लॉटरी टिकट और लियोनेल मेसी के साथ एक फोटोशूट ने कैसे बदल दी लामिन यमाल की तकदीर?

“जिस बच्चे को कभी खुद लियोनेल मेसी ने अपने हाथों से नहलाया था, आज वही बच्चा मैदान पर मेसी के साम्राज्य को चुनौती देने के लिए तैयार है। यह कहानी सिर्फ फुटबॉल की नहीं है,यह कहानी है गरीबी की मार, माता-पिता के आंसुओं, वफादारी के एक अनोखे वादे और उस किस्मत की… जिसने 5 महीने के एक नवजात को दुनिया का अगला सुपरस्टार चुन लिया था।”

फुटबॉल की दुनिया में जब कोई खिलाड़ी मैदान पर उतरता है, तो वह सिर्फ अपनी टीम के लिए नहीं, बल्कि अपने अतीत, अपने संघर्षों और अपने माता-पिता के आंसुओं के बदले के लिए दौड़ रहा होता है। स्पेन के 19 वर्षीय सनसनी लामिन यमाल (Lamine Yamal) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आज दुनिया उनके पैरों का जादू देख रही है, लेकिन इस जादू के पीछे छुपा है एक बेहद भावुक कर देने वाला अतीत।

माता-पिता का संघर्ष और नाम के पीछे का 'रहस्य'

यमाल का जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता मुनीर नसराउई मोरक्को के रहने वाले हैं और मां शीला एबाना इक्वेटोरियल गिनी की हैं। दोनों बचपन में ही गरीबी के कारण स्पेन के कैटालोनिया में आकर बस गए थे।

यमाल का पूरा नाम ‘लामिन यमाल नसराउई एबाना’ है। दिलचस्प बात यह है कि खेल की दुनिया में वह जिस 'यमाल' नाम का उपयोग करते हैं, वह उनका सरनेम (उपनाम) नहीं, बल्कि उनके नाम का ही हिस्सा है।

नाम के पीछे की भावुक कहानी: स्पैनिश मीडिया के अनुसार, जब यमाल के पिता पाई-पाई के लिए मोहताज थे, तब उनके दो दोस्तों ने उनकी आर्थिक मदद की थी। पिता ने उस तंगी के दिनों में आभार व्यक्त करने के लिए वादा किया था कि वे अपने बेटे का नाम उन दोस्तों के नाम पर रखेंगे।

  • अरबी भाषा में ‘लामिन’ का अर्थ होता है- ‘ईमानदार या भरोसेमंद’।
  • ‘यमाल’ (जमाल) का अर्थ होता है- ‘सुंदरता या लालित्य’।

अपनी जड़ों को नहीं भूले: क्या है '3-0-4' का राज?

यमाल का बचपन बार्सिलोना के एक ऐसे इलाके में बीता जिसे प्रवासियों का गढ़ और 'वर्किंग क्लास' (कामकाजी वर्ग) का इलाका माना जाता है—रोकाफोंडा। यहाँ कदम-कदम पर अभाव थे, लेकिन सपने बड़े थे।

“आज जब यमाल मैदान पर गोल करते हैं, तो अपनी उंगलियों से ‘3-0-4’ का इशारा करते हैं। यह कोई स्टाइलिश पोज़ नहीं है, बल्कि रोकाफोंडा इलाके का पोस्टकोड (08304) है। यमाल दुनिया को बताना चाहते हैं कि वे चाहे जितने बड़े स्टार बन जाएं, अपनी झुग्गी-झोपड़ी और अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलेंगे।”

यमाल अपने माता-पिता के बलिदानों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, “बेहद कम संसाधनों के बावजूद मेरे माता-पिता ने जिस तरह मुझे फुटबॉल खेलने में मदद की, उसका कर्ज मैं जीवन में कभी नहीं चुका पाऊंगा।”

जब 5 महीने के यमाल से टकराई किस्मत: मेसी के साथ वो जादुई मुलाकात

फुटबॉल इतिहास में कुछ संयोग ऐसे होते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। एक तरफ सर्वकालिक महानतम फुटबॉलर लियोनेल मेसी हैं और दूसरी तरफ बार्सिलोना के राइट विंग पर उनके उत्तराधिकारी के रूप में उभर रहे लामिन यमाल। आगामी बड़े मुकाबले में जब दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, तो इतिहास रचेगा। लेकिन इनका रिश्ता आज का नहीं, बल्कि दो दशक पुराना है।

