जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की होल्डिंग कंपनी को मिल सकती है ‘डिफॉल्ट’ रेटिंग, कर्ज चुकाने में की देरी : सूत्र

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की होल्डिंग कंपनी Jana Holdings Limited (JHL) की क्रेडिट रेटिंग घटकर ‘डिफॉल्ट’ कैटेगरी में जा सकती है। CNBC-TV18 को मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि इसकी वजह नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) की रकम तय समय पर नहीं चुका पाना है।

NCD भुगतान में हुई देरी

सूत्रों के मुताबिक, JHL ने NCD की भुगतान अवधि 30 जून 2026 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। यानी कंपनी को भुगतान के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिला है।

बताया जा रहा है कि यह फैसला डिबेंचर-होल्डर्स की सहमति से लिया गया है। इनमें प्रमुख निवेशक TPG Asia VI India Markets Pte भी शामिल है। ऐसे में इसे टेक्निकल डिफॉल्ट माना जा रहा है।

 Jana Holdings को क्यों आई दिक्कत?

सूत्रों के अनुसार, JHL को उम्मीद थी कि वह Jana Small Finance Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचकर NCD का भुगतान कर देगी। लेकिन हिस्सेदारी का समय पर मोनेटाइजेशन नहीं हो पाया, जिससे भुगतान में देरी हुई।

JHL की हिस्सेदारी पहले 44% थी, जो TVS Venu Group को आंशिक हिस्सेदारी बेचने के बाद घटकर करीब 16.95% रह गई है। सूत्रों का कहना है कि अगर रीफाइनेंसिंग की जरूरत पड़ी, तो कंपनी अपनी बची हुई हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा भी बेच सकती है।

Jana Small Finance Bank पर कितना असर?

सूत्रों के मुताबिक, इस घटनाक्रम का Jana Small Finance Bank के कारोबार पर सीधा असर सीमित रहने की उम्मीद है। बैंक को जून 2022 के बाद से JHL की ओर से कोई नई पूंजी नहीं मिली है। फंडिंग के मामले में बैंक स्वतंत्र रूप से काम करता है।

इसके अलावा JHL और बैंक के बोर्ड में कोई साझा प्रतिनिधित्व नहीं है। दोनों के कर्ज भी आपस में जुड़े नहीं हैं। इसलिए होल्डिंग कंपनी की रेटिंग में गिरावट का सीधा वित्तीय असर बैंक पर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।

हालांकि, अगर JHL आगे अपनी बची हुई हिस्सेदारी भी बेचती है, तो इससे Jana Small Finance Bank के शेयर पर शॉर्ट टर्म में दबाव बन सकता है। फिलहाल इस मामले पर Jana Holdings और Jana Small Finance Bank की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RFBL Flexi Pack को मिला ₹20 करोड़ का ऑर्डर, 4 महीने में करेगी सप्लाई

पैकेजिंग कंपनी RFBL Flexi Pack को घरेलू बाजार से 20 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी 3B Films को ट्रांसपेरेंट और मेटलाइज्ड फिल्म्स की सप्लाई करेगी। इस ऑर्डर को अगले चार महीनों में पूरा किया जाएगा।

कंपनी ने साफ किया कि यह किसी रिलेटेड पार्टी (Related Party) के साथ हुआ सौदा नहीं है। इस ऑर्डर में कंपनी के प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप की भी कोई हिस्सेदारी नहीं है।

RFBL Flexi Pack को मिलेगी मजबूती

कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से फ्लेक्सिबल पैकेजिंग कारोबार में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। ट्रांसपेरेंट और मेटलाइज्ड फिल्म्स का इस्तेमाल फूड, FMCG, फार्मा और इंडस्ट्रियल पैकेजिंग में बड़े पैमाने पर होता है।

ये फिल्म्स पैकेजिंग को ज्यादा मजबूत बनाती हैं। साथ ही उत्पाद को सुरक्षित रखने और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी मदद करती हैं। कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर अलग-अलग इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने की उसकी रणनीति को और मजबूत करेगा।

