इंजन खराब होने से लेकर वारंटी खत्म होने तक… E20 Petrol पर सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों E20 Petrol को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। E20 पेट्रोल को लेकर पानी, इंजन डैमेज, माइलेज और वारंटी से जुड़े कई दावे भी किए जा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा है कि इसका इस्तेमाल करने पर वाहन का बीमा क्लेम या कंपनी की वारंटी खत्म हो सकती है। इस दावे के वायरल होने के बाद केंद्र सरकार ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की और लोगों से ऐसी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की।

सरकार ने इन बड़े दावों की बताई सच्चाई

सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। संबंधित बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन के उपयोग से न तो वाहन का बीमा प्रभावित होता है और न ही कंपनी की वारंटी पर कोई असर पड़ता है। सरकार की ओर से साझा की गई जानकारी में कहा गया कि बीमा कंपनियों और वाहन निर्माता कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से भारत में किसी भी वाहन के बीमा या कंपनी की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए इस तरह की अफवाहों पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिन गाड़ियों को E20 ईंधन के लिए तैयार किया गया है और जो तय मानकों को पूरा करती हैं, उनकी कंपनी वारंटी पहले की तरह जारी रहेगी। यानी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले भी सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कई गलत जानकारियों पर विस्तार से जवाब दिया था। सरकार ने एक विस्तृत जानकारी जारी कर इंजन की सुरक्षा, ईंधन की खपत, वाहन की वारंटी, माइलेज और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि E20 कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना वैज्ञानिक अध्ययनों, तय सुरक्षा मानकों और कई देशों के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मंत्रालय ने बताया कि इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल दुनिया के कई देशों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिका, ब्राज़ील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों में भी यह ईंधन पहले से उपयोग में है। मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन के प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता और माइलेज में भी केवल मामूली बदलाव देखने को मिलता है।

सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की तेल आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर देश पर पड़ता है। ऐसे में इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारत के इंजीनियरों से ज्यादा पैसे और इज्जत कमाते हैं ऑस्ट्रेलिया के प्लंबर! वहां रहने वाले ऐडी खानेजा ने बताई गजब की बात

सोशल मीडिया पर एक भारतीय युवक का वीडियो इन दिनों खूब चर्चा में है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले इस युवक ने वहां प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और बढ़ई जैसे स्किल्ड प्रोफेशन को मिलने वाली कमाई और सम्मान पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि इन कामों को वहां सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मानजनक करियर माना जाता है। उनके वीडियो ने भारत में स्किल्ड ट्रेड्स को लेकर लोगों की सोच पर नई बहस छेड़ दी है।

यहां प्लंबर बनना भी लोगों का सपना है’

वीडियो में युवक बताते हैं कि भारत में अक्सर पढ़ाई में कमजोर बच्चों को ताना दिया जाता है कि वे बड़े होकर प्लंबर, बढ़ई या इलेक्ट्रिशियन बनेंगे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में स्थिति बिल्कुल अलग है। वहां कई युवा खुद इन पेशों को चुनना चाहते हैं क्योंकि इनमें अच्छी कमाई और बेहतर भविष्य मिलता है।

15 मिनट के काम के मिले हजारों रुपये

उन्होंने एक निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके घर का ताला खराब हो गया था। इसे ठीक करने के लिए उन्होंने एक बढ़ई को बुलाया। बढ़ई ने सिर्फ 15 मिनट में काम पूरा किया और इसके लिए 150 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर फीस ली। उनका कहना था कि ऐसे कामों की वहां अच्छी कीमत दी जाती है।

सैलरी सुनकर रह जाएंगे हैरान

युवक के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में एक कंस्ट्रक्शन मैनेजर सालाना करीब 2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक कमा सकता है। वहीं प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन भी आसानी से 1.2 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर या उससे अधिक की कमाई कर लेते हैं।

अब बेटे को इंजीनियर नहीं, बढ़ई बनाना चाहूंगा’

