‘पेपर लीक रोकने के लिए बनाएंगे सख्त कानून’, NEET विवाद के बीच PM मोदी का ऐलान

नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को घोषणा की कि अगले हफ्ते संसद में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधानों वाला एक बिल पेश किया जाएगा। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बिल की रूपरेखा पर शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा की जाएगी, जहां प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, “शुक्रवार को कैबिनेट पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करेगी और कैबिनेट सहयोगियों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

पीएम मोदी ने कहा, “सोमवार को, जब संसद के मानसून सत्र का दूसरा हफ्ता शुरू होगा, तो पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधानों वाला एक बिल लाया जाएगा और हम इसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश करेंगे।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वह जानते हैं कि पेपर लीक कोई छोटी समस्या नहीं है और लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद दुखद होती हैं।

उन्होंने कहा कि इसलिए, जब से NEET पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं, करीब ढाई महीने पहले-तब से सरकार ने कई कड़े कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा, “दोषियों को पकड़ लिया गया है। वे अब जेल में हैं। हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह पक्का करना था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो। तुरंत परीक्षा कराना जरूरी था। सभी संसाधनों का इस्तेमाल करके, सरकार ने यह पक्का किया कि 22 लाख छात्र दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकें।”

पीएम मोदी ने कहा कि मेडिकल-एंट्रेंस की दोबारा परीक्षा के नतीजे 19 जुलाई को घोषित किए गए और पूरे भारत से सफल छात्रों की खुशी की खबरें आई हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह उन लोगों में से नहीं हैं जो इससे संतुष्ट हो जाएंगे।

उन्होंने कहा, “इसीलिए मैंने संबंधित अधिकारियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। फास्ट-ट्रैक कोर्ट पहले ही बनाए जा चुके हैं।”

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : कच्चे तेल में उछाल ने ग्लोबल बाजारों का मूड खराब कर दिया है। गिफ्ट निफ्टी करीब 175 अंक फिसला है। FIIs की कैश में करीब 3000 करोड़ रुपये की बिकवाली देखने को मिली है। लॉन्ग शॉर्ट रेश्यो भी 8% के नीचे फिसल गया है। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

23 जुलाई को भारतीय बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट जारी रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार पर दबाव डाला। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर और निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ।

GIFT निफ्टी

GIFT निफ्टी शुरुआती कारोबार में लगभग 23,695 के निचले स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार में कमजो शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार और अमेरिकी बाजार

एशियाई बाजारों में भी आज दबाव दिख रहा है। निक्केई और कॉस्पी में तीन फीसदी की गिरावट है। महंगे क्रूड और बॉन्ड यील्ड के इस साल की ऊंचाई पर पहुंचने से US मार्केट में भी तेज बिकवाली दिखी है। डाओ जोंस 500 अंक से ज्यादा गिरा है। नैस्डैक भी दो परसेंट फिसला है।

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12.5% की जगह भारत पर अब 10% टैरिफ

ट्रंप टैरिफ से भारत को मामूली राहत संभव है। प्रस्तावित 12.5% की जगह भारत पर अब 10% टैरिफ लग सकता है। फोर्स्ड लेबर इनवेस्टिगेशन के तहत 10% टैरिफ का प्रस्ताव है। यह टैरिफ भारत समेत 60 देशों पर लागू होगा।

ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका, क्रूड ऊपरी स्तरों से थोड़ा हुआ नरम

अमेरिका, ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में है। ईरान में UK की एंबेसी बंद कर दी गई है। फ्रांस ने भी तेहरान में अपना दूतावास खाली करा लिया है। ट्रंप ने कहा है कि हूती के हमलों के लिए ईरान जिम्मेदार होगा। हालांकि, क्रूड ऊपरी स्तरों से थोड़ा नरम पड़ा है। यह 102 डॉलर तक जाकर फिलहाल 99 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।

ट्रंप ने कहा है कि पहले हूती जिम्मेदारी से व्यवहार कर रहे थे। पिछले साल अमेरिका ने हमला किया था। हमले के बाद हूती का व्यवहार जिम्मेदारी भरा था। हूतियों ने बीती रात फिर हमला किया है। इन्होंने सऊदी के 2 जहाजों पर हमला किया है। दोबारा ऐसा करना उनके हित में नहीं होगा। इसके लिए हूती और ईरान दोनों को जिम्मेदार ठहराएंगे। ईरान और हूतियों को कड़ी सैन्य सजा मिलेगी। जहाजों और माल को नुसकान की भरपाई होगी। ईरान के पैसों से नुसकान की भरपाई होगी। नुकसान की राशि बड़ी हो सकती है।

