कॉर्पोरेट नौकरी से बिजनेस तक का सफर, 1.8 लाख रुपये महीना कमाने वाले प्रोफेशनल ने बताए सफलता के राज

नौकरी की सुरक्षा छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। अच्छी सैलरी, तय समय पर मिलने वाली आय और स्थिर करियर के बावजूद कई लोग अपने सपनों को सिर्फ इसलिए पीछे छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें असफल होने का डर रहता है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जोखिम उठाने का साहस करते हैं और अपनी मेहनत के दम पर नई पहचान बना लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए सफलता का मतलब केवल बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना भी होता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही कहानी चर्चा में है, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा है।

एक मार्केटिंग प्रोफेशनल ने अपनी प्रोफेशनल जर्नी साझा करते हुए बताया कि कैसे उसने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर नया रास्ता चुना। उसने अपनी सफलता को पैसों से ज्यादा आजादी, संतुलित जीवन और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय से जोड़ा। उसकी कहानी के साथ साझा किए गए अनुभव और सलाह अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

Reddit पर शेयर की अपनी कहानी

33 वर्षीय मार्केटिंग प्रोफेशनल ने Reddit के r/Indian_flex पर अपनी सफलता की कहानी साझा की। उसने बताया कि करीब दो साल पहले उसने अपनी फुल-टाइम कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर खुद का मार्केटिंग सर्विस बिजनेस शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन आज उसकी मेहनत रंग ला रही है।

कभी 16 घंटे करता था नौकरी

यूजर ने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह रोज 14 से 16 घंटे तक नौकरी करता था। उस दौर को याद करते हुए उसने लिखा कि अब वह जिंदगी किसी दूसरे दौर जैसी लगती है। आज वह वही काम करता है जो उसे पसंद है और परिवार के साथ ज्यादा समय भी बिता पाता है।

शुरुआत में आईं कई चुनौतियां

नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती महीनों में सबसे बड़ी चुनौती क्लाइंट्स ढूंढना, काम की बेहतर प्रक्रिया बनाना और ऐसा सिस्टम तैयार करना था जिससे बिजनेस लंबे समय तक चल सके। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई और क्लाइंट्स बढ़ने लगे।

अब कई क्लाइंट्स के साथ कर रहा काम

मार्केटिंग प्रोफेशनल ने बताया कि पिछले साल से वह दो बड़े क्लाइंट्स के साथ काम कर रहा है और हाल ही में एक नया क्लाइंट भी जुड़ा है। अब साल खत्म होने से पहले वह कुछ और बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने की तैयारी में है।

9 से 5 की नौकरी से मिली आजादी

उसने बताया कि आज भी काम में मेहनत करनी पड़ती है, क्लाइंट मीटिंग्स और ट्रैवल भी होता है, लेकिन अब किसी तय ऑफिस टाइम में बंधकर काम नहीं करना पड़ता। अगर दिन में सब्जियां खरीदनी हों या बेटी को बीच घुमाने ले जाना हो, तो वह बिना किसी परेशानी के ऐसा कर सकता है। इन दिनों वह अपने गांव से बारिश का आनंद लेते हुए रिमोटली काम कर रहा है।

बिजनेस शुरू करने वालों के लिए बताए 3 जरूरी सबक

  1. बिना तैयारी नौकरी छोड़ने की गलती न करें

उसने सलाह दी कि जब तक अच्छी बचत, बैकअप प्लान या आर्थिक सहारा न हो, तब तक नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं करना चाहिए। बिजनेस में शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  1. सिर्फ बड़े क्लाइंट्स के पीछे न भागें

यूजर का कहना है कि छोटे क्लाइंट्स से उसे बिजनेस को बेहतर तरीके से चलाने और मजबूत सिस्टम बनाने की सबसे ज्यादा सीख मिली। बड़े क्लाइंट्स कई बार सीखने और नए प्रयोग करने की गति धीमी कर देते हैं।

  1. सिर्फ टैलेंट नहीं, मजबूत सिस्टम भी जरूरी

उसने कहा कि सफल बिजनेस केवल अच्छी स्किल से नहीं चलता। काम के लिए स्पष्ट प्रक्रिया (SOP), तय फ्रेमवर्क और ऐसे नतीजे होने चाहिए जिन्हें क्लाइंट साफ तौर पर देख सके। तभी लंबे समय तक सफलता मिलती है।

लोगों ने की जमकर तारीफ

Reddit पर इस पोस्ट को लोगों ने खूब पसंद किया। कई यूजर्स ने कहा कि यह कहानी बताती है कि असली सफलता सिर्फ ज्यादा कमाई में नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और समय पर खुद का नियंत्रण पाने में है।

Viral Video: बारिश में जब थम गया ट्रैफिक, तब सड़क पर उतरा ‘स्पाइडर-मैन’, इंटरनेट पर मचा बवाल

