मैं गे हूं; लव मैरिज और बच्चा पैदा होने के बाद पति ने बताई सच्चाई, फिर क्या हुआ? वीडियो वायरल

सोशल मीडिया साइट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला ने दावा किया है कि उसके पति ने शादी और बच्चा होने के बाद अपनी सच्चाई बताई कि वह गे है। इसके बाद उन्होंने दोस्तों की तरह साथ रहने और अपना बच्चा पालने पर सहमति जताई।

Amitabh Bachchan: मुंबई में बारिश बनी आफत! अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले ‘जनक’ में भरा पानी, सामने आया वीडियो

Amitabh Bachchan: मुंबई में लगातार हो रही मॉनसून की तेज बारिश से जनजीवन एक बार फिर प्रभावित हो गया है। कई इलाकों में जलभराव की वजह से लोगों को आने-जाने और रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मुंबई में लगातार हो रही तेज बारिश असर दिग्गज एक्टर अमिताभ बच्चन के घर पर भी पड़ा। लगातार बारिश के वजह से अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले ‘जनक’ के अंदर और आसपास पानी भरा हुआ नजर आ रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

हाल ही में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने जुहू इलाके का वीडियो शेयर कर आसपास के हालात दिखाए गए। वीडियो में दिखाई दिया कि लगातार बारिश के कारण अभिनेता अमिताभ बच्चन के घर जनक के बाहर घुटनों तक पानी भर गया था। इतना ही नहीं बारिश का पानी बंगले के अंदर तक पहुंच गया।

मिताभ में घर में पहुंचा बारिश का पानी

वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया, “मुंबई में भारी बारिश के बीच अमिताभ बच्चन के मशहूर जुहू स्थित बंगले में भी बारिश का पानी घुस गया।” वीडियो बनाते हुए इन्फ्लुएंसर ने कहा, “आप देख सकते हैं कि अमिताभ बच्चन के घर के बाहर भी पानी भर गया है। पूरा इलाका जलमग्न है। यह उनका जुहू स्थित बंगला है। मुंबई में लगातार हो रही बारिश की वजह से यहां कई जगहों पर इसी तरह जलभराव की स्थिति देखने को मिल रही है।”

 

वीडियो में आगे अमिताभ बच्चन के बंगले के सामने का इलाका और ओवरफ्लो हो रहे गटर को दिखाते हुए कहा, “यहां गटर का पानी बाहर निकल रहा है। मौके पर बीएमसी के कुछ अधिकारी भी पहुंचे हुए हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं।”

 

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इस फिल्म में आएंगे नजर

वीडियो में इन्फ्लुएंसर ने अभिनेता अजय देवगन के घर के आसपास का इलाका भी दिखाया, जहां बारिश का असर साफ नजर आया। वहीं, अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले जनक में जलभराव की ये पहली घटना नहीं है। वहीं अमिताभ बच्चन के काम की बात करें तो वो जल्द ही निर्देशक नाग अश्विन की फिल्म ‘कल्कि 2898 AD’ के सीक्वल में नजर आएंगे। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में उनके साथ प्रभास और कमल हासन भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

Motorola Edge 70 Max HDR10+ सर्टिफिकेशन साइट पर दिखा, WPC लिस्टिंग से चार्जिंग डिटेल्स सामने आईं

Motorola Edge 70 Max: Motorola Edge 70 Max कंपनी की Edge 70 सीरीज का अगला स्मार्टफोन हो सकता है। हाल ही में इसके कुछ प्रमोशनल इमेज भी सामने आए थे, जिसे अब HDR10+ सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर भी देखा गया है। लिस्टिंग से पता चलता है कि यह फोन भारत के साथ-साथ दूसरे ग्लोबल मार्केट में भी लॉन्च होगा। यह स्मार्टफोन Wireless Power Consortium (WPC) डेटाबेस में भी दिखाई दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Motorola Edge 70 Max में Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट दिया जा सकता है। इसके अलावा, यह फोन तीन कलर ऑप्शन में लॉन्च हो सकता है और इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होने की उम्मीद है।

Motorola Edge 70 Max सर्टिफिकेशन वेबसाइट्स पर देखा गया

HDR10+ सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर Motorola Edge 70 Max की लिस्टिंग से फोन के नाम की पुष्टि होती है और यह संकेत मिलता है कि इसे भारत और अन्य एशियन-पैसिफिक और EMEA (यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका) बाजारों में लॉन्च किया जाएगा। लिस्टिंग में फोन की किसी भी स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं किया गया है।

इस बीच, Motorola Edge 70 Max भी Wireless Power Consortium (WPC) की साइट पर मॉडल नंबर XT2611 और MPP25 पावर प्रोफाइल के साथ दिखाई दिया है। इसे Qi वर्जन 2.2.1 के साथ लिस्ट किया गया है, जिससे पता चलता है कि इसमें 25W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट है।

