुए थे, एकल और युगल नहीं। टेबल टेनिस में भारत ने मलेशिया को हराकर दोनों स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।लेकिन भारोत्तोलन, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फी्लड इवेंट के साथ पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने झंडे गाढे़।


भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है।भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते।

मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते।निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया।

कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई।ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।

पाकिस्तानी नहीं श्रीलंकाई नीरज के हाथों से ले उड़ा गोल्ड पर विजयवीर जीते कांस्य

पेरिस ओलंपिक में पाकिस्तानी अरशद नदीम से गोल्ड मेडल हारने के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा श्रीलंकाई खिलाड़ी से गोल्ड मेडल हार गए। हालांकि अपने बुरे दिन पर भी उन्होंने सुनिश्चित किया कि सिल्वर मेडल कहीं नहीं जाए। इसके अलावा भारत के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि यशवीर को कांस्य पदक मिला।

तोक्यो ओलंपिक चैम्पियन 28 वर्ष के नीरज ने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85 . 83 मीटर थ्रो फेंका जो दूसरे स्थान पर रहने के लिये काफी था।वह 19 जून को दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार उतरे 24 बरस के यशवीर ने छठे और आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया।

इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83 . 72 मीटर था। वह पांचवें दौर के बाद 81.33 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास से सातवें स्थान पर थे लेकिन उनका आखिरी प्रयास जबर्दस्त रहा।

श्रीलंका के स्टार रूमेश थरंगा पथिरागे ने अपेक्षा के अनुरूप 89.75 मीटर फेंककर स्वर्ण पदक जीता।बेहद सर्दी और तेज हवाओं के प्रदर्शन उनका यह प्रदर्शन शानदार रहा । उन्होंने जून में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंका था।

चोपड़ा पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट से उबरकर लौटे थे। इस चोट के कारण उनकी वापसी दोहा में आयोजित डायमंड लीग तक टल गई थी। वह दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे थे। इससे पहले उन्होंने 2018 में गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।उन्होंने संकेत दिया कि वह अभी भी पूरी तरह से फिट नहीं हैं, लेकिन धीरे-धीरे उस ओर बढ़ रहे हैं।

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी रोहित यादव 81.56 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सातवें स्थान पर रहे। दिलचस्प बात यह है कि भाला फेंक में पुरुषों के सभी पदक भारतीय उपमहाद्वीप के एथलीटों ने जीते।पाकिस्तान के गत चैम्पियन और मौजूदा ओलंपिक विजेता अरशद नदीम 77.41 के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ तीन दौर के बाद बाहर हो गए । त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैम्पियन केशोर्न वालकॉट छठे स्थान पर रहे।

अस्मिता और हर्ष के एतिहासिक स्वर्ण पदक, जूडो में 3 पदक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहली बार जूडो कराटे में मेडल दिलवाया वह भी गोल्ड। अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला जूडोका बनी वहीं इसके बाद हर्ष सिंह भी पहले पुरष जूडोका बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स  में गोल्ड जीता। इसके अलावा यामिनी ने भी 48.किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

भारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया । यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

मलेशिया को मात देकर भारत की पुरुष और महिला टीम ने जीता गोल्ड मेडल

भारत की पुरुष और महिला टेबल टेनिस टीम ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मलेशिया की टीम को हराकर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया है। भारत की महिली टीम ने मलेशिया को 3-0 से हराया वहीं भारत की पुरुष टीम ने मलेशिया को 3-2 से हराया। यह जीत एक ही दिन और एक ही प्रतिद्वंदी के खिलाफ आई इस कारण से यह जीत टीम के लिए खास है।

भारत की पुरुष टीम ने पिछली बार भी स्वर्ण पदक जीता था जबकि महिला टीम ने 12 साल बाद स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय पुरुष टीम में मानव ठक्कर, मानुष शाह, साथियन गणानाशेकरन, हरमीत देसाई और पायस जैन शामिल थे।

भारत ने इससे पहले ग्रुप स्टेज में भी जिमबाब्वे और मलेशिया को 3-0 से हराया था। इसके बाद टीम ने श्रीलंका, वेल्स, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और इंग्लैंड पर विजय हासिल की।

खिताबी मुकाबले में मानव ठक्कर, मानुष शाह विजेता रहे जबकि साथियन गणानाशेकरन को हार मिली।

