15 मिनट लेट हुई ट्रेन तो मिलेगा अलर्ट, रेलवे का ‘Punctuality BZA’ ऐप लॉन्च…देगा अहम जानकारियां

भारत में ट्रेनों का लेट होना लंबे समय से यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी रहा है। कई बार ट्रेन कितनी देर से चल रही है, इसकी सही जानकारी भी समय पर नहीं मिल पाती। हालांकि, रेलवे अब इस समस्या से निपटने के लिए तकनीक का सहारा ले रहा है। इंडियन रेलवे ने ट्रेनों के समय पर चलने और उनकी देरी पर रियल-टाइम नजर रखने के लिए अपना पहला एंड्रॉयड आधारित मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप का नाम ‘पंक्चुअलिटी’ (Punctuality BZA) है। इसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा मंडल ने तैयार किया है।

रेलवे ला रहा है ये नया ऐप

यह ऐप रेलवे अधिकारियों को ट्रेनों की आवाजाही और देरी की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराएगा। इस ऐप की मदद से रेलवे अधिकारी और कंट्रोल रूम के कर्मचारी कहीं से भी ट्रेनों की स्थिति पर नजर रख सकेंगे। इसके लिए अब डेस्कटॉप सिस्टम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। जानकारी के मुताबिक यह नया ऐप पुराने ICMS वेब पोर्टल की कई परेशानियों को भी दूर करता है। पहले अधिकारियों को अलग-अलग स्क्रीन पर जाना पड़ता था और बार-बार ओटीपी डालकर लॉग इन करना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो गई है।

15 मिनट से ज्यादा लेट हुई ट्रेन तो मिलेगा अलर्ट

साउथ कोस्ट रेलवे के मुताबिक, ‘Punctuality BZA’ ऐप में ट्रेनों से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी एक ही डैशबोर्ड पर मिल जाती है। इस ऐप के जरिए अधिकारी अलग-अलग रेल सेक्शन में ट्रेनों की स्थिति, लेट चल रही ट्रेनों की निगरानी, समय पर चलने से जुड़े आंकड़े और रास्ते में छूट गई ट्रेनों की जानकारी आसानी से देख सकते हैं। इस ऐप की एक खास सुविधा यह भी है कि अगर कोई ट्रेन 15 मिनट से ज्यादा देर होती है, तो अधिकारियों को अपने आप नोटिफिकेशन मिल जाता है। इससे वे तुरंत स्थिति का पता लगाकर जरूरी कदम उठा सकते हैं।

रियल-टाइम निगरानी में मिलेगी काफी मदद

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह ऐप ट्रेनों की रियल-टाइम निगरानी में काफी मदद करेगा। इससे हालात को बेहतर तरीके से समझना, जल्दी फैसला लेना और ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए तुरंत जरूरी कार्रवाई करना आसान होगा। नए ‘Punctuality BZA’ ऐप को लेट ट्रेन मॉनिटरिंग (LTM BZA) सिस्टम से भी जोड़ा गया है। यह रेलवे का अंदरूनी सिस्टम है, जो ट्रेन मैनेजरों के लिए ट्रेन संचालन से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज अपने आप तैयार करता है। इस ऐप की मदद से रेलवे अधिकारी रियल-टाइम में ट्रेनों की देरी और उनकी आवाजाही की पूरी जानकारी देख सकते हैं। इससे किसी भी परिचालन समस्या की पहचान जल्दी हो जाती है और अधिकारी तुरंत जरूरी कार्रवाई कर सकते हैं। इससे ट्रेनों के समय पर संचालन को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।

एक झटके में खत्म हुआ टीम इंडिया का 3 साल का दबदबा! आखिरी बार कब हारी थी टी20 सीरीज