पहले लीक हुए मार्केटिंग मटीरियल से पता चला था कि Motorola Edge 70 Max में होल-पंच डिस्प्ले डिजाइन, फ्लैट डिस्प्ले, फ्लैट रियर पैनल और चौकोर आकार का रियर कैमरा मॉड्यूल होगा। ऐसी चर्चा है कि इसे तीन कलर ऑप्शन – ग्लेशियर ब्लू, ओनिक्स ब्लैक और सेज ग्रीन – में लॉन्च किया जाएगा। इसमें Octa-Core Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट पर चलने की संभावना है।

कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सिस्टम हो सकता है, जिसमें मेन कैमरा, टेलीफोटो लेंस और अल्ट्रा-वाइड लेंस शामिल होंगे। इसके अलावा, यह फोन MIL-STD-810H ड्यूरेबिलिटी सर्टिफिकेशन के साथ आ सकता है, जो इसे ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनाता है।

हालांकि, Motorola Edge 70 Max के लॉन्च की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इसका सर्टिफिकेशन वेबसाइट्स पर दिखाई देना इस बात की ओर इशारा करता है कि इसका लॉन्च जल्द ही हो सकता है।

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Viral Post: पार्टी और स्पा की लत ने बढ़ाई मुश्किलें, 23 हजार की सैलरी में 3 लाख के कर्ज से परेशान युवक

Viral Post: सोशल मीडिया पर एक युवक का खर्चों को लेकर किया गया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। युवक ने बताया कि गलत खर्चों की वजह से उस पर 3 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज हो गया है। 27 वर्षीय एक युवक ने मुताबिक बार-बार पार्टी करना, स्पा पर पैसे खर्च करना और क्रेडिट कार्ड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से उस पर 3 लाख रुपये से अधिक का कर्ज हो गया। अब उसे अपने पुराने फैसलों पर पछतावा हो रहा है।

युवक ने बताया कि, उसकी कमाई घर का खर्च और कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए उसने सोशल मीडिया पर लोगों से आर्थिक स्थिति सुधारने और कर्ज से बाहर निकलने की सलाह मांगी। सोशल मीडिया पर युवक की ये कहानी तेजी से वायरल हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

Reddit पर की गई पोस्ट में युवक ने अपनी फाइनेंस स्थिति का पूरा ब्यौरा शेयर किया। पोस्ट के टाइटल में उन्होंने लिखा, “अपनी बेवकूफी की वजह से कर्ज के जाल में फंस गया।” उसने अपनी पोस्ट के साथ लोन और क्रेडिट कार्ड के बकाया की तस्वीर भी लगाई। उसके अनुसार, उस पर चार पर्सनल लोन और तीन क्रेडिट कार्ड का बकाया है। उसने बताया कि, “हर महीने उसके हाथ में 23,000 रुपये की सैलरी आती है, जिससे घर का खर्च चलाने के साथ कर्ज की किस्तें चुकाना उसके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।”

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3 लाख का हो गया कर्ज

उन्होंने लिखा, “कृपया कोई सलाह दें। मैंने इन कर्जों को चुकाने के लिए 3 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेने की कोशिश की, लेकिन मेरी सभी लोन एप्लिकेशन खारिज हो गईं। मेरी मौजूदा सैलरी 23,000 रुपये है। किराया और घर का खर्च निकालने के बाद हर महीने मुश्किल से 4,000 रुपये ही लोन की किस्त के लिए बचते हैं।” युवक ने बताया कि ज्यादा कर्ज और क्रेडिट कार्ड की सीमा का अधिकांश हिस्सा इस्तेमाल करने की वजह से उसका क्रेडिट स्कोर भी लगातार गिर रहा है।

गिर गया क्रेडिट स्कोर

उन्होंने आगे लिखा, “ज्यादा क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करने की वजह से मेरा CIBIL स्कोर 770 से घटकर 765 हो गया है। मैं 27 साल का हूं और मुझसे बड़ी गलती हो गई।” अपडेट में उसने बताया, “मैंने क्रेडिट कार्ड के करीब 80% बकाया को EMI में बदल दिया, लेकिन अब उसकी किस्तें भरना भी मुश्किल हो रहा है। मैं परिवार के साथ रहता हूं और घर में अकेला कमाने वाला हूं। मैंने सारा पैसा पार्टियों और स्पा (बेवकूफी) पर खर्च कर दिया है।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के सामने आने के बाद कई लोगों ने अपनी राय शेयर किए। कुछ यूजर्स ने खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी, वहीं कई लोगों ने कर्ज चुकाने की बेहतर योजना बनाने और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए व्यावहारिक उपाय अपनाने की बात कही। एक यूजर ने लिखा, “अगर कोई आपको नया लोन नहीं दे रहा है, तो फिलहाल सभी EMI रोक दें। अपने बैंक खाते में पैसा न रखें, क्योंकि ऑटो-डेबिट के जरिए रकम कट सकती है। इसके बाद तीनों प्राइवेट लोन और दोनों क्रेडिट कार्ड के लिए बैंक या कंपनी से सेटलमेंट की बात करें।”