कच्चे तले में लगी आग

कच्चे तेल के भाव 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। कल ब्रेंट $101 के ऊपर बंद हुआ था। आज भी ब्रेंट $100 के ऊपर कायम है। WTI में भी $91 के ऊपर कारोबार हो रहा है। जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से इसमें तेजी आई है। रेड और ब्लैक सी दोनों जगह तनाव बढ़ा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर असमंजस कायम है। फिजिकल में भाव $105/बैरल के पार निकलते दिखे हैं। डीजल वायदा 7 अप्रैल के बाद सबसे ऊंचाई पर दिख रहा है।

इंफोसिस के निराशाजनक Q1 नतीजे

पहली तिमाही में इंफोसिस के नतीजों ने निराश किया है। constant currency Revenue Growth महज 1 परसेंट रही है। यह अनुमान से कम रही है। हालांकि मार्जिन अनुमान के मुताबिक रहे हैं। लेकिन गाइंडेंस में कटौती की गई है। आशीष कुमार दास अगले साल एक अप्रैल से सलिल पारेख की जगह इंफोसिस के नए MD & CEO होंगे। अमेरिका में इंफोसिस का ADR दो परसेंट नीचे बंद हुआ है।

इंडिगो पर पड़ी महंगे कच्चे तेल की मार

इंडिगो के नतीजों पर महंगे कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी का असर साफ दिखा है। पहली तिमाही में 20% आय बढ़ने के बावजूद कंपनी को 382 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। जेट फ्यूल खर्च 86% बढ़ा है। मार्जिन भी घटकर आधे हो गए हैं। मैनेजमेंट ने कहा है कि दूसरी तिमाही में हालात सामान्य से कमजोर रहने की उम्मीद है।

Q1 में उम्मीद से बेहतर सोना BLW के नतीजे,14% बढ़ा मोतीलाल ओसवाल का मुनाफा

पहली तिमाही में सोना BLW के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे हैं। कंपनी का मुनाफा 47% तो रेवेन्यू 52% बढ़ा है। हालांकि मार्जिन भी उम्मीद से बेहतर रही है। वहीं मोतीलाल ओसवाल का ऑपरेटिंग मुनाफा 14% बढ़ा है। साथ ही असेट एंड प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का प्रॉफिट 46% बढ़ा है।

नतीजों के लिहाज से आज अहम दिन

नतीजों के लिहाज से आज अहम दिन है। आज निफ्टी की चार कंपनियों,श्रीराम फाइनेंस,टाटा कंज्यूमर,NTPC और SBI LIFE के रिजल्ट आएंगे। श्रीराम फाइनेंस का मुनाफा 52% बढ़ सकता है। इसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन में भी सुधार संभव है। साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा,CG पावर,लॉरस लैब समेत वायदा की 13 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

आज कैबिनेट बैठक में होगा बड़ा फैसला

नीट पेपर लीक के खिलाफ पीएम मोदी का कल रात बड़ा संदेश आया। आज कैबिनेट में सरकार पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कदम उठाएगी। इससे जुड़े बिल को जल्द सदन में पास कराने की कोशिश होगी। उधर सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद अनशन तोड़ा है। जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद उन्होंनें अनशन तोड़ने का फैसला लिया

विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली

23 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और लगभग 3,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार दो सेशन तक बिकवाली करने के बाद खरीदारी की और 2,947 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, कहा- लंबी बातचीत और देशहित में लिया फैसला

Sonam Wangchuk hunger strike: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी है, क्योंकि सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगें पूरी की जाएंगी। उन्होंने गुरुवार आधी रात के करीब मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद और सरकार का भरोसा मिलने के बाद अपना अनशन खत्म करने की घोषणा की।

वांगचुक ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में, मैंने आखिरकार 26 दिनों के बाद अपना अनशन खत्म किया।”

अपना वजन जल्द से जल्द हासिल करें- पीएम मोदी

वहीं, वांगचुक के अनशन समाप्त करने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वे डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या का पालन करें और जल्द से जल्द अपना वजन वापस हासिल करें।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि सोनम जी स्वस्थ रहें।”