साल 2007 में, जब मेसी महज 20 साल के थे और बार्सिलोना की टीम में अपनी जगह बना रहे थे, तब लामिन यमाल सिर्फ 5 महीने के एक मासूम बच्चे थे।

  • कैसे हुई मुलाकात? यमाल के माता-पिता ने कैटलन अखबार ‘स्पोर्ट’ और अंतर्राष्ट्रीय संस्था ‘यूनिसेफ’ द्वारा आयोजित एक लॉटरी (रैफल) जीती थी। इनाम यह था कि विजेता के बच्चे का फोटोशूट बार्सिलोना के किसी सीनियर खिलाड़ी के साथ होगा।
  • किस्मत का खेल: भाग्यवश, उस दिन लामिन यमाल के परिवार की जोड़ी लियोनेल मेसी के साथ बनी। यह फोटोशूट कैंप नोउ स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में हुआ।

फोटोग्राफर का खुलासा: शर्मीले मेसी और खुशमिजाज यमाल

उस ऐतिहासिक तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर जोन मोनफोर्ट बताते हैं कि मेसी स्वभाव से बेहद शर्मीले और अंतर्मुखी थे। जब उनके सामने अचानक एक छोटा बच्चा लाया गया, तो वह काफी असहज हो गए थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बच्चे को कैसे संभालें। लेकिन यमाल एक खुशमिजाज बच्चा था और जल्द ही मेसी ने भी उसे गोद में ले लिया।

खुद फोटोग्राफर को भी 2024 तक यह नहीं पता था कि वह बच्चा लामिन यमाल था! इस राज से पर्दा तब उठा जब यमाल के पिता ने इंस्टाग्राम पर उस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा—

“दो दिग्गजों की शुरुआत” (The beginning of two legends).

आज लामिन यमाल का इतनी कम उम्र में विश्व स्तर पर चमकना और मेसी का इस उम्र में भी शीर्ष पर बने रहना, फुटबॉल के दो अलग-अलग युगों का मिलन है। यमाल की यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास प्रतिभा है और माता-पिता का आशीर्वाद, तो किस्मत भी आपके सामने घुटने टेक देती है। रोकाफोंडा की गलियों से निकलकर ग्लोबल आइकॉन बनने का यमाल का यह सफर आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

जिसे Messi ने गोद में नहलाया, अब उसी से होगी FIFA World Cup Final की जंग! जानिए 19 साल पुरानी तस्वीर की कहानी

किस्मत कभी-कभी ऐसी कहानियां लिख देती है, जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। लगभग 19 साल पहले Lionel Messi ने एक चैरिटी फोटोशूट के दौरान एक मासूम बच्चे को गोद में उठाकर नहलाया था। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही बच्चा एक दिन FIFA World Cup Final में Messi की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा होगा।

 

अब 39 वर्षीय Lionel Messi और 19 वर्षीय Lamine Yamal विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर आमने-सामने होंगे। एक तरफ इतिहास रचने वाला महान खिलाड़ी, दूसरी तरफ भविष्य का सबसे चमकता सितारा।


 

कैसे हुई Messi और Lamine Yamal की पहली मुलाकात?

 

यह कहानी दिसंबर 2007 की है। उस समय Messi केवल 20 साल के थे और Barcelona की पहली टीम में अपनी जगह मजबूत कर रहे थे। दूसरी ओर Lamine Yama* महज पांच-छह महीने के थे।

 

दरअसल, स्पेन के अखबार Diario Sport और UNICEF ने एक चैरिटी अभियान चलाया था। इसमें कैटालोनिया के परिवारों के लिए एक रैफल (लॉटरी) आयोजित की गई थी। विजेता परिवारों को Barcelona के खिलाड़ियों के साथ अपने बच्चों का फोटोशूट कराने का मौका मिलता था।

 