वहीं दूसरी वरीयता प्राप्त महिला टीम ने दबदबा बनाकर छठी वरीयता प्राप्त मलेशिया को  3-0 से हराकर खिताब पाया। भारत की महिला टीम में सिंड्रेला दास, श्रीजा अकुला, यशस्वी घोरपड़े, सुतीर्था मुखर्जी और स्वस्तिका घोष शामिल थीं।

पुरषों की भांति इस टूर्नामेंट में महिला टीम भी बिना कोई मैच हारे खिताब जीती। महिला टीम ने मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी आयरलैंड, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के खिलाफ बिना कोई सेट गंवाए 3-0 से जीत दर्ज की। वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 3-1 से हराया।

खिलाड़ियों और प्रसारक की भलाई के लिए बदली गई जर्सी जानिए कैसे (Video)

नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले हॉकी विश्वकप में भारत की जर्सी का रंग बदलने का मामला गर्माता जा रहा है। भारत अमूमन किसी वैश्विक टूर्नामेंट या प्रो लीग में नीली या सफेद जर्सी पहनकर हॉकी स्टेडियम में उतरता था। लेकिन अब आगामी विश्वकप के लिए नारंगी (भगवा) और सफेद जर्सी को चुना गया है।

भारत के कप्तान हरमनप्रीत ने एक डिजिटल चैनल में यह बात स्वीकारी की खिलाड़ियों और कोच की सहमति के बाद ही जर्सी बदलनी पड़ी। जर्सी बदलने का सबसे बड़ा कारण यह था कि टर्फ का रंग नीला होता है जिससे ना केवल अभ्यास सत्र बल्कि मैच के दौरान भी खिलाड़ियों को फॉर्मेशन बनाने में दिक्कत होती थी।

इसके अलावा लंबे समय से बात चर्चा में थी कि स्क्रीन पर टर्फ और जर्सी का रंग एक होने के कारण दर्शकों को हॉकी का मैच देखने में बहुत दिक्कत आती है। यह प्रसारकों के हित का भी निर्णय है लेकिन अब इस पर राजनीति हो रही है।

इन पूर्व खिलाड़ियों ने उठाया सवाल

नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया जिसे लेकर वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन, धनराज पिल्लै जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये हैं। वहीं मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विपक्षी दलों ने इस पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

टिर्की सहित हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों का कल तक कहना था कि खेल के मैदान पर इस्तेमाल होने वाली नीली पिच से रंग की समानता से बचने के लिए यह पूरी तरह से तकनीकी निर्णय था।

भारोत्तोलन में भारत का आठवां मेडल, लवप्रीत सिंह ने उठाया रिकॉर्ड 388 कि.ग्रा वजन (Video)

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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेल में भारत ने भारोत्तोलन में 8 मेडल पा लिये हैं। भारतीय भारोत्तोलक लवप्रीत सिंह ने 110 कि.ग्रा वर्ग में रिकॉर्ड 388 कि.ग्रा वजन उठाकर रजत पदक प्राप्त किया। इसके अलावा उन्होंने कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाते हुए 176 कि.ग्रा स्नेच में वजन उठाया और फिर क्लीन एंड जर्क में 212 कि.ग्रा वजन उठाया।

न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटि ने क्लीन एवं जर्क में खेलों का रिकॉर्ड 223 किग्रा भार उठाते हुए कुल 389 किग्रा (166 किग्रा और 223 किग्रा) वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता।पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले लवप्रीत ने इस बार अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए रजत पदक जीता।

इसके साथ ही उन्होंने भारोत्तोलन में भारत के लगातार तीन स्पर्धाओं के पदक नहीं जीत पाने का सिलसिला भी तोड़ा। भारतीय भारोत्तोलन दल ने खेलों में अपने अभियान का समापन एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य सहित कुल आठ पदक के साथ किया।

भारतीय भारोत्तोलक मार्टिना देवी मेबाम का राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्प भावनाओं से भरा रहा जब यह 18 वर्षीय खिलाड़ी मुकाबले से बाहर होने की कगार से वापसी करने में सफल रहीं लेकिन पदक से चूककर महिलाओं के 86 किग्रा से अधिक भारवर्ग में पांचवें स्थान पर रहीं।

मणिपुर की मार्टिना ने स्नैच में 105 किग्रा और क्लीन एवं जर्क में 140 किग्रा सहित कुल 245 किग्रा वजन उठाया। उनका कुल भार न्यूजीलैंड की तुई अलोफा पटोलो (115 किग्रा और 130 किग्रा) के बराबर रहा।हालांकि कम असफल प्रयासों के आधार पर पटोलो को चौथा स्थान मिला।