जेपी नड्डा ने सुनाया सरकार का फैसला

अस्पताल में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो और अन्य लोगों की मौजूदगी में सरकार के आश्वासनों को पढ़कर सुनाते हुए जेपी नड्डा ने कहा, “सरकार दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध करने वालों और 20 जुलाई, 2026 को संसद तक मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ केस दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक है।” केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि सरकार पहले ही परीक्षाओं के लिए पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा का आश्वासन दे चुकी है।

नड्डा ने कहा, “इसके अलावा, सरकार हाल ही में हुए NEET पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वालों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।”

वहीं, वांगचुक ने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के कुल 65 सांसदों ने उनसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन तोड़ने का आग्रह किया था।

लंबी बातचीत और देशहित में लिया गया फैसला

वांगचुक ने X पर कहा, “यह फैसला कई शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में संभावित हिंसा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। मैं जल्द ही एक अलग वीडियो में इन शर्तों के बारे में विस्तार से बताऊंगा। इस बीच, मैं आप सभी से अपील करता हूं कि आप बहुत सतर्क रहें और कहीं भी किसी भी तरह की हिंसा न होने दें।”

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को कहा कि उसे “राहत और खुशी” है कि एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन पार्टी ने जोर देकर कहा कि जंतर-मंतर पर उसका शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते।

X पर एक पोस्ट में, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वांगचुक को उनके “असाधारण साहस और त्याग” के लिए धन्यवाद दिया।

दिपके ने कहा, “हमें राहत मिली है और हम शुक्रगुजार हैं कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। सर, आपकी असाधारण हिम्मत और त्याग के लिए आपका धन्यवाद। अपनी जान जोखिम में डालकर आपने पूरे देश की अंतरात्मा को जगाया। यह देश आपके जीवन को बहुत कीमती मानता है,”

उन्होंने आगे कहा, “जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।”

28 जून को आंदोलन में शामिल हुए थे वांगचुक

बता दें कि वांगचुक 28 जून को जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने उन छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी जो प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही, शिक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

इसके बाद के 26 दिनों में वांगचुक का करीब 11 किलोग्राम वजन कम हो गया। इस दौरान उन्होंने लगातार लोगों से अपील की कि 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ मार्च पर पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखें।

वहीं, 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को विरोध स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना था कि उन्हें मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। हालांकि, उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस कदम को चुनौती दी और कहा कि उन्हें उनकी मर्जी के बिना सरकारी अस्पताल में रखा जा रहा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भेजने की मंजूरी दी, जहां उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।

मेदांता में रहने के दौरान, वांगचुक ने कहा कि वह अपने छात्रों और एक शिक्षक के तौर पर अपने काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन युवा प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की गारंटी के बिना वह अपना अनशन खत्म नहीं कर सकते।

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समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल के 26वें दिन भी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। इस बीच उन्होंने गुरुवार को अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में वांगचुक ने लिखा, “शांति और केवल शांति ही मेरा रास्ता है।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह अहिंसक होना चाहिए। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन कुछ समाज-विरोधी तत्व दूसरी जगहों पर हिंसा भड़काकर इस आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक ने की ये अपील 

सोनम वांगचुक ने कहा, “जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं, लेकिन यह जानकर दुख हुआ कि कुछ समाज-विरोधी तत्व दूसरी जगहों पर इन आंदोलनों का फायदा उठाकर हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “सामने वाला चाहे जैसा भी व्यवहार करे, हमारी ओर से जवाब सिर्फ फूलों का होना चाहिए। हर हाल में शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाएं।” वांगचुक की यह अपील ऐसे समय आई है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने दोहराया था कि वह अपना भूख हड़ताल तभी खत्म करेंगे, जब सरकार यह भरोसा देगी कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

अब ऐसी ही उनकी तबियत

इस बीच, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल से लाए जाने के बाद सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। अस्पताल की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि डॉक्टरों की अलग-अलग विशेषज्ञताओं वाली टीम उनका इलाज कर रही है। अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत (वाइटल्स) सामान्य स्तर पर हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।