किस्मत ने Lamine Yamal के परिवार का नाम चुना और Camp Nou के ड्रेसिंग रूम में उनकी मुलाकात Lionel Messi से कराई गई। फोटोशूट के दौरान Messi ने छोटे से Yamal को प्लास्टिक के बेबी बाथटब में गोद में उठाकर नहलाया। यही तस्वीर बाद में 2008 के चैरिटी कैलेंडर का हिस्सा बनी।

 

सालों तक गुम रहीं तस्वीरें, फिर ऐसे हुईं वायरल

 

यह तस्वीरें कई वर्षों तक लोगों की नजरों से दूर रहीं। 2024 में जब Lamine Yamal ने Spain को Euro Cup जिताने में अहम भूमिका निभाई, तब उनके पिता ने Instagram पर पुरानी तस्वीर साझा की और कैप्शन लिखा—”The beginning of two legends.”

 

इसके बाद तस्वीरें पूरी दुनिया में वायरल हो गईं। कई लोगों को लगा कि ये AI या एडिटिंग का कमाल है, लेकिन UNICEF ने खुद पुष्टि की कि तस्वीरें पूरी तरह असली हैं। संगठन ने बताया कि ये फोटो उनके फंडरेजिंग अभियान के दौरान ली गई थीं और फोटोग्राफर Joan Monfort ने इन्हें कैमरे में कैद किया था।

 

फोटोग्राफर ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
 

इन तस्वीरों को खींचने वाले फोटोग्राफर Joan Monfort ने बताया कि Messi उस समय बेहद शर्मीले स्वभाव के थे। जब उन्हें अचानक एक छोटे बच्चे को गोद में लेकर फोटोशूट करने के लिए कहा गया तो शुरुआत में उन्हें समझ ही नहीं आया कि बच्चे को कैसे संभालें।

 

हालांकि कुछ ही देर में उन्होंने खुद को सहज कर लिया और पूरे फोटोशूट को बेहद प्रोफेशनल तरीके से पूरा किया। Monfort के मुताबिक, उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यही बच्चा आगे चलकर विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा युवा सितारा बनेगा।

 

Barcelona से World Cup Final तक का सफर

 

Messi ने Barcelona को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और क्लब की नंबर-10 जर्सी को दुनिया भर में पहचान दिलाई। उनके क्लब छोड़ने के कुछ साल बाद Lamine Yamal ने Barcelona की पहली टीम में जगह बनाई और आज वही नंबर-10 जर्सी पहन रहे हैं।

 

दिलचस्प बात यह भी है कि Lamine Yamal अपने आइडल Neymar Jr. को मानते हैं, लेकिन वह कई बार कह चुके हैं कि Lionel Messi उनके अनुसार फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी हैं।

 

अब World Cup Final में होगी सबसे खास टक्कर

 

अब कहानी वहीं लौट आई है जहां से इसकी शुरुआत हुई थी। जिस बच्चे को कभी Messi ने अपनी बाहों में उठाया था, वही अब World Cup Final में Argentina के सपनों के सामने सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ा है।

 

एक ओर Messi लगातार दूसरा World Cup जीतकर अपने सुनहरे करियर को यादगार विदाई देना चाहेंगे, वहीं दूसरी ओर Lamine Yamal बेहद कम उम्र में विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा खिताब जीतकर नई पीढ़ी के सुपरस्टार के रूप में अपनी पहचान पक्की करना चाहेंगे।

 

यह मुकाबला सिर्फ Argentina और Spain के बीच नहीं होगा, बल्कि एक युग से दूसरे युग तक की विरासत का भी प्रतीक बनेगा। शायद इसी वजह से 19 साल पुरानी वह तस्वीर आज दुनिया की सबसे चर्चित फुटबॉल तस्वीरों में शामिल हो चुकी है।

अर्जेंटीना के आलोचकों का मेस्सी का करारा जवाब, नहीं मिला थाल सजाकर

अर्जेंटीना का यह विश्वकप शानदार रहा है। टीम अविजित रही है और लियोनेल मेस्सी ने 8 गोल कर किसी भी विश्वकप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। लेकिन किसी चीज ने अर्जेंटीना का पीछा नहीं छोड़ा है तो वह है आलोचना।

