IND vs ENG: प्लेइंग 11 से बाहर होने के बाद अकेले मायूस बैठे दिखे वैभव, वायरल हुई युवा बल्लेबाज की तस्वीर

IND vs ENG: इंग्लैंड के खिलाफ लगातार हार के बाद भारतीय टीम ने पांचवें टी20 मुकाबले के लिए अपनी ओपनिंग जोड़ी में बदलाव किया। पांचवें मुकाबले में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। वहीं टीम ने अनुभवी बल्लेबाज संजू सैमसन की वापसी हुई है। सीरीज पहले ही गंवा चुकी भारतीय टीम अब साउथैम्प्टन में खेले जा रहे इस मुकाबले को जीतकर सम्मान बचाने की कोशिश कर रही है। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे 5वें मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया है। वहीं पहले बल्लेबाजी करने आई इंग्लैंड ने रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। इंग्लैंड ने 20 ओवर में 3 विकेट खोकर 257 रन बनाई है। इंग्लैंड ने भारत को 258 रन का टारगेट दिया है।

वहीं अब भारत को उम्मीद है कि अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत दिलाएगी। इसी बीच प्लेइंग 11 से बाहर हुए युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी काफी वायरल हो रहे हैं।

अकेले बैठे दिखे वैभव

पांचवें टी20 मैच के लिए भारतीय टीम में दो बदलाव किए गए। वैभव सूर्यवंशी और वॉशिंगटन सुंदर को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया। टीम की घोषणा के बाद कैमरे में वैभव अकेले बैठे नजर आए। उनके चेहरे और हाव-भाव से साफ लग रहा था कि टीम से बाहर होने के कारण वह काफी निराश थे। टीम से वैभव सूर्यवंशी को बाहर किए जाने के फैसले पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली रिएक्शन देखने को मिलीं है। कई प्रशंसकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे सही बताया।

 

पहले तीन मैचों में नहीं चला बल्ला

वैभव सूर्यवंशी ने हाल ही में भारत के लिए टी20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने का सचिन तेंदुलकर रिकॉर्ड तोड़ा है। वैभव ने 15 साल की उम्र में टी20 में डेब्यू किया है। वहीं अपने शुरुआती तीन मुकाबलों में वह बल्लेबाजी से खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। बाएं हाथ के इस युवा ओपनर को खासकर तेज गेंदबाजों की शॉर्ट गेंदों के सामने मुश्किलों का सामना करना पड़ा और वह लगातार तीन पारियों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ 15, 13 और 14 रन बनाए। शुरुआती तीन मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल सके और कुल 42 रन ही बना पाए।

 

भारत की प्लेइंग 11: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, इशान किशन (विकेट कीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, सूर्यांश शेज, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, प्रसिद्ध कृष्णा

इंग्लैंड की प्लेइंग 11: फिलिप सॉल्ट, जोस बटलर (विकेट कीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद, जोश टंग

‘जॉब मिलने की थी पूरी उम्मीद, फिर कंपनी ने…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई उम्मीदवार की पोस्ट

नई नौकरी की तलाश के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नई नौकरी की तलाश कर रही एक उम्मीदवार ने इंटरव्यू से जुड़ा अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि, इंटरव्यू के दौरान सब कुछ ठीक चल रहा था और उन्हें लगा कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बाद में काफी इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। LinkedIn पर शेयर किया गया ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर ये एक्सपीरिएंश श्रुति राय ने LinkedIn पर शेयर किया, जहां उन्होंने इसे “अब तक का सबसे बुरा अनुभव” बताया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

श्रुति राय ने पोस्ट में कहा, “अब तक का सबसे बुरा अनुभव। मैंने हाल ही में एक एजेंसी में इंटरव्यू दिया, जहां मैं पहले काम कर चुकी थी। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही मैंने अपनी सैलरी की उम्मीदें साफ तौर पर बता दी थीं। मैंने उनसे ये भी कहा था कि अगर मेरी अपेक्षाएं उनके बजट में फिट नहीं बैठतीं, तो मैं किसी का समय बर्बाद नहीं करना चाहूँगी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया।”

