ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच को बना दिया ‘हनीमून सुइट’! वीडियो वायरल होते ही रेलवे ने लिया बड़ा एक्शन

इंडियन रेलवे (Indian Railways) के कोच का एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया है। वीडियो में एक यात्री ने ट्रेन के फर्स्ट एसी (First AC) कोच को किसी फाइव स्टार होटल के हनीमून सुइट (Honeymoon Suite) की तरह सजाया हुआ दिखता है।वहीं अब ट्रेन के 1AC कोच के एक केबिन को सजाने का मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर सुहागरात के कमरे की तरह सजे केबिन का वीडियो वायरल होने के बाद अब रेलवे प्रशासन ने संबंधित TC (टिकट चेकर) को सस्पेंड कर दिया है।

रेलवे ने लिया बड़ा एक्शन

रेल मंत्रालय ने बताया कि 6 जुलाई 2026 को ट्रेन नंबर 11002 नंदीग्राम एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक कपल ने अपने फर्स्ट एसी कूपे को सजाने के लिए निजी तौर पर एक ऑनलाइन डेकोरेटर को बुलाया था। मंत्रालय के अनुसार, डेकोरेटर का ट्रेन के कोच में प्रवेश अधिकृत नहीं था। इसे सुरक्षा और नियमों के लिहाज से गंभीर लापरवाही माना गया है। इस मामले में संबंधित टिकट चेकर (TTE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियों में एक यात्री ने ट्रेन के फर्स्ट एसी (First AC) कोच को किसी फाइव स्टार होटल के हनीमून सुइट (Honeymoon Suite) की तरह सजा हुआ दिखता है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई कि क्या ट्रेन में ऐसा करने की अनुमति है?

वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो की शुरुआत स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन से होती है। इसके बाद कैमरा कोच के अंदर आगे बढ़ता है और एक खास फर्स्ट एसी कूपे तक पहुंचता है। कूपे के दरवाजे को पिंक कलर के मोतियों वाले पर्दे और दिल के आकार की सजावट से खूबसूरती से सजाया गया है, जो लोगों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लेता है। कूपे के अंदर का नजारा किसी नॉर्मल ट्रेन के डिब्बे जैसा नहीं दिखता। पूरी जगह को खास अंदाज में सजाया गया है। छत पर रेड और सफेद रंग के गुब्बारे लगाए गए हैं, फर्श पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरी गई हैं और दीवारों व खिड़कियों को गुलाब, गेंदा और रजनीगंधा के ताजे फूलों से सजाया गया है।

कनाडा की इस लड़की ने पाकिस्तानी लड़के से की शादी फिर पति के घर का कल्चर देख ऐसी बातें कहीं कि हो गई वायरल

एक कनाडाई महिला ने पाकिस्तानी परिवार में शादी के बाद अपने नए एक्सपीरिएंस को सोशल मीडिया पर शेयर किया हैं। उसने बताया कि साउथ एशियन परिवारों की परंपराएं, रिश्तों को बुलाने का तरीका, मेहमानों की खातिरदारी और रोजमर्रा की कई आदतें उनके लिए बिल्कुल नई थीं। ये सारी बातें उनके लिए इतनी अलग थीं कि वह पूरी तरह हैरान हो गई। अपने पति के परिवार की कल्चर के बारे में बात करते हुए कैसी ने बताया कि, जब वह पहली बार साउथ एशियन परिवार का हिस्सा बनीं तो वहां की कई रोजमर्रा की आदतें और रीति-रिवाज उनके लिए बिल्कुल अलग थे।

उन्होंने अपने इस एक्सपीरीएंस को मजेदार अंदाज में शेयर किया, जिसे सोशल मीडिया पर लोगों ने खूब पसंद किया। कई यूजर्स ने कहा कि वे भी ऐसे कल्चरल एक्सपीरिएंस से गुजर चुके हैं। कैसी ने बताया कि उनके लिए सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि साउथ एशियन परिवारों में हर रिश्तेदार को अलग-अलग रिश्तों के नाम से बुलाया जाता है।