अर्जेंटीना के खिलाफ FIFA World Cup के प्री-क्वार्टर फाइनल में 3-2 की विवादित हार के बाद मिस्र में रेफरिंग को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सरकारी अधिकारियों, कोच और वैश्विक खेल हस्तियों ने मैच अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्णायक रेफरिंग गलतियों के कारण मिस्र क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने से वंचित रह गया।

विवाद का केंद्र 62वें मिनट में मुस्तफा ज़िको का वह गोल रहा, जिसे वीएआर समीक्षा के बाद बिल्ड-अप में मिस्र के खिलाड़ी द्वारा फाउल मानते हुए रद्द कर दिया गया। इसके अलावा, मैच के अंतिम क्षणों में मोहम्मद सलाह को पेनाल्टी बॉक्स के भीतर गिराये जाने पर भी मिस्र को पेनाल्टी नहीं दी गयी।

यह सिलसिला स्विटजरलैंड के खिलाफ हुए मैच में भी जारी रहा। स्विजटरलैंड के फॉरवर्ड ब्रील एम्बोलो को अर्जेंटीना के खिलाफ विश्व कप क्वार्टर फाइनल मैच के दूसरे हाफ में वीडियो रिव्यू के बाद रेडकार्ड दिखाये जाने के फैसले पर विवाद के कारण पूरे टूर्नामेंट में रैफरियों द्वारा अर्जेंटीना का पक्ष लिये जाने की आलोचना करने वाले और मुखर हो गए।

अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो पेरेडेस को एम्बोलो से टकराने के कारण येलो कार्ड दिखाया गया लेकिन वीडियो रिव्यू में नजर आया कि पेरेडेस से टकराने से पहले ही एम्बोलो गिर रहे थे।लेकिन इन सब आलोचनाओं के बीच मेस्सी का बयान आया है कि उनके लिए किसी ने जीत को थाली में नहीं परोसा।

लियोनेल मेस्सी ने विश्व कप फुटबॉल में अर्जेंटीना की आलोचना करने वालों को संदेश देते हुए कहा कि ‘‘हमें कुछ भी थाली में सजाकर नहीं दिया गया।’’मेस्सी ने कहा कि मैच के अंतिम क्षणों में पिछड़ने के बाद वापसी करने की क्षमता से ही उनकी टीम ने लगातार जीत हासिल की तथा इसमें किसी और चीज का हाथ नहीं है।

मेस्सी ने इंग्लैंड पर जीत के बाद कहा, ‘‘पिछले चार साल में हमने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है फिर चाहे आपको यह पसंद हो या न हो और फिर चाहे आप कुछ भी कहें।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने फिर से खुद को दुनिया की शीर्ष दो टीमों में स्थापित कर लिया है। यह साबित करता है कि हमने जो कुछ भी किया है वह कोई संयोग नहीं है। हमें कुछ भी थाली में सजाकर नहीं दिया गया।’’

मेस्सी ने कहा, ‘‘लगातार दो विश्व कप के फाइनल में पहुंचने की उपलब्धि बहुत कम टीम ने हासिल की हैं और इस टीम ने यह कर दिखाया। अगर हम इंग्लैंड से हार जाते तो लोग तरह-तरह की बातें करने लगते, लेकिन हमने उन्हें मौका ही नहीं दिया।’’

गोल्डन बूट की दौड़ में मेस्सी को मिलेगा एमबाप्पे से आगे निकलने का अंतिम मौका

अर्जेंटीना फीफा विश्वकप के फाइनल में पहुंच चुकी है। खिताबी मुकाबला 20 तारीख को स्पेन से है। लेकिन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फाइनल जीत सकती है या नहीं के सवाल से ज्यादा बड़ा सवाल यह रहेगा कि क्या लियोनेल मेस्सी गोल्डन बूट जीत सकते हैं या नहीं।

लियोनेल मेस्सी के टूर्नामेंट में 8 गोल है। यह विश्वकप उनका सबसे सफलतम आंकड़ा है। लियोनेल मेस्सी सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ एक भी गोल करने में सफल नहीं रहे थे। लेकिन उन्होंने 2 असिस्ट किए जिससे वह एमबाप्पे के बिल्कुल बराबर आकर खड़े हो गए। उनको फाइनल में गोल या असिस्ट करना पड़ेगा। तब जाकर उनके पास गोल्डन बूट आ पाएगा।

