नॉवें के हालैंड ने अकेले दम पर ब्राजील को हराकर किया विश्वकप से बाहर

एर्लिंग हालैंड अंतिम क्षणों में किये गये दो गोलों की बदौलत नॉर्वे ने पांच बार की चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 से बाहर कर दिया है। इस जीत के साथ नॉर्वे ने टूर्नामेंट के क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है। इस रोमांचक मुकबाले के हीरो एर्लिंग हालैंड ने मैच के आखिरी क्षणों (79वें और 90वें मिनट) में दो शानदार गोल दागकर नॉर्वे को जीत दिलाई। इंजरी टाइम में ब्राजील के लिए नेमार ने पेनल्टी से एक गोल किया, लेकिन यह हार टालने के लिए नाकाफी था।

पहले हाफ में खेल का रुख बिल्कुल अलग हो सकता था, जब ब्राजील के फॉरवर्ड मैथियस कुन्हा ने पेनल्टी हासिल की, लेकिन नॉर्वे के ओरजान नाइलैंड ने ब्रूनो गुइमारेस के कमजोर प्रयास को बचा लिया। कई मौको के बावजूद पहला हॉफ गोल रहित रहा। मुकाबले के तीनों गोल मैच के दूसरे हॉफ में आये।

ब्रेक के बाद नॉर्वे ने आक्रामक खेल दिखाया, जिसका श्रेय सोलबैकन के दो बड़े और शायद अप्रत्याशित बदलावों को जाता है। उन्होंने अलेक्जेंडर सोरलॉथ और एंटोनियो नुसा की जगह एंड्रियास शेल्डरुप और ऑस्कर बॉब को मैदान पर उतारा । वहीं ब्राजील के कोच कार्लो एंसेलोटी के बदलाव – जिनमें एंड्रिक और नेमार जैसे खिलाड़ी शामिल थे – ने शायद दर्शकों को खुश किया हो, लेकिन खेल पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।
नॉर्वे का क्वार्टर फाइनल में मुकाबला मियामी में इंग्लैंड बनाम मैक्सिको के मैच के विजेता से होगा । ब्राजील के लिए, यह 36 वर्षों में विश्व कप से उनका सबसे जल्दी बाहर होना है।

कमजोर दिल वालों के लिए नहीं था Mexico-England मैच: मैक्सिको का दबदबा, इंग्लैंड का जज्बा: 10 खिलाड़ियों से खेलकर भी जीता ब्लॉकबस्टर मुकाबला

England Vs Mexico

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अगर अब तक किसी मुकाबले ने दर्शकों की धड़कनें सबसे ज्यादा बढ़ाई हैं, तो वह इंग्लैंड और मेजबान मैक्सिको के बीच खेला गया राउंड ऑफ 16 का मुकाबला रहा। यह सिर्फ एक फुटबॉल मैच नहीं बल्कि रोमांच, संघर्ष, विवाद और साहस की ऐसी कहानी थी, जिसमें हर कुछ मिनट बाद मैच का रंग बदलता नजर आया। दो पेनल्टी, एक रेड कार्ड, पांच गोल और अंतिम सीटी तक बना सस्पेंस, इस मुकाबले में वह सब कुछ देखने को मिला जिसकी उम्मीद विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले से की जाती है। आखिरकार इंग्लैंड ने 10 खिलाड़ियों के साथ लंबा समय खेलने के बावजूद 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया।

 

मुकाबले की शुरुआत खराब मौसम के कारण करीब एक घंटे की देरी से हुई, लेकिन जैसे ही खेल शुरू हुआ, दोनों टीमों ने आक्रामक अंदाज दिखाया। शुरुआती आधे घंटे तक मैक्सिको ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और इंग्लैंड पर लगातार दबाव बनाया। हालांकि असली धमाका 36वें मिनट में हुआ, जब बुकायो साका के शानदार मूव के बाद जूड बेलिंघम ने इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी।

 

मैक्सिको इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि सिर्फ 98 सेकंड बाद 38वें मिनट में हैरी केन के शानदार पास पर बेलिंघम ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। दो मिनट के भीतर दो गोल ने पूरे स्टेडियम को सन्न कर दिया और इंग्लैंड 2-0 से आगे निकल गया।