वीडियो में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब वह शायद पहले भारतीय पिता होंगे जो अपने बच्चे से इंजीनियर या डॉक्टर बनने के बजाय बढ़ई का काम सीखने को कहेंगे। उनका मानना है कि इससे अच्छी कमाई भी होगी और रोजमर्रा के छोटे-मोटे कामों के लिए दूसरों पर निर्भर भी नहीं रहना पड़ेगा।

सिर्फ पैसे नहीं, सम्मान भी मिलता है

उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में हाथ से काम करने वाले लोगों को काफी सम्मान दिया जाता है। प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और बढ़ई जैसे पेशों को वहां किसी भी दूसरे प्रोफेशन की तरह सम्मानजनक माना जाता है। उनके मुताबिक, भारत में अभी भी इन कामों को उतनी इज्जत नहीं मिलती।

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ यूजर्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में न्यूनतम वेतन और स्किल ट्रेनिंग सिस्टम की वजह से इन नौकरियों की अच्छी कमाई होती है। वहीं कुछ लोगों का मानना था कि आज भी इंजीनियरिंग और दूसरे प्रोफेशन में कमाई की संभावनाएं अधिक हैं। इस वीडियो ने एक बार फिर स्किल-बेस्ड प्रोफेशन और उनके सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है।

2.9 करोड़ रुपये की US नौकरी छोड़ी, IIT टॉपर ने कानपुर में खोली किराने की दुकान, वजह हैरान कर देगी!

2.9 करोड़ रुपये की US नौकरी छोड़ी, IIT टॉपर ने कानपुर में खोली किराने की दुकान, वजह हैरान कर देगी!

सोशल मीडिया पर एक ऐसी भावुक कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है। IIT Bombay के एक टॉपर ने विदेश में मिले करोड़ों रुपये के जॉब ऑफर को छोड़कर अपने माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि उन्हें अमेरिका की एक कंपनी से शानदार पैकेज मिला था, लेकिन परिवार की परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया। इस कहानी ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि असली सफलता पैसा है या अपने अपनों के साथ खड़ा रहना।

जहां एक तरफ युवा विदेश जाकर करियर बनाने का सपना देखते हैं, वहीं इस फैसले ने एक अलग ही उदाहरण पेश किया है। यह कहानी अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे भावनात्मक और प्रेरणादायक बता रहे हैं।

2.9 करोड़ रुपये का शानदार ऑफर ठुकराया

रिपोर्ट्स के अनुसार, कंप्यूटर साइंस से B.Tech गोल्ड मेडलिस्ट विवेक शर्मा को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक स्टार्टअप से करीब $240,000 (लगभग ₹2.9 करोड़) सालाना का जॉब ऑफर मिला था। इस ऑफर में वीजा, रिलोकेशन और ग्लोबल करियर का शानदार मौका भी शामिल था।

साधारण परिवार से निकलकर IIT तक का सफर

विवेक का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता रेलवे में क्लर्क थे और मां ट्यूशन पढ़ाकर घर चलाने में मदद करती थीं। परिवार ने उनकी पढ़ाई के लिए कई त्याग किए, यहां तक कि गहने बेचकर और बचत से उन्हें कोटा भेजा गया।

अचानक बदली जिंदगी की कहानी

जब सब कुछ ठीक चल रहा था और वह अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ आया। उनके पिता को हार्ट अटैक आ गया और मां को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चला।

विदेश नहीं, परिवार चुना

इस मुश्किल समय में विवेक ने बड़ा फैसला लिया और विदेश जाने की बजाय कानपुर में ही रुकने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने माता-पिता की देखभाल शुरू की और उनके साथ रहना चुना।

ग्रोसरी शॉप से नई शुरुआत

रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक अब अपने घर के नीचे एक छोटी किराने की दुकान चला रहे हैं और साथ ही जरूरतमंद बच्चों को कोडिंग भी सिखा रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार से बढ़कर कुछ नहीं होता।

सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं

इस कहानी को पढ़कर लोग सोशल मीडिया पर भावुक हो गए हैं। कई यूजर्स ने कहा कि असली सफलता पैसा नहीं बल्कि परिवार और जिम्मेदारी है। उनकी यह कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

 

