अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा (Video)

भारतीय मध्यक्रम बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। अजिंक्य रहाणे लंबे समय से भारतीय टेस्ट टीम से बाहर थे ऐसे में वह कई बार कमेट्री बॉक्स में दिखते थे। वहीं फ्रैंचाइजी क्रिकेट में वह कोलकाता नाईट राइडर्स के कप्तान थे।38 वर्षीय अजिंक्य रहाणे ने पिछले 3 वर्षों से कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है।रहाणे ने आखिरी बार भारत के लिये 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट आफ स्पेन में खेला था।

टेस्ट टीम से बाहर होने के बाद से, रहाणे ने लगातार दो रणजी ट्रॉफ़ी सीजन में मुंबई का नेतृत्व किया है, जिसमें टीम ने 2023-24 में अपना 42वां खिताब जीता, जबकि 2024-25 में उपविजेता रही। वह सैयद मुश्ताक अली (टी20) खिताब जीतने वाली मुंबई टीम का भी हिस्सा थे।

रहाणे ने 2024-25 के रणजी सीज़न में 14 पारियों में 35.92 की औसत से एक अर्धशतक और एक शतक सहित 467 रन बनाए। वह निराशाजनक आईपीएल 2025 के दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे, जहां उनकी टीम 10 टीमों में से आठवें स्थान पर रही। रहाणे ने 14 पारियों में 147.27 के स्ट्राइक रेट से 390 रन बनाए।

अजिंक्य रहाणे ने अपना टेस्ट पदार्पण साल 2013 में किया था। अभी तक वह कुल 85 टेस्ट खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 38.5 की औसत के साथ 5077 रन बनाए हैं, जिसमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल है।साल 2011 में अपने सफेद गेंद करियर का आगाज करने वाले अजिंक्य रहाणे अपना आखिरी टी-20 मैच साल 2016 के टी-20 विश्वकप सेमीफाइनल में खेल चुके थे जहां उनकी धीमी पारी ने टीम इंडिया का वेस्टइँडीज के खिलाफ खासा नुकसान किया था।इसके अलावा उन्होंने आखिरी वनडे 2018 में खेला था।

Commonwealth Games 2026 के शॉट पुट में यह दो एथलीट पहुंचे फाइनल में

Tajinderpal Singh

CommonWealth Games 2026 के शॉट पुट में भारत के टॉप्स के दो एथलीट तजिंदर पाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल शॉट पुट स्पर्धा के फाइनल में पहुंच चुके हैं। तजिंदर पाल सिंह ने क्वालिफाइंग राउंड में 20.14 मीटर दूर शॉट पुट फेंका और उनका यह थ्रो दूसरा सर्वश्रेष्ठ थ्रो रहा। भारत चाहेगा कि फाइनल में भी वह दूसरे स्थान पर रहकर कम से कम सिल्वर मेडल ले पाएं।

समरदीप सिंह गिल शॉट पुट स्पर्धा में तजिंदर पाल सिंह तूर से ज्यादा दूर नहीं थे। उन्होंने 19.95 मीटर दूर शॉट पुट फेंका लेकिन सिर्फ .20 मीटर के अंतर में ही वह पांचवे स्थान पर रहे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतियोगिता किस स्तर की है।

राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी तूर ने दो प्रयासों में ही ग्रुप ए से 20 मीटर का स्वत: क्वालीफिकेशन मार्क हासिल कर लिया। उनका पहला प्रयास 19 . 93 मीटर और दूसरा 20.14 मीटर था।उन्होंने तीसरा प्रयास नहीं किया।ग्रुप बी से गिल का सर्वश्रेष्ठ प्रयास पहला ही था जिसमें उन्होंने 19 . 95 मीटर का थ्रो फेंका । दूसरा थ्रो 19 . 75 मीटर और तीसरा फाउल रहा।

