अर्जेंटीना के लिए विरोधी टीम से पक्षपात, क्वार्टरफाइनल के बाद मुखर हुई आवाज

स्विजटरलैंड के फॉरवर्ड ब्रील एम्बोलो को अर्जेंटीना के खिलाफ विश्व कप क्वार्टर फाइनल मैच के दूसरे हाफ में वीडियो रिव्यू के बाद रेडकार्ड दिखाये जाने के फैसले पर विवाद के कारण यह तो तय है कि इससे पूरे टूर्नामेंट में रैफरियों द्वारा अर्जेंटीना का पक्ष लिये जाने की आलोचना करने वाले और मुखर हो जायेंगे।

स्विटजरलैंड के लिये डैन एनडोये ने 67वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। इसके बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो पेरेडेस को एम्बोलो से टकराने के कारण येलो कार्ड दिखाया गया लेकिन वीडियो रिव्यू में नजर आया कि पेरेडेस से टकराने से पहले ही एम्बोलो गिर रहे थे। एम्बोलो को मैच में पहले येलो कार्ड मिल चुका था जिसकी वजह से उन्हें रेडकार्ड दिया गया।

मैच 1-1 से बराबर होने के बाद स्विटजरलैंड को दस खिलाड़ियों के साथ ही खेलना पड़ा। अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में दो गोल करके उसे 3-1 से हराया।इस विश्व कप में दूसरी बार येलो कार्ड का फैसला बदला गया। नियमों के अनुसार अगर गलत खिलाड़ी को येलो या रेड कार्ड दिखाया जाता है तो वीडियो सहायता रैफरी दखल दे सकता है।

स्विटजरलैंड के कोच मुरात याकिन ने कहा ,‘‘ हमें एक नियम का खामियाजा भुगतना पड़ा जो मेरी राय में पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इस तरह से बाहर होना दुखद है। मुझे नहीं लगता कि हमारे साथ ऐसा होना चाहिये था। मेरी टीम ने पूरी लगन और जुनून के साथ खेला और मुझे उस पर गर्व है।’’

उन्होंने पुर्तगाल के रैफरी जोओ पिन्हेइरो की आलोचना करते हुए कहा ,‘‘ रैफरी ने गलत फैसला लिया। यह सजा लायक गलती नहीं थी। मुझे पता है कि वे अपने रैफरी का बचाव करेंगे लेकिन इस नियम ने आज हमारा खेल बर्बाद कर दिया। यह काफी दर्दनाक है कि हम इस तरह से बाहर हुए।’’

अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने स्वीकार किया कि किस्मत ने उनका साथ दिया क्योंकि स्विटजरलैंड का एक खिलाड़ी बाहर था।स्विस कप्तान ग्रैनिट जाका ने कहा ,‘‘ रेडकार्ड ने मैच का परिणाम बदल दिया। इस फैसले को स्वीकार कर पाना मुश्किल है।’’

इससे पहले अंतिम 16 के दौर में अर्जेंटीना से 2-3 से मिली हार के बाद मिस्र फुटबॉल संघ ने कहा था कि वे खामोश नहीं बैठेंगे। मिस्र के कोच होसाम हसन और कई खिलाड़ियों ने रैफरिंग की आलोचना की थी। मैच में 79वें मिनट में दो गोल से पिछड़ने के बाद अर्जेंटीना ने 13 मिनट के भीतर तीन गोल किये थे।

फीफा के रैफरिंग प्रमुख पीयरलुइगी कोलिना ने बुधवार को कहा था ,‘‘ फीफा विश्व कप मैच अधिकारियों की ईमानदारी पर कोई शक नहीं कर सकता। ऐसी कोई घटना होने पर उनको और उनके परिवार को धमकियां दी जाती हैं जो सही नहीं हैं।’’

अर्जेंटीना Vs इंग्लैंड, दो पुराने दुश्मनों का सेमीफाइनल में मुकाबला

फ्रांस बनाम स्पेन के मैच के नतीजे के बाद सबकी निगाहें इंग्लैंड बनाम अर्जेंटीना के मुकाबले पर जा टिकेंगी। अर्जेंटीना 1962 में ब्राज़ील के बाद से ट्रॉफ़ी बचाने वाली पहली टीम बनने की कोशिश कर रहा है। वहीं इंग्लैंड 1966 में ट्रॉफ़ी उठाने के बाद से खिताबी मुकाबले तक नहीं पहुँचा है।लेकिन दोनों चिर प्रतिद्वंदी एक बार फिर आमने सामने हैं जहां इतिहास ने इन दोनों के बीच बहुत सारे यादगार मुकाबले देखे हैं।

“Hand of God” गोल

अटलांटा में सेमीफ़ाइनल ने वर्ल्ड कप की सबसे लंबे समय तक चलने वाली राइवलरी में से एक को फिर से शुरू कर दिया है। अर्जेंटीना ने 1986 का मशहूर क्वार्टरफाइनल जीता था जिसमें डिएगो माराडोना ने “Hand of God” गोल और गोल ऑफ़ द सेंचुरी बनाया था। इसके बाद 1998 में राउंड ऑफ़ 16 में पेनल्टी पर इंग्लैंड को बाहर कर दिया गया, जब डेविड बेकहम को डिएगो शिमोन को किक आउट करने के लिए बाहर भेज दिया गया था। बेकहम, जिन्हें घर पर हार के लिए काफी दोषी ठहराया गया था, ने 2002 में जब दोनों टीमें अगली बार मिलीं तो पेनल्टी स्पॉट से एकमात्र गोल किया।