हर रिश्ते के होते हैं अलग नाम

अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए कैसी ने कहा, “हर रिश्ते के लिए अलग नाम होता है। मां की तरफ के आंटी और अंकल के अलग नाम हैं, पिता की तरफ के आंटी और अंकल के भी अलग नाम हैं। फिर बड़ी आंटी, छोटी आंटी जैसे अलग-अलग संबोधन भी होते हैं।” उन्होंने बताया कि दक्षिण एशियाई परिवारों में ये संबोधन सिर्फ नाम नहीं होते, बल्कि सम्मान और रिश्तों की गहराई को भी दर्शाते हैं।

WhatsApp का किया ज्यादा इस्तेमाल

कैसी ने बताया कि उनके लिए एक और नई बात WhatsApp का ज्यादा इस्तेमाल करना था। कैसी ने कहा, “मैंने पहले कभी WhatsApp इस्तेमाल नहीं किया था। मैंने इसे कभी डाउनलोड भी नहीं किया था। सच कहूं तो मुझे ठीक से पता भी नहीं था कि यह क्या है। लेकिन अब मैं इसे हर समय इस्तेमाल करती हूं।” उन्होंने बताया कि शादी के बाद WhatsApp उनके पति और ससुराल के लोगों से जुड़े रहने का सबसे अहम माध्यम बन गया है।

अलग तरह की होगी है मेहमाननवाजी

कैसी ने बताया कि साउथ एशियाई परिवारों की मेहमाननवाजी ने भी उन्हें काफी प्रभावित किया। उनके मुताबिक, यहां लोग बिना किसी पहले से सूचना के आए मेहमानों का भी पूरे दिल से स्वागत करते हैं। कैसी ने कहा, “आप सुबह 8 बजे भी बिना बताए किसी के घर पहुंच जाएं, तब भी वहां आपके लिए कई तरह के खाने के व्यंजन तैयार मिल जाएंगे। इतना ही नहीं, जाते समय भी आपको बचा हुआ खाना साथ ले जाने के लिए दिया जाएगा।”

उन्होंने अपनी मेहमाननवाजी की तुलना करते हुए कहा, “मुझे पहले लगता था कि मैं अच्छी मेजबानी करती हूं, लेकिन अब ऐसा नहीं लगता। मेरे यहां तो सिर्फ कुछ स्नैक्स और क्रैकर्स होते हैं, जबकि इनके घर किसी भी समय कई तरह के व्यंजन तैयार मिल जाते हैं।”

घर पर ही रुकते हैं रिश्तेदार

कैसी ने बताया कि एक और बात जिसने उन्हें हैरान किया, वह रिश्तेदारों के ठहरने का तरीका था। कैसी ने कहा, “ब्राउन परिवारों में ऐसा लगभग कभी नहीं होता। जो रिश्तेदार मिलने आते हैं, वे होटल बुक नहीं करते, बल्कि परिवार के साथ ही रहते हैं। और अगर कोई होटल में ठहर भी जाए, तो घरवाले पूछते हैं, ‘आपने हमें बताया क्यों नहीं? हमारे साथ क्यों नहीं रुके?'” उन्होंने ये भी कहा कि एक और बात जिसने उन्हें हैरान किया, वह यह थी कि साउथ एशियाई समुदायों में खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं।

लोगों तक जल्दी पहुंचती है खबर

उनके शब्दों में, “यहां हर कोई किसी न किसी को जानता है और कोई भी खबर बहुत जल्दी सब तक पहुंच जाती है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं सच में जानना चाहूंगी कि इतनी जल्दी खबरें कैसे फैल जाती हैं। मुझे लगता है कि इसमें WhatsApp की बड़ी भूमिका होती है, लेकिन मेरे लिए ये हैरानी की बात है कि जानकारी इतनी तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच जाती है। कई बार आपको लगता है कि लोग एक-दूसरे को नहीं जानते होंगे, लेकिन आखिर में पता चलता है कि सब किसी न किसी तरह जुड़े हुए हैं।”