UAE में भी बढ़ाएगी कारोबार

हाल ही में RFBL Flexi ने UAE में अपनी सब्सिडियरी बनाने का फैसला किया है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाना और विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है।

मजबूत घरेलू कारोबार, बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और विदेशों में विस्तार की योजना के साथ RFBL Flexi Pack फ्लेक्सिबल पैकेजिंग इंडस्ट्री में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रही है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gaurav Khanna: ‘वो मेरी बीवी है यार’, तलाक की खबरों पर गौरव खन्ना ने दिया रिएक्शन

एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला और एक्टर गौरव खन्ना इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। आकांक्षा ने रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 2’ के पहले एपिसोड में बताया कि उन्होंने और गौरव खन्ना ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है। आकांक्षा ने बताया की वह पिछले 1 साल से एक दूसरे के साथ नहीं रह रहे हैं। वहीं तलाक की खबरों के बीच गौरव खन्ना लंबे समय बाद 30 जून को ‘लाफ्टर शेफ्स’ के सेट पर नजर आए। बिग बॉस 19 विनर गौरव खन्ना ‘लाफ्टर शेफ्स’ के सेट के बाहर पैपराजी को पोज देते नजर आए।

गौरव ने क्या कहा

इसी दौरान एक फोटोग्राफर ने उनसे पूछा, “गौरव भाई, क्या हाल है?” इस पर मुस्कुराते हुए गौरव ने कहा, “बस यार, वही जो पहले था, वही हाल है अभी भी। प्यार अभी भी बढ़ना है, सपोर्ट अभी भी बढ़ना है… मैं तो हमेशा आकांक्षा का साथ दूंगा, मेरी बीवी है यार। प्यार किया है तो पीछे क्यों हटूं।” जब आगे पूछा, “भाई, लेकिन कॉन्ट्रोवर्सी बहुत ज्यादा हो गई है…”, तो गौरव ने जवाब दिया, “आकांक्षा को जिंदगी के लिए मेरी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएं। मैं हमेशा उसके साथ खड़ा हूं और उसका सपोर्ट करता रहूंगा। वह अच्छा खेले और जीतकर वापस आए।”

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही फैंस ने इस पर अपना रिएक्शन देना शुरू कर दिया। एक फैन ने कमेंट किया, “Gk बेस्ट है।” वहीं दूसरे फैन ने लिखा, “उसकी आंखें,” और इसके साथ रोने वाली इमोजी भी शेयर की।

 

आकांक्षा ने क्या कहा

इस बीच, ‘लॉक अप’ के हालिया एपिसोड में आकांक्षा को अपने को-कंटेस्टेंट्स श्रेया कालरा और सूफी मोतीवाला से बात करते देखा गया। अपने तलाक की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, “जब हमारी शादी हुई थी, तब मेरे अंदर कभी मां बनने की इच्छा नहीं थी। मैंने खुद को समझने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि मैं इसके लिए बनी ही नहीं हूं। उस समय गौरव भी इस बात से ठीक थे, लेकिन समय के साथ उनका विचार बदल गया। अब वह बच्चे चाहते हैं और मैं उन्हें यह नहीं दे सकती। मेरे अंदर वह इंस्टिंक्ट नहीं है और मैंने यह बात उन्हें बहुत पहले ही बता दी थी। जब मुझे यकीन हो गया कि मैं इसके लिए नहीं बनी हूं, तभी मैंने साफ कह दिया था कि मैं ऐसा नहीं करूंगी। फिर मैंने उनसे कहा कि अगर वह मुझे छोड़ना चाहते हैं, तो छोड़ सकते हैं, मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।”

‘लॉक अप’ के लॉन्च इवेंट में आकांक्षा चमोला ने खुलासा किया कि वह और गौरव खन्ना पिछले करीब एक साल से अलग-अलग रह रहे हैं। उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाए, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे शो की पब्लिसिटी से जोड़कर भी देखा।

Multi Cap vs Flexi Cap: मल्टीकैप या फ्लेक्सी कैप… जानिए कौन-सा म्यूचुअल फंड आपके लिए रहेगा बेहतर?