अर्जेंटीना का सफर

गत विजेता अर्जेंटीना ने कड़ी परीक्षा पार करके आखिरी चार में जगह बनाई है। लियोनेल स्कालोनी की टीम को Round of 32 में केप वर्डे को हराने के लिए अतिरिक्त समय की ज़रूरत पड़ी, फिर 11 मिनट बाकी रहते दो गोल से पीछे होने के बाद मिस्त्र को हराया। शनिवार को स्विट्जरलैंड पर 3-1 की अतिरिक्त समय जीत में भी ऐसा ही दिखा, जिसमें जूलियन अल्वारेज़ और लुटारो मार्टिनेज ने गोल किए, जब डैन एनडोये ने एलेक्सिस मैक एलिस्टर का पहला गोल कैंसिल कर दिया था।

लियोनेल मेसी इस टूर्नामेंट में स्विट्जरलैंड के खिलाफ पहली बार गोल करने में नाकाम रहे।लेकिन अर्जेंटीना की तरक्की ने उसके आस-पास की टीम के योगदान को भी दिखाया है। सात और खिलाड़ियों ने गोल किए हैं, जिससे साउथ अमेरिकन टीम 2019 कोपा अमेरिका के बाद किसी बड़े टूर्नामेंट में लगातार पांचवें सेमीफाइनल में पहुंची ह।

इंग्लैंड का सफर

इंग्लैंड को भी इसी तरह मुश्किलों से उबरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। थॉमस ट्यूशेल की टीम ने राउंड ऑफ़ 32 में एक गोल से पिछड़ने के बाद DR कांगो को हराया और फिर 10 खिलाड़ियों के साथ आधे घंटे से ज़्यादा समय तक खेलने के बावजूद को-होस्ट मेक्सिको को हरा दिया।

फिर थ्री लायंस ने एंड्रियास श्जेल्डरुप के ओपनर से उबरकर अपने क्वार्टर फ़ाइनल में एक्स्ट्रा टाइम के बाद नॉर्वे को 2-1 से हराया।जूड बेलिंगहैम ने नॉर्वे के ख़िलाफ़ दो गोल किए और टूर्नामेंट में छह गोल करके हैरी केन के साथ इंग्लैंड के लिए जॉइंट टॉप स्कोरर बन गए।

FIFA World Cup 2026: अमिताभ बच्चन ने उठाए ‘अनुचित फैसलों’ पर सवाल, वर्ल्ड कप ने बिगाड़ दिया मेरा रूटीन

FIFA World Cup 2026: अमिताभ बच्चन ने उठाए ‘अनुचित फैसलों’ पर सवाल, वर्ल्ड कप ने बिगाड़ दिया मेरा रूटीन

फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने रोमांचक आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है और इसी बीच बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने टूर्नामेंट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बिग बी ने अपने ब्लॉग में एक लंबी पोस्ट लिखकर फुटबॉल के इस महासंग्राम में हो रहे बड़े बदलावों, चौंकाने वाले नतीजों और कुछ फैसलों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कुछ फैसले ऐसे रहे जिन्हें देखकर हैरानी हुई, लेकिन खेल की यही खूबसूरती है कि परिस्थितियां बदलती रहती हैं और मुकाबला आगे बढ़ता रहता है।

 

बिग बी बोले- वर्ल्ड कप ने बिगाड़ दिया मेरा रूटीन

अमिताभ बच्चन ने हल्के अंदाज में अपनी बात शुरू करते हुए लिखा कि फीफा वर्ल्ड कप की टाइमिंग ने उनकी दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। देर रात होने वाले मुकाबलों के कारण उनका समय का हिसाब बिगड़ गया है।

 

उन्होंने लिखा कि मैच देखते हुए कभी खुशी मिलती है, कभी निराशा होती है और कई बार ऐसे फैसले देखने को मिलते हैं जिन्हें लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने खास तौर पर उन फैसलों का जिक्र किया जिन्हें उन्होंने एक टीम के पक्ष में और दूसरी के खिलाफ अनुचित महसूस किया।

 

बड़े फुटबॉल देशों की हार और नए सितारों का उदय

अमिताभ बच्चन ने कहा कि इस बार वर्ल्ड कप में कई मशहूर फुटबॉल देशों को हार का सामना करना पड़ा, जो काफी चौंकाने वाला है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि जिन टीमों से ज्यादा उम्मीद नहीं थी, उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर अपनी पहचान बनाई।

 

बिग बी के मुताबिक, यही खेल की सबसे बड़ी खासियत है कि नए खिलाड़ी और नई टीमें अचानक दुनिया के सामने अपनी ताकत दिखा देती हैं।

