गोल्ड और ओलंपिक क्वालिफिकेशन के बीच खड़ी है चीन की दीवार, देखें H2H रिकॉर्ड

शानदार फॉर्म में चल रही भारतीय टीम एशियाई खेलों के महिला हॉकी फाइनल में गत चैम्पियन चीन के खिलाफ शुक्रवार को उतरेगी तो नजरें 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई करके पुराने कई मलाल मिटाने पर लगी होंगी।

टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रहने के बाद पेरिस ओलंपिक 2024 के लिये क्वालीफाई नहीं कर सकी भारतीय टीम के लिये सबसे बड़ी प्रेरणा लॉस एंजिलिस में दो साल बाद होने वाले खेलों का सीधे टिकट कटाना है। मौजूदा फॉर्म और विश्व कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को देखते हुए यह संभव भी लग रहा है, बस अपेक्षाओं के दबाव से पार पाना होगा।

भारत ने एशियाई खेलों में एकमात्र स्वर्ण 1982 में दिल्ली में जीता था जब महिला हॉकी को पहली बार इन खेलों में शामिल किया गया था।उसके बाद से भारत 1998 और 2018 में फाइनल में पहुंचा लेकिन क्रमश: दक्षिण कोरिया और जापान से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।लेकिन युवा खिलाड़ियों से सजी कोच शोर्ड मारिन की यह टीम लंबे इंतजार को खत्म करने और दमदार प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त देने का माद्दा रखती है।

पिछले साल खराब फॉर्म से जूझती दिखी भारतीय महिला हॉकी टीम के लिये 2026 यादगार रहा है जिसमें एफआईएच नेशंस कप जीतकर प्रो लीग में वापसी की और पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए विश्व कप में पांचवां स्थान हासिल किया जो 1974 के बाद उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

विश्व कप में भारत ने ग्रुप चरण में दुनिया की चौथे नंबर की टीम चीन को 2-2 से ड्रॉ पर रोका था जबकि भारतीय टीम में 11 खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप था। पूरे टूर्नामेंट में भारत एकमात्र मैच सह मेजबान नीदरलैंड से 0-2 से हारा था।

इधर चीन को दूसरे सेमीफाइनल में मेजबान जापान ने निर्धारित 60 मिनट तक गोलरहित बराबरी पर रोका और पेनल्टी शूटआउट में 4 . 2 से जीत दर्ज करके चीन फाइनल में पहुंच सका।

भारत को भी दक्षिण कोरिया से कड़ी चुनौती मिली और 12 पेनल्टी कॉर्नर में से सिर्फ एक पर गोल हो सका। भारत के लिये सेमीफाइनल के 44वें मिनट में इशिका और चार मिनट बाद कप्तान सलीमा टेटे ने गोल किया।

भारत के लिये गोलकीपर सविता और बिछू देवी ने विश्व कप का शानदार फॉर्म जारी रखा है। भारत ने पेनल्टी कॉर्नर और ओपन प्ले में गोल किये हैं हालांकि कोरिया के खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर उतना अच्छा नहीं रहा। दीपिका छह मैचों में 21 गोल कर चुकी है जिनमें से 19 पेनल्टी कॉर्नर पर आये । नवनीत ने दस गोल दागे हैं जिनमें से सात फील्ड गोल हैं।

चीन के लिये झोंग जियाकी ने नौ जबकि चेन यि और झांग यिंग ने सात सात गोल किये हैं।चीन एशियाई खेलों की सबसे कामयाब टीम रही है और 2023 में हांगझोउ खेलों समेत उसने छह खिताब जीते हैं। भारत और चीन के बीच अब तक 28 मुकाबले हुए हैं जिनमें से 12 चीन ने और 11 भारत ने जीते जबकि पांच मैच ड्रॉ रहे।

मैच का समय – दोपहर 3.30 पर

कहां देखें- सोनी सपोर्ट्स नेटवर्क या सोनी लिव पर

Asian Games के रोमांचक सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 4-3 से हराकर किया पदक पक्का