 

Viral Video: बारिश में जब थम गया ट्रैफिक, तब सड़क पर उतरा ‘स्पाइडर-मैन’, इंटरनेट पर मचा बवाल

महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। भारी बारिश की वजह से लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी बीच भिवंडी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भिवंडी के एक युवक ने लोगों की मदद के लिए अनोखा तरीका अपनाया। यहां एक युवक स्पाइडर-मैन की ड्रेस पहनकर बारिश के बीच सड़क पर उतरा और ट्रैफिक संभालने के साथ-साथ लोगों की मदद करता नजर आया। उसका ये अंदाज लोगों को काफी पंसद आ रहा है और ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

स्पाइडर-मैन की ड्रेस पहनकर आया ये युवक

वीडियो शेयर करते हुए न्यूज एजेंसी ANI ने लिखा, “भिवंडी में जलभराव के बीच स्थानीय निवासी शादाब स्पाइडर-मैन की ड्रेस पहनकर ट्रैफिक को सुचारु रूप से चलाने में लोगों की मदद कर रहे हैं।” वीडियो में शादाब पानी से भरी सड़क के बीच खड़े होकर वाहनों को रास्ता दिखाते, ट्रैफिक संभालते और लोगों को सुरक्षित निकलने में मदद करते नजर आते हैं। साथ ही वह सड़क पर जमा पानी हटाकर यातायात को आसान बनाने की कोशिश भी करते दिखाई दे रहे हैं।

गाड़ियों को रास्ता दिखाने के साथ-साथ शादाब लोगों से बातचीत करते और राहगीरों से हाथ मिलाते भी नजर आए। उनकी इस पहल की वहां मौजूद कई लोगों ने सराहना की और उनके काम की जमकर तारीफ की है।

क्यों पहनी स्पाइडर-मैन की ड्रैस

ANI से बात करते हुए शादाब ने कहा, “मैंने देखा कि इलाके में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए नगर निगम की टीम अभी तक नहीं पहुंची थी।” उन्होंने बताया कि इसी वजह से उन्होंने खुद लोगों की मदद करने का फैसला किया। स्पाइडर-मैन की पोशाक पहनने की वजह बताते हुए शादाब ने कहा, “फिल्मों में स्पाइडर-मैन जिस तरह लोगों की मदद करता है और उनकी जान बचाता है, उसी से प्रेरित होकर मैंने भी असल जिंदगी में लोगों की मदद करने और सड़क पर जमा पानी हटाने का फैसला किया।”

वीडियो पर यूजर्स ने किया कमेंट

वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने शादाब की पहल की तारीफ करते हुए उन्हें असली सुपरहीरो बताया। एक यूजर ने लिखा, “अगर इसे अच्छा साइड क्वेस्ट नहीं कहेंगे, तो फिर क्या कहेंगे?” वहीं, दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कमेंट किया, “स्पाइडर-मैन: इंडिया चैप्टर।”

Viral Video: न्यूली वेड कपल के लिए ट्रेन में हुआ खास इंतजाम, फर्स्ट AC बना ‘हनीमून सुइट’, वीडियो देख लोग रह गए हैरान

Viral Video: सोशल मीडिया पर ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे को न्यूली वेड कपल के लिए फूलों, गुब्बारों और फेयरी लाइट्स से खास अंदाज में सजाया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं। इस अनोखी सजावट को देखकर कई लोग हैरान रह गए वहीं कुछ ने इसको ‘चलता-फिरता हनीमून सुइट’ बताया। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या रेलवे में इस तरह की सजावट की अनुमति होती है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो की शुरुआत स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन से होती है। इसके बाद कैमरा कोच के अंदर आगे बढ़ता है और एक खास फर्स्ट एसी कूपे तक पहुंचता है। कूपे के दरवाजे को पिंक कलर के मोतियों वाले पर्दे और दिल के आकार की सजावट से खूबसूरती से सजाया गया है, जो लोगों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लेता है। कूपे के अंदर का नजारा किसी नॉर्मल ट्रेन के डिब्बे जैसा नहीं दिखता। पूरी जगह को खास अंदाज में सजाया गया है। छत पर रेड और सफेद रंग के गुब्बारे लगाए गए हैं, फर्श पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरी गई हैं और दीवारों व खिड़कियों को गुलाब, गेंदा और रजनीगंधा के ताजे फूलों से सजाया गया है।

कूपे को खास अंदाज में सजाया गया

कूपे की नीचे वाली बर्थ पर सफेद चादर बिछाकर लाल और सफेद फूलों की पंखुड़ियों से दिल का बड़ा आकार बनाया गया था। बिस्तर पर भी गुलाब की पंखुड़ियां सजाई गई थीं, वहीं ऊपर की मुड़ी हुई बर्थ पर “आई लव यू” लिखा हुआ सजावटी कट-आउट लगाया गया था। रंग-बिरंगी फेयरी लाइट्स ने पूरे कूपे को और भी आकर्षक बना दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जहां कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में इसे “सुहागरात एक्सप्रेस” नाम दे दिया। जहां कई लोगों ने इस अनोखी सजावट की तारीफ की, वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या ट्रेन के कोच को इस तरह सजाने के लिए रेलवे से अनुमति ली गई थी।