अगर वह फाइनल में असिस्ट भी नहीं कर पाते और गोल भी नहीं कर पाते तो फिर गोल़्डन बूट एमबाप्पे के खाते में आ जाएगा क्योंकि एमबाप्पे ने मेस्सी से 2 मैच कम खेले हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के बीच विश्व कप करियर में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड बनाने के लिए भी रोचक जंग चली। मेस्सी ने अभी तक सभी विश्व कप में कुल मिलाकर 21 गोल किए हैं जबकि एमबाप्पे के नाम पर 20 गोल दर्ज हैं।

मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में इन दोनों के बाद नॉर्वे के एर्लिंग हालैंड का नंबर आता है जिन्होंने सात गोल किए हैं लेकिन उनकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है।इसके अलावा इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम और हैरी केन ने भी  छह-छह गोल किए हैं। फ्रांस के औस्मान डेम्बेले ने पांच गोल किए हैं। फाइनल खेलने वाली स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने चार गोल किए हैं। उनका फाइनल में मेस्सी से पार जाना मुश्किल लगता है। ना केवल उनको 5 गोल करने हैं पर मेस्सी को भी एक भी गोल करने से रोकना है।

अति रक्षात्मक खेल पर इंग्लैंड के कोच और कप्तान के विरोधाभासी बयान

Harry Kane

अर्जेंटीना पर एक गोल करने के बाद इंग्लैंड ने रक्षात्मक रवैया अपना लिया। इंग्लैंड ने वह किया जो इस टूर्नामेंट में टीमों ने अर्जेंटीना के खिलाफ किया। मिस्र ने 2-0 की बढ़त के बाद अति रक्षात्मक रवैया अपना लिया जिसके बाद उसको 2-3 की हार देखनी पड़ी। वहीं स्विटजरलैंड ने भी एक -एक की बराबरी के बाद यह ही किया लेकिन अंत में अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना ने 2 गोल कर दिए और स्कोरलाइन 1-3 हो गई।  

इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल ने माना कि बढ़त लेने के बाद रक्षापंक्ति का गोलमुख के आगे खड़े हो जाना गलत नहीं था।ट्यूशेल ने कहा, ‘‘वे हर हेडर पर प्रहार कर रहे थे। वे लगातार क्रॉस पर क्रॉस दे रहे थे इसलिए हमने ‘बैक फाइव’ (रक्षा पंक्ति में पांच खिलाड़ी) वाली रणनीति अपनाई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे गोल के ठीक बाद हमने बहुत सारे क्रॉस और बहुत सारे मौके विरोधी टीम को दे दिए। इसलिए हमने मदद करने की कोशिश की। लेकिन जाहिर है कि जिम्मेदारी कोच की होती है। और अगर चीजें ठीक नहीं होतीं तो यह कहना आसान होता है कि फैसला गलत था।’’

गौरतलब है कि इंग्लैंड 1966 के बाद से एक भी बार फीफा विश्वकप फाइनल में प्रवेश नहीं ले पाई है। ऐसे में यह उसके लिए एक बेहतरीन मौका माना जा रहा था लेकिन अर्जेंटीना के मेस्सी के शानदार असिस्ट के कारण टीम 2 गोल खा बैठी।कप्तान हैरी केन ने अपने कोच से अलग बयान दिया और माना कि सिर्फ रक्षण करना अर्जेंटीना को रोकने के लिए नाकाफी था।

मैच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए हैरी केन ने कहा “मेस्सी अभी भी उच्च कोटि के खेल का प्रदर्शन कर रहा है। मुझे लगा कि खेल के ज़्यादातर हिस्से में, हमने उसके साथ बहुत अच्छा खेला। लेकिन हमेशा की तरह दुनिया के सबसे खतरनाक खिलाड़ियों के साथ, जब उनके पास आखिरी तीसरे हिस्से में बॉल होती है, तो वे जगह बना सकते हैं। और उसने आज फिर ऐसा ही किया। वह ज़ाहिर तौर पर किसी वजह से अब तक के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में से एक है।”