क्या यहीं है हायरिंग का सही तरीका

उन्होंने कहा, “इंटरव्यू खुद अजीब लगा। मेरे अनुभव, मेरे काम या मेरे द्वारा लीड किए गए कैंपेन को समझने की कोशिश करने के बजाय, ऐसा लगा कि इंटरव्यू लेने वाला किसी सार्थक बातचीत के बजाय अपनी बात साबित करने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था। मेरे हर जवाब पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया जाता था, मानो उम्मीदवार को असहज करना ही मकसद हो। अगर यही हायरिंग का तरीका है, तो मुझे सच में लगता है कि ये अब पुराना हो चुका है। इंटरव्यू का उद्देश्य किसी की काबिलियत को परखना होना चाहिए, न कि बेवजह पावर डायनामिक बनाना।”

मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं

राय ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही नौकरी का ऑफर मिल जाएगा। इसी वजह से उन्होंने एक दूसरे नौकरी के अवसर को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन जब उन्होंने तय समय के बाद कंपनी से संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं है, अगर फैसला यही है तो। कंपनियों को किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवार से समय देने की उम्मीद की जाती है, जबकि उसके समय की कोई कद्र नहीं की जाती।

उन्होंने आगे लिखा, “अगर आप आगे नहीं बढ़ना चाहते, तो साफ बता दीजिए। अगर आपके प्लान बदल गए हैं, तो इसकी जानकारी दे दीजिए। उम्मीदवार भी इंसान होते हैं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां आप बिना कुछ बताए चीजें लंबित छोड़ दें।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे सच में उम्मीद है कि कंपनियां समझेंगी कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया भी उनके कार्य संस्कृति को उतना ही दिखाती है, जितना किसी उम्मीदवार का इंटरव्यू उसकी काबिलियत को दिखाता है। P.S. इस वजह से मैंने एक और अच्छा मौका खो दिया, और यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है।”

यूजर्स ने किया कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात होती है। मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे उम्मीदवारों को जानबूझकर तनाव और बेचैनी में रखने के बाद लोग चैन से कैसे रह लेते हैं।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन लोगों ने मुझसे काफी बातचीत की, लेकिन आखिर में बिना किसी जवाब के गायब हो गए।” एक और यूजर ने कहा, “यह वाकई मुश्किल होता है। मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है। एक बार तो मुझसे मेरी खुद की जॉब डिस्क्रिप्शन तक लिखवाई गई और उसके बाद मुझे कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ता है। आप यह कर सकते हैं।”

महंगे क्लीनर छोड़िए, एक आलू करेगा कार के शीशे की सफाई? जानें वायरल ट्रिक

आलू सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने वाली सब्जी नहीं, बल्कि कार की सफाई में भी काम आ सकता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा देसी जुगाड़ वायरल हो रहा है, जिसमें कच्चे आलू की मदद से कार के शीशे को साफ और चमकदार बनाने का दावा किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस उपाय के लिए किसी महंगे क्लीनर या स्पेशल केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती। घर में मौजूद एक साधारण आलू से कार के विंडशील्ड पर पानी के दाग और धुंधलेपन को कम करने की यह ट्रिक लोगों का ध्यान खींच रही है।

हालांकि, इसके पीछे का कारण सिर्फ घरेलू नुस्खा नहीं बल्कि आलू में मौजूद स्टार्च बताया जा रहा है, जो शीशे पर एक अलग तरह की परत बनाने में मदद कर सकता है।

आलू कैसे करता है शीशे की सफाई?