यूजर्स ने किए कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि यह कानूनी है या नहीं, लेकिन अगर रेलवे कपल्स के लिए ऐसे कूपे उपलब्ध कराए तो यह अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है। बस यात्रियों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। हम नहीं चाहते कि यह कई होटलों की तरह बेवजह चर्चा का विषय बने।” एक अन्य यूजर ने सवाल किया, “क्या इनके पास इसकी परमिशन है?” एक और कमेंट में कहा गया, “भाई, इसकी इजाजत किसने दी और यह कब से होने लगा? यह बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड है, और ये लोग इसमें सहज भी हैं।” वहीं, कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में इस सजे हुए कूपे को “चलता-फिरता हनीमून सुइट” भी कहा।

Video: भारतीयों की सेविंग्स की आदत के पीछे क्या है असली वजह, यूरोप में 10 साल रहे शख्स ने बताए 4 बड़े कारण

भारत में बचत करना सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। ज्यादातर परिवार बचपन से ही बच्चों को पैसे संभालकर खर्च करने और भविष्य के लिए बचत करने की सीख देते हैं। नौकरी लगने के बाद भी लोगों की पहली प्राथमिकता अक्सर सेविंग्स बढ़ाना और आने वाले समय के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करना होती है। वहीं, यूरोप के कई देशों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली इससे काफी अलग नजर आती है। वहां लोग भविष्य की चिंता के बजाय वर्तमान में खुलकर खर्च करते हुए दिखाई देते हैं।

आखिर दोनों जगहों की सोच में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या इसकी वजह सिर्फ लोगों की मानसिकता है या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा है? इसी सवाल का जवाब यूरोप में लंबे समय से रह रहे एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने अपने अनुभव के आधार पर दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।

  1. इलाज का खर्च सबसे बड़ी चिंता

मुकुल के मुताबिक, यूरोप में लोग टैक्स और सोशल सिक्योरिटी के जरिए हेल्थकेयर का लाभ लेते हैं। किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें इलाज के खर्च की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती।

वहीं भारत में कई परिवारों को अस्पताल का खर्च खुद उठाना पड़ता है। यही वजह है कि लोग मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पैसे बचाकर रखते हैं।

  1. बच्चों की पढ़ाई पर होता है भारी खर्च

उन्होंने बताया कि यूरोप के कई देशों में सरकारी स्कूलों में अच्छी और मुफ्त या बेहद कम खर्च वाली शिक्षा मिल जाती है। जहां भारत में बड़ी संख्या में माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, जहां फीस और दूसरे खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से बचत करना जरूरी माना जाता है।

  1. रिटायरमेंट के लिए खुद बनाना पड़ता है सहारा

मुकुल का कहना है कि यूरोप में सोशल सिक्योरिटी और पेंशन जैसी सुविधाएं लोगों को भविष्य को लेकर कुछ राहत देती हैं।

जबकि भारत में अधिकतर लोग अपनी रिटायरमेंट के लिए खुद ही पैसा जोड़ते हैं। नौकरी के दौरान लगातार बचत करने की यही एक बड़ी वजह है।

  1. शादियों पर होता है लाखों का खर्च

उन्होंने ये भी कहा कि भारत में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि बड़ा पारिवारिक आयोजन होती है। कई परिवार शादी पर अपनी सालों की बचत खर्च कर देते हैं।

यूरोप में आमतौर पर शादियां काफी सादगी से होती हैं, इसलिए वहां लोगों पर ऐसा आर्थिक दबाव कम होता है।

लोगों ने क्या कहा?

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर लोगों ने अलग-अलग राय दी।

एक यूजर ने लिखा, “आपकी बातें हमेशा जानकारी बढ़ाने वाली होती हैं।”

दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि माता-पिता और पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। खासकर 90 के दशक की पीढ़ी पर ये दबाव ज्यादा है।”

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “आपके सभी पॉइंट सही हैं।”

वहीं एक यूजर का कहना था कि भारत की बड़ी आबादी भी इसकी एक अहम वजह है, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या को सभी तरह की सरकारी सुविधाएं देना आसान नहीं है।

बचत की आदत के पीछे सिर्फ सोच नहीं, व्यवस्था भी

मुकुल आनंद का मानना है कि भारत और यूरोप के लोगों की बचत की आदत में सबसे बड़ा फर्क उनके देश की व्यवस्था से आता है। जहां यूरोप में कई जरूरी खर्चों का बोझ सरकार और सोशल सिक्योरिटी सिस्टम संभाल लेते हैं, वहीं भारत में लोगों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए खुद पहले से आर्थिक तैयारी करनी पड़ती है।