वह 15 खिलाड़ियों में कुल पांचवें स्थान पर रहे। ग्रुप ए में सात और बी में आठ प्रतियोगी थे। 20 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले या सर्वश्रेष्ठ 12 को बृहस्पतिवार को होने वाले फाइनल में जगह मिली।

न्यूजीलैंड के टॉम वाल्श ने 21.03 का थ्रो लगाकर पहला स्थान हासिल किया।तूर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 21.03 मीटर है जबकि उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड 21.77 मीटर का है जो उन्होंने 2023 में बनाया था।पिछले दो एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता तूर दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे हैं। वह 2018 में गोल्ड कोस्ट में आठवें स्थान पर रहे थे जबकि पिछली बार चोट के कारण भाग नहीं लिया था।

Commonwealth Games में भारतीय जिमानेस्टिक्स का निराशा भरा सफर हुआ समाप्त

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Commonwealth Games 2026 से भारत का आठ सदस्यीय कलात्मक जिम्नास्टिक दल खाली हाथ लौटा, जिसमें प्रोतिष्ठा सामंता सातवें स्थान पर रहीं।महिलाओं के वॉल्ट फाइनल में देश का सर्वश्रेष्ठ परिणाम दर्ज किया गया। अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रही सामंता ने 13.025 के स्कोर के साथ महिला वॉल्ट फाइनल के लिए सातवें स्थान पर क्वालीफाई किया और फाइनल में 12.883 के साथ सातवें स्थान पर रहीं। 22 वर्षीय भारतीय जिमनास्ट का प्रदर्शन ग्लासगो 2026 में खेल में भारत का एकमात्र शीर्ष आठ में स्थान था।

भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद प्रणति नायक 12.575 के स्कोर के साथ महिला वॉल्ट फाइनल में चूक गईं।एक ओलंपियन, प्रणति नायक अपने चौथे राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रही थी और वॉल्ट में तीन बार की एशियाई चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता के रूप में ग्लासगो इंटरनेशनल एरेना में पहुंची।

महिलाओं की ऑल-अराउंड क्वालिफिकेशन में, सामंता ने कुल 42.250 अंक हासिल किए और 27वें स्थान पर रहीं, इशिता रेवाले 41.700 अंकों के साथ 28वें स्थान पर रहीं और निश्का अग्रवाल 38.550 अंकों के साथ 34वें स्थान पर रहीं। महिला टीम स्पर्धा में भारत 123.000 अंक अर्जित कर नौवें स्थान पर रहा। भारतीय पुरुष टीम भी टीम प्रतियोगिता में 208.550 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रही।

व्यक्तिगत रूप से, तपन मोहंती 71.700 अंकों के साथ क्वालीफिकेशन में 17वें स्थान पर रहने के बाद पुरुषों के ऑल-अराउंड फ़ाइनल में आगे बढ़े। उन्होंने फाइनल में 70.100 का स्कोर किया और 15वें स्थान पर रहे।

योगेश्वर सिंह ने भी 18वें में 71.400 के साथ फाइनल के लिए क्वालीफाई किया, लेकिन रिजर्व के रूप में और उन्होंने मंगलवार को इवेंट शुरू नहीं किया, जबकि तपेश्वरनाथ दास 61.000 के साथ क्वालिफिकेशन में 27वें स्थान पर रहे।

कलात्मक जिम्नास्टिक 1990 से सभी राष्ट्रमंडल खेलों के संस्करणों का हिस्सा रहा है। भारत ने सीडब्ल्यूजी में खेल के इतिहास में तीन पदक जीते हैं, जिसमें आशीष कुमार ने नई दिल्ली 2010 में पुरुषों की वॉल्ट में रजत और फ्लोर एक्सरसाइज में कांस्य पदक जीता था, इसके बाद दीपा करमाकर ने ग्लासगो 2014 में महिलाओं की वॉल्ट में कांस्य पदक जीता था।

