
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में चल रही बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में यह पहला मौका है, जब कोई गेम गोल्डन पॉइंट तक पहुंचा है। अशित सूर्या और अमृता प्रमुतेश की भारतीय जोड़ी एमरे सोनमेज़ और यास्मीन बेक्तास से 71 मिनट चले रोमांचक मुकाबले में 21-16, 29-30, 22-24 से हार गयी।पहला गेम आसानी से जीतने के बावजूद, भारतीय जोड़ी दूसरा गेम गोल्डन पॉइंट में हार गयी और निर्णायक गेम में मैच अपने नाम नहीं कर सकी।
क्या होता है गोल्डन प्वाइंट?
इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में यह पहला मौका है, जब कोई गेम गोल्डन पॉइंट तक पहुंचा है। दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी तुर्की की जोड़ी को कड़ी टक्कर दे रही थी और दोनों जोड़ियां बारी-बारी से पॉइंट जीत रही थीं। जब कोई भी जोड़ी गेम जीतने के लिए जरूरी दो पॉइंट की बढ़त नहीं बना पायी, तो गोल्डन पॉइंट का नियम लागू हुआ। गोल्डन पॉइंट तुरंत उस गेम के विजेता (30-29) का फैसला करता है, और दो पॉइंट की बढ़त वाले सामान्य नियम को दरकिनार कर देता है।
तुर्की की जोड़ी गोल्डन पॉइंट में सफल रही और दूसरा गेम जीतकर मैच में वापसी की। आखिरकार उन्होंने निर्णायक गेम 24-22 से जीता। गोल्डन पॉइंट का एक मशहूर उदाहरण है ऑल इंग्लैंड 2021 फ़ाइनल में विक्टर एक्सेलसन के ख़िलाफ़ ली जी जिया की जीत। उन्होंने पहला गेम 30-29 से जीता और फिर निर्णायक गेम 21-9 से जीतकर खिताब अपने नाम किया था।
दो टीमों के हटने के बाद रिज़र्व लिस्ट से इन नये खिलाड़ियों को आख़िरी समय में एंट्री मिली थी। जब उन्हें इस कन्फर्मेशन के बारे में पता चला, तो वे एक स्टेट चैंपियनशिप खेल रहे थे। अशित ने कहा, “हम स्टेट चैंपियनशिप खेल रहे थे और अब हम यहां हैं। यह हमारे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।”
BWF World C’ships:
Indian pair Ashith-Amrutha rue missed match points after marathon defeat to Turkish pair. pic.twitter.com/fRwHMrhiQa
— News Arena India (@NewsArenaIndia) August 18, 2026
भारतीय जोड़ी ने कहा, “यह हमारे लिए एक स्प्रिंगबोर्ड (आगे बढ़ने का ज़रिया) का काम करेगा। हमें उम्मीद है कि हम इससे और बेहतर होंगे।”अशित ने कहा, “यह हमारे लिए एक कड़ा मुक़ाबला था। हमने पहला गेम जीता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। लेकिन हम सडन डेथ पॉइंट नहीं जीत पाये।” अमृता ने कहा कि यह अनुभव भविष्य के टूर्नामेंट में उनकी मदद करेगा। उन्होंने कहा, “हम यह सीखेंगे कि जब मौका मिले तो मैच पॉइंट कैसे जीतें। आख़िर तक मैच को खींचने का कोई फ़ायदा नहीं है।”