अर्जेंटीना फिर हारा हुआ मैच जीती, 7 मिनट में दागे 2 गोल (Video)

स्टार स्ट्राइकर लियोनल मेस्सी भले ही एक भी गोल दागने में नाकाम रहे लेकिन एन्जो फर्नांडेज और लोटारो मार्टिनेज के एक-एक गोलों की मदद से अर्जेंटीना ने सेमीफाइनल में मुकाबले में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार विश्वकप फाइनल में जगह बना ली। पिछले संस्करण में अर्जेंटीना ने फ्रांस को हराकर दूसरी बार विश्वकप जीता था। इस बार उसके सामने यूरोपीय टीम फ्रांस होगी।

अटलांटा स्टेडियम में बुधवार को खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड, जो 1966 के बाद पहली बार फाइनल में पहुंचने की कोशिश कर रहा है, दूसरे हाफ की शुरुआत में एंथनी गॉर्डन के गोल से बढ़त मिलने के बाद 60 साल का इंतजार खत्म करने के करीब लग रहा था। लेकिन अर्जेंटीना ने मैच में वापसी की कोशिश में आक्रामक रुख अपनाया, पर इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड के शानदार बचावों और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण फिनिशिंग के कारण विश्व चैंपियन टीम बराबरी का गोल करने के लिए संघर्ष करती रही।

लेकिन 85वें मिनट में एन्जो फर्नांडेज के 20 गज की दूरी से किए गए शानदार स्ट्राइक ने अर्जेंटीना को मैच में वापस ला दिया, जिसके बाद स्टॉपेज टाइम के दो मिनट बाद लियोनेल मेसी के क्रॉस पर लोटारो मार्टिनेज ने हेडर से गोल करके अर्जेंटीना को जीत दिला दी ।इस परिणाम के साथ ही तय हो गया है कि अब न्यूर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में फाइनल मुकाबला अर्जेंटीना और यूरोपीय चैंपियन स्पेन के बीच होगा।

पहले हाफ में टीमें एक दूसरे से काफी भिड़ी। पहला गोल दागने की कोशिश में काफी लड़ाईयां हुई। लेकिन अर्जेंटीना ने एक बार फिर सामने वाली टीम के अति रक्षात्मक रवैए का फायदा उठाया जैसे मिस्र और स्विटजरलैंड वाले मैच में देखा गया था।मिस्र के खिलाफ अंतिम 11 मिनट में 3 गोल और स्विटरजलैंड के खिलाफ अतिरिक्त समय में 2 गोल करने वाली अर्जेंटीना ने इस बार भी कुल 7 मिनट में जीत अपने नाम कर ली। अब सबकी नजरे स्पेन बनाम अर्जेंटीना के मैच पर है। अर्जेंटीना ने वापसी की है तो स्पेन ने अब तक सिर्फ एक गोल ही खाया है।

फाइनल तक पहुंची स्पेन ने सिर्फ एक गोल खाया, अजेय महसूस कर रही टीम

स्पेन की फुटबॉल टीम के कोच लुइस डे ला फुएंते ने कहा है कि हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम है और फ्रांस हराकर हम स्वयं को अजेय महसूस कर रहे है। डलास स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए सेमीफाइनल में स्पेन को मिकेल ओयार्जाबल के पहले हाफ में किए गए पेनल्टी गोल और हाफ टाइम के बाद पेड्रो पेरो के दूसरे गोल की बदौलत फ्रांस पर शानदार जीत की।

मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में डे ला फुएंते ने कहा, “हम खुद को अजेय महसूस कर रहे हैं। फ्रांस ने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम का सामना किया। हमने उन्हें हराया है। उन्हें अपनी खिलाड़ियों प्रतिबद्धता, उदारता, एकजुटता और प्रतिभा पर गर्व हैं। उनका खेल अद्भुत रहा। आज का मैच शानदार था।