 

हालांकि मेजबान टीम ने हार नहीं मानी। 42वें मिनट में फ्री-किक के बाद जूलियन क्विनोनेस ने शानदार फिनिश करते हुए स्कोर 2-1 कर दिया। इस गोल ने मैच में फिर जान डाल दी और हाफ टाइम तक मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ दिखाई दिया।

 

दूसरे हाफ की शुरुआत इंग्लैंड के लिए मुश्किलों से भरी रही। डिफेंडर जारेल क्वांसाह ने जीसस गालार्डो पर खतरनाक टैकल किया। VAR समीक्षा के बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इसके बाद इंग्लैंड को लगभग पूरा दूसरा हाफ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। रेड कार्ड के फैसले के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों और स्टाफ के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

England Vs Mexico

 

संख्यात्मक कमी के बावजूद इंग्लैंड ने हार नहीं मानी। 60वें मिनट में उसे पेनल्टी मिली और कप्तान हैरी केन ने कोई गलती नहीं करते हुए गेंद को गोल में भेज दिया। इंग्लैंड ने फिर दो गोल की बढ़त हासिल कर ली और स्कोर 3-1 हो गया।

 

लेकिन मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ था। 69वें मिनट में इंग्लैंड के बॉक्स में फाउल के बाद मैक्सिको को भी पेनल्टी मिली। अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने इसे गोल में बदलकर स्कोर 3-2 कर दिया। इसके बाद पूरे स्टेडियम में रोमांच चरम पर पहुंच गया।

 

आखिरी 20 मिनट और फिर 11 मिनट के अतिरिक्त समय में मैक्सिको ने लगातार हमले किए। गेंद पर उसका नियंत्रण भी ज्यादा रहा और उसने इंग्लैंड के गोल पर कई खतरनाक मौके बनाए। लेकिन गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड ने शानदार बचाव किए, जबकि डेक्लान राइस और जूड बेलिंघम ने डिफेंस में भी अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने हर हमले के सामने दीवार बनकर खड़े रहते हुए आखिर तक बढ़त बचाए रखी।

 

यह मुकाबला सिर्फ स्कोरलाइन के लिए नहीं, बल्कि इंग्लैंड के जज्बे के लिए भी याद रखा जाएगा। एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद टीम ने संयम नहीं खोया और विश्व कप के सबसे कठिन नॉकआउट मुकाबलों में से एक जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। वहीं मैक्सिको ने पूरे मैच में दबाव तो बनाया, लेकिन मिले अवसरों को गोल में बदलने में वह इंग्लैंड जितना प्रभावी साबित नहीं हो सका। यही दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर बन गया।

रोमांच के शिखर पर अर्जेंटीना ने केप वर्डे को 3-2 से हराया (Video Highlights)

लियोनेल मेसी, लिसैंड्रो मार्टिनेज और डिने बोर्गस के आत्मघाती गोल की मदद से अर्जेंटीना ने शुक्रवार को अतिरिक्त समय के बाद केप वर्डे पर 3-2 की नाटकीय जीत दर्ज करते हुए फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 16 में अपनी जगह पक्की की।

मैच की शुरुआत के पहले हॉफ में मेसी ने 29वें मिनट में गोल दागा अर्जेंटीना को 1-0 की बढ़त दिलाई हालांकि, दूसरे हाफ की शुरुआत में केप वर्डे के लिए डेरोय डुआर्टे ने 59वें मिनट में बराबरी का गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। दोनों टीमों के बीच 90 मिनट का खेल पूरा होने तक स्कोर बराबरी ही रहा। इसके बाद अतिरिक्त समय में लिसांद्रो मार्टिनेज ने 92वें मिनट में दूसरा गोल कर अर्जेंटीना को बढ़त दिला दी।

मार्टिनेज के गोल के बाद लगा अर्जेंटीना अब यह मैच आसानी से जीत लेगा, लेकिन 103वें मिनट में सिडनी लोप्स काब्रेल ने गोल दागकर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। इसके बाद फिर 15 मिनट का अतिरिक्त समय लिया गया। अतिरिक्त समय में मेसी ने 111वें मिनट में कॉर्नर से गोल करने का प्रयास किया, लेकिन केप वर्डे के डिने बोर्गस ने आत्मघाती गोल कर अर्जेंटीना को 3-2 से बढ़त दिला दी।