लोगों ने किया कमेंट

कैसी के अपने एक्सीपिएंस शेयर करने के बाद वीडियो पर लोगों की खूब प्रतिक्रियाएं आईं। कई यूजर्स ने उनकी बातों को मजेदार और अपने अनुभवों से जुड़ा हुआ बताया। एक यूजर ने कमेंट किया, “गोरे लोगों को इन चीजों को पहली बार समझते और खोजते देखना काफी मजेदार लगता है।” वीडियो पर एक यूजर ने लिखा, “रिश्तों के अलग-अलग नाम रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिना पूछे ही पता चल जाता है कि सामने वाला आपका कौन लगता है।” एक और व्यक्ति ने लिखा, “बिल्कुल सही कहा। सुनने में यह थोड़ा मजेदार लगता है, लेकिन हमारे यहां यह बिल्कुल सामान्य बात है।”

Viral Video: न्यूली वेड कपल के लिए ट्रेन में हुआ खास इंतजाम, फर्स्ट AC बना ‘हनीमून सुइट’, वीडियो देख लोग रह गए हैरान

Viral Video: सोशल मीडिया पर ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे को न्यूली वेड कपल के लिए फूलों, गुब्बारों और फेयरी लाइट्स से खास अंदाज में सजाया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं। इस अनोखी सजावट को देखकर कई लोग हैरान रह गए वहीं कुछ ने इसको ‘चलता-फिरता हनीमून सुइट’ बताया। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या रेलवे में इस तरह की सजावट की अनुमति होती है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो की शुरुआत स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन से होती है। इसके बाद कैमरा कोच के अंदर आगे बढ़ता है और एक खास फर्स्ट एसी कूपे तक पहुंचता है। कूपे के दरवाजे को पिंक कलर के मोतियों वाले पर्दे और दिल के आकार की सजावट से खूबसूरती से सजाया गया है, जो लोगों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लेता है। कूपे के अंदर का नजारा किसी नॉर्मल ट्रेन के डिब्बे जैसा नहीं दिखता। पूरी जगह को खास अंदाज में सजाया गया है। छत पर रेड और सफेद रंग के गुब्बारे लगाए गए हैं, फर्श पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरी गई हैं और दीवारों व खिड़कियों को गुलाब, गेंदा और रजनीगंधा के ताजे फूलों से सजाया गया है।

कूपे को खास अंदाज में सजाया गया

कूपे की नीचे वाली बर्थ पर सफेद चादर बिछाकर लाल और सफेद फूलों की पंखुड़ियों से दिल का बड़ा आकार बनाया गया था। बिस्तर पर भी गुलाब की पंखुड़ियां सजाई गई थीं, वहीं ऊपर की मुड़ी हुई बर्थ पर “आई लव यू” लिखा हुआ सजावटी कट-आउट लगाया गया था। रंग-बिरंगी फेयरी लाइट्स ने पूरे कूपे को और भी आकर्षक बना दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जहां कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में इसे “सुहागरात एक्सप्रेस” नाम दे दिया। जहां कई लोगों ने इस अनोखी सजावट की तारीफ की, वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या ट्रेन के कोच को इस तरह सजाने के लिए रेलवे से अनुमति ली गई थी।

यूजर्स ने किए कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि यह कानूनी है या नहीं, लेकिन अगर रेलवे कपल्स के लिए ऐसे कूपे उपलब्ध कराए तो यह अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है। बस यात्रियों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। हम नहीं चाहते कि यह कई होटलों की तरह बेवजह चर्चा का विषय बने।” एक अन्य यूजर ने सवाल किया, “क्या इनके पास इसकी परमिशन है?” एक और कमेंट में कहा गया, “भाई, इसकी इजाजत किसने दी और यह कब से होने लगा? यह बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड है, और ये लोग इसमें सहज भी हैं।” वहीं, कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में इस सजे हुए कूपे को “चलता-फिरता हनीमून सुइट” भी कहा।

