ईशा सिंह ने निशानेबाजी में फिर मनु भाकर को पीछे छोड़ जीता सिल्वर

हाल ही में संपन्न हुए ISSF World Cup  की तरह ही एशियन गेम्स में भी ईशा सिंह ओलंपिक डबल मेडलिस्ट मनु भाकर से 20 साबित हुईं और उन्होंने एशियाड में उनसे बेहतर प्रदर्शन किया। ईशा सिंह ने ISSF World Cup में स्वर्ण पदक जीता था और मनु भाकर ने कांस्य पदक लेकिन 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में इस बार ईशा सिंह तो रजत पदक जीत गई लेकिन मनु भाकर को खाली हाथ लौटना पड़ा।

हैदराबाद की 21 वर्षीय ईशा इस वर्ग की मौजूदा विश्व नंबर एक हैं। उन्होंने रजत की दौड़ में बने रहने के लिए तीन शूट-ऑफ जीते। इसके बाद स्वर्ण पदक के मुकाबले में उन्हें चीन की शियाओ जियारुईशुआन के साथ दो और Shoot-Off से गुजरना पड़ा।निर्धारित सीरीज के बाद दोनों के 38-38 अंक थे, लेकिन अंतिम निशाने में ईशा चूक गईं और उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक ने ईशा के खिलाफ शूट-ऑफ में हारने के बाद 34 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।इससे पहले दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर इस स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहने के बाद एशियाई खेलों से पदक के बिना लौटेंगी। ईशा ने क्वालीफिकेशन में आठवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचकर भारत की पदक उम्मीदें कायम रखीं।

मनु 579 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहीं, जो फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। ईशा ने क्वालीफिकेशन में 580 अंक जुटाए थे।भारतीय महिला टीम भी पदक की दौड़ में थी, लेकिन अहम समय पर राही सरनोबत की एक चूक टीम पर भारी पड़ी।

Manu Bhakar

सरनोबत ने चौथी सीरीज (प्रत्येक सीरीज में पांच निशाने लगाने होते हैं) में 39 अंक का निराशाजनक स्कोर किया। इसके बाद भारत की पदक की उम्मीदें समाप्त हो गईं। सरनोबत 568 अंक के साथ 30वें स्थान पर रहीं।

जीत को बाद ईशा ने यह कहा

एशियाड में रजत पदक जीतने वाली ईशा ने कहा, ‘‘पिछली जीत के कारण मुझ पर काफी दबाव था। जब आप अपनी स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो आपसे काफी उम्मीद की जाती है। मुझे खुशी है कि आज मैं इस दबाव को झेलने में सफल रही।’’

Asian Games से बाहर होने के बाद सिंधू ने शेड्यूल पर उठाए सवाल, 24 घंटे में 3 मैच क्यों

एशियाड में भारतीय बैडमिंटन टीम सिर्फ पुरुष टीम प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक लेकर लौटी। लगातार 3 बार ओलंपिक में मेडल लाने वाले इस खेल के लिए यह निराशाजनक बात है क्योंकि उम्मीद थी कि व्यक्तिगत मेडल भी भारतीय शीर्ष स्तर के खिलाड़ी ला सकते हैं। सात्विक और चिराग की राउंड ऑफ 16 में हार से सारी उम्मीदें पीवी सिंधु पर थी लेकिन वह भी रविवार को बाहर हो गई।

गौरतलब है कि महिला भारतीय बैडमिंटन टीम का कुल प्रदर्शन भी निराशाजनक ही रहा। क्वार्टरफाइनल में भारतीय महिला टीम जापान से 1-3 से हारकर बाहर हो गई।लेकिन व्यक्तिगत स्पर्धा में टीम को सिंधू से या त्रिसा जॉली और गायत्री से उम्मीद थी कि कम से कम एक पदक तो आएगा लेकिन ऐसा ना हो सका।

भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू ने रविवार को 24 घंटे के भीतर तीन एकल मुकाबले खेलने पर नाराजगी जताई।सिंधू को शनिवार को दो मुकाबले खेलने थे जिसमें से दूसरा मैच आधी रात के बाद खत्म हुआ। इसके बाद उन्हें रविवार को चीन की चेन यूफेई के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले के लिए कोर्ट पर उतरना पड़ा जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इससे पहले किसी बड़े टूर्नामेंट में कभी एक दिन में दो मैच खेले हैं, सिंधू ने कहा, ‘‘वास्तव में नहीं क्योंकि मुझे लगता है कि कार्यक्रम वास्तव में अच्छी तरह व्यवस्थित नहीं था।’’उन्होंने कहा, ‘‘हम काफी देर से सोए और फिर रविवार सुबह वापस आए, एक दिन में दो मैच खेलने के बाद उबरने की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता होती है।’’

Treesa Jolly Gayatri Gopichand

चौबीस घंटे में तीन मैच खेलने के लिए मानसिक रूप से खुद को तैयार करने के सवाल पर सिंधू ने कहा, ‘‘यह सिर्फ मानसिक रूप से तैयार होने की बात नहीं है, आपको उबरने की जरूरत होती है। भले ही आपको लगे कि आप अच्छा कर रहे हैं लेकिन शारीरिक रूप से शायद आप वहां जाने या खेलने की स्थिति में नहीं हो।’’

सिंधू ने  कहा, ‘‘जब लंबी रैलियां होती हैं तो निश्चित रूप से रिकवरी जरूरी होती है। जब आप अच्छा कर रहे होते हैं तो आप स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ते हैं, लेकिन आपके पैर साथ नहीं देते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा कुल मिलाकर मैच अच्छा था, लेकिन कार्यक्रम थोड़ा बेहतर होना चाहिए था।’’

Asian Games में एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम, जीते 4 मेडल

भारत के सर्वेश कुशारे और एंसी सोजन ने रविवार को एशियाई खेलों में क्रमश: पुरुष ऊंची कूद और महिला लंबी कूद फाइनल में अधिकांश समय बढ़त बनाए रखी लेकिन अंत में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा जबकि पारुल चौधरी ने महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज में कांस्य पदक जीता।

सर्वेश स्पर्धा में काफी समय तक शीर्ष पर रहे लेकिन 2.25 मीटर की ऊंचाई को पहली कोशिश में पार नहीं कर पाने के बाद दूसरे स्थान पर खिसक गए। चीनी ताइपे के चाओ शुआन फू ने यह ऊंचाई अपनी पहली कोशिश में पार कर ली।

हालांकि कुशारे ने दूसरी कोशिश में 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर ली।महिला लंबी कूद फाइनल में एंसी ने 6.53 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और दूसरे स्थान पर रहीं। चीन की हुआंग यिंगयिंग ने आखिरी प्रयास में 6.55 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया।इससे पहले भारत की हरिता भद्रा ने महिला 200 मीटर में 23.20 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। भद्रा तीसरे स्थान पर रहीं। वह जापान की इडो अबिगेइरुफुका से मामूली अंतर से आगे रहीं जिन्होंने 23.21 सेकेंड का समय निकाला।

हालांकि एंसी की हमवतन शैली सिंह के लिए महिला लंबी कूद फाइनल में निराशा हाथ लगी। चीन की मेंगयी तान ने 6.46 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ दिया जिससे शैली कांस्य पदक से चूक गईं।एंसी ने पांचवें प्रयास में 6.53 मीटर की कूद लगाई थी लेकिन यिंगयिंग ने 6.55 मीटर की कूद के साथ अंतिम प्रयास में उन्हें पीछे छोड़ दिया।

शैली का दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 6.42 मीटर रहा।महिला 200 मीटर फाइनल में सिंगापुर की शांति परेरा ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ 22.78 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि चीन की चेन युजी ने 22.93 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया।

फाइनल में शामिल एक अन्य भारतीय उन्नति अयप्पा बोलैंड 23.48 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं।पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली पारुल ने नौ मिनट 8.67 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ लगातार दूसरी बार कांस्य पदक अपने नाम किया।