INDvsPAK एशियाड 2026 में भारत ने पाकिस्तान को एक बेहद करीबी मुकाबले में 4-3 से हरा दिया और फाइनल में जगह बना ली। अब भारतीय पुरुष हॉकी टीम स्वर्ण पदक और लॉस एंजलिस ओलंपिक में स्वत प्रवेश पाने से सिर्फ एक कदम दूर है। कुछ सालों में भारत पाकिस्तान के मुकाबले एकतरफा होते थे लेकिन यह मुकाबला अंतिम मिनट तक चला। पहले भारत ने बढ़त बनाई उसके बाद पाकिस्तान ने बराबरी की और अंतिम मिनट में अभिषेक ने गोल दागा।

भारत ने पहले हाफ में तीन गोल करके 3-0 से बढत बना ली थी लेकिन दूसरा हाफ पाकिस्तान के नाम रहा जिसने तीन गोल करके स्कोर 3-3 कर दिया। ऐसा लग रहा था कि मैच पेनल्टी शूटआउट तक जायेगा लेकिन आखिरी सीटी बजने से कुछ सेकंड पहले अभिषेक ने गोल करके भारत को फाइनल में पहुंचाया।

फाइनल शनिवार को खेला जायेगा जिसमें भारत का सामना मलेशिया या कोरिया से होगा।भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह (पांचवां और 13वां मिनट) ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किये जबकि सुखजीत सिंह (23वां) और अभिषेक (60वां) ने फील्ड गोल दागे। पाकिस्तान के लिये कप्तान अबू बकर ने 30वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर पहला गोल किया जबकि शाहिद हन्नान (45वां) और राणा वाहिद (49वां) ने पांच मिनट के भीतर दो गोल दागे।

भारतीय पुरुष और महिला स्क्वॉश टीम ने मैच हारकर भी जीता ब्रॉंज मेडल

भारतीय स्क्वैश टीम को एशियाई खेलों में गुरुवार को सेमीफाइनल मुकाबले में हांगकांग से 1-2 से हरा के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।आज रोमांचक मुकाबले में अनाहत सिंह की हार ने भारत को बैकफुट पर धकेल दिया, लेकिन तन्वी खन्ना ने चौंकाने वाली जीत दर्ज करते हुए भारत को टूर्नामेंट से बनाये रखा। हालांकि, निर्णायक मैच में जोशना चिनप्पा हार गई।

अनाहत सिंह को चान सिन युक से 3-2 (11-9, 11-8, 6-11, 11-13, 10-12) से हार का सामना करना पड़ा, जबकि तन्वी खन्ना ने ली का यी को 3-1 (4-11, 13-11, 11-9, 13-11) से हराकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया। इसके बाद जोशना चिनप्पा निर्णायक मैच में हो त्ज़े लोक से 3-0 (11-4, 11-7, 11-9) से हार गईं।

उल्लेखनीय है कि जोशना चिनप्पा, तन्वी खन्ना और अनाहत सिंह उस भारतीय महिला टीम का भी हिस्सा थीं जिसने हांग्जो 2023 में कांस्य पदक जीता था।    सिन युक चान के खिलाफ अनाहत ने शानदार शुरुआत की और पहले दो गेम जीत लिए। चौथे गेम में वह 10-6 से आगे थीं लेकिन चार मैच प्वाइंट गंवा बैठीं जिससे सिन को जोरदार वापसी का मौका मिल गया।

पांचवें गेम में अनाहत 7-9 से पिछड़ गईं लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर 9-9 कर दिया। इसके बाद सिन ने पहला मैच प्वाइंट हासिल किया। अनाहत ने बैकहैंड ड्रॉप के जरिए इसे बचाया लेकिन संयम बनाए रखने वाली सिन ने एक और मैच प्वाइंट हासिल किया और फिर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

दूसरे मैच में तन्वी को का यी ली के खिलाफ शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ा और वह पहला गेम जल्दी हार गईं। दूसरे गेम में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करते हुए रैलियों को लंबा खींचा और 10-9 पर गेम प्वाइंट हासिल किया। बैकहैंड ड्रॉप के जरिए ली ने स्कोर बराबर कर दिया।