आलू में मौजूद स्टार्च इस ट्रिक का मुख्य कारण बताया जाता है। जब कच्चे आलू को काटकर कार के शीशे पर रगड़ा जाता है, तो इसकी एक हल्की परत ग्लास की सतह पर बन जाती है।

यह परत पानी को शीशे पर ज्यादा देर टिकने नहीं देती और उसे फिसलने में मदद करती है। बारिश के दौरान इससे विंडशील्ड पर पानी की बूंदें कम चिपकती हैं, जिससे ड्राइवर को आगे का रास्ता ज्यादा साफ दिखाई दे सकता है।

इसके पीछे छिपा है सरफेस टेंशन का खेल

इस वायरल हैक के पीछे विज्ञान भी जुड़ा है। सामान्य स्थिति में बारिश की बूंदें कार के शीशे पर फैलकर धुंधली परत बना सकती हैं, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है।

लेकिन स्टार्च की मौजूदगी पानी की बूंदों को सतह पर फैलने से कुछ हद तक रोक सकती है। इससे बूंदें छोटी गोल आकृति में रह सकती हैं और ढलान या हवा के दबाव से नीचे खिसक सकती हैं।

यही वजह है कि बिना महंगे प्रोडक्ट के भी शीशे पर पानी का असर कम दिखाई दे सकता है।

कैसे करें आलू वाला कार क्लीनिंग हैक?

अगर आप इस घरेलू उपाय को आजमाना चाहते हैं तो तरीका काफी आसान है

  1. सबसे पहले कार के शीशे को साफ कपड़े से पोंछ लें।
  2. एक कच्चे आलू को बीच से काट लें।
  3. आलू के कटे हुए हिस्से को विंडशील्ड, साइड मिरर और बैक ग्लास पर रगड़ें।
  4. कुछ देर सूखने दें।
  5. इसके बाद माइक्रोफाइबर कपड़े से हल्के हाथ से साफ कर दें।

इससे शीशे पर आलू के स्टार्च के निशान भी नहीं रहेंगे।

सस्ता, आसान और घरेलू उपाय

इस ट्रिक की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है। जहां बाजार में मिलने वाले कई ग्लास क्लीनर और कोटिंग प्रोडक्ट महंगे हो सकते हैं, वहीं आलू घर में आसानी से मिल जाता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई स्थायी कोटिंग या प्रोफेशनल ट्रीटमेंट नहीं है। कार की नियमित सफाई और सही मेंटेनेंस के लिए अच्छे क्लीनिंग प्रोडक्ट और विशेषज्ञों की सलाह भी जरूरी हो सकती है।

वायरल जुगाड़ ने बढ़ाई लोगों की दिलचस्पी

कार की देखभाल से जुड़े ऐसे देसी उपाय अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं। आलू वाला यह हैक भी इसी वजह से चर्चा में है क्योंकि यह आसान, सस्ता और घर में मौजूद चीज से किया जा सकता है।

World Rum Day: जिसने खुद कभी शराब को नहीं लगाया हाथ, जानें कैसे भारत में खड़ी कर दी ‘ओल्ड मंक’ की विरासत

World Rum Day: भारत में ऐसी बहुत कम बोतलें हैं जो ‘ओल्ड मोंक’ जैसी वफादारी और लगाव पैदा करती हैं। इसने पीने की बदलती आदतों, विदेशी ब्रांड्स के आकर्षक लेबल और कई पीढ़ियों के ग्राहकों के बीच भी अपनी जगह बनाए रखी है और यह सब बिना किसी सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट या चमकदार विज्ञापन कैंपेन के हुआ है। आप किसी भी बार, मिलिट्री कैंटीन या आस-पास की शराब की दुकान में चले जाइए, पूरी संभावना है कि आपको शेल्फ पर वह जानी-पहचानी, छोटी और चौड़ी बोतल दिख ही जाएगी। ‘वर्ल्ड रम डे’ पर इसकी कहानी का जश्न मनाना बनता है—खासकर इसलिए क्योंकि इसने मार्केटिंग के लगभग हर नियम को तोड़ा है।

ओल्ड मंक की सबसे बड़ी खूबी हमेशा से इसकी एक जैसी क्वालिटी रही है। 1950 के दशक में जब यह पहली बार आया था, तब से इसकी खास डार्क रम का स्वाद और अंदाज लगभग वैसा ही बना हुआ है। इसमें मौजूद कैरमल का भरपूर स्वाद, वनीला और चॉकलेट की हल्की महक और इसका बेहतरीन स्मूद फिनिश इसे लाखों लोगों की पसंदीदा ड्रिंक बनाता है। जहां दूसरे ब्रांड्स समय के साथ खुद को बदलते रहते हैं, वहीं ओल्ड मंक चुपचाप वैसा ही बना रहा—और शायद यही उसका सबसे बड़ा इनोवेशन था।