बहरीन की विनफ्रेड यावी ने नौ मिनट 4.36 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाखस्तान की नोराह जेरुतो तनुई ने नौ मिनट 06.82 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया।स्पर्धा में हिस्सा लेने वाली एक अन्य भारतीय एथलीट अंकिता नौ मिनट 19.24 सेकेंड के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहीं।

7 गोलों से सिंगापुर को रौंदकर Asian Games सेमीफाइनल में पहुंची चक दे गर्ल्स

रविवार को गिफू प्रीफ़ेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में एशियन गेम्स 2026 के ग्रुप स्टेज में, भारतीय महिला हॉकी टीम ने सिंगापुर के मज़बूत डिफेंस को पार करते हुए 7-0 से आसान जीत दर्ज की और लगातार पांचवीं जीत हासिल की। कप्तान सलीमा टेटे (17′) ने स्कोरिंग की शुरुआत की, जिसके बाद सुनीलिता टोप्पो (22′, 24′) ने पेनल्टी कॉर्नर से दो गोल किए। लालरेम्सियामी हमारज़ोटे (26′), रुतुजा पिसल (29′), निक्की प्रधान (35′) और दीपिका सहरावत (55′) ने बाकी गोल किए।

एशियन गेम्स 2026 हॉकी पूल बी में टॉप पर रहने के बाद, भारत – जो हांगझोउ 2023 में ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता था – अब बुधवार को सेमीफ़ाइनल में रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया का सामना करेगा। कोरियाई टीम ने दिन में पहले मलेशिया को 2-1 से हराकर पूल ए में दूसरा स्थान हासिल किया। दूसरा सेमीफ़ाइनल पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना और जापान के बीच खेला जाएगा।

पूल स्टेज में भारत का दबदबा रहा और उन्होंने उज़्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, जापान, थाईलैंड और सिंगापुर के खिलाफ़ जीत के साथ 63 का शानदार गोल अंतर हासिल किया। उनका सबसे कड़ा पूल मैच मेज़बान जापान के खिलाफ़ था, जो कड़े मुकाबले के बाद 3-1 की जीत के साथ समाप्त हुआ।

भारत ने शुरुआत से ही बॉल पर कब्ज़ा और मैदान पर दबदबा बनाए रखा और पहले ही मिनट में अपने 27 पेनल्टी कॉर्नर में से पहला हासिल किया, जब लालरेम्सियामी की हिट सिंगापुर के एक डिफेंडर के पैर से टकराई। हालांकि, दीपिका का ड्रैग-फ़्लिक डिफ़्लेक्ट होकर दूर चला गया। भारत ने दबाव बनाना जारी रखा और सफल वीडियो रेफरल के बाद दूसरे मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन सिंगापुर का डिफेंस मज़बूती से डटा रहा।

सिंगापुर की टीम ने बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के साथ डिफेंस किया और गोलकीपर फेलिसा लाई को हराना मुश्किल साबित हुआ। भारत मौके बनाता रहा; आठवें मिनट में इशिका चौधरी ने कप्तान सलीमा टेटे के साथ अच्छा तालमेल बिठाया, लेकिन समय पर हुए इंटरसेप्शन ने भारतीय कप्तान को गोल करने से रोक दिया।

आखिरकार दूसरे क्वार्टर के दूसरे मिनट में दबाव का असर दिखा। क्रॉस पर नवनीत कौर के पहले प्रयास को रोक दिया गया, लेकिन रिबाउंड सलीमा टेटे के पास आया, जिन्होंने गैप ढूंढकर 17वें मिनट में भारत को 1-0 से आगे कर दिया। भारत ने तेज़ी से मोमेंटम बनाया। 22वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर पर गोल के सामने अफरा-तफरी मची, जिसमें सुनेलिता ने करीब से फिनिशिंग टच देकर बढ़त को दोगुना कर दिया।