तन्वी ने एक और गेम प्वाइंट गंवाया लेकिन तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर भारत को मुकाबले में बनाए रखा। तीसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी 3-7 से पिछड़ गई थीं लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए स्कोर 9-9 कर दिया। इसके बाद गेम प्वाइंट हासिल कर तन्वी ने ली की एक और गलती का फायदा उठाते हुए गेम अपने नाम कर लिया।

चौथे गेम में तन्वी ने 4-1 की बढ़त बना ली। ली ने 9-7 से बढ़त हासिल कर ली लेकिन तन्वी ने लगातार दो अंक लेकर वापसी की। ली ने गेम प्वाइंट हासिल किया जिसे तन्वी ने बचा लिया और फिर खुद मैच प्वाइंट हासिल कर लिया। पहला मैच प्वाइंट गंवाने के बाद उन्होंने दूसरे मौके को भुनाया और भारत की उम्मीदें बरकरार रखीं।

निर्णायक एकल मुकाबले में जोशना का सामना हो से हुआ। भारतीय खिलाड़ी अपनी प्रतिद्वंद्वी की शारीरिक गति का सामना नहीं कर सकीं और पहले दो गेम गंवाने के बाद तीसरे गेम में छह मैच प्वाइंट से पिछड़ गईं।

पुरुषों के टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल

सेमीफ़ाइनल में मलेशिया से 2-1 से हारने के बाद भारत ने पुरुषों के टीम इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। अभय सिंह को एनजी ईन यो से 3-0 (11-8, 11-8, 11-8) से हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वीर चोटरानी ने संजय जीवा को 3-0 (11-4, 11-8, 11-5) से हराकर मुक़ाबला बराबरी पर ला दिया। इसके बाद फ़ैसले वाले मैच में वेलावन सेंथिलकुमार को अमीशेनराज चंद्रन से 3-1 (10-12, 11-6, 11-8, 11-9) से हार मिली, जिससे भारत का अभियान समाप्त हो गया।

2 गोल से दक्षिण कोरिया को हराकर चक दे गर्ल्स पहुंची एशियाई खेलों के फाइनल में

दक्षिण कोरिया को एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में 2 -0 से हराने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम ने भारतीय दल के लिए एक और पदक पक्का कर लिया है। भारतीय टीम ने इस साल विश्वकप में पांचवा पायदान मिला था, इस लिहाज से उम्मीद रहेगी कि भारतीय महिला हॉकी टीम फाइनल जीतकर ना केवल स्वर्ण पदक लाए बल्कि लॉस एंजलिस ओलंपिक्स में स्वत प्रवेश ले।

यह लम्हा भारतीय महिला हॉकी के लिए खास रहा क्योंकि करीब 8 साल बाद भारतीय हॉकी टीम ने एशियाई खेलों के फाइनल में जगह बनाई थी। साल 2022 के हांगजाऊ में हुए  एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रही थी और क्वालिफायर में जापान से हारकर ओलंपिक कोटा पाने में भी महरूम रह गई थी।

भारत के लिये इशिका ने 44वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किया जबकि चार मिनट बाद कप्तान सलीमा टेटे ने गोल दागा।
पहला हाफ गोलरहित बराबर रहने के बाद भारत ने तीसरे क्वार्टर में बढ़त बनायी। 44वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से यह सफलता मिली। एक वेरिएशन के तहत दीपिका सहरावत ने इंजेक्टर इशिका को गेंद दी, जिन्होंने पहली ही कोशिश में गोलकीपर को छकाते हुए भारत को बढ़त दिला दी। भारत ने चार मिनट बाद अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। 48वें मिनट में कप्तान सलीमा टेटे ने एक लूज़ बॉल पकड़ी और सर्कल में तेज़ी से आगे बढ़ीं, फिर गेंद को सेंटर की ओर भेजा; गेंद कोरियाई डिफेंडर की स्टिक से टकराकर नेट में चली गई। एशियाई खेलों में महिला हॉकी फ़ाइनल में भारत का यह चौथा मौका होगा।