शायद ‘ओल्ड मंक’ की कहानी का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा वह व्यक्ति है जिसने इसे मशहूर बनाया। मोहन मीकिन के पूर्व चेयरमैन कपिल मोहन ने कभी शराब नहीं पी। सेना के रिटायर्ड अफसर और चाय के शौकीन कपिल मोहन ने अपने बड़े भाई वेद रतन मोहन की मौत के बाद परिवार का बिजनेस संभाला। वेद रतन मोहन ने ही यह रम बनाई थी। 1970 के दशक की शुरुआत से कपिल मोहन की लीडरशिप में, ‘ओल्ड मंक’ एक लोकप्रिय भारतीय शराब से बदलकर साल 2000 तक दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली डार्क रम बन गई।

ओल्ड मॉन्क से जुड़ा रहस्य इसकी लोकप्रियता को और बढ़ाता है। किसी को पक्के तौर पर नहीं पता कि इसका नाम कैसे पड़ा। कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह नाम मठों में पारंपरिक रूप से रखे जाने वाले लकड़ी के पीपों (बैरल) की वजह से पड़ा, जबकि दूसरों का कहना है कि इसके परिपक्व और बिटर स्ट्रॉंग स्वाद ने इसे बनाने वालों को एक बूढ़े साधु (मॉन्क) की समझदारी की याद दिलाई। यहां तक कि इसकी खास बोतल भी दशकों से लगभग वैसी ही रही है। इसे भारत की कई पीढ़ियां तुरंत पहचान लेती हैं और इसे सर्दियों की शामों, पुरानी दोस्ती और पारिवारिक समारोहों से जोड़कर देखती हैं।

इस ब्रांड के बढ़ने का तरीका और भी अनोखा था। ओल्ड मंक ने कभी भी विज्ञापन का सहारा नहीं लिया। असल में, कपिल मोहन ने जान-बूझकर इसका प्रचार-प्रसार करना बंद कर दिया था। उनका मानना ​​था कि रम को मार्केटिंग के बजाय अपनी क्वालिटी के दम पर पहचान बनानी चाहिए। यह तरीका काम भी आया। लोगों की बातें, दूसरों की सलाह और पुरानी यादों ने ही इसे मशहूर बनाने में अहम भूमिका निभाई। कुछ साल पहले तो ओल्ड मंक के बंद होने की अफवाहों से इसके चाहने वालों में घबराहट भी फैल गई थी, जिसके बाद कंपनी को सार्वजनिक रूप से यह साफ करना पड़ा कि इसका प्रोडक्शन बंद नहीं हो रहा है।

ओल्ड मंक की शुरुआत औपनिवेशिक भारत में हुई थी। मोहन मीकिन के अनुसार, इसका इतिहास 1885 में स्थापित एक ब्रुअरी से जुड़ा है। आजादी के बाद यह भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी बन गई। समय के साथ, इस रम को UK, US, जापान, जर्मनी, कनाडा और UAE समेत 50 से ज्यादा देशों में पसंद किया जाने लगा। अपने सबसे सफल दौर में, यह दुनिया की सबसे कामयाब डार्क रम में से एक बन गई, जिससे यह साबित हुआ कि कोई भारतीय स्पिरिट अपनी पहचान बदले बिना वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सकती है।

आज के दौर में जब ब्रांड्स ट्रेंड्स, इन्फ्लुएंसर्स और वायरल कैंपेन्स के पीछे भागते हैं, तब ‘ओल्ड मंक’ (Old Monk) आज भी पुराने अंदाज को बनाए हुए है। इसकी रेसिपी वैसी ही बनी हुई है, इसकी बोतल आज भी पुरानी यादें ताजा कर देती है और इसकी शोहरत हमेशा की तरह एक संतुष्ट पीने वाले से दूसरे तक फैलती रही है। ‘वर्ल्ड रम डे’ (World Rum Day) पर शायद सबसे बड़ी सीख यही है। कभी-कभी, सबसे मजबूत ब्रांड स्टोरी वह होती है, जिसे कभी बेचने की जरूरत ही नहीं पड़ी।