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या की वजह से कई ऑफिस ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है। वहीं हाल ही में एक महिला प्रोफेशनल ने बताया कि, उसको वर्क फ्रॉम होम मिलने के बावजूद सिर्फ लैपटॉप लेने के लिए ऑफिस जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऑफिस तक पहुंचने में कुल 1 घंटे का समय लगा। वहीं कई यूजर्स ने मुंबई में हर साल मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों और बारिश के बीच भी कर्मचारियों पर पड़ने वाले काम के दबाव को लेकर अपनी राय रखी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

मार्केटिंग प्रोफेशनल और आईआईएम रायपुर से पढ़ाई कर चुकी इहिना डी ने मुंबई में रेड अलर्ट के दौरान अपना एक्सपीरिएंस लिंक्डइन पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, भारी बारिश के बीच, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लोगों को केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की कि खराब मौसम को देखते हुए जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। इहिना डी ने बताया कि उनकी कंपनी ने भी भारी बारिश के कारण कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू कर दी थी।

ऑफिस में भूल गई लैपटॉप

इहिना डी ने बताया कि उन्हें बाद में याद आया कि उनका लैपटॉप ऑफिस में ही रह गया है। उन्होंने लिखा, “मुंबई में कल रेड अलर्ट घोषित किया गया था, इसलिए आज मैं वर्क फ्रॉम होम कर रही हूं। लेकिन अपना लैपटॉप ऑफिस में ही छोड़ आई थी।” उन्होंने आगे लिखा, “जब पूरा शहर अपने प्लान रद्द कर रहा था और रेनकोट निकाल रहा था, तब मैं मजबूरी में कार से ऑफिस जा रही थी।” इहिना ने बताया कि ऑफिस पहुंचकर उन्होंने सिर्फ अपना लैपटॉप उठाया और करीब तीन मिनट में वापस निकल गईं। उन्होंने लिखा, “अपना लैपटॉप लिया, तीन मिनट में फिर कार में लौट आई। एक घंटे का सफर और ऑफिस में सिर्फ तीन मिनट।”

Screenshot 2026-07-07 230031

इस एक्सपिरिएंस के बाद इहिना ने मुंबई में हर साल होने वाली बारिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ये सिर्फ बारिश नहीं है। यह हर साल होने वाला ऐसा ठहराव है, जिसके आने का सभी को पता होता है, लेकिन पूरा शहर मानो ये दिखावा करता है कि यह आने वाला ही नहीं है।” उन्होंने हर साल मानसून के दौरान होने वाली पानी भरी सड़कों, जलभराव और आखिरी समय में होने वाली वर्क-फ्रॉम-होम की घोषणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “हम जानते हैं कि बारिश जून में शुरू होगी। हमें यह भी पता है कि जुलाई में हालात और खराब होंगे। फिर भी हर साल ऐसा लगता है जैसे यह सब अचानक हो गया हो।”

उन्होंने ये भी माना कि हर किसी के पास घर से काम करने की सुविधा नहीं होती। उन्होंने लिखा, “आज मुझे वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला, इसलिए मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। मेरा काम नहीं रुका और मेरा सफर सिर्फ मेरे बेडरूम से मेरी डेस्क तक था। लेकिन इससे मुझे यह भी एहसास हुआ कि लाखों मुंबईकरों के पास वर्क फ्रॉम होम का विकल्प नहीं है। वे फिर भी बारिश में, लोकल ट्रेन से और बाइक पर सफर करके काम पर पहुंचे। यह कोई ‘हसल कल्चर’ नहीं है, यह बस मुंबई है।”

Viral Video: मॉल में ‘विराट कोहली’ की एंट्री से मची अफरा-तफरी, बाद में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली के दुनिया भर में फैंस हैं। विराट कोहली की एक झलक पाने के लिए फैंस हमेशा एक्साईटेड रहते हैं। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर विराट कोहली की तरह दिखने वाला एक सोशल मीडिया क्रिएटर का प्रैंक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में एक शख्स विराट कोहली जैसी हेयरस्टाइल और टैटू बनवाकर आरसीबी की जर्सी पहन कर लखनऊ के एक मॉल में जाते हुए नजर आ रहा है। लोगों ने कोहली समझ लिया और बड़ी संख्या में लोग उनके आसपास इकट्ठा हो गए। बाद में पता चला कि वह भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली नहीं, बल्कि उनके जैसे दिखने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर कार्तिक शर्मा थे।

सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं इस प्रैंक को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए और कहा कि भीड़भाड़ वाली जगह पर इस तरह की हरकत करना सही नहीं है।

