ऐप से बंद हुआ ई रिक्शा तो रोने लगा ये मुस्लिम ड्राइवर, इसके बाद बाइक पर बैठे लड़के ने किया दिल जीतने वाला काम

सोशल मीडिया पर वायरल ये इंस्टा रील लोगों का ध्यान तेजी से खींच रही है, जिसमें एक ई-रिक्शा ड्राइवर बीच सड़क पर अचानक वाहन बंद होने के बाद परेशान और भावुक नजर आता है। ये छोटा-सा वीडियो अब बड़ी बहस का कारण बन चुका है, क्योंकि इसमें मजाक के नाम पर एक मेहनत करने वाले ड्राइवर की रोजी-रोटी पर असर पड़ता दिख रहा है। कई यूजर्स इसे सिर्फ प्रैंक नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही मान रहे हैं, जो सड़क पर खतरनाक स्थिति भी पैदा कर सकती है। यही वजह है कि यह रील सोशल मीडिया पर लगातार शेयर की जा रही है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल इस इंस्टा रील में एक ई-रिक्शा ड्राइवर का दर्द साफ झलकता है, जो बीच सड़क पर अचानक अपना वाहन बंद होने से परेशान है। एक बाइक सवार युवक उसके पास आकर पूछता है, “अंकल आप रो क्यों रहे हो…”, जिस पर ड्राइवर बताता है कि किसी ने उसके चीनी ऐप से उसकी तिर्री बंद कर दी, जिससे उसकी रोज़ी-रोटी और आज की कमाई का नुकसान हो गया। यह वीडियो लोगों के बीच चिंता और गुस्से का कारण बन गया है क्योंकि इसमें “प्रैंक” के नाम पर ड्राइवर की कमाई और सुरक्षा दोनों से खिलवाड़ होता दिख रहा है।

क्या है पूरा मामला?

वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग एक मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा को बीच सड़क पर रोक देते हैं। यह सब “मजाक” या प्रैंक के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन इसका असर ड्राइवर की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है। कई लोग इसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना हरकत बता रहे हैं।

BAT-BMS App क्या है?

BAT-BMS एक असली बैटरी मैनेजमेंट ऐप है, जिसे Shenzhen Grenergy Technology ने बनाया है। इसका काम बैटरी की चार्जिंग, वोल्टेज, तापमान और हेल्थ को मॉनिटर करना होता है। ये आमतौर पर बैटरी सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि किसी वाहन को रोकने के लिए।

कैसे किया जा रहा है प्रैंक”?

वायरल क्लिप्स में लोग ई-रिक्शा के पास जाकर Bluetooth के जरिए बैटरी सिस्टम से कनेक्ट करते हैं। कुछ ही सेकंड में वाहन की पावर बंद हो जाती है। यह कोई बड़ा हैक नहीं है, बल्कि उन बैटरी सिस्टम की कमजोरी का फायदा है जिनमें सुरक्षा पासवर्ड नहीं होता।

कौन से वाहन हैं ज्यादा खतरे में?

यह समस्या हर ई-रिक्शा में नहीं होती। खतरा केवल उन्हीं वाहनों में है जिनमें:

  • Bluetooth-enabled lithium battery लगी हो
  • BMS सिस्टम अनसिक्योर्ड हो
  • और 10–15 मीटर के अंदर कनेक्शन संभव हो

पुराने lead-acid बैटरी वाले ई-रिक्शा इस समस्या से सुरक्षित रहते हैं।

ड्राइवरों पर असर और बढ़ता खतरा

इस तरह के प्रैंक से ई-रिक्शा ड्राइवर बीच सड़क पर फंस जाते हैं, जिससे उनकी कमाई रुक जाती है और ट्रैफिक में भी खतरा पैदा होता है। यह सिर्फ मजाक नहीं बल्कि एक गंभीर सुरक्षा और आर्थिक समस्या बनता जा रहा है।

जिम्मेदारी और जरूरी सुधार

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी कंपनियों और डीलरों की है। जरूरी है कि बैटरी सिस्टम को मजबूत पासवर्ड और सिक्योरिटी फीचर्स के साथ बेचा जाए, ताकि ऐसे गलत इस्तेमाल को रोका जा सके और ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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चप्पल पर बार-बार हमला करता दिखा सांप, निकला इतना ज्यादा हरे रंग का जहर! वायरल वीडियो ने लोगों को किया हैरान