नौकरी से पहले ही रख दीं सारी शर्तें, कैंडिडेट का WhatsApp मैसेज देख HR भी हैरान

आज के समय में नौकरी पाना जितना चुनौतीपूर्ण हो गया है, उतना ही बदल गया है नौकरी तलाशने का तरीका भी। अब उम्मीदवार सिर्फ अपनी योग्यता ही नहीं, बल्कि अपनी अपेक्षाओं को भी खुलकर सामने रखने लगे हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया, जहां एक जॉब सीकर का WhatsApp मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज ने लोगों को हैरान भी किया और हंसने पर भी मजबूर कर दिया। किसी ने इसे जबरदस्त आत्मविश्वास बताया, तो किसी ने इसे जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंस करार दिया।

वहीं कई यूजर्स ने कहा कि उम्मीदवार ने अपनी शर्तें पहले ही साफ कर दीं, जिससे बाद में किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश नहीं रहती। इस वायरल चैट ने एक बार फिर नौकरी, सैलरी और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

डिजिटल मार्केटिंग की नौकरी के लिए किया संपर्क

मार्केटिंग स्ट्रैटेजिस्ट और फाउंडर नैंसी श्रीवास्तव ने लिंक्डइन पर एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। उनके मुताबिक, एक उम्मीदवार ने डिजिटल मार्केटिंग/कंटेंट राइटर की नौकरी के लिए WhatsApp पर संपर्क किया।

उम्मीदवार ने अपने पोर्टफोलियो के साथ लिखा कि उसे सोशल मीडिया पोस्ट बनाने का अनुभव है और वह एडवांस प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की मदद से AI आधारित कंटेंट राइटिंग में भी अच्छी पकड़ रखता है।

मैसेज में रखीं साफ-साफ शर्तें

नौकरी के लिए आवेदन करते हुए उम्मीदवार ने अपनी अपेक्षाएं भी बिना किसी झिझक के बता दीं। उसने लिखा कि उसे ₹40,000 से ₹50,000 तक की सैलरी चाहिए और इससे कम पर वह काम नहीं करेगा। यही नहीं, उसने यह भी कहा कि उसे शनिवार और रविवार की फिक्स छुट्टी चाहिए। साथ ही उसने अनुरोध किया कि उससे फोन कॉल नहीं, सिर्फ WhatsApp पर ही संपर्क किया जाए।

फाउंडर ने कहा- समझ नहीं आया भर्ती कौन कर रहा था

इस बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए नैंसी श्रीवास्तव ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि मैसेज पढ़ने के बाद उन्हें ही समझ नहीं आया कि नौकरी कौन दे रहा है और कौन ले रहा है। उन्होंने लिखा कि उम्मीदवार ने सैलरी, वीकेंड ऑफ और कम्युनिकेशन का तरीका पहले ही तय कर दिया। बस ऑफर लेटर और जॉइनिंग डेट पूछना बाकी रह गया था।

सोशल मीडिया पर आई मजेदार प्रतिक्रियाएं

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने तरह-तरह के कमेंट किए।

  • एक यूजर ने लिखा, “इतना कॉन्फिडेंस चाहिए, कृपया इसका कोचिंग सेंटर बता दीजिए।”
  • दूसरे ने कहा, “कम से कम उम्मीदवार को पता तो है कि उसे क्या चाहिए।”
  • एक अन्य यूजर ने मजाक में लिखा, “मैं भी इसी उम्मीदवार के साथ जॉइन करना चाहता हूं।”
  • वहीं किसी ने इसे Gen Z का नया अंदाज बताया।

कुछ लोगों ने उम्मीदवार का किया समर्थन

जहां कई लोगों ने इस मैसेज पर हंसी-मजाक किया, वहीं कुछ यूजर्स ने उम्मीदवार की साफगोई की तारीफ भी की।

उनका कहना था कि अपनी उम्मीदें पहले ही बता देना गलत नहीं है। इससे उम्मीदवार और कंपनी दोनों का समय बच सकता है।

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वायरल पोस्ट पर उठे सवाल भी

हालांकि, हर कोई इस वायरल पोस्ट पर भरोसा करने को तैयार नहीं था। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि यह बातचीत नकली भी हो सकती है। उनका कहना था कि इतने कम समय में इतने सारे मैसेज टाइप होना थोड़ा अजीब लगता है। इसलिए कुछ लोगों ने स्क्रीनशॉट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

कॉन्फिडेंस या ओवरकॉन्फिडेंस?