केप वर्डे ने इसके बाद 116 और 120वें मिनट में गोल करने के प्रयास किए, लेकिन विफल रहे। अभी एक और नाटकीय मोड़ आना बाकी था जब एमिलियानो मार्टिनेज ने कैब्राल की फ्री किक को शानदार तरीके से रोककर अर्जेंटीना को जीत दिला दी।

अर्जेंटीना होगी उलटफेर की शिकार, केप वर्डे के कोच का धमाकेदार बयान

केप वर्डे के कोच पेड्रो लीटाओ ब्रितो भरोसा है कि उनकी टीम FIFA World Cup 2026 में अर्जेंटीना हरा सकती है। ब्रितो को “विश्वास” है कि वे विश्व कप के इतिहास में सबसे बड़े उलटफेरों में से एक को अंजाम दे सकते हैं और अर्जेंटीना को चौंका सकते हैं। विश्व कप में ग्रुप स्टेज से आगे बढ़ने वाला अब तक का सबसे छोटा देश केप वर्डे, शुक्रवार को मियामी में राउंड ऑफ 32 में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना से भिड़ेगा।

लियोनेल मेसी के नेतृत्व वाली अर्जेंटीना की टीम जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। लेकिन केप वर्डे के कोच, जिन्हें बुबिस्ता के नाम से जाना जाता है, ने कहा कि उनकी टीम “साहसी और निडर” है।उन्होंने कहा, “बेशक, हमें विश्वास है। हमें खुद पर, अपनी ताकत पर, अपने खिलाड़ियों पर और अपनी टीम पर पूरा भरोसा है। हम जानते हैं कि यह बहुत मुश्किल मुकाबला होगा, लेकिन हम अपने प्रतिद्वंदी को हरा सकते हैं। हम साहसी और महत्वाकांक्षी हैं और हम जीतने के लिए खेलेंगे।”

उन्होंने कहा, “हमारा दृढ़ विश्वास है, और यह बहुत मददगार है। हम साहस के साथ खेलेंगे। हम निडर होकर क्वालिफिकेशन के लिए लड़ेंगे। हम चाहते हैं कि खिलाड़ी मैच का आनंद लें, लेकिन साथ ही साथ ध्यान केंद्रित रखें और अगले चरण में पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास करें।” उन्होंने कहा, “वे मौजूदा विश्व चैंपियन हैं और टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक हैं। हम उनकी पूरी टीम के खिलाफ खेलेंगे। हम जानते हैं कि मेसी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं, लेकिन हम उनकी पूरी टीम के खिलाफ खेलेंगे।”

1934 के बाद स्विटजरलैंड ने जीता नॉकआउट मैच, अलजीरिया पर दागे दो गोल

 

ब्रिल एम्बोलो और डैन एनदोये के गोल की मदद से स्विट्जरलैंड ने अल्जीरिया पर 2-0 की जीत के साथ विश्व कप के अंतिम 16 में जगह बना ली।स्विट्जरलैंड अगला मुकाबला कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा। राउंड ऑफ 16 का मैच अगले मंगलवार को वैंकूवर में खेला जाएगा।

BC Place Vancouverमें खेले गए इस मैच के दौरान पहले हाफ में ही स्विटजरलैंड ने बढ़त बना ली थी। दसवें मिनट में ही ब्रिल एम्बोलो ने पहला गोल दाग दिया और रक्षा पंक्ति ने अल्जीरिया को गोल करने का मौका नहीं दिया। पहले हाफ में अलजीरिया के पास बराबरी का एक शानदार मौका था लेकिन डिफेंडर्स ने गोलकीपर का काम आसान कर दिया।

दूसरे हाफ की शुरुआत हुई ही थी लेकिन अलजीरिया बराबरी के बजाए एक और गोल खा गई। डैन एनदोये ने 46वें मिनट में गेंद को अलजीरियन डिफेंडर्स के बीच में से निकालकर गोलकीपर को भी छका दिया। यह स्कोरलाइन अंत तक रही।