जो चीज मुश्किल लगती है, यह टीम उसे आसानी से कर दिखाती है।” उन्होंने कहा, “हम जानते थे कि हमें धीरे-धीरे सुधार करना होगा। हम पहला मैच जीतना चाहते थे, लेकिन यह एक प्रक्रिया है। हमारी योजना यही थी कि हम महत्वपूर्ण क्षणों तक सर्वोत्तम स्थिति में पहुंचें। हम बेहतरीन स्थिति में हैं और फुटबॉल के स्तर पर हम अपने चरम पर पहुंच चुके हैं।” उन्होंने कहा, “फिलहाल हम किसी एक को प्राथमिकता नहीं देते। उनकी विशेषताएं अलग-अलग हैं। मैं अर्जेंटीना का सामना करने के लिए उत्साहित हूं क्योंकि मैं लियोनेल स्कालोनी का करीबी दोस्त हूं, लेकिन मुझे इंग्लैंड भी बहुत पसंद है। हम दोनों में से किसी का भी खुले दिल से स्वागत करते हैं।”

स्पेन की रक्षापंक्ति इस टूर्नामेंट की सुर्खियों में से एक है। टीम फाइनल में है और अब तक उसने सिर्फ एक बार गोल खाया है। यानि सेमीफाइनल मिलाकर ज्यादातर मौकों पर क्लीनशीट रखी है। स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन ने ना केवल इस विश्वकप बल्कि पिछले विश्वकप में भी कई मैचों तक स्पेन को गोल खाने से रोका था।

साइमन ने दो विश्वकपों को मिलाकर प्रतिद्वंदी टीम को 519 मिनट तक गोल करने से रोका है। उन्होंने 36 साल पुराने इटनी के वाल्टर जेंगा के 517 मिनट तक गोल बचाने के रिकॉर्ड को पार किया।

गोल ना कर पाने के बाद एमबाप्पे ने मैनेजर को कोसा, खो सकते हैं गोल्डन बूट

फ्रांस का लगातार तीसरा बार FIFA World Cup के फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया। वही टूर्नामेंट में आठ गोल करने वाले कीलियन एमबापे इस मैच में गोल नहीं कर पाये और वह गोल्डन बूट की दौड लियोनेल मेसी (8 गोल) के साथ बराबरी पर है।स्टार फुटबॉल खिलाड़ी एमबापे ने FIFA World Cup 2026 के सेमीफाइनल में मंगलवार को स्पेन से फ्रांस की 2-0 से हार के बाद अपनी टीम मैनेजर दिदिएर डेसचैम्प्स के दृष्टिकोण और रणनीति की आलोचना की।

मैच के बाद एमबापे ने कहा, “मिडफील्ड में हम तीन के मुकाबले दो पर थे और स्पेन के खिलाफ खेलना मुश्किल था। फैबियन और रोड्रि को खेलने के लिए काफी समय मिला। प्रेसिंग में तालमेल की कमी थी। मुझे लगता है कि हमें मैन-टू-मैन प्रेसिंग करनी चाहिए थी और उन्हें हमारे साथ दौड़ने के लिए मजबूर करना चाहिए था।”

उन्होंने कहा, “हमने वो खेल नहीं खेल पाये जो हम खेलना चाहते थे, तकनीकी और रणनीतिक दोनों ही दृष्टि से। जब आप विश्व कप सेमीफाइनल में वो नहीं करते जो आपको करना चाहिए, तो आप जीत नहीं सकते। स्पेन ने उनकी खेल योजना और टीम की सामान्य रणनीति का सम्मान किया। उन्हें गेंद पर नियंत्रण और खेल की गति बनाए रखना पसंद है। हमारी योजना उन्हें आगे से दबाव में खेलने की थी ताकि वे अपनी लय न बना सकें। खेल को नियंत्रित करने में वे हमसे बेहतर हैं। हम ऐसा नहीं कर पाए। तकनीकी रूप से हम बहुत लापरवाह थे। जब हम उन्हें नुकसान पहुंचा सकते थे, तब हम ऐसा नहीं कर पाए।”

उन्होंने कहा, “जब हमने गेंद वापस हासिल की, तब भी हमारे पहले टच अच्छे नहीं थे। इसी वजह से हार मिली। यह बहुत निराशाजनक है। लेकिन अगर हम निष्पक्ष होकर देखें, तो फाइनल में पहुंचने के लिए हमारे पास सभी जरूरी चीजें मौजूद नहीं थीं।”