टी20 क्रिकेट में भारत का जीत का सिलसिला आयरलैंड के खिलाफ खत्म हो गया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम तीन दिनों के अंदर दो मैचों की टी20 सीरीज में 0-2 से हार गई। इस हार के साथ टीम इंडिया का टी20 क्रिकेट में शानदार सफर और दबदबा फिलहाल थम गया है। बेलफास्ट में खेले गए दोनों मुकाबलों में आयरलैंड ने शानदार खेल दिखाते हुए पहली बार भारत को टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप कर इतिहास रच दिया। भारतीय फैंस के लिए ये हार किसी बड़े झटके से कम नहीं है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों से बेहद शानदार रहा है।

टीम इंडिया ने बाइलेटरल सीरीज के साथ-साथ बड़े टूर्नामेंटों में भी लगातार बेहतरीन खेल दिखाया है। साल 2020 के बाद से टीम इंडिया को सिर्फ तीसरी बार किसी बाइलेटरल टी20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के हाथों पांच मैचों की सीरीज में भारत को 3-2 से हार का सामना करना पड़ा था

आखिरी बार कब हारी थी टीम इंडिया

आयरलैंड दौरे से पहले भारतीय टीम लगातार 16 द्विपक्षीय टी20 सीरीज से अजेय चल रही थी। इससे पहले उसे आखिरी बार अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज गंवानी पड़ी थी, जहां पांच मैचों की सीरीज में भारत 3-2 से हार गया था। उस दौरे में टीम इंडिया शुरुआती दोनों मुकाबले हार गई थी। शुरुआती दो मैच हारने के बाद भारत ने शानदार वापसी करते हुए लगातार दो मुकाबले जीत लिए और सीरीज 2-2 से बराबर कर दी। इसके बाद आखिरी और निर्णायक मुकाबला अमेरिका के लॉडरहिल में खेला गया। इस मैच में भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 165 रन ही बना सकी। जवाब में वेस्टइंडीज ने लक्ष्य को दो ओवर शेष रहते हासिल कर लिया और सीरीज़ अपने नाम कर ली।

आयरलैंड के लिए भारत को हराना उसकी क्रिकेट यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले टीम ने 2011 वनडे विश्व कप में इंग्लैंड को हराकर इतिहास रचा था, लेकिन इस बार मौजूदा टी20 विश्व चैंपियन भारत को सीरीज में हराना उससे भी बड़ी सफलता माना जा रहा है।

आयरलैंड से हारी भारतीय टीम

तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का जय मूंदड़ा ने शानदार फायदा उठाया। उन्होंने अपनी सटीक गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। जय ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को बिना खाता खोले पवेलियन भेजा, वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर का अहम विकेट लेकर उन्होंने 3 विकेट झटके और अपनी टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। बेलफास्ट में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 154 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 155 रन के टारगेट का पीछा करते हुए 9 विकेट पर 153 रन ही बना सकी और 1 रन से मैच हार गई। आखिर में हर्षित राणा ने 10 गेंदों में 21 रन बनाकर जीत की उम्मीद जगाई, लेकिन अंतिम ओवर में उनका विकेट गिरते ही भारत की उम्मीदें भी खत्म हो गईं।

F&O ट्रेडिंग में जल्द बड़ा बदलाव! लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर SEBI का ये है नया प्लान

SEBI Long Term Derivatives Market: जल्द ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के उस प्रस्ताव को मार्केट एक्सपर्ट्स और पार्टिसिपेंट्स का बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिसमें उन्होंने बाजार में लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने की बात कही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से भारतीय कैपिटल मार्केट मजबूत होगा।

हालांकि, बाजार के दिग्गजों का यह भी कहना है कि ये लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स तभी कामयाब हो सकते हैं, जब लिक्विडिटी, मार्केट मेकिंग, मार्जिन नियमों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी जैसी ढांचागत कमियों को दूर किया जाए। आइए समझते हैं कि लॉन्ग-टर्म F&O को लेकर SEBI का क्या है पूरा प्लान और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं।

क्यों है लॉन्ग-टर्म F&O पर सेबी का फोकस?