भारत का सामना अब मौजूदा चैम्पियन चीन से होगा जिसने हांगझोउ एशियाई खेल 2023 में उसे सेमीफाइनल में 4-0 से हराया था।चीन ने दूसरे सेमीफाइनल में जापान को पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से मात दी।

भारत और चीन का सामना पिछले महीने नीदरलैंड में एफआईएच विश्व कप के ग्रुप मैच में हुआ था जिसमें भारत ने उसे 2-2 से ड्रॉ पर रोका था। भारतीय टीम विश्व कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन करके पांचवें स्थान पर रही थी जो 1974 के बाद उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने सिर्फ एक बार दिल्ली में 1982 में स्वर्ण पदक जीता था जब पहली बार महिला हॉकी को इन खेलों में शामिल किया गया। पिछली बार भारत ने कांस्य जीता और 2018 में रजत पदक जीता था।

पहलवानी में पहला पदक, सुनील कुमार तकनीकी श्रेष्ठता से जीते कांस्य पदक

भारत के ग्रीको रोमन पहलवान सुनील कुमार ने पुरुषों के 87 किग्रा वर्ग में फिलीपींस के रॉबर्ट कैलम जॉनस्टन को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर कांस्य पदक जीता। इससे पहले भारतीय पहलवान सुनील कुमार ने बुधवार को पुरुषों के 87 किग्रा ग्रीको-रोमन कुश्ती स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में जगह बना ली।

आज खेले गये मुकाबले में भारत के सुनील कुमार ने ताजिकिस्तान के मुहम्मद सुल्तानजोडा को ‘टेक्निकल सुपीरियरिटी’ के आधार पर 9-0 से हराकर पुरुषों के 87 किग्रा ग्रीको-रोमन सेमीफाइनल में जगह बनाई।

सुनील ने अपने प्रतिद्वंद्वी का दाहिने हाथ बांधकर उन्हें पटखनी देते हुए 4-0 से बढत बना ली। रक्षात्मक खेल रहे जॉनस्टन को ‘पार टेरे’ पोजिशन से जमीन पर गिराते हुए सुनील ने स्कोरिंग मूव बनाते हुए पहले ही पीरियड में मुकाबला जीत लिया।

उन्होंने हांगझोउ में 2023 खेलों में भी कांस्य पदक जीतकर ग्रीको रोमन शैली में भारत का पदक का 13 साल का इंतजार खत्म किया था।इससे पहले रविंदर सिंह और सुनील कुमार ने 2010 में ग्वांग्झू खेलों में कांस्य पदक जीता था।

चीन कोरिया जैसे दिग्गजों को हराकर भारतीय पुरुष तीरंदाजों ने जीता गोल्ड मेडल

Archers

चीन और दक्षिण कोरियाई तीरंदाज विश्व के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों की फहरिस्त में आते हैं। लेकिन बुधवार को भारतीय पुरुष तीरंदाजों के खिलाफ सेमीफाइनल में ना दक्षिण कोरिया के तीरंदाज चल पाए और फाइनल में चीन के खिलाफ भारतीय पुरुष तिकड़ी ने लगभग हारा हुआ मैच जीत लिया और भारत को इस एशियाड का दसवां स्वर्ण पदक दिलवा दिया।

कुशल दलाल, साहिल राजेश जाधव और गणेश मणिरत्नम थिरुमुरु ने दक्षिण कोरिया को 5 अंको के बड़े अंतर से सेमीफाइनल में हराया। कुल स्कोर 236-229 का रहा। वहीं चीन के खिलाफ मुकाबला करीबी था। अंतिम सेट में चीन सिर्फ एक शुरुआती गलती जिसमें तीरंदाज ने 8 अंक तक बाण भेजा, इससे यह स्पष्ट हो गया था कि भारत को सिर्फ बढ़त बनाए रखनी है और भारत ने ऐसा ही किया। तीरंदाजों का हर बाण 10 अंक पर गिरा और भारत स्वर्ण पदक जीत गया। चीन ने शुरुआती गलती के बाद सभी बाण 10 अंको के गोलार्ध पर गिराए लेकिन यह जीत के लिए काफी ना था।