दो मिनट बाद, सुनेलिता ने फिर गोल किया; उन्होंने नियर पोस्ट की ओर तेज़ी से दौड़ते हुए दीपिका के पेनल्टी कॉर्नर फ्लिक को डिफ्लेक्ट किया। इसके बाद भारत ने 26वें मिनट में स्कोर 4-0 कर दिया, जब दीपिका के फ्लिक ने लालरेम्सियामी की स्टिक से डिफ्लेक्ट होकर नेट में जगह बनाई। तीन मिनट बाद, डिफेंस की चूक से रुतुजा को मौका मिला और उन्होंने शांति से गोलकीपर के ऊपर से गेंद को उछालकर स्कोर 5-0 कर दिया। बिना किसी गोल वाले शुरुआती क्वार्टर के बाद, भारत ने दूसरे क्वार्टर में पांच गोल किए और हाफ-टाइम तक मज़बूत बढ़त बना ली।

भारत ने 35वें मिनट में छठा गोल किया। लगातार मिले पेनल्टी कॉर्नर को ठीक से नहीं रोका जा सका, लेकिन बलजीत ने दूसरे प्रयास में गेंद को संभाला और हमले को जारी रखा।

इसके बाद गोल के सामने हुई अफरा-तफरी का अंत निक्की प्रधान द्वारा गेंद को लाइन के पार धकेलने के साथ हुआ।

सिंगापुर ने अपना डिफेंस मज़बूत बनाए रखा और तीसरे क्वार्टर में भी भारत को परेशान करना जारी रखा। लालरेम्सियामी 40वें और 42वें मिनट में गोल के करीब पहुंचीं, लेकिन गोलकीपर ने दोनों प्रयासों को नाकाम कर दिया।

आखिरी क्वार्टर में भी सिंगापुर का डिफेंस मज़बूती से डटा रहा और शुरुआती 10 मिनट तक भारत को कोई गोल नहीं करने दिया। दीपिका को एक और पेनल्टी कॉर्नर से गोल करने का मौका मिला, लेकिन हवा में किए गए उनके शॉट को गोलकीपर ने रोक दिया।

आखिरकार, 55वें मिनट में भारत को अपना सातवां गोल मिला। दीपिका ने पेनल्टी कॉर्नर पर कोई गलती नहीं की और सटीक फ़्लिक से गोल के कोने में गेंद पहुंचाकर स्कोर 7-0 कर दिया। एक मिनट बाद दीपिका को पेनल्टी कॉर्नर से एक और मौका मिला, लेकिन वह अपना स्कोर नहीं बढ़ा सकीं।

इसके बाद सिंगापुर को मैच का सबसे अच्छा मौका मिला, जब बॉल मिलने के बाद कियान शियाओ क्वेक भारत की गोलकीपर बिचू देवी के आमने-सामने थीं, लेकिन उनका शॉट गोल पोस्ट से बाहर चला गया। आइची-नागोया 2026 में हॉकी टूर्नामेंट 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ायर का काम भी करेगा, जिसमें गोल्ड मेडल जीतने वाली टीमों को आगामी समर गेम्स में सीधे जगह मिलेगी।

Asian Games में इन 3 मुक्केबाजों ने किए मेडल पक्के, खोलेंगे खाता

भारत के सचिन सिवाच पुरुष 60 किग्रा क्वार्टरफाइनल में जापान के विश्व कांस्य पदक विजेता शुनसुके कितामोटो से 0-5 से हारकर बाहर हो गए जबकि परवीन हुड्डा,अंकुश पंघाल और नरेंद्र बेरवाल ने सेमीफाइनल में पहुंचकर देश के लिए तीन पदक पक्के कर दिए हैं।

परवीन ने रविवार को एशियाई खेलों में महिलाओं के 65 किग्रा भार वर्ग की स्पर्धा के क्वार्टरफाइनल में उज्बेकिस्तान की नवबखोर खमिदोवा को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली है जबकि नरेंद्र बेरवाल ने पुरुष 90 किग्रा क्वार्टरफाइनल में थाईलैंड के अदथापोंग सेंगतेप को रेफरी स्टॉपेज के जरिए पहले राउंड में हराकर अपना पदक पक्का कर लिया।