Viral Video: मनाली की वादियों में बदली जिंदगी! पहाड़ों में शिफ्ट होते ही हर महीने ₹30,000 की बचत, कॉरपोरेट कपल का वीडियो वायरल

Viral News: दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम या बेंगलुरु जैसे महंगे शहरों की भागदौड़ छोड़कर एक कॉरपोरेट कपल ने जब हिमाचल प्रदेश के मनाली में बसने का फैसला किया, तो उनका मकसद पैसे बचाना नहीं बल्कि सुकून भरी जिंदगी जीना था। लेकिन इस फैसले ने उनकी जिंदगी के साथ-साथ बैंक बैलेंस भी बदल दिया। अब यह कपल हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा की बचत कर रहा है। अंजलि और नमन ने इंस्टाग्राम पर @anjali.aur.naman नाम से अपने अकाउंट के जरिए अपनी जिंदगी में हए बदलाव को लेकर जानकारी दी है।

दोनों रिमोट कॉरपोरेट जॉब करते हैं। उन्होंने बताया कि वे शहर छोड़कर मनाली इसलिए आए ताकि प्रकृति के बीच शांत और संतुलित जीवन जी सकें। उनका कहना है कि पैसे बचाना उनका उद्देश्य नहीं था। लेकिन यह अपने आप होने लगा।

किराए में हुई सबसे बड़ी बचत

शहरों में जहां वे हर महीने ₹45,000 किराया देते थे। वहीं, मनाली में उन्हें सिर्फ ₹28,000 में बेहतर घर मिल गया। यानी केवल किराए में ही ₹17,000 की मासिक बचत होने लगी। रिमोट वर्क की वजह से रोज ऑफिस जाने की जरूरत नहीं रही। इससे हर महीने करीब ₹3,000 का यात्रा खर्च बचने लगा।

कपल ने क्या कहा?

वीडियो में अंजलि कहती हैं, “हमने बिना कोशिश किए ही हर महीने 30,000 रुपये से ज्यादा बचाना शुरू कर दिया। हाय, हम अंजलि और नमन हैं। मनाली में रहने वाला एक कॉर्पोरेट कपल जो रिमोट वर्क करता है। हम यहां पैसे बचाने के लिए नहीं आए थे। बल्कि अपनी कॉर्पोरेट नौकरी करते हुए ‘स्लो ट्रैवल’ (आराम से यात्रा) का अनुभव करने आए थे।”

इसके बाद वह बताती हैं कि हिमालय के इस शहर में बसने के बाद उनके खर्च कैसे बदले। सबसे बड़ी बचत किराए में हुई, जो शहर में 45,000 रुपये से घटकर मनाली में 28,000 रुपये हो गया। इससे उनके रहने का मासिक खर्च 17,000 रुपये कम हो गया।

रिमोट वर्क से किराए का खर्च समाप्त

रिमोट वर्क की वजह से रोजाना आने-जाने का खर्च भी खत्म हो गया। इससे हर महीने लगभग 3,000 रुपये की बचत हुई। इसके अलावा ऑफिस डिनर, कॉफी के लिए बाहर जाना और स्नैक ब्रेक जैसे आम खर्च भी तेजी से कम हुए। इससे उनके महीने के बजट में 7,500 रुपये की और कमी आई।

हालांकि, सबसे बड़ी हैरानी की बात वीकेंड पर घूमने-फिरने के खर्च का खत्म होना था। शहर में रहते हुए यह कपल तेज-तर्रार शहरी जिंदगी से दूर छोटी-छोटी यात्राओं पर हर महीने लगभग 5,000 से 6,000 रुपये खर्च करता था। मनाली आने के बाद उन्हें ऐसे ब्रेक की योजना बनाने की जरूरत महसूस नहीं हुई, क्योंकि प्रकृति और शांत माहौल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं।

‘पैसे बचाने नहीं, जिंदगी बदलने आए थे’

अंजलि का कहना है, “हमने रिमोट वर्क इसलिए नहीं चुना कि पैसे बचेंगे। बल्कि इसलिए चुना क्योंकि हम अलग तरीके से जीना चाहते थे। बचत तो बस एक बोनस बन गई।”