19 जून 2026 को हुई सेबी की बोर्ड बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि शॉर्ट-टर्म के अलावा लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स भी मार्केट में मिलने चाहिए। सेबी इस समय रिटेल निवेशकों के नुकसान को लेकर एक बड़ा स्टडी डेटा जुलाई 2026 में जारी करने वाला है, जिसके बाद डेरिवेटिव मार्केट की समीक्षा की जा रही है। सेबी का मानना है कि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स आने से बाजार में केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म हेजिंग यानी जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन कम करना क्यों जरूरी?

हेज फंड मैनेजर मयंक बंसल के मुताबिक, भारत का मौजूदा मार्जिन फ्रेमवर्क लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स को आकर्षक नहीं बनाता। इस समय लंबी अवधि के इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर मार्जिन काफी ज्यादा है:

रेगुलर इंडेक्स डेरिवेटिव्स मार्जिन: 9.3%

लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस के लिए स्पैन फ्लोर: 17.7% (जो कि काफी ज्यादा है)

एक्सपोजर मार्जिन (ELM): 5%

सेबी के पूर्व होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण जी ने भी कहा कि लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन नियमों को तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है, लेकिन इसके लिए एक विस्तृत स्टडी और रिव्यू की जरूरत है।

मार्केट मेकर्स और STT पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

क्रॉस सीज कैपिटल के एमडी राजेश बहेती ने कहा कि इन प्रोडक्ट्स की सफलता के लिए ‘डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर्स’ की जरूरत होगी, जो दोनों तरफ यानी बाय और सेल के कोट्स उपलब्ध करा सकें। इसके लिए उन्हें मिलने वाला इंसेंटिव ट्रांजैक्शन कॉस्ट और STT से ज्यादा होना चाहिए।

एनएमआई के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का मानना है कि शुरुआत में इन्हें इंडेक्स डेरिवेटिव्स जैसे- निफ्टी, सेंसेक्स में लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है और मैनिपुलेशन का रिस्क नहीं रहता। बाद में इसे चुनिंदा लिक्विड स्टॉक्स में बढ़ाया जा सकता है।

क्या वीकली एक्सपायरी जैसे वॉल्यूम की बराबरी कर पाएगा लॉन्ग-टर्म?

एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि मार्जिन कम होने के बाद भी लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स कभी भी वीकली या मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स के वॉल्यूम की बराबरी नहीं कर पाएंगे। ऑप्शंस ग्रीक्स के काम करने के तरीके के कारण लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस में कम अवधि के मुकाबले प्रति यूनिट कैपिटल पर रिटर्न काफी कम मिलता है। अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक बाजारों में भी वीकली और शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स का वॉल्यूम ही सबसे ज्यादा रहता है, जबकि लॉन्ग-टर्म का इस्तेमाल पेंशन फंड्स और एसेट मैनेजर्स अपनी होल्डिंग को हेज करने के लिए करते हैं।

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमन आर ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बीएसई पहले से ही ‘BSE Focused IT Index’ और ‘Bankex’ जैसे लॉन्ग-टर्म सुइट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने भी माना कि एसटीटी और मार्जिन फ्रेमवर्क की समीक्षा से इसे तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

Bajaj Auto Share Buyback: ₹5633 करोड़ का ऑफर 1 जुलाई से, ₹12000 के भाव पर खरीद; किस रेशियो में मंजूर होंगे शेयर

टूव्हीलर और थ्रीव्हीलर मेकर Bajaj Auto Ltd शेयर बायबैक कर रही है। इसके लिए ​विंडो 1 जुलाई 2026 से खुलेगी और 7 जुलाई को बंद होगी। बायबैक का साइज ₹5,632.8 करोड़ है। कंपनी ने एनटाइटलमेंट रेशियो की घोषणा कर दी है। बायबैक में कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स से ₹10 प्रति शेयर फेस वैल्यू वाले 46.94 लाख इक्विटी शेयर वापस खरीदने वाली है। शेयरों की यह संख्या कंपनी के कुल इक्विटी शेयरों का 1.68% है। Bajaj Auto के शेयर बायबैक की कीमत ₹12,000 प्रति शेयर तय की गई है।