स्विट्जरलैंड ने 1938 में फ्रांस में खेले गए विश्व कप के बाद नॉकआउट राउंड का कोई मैच नहीं जीता था, लेकिन 1954 में उसकी टीम ने प्लेऑफ मैच जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी।

स्विट्जरलैंड की टीम पिछले तीन विश्व कप में अंतिम 16 में पहुंची थी लेकिन इससे आगे बढ़ने में नाकाम रही।अल्जीरिया 2014 के बाद पहली बार विश्व कप में भाग ले रहा था। वह 2014 में नॉकआउट राउंड तक पहुंचा था, लेकिन तब जर्मनी से हार गया था।

2-1 से पुर्तगाल की क्रोएशिया पर जीत के अंतिम लम्हों में हुआ विवाद (Video)

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क्रिस्टियानो रोनाल्डो और गोंकालो रामोस के एक-एक गोलों की बदौलत पुर्तगाल ने क्रोएशिया को 2-1 से हराकर फीफा विश्वकप 2026 के प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है।

टोरंटो स्टेडियम में खेले गये इस मुकाबले में क्रोएशिया के लिए इवान पेरिसिक ने 53वें मिनट में गोल कर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। कुछ देर बाद पुर्तगाल ने पलटवार किया और रोनाल्डो ने 68वें मिनट में पेनल्टी पर गोलकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद गोंकालो रामोस ने एक्ट्रा टाइम में निर्णायक गोल किया। फाइनल सीटी बजने से पहले क्रोएशिया के जोस्को ग्वार्डिओल ने गोल कर दिया था. लगा था कि यह मैच पेनल्टी शूटआउट में जाएगा, लेकिन वीडियो रीव्यू के बाद इसे ऑफ साइड करार दिया गया।

रोनाल्डो ने 68वें मिनट में किया गया गोल विश्व कप में नॉकआउट चरण का पहला गोल है लेकिन यह रामोस ही थे जिन्होंने पुर्तगाल को जीत दिलाई क्योंकि उन्होंने पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए टूर्नामेंट में देश के इतिहास में केवल दूसरी बार जीत हासिल की। 2026 विश्व कप में अब तक वीएआर द्वारा रद्द किया गया यह 10वां गोल था।

पुर्तगाल सोमवार को राउंड ऑफ 16 में स्पेन का सामना करेगा।गुरुवार का मैच विश्व कप के इतिहास में पहला ऐसा मैच था जिसमें मोड्रिक और रोनाल्डो सहित दो ऐसे खिलाड़ी मैदान पर उतरे जिनकी उम्र कम से कम 40 वर्ष थी। मैच के बाद रियल मैड्रिड के इन दोनों पूर्व साथी खिलाड़ियों ने मिडफील्ड में एक-दूसरे को गले लगाया।

3 गोलों से ऑस्ट्रिया को रौंदकर स्पेन ने 16 साल बाद जीता विश्वकप नॉकआउट मैच

 

मिकेल ओयार्सबल के दो शानदार गोल की बदौलत स्पेन ने फीफा विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराकर टूर्नामेंट के प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। यह 2010 के फाइनल के बाद पहली बार है जब स्पेन ने नॉटकाउट मुकाबले में जीत हासिल की है।राउंड ऑफ 32 के गुरुवार रात खेले गये इस मुकाबले में स्पेन के लिए मिकेल ओयार्सबल ने 36वें और 89वें मिनट में गोल किया, जबकि पेद्रो पोरो ने 66वें मिनट में गोल दागा। अब अंतिम 16 में अब उसका मुक़ाबला अब पुर्तगाल से होगा।

2010 में टूर्नामेंट जीतने के बाद से विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में स्पेन का इतिहास बेहद निराशाजनक रहा है। तब से लेकर सोफी स्टेडियम तक: तीन विश्व कप, एक भी नॉकआउट जीत नहीं। 2014 में, मौजूदा चैंपियन ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए। 2018 में, वे राउंड ऑफ़ 16 में मेजबान रूस से हार गए। 2022 में, लुइस एनरिक की प्रबल दावेदार टीम को इसी चरण में मोरक्को ने पेनल्टी शूटआउट में हरा दिया ।