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है, जिसे देखकर कई यूजर्स हैरानी जताते नहीं थक रहे। महज 8 सेकंड की ये क्लिप तेजी से वायरल हो रही है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खूब शेयर की जा रही है। वीडियो में एक सांप बेहद आक्रामक अंदाज में नजर आता है, जिसकी हरकतें लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। सबसे ज्यादा ध्यान उस पल ने खींचा, जब हमले के दौरान उसके मुंह से हरे रंग जैसा तरल निकलता दिखाई देता है। यही वजह है कि इंटरनेट पर इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के दावे और सवाल सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि यह छोटा-सा वीडियो लोगों की जिज्ञासा और का कारण बन गया है।

पत्थरों के बीच फंसा था सांप, फिर हुआ अचानक हमला

वीडियो में सांप पत्थरों के बीच बैठा दिखाई देता है। तभी एक व्यक्ति उसके सामने चप्पल ले जाता है। खतरा महसूस होते ही सांप लगातार चप्पल पर वार करने लगता है। इसी दौरान उसके मुंह से बड़ी मात्रा में हरे रंग का तरल निकलता दिखाई देता है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।

क्या सच में इतना जहर छोड़ सकता है सांप?

विशेषज्ञों के अनुसार, हर बार सांप के काटने पर समान मात्रा में जहर नहीं निकलता। ये उसकी प्रजाति, उम्र, आकार और उस समय महसूस हो रहे खतरे पर निर्भर करता है। कई बार सांप बिना जहर छोड़े भी काटते हैं, जिसे ड्राई बाइट कहा जाता है।

हरे रंग का तरल हमेशा जहर नहीं होता

वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला हरा तरल देखकर कई लोगों ने इसे सांप का जहर मान लिया। हालांकि, केवल वीडियो देखकर ये तय नहीं किया जा सकता कि वो वास्तव में जहर ही है। किसी भी वायरल क्लिप के आधार पर वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जाता।

लोगों ने दिए मजेदार और हैरान करने वाले रिएक्शन

वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर कमेंट किए। किसी ने इसे बेहद डरावना बताया तो किसी ने मजाक करते हुए लिखा कि “इतना गुस्सा तो इंसानों में भी कम देखने को मिलता है।” कुछ लोगों ने वीडियो की सच्चाई पर भी सवाल उठाए।

सांप दिखे तो क्या करें?

  • सांप को छेड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश न करें।
  • सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
  • तुरंत वन्यजीव या रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

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BAT-BMS ऐप से ब्लूटूथ के जरिए बंद किए जा रहे ई-रिक्शा! वायरल प्रैंक ने बढ़ाई ड्राइवरों की परेशानी, जानिए क्या है पूरा मामला

what is bat BMS

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल ट्रेंड ने ई-रिक्शा चालकों और इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दावा किया जा रहा है कि कुछ शरारती लोग BAT-BMS नाम के एक चीनी ऐप का इस्तेमाल कर ब्लूटूथ के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा की बिजली सप्लाई बंद कर रहे हैं। इससे बीच सड़क पर ई-रिक्शा अचानक रुक जाते हैं और चालक असमंजस में पड़ जाते हैं।

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वायरल वीडियो में कुछ युवक ई-रिक्शा का पीछा करते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद वे अपने मोबाइल में BAT-BMS ऐप खोलकर कथित तौर पर 'डिस्चार्ज स्विच' का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता है। इसके बाद वे ड्राइवर के पास जाकर अनजान बनने का नाटक करते हुए मदद की पेशकश करते हैं।

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एक अन्य वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग ई-रिक्शा चालक को वाहन बंद होने के बाद करीब 3 किलोमीटर तक रिक्शा धक्का लगाकर ले जाते हुए देखा गया। एक अन्य वीडियो में कथित तौर पर ऐसे ही हरकत करने वाले युवक को लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले करने की चेतावनी दी।

 

 कई जगह मारपीट खबरें भी हैं। हालांकि इन वायरल वीडियो और उनमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी घटनाएं वास्तविक हैं या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड की गई हैं।

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क्या है BAT-BMS ऐप?