 

IPL से जोड़कर समझाया टीम भावना का महत्व

अमिताभ बच्चन ने फुटबॉल और भारतीय क्रिकेट लीग आईपीएल के बीच एक समानता भी बताई। उन्होंने कहा कि आईपीएल में खिलाड़ी अलग-अलग फ्रेंचाइजी टीमों के लिए खेलते हैं और एक-दूसरे के खिलाफ मुकाबला करते हैं, लेकिन जब वे राष्ट्रीय टीम के लिए मैदान में उतरते हैं तो सभी एक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के लिए खेलना एक अलग तरह के चरित्र और जिम्मेदारी की मांग करता है।

 

17-18 साल के युवा खिलाड़ियों ने बदली तस्वीर

बिग बी ने फीफा वर्ल्ड कप में उभरती युवा प्रतिभाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर वर्ल्ड कप नई प्रतिभाओं और नई रणनीतियों को सामने लाता है।

 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 17 और 18 साल के खिलाड़ी भी अब पूरी दुनिया के सामने अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और खेल की दिशा बदल रहे हैं।

 

समय के साथ बदलती दुनिया पर भी की बात

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में बदलते समय और पीढ़ियों के बदलाव पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि दुनिया लगातार बदल रही है और ऐसी कई चीजें सामने आ रही हैं जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।

 

उनके मुताबिक, तेजी से हो रहे बदलाव नई पीढ़ी के लिए अवसर लेकर आते हैं। युवा इन बदलावों का फायदा उठाते हैं, जबकि पुरानी पीढ़ी इन्हें देखकर हैरान होती है कि ये सब उनके समय में क्यों नहीं हुआ।

 

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नई पीढ़ी इन बदलावों की गवाह बनेगी और यही संतोष की बात है।

 

फीफा वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल में पहुंचा रोमांच

कई रोमांचक और कांटे के मुकाबलों के बाद फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब सेमीफाइनल चरण में पहुंच चुका है। खिताब की दौड़ में फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड और अर्जेंटीना जैसी बड़ी टीमें आमने-सामने हैं।

 

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि कौन सी टीम फाइनल में जगह बनाकर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करने के करीब पहुंचती है।

​पाकिस्तान के आबिद अली के खिलाफ एशिया चैंपियन खिताब की भिड़ंत से पहले संग्राम सिंह ने भारत को गौरवान्वित करने का लिया संकल्प ! कहा तिरंगा लहराएगा

भारतीय कुश्ती के दिग्गज और अजेय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर संग्राम सिंह ने 19 जुलाई को कुआलालंपुर, मलेशिया में पाकिस्तान के आबिद अली के खिलाफ होने वाली अपनी बहुप्रतीक्षित 'एशिया चैंपियन खिताब' की भिड़ंत से पहले पूरा आत्मविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय तिरंगा लहराने के एकमात्र उद्देश्य के साथ रिंग (केज) में उतर रहे हैं।

​इस मुकाबले से जुड़ी आधिकारिक प्री-फाइट प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के 'द ललित' होटल में आयोजित की गई। इस दौरान संग्राम सिंह, पीएमएमए (PMMA) मलेशिया के अध्यक्ष इस्माइल मरज़ुकी बिन, पीएमएमए के सीईओ मोहम्मद हाकिम बिन लुकमान अब्दुल्ला, आयोजन समिति के सदस्य, संग्राम की कोचिंग टीम के प्रतिनिधि और मीडिया कर्मी मौजूद रहे।

​भारत बनाम पाकिस्तान के इस मुकाबले ने कॉम्बैट स्पोर्ट्स (युद्धक खेलों) के प्रशंसकों के बीच पहले से ही भारी उत्साह पैदा कर दिया है, और इस मैच के विजेता को 'एशिया चैंपियन' का ताज पहनाया जाएगा।

​संग्राम सिंह का अब तक का सफर
​दो बार के राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) हेवीवेट कुश्ती चैंपियन और भारत के सबसे सम्मानित पेशेवर पहलवानों में से एक, संग्राम सिंह ने पेशेवर एमएमए (MMA) में कदम रखने के बाद से इतिहास रचा है।
​धमाकेदार शुरुआत: उन्होंने जॉर्जिया में पाकिस्तान के अली रज़ा नासिर को मात्र 90 सेकंड में हराकर अपने सफर की शानदार शुरुआत की थी।

​अजेय रिकॉर्ड: इसके बाद उन्होंने नीदरलैंड में ट्यूनीशिया के हाकिम ट्रैबेल्सी और अर्जेंटीना में फ्रांस के फ्लोरियन कौडियर पर जीत दर्ज की। वर्तमान में उनका पेशेवर एमएमए रिकॉर्ड 3-0 का है और वे अजेय हैं।
​ऐतिहासिक जीत: अर्जेंटीना में मिली उनकी जीत ने उन्हें अर्जेंटीना की धरती पर पेशेवर एमएमए मुकाबला जीतने वाला पहला भारतीय बना दिया।