अब, मिकेल ओयार्सबल के दो गोल और पेड्रो पोरो के एक गोल की बदौलत , स्पेन ने एक बार फिर नॉकआउट मैच जीत लिया है और इस विस्तारित टूर्नामेंट के राउंड ऑफ़ 16 में पहुंच गया है।पेड्री और मार्क कुकुरेला के शानदार तालमेल के बाद ओयार्सबल ने 36वें मिनट में पहला गोल किया। यह गोल 2010 के फाइनल में आंद्रेस इनिएस्टा के ऐतिहासिक अतिरिक्त समय के गोल के बाद किसी स्पेनिश खिलाड़ी द्वारा विश्व कप के नॉकआउट चरण में किया गया पहला गोल था।


यामल को हमेशा ही सारी सुर्खियां मिलती हैं। यहां, मैच शुरू होने से पहले जब टीमें मैदान पर उतर रही थीं, तब टीवी कैमरे उन पर ही टिके रहे। यामल मुस्कुराते हुए उनकी ओर देख रहे थे और बड़ी स्क्रीन पर नज़र आ रहे थे। बाद में, उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (MVP) चुना गया।

लेकिन ओयार्सबल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं उन्होंने स्पेन के लिए अपने पिछले 17 मैचों में 17 गोल और छह असिस्ट किए हैं। इस विश्व कप में स्पेन ने आठ गोल किए हैं, जिनमें से पांच में ओयार्सबल की सीधी भूमिका रही है, जिनमें चार गोल और एक असिस्ट शामिल है। स्पेन की पुरुष राष्ट्रीय टीम के इतिहास में केवल छह खिलाड़ियों – डेविड विला, राउल गोंज़ालेज़, फर्नांडो टोरेस, अल्वारो मोराटा, डेविड सिल्वा और फर्नांडो हिएरो – ने उनसे अधिक गोल किए हैं।

21 की जगह 15 अंक के होंगे Best of Three मुकाबले, भारतीय बैडमिंटन से बदलाव शुरु

भारतीय बैडमिंटन को आगे रखने के लिए कदम उठाते हुए, बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (BAI) जुलाई 2026 से घरेलू सर्किट में नया बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ) 3×15 स्कोरिंग सिस्टम लागू करेगा, जिसकी शुरुआत टॉमिनोरी रासेनिंग इंडियनेक्स-एस से होगी जो 7 से 14 जुलाई, 2026 तक रीजनल स्पोर्ट्स सेंटर, एर्नाकुलम में होगा।

इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि भारतीय शटलर नए फ़ॉर्मेट में आसानी से ढल जाएं, इसकी टैक्टिकल और फ़िज़िकल ज़रूरतों के हिसाब से जल्दी ढल जाएं, और उस सफलता और कॉम्पिटिटिव बढ़त को बनाए रखें जिसने भारत को वैश्विक रूप से परिभाषित किया है।

बदले हुए फ़ॉर्मेट के तहत, मैच रैली-पॉइंट स्कोरिंग के तहत Best of Three गेम के तौर पर खेले जाते रहेंगे, लेकिन हर गेम अब 21 के बजाय 15 पॉइंट तक खेला जाएगा। 14-ऑल से दो-पॉइंट की बढ़त ज़रूरी रहेगी, गेम 21 पॉइंट तक सीमित रहेंगे, जहाँ 21 पर अगला पॉइंट कम होगा। छोटे फ़ॉर्मेट से तेज़ी बढ़ने, मोमेंटम में बदलाव तेज़ होने और टैक्टिकल सटीकता और जल्दी फ़ैसले लेने पर ज़्यादा ज़ोर देने की उम्मीद है।

यह बदलाव सभी बड़े घरेलू इवेंट्स पर लागू होगा, जिसमें ज़ोनल चैंपियनशिप, रैंकिंग टूर्नामेंट और नेशनल चैंपियनशिप शामिल हैं, जिससे पूरे इकोसिस्टम में एक जैसा बदलाव आएगा। जनवरी 2027 में इसके ग्लोबल रोलआउट से पहले इस फ़ॉर्मेट को शुरू करके, बाई का मकसद खिलाड़ियों, कोचों और टेक्निकल अधिकारियों को आसानी से ढलने के लिए ज़रूरी समय और कॉम्पिटिटिव अनुभव देना है।