एक यूजर ने लिखा, “ऐसा बिल्कुल मत करो। तुम अभी सिर्फ 27 साल के हो, अपनी क्रेडिट हिस्ट्री खराब मत होने दो। कर्ज की रकम बहुत बड़ी नहीं है। ये करीब 10 महीने की सैलरी के बराबर है। अगर समझदारी से खर्च करो और लगातार कोशिश करो, तो 12 से 36 महीनों में इसे चुका सकते हो।” एक और यूजर ने लिखा, “अच्छी बात है कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है। अब इसे सुधारने पर ध्यान दो। जहां तक हो सके बचत करो, घर का खाना खाओ और थोड़ा-थोड़ा करके भुगतान करते रहो। साथ ही, क्रेडिट कार्ड कंपनियों से बात करके बकाया रकम को EMI में बदलने की कोशिश करो।” एक अन्य यूजर ने सलाह दी कि हालात और बिगड़ने से पहले परिवार या दोस्तों से मदद लेनी चाहिए।

Lenovo ने भारत में लॉन्च किया Tab Plus Gen 2 और LOQ गेमिंग मॉनिटर्स, जानें कीमत और फीचर्स

Lenovo ने आज भारत में नया Lenovo Tab Plus Gen 2 और LOQ गेमिंग मॉनिटर्स की नई सीरीज लॉन्च की है। इस टेक कंपनी (जिसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है) ने अपना नया Android टैबलेट MediaTek Dimensity 7400 चिपसेट के साथ पेश किया है। इसमें 12.1 इंच का बड़ा 2.5K डिस्प्ले और JBL ट्यून किए गए 9 स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम दिया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने गेमर्स के लिए तीन नए LOQ गेमिंग मॉनिटर भी लॉन्च किए हैं, जो तेज रिफ्रेश रेट और फास्ट रिस्पॉन्स टाइम के लिए बनाए गए हैं।

Lenovo Tab Plus Gen 2 के स्पेसिफिकेशन और फीचर्स

Motorola की पैरेंट कंपनी ने Lenovo Tab Plus Gen 2 में 12.1-इंच की 2.5K IGZO LCD डिस्प्ले दी है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट, 800 निट्स तक की हाई ब्राइटनेस मोड और 16:10 आस्पेक्ट रेशियो को सपोर्ट करती है। टैबलेट में MediaTek Dimensity 7400 प्रोसेसर है, साथ ही 12GB तक LPDDR5 RAM और 256GB तक UFS 3.1 स्टोरेज है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह टैबलेट Android 16 पर चलता है और Lenovo का कहना है कि इसे 2030 तक दो बड़े Android OS अपग्रेड और चार साल के सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे।

कैमरे की बात करें तो, इस डिवाइस में ऑटोफोकस के साथ 13MP का रियर कैमरा और वीडियो कॉल व सेल्फी के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसकी एक खास खूबी JBL-इंजीनियर्ड नौ-स्पीकर सेटअप है जिसमें Dolby Atmos की सुविधा है, साथ ही इसमें एक बिल्ट-इन रोटेटिंग किकस्टैंड भी है जो कई तरह के व्यूइंग मोड को सपोर्ट करता है, जैसे कि थिएटर, हैंगिंग, स्टैंड और लीन मोड।

कनेक्टिविटी के मामले इस फोन में Wi-Fi 6, Bluetooth 5.4, IP52-रेटेड प्रोटेक्शन, Bluetooth स्पीकर मॉड और Lenovo Tab Pen Plus व वायरलेस कीबोर्ड जैसे ऑप्शनल एक्सेसरीज का सपोर्ट शामिल है। इसके अलावा, टैबलेट में 45W फास्ट चार्जिंग वाली 10200mAh की बैटरी है, जो 15 घंटे तक YouTube स्ट्रीमिंग दे सकती है।

नए LOQ मॉनिटर के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

टैबलेट के साथ-साथ, Lenovo ने LOQ 24-10, LOQ 27-10 और LOQ 27Q-10 गेमिंग मॉनिटर भी पेश किए हैं। फ्लैगशिप LOQ 27Q-10 में 27-इंच का QHD IPS डिस्प्ले है, जिसमें 180Hz रिफ्रेश रेट, 0.5ms रिस्पॉन्स टाइम, HDR10 सपोर्ट और 99% sRGB कलर कवरेज मिलता है। इसमें स्मूद गेमप्ले के लिए AMD FreeSync और VESA Adaptive Sync का सपोर्ट भी दिया गया है।