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सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग महानगरों में बढ़ते खर्च, रिमोट वर्क के फायदे और छोटे शहरों में बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कई लोग अब यह मानने लगे हैं कि अगर नौकरी रिमोट हो, तो छोटे शहरों में रहकर बेहतर जीवन और बड़ी बचत दोनों संभव हैं।

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Lock Upp 2: आकांक्षा चमोला ने श्रेया कालरा को बताया ईविल, फैंस ने एक्ट्रेस का किया सपोर्ट

Lock Upp 2: जब से एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने ‘लॉक अप सच या सजा’ में एंट्री की है, तब से वह चर्चा में बनी हुई हैं। शो के हालिया एपिसोड में तब एक बड़ा मोड़ आया जब आकांक्षा को पता चला कि श्रेया कालरा—जिसे वह अपनी दोस्त मानती थीं—ने उनका एक राज़ खोल दिया है, जिसकी वजह से उन्हें गेम में अपनी एक ‘लाइफलाइन’ गंवानी पड़ी। गुस्से में आकर आकांक्षा ने श्रेया से सवाल-जवाब किए और उन्हें “बुरी इंसान” कहा, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर दर्शकों ने उनके समर्थन में खूब मैसेज किए।

इस हफ़्ते की शुरुआत में, जब आकांक्षा ने श्रेया को बचाने का फ़ैसला नहीं किया, तो श्रेया ने सूफ़ी मोतीवाला के साथ आकांक्षा के एक राज के बारे में बात की। हाल के एपिसोड में, वह क्लिप आकांक्षा को दिखाई गई। इसके बाद उन्होंने बताया कि वह राज उनके बायसेक्शुअल होने और गौरव खन्ना से शादी करने से पहले महिलाओं के साथ रिश्ते में रहने के बारे में था। हालांकि आकांक्षा ने सच को खुलकर स्वीकार किया, लेकिन जिस तरह से यह बात सामने आई, उसे लेकर वह रो पड़ीं।

बाद में, एलिमिनेशन से बचने के बाद, आकांक्षा घर लौटी और अन्य प्रतियोगियों के सामने श्रेया का सामना किया। उसने कहा, “मैं सबके सामने कहना चाहती हूं कि मैंने दुनिया में इससे ज्यादा दुष्ट, निर्दयी और असंवेदनशील इंसान कभी नहीं देखा। तुमने जो सूफी के साथ मेरा राज साझा किया है ना, बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे बोल रही हो, मैंने तुम्हारा साथ नहीं दिया? लेकिन जो तुमने सूफी को बताया, वो मैंने तुम्हें बताया तक नहीं। हमारी बैकस्टेज पर बातचीत हुई थी। तुमने उसे सुन लिया और उसका इस्तेमाल किया।”

आकांक्षा ने आगे कहा, “इस औरत पर भरोसा मत करो। यह बात शो का हिस्सा भी नहीं थी, लेकिन वह इसे खेल में ले आई। इसलिए, साफ-साफ बता दूं, अब मेरे पास कोई सहारा नहीं है। वह पीठ पीछे छुरा घोंपने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। भगवान आपका भला करे। आशा है भगवान और तुम्हारा कर्म थोड़ा सुख और शांति दे और तुम्हारे अंदर जो लोगों के लिए गंदगी और नफरत है ना वो कभी तो कम हो।

यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गई। कई दर्शकों ने आकांक्षा का समर्थन किया और श्रेया के व्यवहार की आलोचना की। एक यूज़र ने लिखा, “श्रेया इस शो की सबसे बुरी इंसान है। सिर्फ़ गेम के चक्कर में उसने अपनी इंसानियत खो दी है। शर्म की बात है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “उसने कंगना रनौत से भी बेहतर तरीके से उसकी क्लास लगाई।” तीसरे ने लिखा, “इस सीन को देखने के बाद जो संतुष्टि मिली, वह कमाल की थी।” एक और यूज़र ने कहा, “उसने वही कहा जो दर्शक महसूस कर रहे थे,” जबकि एक फ़ैन ने कमेंट किया, “श्रेया बस फरहाना भट्ट बनने की कोशिश कर रही है।” एक और ने कहा, “आकांक्षा ने जो कुछ भी कहा, वह बिल्कुल सही है।”