यह वायरल WhatsApp चैट अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है। कुछ लोग इसे आत्मविश्वास की मिसाल मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि नौकरी मांगते समय पेशेवर व्यवहार और बातचीत का तरीका भी उतना ही जरूरी होता है।

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

एक महीने में भेजे 500 रिज्यूमे, नहीं आया एक भी कॉल, फ्रेशर्स की मुश्किलें आईं सामने

भारत में इंजीनियरिंग करने के बाद अच्छी नौकरी पाना आज कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी परेशानी को दिखाती है बेंगलुरु के एक बीटेक ग्रेजुएट की कहानी, जिसने नौकरी की तलाश में एक महीने के भीतर 500 से ज्यादा आवेदन भेजे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिला। इस युवा इंजीनियर ने लिंक्डइन, अलग-अलग जॉब पोर्टल और कंपनियों की करियर वेबसाइटों पर लगातार प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी।

उसका कहना है कि वो किसी बड़ी सैलरी या नामी कंपनी की तलाश में नहीं है, बल्कि सिर्फ एक ऐसा मौका चाहता है जहां वह काम सीख सके और अपने करियर की शुरुआत कर सके। उसकी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेशर्स की परेशानियों को उजागर कर दिया है।

बड़ी सैलरी नहीं, बस शुरुआत का एक मौका चाहिए

युवा इंजीनियर ने कहा कि उसका लक्ष्य किसी बड़ी कंपनी में भारी पैकेज हासिल करना नहीं है। वह सिर्फ ऐसा अवसर चाहता है जहां वह काम सीख सके, इंडस्ट्री का अनुभव हासिल कर सके और अपने करियर की मजबूत शुरुआत कर सके।

उसने लिखा कि वह किसी भी अच्छे टेक रोल, यहां तक कि शुरुआती दौर के स्टार्टअप में भी काम करने के लिए तैयार है, जहां उसे सीखने और योगदान देने का मौका मिले।

जब ऑनलाइन आवेदन भी बेअसर हुए तो रेडिट से मांगी मदद

लगातार कोशिशों के बाद जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो इंजीनियर ने रेडिट पर अपनी परेशानी साझा की। उसने नौकरी देने वालों, स्टार्टअप फाउंडर्स और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील की।

उसकी पोस्ट का शीर्षक था  “एक महीने में 500+ नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन एक भी इंटरव्यू नहीं मिला।”

पोस्ट वायरल होते ही कई फ्रेशर्स ने अपनी-अपनी परेशानियां साझा करनी शुरू कर दीं।

फ्रेशर्स की सबसे बड़ी चुनौती

कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना काफी नहीं रह गया है। एक यूजर ने सलाह दी कि उम्मीदवारों को सीधे कंपनी के फाउंडर्स, एचआर या कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी ऐसा करके देखा, लेकिन 100 से ज्यादा एचआर को मैसेज करने के बाद भी उन्हें इंटरव्यू का मौका नहीं मिला।

स्किल्स हैं, फिर भी दरवाजे बंद हैं

एक कमेंट में एक टेक उम्मीदवार ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसके पास इंटर्नशिप अनुभव और कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की जानकारी होने के बावजूद नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। उसने बताया कि वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एजेंट ऑर्केस्ट्रेशन, ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर, लैंगचेन और लैंगग्राफ जैसी तकनीकों पर काम कर चुका है, फिर भी कंपनियों तक पहुंच बनाना चुनौती बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि मौजूदा जॉब मार्केट में फ्रेशर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद बढ़ गई है, जबकि कुछ ने उम्मीदवारों को नेटवर्किंग और सीधे संपर्क जैसे तरीकों पर ध्यान देने की सलाह दी।