लेनोवो का कहना है कि नए मॉनिटर लाइनअप PlayStation 5, Xbox और Nintendo Switch जैसे पॉपुलर गेमिंग प्लेटफॉर्म के साथ कम्पैटिबल हैं, जिससे ये PC और कंसोल, दोनों तरह के गेमर्स के लिए सही हैं।

भारत में Lenovo Tab Plus Gen 2 और LOQ मॉनिटर की कीमत और उपलब्धता

Lenovo Tab Plus Gen 2 के 8GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की शुरुआती कीमत Rs. 35,999 है। जबकि, 8GB RAM + 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत Rs. 38,999 है। यह टैबलेट सिर्फ Celestial White कलर में उपलब्ध है और इसे Lenovo India की वेबसाइट, प्रमुख ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म और देश के ऑथराइज्ड रिटेल स्टोर से खरीदा जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, टैबलेट के साथ-साथ, भारत में Lenovo LOQ मॉनिटर सीरीज की शुरुआती कीमत Rs. 9,799 है और ये Amazon पर उपलब्ध होंगे। इस लाइनअप में अभी LOQ 24-10, LOQ 27-10 और LOQ 27Q-10 मॉडल शामिल हैं।

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Ketan Agarwal Murder Case: सिया गोयल का पब में पार्टी करते वीडियो वायरल, शराब पीते देखी गईं

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी और अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या की आरोपी सिया गोयल एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। उनका एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें वह एक नाइटक्लब में पार्टी करती और शराब पीती हुई दिख रही हैं। वीडियो में सिया गोयल भीड़-भाड़ वाले पब में फोन पर बात करते हुए और हाथ में एक बोतल जैसी चीज पकड़े हुए नजर आ रही हैं। यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की चल रही जांच पर फिर से लोगों का ध्यान गया है।

वहीं, वीडियो सामने आने के बाद, अग्रवाल परिवार ने आरोप लगाया है कि रिश्ते के आगे बढ़ने से पहले उन्हें जान-बूझकर सिया की जीवनशैली से जुड़ी यह बात और कई अन्य जानकारी नहीं बताई गई थी। उन्होंने एक बार फिर इस मामले की सभी पहलुओं से निष्पक्ष और पूरी जांच करने की मांग दोहराई है।

हालांकि, यह वीडियो कब का है इसकी पुष्टि अभी तक नहीं है, लेकिन यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिससे जांच को लेकर बहस और तेज हो गई है। साथ ही यह मर्डर केस तब से ही देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जब से यह मामला सामने आया है।

बता दें कि पुणे के रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में एक चट्टान से धक्का देकर मार डाला गया था। बताया जाता है कि केतन और उनकी मंगेतर की सगाई हो चुकी थी और इस साल नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी।

वहीं, इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल (20) और उनके कथित साथी चेतन चौधरी (22) को आरोपी बनाया गया है, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

कथित हत्या के बाद, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और जांच जारी रहने तक उन्हें 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कई पहलुओं से मामले की जांच कर रही है, जबकि यह मामला पूरे देश में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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‘जोहो का नाम लिया और 90% कम हो गई कीमत’ Zoho के को-फाउंडर ने शेयर किया किस्सा

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस की कीमत को लेकर जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू का एक दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जोहो के को-फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि एक भारतीय कस्टमर को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस रिन्यूअल की कीमत में 90 परसेंट की कमी मिली, जब उसने सॉफ्टवेयर की बड़ी कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस-सूट प्रोडक्ट्स को देख रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई अपनी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने बताया कि, संबंधित ग्राहक पहले से जोहो के कुछ प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहा था। उनके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने लाइसेंस रिन्यूअल साइकिल के दौरान कीमत में तेजी से बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस सॉफ्टवेयर को अपनाने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