25 दिन से जारी के भूख हड़ताल

अस्पताल ने यह भी साफ किया कि सोनम वांगचुक को दिया जा रहा हर इलाज उनकी सहमति से ही किया जा रहा है। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि उनका 25 दिन का अनशन पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया है और मांसपेशियां भी कमजोर हुई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनकी हालत ठीक है। वांगचुक ने कहा, “मैं अभी भी जीवित हूं। 25 दिनों के अनशन में मेरा 11 किलो वजन कम हुआ है, लेकिन मैं ठीक हूं।” उन्होंने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च का भी जिक्र किया और पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण रवैये की सराहना की। वांगचुक ने कहा, “मैं उन छात्रों की तारीफ करता हूं जिन्होंने लाठीचार्ज के बावजूद शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।” उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने और पत्थरबाजी के लिए उकसाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने संयम बनाए रखा। उन्होंने कहा, “आप सभी का धैर्य देखकर मेरा दिल भर आया।”

सोनम वांगचुक ने कहा कि कई केंद्रीय मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी उन्हें मिला, जिसमें उनसे अनशन समाप्त कर देश की सेवा के अपने काम पर लौटने का अनुरोध किया गया। वांगचुक ने कहा, “मैं भी अपने काम पर लौटना चाहता हूं, क्योंकि मेरा काम भी महत्वपूर्ण है।” हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वह अपना विरोध खत्म नहीं करेंगे। वांगचुक ने सरकार से अपील करते हुए कहा, “बच्चों के खिलाफ बल प्रयोग न किया जाए। मैं यह आश्वासन चाहता हूं कि प्रदर्शनकारियों पर कोई मामला या एफआईआर दर्ज नहीं होगी और उन्हें पुलिस या जेल की धमकी नहीं दी जाएगी। अगर सरकार जल्द यह भरोसा दे देती है, तो मैं आज ही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकता हूं। लेकिन ऐसा आश्वासन नहीं मिलने पर मुझे अपना अनशन जारी रखना पड़ेगा।”

दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब कोलकाता में नया फ्रंट? जानिए अभिजीत दिपके की CJP ने अब ये क्या नई डिमांड कर दी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच एक बड़ा खबर सामने आई है। न्यूज 18 के रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अब कोलकाता में भी प्रदर्शन करने जा रही है।

कोलकाता में प्रदर्शन की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कोलकाता पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त को एक आवेदन देकर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में रैली निकालने की अनुमति मांगी है। आवेदन के अनुसार, पार्टी ने कल शाम 4 बजे कॉलेज स्ट्रीट से रानी रश्मोनी एवेन्यू तक रैली आयोजित करने की इजाजत मांगी है। आयोजकों का कहना है कि इस रैली में करीब 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। साथ ही, जुलूस के दौरान दो वाहनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

कनॉट प्लेस में सभी दुकानें और ऑफिस शाम 6:30 बजे तक बंद करने का आदेश

नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने 23 जुलाई को कनॉट प्लेस की सभी दुकानें, ऑफिस और रेस्टोरेंट को आज शाम 6:30 बजे तक बंद करने की अपील की है। NDMC ने अपनी एडवाइजरी में कहा कि NDMC चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सलाह पर कनॉट प्लेस के आसपास की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस करीब 1 किमी की दूरी पर हैं। जब जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन या पुलिस कार्रवाई होती है, तो उसका असर आसपास के इलाकों खासकर कनॉट प्लेस, जनपथ, बाराखंभा रोड, मंडी हाउस और संसद मार्ग पर भी पड़ता है।

कल हुई थी हिंसा

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस इलाके में हुई हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में केस दर्ज कर लिया है। बीते बुधवार को हुई पत्थरबाजी में एसीपी विवेक भगत के अलावा पंजाबी बाग के एसीपी भी घायल हुए थे। साथ ही इंस्पेक्टर नंद किशोर समेत कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को भी चोट आई थी। बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी अनशन पर बैठी है। सीजेपी के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर हैं। ये सभी हाल ही में हुए नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सीजेपी के समर्थन में एक के बाद एक नेता जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और 21 जुलाई को नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता दिल्ली में पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर पलटवार, बोले- युवाओं का भविष्य आपने बर्बाद किया, धर्मेंद्र प्रधान को हटाइए

CJP Protest : rahul gandhi answer to PM Modi

छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रेक कोर्ट के एलान पर लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और इसके जिम्मेदार व्यक्तियों को संरक्षण दिया। ALSO READ: CJP Protest : आख़िर पेपर लीक पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किया फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान

 

राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया – और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें साफ़ हैं: धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं। छात्रों से माफ़ी मांगे। छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। ALSO READ: प्रीति जिंटा का छात्रों को समर्थन, सता रहा है CJP प्रोटेस्ट हाईजैक होने का डर

क्या बोले पीएम मोदी?