स्पेन ने 2 गोल दागकर फ्रांस को तीसरी बार विश्वकप फाइनल में जाने से रोका

FIFA World Cup सेमीफाइनल में मंगलवार को स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से हराकर 16 साल बाद वैश्विक फुटबॉल टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। यह 2010 के बाद पहली बार है जब स्पेन FIFA World Cup Final खेलेगा।मिकेल ओयारजाबाल ने पेनल्टी पर गोल कर स्पेन को बढ़त दिलाई, जबकि पेड्रो पोरो ने दूसरा गोल दागकर जीत पक्की कर दी।

अपने 19वें जन्मदिन के एक दिन बाद मैदान में उतरे युवा खिलाड़ी लामिन यामाल का एक गोल बेहद करीबी ऑफसाइड फैसले के कारण रद्द कर दिया गया। यह मौका 58वें मिनट में पेड्रो पोरो और दानी ओल्मो के बेहतरीन तालमेल से स्पेन की बढ़त 2-0 होने के तुरंत बाद आया।

स्पेन को हालांकि शुरुआती बढ़त दिलाने में यामाल की सूझबूझ भरी खेल-समझ ही काफी अहम साबित हुई।स्पेन अब रविवार को न्यू जर्सी के ईस्ट रदरफोर्ड में होने वाले फाइनल में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच बुधवार को अटलांटा में खेले जाने वाले दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से भिड़ेगा।

फीफा रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर काबिज फ्रांस और उसके स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली इतिहास की केवल तीसरी टीम बनने की कोशिश में थे।इस हार के बाद अब फ्रांस शनिवार को फ्लोरिडा के मियामी गार्डन्स में तीसरे स्थान के मुकाबले में उतरेगा।

फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर स्पेन ने लगातार तीसरे साल किसी बड़े टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में फ्रांस को हराया है। यामाल ने 2024 यूरोपीय चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में अपने 17वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले फ्रांस के खिलाफ 2-1 की जीत में गोल किया था। वहीं पिछले वर्ष यूएफा नेशंस लीग में भी स्पेन ने फ्रांस को 5-4 से मात दी थी।

हार के बाद भी हालैंड की टीम का नोर्वे में हुआ जोरदार स्वागत (Video)

Erling Haaland

FIFA World Cup 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर नॉर्वे लौटे अर्लिंग हालैंड और उनके साथियों का सोमवार को राजधानी ओस्लो में हजारों उत्साहित समर्थकों और अधिकारियों ने नायकों जैसा स्वागत किया। नॉर्वे ने अपने इतिहास में पहली बार पुरुषों के विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई, जहां उसने राउंड ऑफ 16 में पांच बार के विजेता ब्राजील को हराया, लेकिन इंग्लैंड से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया। स्टार स्ट्राइकर हालैंड ने नॉर्वे के 28 साल में पहले विश्व कप अभियान में सात गोल करके अपनी वैश्विक प्रसिद्धि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

टीम के सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए फुटेज में खिलाड़ियों और कर्मचारियों को अपने विमान की खिड़कियों के पास इकट्ठा होकर नॉर्वे सैन्य जेट विमानों को देखते हुए दिखाया गया है, जो उन्हें वापस ओस्लो ले जा रहे थे, जहां एक शाही स्वागत समारोह उनका इंतजार कर रहा था।लैंडिंग के बाद जब हालैंड विमान से बाहर निकले तो लोगों में उत्साह का माहौल छा गया क्योंकि वह सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए एक खाली बोतल पकड़े हुए एक कृत्रिम रैकून को ले जा रहे थे।

देश के शाही परिवार के प्रमुख सदस्य हजारों नॉर्वे समर्थकों के साथ अब प्रथागत “वाइकिंग रो” में शामिल हुए, जो टूर्नामेंट के दौरान प्रसिद्ध हुआ था । क्राउन प्रिंस हाकॉन ने उसी तरह ढोल बजाकर इस समारोह की अगुवाई की। इस उत्सव में खुली छत वाली बसों की परेड भी शामिल थी, जिसमें खिलाड़ियों और समर्थकों ने एक-दूसरे को धन्यवाद दिया जो नॉर्वे फुटबॉल इतिहास में दर्ज हो जाएगा।