इस बदलाव की स्ट्रेटेजिक ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, बाई के जनरल सेक्रेटरी संजय मिश्रा ने कहा, “कॉम्पिटिशन में एक जैसापन पक्का करने, बेहतर तैयारी में मदद करने और प्लेयर्स, कोच, टेक्निकल ऑफिशियल्स और सभी स्टेकहोल्डर्स को नए स्कोरिंग फ़ॉर्मेट की पूरी तरह आदत डालने के लिए, जनवरी 2027 से इसके प्रपोज़्ड इम्प्लीमेंटेशन से बहुत पहले, 3×15 स्कोरिंग सिस्टम को लागू करने का फ़ैसला किया गया है। यह फ़ैसला इसलिए लिया गया है ताकि सभी एज ग्रुप के प्लेयर्स बदले हुए स्कोरिंग फ़ॉर्मेट से जान-पहचान और कॉम्पिटिटिव एडजस्टमेंट की क्षमता डेवलप कर सकें, ताकि जब यह सिस्टम इंटरनेशनल लेवल पर अपनाया जाए तो यह आसानी से हो सके।”

नए फ़ॉर्मेट के तहत मैच के दूसरे प्रोसेस में भी बदलाव किया गया है। ट्रेडिशनल मिड-गेम इंटरवल अब तब होगा जब लीडिंग प्लेयर या जोड़ी आठ पॉइंट्स तक पहुँचेगी, इसके साथ तीसरे गेम में एंड्स में बदलाव होगा और 60-सेकंड का ब्रेक होगा। गेम के बीच 120-सेकंड का इंटरवल बदला नहीं जाएगा, जबकि पिछले गेम का विनर पहले सर्व करता रहेगा।

नया 3×15 सिस्टम जुलाई 2026 से भारत के घरेलू बैडमिंटन कैलेंडर में एक जैसा लागू किया जाएगा, जिससे कॉम्पिटिशन और एथलीट की तैयारी में एक जैसापन आएगा। यह फ़ॉर्मेट सभी ज़ोनल चैंपियनशिप, अंडर-13, अंडर-15, अंडर-17, अंडर-19, सीनियर और मास्टर्स (वेटरन्स) कैटेगरी में घरेलू रैंकिंग टूर्नामेंट, साथ ही नेशनल चैंपियनशिप के हर लेवल पर लागू होगा-अंडर-11 से लेकर सीनियर और मास्टर्स कॉम्पिटिशन तक।

मेजबान अमेरिका पहुंचा क्वार्टर फाइनल, बोस्निया-हर्जेगोविना को 2 गोलों से रौंदा

मेजबान अमेरिका की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में बोस्निया-हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर टूर्नामेंट के अगले दौर में जगह बना ली है। फोलारिन बालोगुन ने हाफ टाइम से ठीक पहले अमेरिका के लिए निर्णायक गोल किया। यह टूर्नामेंट में उनका तीसरा गोल था। लेकिन फिर एक घंटे के निशान के ठीक बाद एक विवादास्पद फैसले में उन्हें मैदान से बाहर भेज दिया गया, जिसके कारण उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मैच के लिए निलंबित किया जा सकता है।

अमेरिकी आक्रमण क्षेत्र के भीतर ही बालोगुन और बोस्नियाई डिफेंडर तारिक मुहारेमोविक के बीच टक्कर होने पर उन्हें लाल कार्ड दिखाया गया। शुरुआत में दोनों खिलाड़ी जमीन पर गिर पड़े, लेकिन फिर वीडियो सहायक रेफरी ने रेफरी, ब्राजील के राफेल क्लॉस को मॉनिटर पर बुलाया।

स्लो-मोशन फुटेज देखने के बाद, क्लॉस ने निष्कर्ष निकाला कि बालोगुन ने अपने जूते मुहारेमोविक के पैर पर रगड़े थे और उनके टखने पर भी चोट पहुंचाई थी, जिसके चलते उन्हें गंभीर फाउल प्ले के लिए मैदान से बाहर भेज दिया गया। बालोगुन सदमे में दिखे; वे लड़खड़ाते हुए साइडलाइन पर गए और क्रिस्टियन पुलिसिक और टिम वेह ने उन्हें सांत्वना दी। विश्व कप में रेड कार्ड के लिए एक मैच का निलंबन मानक है, हालांकि अमेरिका संभवतः अपील करेगा।