आज परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल में नवबखोर खमिदोवा पर शानदार 5-0 से जीत हासिल करके एशियन गेम्स में अपनी पिछली निराशा को पीछे छोड़ कर अपना पदक पक्का कर लिया। डोपिंग उल्लंघन के कारण परवीन का 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स का कांस्य पदक छीन लिया गया था, लेकिन उन्होंने एक बार फिर अपने लिए पदक हासिल कर लिया है। खमिदोवा की एकमात्र उम्मीद इस मुक़ाबले को ज़बरदस्त टक्कर वाले मुक़ाबले में बदलने की थी और वह तेज़ी से आगे बढ़ीं, लेकिन परवीन ने एक बार फिर दूरी बनाए रखी और फिर तेजी से हमला करते हुए कुछ बॉडी शॉट्स और चेहरे पर जैब्स मारे, और फिर पीछे हट गईं।

उज्बेकिस्तान की मुक्केबाज ने अपनी रणनीति बदली और कुछ काउंटर-पंच मारने के लिए पीछे रहीं, लेकिन जब परवीन ने खुद हमला किया तो उनकी स्पीड और पहुंच उनके काम आई और उन्होंने आसानी से कुछ हिट्स किए। अंत में काफ़ी हलचल रही, लेकिन परवीन ने मेडल जीतने के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और परवीन 5-0 से जीतीं और सेमीफाइनल में पहुँच गईं।

फाइनल में पहुंचना परवीन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि संभावना है कि उनका मुकाबला चीन की ली शू से होगा जिन्होंने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन कजाकिस्तान की आइदा अबिकेयेवा को क्वार्टरफाइनल में हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया है और अब सेमीफाइनल में परवीन से भिड़ेंगी।

इससे पहले वहीं शानदार फॉर्म में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर एशियाई खेलों में भारत के लिए पहला बॉक्सिंग मेडल पक्का कर लिया। एशियाई खेलों में अपना पहला मुकाबला खेल रहे हरियाणा के 21 वर्षीय बॉक्सर ने क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के नेक्रुज़ सलीमोव को 5-0 से हराकर परिपक्व और नियंत्रित खेल दिखाया।अंकुश ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी; उन्होंने तेज़ फुटवर्क के साथ सटीक सीधे पंच और सही समय पर काउंटर-पंच का इस्तेमाल किया। उन्होंने मुकाबले की दूरी को अपने हिसाब से तय किया और सलीमोव को अपनी लय में नहीं आने दिया।

पहले दो राउंड में स्पष्ट बढ़त बनाने के बाद, अंकुश ने आखिरी राउंड में भी शानदार संयम दिखाया। जल्दबाजी में उलझने के बजाय, उन्होंने समझदारी से मुकाबला खेला, अपने प्रतिद्वंद्वी को दूर रखा और अपनी बढ़त को बचाए रखते हुए सर्वसम्मत निर्णय से जीत हासिल की। इस जीत से अंकुश का कम से कम कांस्य पदक पक्का हो गया है और इससे आइची-नागोया में भारत के बॉक्सिंग अभियान को शुरुआती बढ़त मिली है।

यह युवा बॉक्सर के लिए हाल के शानदार सफर में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अंकुश 80 किग्रा वर्ग में कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीतकर जापान पहुंचे थे और अब उन्होंने उसी आत्मविश्वास को एशियाई मंच पर भी बरकरार रखा है। उन्होंने राउंड ऑफ़ 16 में बहरीन के हम्सा वोगेल पर 5-0 की शानदार जीत के साथ एशियाई खेलों में अपने अभियान की शुरुआत की थी। प्रतियोगिता में दो मुकाबले खेलने के बाद भी अंकुश ने अभी तक एक भी राउंड नहीं गंवाया है, जो उनके अभियान में निरंतरता और नियंत्रण को दर्शाता है।