नीरज चोपड़ा समेत 3 भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी फाइनल में हराने उतरेंगे नदीम को

नीरज चोपड़ा समेत 3 भारतीय भाला फेंक खिलाड़ियों ने भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश पा लिया है। कुल 20 प्रतियोगियों में से 12 प्रतियोगी को फाइनल में प्रवेश मिला। भारत के 3 खिलाड़ियों का इस स्पर्धा में भाग लेना मायने रखता है। हालांकि ग्लास आधा भरा और आधा खाली जैसी स्थिति है।

क्वालिफाय करने वाले तीनों खिलाड़ियों में से एक ने भी पहली तीन में से एक भी स्थान नहीं पाया। 79.61 मीटर के थ्रो के साथ नीरज चोपड़ा पांचवे स्थान पर रहे। वहीं रोहित यादव 78.37 की थ्रो के साथ नवें स्थान पर रहे। 78.36 मीटर थ्रो के साथ यशवीर सिंह दसवें स्थान पर रहे।

श्रीलंका के रुमेश थरंगा 82.84 मीटर के थ्रो के कारण शीर्ष पर रहे। ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स 81.29 मीटर के थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के डाउ स्मिट 80.64  मीटर की थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इंग्लैंड के बेन इस्ट 80.38  मीटर की थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे।

ऑस्ट्रेलिया के कैमरून मेकेन्ट्री 78.91 मीटर के साथ छठवें स्थान पर रहे। सातवें स्थान पर रहे पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अर्शद नदीम जिन्होंने  78.63 मीटर दूर भाला फेंका।

बहरीन के केशुआन स्ट्रेचन ने 78.60 मीटर दूर भाला फेंका और वह आठवें स्थआन पर रहे। ट्रिनिडैड और टोबेगो के केशरोन वेलकॉट 78.26 मीटर दूर भाला फेंककर 9वें स्थान पर रहे। दसवें स्थान पर नाइजिरिया के शिनचिरीम नमादी रहे जिन्होंने  75.27 मीटर दूर भाला फेंका।भाला फेंक स्पर्धा का फाइनल शुक्रवार देर रात खेला जाएगा।

8.9 मीटर की लंबी कूद लगाकर श्रीशंकर ने जीता सिल्वर मेडल (Video)

भारत के अनुभवी एथलीट मुरली श्रीशंकर ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जारी राष्ट्रमंडल खेलों में 8.9 मीटर लंबी कूद मारकर रजत पदक अपने नाम कर लिया है।  मुरली श्रीशंकर टॉप्स के एथलीट है और उनसे पदक जीतने की उम्मीद थी और उन्होंने निराश भी नहीं किया।यह उनके लिए एक सुखद अहसास भी है क्योंकि वह चोट के कारण पेरिस ओलंपिक का भाग नहीं बन पाए थे।

एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता श्रीशंकर ने 2023 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 8.37 मीटर के प्रयास से रजत पदक जीतते हुए पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।

जून 2023 में श्रीशंकर तीसरे स्थान पर रहकर डाइमंड लीग प्रतियोगिता में शीर्ष तीन में जगह बनाने वाले तीसरे भारतीय बने थे।हालांकि वह बुडापेस्ट में विश्व चैंपियनशिप के क्वालीफाइंग दौर से बाहर होने से निराश थे लेकिन हांगझोउ में एशियाई खेलों में रजत पदक जीतकर जोरदार वापसी की।

श्रीशंकर ने कहा, ‘‘जिंदगी अजीब पटकथाएं लिखती है और कभी-कभी इसे स्वीकार करने और आगे बढ़ने में साहस होता है। मैं यही करूंगा।’’उन्होंने कहा, ‘‘मेरी वापसी का सफर उसी क्षण शुरू हो गया जब मेरे घुटने में चोट लगी। यह रास्ता लंबा, कठिन होने वाला है और मेरे से बहुत कुछ छीन लेगा।’’

बॉस्केटबॉल के दिग्गज कोबे ब्रायंट को अपना आदर्श मानने वाले श्रीशंकर ने कहा, ‘‘अच्छी बात यह है कि मेरे पास देने के लिए बहुत कुछ है। मैं इससे निपट लूंगा क्योंकि मांबा मानसिकता का यही मतलब है।’’शब्द ‘माम्बा मानसिकता’ लॉस एंजिल्स लेकर्स स्टार की जीवन और प्रतिस्पर्धा के प्रति मानसिकता और सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