 

BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System) ऐप है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने डेवलप किया है। यह ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से बैटरी से कनेक्ट होकर अधिकृत यूजर्स को बैटरी की स्थिति देखने और आवश्यकता पड़ने पर बैटरी के डिस्चार्ज सर्किट को ऑन या ऑफ करने की सुविधा देता है। खबरों के मुताबिक भारत में कुछ कम कीमत वाले ई-रिक्शा की बैटरियों में ब्लूटूथ सुरक्षा या पासवर्ड प्रोटेक्शन नहीं होता। ऐसे में यदि बैटरी का ब्लूटूथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है, तो 10 से 15 मीटर की दूरी के भीतर मौजूद कोई भी व्यक्ति बैटरी से कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है।

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ई-वाहनों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस वायरल ट्रेंड के बाद ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा तथा बैटरी प्रबंधन प्रणाली की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक  बैटरी निर्माताओं को मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ब्लूटूथ पेयरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए ताकि अनधिकृत लोग बैटरी तक पहुंच न बना सकें।

सांप को हाथ में लहराकर रील बना रहा था दुकानदार, शूटिंग के दौरान ‘कोबरा’ ने डंसा, वीडियो वायरल

यूपी के औरैया में सांप के साथ रील बनाना एक मिठाई दुकानदार को भारी पड़ गय। रील बनाने के दौरान सांप ने दुकानदार के हाथ में डंस लिया। हालांकि दुकानदार सीधे अस्पताल पहुंच गया, जिससे उसकी जान बच सकी। वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

Parle Products IPO: पारले-जी बनाने वाली कंपनी का आएगा आईपीओ, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के वैल्यूएशन पर नजर : सूत्र

Parle Products IPO: Parle-G, Melody और Mango Bite जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली Parle Products अगले साल 1 अरब डॉलर (करीब 9,530 करोड़ रुपये) से बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रही है। मामले की जानकारी रखने वाले कई सूत्रों ने Moneycontrol को यह जानकारी दी है।

सूत्रों के मुताबिक, चूंकि ये देश प्रतिष्ठित ब्रांड है, ऐसे में प्रस्तावित IPO का साइज1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल कंपनी 10.5 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के वैल्यूएशन का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, बाजार की स्थिति के हिसाब से IPO का साइड और वैल्यूएशन बदल सकता है।

किन बैंकों को मिल सकती है जिम्मेदारी?

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अप्रैल में Request for Proposal (RFP) जारी किया था। इसके बाद कई इन्वेस्टमेंट बैंकों ने अपनी प्रेजेंटेशन दी। फिलहाल कंपनी ने Kotak Mahindra Capital, Axis Capital और HSBC Securities को सलाहकार के तौर पर चुना है।

दो अन्य सूत्रों ने भी इन नामों की पुष्टि की। इनमें से एक ने बताया कि कंपनी चौथे इन्वेस्टमेंट बैंक को भी सलाहकार समूह में शामिल करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में बातचीत जारी है।

Parle Products ने क्या कहा?

Moneycontrol ने जब Parle Products से संपर्क किया तो कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) मयंक शाह ने कहा कि कंपनी बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती। फिलहाल उसका पूरा फोकस कारोबार को बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि हर बड़ी कंपनी की तरह Parle Products भी ग्रोथ के लिए तमाम विकल्पों का मूल्यांकन करती रहती है।

वहीं, Kotak Mahindra Capital और Axis Capital ने इस खबर पर कोई जवाब नहीं दिया। HSBC Securities ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

Parle Agro से अलग है Parle Products

विजय चौहान के अगुआई वाली Parle Products असल में जयंतीलाल चौहान, सचौना चौान नादिया चौहान के नेतृत्व वाली Parle Agro से अलग कंपनी है। Parle Agro Frooti, Appy Fizz और Bailley जैसे ब्रांड बनाती है। परिवार के बंटवारे के बाद दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से कारोबार कर रही हैं।

किन कंपनियों से है मुकाबला?

भारतीय बाजार में Parle Products की प्रतिस्पर्धा Britannia, ITC (Sunfeast), Mondelez India, Perfetti, Priya Gold, Anmol Industries और Cremica जैसी कंपनियों से है।

Hurun India 500 की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, Parle Products का अनुमानित वैल्यूएशन 75,420 करोड़ रुपये था। इस वैल्यूएशन के साथ यह भारत की सातवीं सबसे मूल्यवान गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनी थी।

पहले IPO से किया था इनकार

20 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को Melody टॉफी भेंट करने का वीडियो वायरल होने के बाद CMO मयंक शाह ने कहा था कि इससे भारतीय ब्रांड को वैश्विक पहचान मिलेगी।

उसी दौरान जब उनसे IPO की योजना के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल कंपनी लिस्टिंग पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि Parle Products लंबे समय से एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है और फिलहाल उसी तरह बने रहने की योजना है।

कंपनी का कारोबार कितना बड़ा है?