बालोगुन विश्व कप में लाल कार्ड पाने वाले पांचवें अमेरिकी खिलाड़ी हैं और 2006 के फाइनल में फ्रांस के जिनेदिन जिदान के बाद किसी भी देश के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने एक ही नॉकआउट मैच में गोल करने के साथ-साथ लाल कार्ड भी प्राप्त किया है।

10 खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए, अमेरिका ने न केवल अपनी बढ़त बनाए रखी, बल्कि 82वें मिनट में मलिक टिलमैन के बोस्नियाई दीवार को भेदते हुए शानदार फ्री किक ने अमेरिका के लिए जीत सुनिश्चित कर दी। अमेरिका ने इतिहास में केवल दूसरा और 2002 के बाद पहला विश्व कप नॉकआउट मैच जीता। इस जीत के साथ अमेरिकी टीम ने यूरोपीय टीमों के खिलाफ लगातार 10 मैचों में हार का सिलसिला भी तोड़ दिया है और अब अगले दौर में उनका सामना बेल्जियम से होगा, जहां उनके पास बदला लेने का मौका होगा: बेल्जियम ने उन्हें 2014 विश्व कप के राउंड ऑफ 16 में बाहर कर दिया था।

खेल का शुरुआती हिस्सा काफी संतुलित लग रहा था। अमेरिका का खेल पर पूरा नियंत्रण था और गेंद पर उनका अधिक समय तक कब्जा था, लेकिन ऐसा लग रहा था कि बोस्निया यही चाहता था। उन्होंने अमेरिकी हमलों को नाकाम किया, डिफेंडरों को फुर्ती से बदलते रहे और खेल को मैदान के किनारों की ओर ही ले जाते रहे। कुछ खतरनाक मौके भी आए, लेकिन हाफ टाइम आते-आते अमेरिका ने सिर्फ एक ही शॉट गोल पर लगाया था।

बालोगुन सबसे ज्यादा निराश खिलाड़ियों में से थे, उन्होंने कई बार अपना हाथ जमीन पर पटका। उनका दावा था कि बोस्नियाई डिफेंडर लगातार उनकी कमीज खींच रहे थे, उन्होंने रेफरी से पेनल्टी की मांग की जो उन्हें नहीं मिली, और 33वें मिनट में उन्होंने गोल कर दिया, लेकिन उसे ऑफसाइड करार देकर रद्द कर दिया गया।

बोस्निया को पूरा यकीन था कि उन्होंने मैच को हाफ टाइम तक बराबरी पर लाने के लिए काफी कुछ कर लिया है। लेकिन 45वें मिनट में टिम रीम ने मैदान के बीच में गेंद छीन ली और टायलर एडम्स की ओर गेंद बढ़ाई , जिन्होंने बड़ी चतुराई से टिलमैन को पास दिया। मिडफील्डर ने एक ऐसा पास दिया जो संयोगवश उछला, बोस्नियाई रक्षापंक्ति ने उसे रोकने का प्रयास किया लेकिन वह अपने साथी खिलाड़ी से टकराकर वापस आ गई और गेंद बालोगुन के पास गिरी, जिन्होंने उसे गोलकीपर के नीचे से गोल में डाल दिया।

FIFA WorldCup की सबसे शानदार वापसी, 2 गोल खाकर बेल्जियम ने किए अंतिम 39 मिनट में 3 गोल

 

बेल्जियम ने FIFA World Cup के इतिहास में सबसे शानदार वापसी करते हुए 86वें मिनट के बाद तीन गोल कर सेनेगल पर 3-2 से जीत दर्ज करते हुए टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। जिसमें 125वें मिनट में रिकॉर्ड-तोड़ पेनल्टी भी शामिल थी।