युवक ने किया प्रैंक

सोशल मीडिया क्रिएटर कार्तिक शर्मा, जिनकी शक्ल विराट कोहली काफी मिलती-जुलती हैं ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो शेयर किया। प्रैंक को बिल्कुल असली दिखाने के लिए कार्तिक शर्मा ने विराट कोहली के लुक और अंदाज की पूरी तरह नकल की। उन्होंने कोहली जैसी हेयरस्टाइल, दाढ़ी और टैटू अपनाए, साथ ही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जर्सी भी पहनी। इतना ही नहीं, वह चार बॉडीगार्ड के साथ बीएमडब्ल्यू कार से मॉल पहुंचे, जिससे लोगों को लगा कि सच में विराट कोहली वहां आए हैं। ये प्रैंक शुरू होते ही सफल होता नजर आया।

 

जैसे ही कार्तिक शर्मा मॉल के अंदर पहुंचे, कई लोगों ने उन्हें विराट कोहली समझ लिया और उनके आसपास भीड़ जमा हो गई। लोग उनके साथ सेल्फी लेने और उनके पीछे-पीछे चलने लगे, जिससे मॉल में काफी हलचल मच गई।

कुछ ही देर में भीड़ जमा हो गई

वीडियो में दावा किया गया कि मॉल के सुरक्षा कर्मी भी इस पूरे घटनाक्रम से हैरान हो गए। कार्तिक शर्मा के अनुसार, कुछ सिक्योरिटी गार्ड उन्हें मॉल के अंदर ले जाने लगे और भीड़ को संभालने में जुट गए। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग उनके पीछे चलने लगे, जबकि सुरक्षा कर्मचारी और उनके साथ मौजूद बॉडीगार्ड भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश करते नजर आए। वीडियो में दिखाया गया कि कुछ ही देर में मॉल के कई फ्लोर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोग रेलिंग और बालकनी से उस शख्स को देखने की कोशिश करने लगे, जिसे वे विराट कोहली समझ रहे थे।

वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों को ये प्रैंक मजेदार लगा, लेकिन कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी आलोचना की। उनका कहना था कि इस तरह की हरकत से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और सार्वजनिक जगह पर अनावश्यक भीड़ जुटने से लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

Viral Video: ‘तुम्हारा न्यूमरोलॉजी नंबर क्या है?’ जवाब सुनते ही ओनर ने किराए पर घर देने से किया इनकार

Viral Video: मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में बजट में हर खोजना काफी मुश्किल होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर मुंबई में किराए पर घर लेने से जुड़ा एक अनोखा मामला चर्चा में है। एक आर्टिस्ट और इन्फ्लुएंसर ने बताया कि, उनकी एक दोस्त को मुंबई में सिर्फ उसके न्यूमरोलॉजी नंबर की वजह से किराए पर घर नहीं मिला। उनकी दोस्त ने एक मकान देखने के लिए मकान मालकिन से मुलाकात की थी, लेकिन बाद में उसे फ्लैट देने से इनकार कर दिया गया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।

फ्लैट देने से किया इनकार

एक आर्टिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वाग्मिता सिंह का इंस्टाग्राम पर ये वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वाग्मिता सिंह ने बताया कि मकान मालकिन ने उनकी दोस्त से पूछा, “तुम्हारा नंबर क्या है?” पहले उनकी दोस्त को लगा कि वह मोबाइल नंबर पूछ रही हैं। लेकिन बाद में मकान मालकिन ने साफ किया कि वह जन्मतिथि के आधार पर निकलने वाले न्यूमरोलॉजी नंबर के बारे में पूछ रही थीं। वाग्मिता सिंह के अनुसार, मकान मालकिन ने फ्लैट और उनकी दोस्त के न्यूमरोलॉजी नंबर की तुलना की।

न्यूमरोलॉजी नंबर अलग थी

उन्होंने कहा कि, फ्लैट का नंबर 4 से जुड़ा है, जबकि उनकी दोस्त का नंबर 7 है। मकान मालकिन का कहना था कि दोनों नंबर एक-दूसरे के अनुकूल नहीं हैं, इसलिए उन्होंने फ्लैट किराए पर देने से इनकार कर दिया। इस घटना पर रिएक्शन देते हुए वाग्मिता सिंह ने कहा कि “मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि इस स्थिति को क्या कहूं।” इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में गुनगुनाया, “इस मेंटल इलनेस को मैं क्या नाम दूँ,” और अपनी हैरानी जाहिर की। इस वीडियो पर लोगों ने कई मजेदार रिएक्शन दिए है।

 

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर रिएक्शन दिया है। एक यूजर ने मजाक में लिखा, “लेकिन 4-7 तो बहुत अच्छा कॉम्बो है। आंटी ने एक अच्छा मौका गंवा दिया।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, “अच्छा लगा कि कुछ लड़कियां सच में न्यूमरोलॉजी समझती हैं। 4 और 7 सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक हैं।” वहीं एक और यूजर ने टिप्पणी की, “इंडिया इवॉल्व हो रहा है, लेकिन पीछे की ओर।”