Multi Cap vs Flexi Cap: जब हम अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने की सोचते हैं, तो चाहते हैं कि पैसा सुरक्षित रहे और अच्छा रिटर्न भी मिले। ऐसे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड काफी लोकप्रिय विकल्प है। लेकिन यहां भी अक्सर लोग मल्टी-कैप (Multi Cap) और फ्लेक्सी-कैप (Flexi Cap) फंड को लेकर उलझ जाते हैं।

नाम सुनने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन निवेश का तरीका और रणनीति अलग है। मनीफ्रंट के को-फाउंडर और CEO मोहित गांग ने आसान शब्दों में समझाया कि दोनों फंड कैसे काम करते हैं और किस तरह के निवेशक के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर हो सकता है।

मल्टी-कैप फंड कैसे काम करता है?

मल्टी-कैप फंड को आप ऐसे परिवार की तरह समझ सकते हैं, जहां हर खर्च पहले से तय होता है। SEBI के नियमों के मुताबिक, इस फंड को अपनी कुल रकम का कम से कम 75% शेयर बाजार में निवेश करना होता है।

इसके अलावा फंड मैनेजर को 25% लार्ज-कैप, 25% मिड-कैप और 25% स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करना ही पड़ता है। बाकी 25% रकम वह अपनी रणनीति के हिसाब से कहीं भी लगा सकता है।

मोहित गांग के मुताबिक, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी सीमा भी। फायदा यह है कि आपका पैसा हर तरह की कंपनियों में बंटा रहता है। लेकिन अगर बाजार में गिरावट आए और स्मॉल-कैप शेयर लगातार कमजोर चल रहे हों, तब भी फंड मैनेजर वहां से पूरा पैसा नहीं निकाल सकता। उसे नियमों के मुताबिक निवेश बनाए रखना पड़ता है। इससे जोखिम बढ़ सकता है।

फ्लेक्सी-कैप फंड में क्या खास है?

फ्लेक्सी-कैप फंड में फंड मैनेजर के पास ज्यादा आजादी होती है। इसे सिर्फ अपनी कुल रकम का कम से कम 65% शेयरों में निवेश करना होता है। इसके बाद वह बाजार की स्थिति के हिसाब से निवेश का फैसला ले सकता है।

अगर उसे लगता है कि आने वाले समय में स्मॉल-कैप कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी, तो वह वहां ज्यादा पैसा लगा सकता है। अगर बाजार में जोखिम बढ़ता दिखे, तो वह निवेश का बड़ा हिस्सा लार्ज-कैप कंपनियों में शिफ्ट कर सकता है। जरूरत पड़ने पर वह स्मॉल-कैप में निवेश शून्य भी कर सकता है।

मोहित गांग का कहना है कि फ्लेक्सी-कैप की सबसे बड़ी ताकत यही लचीलापन है। फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से रणनीति बदल सकता है। इससे गिरावट के दौर में जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

आपके लिए कौन-सा फंड सही रहेगा?

यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। मोहित गांग के मुताबिक, अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा परेशान नहीं होते, तो मल्टी-कैप फंड आपके लिए बेहतर हो सकता है। इसमें मिड और स्मॉल-कैप का हिस्सा तय होने की वजह से लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है।

अगर आप चाहते हैं कि बाजार की स्थिति के हिसाब से आपका पोर्टफोलियो बदलता रहे और जोखिम कुछ कम रहे, तो फ्लेक्सी-कैप फंड बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से निवेश का अनुपात बदल सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IND vs ENG: वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर सस्पेंस बरकरार, प्लेइंग इलेवन को लेकर श्रेयस अय्यर ने अब तक नहीं खोले पत्ते

IND vs ENG: आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस सीरीज में संजू सैमसन और ईशान किशन का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसके बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका देने की मांग और तेज हो गई है। वहीं आयरलैंड के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के साथ 5 मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को खेला जाएगा। भारत और इंग्लैंड के बीच पहले टी20 मैच से पहले कप्तान श्रेयस अय्यर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