इस तरह कंपनी इस बायबैक के लिए ₹5,633 करोड़ (₹5,632,80,00,000) खर्च करेगी। इस रकम में अन्य खर्च, ब्रोकरेज फीस और लागू टैक्स शामिल नहीं हैं। इस शेयर बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट 24 जून थी। रिकॉर्ड डेट से एक दिन पहले मार्केट क्लोजिंग टाइम तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में रहे होंगे, वे बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे।

Bajaj Auto ने क्या रखा है बायबैक रेशियो?

बायबैक ऑफर के तहत छोटे शेयरहोल्डर्स के लिए रिजर्व कैटेगरी में आने वाले पात्र शेयरहोल्डर रिकॉर्ड डेट (24 जून) पर अपने पास मौजूद हर 61 इक्विटी शेयरों के लिए 17 इक्विटी शेयर टेंडर कर सकते हैं, यानि कि बेचने के लिए पेश कर सकते हैं। जनरल कैटेगरी में आने वाले शेयरहोल्डर रिकॉर्ड डेट पर उनके पास मौजूद हर 525 इक्विटी शेयरों पर 17 इक्विटी शेयर टेंडर कर सकते हैं। कंपनी के प्रमोटर्स, प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों और कंपनी का कंट्रोल रखने वाले लोगों ने संकेत दिया है कि वे बायबैक में हिस्सा नहीं लेंगे। स्टॉक एक्सचेंजेस पर बिड्स के सेटलमेंट की लास्ट डेट 14 जुलाई है।

कंपनी ने इस बायबैक की घोषणा 6 मई को तिमाही और सालाना नतीजे जारी करने के साथ की थी। शेयरहोल्डर्स ने प्रपोजल को मंजूरी 14 मई को दी। इससे पहले बजाज ऑटो ने साल 2024 में शेयर बायबैक किया था। उस वक्त कंपनी ने शेयरहोल्डर्स से कुल इक्विटी शेयरों का 1.41% हिस्सा ₹10,000 प्रति शेयर की कीमत पर वापस खरीदा था।

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सोमवार को Bajaj Auto के शेयर में गिरावट

Bajaj Auto के शेयर में 29 जून को 2% की गिरावट रही। BSE पर कीमत ₹9628.15 पर बंद हुई। कंपनी का मार्केट कैप ₹2.69 लाख करोड़ से ज्यादा है। शेयर 3 साल में निवेशकों का पैसा डबल कर चुका है। मार्च 2026 तिमाही के अंत तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 55.01% हिस्सेदारी थी। बजाज ऑटो के अब लगभग 3 लाख खुदरा शेयरधारक हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : बाजार में बढ़त का सिलसिला थमा, जानिए 30 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : भारतीय इक्विटी इंडेक्स का दो दिन से जारी बढ़त का सिलसिला 29 जून को टूट गया और बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,000 के नीचे रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 372.10 अंक या 0.48 प्रतिशत गिरकर 76,728.37 पर और निफ्टी 109.75 अंक या 0.46 प्रतिशत गिरकर 23,946.25 पर बंद हुआ। लगभग 1681 शेयरों में बढ़त हुई,2471 शेयरों में गिरावट आई और 202 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,M&M,मारुति सुजुकी,अदाणी एंटरप्राइजेज और इंटरग्लोब एविएशन शामिल रहे। जबकि बढ़त वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर,कोल इंडिया,डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज,एटरनल और ट्रेंट शामिल रहे।