Viral Video: ‘लंदन में फोन छिपाकर चलती हूं, भारत में बिना डर के’, विदेशी महिला के इस वीडियो ने इंटरनेट पर मचाया धमाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों विदेशी महिला टूरिस्ट का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विदेशी महिला भारत में अपने घूमने के एक्सपीरिएंस को शेयर करती हुई नजर आ रही है। उसने बताया कि भारत के कई राज्यों की यात्रा के दौरान उसे सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल इस्तेमाल करने में कोई डर नहीं लगा। वहीं इस मामले में भारत उन्हें लंदन से भी ज्यादा सेफ लगा। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं इस वीडियो पर लोगों ने अपना रिएक्शन भी दिया है।

डिजिटल क्रिएटर एम्मा ने बताया कि, केरल और मेघालय समेत भारत के कई राज्यों की यात्रा के दौरान उनका एक्सपीरिएंस काफी अच्छा रहा। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “ये बात विवादित लग सकती है, लेकिन सच कहूं तो मुझे लंदन की तुलना में भारत में अपना फोन इस्तेमाल करने को लेकर कम चिंता हुई।”

सड़कों पर रिकॉर्ड की वीडियो

वीडियो में एम्मा भारत की सड़कों पर आराम से चलते हुए अपने फोन से व्लॉग रिकॉर्ड करती नजर आती हैं। वह बिना किसी डर के खुलेआम मोबाइल का इस्तेमाल करती दिखाई देती हैं। वीडियो पर लिखा था, “मैं भारत में अपना फोन हाथ में लेकर चल रही हूं।” इसके बाद वीडियो का दूसरा हिस्सा लंदन का है, जहां वह अपना फोन पहले सावधानी से बैग में रखती हैं और फिर उसे सेफ रखने के लिए मजबूती से हाथ में पकड़ लेती हैं।

फोन की नहीं थी चिंता

उन्होंने लिखा, “केरल, वर्कला, गुवाहाटी और मेघालय जैसी जगहों की यात्रा करने के बाद मेरी सोच पूरी तरह बदल गई। भारत आने से पहले मैंने जो बातें सुनी थीं, मेरा अनुभव उनसे बिल्कुल अलग रहा। मैं आराम से वीडियो शूट कर रही थी, खुलेआम अपना फोन इस्तेमाल कर रही थी और एक पल के लिए भी मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि मुझे हर समय अपना सामान संभालकर रखना है।”

लंदन में फोन चोरी का डर

उन्होंने अपने इस अनुभव की तुलना लंदन की रोजमर्रा की जिंदगी से करते हुए लिखा, “वहीं दूसरी ओर लंदन में हालात बिल्कुल अलग हैं। वहां मुझे हमेशा फोन चोरी होने की चिंता रहती है। सच कहूं तो ऐसा लगता है जैसे मेरा फोन मेरे हाथ से चिपका हुआ हो, क्योंकि मैं उसे एक पल के लिए भी ढीला नहीं छोड़ती।” उन्होंने आगे लिखा, “हर जगह के अपने-अपने जोखिम होते हैं और यह सिर्फ मेरा निजी अनुभव है। मेरा यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कहीं भी बिना सावधानी के घूमना चाहिए। लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगी कि इंटरनेट पर जो बातें दिखाई देती हैं, वे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बतातीं।”

लोगों ने पोस्ट पर किए कमेंट

उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही। वहीं इस तुलना पर लोग अपनी-अपनी राय रखी और अपने यात्रा के एक्सपीरिएंश भी शेयर किए। कई यूजर्स ने कहा कि उन्हें भारत के कई शहरों में खुलेआम फोन इस्तेमाल करने में सुरक्षित महसूस हुआ, वहीं कुछ लोगों का मानना था कि सुरक्षा हर शहर और इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है। एक यूजर ने लिखा, “बिल्कुल सही… यूके में तो अब घड़ियां भी सुरक्षित नहीं हैं।” दूसरे यूजर ने कहा, “ये वीडियो शेयर करने के लिए धन्यवाद। आजकल चोरी के मामलों में यूरोप, भारत के मुकाबले ज्यादा असुरक्षित लगता है।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में ज्यादा समस्या स्कैम की है, सड़क पर फोन छीनने जैसी घटनाएं उतनी आम नहीं हैं, क्योंकि यहां ज्यादातर लोगों के पास पहले से अच्छे स्मार्टफोन हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरे एक दोस्त के भाई का फोन गुरुग्राम में सड़क पर चलते समय बात करते-बात करते छीन लिया गया था। हम भी सड़क पर चलते समय अपना फोन या हैंडबैग हमेशा सुरक्षित रखते हैं। मुझे लगता है कि यह पोस्ट सिर्फ ध्यान खींचने के लिए बनाई गई है।”