भारतीय पुरुष टीम फाइनल में दो अंक से पीछे थी लेकिन उसने अंतिम चरण में शानदार वापसी करते हुए चीन को 238-237 से हराकर रोमांचक जीत दर्ज की। चीन की टीम में जियाहाओ लियाओ, जिनयी लियू और जिंग्यू शी शामिल थे। चीन को रजत पदक मिला।

सेमीफाइनल में भारत ने चोई यून ग्यू, चोई योंगही और किम जोंघो की दक्षिण कोरियाई टीम को 236-229 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।पुरुष फाइनल में भारत नौ अंक के दो निशानों के कारण पहले चरण के बाद 58-60 से पीछे था। हालांकि अगले चरण में भारतीय टीम ने छह परफेक्ट 10 के निशाने लगाए जिससे दूसरे चरण के बाद टीम 118-120 से पीछे थी।

तीसरे चरण के बाद भारत ने अंतर घटाकर एक अंक कर दिया और स्कोर 178-179 हो गया। इसके बाद चीन के जियाहाओ लियाओ ने आठ अंक का निशाना लगाया जबकि भारत ने अंतिम छह शॉट में शानदार प्रदर्शन करते हुए रोमांचक जीत दर्ज की।भारतीय टीम के लिए यह जीत इस कारण भी खास रही क्योंकि स्वर्ण के साथ साथ ओलंपिक कोटा भी टीम ने हासिल कर लिया।

नीरु ने दुबारा गोल्ड किया ट्रैप, पुरुष साथी काईनन के साथ जीता खिताब

TraP Shooting

हरियाणवी शहर जिंद से पहलवान और कुश्ती के खिलाड़ी तो बहुत निकलते हैं लेकिन ट्रैप निशानेबाज नीरू हांडा ने निशानेबाजी जैसा धैर्य और एकाग्रता रखने वाले खेल में भारत को दो स्वर्ण पदक दिलाए। एकल प्रतियोगिता में उन्होंने कल ट्रैप शूटिंग में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था इसके बाद आज काइनन चेनाई के साथ मिलकर ट्रैप मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। यही नहीं नीरू ढांडा, आशीमा अहलावत और मनीषा कीर ने महिलाओं के ट्रैप टीम स्पर्धा में 328 अंकों के साथ रजत पदक जीता।

इसके साथ ही वह गुलवीर सिंह समेत कुछ चुनिंदा भारतीय एथलीटों में शामिल हो गई जिन्होंने अब तक तीन पदक जीते। हालांकि इसमें से 2 स्वर्ण पदक है तो नीरू इस एशियाड की सबसे सफल एथलीट कही जा सकती है। ट्रैप शूटिंग इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली इतिहास की पहली भारतीय महिला नीरू ने कल एकल प्रतियोगिता में बारिश के बीच गजब का संयम बनाकर कुल 30 अंको में से 28 अंक अर्जित किए थे।

आज भी उन्होंने वहीं से शुरुआत की जहां से उन्होंने कल खेल छोड़ा था।नीरू हांडा और काइनन चेनाई  ने चौथे स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। उन्होंने फाइनल में 34 का स्कोर बनाया। कतर के मोहम्मद अल रुमैही और रे बासिल ने 32 के स्कोर के साथ रजत पदक जीता।