वहीं कुछ लोगों ने उम्मीद भी दिखाई। एक यूजर ने बताया कि उसे एक जॉब प्लेटफॉर्म के जरिए इंटरव्यू मिला और पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीना लगा।

नौकरी बाजार की नई हकीकत

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिग्री और तकनीकी ज्ञान आज के जॉब मार्केट में पर्याप्त हैं? बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन कंपनियां अनुभव, प्रोजेक्ट्स और नेटवर्किंग को भी तेजी से महत्व दे रही हैं।

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Alia Bhatt: सावा…सावा महिया वे….., BFF आकांक्षा राजन के वेडिंग फंक्शन में जमकर नाची आलिया भट्ट का वीडियो वायरल

Alia Bhatt: बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट और आकांक्षा रंजन कपूर बेस्ट फ्रेंड हैं। आकांक्षा फिल्ममेकर शरण शर्मा से शादी करने वाली हैं। इससे पहले आलिया प्री वेडिंग फंक्शन में शामिल हुईं और आकांक्षा की बहन अनुष्का रंजन कपूर के साथ परफॉर्म करती नजर आईं।

आकांक्षा के प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन का एक वीडियो ऑनलाइन सामने आया है, जिसमें आलिया, अनुष्का रंजन कपूर और उनके पति आदित्य सील के साथ शाहरुख खान की 2003 की फिल्म ‘कल हो ना हो’ के गाने ‘माही वे’ पर डांस करती दिख रही हैं। आलिया ने एक शानदार पर्पल साड़ी पहनी थी।

खबरों के मुताबिक, आकांक्षा और शरण 2022 से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। आकांक्षा एक्ट्रेस हैं, जबकि शरण राजकुमार राव और जाह्नवी कपूर की फ़िल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज माही’ के डायरेक्टर हैं। यह कपल 11 जुलाई को सिर्फ़ करीबी दोस्तों और परिवार की मौजूदगी में शादी के बंधन में बंधने जा रहा है। आकांक्षा और शरण ने अपनी शादी को प्राइवेट रखने का फ़ैसला किया है और 12 जुलाई को एक शानदार रिसेप्शन रखा है।

कपल के करीबी एक सूत्र ने News18 को बताया, “आकांक्षा और शरण पारंपरिक फेरे या कोई बड़ी धार्मिक रस्म नहीं करेंगे। इसके बजाय, उन्होंने रजिस्टर्ड शादी करके चीज़ों को सिंपल रखने का फ़ैसला किया है। कानूनी औपचारिकताएं मुंबई में रंजन के घर पर पूरी की जाएंगी।”

सूत्र ने आगे कहा, “यह कपल अपने करीबी लोगों की मौजूदगी में शादी के कागज़ात पर साइन करेगा। पारंपरिक शादी की रस्मों को निभाने के बजाय, अपनों के साथ इस मिलन का जश्न मनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है, जिससे यह एक बेहद निजी और सादगी भरा मौका बन जाएगा।”

आकांक्षा को हाल ही में ‘इक्का’ में देखा गया था। सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ​​के निर्देशन में बनी इस सीरीज़ में एक्ट्रेस का छोटा सा रोल है। इस सीरीज़ में अक्षय खन्ना, सनी देओल, दीया मिर्ज़ा और तिलोत्तमा शोम मुख्य भूमिकाओं में हैं। क्रिटिक्स से इस सीरीज़ को मिले-जुले से लेकर नेगेटिव रिव्यू मिले और यह नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। इसके अलावा, वह प्राइम वीडियो के ‘ग्राम चिकित्सालय सीज़न 2’ में भी नज़र आई थीं।

वहीं दूसरी ओर, आलिया को हाल ही में ‘अल्फा’ में देखा गया था। शिव रवैल द्वारा निर्देशित यह फ़िल्म YRF स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फ़िल्म है। क्रिटिक्स से इस फ़िल्म को नेगेटिव रिव्यू मिले और इसने आठ दिनों में सिर्फ़ ₹49 करोड़ की कमाई की है। इसमें शरवरी, अनिल कपूर और बॉबी देओल भी अहम भूमिकाओं में हैं। इसके अलावा, आलिया के पास संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ भी है। इस फ़िल्म में रणबीर कपूर और विक्की कौशल भी हैं और यह अगले साल जनवरी में रिलीज़ होने वाली है।