मनु भाकर ने कहा बेहतर प्रदर्शन किया, फैंस ने कहा पाषाण युग से ब्रॉंज जीत रही हो

ओलंपिक के बाद ISSF विश्वकप 2026 में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली मनु भाकर ने कहा कि उन्होंने हर टूर्नामेंट में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि फैंस का मानना है कि वह पाषाण युग से ब्रॉंज मेडल ही जीत रही है। उनके ट्वीट पर बहुत से फैंस यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें सिर्फ यह कहना नहीं बल्कि रजत या स्वर्ण पदक जीतकर दिखाना चाहिए।

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने कहा कि हांगझोउ में हाल ही में समाप्त हुए विश्व कप में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने पर उनकी भावनाएं मिली जुली है।भाकर को भारत की ईशा सिंह ने ही पीछे छोड़ दिया था दिया, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इस स्पर्धा में भारत के दो पदक पक्के किए थे।

भाकर अभी भी 2026 में अपना पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने की तलाश में हैं, जबकि म्यूनिख विश्व कप में सम्राट राणा के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतना उनका अन्य उल्लेखनीय प्रदर्शन है।इस साल की शुरुआत में दिल्ली में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया था, लेकिन ये दोनों स्वर्ण पदक टीम स्पर्धाओं में आए थे।

भाकर ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘एक और कांस्य पदक। इस पदक को लेकर मेरी मिली-जुली भावनाएं हैं। मुझे खुशी है कि मैं अपने प्रदर्शन में सुधार कर पाई, लेकिन साथ ही, मुझे पता है कि मैं इससे भी बेहतर कर सकती थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात से होती है कि मेरी मेहनत रंग ला रही है। सुधार की अभी भी बहुत गुंजाइश है, और यही बात मुझे प्रेरित करती है। एक-एक कदम आगे बढ़ना है।’’

भारोत्तोलन में भारत को मिला एक और पदक, हरजिंदर कौर ने जीता सिल्वर

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Commonwealth Games 2026 में भारत के लिए सबसे ज्यादा गोल भारोत्तोलन से आए हैं। अगर आज भारत के 1 दर्जन गोल अंकतालिका पर गढ़े हुए हैं तो 8 भारोत्तोलन से मेडल आए हैं। ऐसे में भारत के लिए एक और बार पदक का बोझ उठाया गया और 69 किग्रा वर्ग में हरजिंदर कौर ने कुल 227 किलो उठाकर रजत पदक पाया।

SEC आर्माडिलो में खेलते हुए, 29 वर्षीय भारतीय वेटलिफ्टर ने कुल 227 किग्रा (101 किग्रा स्नैच 126 किग्रा क्लीन एंड जर्क) का भार उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार अपना दूसरा पदक हासिल किया।हरजिंदर ने बर्मिंघम 2022 में महिलाओं के 71 किग्रा कैटेगरी में कुल 212 किग्रा (93 किग्रा स्नैच 119 किग्रा क्लीन एंड जर्क) का भार उठाकर कांस्य पदक जीता था।

कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240किग्रा (108किग्रा 132किग्रा) के राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218किग्रा (97किग्रा 121किग्रा) के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

हरजिंदर का स्नैच मुक़ाबला शानदार रहा, जिसमें उन्होंने 95किग्रा, 99किग्रा और 101किग्रा का वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनकी आख़िरी लिफ़्ट कुछ समय के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनी, लेकिन फिर सिमोन्यू ने 104किग्रा और 108किग्रा की सफल लिफ़्ट के साथ उसे तोड़ दिया।

भारतीय खिलाड़ी ने क्लीन एंड जर्क में भी अपना शानदार फ़ॉर्म जारी रखा और 120किग्रा, 123किग्रा और 126किग्रा का वजन उठाकर बढ़त बना ली। उनकी आख़िरी लिफ़्ट भी कुछ समय के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनी, लेकिन सिमोन्यू ने क्लीन एंड जर्क की अपनी पहली कोशिश में 127किग्रा का वजन उठाकर जवाब दिया और आखिरकार स्वणै जीतने के सफर में इस रिकॉर्ड को और बेहतर किया।