श्रेयस अय्यर से जब पूछा गया कि क्या वैभव पहले मुकाबले में खेलेंगे, तो उन्होंने कहा कि टीम चयन से जुड़ी बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। अय्यर ने कहा कि वह टीम की रणनीति या प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दे सकते।

तोड़ सकते हैं रिकॉर्ड

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी से उम्मीद की कि उन्हें आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलेगा। टीम में चुने जाने के बाद वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन सकते थे। टीम प्रबंधन ने पहले दो मैचों में वैभव को मौका नहीं दिया और संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा व ईशान किशन जैसे अनुभवी बल्लेबाजों पर भरोसा जताया।

वैभव के डेब्यू पर क्या बोले अय्यर

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “देखिए, आपको कभी नहीं पता होता कि क्या होने वाला है। फिलहाल मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि टीम संयोजन से जुड़ी बातें पूरी तरह निजी होती हैं। हम अपनी रणनीति और प्लेइंग इलेवन के बारे में पहले से खुलासा नहीं कर सकते, क्योंकि इससे विपक्षी टीम को फायदा मिल सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “वैभव एक शानदार प्रतिभाशाली खिलाड़ी है और जब भी उसे मौका मिलेगा, मुझे पूरा भरोसा है कि वह बेहतरीन प्रदर्शन करेगा।”

अय्यर ने क्या कहा

जब उनसे बेंच पर बैठे खिलाड़ियों और विश्व कप विजेता खिलाड़ियों को लगातार मौका देने को लेकर सवाल पूछा गया, तो अय्यर ने टीम के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, “इस टीम में हर खिलाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक खिलाड़ी ने ही खुद को साबित किया है। हमें खिलाड़ियों का भरोसा बनाए रखना होगा और उन्हें लगातार मौके देने होंगे, ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे। जिन्होंने पिछला टी20 विश्व कप जीता है, उन्हें इस फॉर्मेट का अच्छा अनुभव है और वे लंबे समय से टीम के अहम खिलाड़ी रहे हैं। इसलिए उनका समर्थन करना जरूरी है।”

ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका, बर्थराइट सिटिजनशिप पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा झटका दिया है। US सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूनाइटेड स्टेट्स में बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक लगाने की वाली उनकी कोशिश को खारिज कर दिया। अदालत का यह फैसला अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और संविधान के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को नागरिकता मिलने का अधिकार है। अदालत ने इस पुराने संवैधानिक प्रावधान को फिर से सही माना।

इस साल दूसरी बार हुआ है जब कोर्ट ने ट्रंप की किसी बड़ी पहल को अमान्य कर दिया है, इससे पहले फरवरी में उनके बड़े ग्लोबल टैरिफ को खत्म करने का फैसला लिया गया था।

ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को झटका

दरअसल, जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के पहले दिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को जन्म के साथ मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता से वंचित करना था, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर हों। इस आदेश के तहत केवल उन्हीं बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता देने का प्रस्ताव था, जिनके कम से कम एक माता-पिता अमेरिकी नागरिक हों या कानूनी रूप से स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हों। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह आदेश लागू नहीं हो सकेगा।

बर्थराइट सिटिजनशिप  पर आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी गई थी। डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से कहते रहे हैं कि जन्म के आधार पर अपने-आप मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता की मौजूदा व्यवस्था का कुछ लोग गलत फायदा उठाते हैं, जिससे देश की इमिग्रेशन व्यवस्था प्रभावित होती है। वहीं, ट्रंप के विरोधियों का आरोप है कि उनकी सरकार की कई इमिग्रेशन नीतियां भेदभावपूर्ण रही हैं और उनका असर खास समुदायों के लोगों पर अधिक पड़ता है।

यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में मौजूद नागरिकता संबंधी प्रावधान से जुड़ा है। इस प्रावधान में कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले या कानूनी रूप से अमेरिकी नागरिक बनने वाले सभी लोग, जो देश के कानून के दायरे में आते हैं, अमेरिका के नागरिक माने जाएंगे। पिछले 150 से ज्यादा वर्षों से इस नियम का यही मतलब माना जाता रहा है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने ट्रंप प्रशासन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संविधान के नागरिकता संबंधी प्रावधान का मुख्य उद्देश्य पहले गुलाम रहे लोगों और उनकी आने वाली पीढ़ियों को अमेरिकी नागरिकता का अधिकार देना था। सॉयर ने यह भी कहा कि “बर्थ टूरिज्म” यानी सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए दूसरे देशों के लोगों का अमेरिका जाकर बच्चे को जन्म देने का चलन बढ़ रहा है। उनका दावा था कि कई विदेशी नागरिक इसी मकसद से अमेरिका आते हैं। हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने उनसे इस दावे के समर्थन में आंकड़े मांगे, तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह के मामलों की संख्या बताने वाला कोई ठोस या आधिकारिक डेटा उनके पास नहीं है।

El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा

IND vs ENG: ‘बेलफास्ट के हालात थे अलग’, इंग्लैंड सीरीज से पहले श्रेयस अय्यर का बड़ा बयान

आयरलैंड ने दो मैचों की टी20 सीरीज में भारत का 2-0 से सूपड़ा साफ कर दिया। इसके साथ ही साल 2023 के बाद पहली बार भारतीय टीम को किसी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में हार के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर को उम्मीद है कि इंग्लैंड के खिलाफ टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। भारतीय कप्तान के मुताबिक, इंग्लैंड में खेलने का माहौल खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित है, जबकि बेलफास्ट की परिस्थितियां अलग और चुनौतीपूर्ण थीं। ऐसे में टीम अब नई शुरुआत करते हुए सीरीज में दमदार वापसी करना चाहेगी।

कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि बेलफास्ट की परिस्थितियां टीम के लिए नई और चुनौतीपूर्ण थीं। उनका मानना है कि इंग्लैंड में होने वाले मुकाबलों की परिस्थितियां खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित होंगी, जिससे टीम बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। भारत अब पिछली हार को भूलकर दमदार वापसी करने की कोशिश करेगा।

मैदान काफी अलग था

श्रेयस अय्यर ने मंगलवार को कहा, “यह पूरी तरह अलग माहौल था। बेलफास्ट का मैदान सामान्य स्टेडियम जैसा नहीं था। आउटफील्ड में हल्की ढलान थी, मैदान कुछ जगह ऊबड़-खाबड़ था और उसका आकार भी थोड़ा अलग था। ऐसे में सिंगल और डबल रन रोकना आसान नहीं था। कप्तान के तौर पर फील्ड सेट करना भी चुनौतीपूर्ण रहा, क्योंकि हम ऐसी परिस्थितियों के आदी नहीं हैं। आईपीएल में ज्यादातर मैदान हर तरफ से बराबर होते हैं, इसलिए वहां खेलना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल रहा।”

इंग्लैड के खिलाफ करेंगे बेहतरीन प्रदर्शन

अय्यर को उम्मीद है कि इंग्लैंड के मैदान और माहौल भारतीय खिलाड़ियों के लिए ज्यादा परिचित हैं। अय्यर ने कहा, “यहां मैदान का आकार लगभग एक जैसा है, आउटफील्ड भी समतल है और स्टेडियम का माहौल बिल्कुल अलग होता है। यहां बड़ी संख्या में दर्शक भी आएंगे। हम पहले भी ऐसी परिस्थितियों में खेल चुके हैं, इसलिए खुद को ढालना आसान रहेगा।” उन्होंने यह भी माना कि बेलफास्ट में भारतीय बल्लेबाजों को काफी दिक्कत हुई, क्योंकि आयरलैंड के तेज गेंदबाजों ने अतिरिक्त उछाल और बड़ी स्क्वायर बाउंड्री का पूरा फायदा उठाते हुए बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

कब खेला जाएगा पहला टी20

आयरलैंड के खिलाफ शुरुआती हार के बाद श्रेयस अय्यर ने कहा था कि उनकी टीम किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं ले सकती। उन्होंने माना कि टीम नए हालात के अनुसार अपने खेल की योजना को सही तरीके से लागू नहीं कर सकी। अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ नई शुरुआत करने के इरादे से उतरेगी। दोनों टीमों के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। ये मुकाबला रात 10 बजे से शुरू होगा।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: बुधवार, 1 जुलाई के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं नए प्रोडक्ट और बड़ी डील का असर दिख सकता है, तो कहीं टैक्स विवाद और जून महीने के बिक्री आंकड़े निवेशकों की नजर में रहेंगे। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