Dubai Job Reality: दुबई में ड्रीम जॉब मिली, कंपनी ने घर भी दिया, लेकिन अकेलापन तोड़ देता है! 23 साल की भारतीय लड़की की कहानी वायरल

दुबई का नाम सुनते ही लोगों के मन में आलीशान इमारतें, शानदार लाइफस्टाइल और बड़े करियर के सपने आने लगते हैं। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसी दुनिया भी है, जहां कई लोग अपने परिवार से दूर रहकर रोज नई चुनौतियों का सामना करते हैं। विदेश में सफलता हासिल करने की राह हमेशा आसान नहीं होती। अकेले रहना, हर जिम्मेदारी खुद संभालना और अपनों की यादों के साथ आगे बढ़ना कई बार भावनात्मक रूप से मुश्किल हो जाता है। दुबई में रहने वाली 23 वर्षीय भारतीय युवती अनुष्का शर्मा ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी जिंदगी का ऐसा ही अनुभव साझा किया।

उन्होंने बताया कि अच्छी सैलरी और बेहतर अवसरों के साथ विदेश की जिंदगी में कई अनदेखी कीमतें भी चुकानी पड़ती हैं। उनकी कहानी ने उन हजारों लोगों की भावनाओं को सामने ला दिया है, जो सपनों के लिए घर से दूर रहते हैं।

बीमारी से लेकर मुश्किल दिनों तक

उन्होंने कहा कि घर से दूर रहने वालों के लिए सबसे मुश्किल पल तब आते हैं, जब वो बीमार पड़ते हैं या किसी परेशानी का सामना करते हैं। थकाऊ काम के बाद भी खुद ही हर जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, जिससे कई बार अकेलापन और मानसिक दबाव महसूस होता है।

सपनों की कीमत होती है

अनुष्का ने अपने संदेश में कहा कि आरामदायक जिंदगी छोड़कर विदेश में मेहनत करना आसान नहीं होता, लेकिन परिवार के बेहतर भविष्य और आर्थिक आजादी के लिए किए गए ये त्याग भविष्य में बड़ी उपलब्धि बन सकते हैं।

दुबई ड्रीम के पीछे की अनकही हकीकत

उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि विदेश में सफलता सिर्फ पैसों से नहीं मापी जाती, बल्कि इसके पीछे कई भावनात्मक बलिदान भी होते हैं। परिवार से दूरी और अकेले संघर्ष करने की कहानी उन हजारों भारतीयों की भी है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में अपने घर से दूर रह रहे हैं।

चीन में सांपों का आतंक! पानी में तैरते मिले 900 सांप, कोबरा के खौफनाक वीडियो ने मचाई दहशत

आफत की बारिश: रपटा पार करने के लिए पानी के बीचो-बीच पहुंचा अधेड़, तेज बहाव में बहा, वीडियो वायरल

यूपी के कई इलाकों में पिछले दो दिन से हो रही बारिश ने आफत मचा दी है। बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह से अस्तव्यस्त हो गया है। बिजनौर में हुई बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। शुक्रवार के एक अधेड़ रपटा पार करने के दौरान पानी के तेज बहाव में बह गया। इसका वीडियो भ वायरल हो रहा है।

VIDEO: अपना बना ल ना पूरा…स्कूल में टीवी पर अश्लील गाना चलाकर प्रधानाध्यापक ने भरे खर्राटे, सस्पेंड

महोबा में स्कूल की स्मार्ट क्लास में बच्चों की बेंच पर लेटकर अश्लील गाना देखते हुए प्रधानाध्यापक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 62 सेकेंड के इस वीडियो में प्रधानाध्यापक रमेश चंद्र स्मार्ट क्लास में बच्चों की बेंच पर आराम से लेटे दिख रहे हैं।