रितेश देशमुख और फ़राह खान द्वारा होस्ट किए गए ‘लॉक अप’ सीज़न 2 का प्रीमियर 27 जून को हुआ। इस जेल-थीम वाले रियलिटी शो में 15 सेलिब्रिटीज़ को बंद किया गया है, जो अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत साबित करने के लिए मुकाबला कर रहे हैं। हालिया एपिसोड में सीज़न का पहला एविक्शन हुआ, जिसमें श्रेष्ठा अय्यर को शो से बाहर कर दिया गया। मेकर्स ने एक नए वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट की एंट्री का भी हिंट दिया है।

90 हजार की सैलरी, कोई फालतू खर्च नहीं, फिर भी 15 लाख के कर्ज में डूबा शख्स; आप तो नहीं कर रहे यही गलती

पुणे के एक 36 साल के आदमी की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्ट में यह बताया गया है कि इस शख्स ने 90 हजार की सलैरी थी, उसके पास कोई फालतू का खर्च नहीं था फिर वह 15 लाख के कर्ज में कैसे चला गया।

Viral Post: 500 जॉब एप्लिकेशन के बाद भी नहीं आया इंटरव्यू कॉल…खर्च चलाने के लिए रैपिडो चला रहा कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट

आज के समय में नए ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कई युवाओं को लंबे समय तक अच्छी नौकरी नहीं मिल रही। कई जगह आवेदन करने के बावजूद अबतक इंटरव्यू का मौका नहीं मिला। इसके बाद कुछ युवाओं को अपने खर्च पूरे करने के लिए अस्थायी या छोटे-मोटे काम करने पड़ रहे हैं। हाल ही में एक ऐसी ही कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

एक X यूजर ने रैपिडो राइडर से हुई अपनी मुलाकात शेयर किया। राइडर ने बताया कि उसने इस साल कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया है, लेकिन अब तक उसे पहली नौकरी नहीं मिल सकी। ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और कई लोग इसे आज के समय में फ्रेशर्स के सामने मौजूद रोजगार की चुनौतियों की सच्ची तस्वीर बता रहे हैं।

युवक ने किया पोस्ट

यह कहानी X यूजर नीरज ने शेयर किया है। उन्होंने बताया कि, “रैपिडो की सवारी के दौरान उनकी नजर राइडर के हेलमेट पर लगे एक कॉलेज के स्टिकर पर पड़ी। इसके बाद ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने के दौरान उन्होंने उससे 10 मिनट तक बातचीत शुरू की। बातचीत में राइडर ने बताया कि उसने इस साल कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिवीजन के साथ ग्रेजुएशन किया है।” पोस्ट में आगे कहा, “पढ़ाई पूरी होने के दो महीने बाद भी नौकरी नहीं मिलने के कारण वह रोज सुबह 6 बजे से रैपिडो चलाकर अपना खर्च चला रहा है। युवक ने यह भी बताया कि वह 500 से ज्यादा कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन अब तक उसे किसी भी कंपनी से इंटरव्यू का कॉल नहीं आया।”

घर वालों को नहीं पता

नीरज ने अपनी पोस्ट में लिखा कि युवक ने बताया, “उसके माता-पिता अब भी यही समझते हैं कि वह घर पर रहकर इंटरव्यू की तैयारी कर रहा है। उसने उन्हें यह नहीं बताया कि वह रैपिडो चला रहा है, क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा कि अपनी स्थिति उनके सामने कैसे रखे।” नीरज के मुताबिक, “युवक ने बिना किसी शिकायत के सिर्फ इतना कहा कि फिलहाल नौकरी का बाजार ऐसा ही है और फिर वह अपनी राइड पूरी करने में लग गया।” पोस्ट के आखिर में नीरज ने लिखा कि, “उन्हें लगता है ये सिर्फ एक युवक की कहानी नहीं है, बल्कि आज के समय में कई फ्रेश ग्रेजुएट्स इसी तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।”