Commonwealth Games में 10 हजार मीटर की दौड़ में एतिहासिक सिल्वर मेडल पाया इस एथलीट ने

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Commonwealth Games 2026 में भारतीय एथलीटों ने यह बता दिया है कि भारत को पदक जीतने के लिए अब सिर्फ नीरज चोपड़ा की तरफ देखने की जरूरत नहीं। अन्य एथलीट भी ओलंपिक नहीं तो कम से कम कॉमनवेल्थ गेम्स जीतने की काबिलियत रखते। 

पांचवें दिन धावक गुलवीर सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन कर पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में रजत पदक जीता ।मंगलवार को गुलवीर सिंह ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रच दिया। वे राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए।

मौजूदा एशियाई चैंपियन गुलवीर ने स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में 27:49.78 का समय लिया और ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन (27:48.93) के बाद दूसरे स्थान पर रहे, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुल्लार्की ने 27:50.28 के समय के साथ कांस्य पदक जीता।वहीं दूसरी ओर, टीनएज हाई जम्पर पूजा सिंह अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवें स्थान पर रहीं, जबकि विशाल टीके पुरुषों की 400 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में पहुँच गए।

25-लैप की इस दौड़ के ज़्यादातर हिस्से में लगातार बारिश के बीच दौड़ते हुए, गुलवीर शुरू से ही आगे रहने वाले ग्रुप के साथ बने रहे। उन्होंने 3000 मीटर की दूरी 8:39.2 में पूरी की, पांचवें स्थान पर खिसकने के बावजूद 6000 मीटर तक मुकाबले में बने रहे, और आखिरी लैप का संकेत देने वाली घंटी बजने से पहले तीसरे स्थान पर आ गए। इसके बाद भारत के इस बेहतरीन लंबी दूरी के धावक ने शानदार फ़िनिशिंग की और रजत पदक पक्का किया।

यह 1986 के कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद पहली बार था जब पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में कोई भी अफ़्रीकी एथलीट टॉप तीन में जगह नहीं बना पाया। यह मेडल पिछले दो सालों में गुलवीर की शानदार तरक्की में एक और उपलब्धि है।

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28 वर्षीय भारतीय एथलीट ने 2023 एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, 2024 से कई बार भारतीय 10,000 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा है और उनके नाम 27:00.22 का नेशनल रिकॉर्ड है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने इस इवेंट में वर्ल्ड एथलेटिक्स रैंकिंग के टॉप 10 में भी जगह बनाई थी।गुलवीर ग्लासगो में 5000 मीटर दौड़ में भी हिस्सा लेंगे।

ऊंची कूद में पहला सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट बने सर्वेश कुशारे (Video)

ग्लास्गो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में सर्वेश कुशारे ने ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम कर लिया है। इस टूर्नामेंट में ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

कुशारे ने 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर दूसरा स्थान हासिल किया। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने स्वर्ण पदक जीता। दोनों खिलाड़ी 2.25 मीटर के बाद 2.28 मीटर पार करने में असफल रहे, लेकिन काउंटबैक नियम के आधार पर बेकफोर्ड को विजेता घोषित किया गया। इंग्लैंड के जैक किमानी ने 2.20 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता।अन्य भारतीय खिलाड़ी आदर्श राम 2.15 मीटर की छलांग के साथ पांचवें स्थान पर रहे।

इससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों में ऊंची कूद में भारत का एकमात्र पदक तेजस्विन शंकर ने 2022 बर्मिंघम खेलों में कांस्य पदक के रूप में जीता था लेकिन 31 वर्षीय कुशारे ने रजत पदक जीतकर उस उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया।