ट्रेन की बर्थ को बना दिया हनीमून सुइट, वीडियो वायरल; रेलवे का भी आया रिएक्शन

बर्थ को फूलों से इस तरह से सजाया गया है, जैसे हनीमून मनाया जाने वाला है। पूरी बर्थ में गुब्बारे, फूल और गुलदस्ते लगे हुए हैं। सीट पर गुलाब की पंखुड़िया हैं और उससे दिल बना हुआ है। यह वीडियो वायरल हो गया है।

Video: भारतीयों की सेविंग्स की आदत के पीछे क्या है असली वजह, यूरोप में 10 साल रहे शख्स ने बताए 4 बड़े कारण

भारत में बचत करना सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। ज्यादातर परिवार बचपन से ही बच्चों को पैसे संभालकर खर्च करने और भविष्य के लिए बचत करने की सीख देते हैं। नौकरी लगने के बाद भी लोगों की पहली प्राथमिकता अक्सर सेविंग्स बढ़ाना और आने वाले समय के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करना होती है। वहीं, यूरोप के कई देशों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली इससे काफी अलग नजर आती है। वहां लोग भविष्य की चिंता के बजाय वर्तमान में खुलकर खर्च करते हुए दिखाई देते हैं।

आखिर दोनों जगहों की सोच में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या इसकी वजह सिर्फ लोगों की मानसिकता है या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा है? इसी सवाल का जवाब यूरोप में लंबे समय से रह रहे एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने अपने अनुभव के आधार पर दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।

  1. इलाज का खर्च सबसे बड़ी चिंता

मुकुल के मुताबिक, यूरोप में लोग टैक्स और सोशल सिक्योरिटी के जरिए हेल्थकेयर का लाभ लेते हैं। किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें इलाज के खर्च की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती।

वहीं भारत में कई परिवारों को अस्पताल का खर्च खुद उठाना पड़ता है। यही वजह है कि लोग मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पैसे बचाकर रखते हैं।

  1. बच्चों की पढ़ाई पर होता है भारी खर्च

उन्होंने बताया कि यूरोप के कई देशों में सरकारी स्कूलों में अच्छी और मुफ्त या बेहद कम खर्च वाली शिक्षा मिल जाती है। जहां भारत में बड़ी संख्या में माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, जहां फीस और दूसरे खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से बचत करना जरूरी माना जाता है।

  1. रिटायरमेंट के लिए खुद बनाना पड़ता है सहारा

मुकुल का कहना है कि यूरोप में सोशल सिक्योरिटी और पेंशन जैसी सुविधाएं लोगों को भविष्य को लेकर कुछ राहत देती हैं।

जबकि भारत में अधिकतर लोग अपनी रिटायरमेंट के लिए खुद ही पैसा जोड़ते हैं। नौकरी के दौरान लगातार बचत करने की यही एक बड़ी वजह है।

  1. शादियों पर होता है लाखों का खर्च

उन्होंने ये भी कहा कि भारत में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि बड़ा पारिवारिक आयोजन होती है। कई परिवार शादी पर अपनी सालों की बचत खर्च कर देते हैं।

यूरोप में आमतौर पर शादियां काफी सादगी से होती हैं, इसलिए वहां लोगों पर ऐसा आर्थिक दबाव कम होता है।

लोगों ने क्या कहा?

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर लोगों ने अलग-अलग राय दी।

एक यूजर ने लिखा, “आपकी बातें हमेशा जानकारी बढ़ाने वाली होती हैं।”

दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि माता-पिता और पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। खासकर 90 के दशक की पीढ़ी पर ये दबाव ज्यादा है।”

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “आपके सभी पॉइंट सही हैं।”

वहीं एक यूजर का कहना था कि भारत की बड़ी आबादी भी इसकी एक अहम वजह है, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या को सभी तरह की सरकारी सुविधाएं देना आसान नहीं है।