भारतीय जोड़ी ने पहले दो राउंड में 46 और 46 का स्कोर बनाया और कुल मिलाकर 46, 46, 44 अंक बनाकर 136 का कुल स्कोर हासिल किया।
दोनों भारतीयों में काइनन ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल 73 अंक हासिल किए।इसमें से नीरु के अकेले 63 अंक थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई खेलों में ट्रैप इवेंट में व्यक्तिगत और मिश्रित गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने पर नीरू ढांडा को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने उनके बेहतरीन निशाने और संयम की सराहना की और कहा कि उनकी इस उपलब्धि से देश को बहुत गर्व हुआ है।श्री मोदी ने भरोसा जताया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि और भी कई युवा खिलाड़ियों को शूटिंग (निशानेबाजी) अपनाने और सर्वोच्च सम्मान हासिल करने की कोशिश करने के लिए प्रेरित करेगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर लिखा, “नीरू ढांडा ने भारत को जश्न मनाने का एक ऐतिहासिक पल दिया है! एशियाई खेलों में ट्रैप इवेंट में व्यक्तिगत और मिश्रित गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने पर उन्हें बधाई। उनके बेहतरीन निशाने और संयम ने देश को बहुत गर्व दिलाया है। यह उपलब्धि और भी कई युवा खिलाड़ियों को शूटिंग अपनाने और सर्वोच्च सम्मान हासिल करने का लक्ष्य रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी। ”

स्वर्णिम तीरंदाज! भारत की महिला और मिश्रित जोड़ी ने जीते एशियाड गोल्ड मेडल

एशियाई खेल 2026 में बुधवार को भारत के खाते में दो स्वर्ण पदक झोली में गिरे। पहले महिला तो फिर मिश्रित जोड़ी ने कंपाउंड तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतकर भारत की अंक तालिका सुधारी।

पहले भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए स्वर्ण पदक जीता।आज भारत की ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप और चिकिता तनिपार्थी ने महिला कंपाउंड टीम फ़ाइनल में चीन को 238-234 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया और अपना एशियाई खेल का खिताब बरकरार रखा।

भारतीय टीम ने आधे समय तक 119-116 की बढ़त बना रखी थी और दूसरे हाफ में चीन की चुनौती का सामना करते हुए जीत पक्की की। 238 अंक का स्कोर दक्षिण कोरिया द्वारा इंचियोन में एशियाई खेल 2014 में बनाए गए महिला कंपाउंड टीम वर्ल्ड रिकॉर्ड के बराबर भी था।आइची-नागोया 2026 एशियाई खेलों में यह भारत का सातवां स्वर्ण पदक था।भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने 2023 में हांगझोउ एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। पिछले सत्र में भारत ने तीरंदाजी में पांच स्वर्ण पदक जीते थे।

इसके बाद चिकिता तनीपार्थी और साहिल जाधव की भारत की कंपाउंड मिश्रित तीरंदाजी जोड़ी ने रोमांचक शूट ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता और 2028 ओलंपिक कोटा स्थान हासिल किया।

चिकिता और साहिल ने शानदार संयम का परिचय देते हुए रोमांचक फाइनल में दक्षिण कोरिया की जंगयून पार्क और चोई यून ग्यू को शूट ऑफ के बाद 158-157 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।भारतीय मिश्रित टीम ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराकर स्वर्ण पदक के मुकाबले में प्रवेश किया था।

Asian Games से खाली हाथ लौटी स्टार निशानेबाज मनु भाकर हुई भावुक

Manu Bhakar

दो ओलंपिक मेडल जीत चुकी भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर को एशियाड 2026 से खाली हाथ लौटना पड़ा। ना उनका निशाना 10 मीटर एयर रायफल ना ही 25 मीटर एयर रायफल स्पर्धा में लगा, टीम इवेंट में भी उनको हार का सामना करा पड़ा। ऐसे में यह उनके करियर का बुरा दौर ही कहा जा सकता है।

गौरतलब है कि इस बार मनु भाकर के कोच जसपाल राणा उनके साथ नहीं थे। कुछ ही महीने पहले उनका निधन हो गया था। मनु जब ध्वजवाहक बनकर उद्घघाटन समारोह का हिस्सा थी तो  भी वह भावुक हो उठी थी और अब जब वह बिना पदक के स्वदेश लौट रही है तो भी भावुक हो गई।

मनु के लिए यह एशियाई खेलों का निराशाजनक अभियान रहा। मनु 579 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहीं, जो फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। इससे पहले वह महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भी पदक जीतने में नाकाम रही थीं।भारतीय महिला टीम भी पदक की दौड़ में थी, लेकिन अहम समय पर राही सरनोबत की एक चूक टीम पर भारी पड़ी।