View this post on Instagram

A post shared by Emma UGC | BANGKOK

Viral Post: बेंगलुरु में टीचर की सिर्फ 6000 रुपये सैलरी? वायरल पोस्ट पर लोगों ने जताई हैरानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में एक प्राइवेट स्कूल में काम करने वाली टीचर की सैलरी सुनकर हर कोई हैरान है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में एक यूजर ने बताया की बेंगलुरु के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर की कथित 6,000 रुपये मासिक सैलरी मिलती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। व्यक्ति के इस दावे के बाद लोगों के बीच प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों के कम वेतन और बड़े शहरों में लगातार बढ़ रही खर्चों को लेकर बहस शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पोस्ट

सोशल मीडिया एक्स (X) पर मोहम्मद नौसाथ नाम के एक यूजर ने दावा किया कि, उनकी भाभी को बेंगलुरु के एक प्री-स्कूल में टीचर की नौकरी मिली है। उन्होंने बताया कि उन्हें हर महीने केवल 6,000 रुपये वेतन देने की बात कही गई। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मेरी भाभी को अभी-अभी बेंगलुरु के एक प्ले-स्कूल/किंडरगार्टन में टीचर की नौकरी मिली है और उन्हें हर महीने सिर्फ 6,000 रुपये वेतन मिलेगा। एक तरफ स्कूलों की फीस लगातार बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ शिक्षकों को इतनी कम सैलरी दी जा रही है। आखिर कोई भी व्यक्ति किसी मेट्रो शहर में 6,000 रुपये महीने में कैसे गुजारा कर सकता है?” इसके साथ ही उन्होंने लोगों से इस मुद्दे पर अपनी राय भी मांगी।

लोगों ने किए कमेंट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर ने इस पर तरह-तरह के रिएक्श दे रहे हैं। कई यूजर्स ने प्राइवेट स्कूलों में टीचरों को मिलने वाले कम वेतन, काम करने की परिस्थितियों और शिक्षा क्षेत्र में वेतन व्यवस्था को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। कई यूजर्स ने इतनी कम सैलरी पर कर्मचारियों से की जाने वाली उम्मीदों पर सवाल उठाए। एक व्यक्ति ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि 6,000 रुपये महीने में पहले किराया, बिजली-पानी के बिल, पढ़ाई और राशन का खर्च निकाल लें, फिर अगर कुछ पैसे बच जाएं तो परिवार के साथ बाहर खाना भी खा सकते हैं।

इन दावों को कुछ लोगों ने किया खारिज

वहीं कई लोगों ने इस दावे पर भरोसा नहीं किया। उनका कहना था कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में किसी शिक्षक को सिर्फ 6,000 रुपये महीने की सैलरी मिलना यकीन करना मुश्किल है। एक यूजर ने टिप्पणी की कि दक्षिण भारत के कई इलाकों में निर्माण कार्य करने वाले मजदूर भी इससे कहीं अधिक कमाई कर लेते हैं, इसलिए इस दावे की सच्चाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। एक अन्य यूजर ने इस कथित वेतन की तुलना दूसरे क्षेत्रों में मिलने वाली शुरुआती नौकरियों की सैलरी से की। उनका कहना था कि कई संस्थानों में हेल्पर और सपोर्ट स्टाफ को भी इससे अधिक वेतन मिलता है। ऐसे में एक शिक्षक को सिर्फ 6,000 रुपये महीने मिलने का दावा कई लोगों को अविश्वसनीय लगा।

Govt attempts to quell heightened E20 backlash with industry support

fuel filling in car

India’s mandatory rollout of E20 petrol has come under renewed scrutiny after a series of public complaints, political criticism and viral social media posts incited fresh debate over the ethanol blending programme. Meanwhile, manufacturers such as Toyota, Maruti Suzuki and Hero Motocorp have publicly defended the E20 policy.

The controversy heightened early last week after reports emerged of Attorney General for India, R Venkataramani, describing the country’s ethanol blending programme as an “experiment” during a court hearing, saying its results would only be known next year. Though the government later denied that the remark referred to the E20 policy and Venkataramani clarified that he was speaking about ethanol supply volumes rather than the fuel itself, the comments have intensified an already growing backlash.

Auto manufacturers express support for India’s ethanol blending programme

No E20-related issues recorded in non-compliant vehicles so far, claim manufacturers 

At a government briefing held on July 4, several automotive manufacturers and industry representatives mounted a coordinated defence of the ethanol blending programme. Maruti Suzuki’s Senior Executive Officer for Corporate Affairs, Rahul Bharti, acknowledged the key concern of E20’s impact on E10-compliant and older vehicles.

“India mandated E20 from 2023 for material compliance, and before that it was E10. Obviously, after 2023 both the cars and the fuel are mandated for E20,” he said. For perspective, E20 compliance was mandated as part of Bharat Stage 6 Phase 2 regulations, which went into effect from April 2023 onwards.