सेक्टरों की बात करें तो ऑटो इंडेक्स में 2% की गिरावट आई। जबकि PSU बैंक,मीडिया,IT और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर,मेटल,फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 1-1% की बढ़त हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे आया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि US-ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के टिके रहने को लेकर निवेशकों के सतर्क नजरिए के कारण अहम साइकोलॉजिकल लेवल के पास प्रॉफिट बुकिंग जारी रही। फिलहाल बाजार में निकट भविष्य के लिए कोई साफ दिशा नहीं दिख रही है। सप्लाई की कमी,लगातार बने महंगाई क दबाव और कमजोर मॉनसून की संभावनाओं के बीच Q1FY27 अर्निंग्स सीजन को लेकर उम्मीदें कमजोर बनी हुई हैं। इन सभी का असर मार्जिन पर पड़ने की आशंका है। बाजार में हर तरफ बिकवाली रही। हालांकि,फ़ार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया, क्योंकि इनकी मांग में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता और इनकी अर्निंग का अनुमान लगाना आसान होता है।

निवेशक US के आने वाले’नॉन-फ़ार्म पेरोल’डेटा को लेकर भी सतर्क हैं। यह डेटा फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी की दिशा पर असर डाल सकता है और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की मौजूदा उम्मीदों को या तो मज़बूत कर सकता है या उनमें कमी ला सकता है। घरेलू बाजार से FII की निकासी में कमी और AI-आधारित ग्लोबल मार्केट के जोश का ठंडा होना,आगे चलकर बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की और पूरे समय दबाव में रहा,क्योंकि इंडेक्स ऑवर्ली चार्ट पर 50EMA के नीचे आ गया। मोमेंटम इंडिकेटर भी कमजोर रहा और RSI में’बेयरिश क्रॉसओवर’दिखा,जो बताता है कि निकट भविष्य में सेंटीमेंट कमजोर रह सकता है।

मंगलवार को NSE की मंथली एक्सपायरी के कारण एकआध दिन उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है। हालांकि,जब तक इंडेक्स 23,800 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना हुआ है,तब तक शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना रहेगा। जब तक निफ्टी 23,800 के नीचे नहीं जाता,तब तक गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। ऊपरी स्तर पर 24,200 के तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर काम करते रहने की संभावना है।

कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान का कहना है कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में ऊंचे लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। निफ्टी 110 अंक गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 372 अंकों की गिरावट आई। सेक्टर की बात करें तो फार्मा,हेल्थकेयर और मेटल इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत की तेजी आई,जबकि ऑटो इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

टेक्निकल तौर पर सुस्त शुरुआत के बाद बाजार में पूरे दिन ऊंचे लेवल पर बिकवाली का दबाव देखा गया। डेली चार्ट पर एक’बेयरिश कैंडल’भी बनी,जो मौजूदा लेवल से और कमजोरी आने का संकेत देती है।

अब निफ्टी में 24,000 का लेवल डे ट्रेडर्स के लिए एक अहम रेफरेंस प्वाइंट होगा। इस लेवल के नीचे,निफ्टी 50-दिन के SMA(सिंपल मूविंग एवरेज)या 23,800–23,750 के लेवल को फिर से टेस्ट कर सकता है। दूसरी ओर,24,000 के ऊपर जाने पर तेजी 24,150–24,200 तक जारी रह सकती है। इंट्राडे मार्केट का ट्रेंड किसी खास दिशा में नहीं है। इसलिए,डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

 

Trading Strategy: बाजार में रीबैलेंसिंग की बिकवाली की वजह से भी बना थोड़ा दबाव,आज और कल की चाल को ना समझें बड़ा ट्रेंड

 

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10,200mAh बैटरी के साथ Motorola का नया टैबलेट लॉन्च, जानें कीमत और स्पेसिफिकेशन्स