​रिंग से इतर, संग्राम सिंह युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत 'फिट इंडिया आइकन' के रूप में काम करते हैं। उन्हें आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा 'स्वच्छ भारत और विकसित भारत' अभियानों के लिए ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त किया गया था। उनके इस अंतरराष्ट्रीय एमएमए अभियान को वैश्विक स्तर पर फिटनेस, स्वस्थ जीवन शैली और भारतीय एथलीटों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत फिट इंडिया, युवा मामले और खेल मंत्रालय का भी समर्थन प्राप्त है।

​संग्राम सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा:
“जब भी मैं केज (रिंग) में कदम रखता हूँ, तो मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि 145 करोड़ भारतीयों के लिए लड़ता हूँ। भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला हमेशा खास होता है, चाहे खेल कोई भी हो, और मैं इस मुकाबले से जुड़ी भावनाओं को पूरी तरह समझता हूँ। मैंने अपने प्रतिद्वंद्वी के प्रति पूरे सम्मान और अनुशासन के साथ ट्रेनिंग की है, लेकिन एक बार जब केज बंद हो जाएगा, तो मेरा एकमात्र मिशन यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत का झंडा सबसे ऊपर लहराए। मेरा मानना है कि फिटनेस, समर्पण और मानसिक ताकत किसी भी एथलीट के सबसे बड़े हथियार होते हैं।”

​भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव (IPS) ने कहा:
“संग्राम सिंह उन मूल्यों के प्रतीक हैं जिन्हें भारतीय खेल बढ़ावा देना चाहते हैं—अनुशासन, लचीलापन, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता। एक कुशल पहलवान से एक अजेय पेशेवर एमएमए एथलीट बनने का उनका सफर इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि कड़ी मेहनत से क्या हासिल किया जा सकता है। हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि भारतीय खिलाड़ी वैश्विक मंच पर नए खेलों में अपनी पहचान बना रहे हैं। हम संग्राम को शुभकामनाएं देते हैं क्योंकि वे इस महत्वपूर्ण चैंपियनशिप में देश की उम्मीदें लेकर जा रहे हैं। उनका यह सफर अनगिनत युवा भारतीयों को फिटनेस और खेल में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा।”

​उम्र के बंधन को तोड़ते हुए संग्राम ने आगे कहा:
“लोग 40 साल की उम्र के बाद एमएमए शुरू करने के मेरे फैसले पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन मैं यह साबित करना चाहता था कि जुनून की कोई उम्र नहीं होती। मेरा उद्देश्य सिर्फ खिताब जीतना नहीं है, बल्कि युवा भारतीयों को जीवन जीने के तरीके के रूप में फिटनेस, अनुशासन और खेलों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। मैं भारत सरकार, फिट इंडिया, युवा मामले और खेल मंत्रालय और उन सभी को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने मेरे इस सफर का समर्थन किया है।”

​उनके कोच भूपेश कुमार ने भारतीय फाइटर पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा:
“संग्राम ने अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछले दो वर्षों में उनकी कुश्ती की पृष्ठभूमि, उनके स्ट्राइकिंग (प्रहार) करने के तरीके, कंडीशनिंग और मानसिक क्रूरता में जबरदस्त सुधार हुआ है। हम आबिद अली का सम्मान करते हैं, लेकिन संग्राम भारत के लिए एक और यादगार प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

​खेल के जरिए एकता का संदेश
​PMMA मलेशिया के अध्यक्ष, इस्माइल मरज़ुकी बिन ने एशियाई कॉम्बैट स्पोर्ट्स के बढ़ते कद की सराहना की:

“एशिया चैंपियन खिताब एशिया में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है। भारत और पाकिस्तान में खेल को लेकर एक अलग ही जुनून है, और यह मुकाबला इस क्षेत्र से उभरती हुई बेहतरीन प्रतिभाओं को प्रदर्शित करेगा। हमें इस स्तर के एथलीटों को एक मंच पर लाने में गर्व और बेहद खुशी हो रही है।”

​PMMA के सीईओ मोहम्मद हाकिम बिन लुकमान अब्दुल्ला ने कहा कि यह आयोजन खेल के माध्यम से एकता का प्रतीक है:”कॉम्बैट स्पोर्ट्स में सम्मान, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा के जरिए देशों को एकजुट करने की अनूठी क्षमता होती है। हमें विश्वास है कि यह चैंपियनशिप एशिया की प्रमुख एमएमए प्रतियोगिताओं में से एक बनेगी, और हम संग्राम सिंह और आबिद अली जैसे विशिष्ट एथलीटों की भागीदारी की सराहना करते हैं।”

​आयोजकों के अनुसार, एशिया चैंपियन खिताब की यह भिड़ंत हाल के वर्षों में भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे बड़े कॉम्बैट स्पोर्ट्स मुकाबलों में से एक होने की उम्मीद है। यह एशियाई फाइटर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी।

 यूरोप और दक्षिण अमेरिका में जीत का परचम लहरा चुके अजेय संग्राम सिंह अब पाकिस्तान के आबिद अली के खिलाफ 'एशिया चैंपियन खिताब' के लिए भिड़ेंगे और अपने करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

यामल बनाम एमबाप्पे, क्या स्पेन रोक पाएगा फ्रांस के विश्वकप फाइनल जाने का सिलसिला?