श्रीधर वेम्बू ने कस्टमर के हवाले से कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का एक बड़ा लाइसेंस रिन्यूअल आया और उन्होंने कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी। हमने उन्हें बताया कि हम जोहो ऑफिस सूट देख रहे हैं और उन्होंने कीमत में 90 परसेंट की कमी कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि कस्टमर ने बाद में कंपनी के पैसे बचाने में मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, “भले ही हमारा ऑफिस सूट खरीदा न हो।” श्रीधर वेम्बू ने अपनी पोस्ट में ग्राहक की पहचान, माइक्रोसॉफ्ट के अनुबंध का आकार या छूट किन शर्तों पर दी गई, इसकी कोई जानकारी शेयर नहीं की।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन संस्थानों या कंपनियों का माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस नवीनीकरण होने वाला है, वे बातचीत के दौरान जोहो को एक संभावित ऑप्शन के रूप में सामने रख सकते हैं। श्रीधर वेम्बू ने ये एग्जांपल तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर अपनी बात रखते हुए शेयर किया। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए मॉडलों को लेकर चर्चा कर रहे थे और उनका कहना था कि चीन के ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स से बढ़ते मुकाबले के कारण बड़ी टेक कंपनियों को भी अपनी रणनीति और पेशकश में अधिक आक्रामक बदलाव करने पड़ रहे हैं।

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि, सॉफ्टवेयर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलता है। उनके अनुसार, जब बाजार में कई मजबूत विकल्प मौजूद होते हैं, तो बड़ी कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें तय नहीं कर पातीं और ग्राहकों को बेहतर दाम व विकल्प मिलते हैं। उसी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2000 में एक संघीय अदालत ने कंपनी को मोनोपॉली से जुड़े मामले में दोषी माना था।

वेम्बू के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहना जरूरी है, क्योंकि इससे बाजार संतुलित रहता है और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं। श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से अपने ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलती रही है।

Ketan Murder: क्या केतन अग्रवाल की कुंडली में था हत्या का संकेत? वायरल दावों के बीच ज्योतिषियों ने बताए खतरनाक ग्रह योग, दी ये अहम चेतावनी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस मामले में जहां पुलिस हत्या की साजिश की जांच कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर केतन और उनकी मंगेतर सिया गोयल की कुंडली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दावा किया जा रहा है कि शादी से पहले दोनों की कुंडली का मिलान कराया गया था, जिसमें 36 में से 27 गुण मिले थे। कुंडली में किसी भी बड़े दोष का संकेत नहीं मिला था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ज्योतिष ऐसी घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकता है?

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले से धक्का देकर हत्या किए जाने का आरोप उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी पर है। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।

कुंडली को लेकर कई तरह के दावे वायरल

इसी बीच, सोशल मीडिया पर दोनों की कुंडली को लेकर कई तरह के दावे वायरल होने लगे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शादी तय होने से पहले दोनों परिवारों ने ज्योतिषीय मिलान कराया था। News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ होने के बावजूद दोनों के 36 में से 27 गुण मिले थे। किसी भी बड़े दोष (दोष) की बात सामने नहीं आई थी। वैवाहिक जीवन को सामान्य एवं सुखद बताया गया था।

हालांकि, कथित हत्या की घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेज हो गया है कि यदि कुंडली अनुकूल थी, तो इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई? इसी मुद्दे पर Zee News से बातचीत में ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुण बंसल और डॉ. अजय भाम्बी ने कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, जन्म कुंडली में मंगल का पांचवें या नौवें भाव में होना, बृहस्पति का कमजोर होना या शनि का ऐसे स्थान पर होना जिससे सप्तम भाव प्रभावित हो, कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति के स्वभाव, क्रोध या वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले योग माने जाते हैं।

हालांकि दोनों ज्योतिषियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे ग्रह योग किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित नहीं करते। उनके मुताबिक, ये केवल कुछ प्रवृत्तियों या मानसिक झुकाव का संकेत माने जाते हैं। जबकि किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके संस्कार, पारिवारिक माहौल, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन के अनुभवों से भी गहराई से प्रभावित होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति में अत्यधिक क्रोध, आवेग या मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो केवल ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर रहने के बजाय मनोवैज्ञानिक परामर्श, ध्यान, योग और परिवार का सहयोग अधिक महत्वपूर्ण है। पारंपरिक मान्यताओं के तहत रुद्राक्ष धारण करने, नियमित ध्यान करने और भगवद्गीता के छठे अध्याय का पाठ करने की भी सलाह दी गई।

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि कुंडली पूरी तरह अनुकूल थी तो कथित तौर पर इतनी भयावह घटना कैसे हुई। वहीं कई यूजर्स का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के निर्णय, रिश्ते और अपराध जैसे मामलों को केवल कुंडली के आधार पर नहीं समझा जा सकता।

News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिश्ता पक्का करने से पहले केतन के पिता और सिया के भाई साहिल ने एक ज्योतिषी से शादी को लेकर सलाह ली थी। कहा जा रहा है कि कुंडली अच्छी तरह से मिली थी। केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ आपसी समझ का संकेत दे रहे थे। दोनों के 36 में से 27 गुण मिल रहे थे। कोई बड़ा दोष नहीं पाया गया था। ज्योतिषियों ने जोड़े के लिए सुखद वैवाहिक जीवन की भविष्यवाणी की थी।