पोस्ट पर लोगों ने किया रिएक्ट

इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी रिएक्शन दिए। एक यूजर ने कहा, “3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में भी युवाओं को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।” वहीं, एक अन्य यूजर ने सिर्फ “OMG” लिखकर अपनी हैरानी जताई। कई लोगों ने यह भी कहा कि आजकल बहुत से नए ग्रेजुएट्स नौकरी की तलाश के साथ-साथ गिग वर्क या पार्ट-टाइम काम करने को मजबूर हैं। उनका मानना है कि मौजूदा समय में फ्रेशर्स के लिए नौकरी हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है।

IND vs ENG: प्लेइंग 11 से निकाले जाने के बाद नाराज सैमसन को मनाते दिखे गौतम गंभीर? वीडियो हो रहा वायरल

IND vs ENG: भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा मुकाबला मैनचेस्टर में खेला जा रहा है। मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया। पहले बैटिंग करने आई भारतयी टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 190 रन बनाई। वहीं इ्ंग्लैंड की टीम अभी बैटिंग कर रही है। इस मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भारत के लिए डेब्यू किया है। वैभव को संजू सैमसन की जगह टीम में शामिल किया गया है। वहीं इसी बीच टीम से बाहर किए जाने के बाद संजू सैमसन और हेड कोच गौतम गंभीर के बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

गौतम ने संजू से की बातचीत

आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार खराब प्रदर्शन के बाद संजू सैमसन को टीम से बाहर बैठना पड़ा। उनकी जगह युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को पहली बार भारतीय टीम से खेलने का मौका मिला। इसी बीच हेड कोच गौतम गंभीर और संजू सैमसन मैदान पर बातचीत करते नजर आए। जब टीम मैनेजमेंट ने वैभव को इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच की प्लेइंग इलेवन में शामिल करने का फैसला किया, तभी मैदान पर हेड कोच गौतम गंभीर और संजू सैमसन आपस में बातचीत करते नजर आए। कैमरे में कैद हुई इस बातचीत को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं, क्योंकि सैमसन इस मुकाबले में अंतिम एकादश का हिस्सा नहीं थे।

बड़ी पारी नहीं खेल पाए वैभव

इस बातचीत की कोई ऑडियो सुनाई नहीं दिया, इसलिए ये कहना संभव नहीं है कि दोनों के बीच क्या बात हुई। लेकिन उस समय की स्थिति को देखते हुए यह दृश्य काफी चर्चा में रहा। संजू सैमसन सिर्फ खराब फॉर्म की वजह से बाहर किए गए एक आम खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि वह लंबे समय से टीम के भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेल रहे युवा वैभव सूर्यवंशी बड़ी पारी नहीं खेल सके। उन्होंने तेज शुरुआत करने की कोशिश की, लेकिन 10 गेंदों पर 14 रन बनाकर आउट हो गए और यादगार डेब्यू का मौका हाथ से निकल गया।

गंभीर ने हमेशा किया सपोर्ट

संजू सैमसन लंबे समय से टीम प्रबंधन के भरोसेमंद खिलाड़ियों में रहे हैं। जब उनके चयन को लेकर सवाल उठ रहे थे, तब भी हेड कोच गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट ने उनका साथ नहीं छोड़ा। टी20 विश्व कप के दौरान वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी शानदार नाबाद 97 रन की पारी के बाद गंभीर ने खुलकर उनकी तारीफ की थी और कहा था कि सैमसन बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उनका मानना था कि टीम ने उन पर जो भरोसा दिखाया, सैमसन ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से उसे सही साबित किया। नए खिलाड़ी को मौका मिलने के बाद भी गौतम गंभीर का संजू सैमसन से बात करना चर्चा का विषय बन गया। इसने दिखाया कि टीम में बदलाव के बावजूद खिलाड़ियों का सम्मान बना रहता है।