फीफा विश्वकप में फ्रांस की टीम बेहतरीन दिखाई दी है। अगर सेनेगल का मैच हटा दे तो हर मैच में टीम का दबदबा रहा है। वहीं स्पेन की बात करें तो टीम ने सातवें मुकाबले में अपना पहला गोल खाया था। मतलब मंगलवार को पहले सेमीफाइनल का मुकाबला बेहतरीन आक्रमण पंक्ति और सुदृढ रक्षात्मक पंक्ति के बीच होगा।

फ्रांस एमबाप्पे के प्रदर्शन के कारण लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में पहुंचा अगर वह फाइनल जीत जाता है तो लगातार 3 बार फाइनल पहुंचने वाली टीम भी वह बन जाएगा। फ्रांस ने 2022 में अर्जेंटीना से हारने से पहले रूस में खेले गए विश्वकप में क्रोएशिया को मात देकर खिताब पाया था।

लेकिन इस बार उसके सामने खड़ी है स्पेन जो कई मौकों पर फ्रांस के सामने बड़े मुकाबले में आकर खड़ी हो जाती है। इन दोनों टीमों का मुकाबला अक्सर टूर्नामेंट के ऐसे ही मोड़ पर होता है।फ्रांस जब विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट के पहले सेमीफाइनल में स्पेन का सामना करेगा तो दिग्गज खिलाड़ी किलियन एमबाप्पे और युवा स्ट्राइकर लामिन यामल के बीच रोचक जंग देखने को मिल सकती है।

फ्रांस और स्पेन किसी बड़ी प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में फिर से आमने-सामने होंगे। यह दोनों टीम दो साल पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में एक दूसरे से भिड़ी थीं।स्पेन ने उस मैच में 2-1 से जीत हासिल की थी। उस मैच में यामल ने गोल किया था जो तब 16 वर्ष के थे। स्पेन ने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर यूरो कप का खिताब अपने नाम किया।

नाक में चोट लगने के बाद एमबाप्पे उस टूर्नामेंट में खास कमाल नहीं दिखा पाए थे जबकि माइकल ओलिस और डेसिरे डोए जैसे उभरते सितारों को अभी सफलता हासिल करनी बाकी थी।दो साल बाद फ्रांस को मौजूदा विश्व कप की सबसे प्रभावशाली टीम माना जा रहा है जिसकी अग्रिम पंक्ति में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। सबकी निगाह हालांकि एमबाप्पे पर टिकी रहेगी जिन्होंने अभी तक टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से सर्वाधिक गोल किए हैं।

स्पेन को टूर्नामेंट में आने से पहले यामल और साथी विंगर निको विलियम्स की चोटों से जूझना पड़ा। स्पेन को पिछले दो दौर में पुर्तगाल और बेल्जियम को हराने के लिए स्थानापन्न खिलाड़ी मिकेल मेरिनो के अंतिम क्षणों में किए गए गोल पर निर्भर रहना पड़ा।विश्व कप या यूरो कप में ये दोनों देश कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। यूरो कप 1984 के फाइनल में फ्रांस ने स्पेन को हराया था।

स्पेन ने पहली बार गोल खाया लेकिन अंतिम लम्हों में बेलजियम पर पाई शानदार जीत

सुपर-सब मिकेल मेरिनो के आखिरी क्षणों में किये गये गोल की बदौलत स्पेन ने शुक्रवार रात फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में फ्रांस से भिड़ने का रास्ता पक्का कर लिया। पहले हाफ में दोनों टीमों ने एक-दूसरे के खिलाफ गोल दागे।

शुरुआती लाइनअप में अप्रत्याशित रूप से शामिल हुए फैबियान रुइज ने 30वें मिनट में रिबाउंड पर गोल दाग दिया, लेकिन चार्ल्स डी केटेलेरे ने टिमोथी कास्टाग्ने के क्रॉस पर 41वें मिनट में बराबरी का गोल दाग दिया। यह टूर्नामेंट में पहला अवसर है जबकि स्पेन ने गोल खाया।

हालांकि, अंत में स्पेन ने बाजी मार ली, जब स्थानापन्न गोलकीपर सेने लैमेंस पाउ कुबार्सी के दूर से किए गए शॉट को रोक नहीं पाए और मेरिनो ने सामान्य समय समाप्त होने से दो मिनट पहले विजयी गोल दाग दिया।स्पेन अब मंगलवार को एक सपने जैसे सेमीफाइनल में फ्रांस का सामना करेगा।स्पेन मार्च 2023 से लगातार 37 मैचों में अजेय रहा है।

गोलकीपर लैमेंस को 71वें मिनट में मैदान में उतरना पड़ा, क्योंकि बेल्जियम के लंबे समय से गोलकीपर रहे थिबाउट कर्टोइस जांघ में चोट लगने के कारण मैदान से बाहर चले गए थे।बेल्जियम ने अंतिम मिनटों में बराबरी का गोल करने के लिए जीजान से प्रयास किया, लेकिन आयमेरिक लापोर्टे ने सर्वश्रेष्ठ मौके पर बाहर शॉट से मार दिया।