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच पेपर लीक पर फास्ट ट्रेक कोर्ट का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड मिलेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पीएम की घोषणा के बाद भी छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।

 

पीएम मोदी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा- देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ALSO READ: CJP प्रदर्शन के कारण आज भी 16 मेट्रो स्टेशन बंद, DMRC ने जारी की सूची

 

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामले में संसद से सड़क तक बवाल मचा हुआ है। सरकार संसद से जंतर मंतर तक गतिरोध तोड़ने का हरसंभव प्रयास कर रही है। सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे हैं। सीजेपी के प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। हालांकि सरकार आंदोलनकारियों की इस मांग से सहमत नजर नहीं आ रही है। युवा प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं तो पिछले 4 दिनों से संसद विपक्ष के हंगामे की वजह से ठप है।

‘मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए…’; NEET पेपर लीक को लेकर CJP के प्रोटेस्ट पर बोले सलमान खान

Salman Khan Neet News: नीट पेपर लीक को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने बुधवार (22 जुलाई) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को नुकसान पहुंचा, उनके प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। सलमान खान ने छात्रों के रुख की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने भविष्य और एक बेहतर, शिक्षित भारत के निर्माण के लिए मेहनत, ईमानदारी और पढ़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

सलमान खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें खुशी है कि देश के छात्र बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन इसके हिंसक रूप लेने की खबरें बेहद दुखद हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सोच-समझकर लिखी गई पोस्ट में कहा, “यह आंदोलन इतना शांतिपूर्ण था, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि इसे हिंसक मोड़ लेना पड़ा। घायल हुए छात्रों और उनके परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। पेपर लीक एक बहुत गंभीर मुद्दा है। यह जानकर और देखकर खुशी होती है कि देश के बच्चे बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए एकजुट हुए हैं। उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया है।”

युवाओं को दी सलाह

हालांकि, सलमान खान ने यह भी कहा कि इन प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से अपने कब्जे में नहीं लिया जाना चाहिए। सलमान ने छात्रों के साहस और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पीढ़ी शिक्षा के प्रति गंभीर है। भविष्य में देश का नाम रोशन करेगी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से किया गया यह आंदोलन सही दिशा में उठाया गया कदम है।

अभिनेता ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखने की अपील करते हुए कहा, “यह मामला छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच का है। इसे राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए। इस आंदोलन का श्रेय सिर्फ देश के छात्रों को मिलना चाहिए। मुझे भरोसा है कि सरकार भी छात्रों का पूरा सहयोग करेगी और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी। यह सभी के लिए जीत की स्थिति होगी।” सलमान खान ने यह भी कहा कि भारत को भविष्य में दुनिया का प्रमुख शिक्षा केंद्र बनना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला

इस बीच, 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के आरोपों को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध लगातार जारी है। वे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इस बीच, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार उन्हें यह भरोसा दिलाए कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। न ही उनके खिलाफ कोई FIR या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे। वांगचुक ने कहा कि भले ही अनशन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम कम हो गया है, फिर भी वह अपने काम पर लौटना चाहते हैं।

3 Idiots Re-Release: क्या सिनेमाघरों में री-रिलीज आमिर खान की ‘3 इडियट्स’? मेकर्स ने दी ये जानकारी

सोशल मीडिया पर इन दिनों आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ की काफी चर्चा हैं। सोशल मीडिया पर खबर फैली कि आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ 4 सितंबर को सिनेमाघरों में री-रिलीज होगी। वहीं अब री-रीलीज की खबरों पर फिल्म के मेकर्स ने अपना रिएक्शन दिया है। प्रोडक्शन हाउस ने साफ किया है कि फिलहाल फिल्म की री-रिलीज को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह से गलत हैं।

प्रोडक्शन हाउस ने अपने ऑफिशियल बयान में मीडिया और दर्शकों से अपील की है कि वे फिल्म से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल उनके आधिकारिक और वेरिफाइड प्लेटफॉर्म पर जारी अपडेट पर ही भरोसा करें। प्रोडक्शन हाउस ने कहा कि अफवाहों या बिना पुष्टि वाली खबरों पर विश्वास न करें।