न्यूयार्क में UN मुख्यालय के बाहर तिब्बती कार्यकर्ता का आत्मदाह:चीन की बर्बरता के खिलाफ उठाया कदम, धर्मशाला में आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर तिब्बती मूल के एक अमेरिकी कार्यकर्ता द्वारा आत्मदाह करने का एक बेहद स्तब्ध करने वाला मामला सामने आया है। इस समाचार के बाद हिमाचल के धर्मशाला में शोक की लहर है। यहां उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। मृतक की पहचान लोबसांग पाल्डेन (लोबगा रंगजेन) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, लोबगा ने यह आत्मघाती कदम तिब्बत में चीन की बढ़ती दमनकारी नीतियों और हाल ही में बीजिंग द्वारा लागू किए गए ‘जातीय एकता और प्रगति’ कानून के कड़े विरोध में उठाया। इस घटना के बाद से ही दुनिया भर में निर्वासित जीवन जी रहे तिब्बतियों में शोक और आक्रोश की लहर है। तिब्बती ध्वज और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे लोबगा प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्टों के अनुसार, जब लोबगा रंगजेन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पहुंचे, तो उन्होंने तिब्बत की पारंपरिक पोशाक ‘चुपा’ पहनी हुई थी। उनके एक हाथ में तिब्बत का राष्ट्रीय ध्वज था। उन्होंने वहां चीन विरोधी नारे लगाए और खुद को आग के हवाले कर दिया। आत्मदाह से ठीक पहले जारी किया भावुक वीडियो संदेश कदम उठाने से ठीक पहले लोबगा ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने दुनिया भर के तिब्बतियों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता और हमारे मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष को तेज करना होगा। कोई भी राष्ट्रीय लक्ष्य बिना कड़े प्रयासों के हासिल नहीं होता। हम सभी को क्षेत्र, संप्रदाय और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर देश हित में अपना सर्वोच्च योगदान देना होगा।” धर्मशाला में शोक: केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने आयोजित की प्रार्थना सभा इस दुखद घटना की खबर जैसे ही हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला पहुंची, वहां माहौल गमगीन हो गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के सिक्योंग हॉल में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए एक विशेष और भव्य प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व, बौद्ध भिक्षुओं और सभी सरकारी कर्मचारियों ने भाग लेकर लोबगा को श्रद्धांजलि दी। “चीन के कठोर कानूनों ने उठाया कदम उठाने पर मजबूर किया” — सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग (राष्ट्रपति) पेनपा त्सेरिंग ने घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चीन द्वारा तिब्बत में थोपे जा रहे कठोर और अमानवीय कानूनों ने ही लोबगा को यह आत्मघाती कदम उठाने के लिए विवश किया है। हालांकि, हम तिब्बती प्रशासन की ओर से सभी नागरिकों से पुरजोर अपील करते हैं कि वे इस तरह आत्मदाह का रास्ता न चुनें।” इसी कड़ी में सीटीए के धर्म और संस्कृति मंत्री ने भी मानव जीवन को अनमोल बताते हुए कहा कि तिब्बत के इस लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष को जिंदा रखने के लिए युवाओं के जीवन को बचाना और जीवित रहकर लड़ना सबसे ज्यादा आवश्यक है। 2009 से अब तक 157 तिब्बती दे चुके हैं जान उल्लेखनीय है कि तिब्बत की आजादी, मानवाधिकारों की बहाली और तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की वतन वापसी की मांग को लेकर आत्मदाह का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2009 से लेकर अब तक तिब्बत के भीतर और दुनिया के अलग-अलग कोनों में कुल 157 तिब्बती नागरिक न्याय की गुहार लगाते हुए आत्मदाह कर अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।

क्या सिया गोयल ने पुलिस कस्टडी में 30 हजार का स्वेटशर्ट पहना? वायरल फोटो को लेकर बवाल

सिया गोयल को लेकर ऑनलाइन आलोचना का सिलसिला जारी रहा। कुछ लोगों ने दावा किया कि वह पुलिस हिरासत में भी तनावमुक्त दिखाई दे रही थी। कुछ यूजर्स ने वीडियो में हथकड़ी न दिखने पर भी सवाल उठाए हैं।