FIFA WC: गोल्डन बूट की रेस में अब एमबाप्पे आए मेस्सी के बराबर

काइलियन एमबाप्पे फ्रांस की विश्वकप क्वार्टर फाइनल में मोरक्को पर 2-0 की जीत से ‘गोल्डन बूट’ की दौड़ में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेस्सी की बराबरी पर पहुंच गए हैं।इन दोनों खिलाड़ियों ने मौजूदा टूर्नामेंट में अभी तक आठ आठ गोल किए हैं। वह टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को मिलने वाले ‘गोल्डन बूट’ की दौड़ में सबसे आगे हैं।

एमबाप्पे ने हालांकि तीन गोल करने में मदद की है, जबकि मेस्सी ने एक बार ही ऐसा किया है। इस कारण से एमबाप्पे को अंकतालिका में मेस्सी से आगे रखा गया है।एमबाप्पे विश्व कप के अपने करियर में अब तक 20 गोल कर चुके हैं और वह मेस्सी के रिकॉर्ड 21 गोल से केवल एक गोल पीछे हैं।

‘गोल्डन बूट’ हासिल करने की दौड़ में इन दोनों को नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड (सात गोल), इंग्लैंड के हेरी केन (छह) और फ्रांस के ओस्मान डेम्बले (पांच) से कड़ी चुनौती मिल रही है।गौरतलब है कि फ्रांस और अर्जेंटीना टूर्नामेंट की गत उपविजेता और विजेता टीम है। ऐसे में अगर एक बार और फाइनल इन दो टीमों के बीच हो जाता है तो दोनों को अंतिम मैच में अपने गोल में सुधार करने का मौका मिलेगा।

फ्रांस एमबाप्पे के प्रदर्शन के कारण लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में पहुंचा अगर वह फाइनल जीत जाता है तो लगातार 3 बार फाइनल पहुंचने वाली टीम भी वह बन जाएगा। फ्रांस ने 2022 में अर्जेंटीना से हारने से पहले रूस में खेले गए विश्वकप में क्रोएशिया को मात देकर खिताब पाया था।

2 गोल से मोरोक्को को हराकर फ्रांस लगातार तीसरी बार पहुंची सेमीफाइनल

स्टार फुटबॉल खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे ने पेनल्टी चूकने के बाद शानदार वापसी करते हुए अपना 20वां विश्व कप गोल दागा और मोरक्को पर 2-0 की जीत के साथ फ्रांस को विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचाने में मदद की। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीन बार विश्वकप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाला तीसरा देश बन गया है।

फ्रांस की फुटबॉल टीम के कोच डिडिएर डेसचैम्प्स की टीम ने गुरुवार को क्वार्टरफाइनल मुकाबले में दूसरे हाफ की शुरुआत में ही छह मिनट के भीतर दो गोल करके मैच पर नियंत्रण हासिल कर लिया और अंतिम चार में स्पेन या बेल्जियम में से किसी एक से भिड़ने का रास्ता साफ कर लिया।

पहले हाफ में एम्बाप्पे की पेनल्टी को यासीन बोनू ने बचा लिया , लेकिन ब्रेक के तुरंत बाद उन्होंने फ्रांस के लिए एक शानदार गोल किया, जो टूर्नामेंट का उनका आठवां गोल था। इसके साथ ही वह गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी के बराबर आ गएइसके तुरंत बाद, उस्मान डेम्बेले ने एक और गोल कर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। डेम्बेले के गोल में एम्बाप्पे ने सहयोग किया।

पहले हाफ में फ्रांस का दबदबा रहा और बाउनौ की बदौलत ही हाफ टाइम तक स्कोर बराबर रहा।मोरक्को के गोलकीपर ने पांच मिनट बाद ही डयोट उपामेकानो के हेडर को बचा लिया और फिर यह दिखाने में कामयाब रहे कि पेनल्टी शूटआउट में वह कितने खतरनाक प्रतिद्वंद्वी हैं।

25वें मिनट में, नौसैर मज़राउई ने बॉक्स के अंदर एम्बाप्पे को गिरा दिया, लेकिन जब रियल मैड्रिड के स्ट्राइकर ने पेनल्टी स्पॉट से शॉट लगाया, तो बोउनौ ने सही अनुमान लगाते हुए पेनल्टी को बचा लिया। विश्व कप में पेनल्टी शूटआउट समेत किसी भी गोलकीपर ने बाउनो के चार पेनल्टी सेव से ज्यादा पेनल्टी नहीं बचाई हैं।

इसके तुरंत बाद हाइड्रेशन ब्रेक के दौरान, एम्बाप्पे ने अधिकारियों से शिकायत की कि उन्हें किक मारने से पहले तीन मिनट से अधिक इंतजार कराया गया। बाउनो यह नहीं रूके और उन्होंने डेसिरे डोए के एक शानदार लो शॉट को बचाया और लुकास डिग्ने के 35 गज दूर से किए गए शॉट को क्रॉसबार पर रोककर यह सुनिश्चित किया कि हाफ टाइम तक स्कोर गोल रहित रहा।