नरेंद्र बेरवाल ने पुरुष 90 किग्रा क्वार्टरफाइनल में थाईलैंड के अदथापोंग सेंगतेप को रेफरी स्टॉपेज के जरिए पहले राउंड में हराकर अपना पदक पक्का कर लिया। नरेंद्र ने शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। अदथापोंग को दो बार स्टैंडिंग काउंट मिला और तीसरी बार काउंट मिलने के बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया। मुकाबला दो मिनट से भी कम समय में खत्म हो गया। इसके साथ ही नरेंद्र, अंकुश पंघाल और परवीन हुड्डा के साथ भारत के लिए दिन का तीसरा बॉक्सिंग पदक पक्का करने वाले मुक्केबाज बन गए।

Asian Games में खिताबी मुकाबला हारने के बाद अनाहत और अभय को मिला सिल्वर मेडल

भारतीय स्क्वाश खिलाड़ियों अनाहत सिंह और अभय सिंह को यहां रविवार को एशियाई खेलों के फाइनल में अपने-अपने मलेशियाई प्रतिद्वंद्वियों से हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अभय पुरुष एकल फाइनल में ईन यो एनजी के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करने में नाकाम रहे और सीधे गेम में 9-11, 5-11, 5-11 से हार गए।

अट्ठारह वर्षीय अनाहत को भी महिला एकल फाइनल में मलेशिया की शिवासांगरी सुब्रमण्यम ने आसानी से हराया। दुनिया की 17वें नंबर की भारतीय खिलाड़ी को पांचवीं रैंकिंग वाली शिवासांगरी के खिलाफ 4-11, 4-11, 7-11 से शिकस्त मिली।

यो और शिवासांगरी दोनों ने 2028 में लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदार्पण कर रही स्क्वाश प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई करने वाले शुरुआती दो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा। दोनों ने अपने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक का भी सफलतापूर्वक बचाव किया। विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली पहली भारतीय अनाहत शनिवार को जापान की दुनिया की छठे नंबर की खिलाड़ी सातोमी वातानाबे के खिलाफ सेमीफाइनल में की गई वापसी को दोहरा नहीं सकीं।

अनाहत-सातोमी सेमीफाइनल को करीब से देखने वाली शिवासांगरी स्पष्ट रणनीति के साथ उतरीं और उसे पूरी तरह से अमल में भी लाईं। मलेशियाई खिलाड़ी ने अनाहत को लगातार विनर्स लगाने का मौका नहीं दिया और लगातार आक्रमण के जरिए उन पर दबाव बनाए रखा।

हालांकि अनाहत के लिए यह अभियान यादगार रहा। उन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में महिला एकल फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया।

इससे पहले 26वीं रैंकिंग वाले अभय भी दुनिया के 18वें नंबर के यो को कड़ी चुनौती नहीं दे सके। यो ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। यह अभय की मलेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ आठवीं हार है।भारत को टीम स्पर्धाओं में भी पदक जीतने की उम्मीद है। पुरुष टीम मौजूदा चैंपियन के रूप में प्रतियोगिता में उतरेगी।

Asian Games में भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीम ने ईरान को हराकर जीता गोल्ड मेडल

भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीम ने शनिवार को यह साबित कर दिया कि ईरान भले ही इस खेल में विश्व की दूसरी बेहतरीन टीम हो लेकिन भारत को वह सिर्फ टक्कर ही दे सकती है। एशियाई खेलों में पहले कड़े मुकाबले में जबरदस्त वापसी करते हुए महिलाओं ने दिल थाम देने वाले मुकाबले में ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। वहीं भारतीय पुरुष टीम ने 40-34 के अंतर से ईरान पर खिताबी जीत पाई।