ल्यूमेन फील्ड में गुरुवार सुबह खेले गये फीफा विश्वकप के राउंड ऑफ 32 में बेल्जियम आखिरी समय में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए सेनेगल पर 3-2 से जीत दर्ज की। मैच के ज़्यादातर समय 2-0 से पीछे रहने के बाद बेल्जियम बाहर होने की कगार पर था, लेकिन उन्होंने अद्भुत वापसी की। उन्होंने एक लगभग हारी हुई बाजी को पलटते हुए टूर्नामेंट की सबसे यादगार नॉकआउट जीतों में से एक में बदल दिया। सब्स्टीट्यूट रोमेलु लुकाकू ने 86वें मिनट में गोल करके वापसी की शुरुआत की और तीन मिनट बाद कप्तान यूरी टिएलेमैन्स ने हेडर से बराबरी का गोल करके मैच को अतिरिक्त समय में पहुंचा दिया।

मैच के ज़्यादातर समय दबदबा बनाने के बाद सेनेगल की शानदार जीत तय लग रही थी। हबीब डियारा ने 25वें मिनट में गोल करके खाता खोला और लगातार हमले के दबाव का फायदा उठाते हुए बेल्जियम को पीछे कर दिया। अफ्रीकी टीम ने 51वें मिनट में अपनी पकड़ और मज़बूत की, जब इस्माइला सार ने शानदार फिनिशिंग के साथ बढ़त को दोगुना कर दिया, जिससे बेल्जियम के जल्दी बाहर होने का खतरा मंडराने लगा।

मैच में बेल्जियम अधिकतर समय सेनेगल के अनुशासित रक्षापंक्ति को तोड़ने के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन लुकाकू के मैदान पर आने से मैच का रुख बदल गया। स्ट्राइकर के 86वें मिनट में करीब से किए गए गोल ने बेल्जियम का हौसला बढ़ाया, और कुछ ही देर बाद टिएलेमैन्स ने लिएंड्रो ट्रॉसार्ड के क्रॉस पर शानदार हेडर से गोल करके स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया और सेनेगल के समर्थकों को हैरान कर दिया।

अतिरिक्त समय में और भी रोमांच देखने को मिला क्योंकि दोनों टीमें निर्णायक गोल की तलाश में थीं। बेल्जियम जीत के बहुत करीब पहुंच गया था जब डोडी लुकेबाकियो ने अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ के अंत में क्रॉसबार पर शॉट मारा, जबकि सेनेगल ने काउंटर-अटैक में कुछ मौके बनाए लेकिन फिर से बढ़त हासिल करने में नाकाम रहे।

निर्णायक पल आखिरी सेकंड में आया। लंबे VR Review के बाद, रेफरी हेक्टर मार्टिनेज ने बेल्जियम को पेनल्टी दी। उन्होंने फैसला सुनाया कि शेख कमारा ने पेनल्टी एरिया के अंदर टिएलेमैन्स को फाउल किया था, जब वे एक लो क्रॉस को क्लियर करने की कोशिश कर रहे थे। इस फैसले के बाद सेनेगल के खिलाड़ियों ने जोरदार विरोध किया, जिससे स्पॉट-किक लेने में काफी देर हो गई।

मैच का सारा दारोमदार अपने कंधों पर होने के बावजूद, टिएलेमैन्स ने संयम बनाए रखा और गोलकीपर मोरी डियाव को छकाते हुए 125वें मिनट में पेनल्टी को गोलपोस्ट के ऊपरी-दाएं कोने में पहुंचाकर एक अद्भुत वापसी पूरी की। आधिकारिक तौर पर 124 मिनट और 44 सेकंड पर हुए इस गोल ने फीफा विश्वकप कप के इतिहास में मैच जिताने वाले सबसे देर से किए गए गोल का रिकॉर्ड बनाया। इस रोमांचक जीत ने बेल्जियम को राउंड ऑफ़ 16 में पहुंचा दिया है, जहां वे सिएटल लौटकर अमेरिका का सामना करेंगे।

सेनेगल के लिए, उनके शानदार प्रदर्शन का अंत दिल तोड़ने वाला रहा। 80 मिनट से ज़्यादा समय तक मैच पर पकड़ बनाए रखने और दो गोल की बढ़त के साथ जीत पक्की लग रही थी, लेकिन बेल्जियम ने मैच के आखिर में अविश्वसनीय वापसी करते हुए फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अब तक की सबसे बेहतरीन वापसी की कहानियों में से एक लिख दी।