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(डिस्क्लेमर: यह खबर ज्योतिषाचार्यों द्वारा व्यक्त पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। ज्योतिष आस्था और व्यक्तिगत विश्वास का विषय है। इससे किसी व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य या अपराध में संलिप्तता की पुष्टि नहीं की जा सकती। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी है और आरोपितों का दोष न्यायालय में विधिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।)

तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

An image featuring sharp satire on the country's economy and rising inflation

साहब! दो जून की रोटी मिल जाए, बस और क्या चाहिए? यह वाक्य सुनने में जितना सरल लगता है, उतना ही भयावह है। दरअसल यह कोई संतोष का वाक्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का मृत्युलेख है जिसने करोड़ों लोगों की पूरी जिंदगी को सिर्फ रोटी तक सीमित कर दिया। जिस देश ने चंद्रयान भेज दिया, डिजिटल क्रांति कर दी, जीडीपी के ग्राफ आसमान तक पहुँचा दिए, उसी देश का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी सुबह उठकर यह तय नहीं कर पाता कि शाम को चूल्हा जलेगा भी या नहीं।

 

एक तरफ कांच की ऊंची इमारतों में बैठे लोग वर्क फ्रॉम होम करते हुए एवोकाडो टोस्ट और ग्रीन टी के साथ हेल्दी लाइफस्टाइल पर वेबिनार कर रहे हैं, दूसरी तरफ शहर के किसी नाले किनारे बैठा रिक्शेवाला अपनी पत्नी से पूछ रहा है आज आटा बचेगा या फिर बच्चों को कहानी सुनाकर सुला दें?

 

यह वही देश है जहां भूख अब आं तों से कम और भाषणों में अधिक पाई जाती है। यहां रोटी पेट से ज्यादा राजनीति में फूलती है। चुनाव आते ही हर दल गरीब की थाली में उतर आता है। कोई कहता है मुफ्त राशन देंगे, कोई कहता है पोषण देंगे, कोई कहता है सब्सिडी देंगे, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि ऐसी व्यवस्था देंगे जहां आदमी खुद अपनी रोटी सम्मान से कमा सके। क्योंकि आत्मनिर्भर गरीब राजनीति के लिए उतना उपयोगी नहीं होता जितना राशन कार्ड वाला गरीब।

 

अब रोटी भी वर्ग देखकर परोसी जाती है। अमीर आदमी की थाली में मल्टीग्रेन, लो कार्ब, ग्लूटन फ्री, ऑर्गेनिक रोटियां हैं। गरीब की थाली में रोटी नहीं, समझौता रखा होता है। आधी जली हुई दो बासी रोटियाँ, नमक-मिर्च और बच्चों को यह समझाने की कोशिश कि आज भूख कम लग रही होगी। अमीर के यहां डाइट प्लान बनते हैं, गरीब के यहां रोटी प्लान। वहां लोग वजन घटाने के लिए खाना छोड़ते हैं, यहां लोग पैसे बचाने के लिए।

 

देश की अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है। हर महीने कोई नया आंकड़ा आता है जो बताता है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने वाला है। मगर अजीब बात है कि यह अर्थव्यवस्था हमेशा गरीब की थाली के ऊपर से छलांग लगाकर निकल जाती है। स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है तो मजदूर की कमर और झुक जाती है। सेंसेक्स को देखकर कॉर्पोरेट जगत मुस्कुराता है, लेकिन दिहाड़ी मजदूर रोज सुबह इस डर से उठता है कि आज काम मिला तो रोटी मिलेगी, नहीं मिला तो लोकतंत्र का भाषण पीकर सोना पड़ेगा।

 

बिहार का मजदूर राजस्थान में ईंट ढो रहा है। उड़ीसा का युवक पंजाब की मंडियों में धूप सेंक रहा है। बुंदेलखंड का किसान दिल्ली में निर्माणाधीन इमारतों पर सीमेंट मल रहा है। और इन सबका सपना क्या है? कोई बंगला नहीं, कोई कार नहीं बस इतना कि घर में चूल्हा जलता रहे। ये लोग इस देश की अर्थव्यवस्था के अनौपचारिक देवता हैं, लेकिन व्यवस्था इन्हें अनस्किल्ड लेबर कहती है, जैसे भूख मिटाने के लिए डिग्री जरूरी हो।

 

महंगाई अब आर्थिक समस्या नहीं रही, वह एक संगठित साजिश जैसी लगती है। प्याज अब सब्जी कम, भावनात्मक हथियार अधिक हो गया है। टमाटर कभी आम आदमी की पहुंच से बाहर जाकर अचानक वीआईपी व्यवहार करने लगता है। गैस सिलेंडर की कीमत सुनकर गृहिणी रोटी बेलने से पहले बजट बेलती है। अब रसोई में मसाले कम और गणित अधिक पकता है। महीने के अंतिम सप्ताह में घर की महिलाएँ वैज्ञानिकों की तरह प्रयोग करती हैं कि बची हुई दाल से कितने दिन और लोकतंत्र चलाया जा सकता है।