पहले हाफ में फ्रांस ने 13 शॉट लगाए, जबकि मोरक्को ने सिर्फ एक शॉट लगाया और अंतिम तीसरे हिस्से में प्रभाव डालने के लिए संघर्ष किया। अगर उनकी खेल योजना फ्रांस को गोल करने से रोकने पर आधारित थी, तो दूसरे हाफ की शुरुआत में ही वह विफल हो गई।

मोरक्को को कोई भी महत्वपूर्ण मौका बनाने में काफी संघर्ष करना पड़ा, जिसके चलते पहले एम्बाप्पे और फिर डेम्बेले ने उन्हें इसका खामियाजा भुगतने पर मजबूर कर दिया और फ्रांस लगातार तीन विश्व कप सेमीफाइनल में पहुंचने वाला तीसरा देश बन गया।

एम्बाप्पे को 77वें मिनट में मैदान के मध्य सर्कल में कुछ क्षण बिताने के बाद प्रतिस्थापित किया गया, लेकिन वह अपने दम पर मैदान से बाहर चले गए और उनकी जगह जीन-फिलिप माटेता मैदान पर आएमंगलवार को डलास में स्पेन या बेल्जियम का सामना फ्रांस और एम्बाप्पे से होगा, जो लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने की अपनी कोशिश जारी रखेंगे।

अर्जेंटीना बनाम मिस्र मैच पर रेफरी ने विवादित निर्णय पर कहा, ईमानदारी पर शक ना करें

फीफा के रेफरी चीफ, पियरलुइगी कोलिना ने मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना की विवादित 3-2 वर्ल्ड कप जीत के दौरान रेफरी के फैसलों का मजबूती से बचाव किया है। उन्होंने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया और आलोचनाओं के बीच कहा कि मैच अधिकारियों ने पूरी आज़ादी के साथ काम किया।

कोलिना ने अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल उठाने की निंदा की और कहा कि ऐसे आरोपों से रेफरी और उनके परिवारों को धमकियां मिल सकती हैं। मिस्र ने गलत व्यवहार की शिकायत की और आरोप लगाया कि अर्जेंटीना द्वारा स्टॉपेज-टाइम में विजयी गोल करके 2-0 की बढ़त को पलटने के बाद रेफरी पर दबाव डाला गया था।

कोलिना ने पुष्टि की कि वीएआर ने लिसांद्रो मार्टिनेज पर फाउल के कारण मुस्तफा ज़िको के गोल को सही ढंग से रद्द किया था और अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले मिस्र को पेनल्टी न देने के फैसले का बचाव किया। फीफा ने पूरे टूर्नामेंट में वीएआर के नियमों को लागू करने के तरीके पर संतोष व्यक्त किया, हालांकि कुछ फैसलों पर अलग-अलग राय हो सकती है, यह भी माना। कोलिना ने कहा कि रेफरी की आलोचना फुटबॉल का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने हार के बाद मिस्र द्वारा रेफरी के फैसलों की शिकायत करने के बाद अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल उठाने की निंदा की।

कोलिना ने बेबुनियाद आरोपों को खारिज किया। कोलिना ने कहा, “फैसलों के बारे में रचनात्मक चर्चा हमेशा फुटबॉल का हिस्सा रहेगी, लेकिन हमारे खेल में बेबुनियाद आरोपों की कोई जगह नहीं है। कोई भी फीफा वर्ल्ड कप मैच अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा सकता… कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि फीफा रेफरी के फैसलों को कोई प्रभावित कर सकता है, यहां तक कि फीफा अध्यक्ष (जियानी इन्फेंटिनो) भी नहीं।”

मिस्र टूर्नामेंट से बाहर हो गया, लेकिन उनका दावा था कि उनके साथ गलत व्यवहार हुआ। अर्जेंटीना ने 0-2 से पिछड़ने के बाद वापसी की और एन्ज़ो फर्नांडीज के स्टॉपेज-टाइम गोल से जीत हासिल की। मैच के बाद कोच होसाम हसन ने आरोप लगाया कि अर्जेंटीना को टूर्नामेंट में बनाए रखने के लिए रेफरी पर दबाव हो सकता है। मिस्र फुटबॉल एसोसिएशन ने कहा, “कई अहम घटनाओं ने गंभीर चिंताएं पैदा कीं और फैसलों की निरंतरता और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े किए, जिन्होंने सीधे तौर पर खेल की दिशा को प्रभावित किया।”

FIFA World Cup

मिस्र का तर्क था कि दूसरे हाफ में मुस्तफा ज़िको के गोल को गलत तरीके से खारिज कर दिया गया; रेफरी ने गोल से पहले की कार्रवाई में फाउल का हवाला दिया, जो असल में हुआ ही नहीं था। मिस्र इस बात से भी नाराज था कि मोहम्मद सलाह के खिलाफ हुए फाउल पर कोई पेनल्टी नहीं दी गई, जबकि ठीक उसी के बाद अर्जेंटीना ने वह मूव बनाया जिससे विजयी गोल हुआ।