हॉकी जर्सी का भगवाकरण, पूर्व कप्तान को नहीं भाया रंग तो बढ़ा विवाद

भारतीय पुरूष और महिला हॉकी टीमें अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले FIH विश्व कप में पारंपरिक नीली जर्सी नहीं बल्कि भगवा रंग की जर्सी पहनेगी।इस फैसले पर हालांकि पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा ने सवाल उठाया है।

हॉकी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नयी जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि जर्सी का डिजाइन और रंग एक कहानी बताने और भारत का गौरव दिखाने के लिये है।हॉकी इंडिया ने कहा कि भगवा रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है। ‘‘भारत के राष्ट्रध्वज और उगते हुए सूरज से प्रेरित यह जर्सी नयी शुरूआत की प्रतीक है।’

विश्व कप 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जायेगा।जर्सी पर ‘मंडाला’ कला से प्रेरित पैटर्न हैं जो भारत की सांस्कृतिक विरासत दर्शाते हैं। हॉकी इंडिया ने कहा कि इस पर गहरा नेवी ब्लू रंक अशोक चक्र से प्रेरित है जो प्रगति, शांति और फोकस का प्रतीक है।हॉकी इंडिया ने कहा कि छाती पर बना ग्राफिक सुदर्शन चक्र का एक आधुनिक रूप है, जो ‘ताकत, एकता और गति’ का प्रतीक है।

कंधों और बाजुओं पर तिरंगे की पाइपिंग है जो राष्ट्रीय गौरव की द्योतक है।जर्सी के आगे के हिस्से पर देवनागरी लिपि में ‘इंडिया’ लिखा है जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।हॉकी इंडिया ने कहा ,‘‘ नयी जर्सी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की परिचायक है।’’

भारतीय टीम के पास भगवा के साथ इसी तरह की सफेद जर्सी भी होगी।पूर्व कप्तान रासकिन्हा ने हालांकि जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल किया है।

उन्होंने एक्स पर लिखा ,‘‘ हॉकी इंडिया ने खेल के लिये बहुत कुछ किया है लेकिन यह निराशाजनक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान नीला रंग रही है। मैने कई साल तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक हमारी टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं।यह भगवा का क्या तुक है।’’

ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के C.EO ने कहा ,‘‘ मेरा सरल और सीधा प्रश्न अपने गर्व, पहचान और विरासत से जुड़ा है।’’हॉकी इंडिया ने हालांकि इस फैसले का बचाव किया और एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ,‘‘इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है। भगवा जर्सी होने में क्या खराबी है। यह हमारे तिरंगे का एक रंग है और परिवर्तन तो होते रहना चाहिये।’’उन्होंने कहा कि नीली टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से प्रशंसकों और प्रसारकों को देखने में समस्या आती है।

पैरा एथलेटिक्स में भारत ने रचा इतिहास, इन 2 रनर्स ने जीते गोल्ड और सिल्वर

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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पैरा एथलेटिक्स की टी47 स्पर्धा की 100 मीटर दौड़ में दिलीप महादू गवित ने सिर्फ 10.71 सेकेंड में सबसे पहले बाधा पार कर ली और भारत को स्वर्ण पदक जिताया।  इसके अलावा त्रिवेंद्रम के एथलीट मोहम्मद बेसिल मोरसिंगनाथ ने 10.83 सेकेंड में इस दौड़ को पूरा किया और सिल्वर मेडल जीता।

यह पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए एक एतिहासिक दिन रहा।  दिलीप महादू गवित पहले ऐसे एथलीट बने जिन्होंने पैरा एथलेटिक्स में  भारत के लिए गोल्ड जीता। इंग्लैंड के केविन सैंटोस ने 10.85 सेकेंड के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ का समय के साथ कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा पैरा एथलेटिक्स की फर्राटा प्रतियोगिता है जिसमें एक हाथ में शारीरिक अक्षमता या उसके अभाव वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इससे शरीर के एक हिस्से की ताकत, गति या समन्वय प्रभावित होता है।इन दो पदकों के साथ भारत पदक तालिका में तीन स्वर्ण, नौ रजत और तीन कांस्य पदक लेकर आठवें स्थान पर पहुंच गया।