KPIT Technologies

टेक्नोलॉजी कंपनी KPIT Technologies ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद से कमजोर रह सकती है। कंपनी को रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 1% की गिरावट का अनुमान है। वहीं EBITDA और नेट मार्जिन भी पिछली तिमाही के मुकाबले घट सकते हैं। हालांकि, कंपनी को दूसरी छमाही में कारोबार में सुधार और चौथी तिमाही में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

L&T Technology Services

इंजीनियरिंग और टेक कंपनी L&T Technology Services ने AI बेस्ड प्लेटफॉर्म Ainfonix 4.0 लॉन्च किया है। इसकी मदद से इंजीनियरिंग डॉक्युमेंट्स और तकनीकी रिकॉर्ड को डिजिटल डेटा में बदला जा सकेगा।

HDFC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life Insurance को GST मामले में झटका लगा है। थाणे के कमिश्नर (अपील) ने ब्याज और जुर्माने समेत 132.7 करोड़ रुपये की GST डिमांड को बरकरार रखा है।

Kotak Mahindra Bank

प्राइवेट सेक्टर के Kotak Mahindra Bank ने Deutsche Bank के साथ डील की है। कोटक इसके तहत बैंक के भारत में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को करीब 281.7 करोड़ रुपये में खरीदेगा।

Paras Defence

डिफेंस कंपनी Paras Defence and Space Technologies ने Tandem Defense LLC के साथ Guardian-1 Interceptor तकनीक के लिए IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है।

Prestige Estates Projects

रियल एस्टेट कंपनी Prestige Estates Projects ने मुंबई के मुलुंड में Prestige Forest Hills प्रोजेक्ट का दूसरा चरण लॉन्च किया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 2,200 करोड़ रुपये है।

Auto Stocks

ऑटो सेक्टर की कंपनियां जून महीने के बिक्री आंकड़े जारी करेंगी। अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26% और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 18% की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है।

Hexaware Technologies

आईटी कंपनी Hexaware Technologies ने Tensai for Reasoning Ops नाम का नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसका मकसद एंटरप्राइज आईटी ऑपरेशंस में एजेंटिक AI का इस्तेमाल बढ़ाना है।

Zaggle Prepaid Ocean Services

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid Ocean Services ने APAC Financial Services के साथ 5 साल का समझौता किया है। इसके तहत कंपनी अपने एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म की सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

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665KM रेंज, 5.8 सेकंड में 100kmph की रफ्तार! Tata Sierra EV हुई लॉन्च, जानें कीमत, फीचर्स और बैटरी की पूरी डिटेल

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने भारत में अपनी नई Tata Sierra EV लॉन्च कर दी है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये रखी गई है। इसके साथ ही टाटा की सबसे लोकप्रिय एसयूवी में से एक सिएरा अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूप में भारतीय बाजार में लौट आई है। नई Tata Sierra EV कुल पांच वेरिएंट में उपलब्ध है। इसमें दो बैटरी पैक का विकल्प मिलता है। कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) की ड्राइविंग रेंज देती है। इसके अलावा इसमें ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) का विकल्प और बैटरी पर लाइफटाइम वारंटी भी दी गई है।

यह टाटा मोटर्स की सातवीं इलेक्ट्रिक कार है। इससे पहले कंपनी टियागो ईवी, टिगोर ईवी, पंच ईवी, नेक्सॉन ईवी, कर्व ईवी और हैरियर ईवी को बाजार में उतार चुकी है। Tata Sierra EV की बुकिंग आज से शुरू हो गई है, जबकि इसकी डिलीवरी 15 जुलाई से शुरू होगी। ग्राहक चाहें तो 49,000 रुपये अतिरिक्त देकर 7.2 किलोवॉट एसी फास्ट चार्जर का विकल्प भी ले सकते हैं।