Moto Pad 70 Pro: Motorola ने भारत में अपना नया फ्लैगशिप टैबलेट, Moto Pad 70 Pro लॉन्च किया है, जो भारत में अगले महीने बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। कंपनी ने इस डिवाइस को खासतौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो मल्टीटास्किंग, स्टडी, एंटरटेनमेंट और प्रोफेशनल काम के लिए एक दमदार टैबलेट ढूंढ रहे हैं। बता दें कि इस टैबलेट में octa-core Snapdragon प्रोसेसर, 13MP का बैक कैमरा, 800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस और 10,200mAh की बैटरी दी गई है। अब चलिए जानते हैं इसके स्पेसिफिकेशन्स और कीमते के बारे में।

Moto Pad 70 Pro: भारत में कीमत

Moto Pad 70 Pro के बेस वेरिएंट (8GB RAM और 128GB स्टोरेज) की शुरुआती कीमत ₹36,999 है। इसके टॉप-एंड वेरिएंट (256GB स्टोरेज) की कीमत ₹39,999 है। खास बात यह है कि इच्छुक खरीदार इस टैबलेट को कंपनी के स्नैप-ऑन कीबोर्ड के साथ ₹45,999 में भी खरीद सकते हैं, जबकि कीबोर्ड अलग से ₹5,999 में बेचा जाएगा। डिस्काउंट की बात करें तो ICICI बैंक कार्ड्स के साथ आपको ₹4,000 की इंस्टेंट छूट मिल सकती है।

यह टैबलेट 4 जुलाई को भारत में कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट और Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इसे सिर्फ ‘Pantone Titan’ कलर ऑप्शन में खरीदा जा सकता है।

Moto Pad 70 Pro: स्पेसिफिकेशन्स

Moto Pad 70 Pro में Android 16 पर आधारित Hello UI मिलता है। इस टैबलेट में Android 18 तक OS अपग्रेड और चार साल तक सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे। इसके अलावा, इसमें 13-इंच की LCD टचस्क्रीन (3,504×2,190 पिक्सल) है, जो 144Hz तक का रिफ्रेश रेट और 800 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस देती है। इस टैबलेट में 319 ppi पिक्सल डेंसिटी, Dolby Vision और Moto Pen Pro का सपोर्ट भी मिलता है।

प्रोसेसर की बात करें तो इसमें Qualcomm का ऑक्टा-कोर Snapdragon 8s Gen 4 चिपसेट दिया गया है। इसमें एक एडवांस्ड NPU, 8GB RAM और 256GB तक की ऑनबोर्ड स्टोरेज भी है। कैमरे की बात करें तो टैबलेट में ऑटोफोकस के साथ 13MP का बैक कैमरा और वीडियो कॉलिंग व सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

इसके साथ ही Moto Pad 70 Pro में 10,200mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें Wi-Fi 7 और Bluetooth 6.0 का सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा USB 3.2 Gen 1 Type-C पोर्ट और gyroscope भी दिया गया है। इस टैबलेट का साइज 296.48 × 191.91 × 6.20mm है और इसका वजन लगभग 589gm है।

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Delhi New EV Policy Explainer: 1 जुलाई से दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी, टू-व्हीलर और बड़ी गाड़ियां खरीदने पर मिलेगी इतनी छूट, देखें लिस्ट

Delhi New EV Policy 2026 Subsidies: दिल्ली में रहने वालों और नई गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली कैबिनेट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में राज्य की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। यह नई पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही है।

अगर आप टू-व्हीलर, ऑटो या कमर्शियल गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, तो सरकार आपको भारी-भरकम छूट देने जा रही है। इस नीति को लागू करने के लिए सरकार करीब ₹7000 करोड़ खर्च करेगी और यह 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी। आइए समझते हैं कि आपको किस गाड़ी पर कितनी छूट मिलेगी और कौन से नए नियम लागू होने जा रहे हैं।

गाड़ियों पर मिलने वाली सब्सिडी की पूरी लिस्ट

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर निहारिका के मुताबिक, नए नियमों के तहत अलग-अलग कैटेगरी की गाड़ियों पर मिलने वाली छूट और इंसेंटिव इस प्रकार हैं:

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (बाइक/स्कूटर): नया इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने पर अधिकतम ₹30000 तक की सीधी छूट यानी सब्सिडी मिलेगी।

इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा: तीन पहिया ऑटो खरीदने वाले ग्राहकों को ₹50000 तक का इंसेंटिव दिया जाएगा।

N1 इलेक्ट्रिक ट्रक्स (माल ढोने वाली गाड़ियां): बड़ी कमर्शियल गाड़ियों की खरीद पर सबसे ज्यादा ₹1 लाख तक की बड़ी छूट मिलेगी।

स्क्रैपिंग का एक्स्ट्रा फायदा: अगर आप अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को कबाड़ में देकर नई ईवी खरीदते हैं, तो आपको अलग से स्क्रैपिंग इंसेंटिव का लाभ भी दिया जाएगा।

टैक्स और रजिस्ट्रेशन में 100% की छूट, हाइब्रिड को झटका

अगर आप पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदते हैं, तो आपको दिल्ली सरकार की तरफ से रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की पूरी छूट मिलेगी। यानी सीधे तौर पर हजारों रुपये की एक्स्ट्रा बचत होगी।

हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इस बार हाइब्रिड गाड़ियों पर किसी भी तरह की सब्सिडी या विशेष छूट का प्रावधान नहीं किया गया है। अच्छी बात यह है कि इस पॉलिसी में गाड़ियों की संख्या पर कोई लिमिट नहीं है, यानी एक खरीदार एक से ज्यादा ईवी खरीदने पर भी इन फायदों का लाभ उठा सकता है।

पेट्रोल-डीजल और CNG गाड़ियों पर कब से लगेगा बैन?

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा और ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी गाड़ियों के नए रजिस्ट्रेशन को बंद करने का कड़ा फैसला लिया है:

1 जनवरी 2027 से: दिल्ली में सभी नए थ्री-व्हीलर्स (ऑटो) और N1 कैटेगरी के ट्रक्स का रजिस्ट्रेशन सिर्फ और सिर्फ EV के रूप में ही होगा।

1 अप्रैल 2028 से: दिल्ली में सभी नए टू-व्हीलर्स (बाइक और स्कूटर) का रजिस्ट्रेशन भी सिर्फ इलेक्ट्रिक वेरिएंट में ही किया जाएगा। यानी इसके बाद नए पेट्रोल स्कूटर नहीं खरीदे जा सकेंगे।

स्कूल बसों का इलेक्ट्रिफिकेशन: दिल्ली के स्कूलों में चलने वाली बसों के बेड़े को भी धीरे-धीरे चरणों में पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया जाएगा।

23000 नए चार्जिंग पॉइंट्स और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर

पावर मिनिस्टर आशीष सूद के अनुसार, जैसे-जैसे दिल्ली में ईवी गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, उसी रफ्तार से बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड को भी मजबूत किया जाएगा ताकि पावर सप्लाई में कोई दिक्कत न आए। इस पूरी पॉलिसी की अवधि 2026 से 2030 के दौरान दिल्लीभर में 23000 नए ईवी चार्जिंग पॉइंट्स लगाए जाएंगे ताकि लोगों को रेंज या चार्जिंग स्टेशन खोजने की चिंता न रहे।

Netweb Share Price: डेटा सेंटर कंपनी का स्टॉक 10% टूटा, जानिए किस वजह से आई इतनी बड़ी गिरावट

Netweb Share Price: डेटा सेंटर कंपनी Netweb Technologies India के शेयर सोमवार को कारोबार के दौरान 10% तक टूट गए। इसकी वजह कंपनी का फंड जुटाने की योजना रही।

शेयर कारोबार के दौरान 4,450 रुपये तक गिर गया। आखिर में यह 9.34% की गिरावट के साथ 4,482 रुपये पर बंद हुआ।

1 जुलाई को होगी बोर्ड बैठक

Netweb Technologies ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि 1 जुलाई को बोर्ड की बैठक होगी। इस बैठक में एक या एक से ज्यादा फंड जुटाने के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। मंजूरी मिलने पर बोर्ड इन्हें आगे बढ़ा सकता है।

कैसे जुटाया जा सकता है फंड?