मेकर्स ने दिया बयान

प्रोडक्शन हाउस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “हाल ही में आई उन मीडिया रिपोर्ट्स के संबंध में, जिनमें दावा किया गया है कि ‘3 इडियट्स’ 4 सितंबर को दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज होगी, विधु विनोद चोपड़ा फिल्म्स स्पष्ट करना चाहता है कि ये खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। हम मीडिया और सभी प्रशंसकों से अनुरोध करते हैं कि वे केवल हमारे सत्यापित आधिकारिक चैनलों पर जारी की गई घोषणाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही, मीडिया संस्थानों से भी अपील है कि बिना पुष्टि की गई जानकारी को प्रकाशित या प्रसारित करने से बचें।”

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कब रिलीज हुई थी फिल्म

साल 2009 में रिलीज हुई ‘3 इडियट्स’ बॉलीवुड की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। राजकुमार हिरानी के निर्देशन और विधु विनोद चोपड़ा के निर्माण में बनी इस फिल्म में आमिर खान, आर. माधवन, शरमन जोशी, करीना कपूर खान और बोमन ईरानी ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म तीन इंजीनियरिंग छात्रों की दोस्ती, कॉलेज जीवन और पढ़ाई के दबाव के बीच उनके संघर्ष और सपनों की कहानी दिखाती है, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था।

वांगचुक से इंस्पायर नहीं है फिल्म

आमिर खान ने ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट (BFI) में आयोजित एक सवाल-जवाब सत्र के दौरान इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “जब हम ‘3 इडियट्स’ बना रहे थे, तब मैं मिस्टर सोनम के बारे में नहीं जानता था। मैंने हाल ही में चतुर का एक वीडियो देखा, जिसमें उन्होंने यह बात कही, लेकिन यह सही नहीं है।” आमिर ने बताया कि जब फिल्म की कहानी लिखी जा रही थी, तब न निर्देशक राजकुमार हिरानी और न ही लेखक अभिजात जोशी सोनम वांगचुक को जानते थे।

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क्यों अलग माना जा रहा है जेन-ज़ी का यह छात्र आंदोलन और कहां चूकी मोदी सरकार?

Gen Z student protest in Delhi

Gen Z student protest in Delhi: दिल्ली में छात्रों के 'संसद मार्च' की शुरुआत परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग से हुई थी। लेकिन समय के साथ यह प्रदर्शन केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र इसे सरकारी जवाबदेही, संस्थागत भरोसे और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों से जोड़कर देख रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में नागरिकता कानून, किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के प्रदर्शन जैसे कई बड़े आंदोलन हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा छात्र आंदोलन को अलग क्यों माना जा रहा है?

1. मुद्दा केवल शिक्षा मंत्री तक सीमित नहीं रहा

शुरुआत में प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। लेकिन अब प्रदर्शन में शामिल कई छात्र सरकार की समग्र शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भी सवाल उठा रहे हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि जब किसी मंत्री का सार्वजनिक रूप से बचाव किया जाता है, तो उस विभाग से जुड़े विवाद केवल मंत्रालय तक सीमित नहीं रहते बल्कि सरकार की व्यापक राजनीतिक जवाबदेही का हिस्सा बन जाते हैं। वहीं सरकार का कहना रहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं और अनियमितताओं पर कार्रवाई की जा रही है। ALSO READ: छात्रों के बाद किसान आंदोलन की तैयारी, शंभु और खनौरी बॉर्डर बंद, भारी सुरक्षा बल तैनात

2. नेतृत्व से अधिक नेटवर्क आधारित आंदोलन

इस आंदोलन की एक खास बात यह भी है कि इसका संचालन किसी एक राजनीतिक दल, छात्र संगठन या प्रमुख चेहरे तक सीमित दिखाई नहीं देता। सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग शहरों के छात्र एक-दूसरे से जुड़े और विरोध प्रदर्शनों का समन्वय करते दिखे। ऐसे विकेंद्रीकृत आंदोलनों को पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग माना जाता है क्योंकि इनमें निर्णय लेने का केंद्र स्पष्ट नहीं होता।