 

सरकारें कहती हैं डिजिटल इंडिया बन रहा है। बिल्कुल बन रहा है। अब भूख भी डिजिटल हो गई है। राशन चाहिए तो आधार लिंक कराइए। अंगूठा लगाइए। ओटीपी डालिए। सर्वर डाउन हो तो भूखे रहिए। गरीब आदमी अब रोटी से पहले नेटवर्क खोजता है। सरकारी पोर्टल कहता है भोजन की गारंटी। गांव वाला कहता है साहब, यहां तो नेटवर्क ही नहीं आता। ऐसा लगता है मानो अब पेट भी ऐप डाउनलोड करके ही भरेगा।

 

शिक्षा और भूख का रिश्ता भी बड़ा विचित्र है। गांव के स्कूलों में बच्चे ज्ञान लेने कम, मध्यान्ह भोजन लेने अधिक आते हैं। शिक्षक उपस्थिति दर्ज करते समय जानते हैं कि बच्चे गणित से पहले खिचड़ी गिनना सीख रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा का सपना उन घरों में भेजा गया जहां मोबाइल से ज्यादा जरूरी आटा था। जिन बच्चों के घर में बिजली नहीं, उनसे कहा गया- डिजिटल बनो। यानी इस देश में गरीब से कहा जा रहा है कि वह भूखे पेट आधुनिक हो जाए।

 

राजनीति भूख की सबसे पुरानी व्यापारी रही है। हर चुनाव में गरीब की थाली कैमरे के सामने परोसी जाती है। नेता रोटी खाते हुए फोटो खिंचवाते हैं, फिर पांच साल तक गरीब लाइन में खड़ा होकर वही रोटी मांगता रहता है। पिछली सरकार कहती है हमने राशन दिया। वर्तमान सरकार कहती है हमने मुफ्त अनाज बढ़ाया। अगली सरकार शायद कहे हमने गरीब को खाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी करोड़ों लोग मुफ्त राशन पर निर्भर क्यों हैं।

 

सबसे भयावह दृश्य सोशल मीडिया पर दिखाई देता है। किसी भूखे बच्चे की वीडियो वायरल होती है। लोग दुखी इमोजी भेजते हैं, मानवता पर लंबी पोस्ट लिखते हैं, फिर अगले ही क्षण किसी सेलिब्रिटी की शादी या क्रिकेट मैच में व्यस्त हो जाते हैं। भूख अब ट्रेंडिंग कंटेंट है। गरीब की पीड़ा अब एल्गोरिद्म के भरोसे चलती है।

 

और इस पूरी व्यवस्था का सबसे क्रूर पक्ष यह है कि अब रोटी भी इज्जत मांगती है। भूखा होना अपराध नहीं माना जाता, लेकिन रोटी मांगना अपमान बना दिया गया है। लोग दान तो करते हैं, पर इस अंदाज़ में कि सामने वाले को उसकी गरीबी का पूरा अहसास हो जाए। अब रोटी पेट नहीं भरती, आत्मसम्मान भी तोड़ती है।

 

सवाल यह नहीं कि देश में अनाज की कमी है। गोदाम भरे पड़े हैं। सवाल यह है कि व्यवस्था की संवेदना खाली क्यों है। एक तरफ शादी-ब्याह में टनों खाना कूड़ेदान में फेंका जाता है, दूसरी तरफ कोई मां अपने बच्चे को पानी पिलाकर सुला देती है ताकि उसे भूख कम लगे। यह केवल आर्थिक असमानता नहीं, सभ्यता की असफलता है।

 

आज दो जून की रोटी कोई साधारण आवश्यकता नहीं रही। यह एक युद्ध है महंगाई और मजदूरी के बीच, भूख और व्यवस्था के बीच, इंसान और उपभोक्ता के बीच। आदमी अब रोटी नहीं खा रहा, वह अपनी जिंदगी किस्तों में चुका रहा है।

 

और शायद इस समय का सबसे बड़ा व्यंग्य यही है कि जिस लोकतंत्र में रोटी सबसे बड़ा मुद्दा हो, वहां भूखा आदमी आंकड़ा कहलाता है और भरी थाली वाला राष्ट्रवाद समझाता है।

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Viral Post: ‘मेरी नौकरी जाने वाली है’, लेऑफ की चर्चा के बीच माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारी का इमोशनल पोस्ट हुआ वायरल