बचत की आदत के पीछे सिर्फ सोच नहीं, व्यवस्था भी

मुकुल आनंद का मानना है कि भारत और यूरोप के लोगों की बचत की आदत में सबसे बड़ा फर्क उनके देश की व्यवस्था से आता है। जहां यूरोप में कई जरूरी खर्चों का बोझ सरकार और सोशल सिक्योरिटी सिस्टम संभाल लेते हैं, वहीं भारत में लोगों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए खुद पहले से आर्थिक तैयारी करनी पड़ती है।

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या की वजह से कई ऑफिस ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है। वहीं हाल ही में एक महिला प्रोफेशनल ने बताया कि, उसको वर्क फ्रॉम होम मिलने के बावजूद सिर्फ लैपटॉप लेने के लिए ऑफिस जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऑफिस तक पहुंचने में कुल 1 घंटे का समय लगा। वहीं कई यूजर्स ने मुंबई में हर साल मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों और बारिश के बीच भी कर्मचारियों पर पड़ने वाले काम के दबाव को लेकर अपनी राय रखी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

मार्केटिंग प्रोफेशनल और आईआईएम रायपुर से पढ़ाई कर चुकी इहिना डी ने मुंबई में रेड अलर्ट के दौरान अपना एक्सपीरिएंस लिंक्डइन पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, भारी बारिश के बीच, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लोगों को केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की कि खराब मौसम को देखते हुए जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। इहिना डी ने बताया कि उनकी कंपनी ने भी भारी बारिश के कारण कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू कर दी थी।

ऑफिस में भूल गई लैपटॉप

इहिना डी ने बताया कि उन्हें बाद में याद आया कि उनका लैपटॉप ऑफिस में ही रह गया है। उन्होंने लिखा, “मुंबई में कल रेड अलर्ट घोषित किया गया था, इसलिए आज मैं वर्क फ्रॉम होम कर रही हूं। लेकिन अपना लैपटॉप ऑफिस में ही छोड़ आई थी।” उन्होंने आगे लिखा, “जब पूरा शहर अपने प्लान रद्द कर रहा था और रेनकोट निकाल रहा था, तब मैं मजबूरी में कार से ऑफिस जा रही थी।” इहिना ने बताया कि ऑफिस पहुंचकर उन्होंने सिर्फ अपना लैपटॉप उठाया और करीब तीन मिनट में वापस निकल गईं। उन्होंने लिखा, “अपना लैपटॉप लिया, तीन मिनट में फिर कार में लौट आई। एक घंटे का सफर और ऑफिस में सिर्फ तीन मिनट।”

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इस एक्सपिरिएंस के बाद इहिना ने मुंबई में हर साल होने वाली बारिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ये सिर्फ बारिश नहीं है। यह हर साल होने वाला ऐसा ठहराव है, जिसके आने का सभी को पता होता है, लेकिन पूरा शहर मानो ये दिखावा करता है कि यह आने वाला ही नहीं है।” उन्होंने हर साल मानसून के दौरान होने वाली पानी भरी सड़कों, जलभराव और आखिरी समय में होने वाली वर्क-फ्रॉम-होम की घोषणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “हम जानते हैं कि बारिश जून में शुरू होगी। हमें यह भी पता है कि जुलाई में हालात और खराब होंगे। फिर भी हर साल ऐसा लगता है जैसे यह सब अचानक हो गया हो।”

उन्होंने ये भी माना कि हर किसी के पास घर से काम करने की सुविधा नहीं होती। उन्होंने लिखा, “आज मुझे वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला, इसलिए मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। मेरा काम नहीं रुका और मेरा सफर सिर्फ मेरे बेडरूम से मेरी डेस्क तक था। लेकिन इससे मुझे यह भी एहसास हुआ कि लाखों मुंबईकरों के पास वर्क फ्रॉम होम का विकल्प नहीं है। वे फिर भी बारिश में, लोकल ट्रेन से और बाइक पर सफर करके काम पर पहुंचे। यह कोई ‘हसल कल्चर’ नहीं है, यह बस मुंबई है।”