पदक चूकने के बाद राणा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा ,‘‘अगर बीता पूरा सफर याद करूं तो आप एक या दो चीजें याद नहीं रखते। वह सदैव आपकी यादों में रहते हैं। जब कोई व्यक्ति आपके जीवन का अहम हिस्सा हो तो आप भुला नहीं सकते।’’

राणा के कोच रहते मनु ने पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीते थे।तीन एशियाई खेलों में चार स्वर्ण समेत आठ पदक जीत चुके राणा ने दोहा में 2006 में हुए खेलों में तीन स्वर्ण जीते थे।राणा से मिली सबसे बड़ी सलाह के बारे में पूछने पर मनु ने कहा ,‘‘वह हमेशा प्रक्रिया को लेकर बहुत दृढ थे कि आप किसी भी दिन, जिंदगी के किसी भी मोड़ पर, जब भी निशानेबाजी करें, तो आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें और प्रक्रिया का अनुसरण करें।’

क्रिकेट से सॉफ्ट टेनिस की ओर, इत्तेफाक ने कैसे बदला देवास के जय मीणा का सफर

क्रिकेट से सॉफ्ट टेनिस की ओर, इत्तेफाक ने कैसे बदला देवास के जय मीणा का सफर

सॉफ्ट टेनिस में एशियाई खेलों में भारत के पहले पदक विजेता जय मीणा का सफ़र लगभग इत्तेफ़ाक से शुरू हुआ। बचपन में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में ज़्यादा थी और शुरू में वे क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में जाने के बाद, उन्हें एक सॉफ्ट टेनिस कोर्ट दिखा। वहाँ उनकी उत्सुकता उन्हें पहले खिलाड़ियों को देखने और फिर बॉल बॉय के तौर पर मदद करने की ओर ले गई।

धीरे-धीरे, उन्होंने खुद यह खेल खेलना शुरू किया और स्कूल व ज़िला स्तर की प्रतियोगिताओं से आगे बढ़कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे। 14 साल की उम्र तक, वे सॉफ्ट टेनिस के गढ़ माने जाने वाले जापान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुक़ाबला कर रहे थे।

इसके बाद, 2022 में गुजरात में हुए 36वें नेशनल गेम्स में पुरुषों के सिंगल्स इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर जय ने भारत के प्रमुख सॉफ्ट टेनिस खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई। उन्होंने पुरुषों की टीम और डबल्स इवेंट में मध्य प्रदेश के लिए मेडल जीतने वाले प्रदर्शन में भी योगदान दिया। 2025 तक, पुरुषों के सिंगल्स में नेशनल चैंपियन बनकर उन्होंने अपनी काबिलियत को और मज़बूत किया।

हांगझोउ में हुए 2022 एशियन गेम्स में भी उनकी अंतरराष्ट्रीय सफलता का सिलसिला जारी रहा, जहाँ वे पुरुषों के सिंगल्स इवेंट के क्वार्टर-फ़ाइनल तक पहुँचे और पुरुषों की टीम इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

2024 में, आध्या तिवारी के साथ जोड़ी बनाकर जय ने वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर भारत के लिए पहला मेडल हासिल करने का इतिहास रचा।

उन्होंने 2025 में एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की; वे पुरुषों के सिंगल्स के सेमीफ़ाइनल तक पहुँचे और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने।

जय ने इस कॉन्टिनेंटल इवेंट में कुल चार मेडल जीते। आइची-नागोया में उनका यह तीसरा एशियन गेम्स है; इससे पहले वे जकार्ता 2018 और हांगझोउ 2023 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

देवास में स्कूल कोर्ट पर लगभग इत्तेफ़ाक से सॉफ्ट टेनिस की खोज से लेकर वर्ल्ड और एशियन चैंपियनशिप दोनों में ऐतिहासिक मेडल विजेता बनने तक का सफ़र तय करने वाले जय मीणा अब सॉफ्टबॉल में भारत के पहले एशियन गेम्स मेडल विजेता हैं।