Tata Sierra EV: कीमत और वेरिएंट

Tata Sierra EV को कंपनी ने पांच वेरिएंट में लॉन्च किया है। इनमें प्योर, प्योर एस, एडवेंचर, एम्पावर्ड और एम्पावर्ड ए शामिल हैं। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 18.79 लाख रुपये है। वहीं, इसका सबसे टॉप मॉडल एम्पावर्ड ए (QWD) 25.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में उपलब्ध है। यह वेरिएंट सबसे ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस के साथ आता है।

Tata Sierra EV: बैटरी, रेंज और चार्जिंग

Tata Sierra EV में दो बैटरी विकल्प दिए गए हैं। पहला 63 kWh और दूसरा 75 kWh बैटरी पैक है। कंपनी के मुताबिक, 75 kWh बैटरी एक बार फुल चार्ज होने पर 665 किलोमीटर तक (एमआईडीसी प्रमाणित) चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी की रेंज 565 किलोमीटर बताई गई है।

टाटा मोटर्स का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में 75 kWh बैटरी वाली सिएरा ईवी करीब 510 से 530 किलोमीटर तक चल सकती है। वहीं, 63 kWh बैटरी वाला मॉडल 440 से 460 किलोमीटर तक की वास्तविक ड्राइविंग रेंज देगा। इसके अलावा 75 kWh बैटरी के साथ आने वाला क्वाड-व्हील ड्राइव (QWD) मॉडल एक बार चार्ज करने पर 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने का दावा करता है।

चार्जिंग की बात करें तो इसमें 120 kW डीसी फास्ट चार्जिंग, 7.2 kW एसी चार्जिंग और 3.3 kW एसी चार्जिंग का विकल्प मिलता है। 120 kW डीसी फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी को सिर्फ 26 मिनट में 20% से 80% तक चार्ज किया जा सकता है। वहीं, कंपनी का दावा है कि 15 मिनट की फास्ट चार्जिंग में यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 250 किलोमीटर से ज्यादा की ड्राइविंग रेंज दे सकती है।

इसके अलावा Tata Sierra EV में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) और व्हीकल-टू-लोड (V2L) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी गई हैं। इनकी मदद से जरूरत पड़ने पर कार से दूसरे इलेक्ट्रिक वाहन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी बिजली दी जा सकती है।

Tata Sierra EV: पावर और परफॉर्मेंस

Tata Sierra EV को कंपनी ने दो इलेक्ट्रिक मोटर विकल्पों के साथ पेश किया है। इसके रियर-व्हील ड्राइव (RWD) मॉडल में 175 kW की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 340 Nm का टॉर्क पैदा करती है। वहीं, इसके टॉप वेरिएंट में 103 kW की फ्रंट मोटर भी मिलती है। दोनों मोटरों के साथ यह एसयूवी ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) सिस्टम से लैस हो जाती है, जिससे इसकी पकड़ और प्रदर्शन बेहतर हो जाता है। टाटा मोटर्स का दावा है कि सिएरा ईवी महज 5.8 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी के अनुसार, यह अब तक भारत में लॉन्च हुई सबसे तेज इलेक्ट्रिक एसयूवी है।

Tata Sierra EV: डिजाइन और फीचर्स

Tata Sierra EV का डिजाइन काफी हद तक सिएरा के पेट्रोल-डीजल (आईसीई) मॉडल जैसा है, लेकिन इसे इलेक्ट्रिक एसयूवी का आधुनिक लुक देने के लिए कई खास बदलाव किए गए हैं। इसमें आगे की तरफ पारंपरिक ग्रिल की जगह बंद फ्रंट पैनल दिया गया है, जो आज की ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारों की पहचान बन चुका है। इसके अलावा कार के फ्रंट बंपर को भी नया डिजाइन दिया गया है, जिससे इसका लुक और ज्यादा आकर्षक दिखाई देता है। वहीं, पीछे की तरफ कार के डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं किए गए हैं। इसका रियर लुक पेट्रोल-डीजल मॉडल जैसा ही रखा गया है, जिससे सिएरा की पहचान बरकरार रहती है।