Viral Video: मॉल में ‘विराट कोहली’ की एंट्री से मची अफरा-तफरी, बाद में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली के दुनिया भर में फैंस हैं। विराट कोहली की एक झलक पाने के लिए फैंस हमेशा एक्साईटेड रहते हैं। वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर विराट कोहली की तरह दिखने वाला एक सोशल मीडिया क्रिएटर का प्रैंक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में एक शख्स विराट कोहली जैसी हेयरस्टाइल और टैटू बनवाकर आरसीबी की जर्सी पहन कर लखनऊ के एक मॉल में जाते हुए नजर आ रहा है। लोगों ने कोहली समझ लिया और बड़ी संख्या में लोग उनके आसपास इकट्ठा हो गए। बाद में पता चला कि वह भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली नहीं, बल्कि उनके जैसे दिखने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर कार्तिक शर्मा थे।

सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं इस प्रैंक को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए और कहा कि भीड़भाड़ वाली जगह पर इस तरह की हरकत करना सही नहीं है।

युवक ने किया प्रैंक

सोशल मीडिया क्रिएटर कार्तिक शर्मा, जिनकी शक्ल विराट कोहली काफी मिलती-जुलती हैं ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो शेयर किया। प्रैंक को बिल्कुल असली दिखाने के लिए कार्तिक शर्मा ने विराट कोहली के लुक और अंदाज की पूरी तरह नकल की। उन्होंने कोहली जैसी हेयरस्टाइल, दाढ़ी और टैटू अपनाए, साथ ही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जर्सी भी पहनी। इतना ही नहीं, वह चार बॉडीगार्ड के साथ बीएमडब्ल्यू कार से मॉल पहुंचे, जिससे लोगों को लगा कि सच में विराट कोहली वहां आए हैं। ये प्रैंक शुरू होते ही सफल होता नजर आया।

 

जैसे ही कार्तिक शर्मा मॉल के अंदर पहुंचे, कई लोगों ने उन्हें विराट कोहली समझ लिया और उनके आसपास भीड़ जमा हो गई। लोग उनके साथ सेल्फी लेने और उनके पीछे-पीछे चलने लगे, जिससे मॉल में काफी हलचल मच गई।

कुछ ही देर में भीड़ जमा हो गई

वीडियो में दावा किया गया कि मॉल के सुरक्षा कर्मी भी इस पूरे घटनाक्रम से हैरान हो गए। कार्तिक शर्मा के अनुसार, कुछ सिक्योरिटी गार्ड उन्हें मॉल के अंदर ले जाने लगे और भीड़ को संभालने में जुट गए। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग उनके पीछे चलने लगे, जबकि सुरक्षा कर्मचारी और उनके साथ मौजूद बॉडीगार्ड भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश करते नजर आए। वीडियो में दिखाया गया कि कुछ ही देर में मॉल के कई फ्लोर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोग रेलिंग और बालकनी से उस शख्स को देखने की कोशिश करने लगे, जिसे वे विराट कोहली समझ रहे थे।

वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों को ये प्रैंक मजेदार लगा, लेकिन कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी आलोचना की। उनका कहना था कि इस तरह की हरकत से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और सार्वजनिक जगह पर अनावश्यक भीड़ जुटने से लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

Viral Video: ‘तुम्हारा न्यूमरोलॉजी नंबर क्या है?’ जवाब सुनते ही ओनर ने किराए पर घर देने से किया इनकार

Viral Video: मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में बजट में हर खोजना काफी मुश्किल होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर मुंबई में किराए पर घर लेने से जुड़ा एक अनोखा मामला चर्चा में है। एक आर्टिस्ट और इन्फ्लुएंसर ने बताया कि, उनकी एक दोस्त को मुंबई में सिर्फ उसके न्यूमरोलॉजी नंबर की वजह से किराए पर घर नहीं मिला। उनकी दोस्त ने एक मकान देखने के लिए मकान मालकिन से मुलाकात की थी, लेकिन बाद में उसे फ्लैट देने से इनकार कर दिया गया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।