3. साझा मुद्दों ने व्यापक समर्थन की कोशिश की

प्रदर्शन का मुख्य फोकस परीक्षा प्रणाली, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर रहा है। ये ऐसे विषय हैं जिनका असर अलग-अलग राज्यों, जातियों और सामाजिक समूहों के युवाओं पर पड़ता है।

 

इसी वजह से आंदोलन को किसी एक पहचान आधारित राजनीति के दायरे में रखना अपेक्षाकृत कठिन माना जा रहा है। हालांकि सरकार समर्थक कुछ समूहों ने आंदोलन की मंशा और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल भी उठाए हैं। ALSO READ: सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

4. संस्थानों पर भरोसे का सवाल

प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि उन्हें अदालतों, जांच एजेंसियों और अन्य संस्थागत प्रक्रियाओं से अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने सार्वजनिक विरोध को अपनी बात रखने का प्रभावी माध्यम माना।

हालांकि न्यायपालिका और अन्य संस्थाएं समय-समय पर ऐसे मामलों में सुनवाई और हस्तक्षेप करती रही हैं। इसलिए यह धारणा सभी पक्षों द्वारा समान रूप से स्वीकार नहीं की जाती।

5. जवाबदेही की मांग आंदोलन का केंद्रीय विषय

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग यह रही है कि बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और भर्ती संबंधी विवादों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।
 

विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवाल उठा रहा है।

6. सरकार की प्रतिक्रिया पर बहस

सरकार की ओर से अब तक प्रशासनिक कदम, जांच और कुछ मामलों में कार्रवाई की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपर्याप्त बताते हुए लगातार विरोध जारी रखे हुए हैं।
 

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार सरकार के सामने चुनौती केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि युवाओं के बीच भरोसा कायम रखने की भी है। आने वाले समय में सरकार बातचीत, नीति सुधार या प्रशासनिक कार्रवाई—किस रास्ते को प्राथमिकता देती है, इस पर भी नजर रहेगी।

7. युवाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया संकेत?

इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद इसका सामाजिक और पीढ़ीगत स्वरूप है। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र इसमें शामिल हैं जो पहली बार किसी सार्वजनिक आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

 

दुनिया के कई देशों में हाल के वर्षों में छात्रों और युवाओं ने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक संकट, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है। भारत में भी कुछ विश्लेषक इस प्रदर्शन को उसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति के संदर्भ में देख रहे हैं, हालांकि इसकी दिशा और राजनीतिक प्रभाव का आकलन अभी जल्दबाजी होगा।
 

दिल्ली का यह छात्र आंदोलन फिलहाल केवल परीक्षा प्रणाली के विरोध तक सीमित नहीं दिखाई देता। यह युवाओं की आकांक्षाओं, रोजगार, शिक्षा और सरकारी जवाबदेही से जुड़े व्यापक प्रश्नों को सामने ला रहा है।

 

हालांकि यह कहना अभी जल्द होगा कि इसका दीर्घकालिक राजनीतिक असर क्या होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस आंदोलन ने युवाओं की चिंताओं और सार्वजनिक संस्थानों में भरोसे के सवाल को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा, दोनों ही इसके महत्व को तय करेंगे।

Sonam Wangchuk: 23 दिन से भूख हड़ताल…कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट

राजधानी दिल्ली में सोमवार 20 जुलाई को खूब गहमा-गहमी दिखी। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान में काफी कुछ देखने को मिला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अब अस्पताल में भर्ती हैं। उनके हेल्थ को लेकर अस्पताल से बड़ी जानकारी दी है।

बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या उन्हें खुद अस्पताल से जाकर मुलाकात करने की इजाजत नहीं दी जाती। फिलहाल सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके ब्लड शुगर स्तर को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अस्पताल की ओर से बताया गया है कि उन्हें शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिया जा रहा है।

डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी

सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के अनुसार, उनकी जरूरी स्वास्थ्य जांच के सभी प्रमुख संकेत फिलहाल स्थिर हैं। अस्पताल ने कहा कि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। हालांकि, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिए जाने के बाद खून से जुड़े दूसरे जांच परिणामों में सुधार देखा गया है।

बुलेटिन के मुताबिक, वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से पूरी तरह उबरने और किसी भी संभावित परेशानी का समय रहते पता लगाने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। अस्पताल ने यह भी बताया कि आगे का इलाज उनकी सेहत में होने वाले सुधार और लैब जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।