मुंबई के विले पार्ले में मुख्यालय वाली Parle Products की स्थापना 1929 में हुई थी। Parle-G के अलावा कंपनी के पोर्टफोलियो में KrackJack, Monaco, Hide & Seek और Poppins जैसे लोकप्रिय ब्रांड भी शामिल हैं।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 8.5% बढ़कर 15,568.49 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, इसी दौरान उसका मुनाफा 39% घटकर 979.53 करोड़ रुपये रह गया।

बिस्किट और कन्फेक्शनरी के अलावा कंपनी केक, रस्क, आटा और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसे सेगमेंट में भी मौजूद है। कंपनी के प्रोडक्ट अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और मध्य-पूर्व सहित कई देशों में बिकते हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, कैमरून, घाना, इथियोपिया, केन्या, आइवरी कोस्ट, नेपाल और मेक्सिको समेत कई देशों में इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी हैं।

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19 दिन बाद दिखें लक्षण

लेकिन इस मामले के 19 दिन बाद, लड़के के चेहरे पर सुन्नपन और सूजन महसूस होने लगी। ‘कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल’ में बताया गया है कि इसके बाद परिवार उसे इमरजेंसी इलाज के लिए क्लिनक ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसके लक्षणों का पता लगाने की कोशिश की।

शुरुआत में, लड़के को एंटीवायरल दवा दी गई, जिसका इस्तेमाल हर्पीज वायरस से होने वाले संक्रमण के इलाज में किया जाता है। उन्हें लगा कि उसे ‘बेल्स पाल्सी’ हो सकता है, जिसमें चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियां कुछ समय के लिए लकवाग्रस्त (पैरालिसिस) हो जाती हैं।

इसके बाद वह लगातार दो बार अस्पताल गया; पहली बार उसे ‘हर्पीस जिंजिवोस्टोमेटाइटिस’ (मुंह और मसूड़ों का वायरल इन्फेक्शन) होने का शक जताया गया, और फिर अगले दिन वह तब वापस आया जब उसके चेहरे का दाहिना हिस्सा कमजोर पड़ गया था। इस दौरान उसे 39°C (102°F) बुखार हो गया, साथ ही उसे कुछ भी निगलने में दिक्कत, उलझन और ऐसी चीजें दिखाई देने लगीं जो असल में नहीं थीं (विजुअल हैलुसिनेशन)। उस दिन उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। जर्नल के अनुसार, उसे इंट्यूबेट किया गया और बच्चों के इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में भर्ती कराया गया।

जिसके बाद, कनाडा के मैनिटोबा विश्वविद्यालय के बाल रोग एवं बाल स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने चमगादड़ के कारण होने वाले रेबीज वायरस का प्रबल संदेह जताया। कुछ दिनों बाद, एक टेस्ट के दौरान इसकी पुष्टि हुई। वहीं, हॉस्पिटल में भर्ती होने के 17 दिन बाद लड़के की मृत्यु हो गई।

कनाडा में रेबीज से अब तक 28 मौतें हुईं

बता दें कि कनाडा में रेबीज का संक्रमण बहुत कम होता है। कैनेडियन वेटरनरी मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, 1924 से अब तक देश में रेबीज से इंसानों की 28 मौतें हुई हैं।

एसोसिएशन की वेबसाइट के अनासर, “रेबीज की यह कम दर बड़े पैमाने पर चल रहे टीकाकरण कार्यक्रमों की वजह से है, और अगर इन कार्यक्रमों को जारी नहीं रखा गया तो बीमारी के दोबारा फैलने का खतरा है।”

अगर कोई इंसान सीधे तौर पर चमगादड़ के संपर्क में आता है, तो उसे रेबीज के लिए ‘पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस’ (यानी रेबीज वाले जानवर के संपर्क में आने के तुरंत बाद दिया जाने वाला मेडिकल इलाज) की जरूरत होती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार लक्षण दिखने के बाद यह संक्रमण लगभग हमेशा जानलेवा साबित होता है।