फ्लैट देने से किया इनकार

एक आर्टिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वाग्मिता सिंह का इंस्टाग्राम पर ये वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वाग्मिता सिंह ने बताया कि मकान मालकिन ने उनकी दोस्त से पूछा, “तुम्हारा नंबर क्या है?” पहले उनकी दोस्त को लगा कि वह मोबाइल नंबर पूछ रही हैं। लेकिन बाद में मकान मालकिन ने साफ किया कि वह जन्मतिथि के आधार पर निकलने वाले न्यूमरोलॉजी नंबर के बारे में पूछ रही थीं। वाग्मिता सिंह के अनुसार, मकान मालकिन ने फ्लैट और उनकी दोस्त के न्यूमरोलॉजी नंबर की तुलना की।

न्यूमरोलॉजी नंबर अलग थी

उन्होंने कहा कि, फ्लैट का नंबर 4 से जुड़ा है, जबकि उनकी दोस्त का नंबर 7 है। मकान मालकिन का कहना था कि दोनों नंबर एक-दूसरे के अनुकूल नहीं हैं, इसलिए उन्होंने फ्लैट किराए पर देने से इनकार कर दिया। इस घटना पर रिएक्शन देते हुए वाग्मिता सिंह ने कहा कि “मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि इस स्थिति को क्या कहूं।” इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में गुनगुनाया, “इस मेंटल इलनेस को मैं क्या नाम दूँ,” और अपनी हैरानी जाहिर की। इस वीडियो पर लोगों ने कई मजेदार रिएक्शन दिए है।

 

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर रिएक्शन दिया है। एक यूजर ने मजाक में लिखा, “लेकिन 4-7 तो बहुत अच्छा कॉम्बो है। आंटी ने एक अच्छा मौका गंवा दिया।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, “अच्छा लगा कि कुछ लड़कियां सच में न्यूमरोलॉजी समझती हैं। 4 और 7 सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक हैं।” वहीं एक और यूजर ने टिप्पणी की, “इंडिया इवॉल्व हो रहा है, लेकिन पीछे की ओर।”

IAF Success Story: छोटे शहर की बेटी ने अकेले MiG-21 उड़ाकर रचा इतिहास, बनीं भारत की पहली महिला फाइटर पायलट

एक समय था जब भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनना महिलाओं के लिए सिर्फ एक सपना माना जाता था। काबिलियत होने के बावजूद लड़कियों के लिए लड़ाकू विमान उड़ाने का रास्ता बंद था। लेकिन मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे से निकली अवनी चतुर्वेदी ने इस सोच को बदल दिया। उन्होंने अकेले MiG-21 बाइसन फाइटर जेट उड़ाकर इतिहास रच दिया और भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने बिना किसी ट्रेनर के फाइटर विमान की कमान संभाली। उनकी कहानी आज लाखों बेटियों के लिए हौसले और मेहनत की मिसाल बन चुकी है।

भाई की वर्दी से मिली देश सेवा की प्रेरणा

अवनी चतुर्वेदी का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा जिले में हुआ और उनका बचपन देवलोंड कस्बे में बीता। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में थे। भाई को वर्दी में देखकर अवनी के मन में भी देश के लिए कुछ करने की इच्छा पैदा हुई।

हालांकि उन्होंने सेना में जाने की बजाय आसमान को अपना रास्ता चुना। उनका सपना था कि वह भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनकर देश की सेवा करें।

जब सपना मुश्किल था, लेकिन हौसला मजबूत था

जिस समय अवनी बड़ी हो रही थीं, उस दौर में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम महिलाओं के लिए बंद थी। यानी महिलाएं चाहकर भी लड़ाकू विमान उड़ाने का मौका नहीं पा सकती थीं।

लेकिन अवनी ने इस बाधा को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया।

फ्लाइंग क्लब ने बदली जिंदगी की दिशा

अवनी ने राजस्थान की बनस्थली विद्यापीठ से बीटेक की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान वह फ्लाइंग क्लब से जुड़ीं और पहली बार विमान उड़ाने का अनुभव हासिल किया।

धीरे-धीरे उड़ान भरना उनका जुनून बन गया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) की तैयारी की और भारतीय वायुसेना में शामिल होने का रास्ता बनाया।