भारतीय पुरुष टीम और ईरान पुरुष टीम के बीच में पहले हाफ में कांटे का मुकाबला चला। पहले हाफ के अंत में बढ़त ईरान के पास थी लेकिन भारतीय टीम ने जबरदस्त आक्रमण और रक्षात्मक खेल दिखाकर ईरान को पीछे ढकेल दिया। अंतिम 3 मिनट में मैच औपचारिकता बचा हुआ था लेकिन कई बार रिव्यू लिए गए क्योंकि ईरान बहुत सशक्त टीम है।

पुरुषों का फाइनल तनावपूर्ण रहा जिसमें एक समय स्कोर 20-20 से बराबर था, लेकिन भारत ने बढ़त हासिल करने में सफलता पाई और एक और स्वर्ण सुरक्षित किया।

भारतीय पुरुषों ने 2018 जकार्ता खेलों में अपना दबदबा खत्म होने से पहले लगातार सात स्वर्ण पदक जीते थे जिसमें ईरान चैंपियन बना था और भारत चौथे स्थान पर रहा था। भारत ने 2023 हांग्झोउ खेलों में वापसी करते हुए खिताब फिर हासिल किया।एशियाई खेलों में कबड्डी में यह भारत का कुल मिलाकर नौवां स्वर्ण पदक था।

वहीं महिला टीम ने ईरान को शनिवार को फाइनल में 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।भारत ने हाफ टाइम तक 22-16 से बढत बना ली थी लेकिन दूसरे हाफ में ईरान ने 18-15 से जीत दर्ज की लेकिन भारत ने कुल स्कोर के आधार पर पीला तमगा हासिल किया।

इस जीत के बाद भारतीय टीम ने मैदान का चक्कर लगाते हुए ‘वंदे मातरम’ गीत गाया।भारत की महिला कबड्डी टीम ने जकार्ता में 2018 में हुए खेलों के अलावा हर एशियाई खेल में स्वर्ण पदक जीता है। जकार्ता में उसे फाइनल में ईरान ने हराया था।

भारतीय महिला निशानेबाजों ने किया कमाल, 50 मीटर राइफल में जीता सिल्वर

Shooting Competition

भारत की तिलोत्तमा सेन, विदर्सा विनोद और आशी चौकसी की तिकड़ी ने एशियाई खेलों में शनिवार को महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस में रजत पदक जीता और तिलोत्तमा व्यक्तिगत स्पर्धा में चौथे स्थान पर रही।भारतीय टीम ने 1763 अंक बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया। चीन ने 1773 अंक लेकर खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाखस्तान को कांस्य पदक मिला।

व्यक्तिगत फाइनल में तिलोत्तमा ने अहम मौके पर 9.4 स्कोर किया जिससे पदक करीब से हाथ से निकल गया। विदर्सा 327.4 अंक लेकर पांचवें स्थान पर रही।तिलोत्तमा फाइनल में पहले 25 शॉट के बाद आगे चल रही थी और 30 शॉट के बाद तीसरे स्थान पर खिसक गई। उनका स्कोर 337.3 रहा।

चीन की जिआयु हान ने 359. 0 के एशियाई चैम्पियनशिप रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। चीन की ही लियुआन झांग (358 . 8) को रजत और दक्षिण कोरिया की जियुन किम (348.4) को कांस्य पदक मिला।

फाइनल में नीलिंग पोजिशन के बाद तिलोत्तमा 102.4 अंक लेकर पांचवें और विदर्सा 102.1 अंक के साथ छठे स्थान पर थी। प्रोन में दोनों का प्रदर्शन औसत रहा लेकिन स्टैंडिंग में उन्होंने वापसी की जो पदक दिलाने के लिये काफी नहीं थी।

इससे पहले क्वालीफिकेशन में आशी और तिलोत्तमा शीर्ष तीन में रहे जिन्होंने 395.25 एक्स और 395.23 एक्स स्कोर किया।विदर्सा ने 588 स्कोर करके क्वालीफिकेशन में छठा स्थान हासिल किया।विश्व में 107वीं रैंकिंग पर काबिज तिलोत्तमा नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग में कुल 590 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रही। वहीं आशी ने 585 अंक बनाये।