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‘पैसे से ज्यादा जरूरी है हेल्थ’, करोड़ों की सैलरी छोड़ वेट्रेस बनीं महिला की कहानी कर देगी हैरान

Left corporate Job: 33 साल की उम्र में एक अच्छी-खासी कॉर्पोरेट सैलरी वाली नौकरी छोड़कर वेट्रेस का काम करने वाली एक महिला का किस्सा वायरल हो गया है। उसने बताया कि कैसे करियर में इस बदलाव ने उसकी लंबे समय से चली आ रही सेहत की समस्याओं को ठीक कर दिया। उसने इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी शेयर करते हुए बताया कि अपनी कॉर्पोरेट डेस्क जॉब के आखिरी छह महीने उसने अपनी बीमारी की असली वजह जानने के लिए लगातार टेस्ट करवाने में बिताए थे। आखिर में पता चला कि इसकी असली वजह कॉर्पोरेट स्ट्रेस (काम का तनाव) ही था।

सारामा कॉर्निश ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के आखिरी 6 महीनों में, मैं बस हवा और पत्तियों जैसा हल्का खाना खा रही थी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्पेशलिस्ट से हर तरह के टेस्ट करवा रही थी ताकि पता चल सके कि मुझे इतना गंभीर IBS क्यों हो रहा है।” उन्होंने दावा किया, “पता चला कि यह सिर्फ़ स्ट्रेस (तनाव) की वजह से था और नौकरी छोड़ने के तुरंत बाद ही सारे लक्षण गायब हो गए। मैं अब पहले से कहीं ज़्यादा सेहतमंद हूं।”

उनके पोस्ट किए गए वीडियो की शुरुआत एक टेक्स्ट के साथ होती है, जिसमें लिखा है, “मैंने 33 साल की उम्र में वेट्रेस का काम करने के लिए मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी… और अगर इसका मतलब यह है कि मुझे फिर कभी स्ट्रेस से जुड़ा IBS का कोई लक्षण नहीं होगा, तो मैं सचमुच अपनी बाकी ज़िंदगी यह फ़र्श पोंछने को तैयार हूं। सेहत ही असली दौलत है। क्लिप में उन्हें चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान के साथ फ़र्श पोंछते हुए दिखाया गया है।

एक व्यक्ति ने पोस्ट किया, “हमें अपने लिए जो कुछ भी स्वीकार करना सिखाया गया है, वह बिल्कुल अजीब और बेतुका है।” एक और व्यक्ति ने कमेंट किया, “तुम वही करो जो तुम्हें पसंद है! जॉब टाइटल से कोई फ़र्क नहीं पड़ता – बस तुम खुश और स्वस्थ रहो!” कॉर्निश ने जवाब दिया, “मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं! मैंने पिछले साल इमरजेंसी डिपार्टमेंट में नर्स की अपनी फुल-टाइम नौकरी छोड़ दी थी, और अब मैं लैशेज और बोटोक्स का काम करती हूं, और मैं पहले से 10 गुना ज़्यादा खुश और सेहतमंद महसूस करती हूं।” हालांकि कई लोगों ने उसकी पोस्ट से सहमति जताई, लेकिन कुछ लोगों का तर्क था कि वेट्रेस की नौकरी लंबे समय के लिए आर्थिक रूप से सही विकल्प नहीं है।

एक व्यक्ति ने लिखा, “मैंने पिछली गर्मियों में वेट्रेस के तौर पर काम किया था। मुझे कम से कम वेतन मिलता था, काम कम होने पर बिना पैसे के घर भेज दिया जाता था, और काम के दौरान कई पुरुषों ने मेरे साथ छेड़छाड़ की। मुझे नहीं लगता कि तनाव कम करने के लिए यह उतना आसान है जितना आप कहती हैं।

कम वेतन वाले और ग्राहकों से सीधे जुड़े काम भी बहुत तनावपूर्ण और असुरक्षित होते हैं, और वेट्रेस की नौकरी से कौन अपना होम लोन और बिल चुका सकता है? खासकर तब जब परिवार भी हो। मुद्दा यह नहीं है कि आपके पास कौन सी नौकरी है। मुद्दा है कैपिटलिज़्म (पूंजीवाद) और यह सोच कि इंसान कोई सामान है। बस गुज़ारा करने के लिए भी हमें बहुत ज़्यादा घंटे काम करना पड़ता है।”