माइक्रोसॉफ्ट के एक कर्मचारी की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने लिखा कि उन्हें लगता है कि आने वाली लेऑफ में उनका नाम भी शामिल हो सकता है। वहीं कंपनी ने अभी तक आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में बताया कि दफ्तर में पिछले कुछ समय से ऐसे कई संकेत मिल रहे थे, जिनसे उन्हें अंदाजा हो गया था कि उनकी नौकरी खतरे में है। इस पोस्ट पर लोगों ने कई तरह के रिएक्शन दिए है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

पोस्ट के मुताबिक काम करने के तरीके में बदलाव, प्रोजेक्ट्स का दूसरी टीमों को सौंपा जाना और मैनेजर की ओर से पहले जैसी बातचीत या प्रतिक्रिया न मिलना इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि उनकी भूमिका खत्म की जा सकती है।

कर्मचारी ने किया पोस्ट

कर्मचारी ने बताया कि, उन्हें पहले ही उनके नियमित प्रोजेक्ट से अलग कर दिया गया था और अब उनके मैनेजर की ओर से भी पहले जैसी बातचीत या मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था। उन्होंने कहा कि दफ्तर में हो रहे इन बदलावों को लेकर उनके सहकर्मी भी असमंजस में थे और किसी को स्पष्ट रूप से यह नहीं पता था कि आखिर इन फैसलों के पीछे क्या वजह है। कर्मचारी ने लिखा, “मेरे मैनेजर को 30 तारीख को लेऑफ लिस्ट मिल रही है। लेकिन मुझे पता है कि मुझे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।” उन्होंने बताया कि काम पर अनिश्चितता महीनों से चल रही थी और मानसिक रूप से थका देने वाली हो गई थी।

अफवाहें मेंटली थका देती है

उनके मुताबिक लगातार रीस्ट्रक्चरिंग और छंटनी की चर्चाओं के कारण काम पर ध्यान लगाना और खुद को सुरक्षित महसूस करना मुश्किल हो गया था। उन्होंने लिखा, “और सच कहूं तो? मुझे राहत महसूस हो रही है। इसलिए नहीं कि नौकरी छूटना मजेदार है। इसलिए नहीं कि मार्केट बहुत अच्छा है। इसलिए नहीं कि मैंने सब कुछ समझ लिया है। मुझे राहत इसलिए मिल रही है क्योंकि अनिश्चितता आखिरकार खत्म हो रही है।” उनके मुताबिक कंपनी में छंटनी की अफवाहें, बार-बार होने वाले बदलाव, कामकाज में सुधार की चर्चाएं और अच्छे कर्मचारियों को जाते देखना मानसिक रूप से काफी थका देने वाला रहा। उन्होंने कहा कि हर कुछ महीनों में यह डर बना रहता था कि अगली बारी कहीं उनकी तो नहीं होगी।

लेऑफ होने पर कैसा होगा इमोशन

उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे माहौल में रहना इसे छोड़ने से भी ज्यादा बुरा लगने लगा था। “किसी समय आप लेऑफ होने की चिंता करना बंद कर देते हैं और इस बात की चिंता करने लगते हैं कि यहं रहने से आपका क्या होगा।” कर्मचारी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि लेऑफ ऑफिशियली होने के बाद उनकी भावनाएं कैसी होंगी। उन्होंने लिखा, “हो सकता है कि जब यह असल में होगा, तब भी मुझे अलग तरह से महसूस हो। लेकिन अभी, एक नई शुरुआत की संभावना एक और साल की अनिश्चितता से बेहतर लग रही है। क्या कोई और उस पॉइंट तक पहुंचा है?”

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह के रिएक्शन दिए। एक यूजर ने लिखा, “मेरे साथ ऐसा तब हुआ जब मैं कोविड से प्रभावित इंडस्ट्री में था। अपने रोल की वजह से मुझे ऐसी जानकारी थी जो दूसरों को नहीं थी (इसलिए मुझे फाइनेंशियल बातें पता थीं और यह भी कि कंपनी शायद टिक न पाए) और फिर मैंने अपने मैनेजर को एक माइक्रोमैनेजर के हाथों खो दिया। मुझे जाने में राहत मिली।” दूसरे व्यक्ति ने कमेंट लिखा, “जब आप नर्ड्स को मैनेज करने के लिए साइकोपैथ्स का एक झुंड लाते हैं तो यही होता है।”

एक व्यक्ति ने आगे कहा, “अभी अमेरिका में हर कॉर्पोरेशन में यही हो रहा है। और वे “प्रोफिशिएंसी को ऑप्टिमाइज करने” जैसी बकवास करते हैं। असल में यह अपने शेयरहोल्डर्स को खुश करने के लिए कॉस्ट कटिंग है।”