आशी और तिलोत्तमा ने नीलिंग और प्रोन चरण में 395 स्कोर किया जिसमें आशी ने इनर 10 में 25 और तिलोत्तमा ने 23 निशाने लगाये।तिलोत्तमा ने स्टैंडिंग में बेहतर प्रदर्शन करके 590 स्कोर किया और शीर्ष तीन में पहुंच गई।विदर्सा ने भी फाइनल में जगह बनाई। 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस में निशानेबाज नीलिंग, प्रोन और स्टैंडिंग पोजिशन में निशाने लगाते हैं।

Asian Games में इस भारतीय धावक के कमाल से 44 बाद मैराथन में मिला सिल्वर मेडल

 

सावन बरवाल ने एशियाई खेलों में शनिवार को पुरूषों की मैराथन फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालकर अप्रत्याशित रजत पदक जीता जो इस स्पर्धा 44 साल बाद भारत का पहला पदक है।

भारत ने पिछली बार मैराथन में पदक 1982 के एशियाई खेलों में जीता था।सेना के 28 वर्ष के खिलाड़ी बरवाल ने दो घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में 42 .195 किलोमीटर की मैराथन पूरी की। वह स्वर्ण पदक जीतने वाले जापान के इचिताका यामाशिता से 48 सेकंड पीछे रहे जिन्होंने दो घंटे 10 मिनट 49 सेकंड का समय निकाला। चीन के पेइयू फेंग दो घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

एशियाई खेलों में मैराथन में इससे पहले 1982 में दिल्ली में होसुर कुक्काप्पा सीतारन ने भारत को कांस्य पदक दिलाया था। बरवाल एशियाई खेलों में मैराथन में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय भी बन गए। दिल्ली में 1951 में पहले एशियाई खेलों में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक जीता था।

बरवाल ने 5000 मीटर, 10000 मीटर और हाफ मैराथन दौड़ने के बाद इसी साल मैराथन में पदार्पण किया  अप्रैल में बरवाल ने रॉटरडम में एनएन मैराथन में शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना दो घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। भारत के कार्तिक करकेरा दो घंटे 22 मिनट 41 सेकंड के समय के साथ 19 धावकों में 17वें स्थान पर रहे।

Asian Games गुलवीर ने लंबी दौड़ में जीता सिल्वर तो शॉटपुट में मनप्रीत ने जीता ब्रॉंज

भारत के लंबी दूसरी के धावक गुलवीर सिंह ने एशियाई खेलों के अपने कांस्य को रजत में बदला और पुरूषों की 10000 मीटर दौड़ में 28 मिनट 29.38 सेकंड का समय निकालकर दूसरे स्थान पर रहे। हांगझोउ में पिछले एशियाई खेलों में कांस्य जीतने वाले गुलवीर बहरीन के बिरहानु बालेयू से पीछे रहे जिन्होंने 28 मिनट 27.51 सेकंड में स्वर्ण पदक जीता।

बहरीन के अलबर्ट किप्टो को कांस्य पदक मिला जिन्होंने 28 मिनट 34.18 सेकंड का समय निकाला।गुलवीर ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भी रजत पदक जीता था। भारत की मनप्रीत कौर ने एशियाई खेलों में महिलाओं की शॉटपुट स्पर्धा में 17 . 17 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता। स्वर्ण पदक चीन की सोंग जियायुआन (19.40 मीटर) और रजत झांग लिनरू (18.14मीटर) ने जीता।

36 वर्ष की मनप्रीत का पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2023 एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य था। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 18 . 06 मीटर है जो उन्होंने 2022 में किया था।वह हांगझोउ में 2023 एशियाई खेलों में पांचवें स्थान पर रही थी और ग्लास्गो में पिछले महीने राष्ट्रमंडल खेलों में 17.49 मीटर के प्रयास के साथ चौथे स्थान पर थी। उन्होंने इस साल राष्ट्रीय अंतर प्रांत चैम्पियनशिप जीतकर एशियाई खेलों के लिये क्वालीफाई किया था।