फीफा के कोलिना ने कहा कि वीएआर ने सही सलाह दी थी कि ज़िको के गोल को रद्द कर दिया जाए, क्योंकि अटैक के दौरान मारवान अत्तिया ने अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसैंड्रो मार्टिनेज के खिलाफ फाउल किया था। कोलिना ने कहा, “हमारा मानना है कि फाउल तो फाउल ही होता है। चाहे फाउल ‘साफ’ दिखे या न दिखे, अगर रेफरी ने इसे मैदान पर नहीं देखा, तो वीएआर दखल दे सकता है।” कोलिना ने अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले मिस्र को पेनल्टी न देने के फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि रेफरी और वीएआर दोनों ने सलाह और जूलियन अल्वारेज़ के बीच हुए संपर्क को “सामान्य फुटबॉल संपर्क” माना।

पहली बार जर्मनी ब्राजील के बिना होगा क्वार्टरफाइनल, इस महाद्वीप की 6 टीमें

पहली बार 48 टीम की भागीदारी में हो रहे विश्व कप में अब आखिरी आठ टीम बची हैं जो 19 जुलाई को फाइनल तक पहुंचने के लिये जोर आजमाइश करेंगी लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब क्वार्टर फाइनल में ब्राजील और जर्मनी दोनों नहीं हैं।

सत्रह में से दस विश्व कप में ब्राजील और जर्मनी दोनों क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे हैं। जर्मनी 1938, 1950, 2018 और 2022 में अंतिम आठ में नहीं था जबकि ब्राजील 1934, 1966 और 1990 में नहीं पहुंच सका था लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि दोनों दिग्गज एक साथ अंतिम आठ से गायब हों ।ब्राजील को अंतिम 16 के दौर में नॉर्वे ने और जर्मनी को अंतिम 32 में पराग्वे ने हराया।विश्व कप 1930, 1950, 1974, 1978 और 1982 में क्वार्टर फाइनल नहीं हुए थे।

8 में से 4 टीम ने नहीं जीता है खिताब :

इस विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली आठ टीम में से चार पहले भी खिताब जीत चुकी हैं जिनमें अर्जेंटीना ने तीन, फ्रांस ने दो , इंग्लैंड और स्पेन ने एक एक बार ट्रॉफी अपने नाम की है।बेल्जियम और मोरक्को कभी सेमीफाइनल से आगे नहीं गए। वहीं स्विटजरलैंड 1954 के बाद पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा है और नॉर्वे इससे पहले अंतिम 16 से आगे नहीं गया था। यानी 2010 में स्पेन के बाद पहली बार कोई नया चैम्पियन मिल सकता है।

यूरोप का दबदबा, छह टीम अंतिम आठ में :

क्वार्टर फाइनल में इस बार यूरोप की छह टीम हैं जबकि चार साल पहले कतर में पांच यूरोपीय टीम अंतिम आठ में थीं। इसके अलावा अफ्रीका की एक (मोरक्को) और दक्षिण अमेरिका (अर्जेंटीना) की एक टीम है।मोरक्को कतर में 2022 विश्व कप में अंतिम चार में पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी टीम थी। वह लगातार दो विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली भी अफ्रीका की पहली टीम बन गई है।

फ्रांस ने निर्धारित समय में ही जीते सारे मैच :

खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही कीलियन एमबाप्पे की फ्रांस टीम ने टूर्नामेंट में अभी तक पांचों मैच निर्धारित 90 मिनट के भीतर ही जीते हैं। लियोनेल मेस्सी की अर्जेंटीना ने भी पांचों मैच जीते हैं लेकिन केप वर्दे के खिलाफ अंतिम 32 का उसका मुकाबला अतिरिक्त समय तक खिंचा था जिसमें उसने 3-2 से जीत दर्ज की।

स्पेन और इंग्लैंड ने चार मैच जीते और एक ड्रॉ खेला। नॉर्वे ने चार मैच जीते लेकिन फ्रांस ने उसे हराया था। बेल्जियम, मोरक्को और स्विटजरलैंड ने तीन मैच जीते और दो ड्रॉ खेले।

स्पेन ने अभी तक नहीं गंवाया एक भी गोल :

इस बार विश्व कप में स्पेन एकमात्र टीम है जिसका डिफेंस अभेद रहा है और उसने एक भी गोल नहीं गंवाया। गोलकीपर उनाइ सिमोन ने विश्व कप में 600 मिनट से अधिक समय मैदान पर रहकर गोल नहीं गंवाने का रिकॉर्ड बनाया है।

ग्रुप चरण में केप वर्दे ने स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोका था। स्पेन ने सउदी अरब को 4-0 और उरूग्वे को 1- 0 से हराया। अंतिम 32 में आस्ट्रिया को 3-0 से और अंतिम 16 में क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल को स्पेन ने 1-0 से हराया।इससे पहले 1990 में इटली की टीम एक भी गोल गंवाये बिना सेमीफाइनल तक पहुंची थी।