तेजस्विन ने भी सोमवार को स्पर्धा में हिस्सा लिया, लेकिन गुरुवार से शुरू होने वाली पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा की तैयारी को देखते हुए उन्होंने 2.05 मीटर के पहले प्रयास में असफल रहने के बाद हटने का फैसला किया। 27 वर्षीय तेजस्विन का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.29 मीटर है और पिछले दो वर्षों में उन्होंने डेकाथलॉन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण व्यक्तिगत ऊंची कूद प्रतियोगिताओं में ज्यादा हिस्सा नहीं लिया है।

FIFA ने चुना विश्वकप का ‘Goal of the tournament’, जानें किस खिलाड़ी ने दागा (Video)

FIFA World Cup

फीफा ने घोषणा की कि 2026 फीफा वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में अर्जेंटीना के खिलाफ केप वर्डे के खिलाड़ी सिडनी लोपेस कैब्राल के शानदार कर्लिंग शॉट को ‘गोल ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया है। 90 मिनट के खेल के बाद मैच 1-1 से बराबरी पर रहा, जिससे मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में चला गया। 2022 वर्ल्ड कप चैंपियन अर्जेंटीना के लिए लिसेंड्रो मार्टिनेज ने बढ़त दिलाई थी, लेकिन बाद में लोपेस कैब्राल ने शानदार अंदाज में गोल करके स्कोर बराबर कर दिया।

103वें मिनट में, केप वर्डे के लेफ्ट-बैक खिलाड़ी ने बाईं ओर गेंद संभाली, एलेक्सिस मैक एलिस्टर को छकाते हुए अंदर की ओर आए और दाएं पैर से एक बेहतरीन कर्ल शॉट मारा, जो एमिलियानो मार्टिनेज की पहुंच से दूर गोल पोस्ट के ऊपरी कोने में जाकर लगा।

लोपेस कैब्राल ने फीफा से कहा, “यह वाकई अविश्वसनीय था। यह बहुत बड़ा सम्मान है और ऐसी पहचान है जिसका हर खिलाड़ी सपना देखता है। मैं उन सभी लोगों का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मेरे गोल को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ गोल चुना।” “अब चुनौती यह है कि ऐसे और गोल करने के लिए मेहनत जारी रखी जाए और सबसे बढ़कर, अपने क्लब और देश को मैच जिताने में मदद की जाए। यह अवॉर्ड मिलना मेरे लिए बहुत खास सम्मान है।”

आखिरकार, क्रिस्टियन रोमेरो के हेडर (जो रास्ते में किसी खिलाड़ी से टकराकर दिशा बदल गया था) की बदौलत अर्जेंटीना ने यह रोमांचक मुकाबला जीत लिया।  उज्बेकिस्तान के एल्डोर शोमुरोदोव और हैती के विल्सन इसिडोर के गोल क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। लोपेस कैब्राल अब मैक्सी रोड्रिगेज, डिएगो फोर्लान, जेम्स रोड्रिगेज, बेंजामिन पावर्ड और रिचार्लिसन जैसे खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्हें यह अवॉर्ड मिला है।

Commonwealth Games भारोत्तोलन में सिर्फ एक दिन में भारत जीता 3 मेडल

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ग्लासगो में खेले जा रहे 2026 में यह साबित हो गया कि भारत भारोत्तोलन में सिर्फ मीराबाई चानू पर निर्भर नहीं है। भारत ने सोमवार को ही भारोत्तोलन में 3 मेडल जीते। भारोत्तोलन के महिला 53 किग्रा वर्ग में एशियाई चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता ज्ञानेश्वरी ने लगातार बनते-बिगड़ते रिकॉर्ड के बीच सोमवार को रजत पदक जीता।

छत्तीसगढ़ के भोंडिया गांव की 23 साल की ज्ञानेश्वरी ने स्नैच में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में 111 किलो समेत कुल 199 किलो वजन उठाया। नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला ने राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड तोड़कर 206 किलो वजन उठाते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 93 किलो और क्लीन एंड जर्क में 113 किलो वजन उठाया।

वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता

वल्लुरी अजय बाबू ने पुरुषों के 79 किग्रा वर्ग के फ़ाइनल में कुल 330 किग्रा (149 किग्रा स्नैच 181 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वज़न उठाकर सिल्वर मेडल जीता। उनका 149 किग्रा का स्नैच कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड था। वल्लुरी अजय बाबू ने 145 किग्रा से शुरुआत की, भारतीय अपने दूसरे प्रयास में 149 किग्रा वजन उठाने में असफल रहे, लेकिन अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने सफलतापूर्वक उतना ही वजन उठा लिया।

अजय बाबू ने अपने पिता वल्लुरी श्रीनिवास राव के नक्शेकदम पर चलते हुए यह उपलब्धि हासिल की; उनके पिता ने भी 2010 में नई दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था। अजय बाबू स्वर्ण पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गए। वह मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद से एक किग्रा पीछे रहे। एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किग्रा (147 184) वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि इंग्लैंड के क्रिस मरे ने 325 किग्रा (148 177) वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

बिंद्यारानी देवी ने जीता कांस्य पदक

भारत की बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में कुल 199 किग्रा वज़न उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया और कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना दूसरा मेडल जीता।बर्मिंघम 2022 में सिल्वर मेडल जीतने वाली बिंद्यारानी ने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा वज़न उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल पक्का किया। यह भारत का भारोत्तोलन में पांचवां पदक है।

कॉमनवेल्थ गेम्स मेडलिस्ट बिंद्यारानी देवी ने स्नैच राउंड में 87 किग्रा के बेस्ट लिफ़्ट के साथ चौथे स्थान पर थीं। उन्होंने 83किग्रा से शुरुआत की, फिर इसे बेहतर करते हुए 85किग्रा और अपने तीसरे प्रयास में 87किग्रा वज़न उठाया। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 112 किग्रा वज़न उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।नाइजीरिया की राफियातु फोलाशाडे लावल ने 229 किग्रा (103 126) वजन उठाकर राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता जबकि कनाडा की एन सोफी टैस्चेरो ने 215 किग्रा (94 121) वजन उठाकर रजत जीता।

गोल्ड मेडल जीतकर शर्मिला धनकड़ ने रचा इतिहास, इस खिलाड़ी को मिला ब्रोंज (Video)

ग्लास्गो में चल रहे Commonwealth games 2026 में भारत की शर्मिला धनकड़ ने इतिहास रचते हुए लंबे समय से चला आ रहा भारत का पदक का सूखा खत्म करते हुए पैरा शूटपूट में स्वर्ण पदक जीत लिया।40 वर्षीय शर्मिला ने 9.81 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो लगाकर स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पैरा एथलेटिक्स पदक के 20 साल के इंतजार को खत्म किया।

इस स्पर्धा में एक और भारतीय खिलाड़ी शिल्पा शायला को विवाद के बाद कांस्य पदक प्रदान किया गया। शिल्पा ने 7.26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया था।शुरुआत में नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी कांस्य पदक की स्थिति में थीं, लेकिन भारतीय दल की आपत्ति और आधिकारिक समीक्षा के बाद उनके एकमात्र वैध प्रयास को फाउल करार दिया गया। इसके बाद चौथे स्थान पर रहीं शिल्पा शायला को कांस्य पदक मिल गया।

नाइजीरिया की ओर से हालांकि इस फैसले के खिलाफ आपत्ति दर्ज किए जाने की संभावना है।पदक में बदलाव की घोषणा के बाद भावुक शिल्पा ने शर्मिला के साथ जश्न मनाया। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में दो पदक हासिल किए।एफ57 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए होता है जिनके निचले अंगों में अक्षमता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत में कमी होती है।