However, Bharti claimed that Maruti Suzuki had tested older E10-compatible vehicles on E20 and found no significant concerns related to wear, corrosion, or component durability. “As a manufacturer we have tested E10 cars, which were prevalent before 2023, on E20 fuel for all parameters, and we have not found anything of concern,” stated Bharti.

Hero MotoCorp Chief Business Officer Ashutosh Verma concurred with Bharti’s statement, confirming that analysis of crores of service records had not found a higher incidence of vehicle damage in vehicles running on E20 compared with earlier fuel blends. Vikram Gulati, Country Head and Executive Vice President of Toyota Kirloskar Motor, added that the auto industry features highly stringent regulations, and that vehicles and fuels are put through extensive testing, certification, and homologation before reaching customers.

Gulati also said that ethanol is a cleaner, high-performance fuel that helps cut vehicle emissions and reduces India’s dependence on crude oil imports. Former Engineers India chairman and managing director Vartika Shukla echoed Gulati, stating that the transition to E20 was carried out via a phased, scientifically driven process involving auto manufacturers and testing agencies. She noted that ethanol blending had increased from around 1.5 percent in 2013-14 to 20 percent by December 2025, achieving the government’s target five years ahead of schedule.

Petroleum minister Hardeep Singh Puri remarked at a separate briefing on July 2: “They use it [ethanol] in racing cars also, the acceleration increases. Mileage, yes, ​it may drop a little.” Puri’s comments are not germane to public concerns at all, as race cars use ethanol solely for performance, and the mileage drop is the central pain point for the overwhelming majority of vehicle owners. Race car engines are also designed to take full advantage of ethanol and are frequently rebuilt, with the latter residing completely outside the realm of reason for the average motorist.

Toyota attributes Innova Hycross issue to fuel contamination

The Hycross in question belonged to Manoj Kashyap, a Bihar-based content creator

Motorists across India have emerged in droves online to voice concerns over reduced fuel efficiency, vehicle performance, and the long-term complications of using E20 petrol. A recent video posted by Bihar-based content creator Manish Kashyap gained immense traction on social media, showing his Toyota Innova Hycross hybrid at a service centre after it reportedly developed engine vibration and knocking issues at around 12,000km.

Kashyap blamed the issue on E20 petrol, criticised Union Road Transport Minister Nitin Gadkari (a major proponent of the ethanol-blending programme), and argued that consumers should have the option of purchasing unblended petrol. Responding to Kashyap’s viral claims, Toyota said it conducted an investigation on the damaged Innova Hycross and found no link between the car’s fault and E20 petrol, and that the culprit was actually contaminated fuel.

Toyota Innova Hycross hybrid. Image used for representation only.

“Based on our detailed technical assessment of the vehicle, the issue was due to fuel contamination,” Toyota noted in its statement. The Japanese carmaker said its technicians drained and cleaned the fuel tank and lines before refilling the vehicle with standard E20 petrol. Following the procedure, the Innova Hycross was found to be operating normally and was returned to Kashyap.

“The incident is not related to E20 fuel usage and was solely caused by non-standard and contaminated fuel,” Toyota added, advising customers to refuel only at authorised and reputed fuel stations. Contaminated fuel is a legitimate issue across the country and is compounded further by the introduction of E20, as fuel-related damage in vehicles becomes more difficult to pin down – ethanol is hygroscopic in nature, which means it can draw moisture from air and rot plastic and rubber components in the fuel system, especially in non-compliant vehicles.

Opposition voices disapproval of E20 policy implementation

Hundreds showed up to an anti-E20 protest in Delhi

Despite the industry’s defence, criticism surrounding the ethanol blending policy continues to grow in the political arena. Opposition leader Priyank Kharge argued that the rollout lacked adequate consultation and that the government could not dismiss consumer concerns while its own assessment remained pending. Political analyst Tehseen Poonawalla staged a protest against the mandatory E20 rollout at Jantar Mantar in New Delhi on July 5, which was attended by hundreds of aggrieved motorists.

The government, meanwhile, has continued to back E20, saying the fuel reduces carbon emissions, cuts crude oil imports, saves foreign exchange and supports farmers by increasing demand for ethanol feedstocks. In fact, the government has signaled an impending increase in baseline ethanol blending beyond E20, with standards notified for E22, E25, E27, and E30. ARAI has also been tasked with carrying out a study on the impact of E25 on existing E20- and E10-compliant vehicles.

Isobutanol-diesel blending under serious consideration

Diesel isn’t safe either, as plans to move forward with isobutanol blending in diesel this year are under consideration – isobutanol is an ethanol-derived compound, but is more energy-dense, less corrosive, and has a lower tendency to absorb water (hygroscopicity). This is despite the fact that none of the diesel cars currently sold in India are compliant with isobutanol-blended fuel.