2015 का फैसला, जिसने खोल दिए बंद दरवाजे

साल 2015 भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। सरकार ने महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम खोलने का फैसला किया।

इसी ऐतिहासिक पहल के तहत अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह का चयन हुआ। ये तीनों भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।

जून 2016 में तीनों को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला और एक नए दौर की शुरुआत हुई।

MiG-21 उड़ाकर रचा ऐसा रिकॉर्ड, जो हमेशा याद रहेगा

फाइटर पायलट बनना तो बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन असली परीक्षा अकेले उड़ान भरना था। क्योंकि सोलो फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में कोई ट्रेनर मौजूद नहीं होता।

19 फरवरी 2018 को जामनगर एयरफोर्स स्टेशन से अवनी चतुर्वेदी ने MiG-21 बाइसन को अकेले उड़ाया। करीब 30 मिनट की इस ऐतिहासिक उड़ान के साथ वह भारत की पहली महिला बन गईं, जिन्होंने अकेले फाइटर जेट उड़ाया।

यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि भारतीय विमानन इतिहास में बदलाव का प्रतीक था।

विमान को फर्क नहीं पड़ता पायलट पुरुष है या महिला”

अवनी की सोच उनकी उपलब्धियों जितनी ही प्रेरणादायक है। एक बार उनसे महिला फाइटर पायलट होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विमान को इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसे उड़ाने वाला पुरुष है या महिला, उसे सिर्फ यह पता होता है कि उसे कौन सही तरीके से उड़ा सकता है।

उनकी यह सोच लैंगिक समानता का मजबूत संदेश देती है।

भारत की बेटी ने विदेशों में भी लहराया परचम

अवनी ने अपनी पहली ऐतिहासिक उड़ान के बाद भी कई उपलब्धियां हासिल कीं। साल 2023 में वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं, जिन्होंने जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।

इस उपलब्धि ने दिखाया कि भारतीय महिला पायलट अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।

नारी शक्ति पुरस्कार से हुआ सम्मान

अवनी चतुर्वेदी के योगदान को देखते हुए साल 2020 में उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देश में महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देने के लिए दिया जाता है।

एक उड़ान जिसने बदल दी हजारों बेटियों की सोच

अवनी चतुर्वेदी की कहानी सिर्फ एक फाइटर जेट उड़ाने की कहानी नहीं है। यह उन सीमाओं को तोड़ने की कहानी है, जो कभी महिलाओं के रास्ते में खड़ी थीं।

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सूर्यकुमार ने कहा बाहर से करता हूं टीम इंडिया का समर्थन, बाकी पोस्ट फेक

Suryakumar Yadav

पूर्व टी-20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान सुर्यकुमार यादव ने वायरल हो रही पोस्ट को फेक बताते हुए कहा कि वह टीम से बाहर रहकर भी टीम इंडिया का समर्थन करते हैं। सूर्यकुमार यादव ने साथ ही कहा कि फैंस ऐसी किसी भी पोस्ट पर यकीन ना  करें जो यह बताए कि वह टीम इंडिया के हालिया फॉर्म को देखते हुए बहुत खुश है।


सूर्यकुमार यादव ने 5 साल के क्रिकेट करियर में इतना कुछ कमा लिया जितना क्रिकेट खिलाड़ी दस साल में नहीं कमा पाते। खासकर 2013 से 2023 के कालखंड के लिए तो यह कहा जा सकता है। विराट कोहली जैसा क्रिकेटर भी टी-20 विश्वकप विजेता कप्तान नहीं बन पाया, यह तथ्य इस बात को साबित करने के लिए काफी है।

हालांकि 35 वर्षीय सूर्यकुमार यादव को जब टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम में नहीं चुना गया तो उनके करियर पर अर्धविराम लग गया। इस उम्र में वापस टीम में जगह बनाना काफी मुश्किल है क्योंकि युवा खिलाड़ियों की खेप इंडियन प्रीमियर लीग में हर साल तैयार हो रही है।