Netweb Technologies इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, कन्वर्टिबल या नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर, वारंट या दूसरे इक्विटी लिंक्ड सिक्योरिटीज जारी कर फंड जुटा सकती है। जरूरत के हिसाब से इनमें से एक या एक से ज्यादा विकल्प अपनाए जा सकते हैं।

कई रास्तों पर विचार

Netweb Technologies ने कहा कि फंड जुटाने के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), प्राइवेट प्लेसमेंट, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO), राइट्स इश्यू या कानून के तहत उपलब्ध किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर जरूरत पड़ी, तो इस प्रस्ताव में ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल किया जा सकता है।

Netweb के शेयरों का हाल

Netweb का शेयर सोमवार 9.34% की गिरकर 4,482 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 6 महीने के दौरान इसमें 45.58% की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसने 142% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 25.52 हजार करोड़ रुपये है।

Netweb का बिजनेस

Netweb Technologies हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) और AI सर्वर बनाने वाली कंपनी है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस भी देती है। कंपनी सरकारी संस्थानों, रिसर्च संगठनों और बड़े एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए सुपरकंप्यूटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार करती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील पर ₹5 लाख का लगेगा जुर्माना! चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

Ram Temple Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में वकीलों ने सोमवार (29 जून) को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह ऐलान बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक के बाद किया गया। सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने जोरदार मांग की है कि मंदिर मैनेजमेंट से जुड़े रहे चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों तीन दिन के भीतर शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अयोध्या के अंदर आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा, “कोई भी वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा। अगर कोई वकील उनका पक्ष रखता है, तो उसे एसोसिएशन के कंट्रीब्यूशन फंड में प्रति नाम 5 लाख रुपये जमा करने होंगे।”

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की मांग

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से आगे कहा, “चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए CrPC की धारा 173 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी। CBI जांच की मांग की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी।”

अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद कोर्ट में पेश किया गया था।

‘सभी की भावनाएं आहत हुई हैं’

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के वकील गिरफ्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।”

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वहीं, कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।

8 आरोपी गिरफ्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। रविवार को पुलिस टीमों ने सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ तलाशी भी ली।

आरोपियों ने मीडिया से बनाई दूरी

पीटीआई ने बार-बार चंपत राय और अनिल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। हालांकि, अनिल मिश्रा के बेटे रवि मिश्रा ने पीटीआई से कहा कि उनके पिता दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच चल रही है और इससे सच सामने आएगा।

रवि ने कहा, “मेरे पिता को मंदिर की जिम्मेदारी दी गई है और वह वहां दिन-रात काम कर रहे हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार में राम मंदिर में फंड के गबन के बारे में कोई चर्चा हुई, तो रवि ने कहा, “हम घर पर मंदिर के मामलों पर चर्चा नहीं करते, हम सिर्फ़ परिवार के मामलों पर बात करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अपने पिता को अच्छी तरह जानता हूं, वह कभी ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। अगर कोई उन पर आरोप लगा रहा है, तो लगाने दें, हम क्या कर सकते हैं, हम हर किसी के मुंह पर ताला तो नहीं लगा सकते।”

मीडिया कवरेज पर रोक

इस बीच, सोमवार सुबह राम मंदिर के मुख्य एंट्री गेट के बाहर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी गई। मंदिर परिसर के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राम मंदिर के एंट्री गेट पर तैनात पुलिस बल को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से आदेश दिया गया था कि किसी भी मीडियाकर्मी को राम मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं फिल्मिंग करने या उनसे बातचीत करने की अनुमति नहीं है।