पाकिस्तानी हैंडल्स फैलाने लगे दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर झूठा प्रॉपेगेंडा, इंडियन आर्मी फैक्ट चेक ने तुरंत खारिज किए ये दावे

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च को लेकर दिल्ली में लगातार गहमागहमी जारी है। वहींदिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर फेक खबरें भी तेजी से फैलाया जा  रही हैं। पाकिस्तान से संचालित कुछ प्रोपेगैंडा सोशल मीडिया हैंडल यह झूठ फैला रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली में भारतीय सेना तैनात की गई है। इतना ही नहीं, इन पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि सेना ने प्रदर्शनकारियों पर हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

फैलाई गई फेक खबरें 

हालांकि, यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सच्चाई यह है कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स, जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान संभाल रहे हैं। इस पूरे मामले में भारतीय सेना की कोई तैनाती नहीं की गई है।फर्जी खबर फैलाने वाले लोग आम प्रदर्शन का वीडियो दिखाकर उसके साथ सेना की तैनाती और हथियारों के इस्तेमाल जैसी झूठी बातें जोड़ रहे हैं। इसका मकसद लोगों में डर और भ्रम फैलाना तथा भारतीय सेना की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

जंतर-मंतर से हटाया गया प्रदर्शन स्थल

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया है। पुलिस ने मंच खाली करा लिया है और टेंट भी निकाल दिए हैं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर के बाद कनॉट प्लेस से भी खदेड़ दिया गया है। इससे कुछ घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर और लाठीचार्ज कर उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए। आंदोलन के एक नेता ने कहा कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक वहीं डटे रहेंगे।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

पुलिस ने वह मंच भी हटा दिया, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की थी। इसके साथ ही वहां रखे ट्रैम्पोलिन, कालीन, गद्दे और अन्य सामान भी हटा दिए गए। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के बाद उनकी एक प्रमुख मांग मान ली गई है। हालांकि, उनका कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी मौजूद हैं।

सीजेपी ने सबसे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिन का विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद आंदोलन लगातार बढ़ता गया और कई लोगों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिससे यह लंबा धरना बन गया। सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास जुटे। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च निकाला। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पहुंच प्रदर्शन में शामिल हुईं शबाना आजमी, बोलीं- जावेद अख्तर ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

Jantar Mantar Protest: दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी रविवार, 19 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने पहुंचीं जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने और जावेद अख्तर ने समाधान खोजने के लिए बातचीत शुरू करने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। हालांकि, उन्हें अभी तक प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

शबाना आजमी ने द रेड माइक से कहा, “जब पानी हद से गुज़र जाता है, जब भी बोलती हूं। हर छोटी बड़ी बात पर मैं नहीं बोलती हूं, क्योंकि अब मेरी 75 साल की उम्र हो गई है, मैं ये सब देख चुकी हूं… तो मैं बहुत, जब मुझे अंदर से कोई चीज़ झंझोड़ती है, तब मैं बोलती हूं।” यहां उनकी बातचीत पर एक नजर डालें:

उन्होंने आगे कहा, “मैंने जो है, प्रधानमंत्री को खत लिखा। जावेद साहब ने खत लिखा कि देखिए आप सिर्फ एक डायलॉग शुरू करिए, प्रेस के पास हम नहीं जा रहे। हम इसको एक पब्लिक मैटर नहीं बनाएंगे, हम सिर्फ राज्यसभा के एक्स-संसद हैं, तो हम उससे लिख रहे हैं, बात तो सुनिए। पहले तो।” हमें स्वीकारोक्ति आई कि 2 दिन मैं आपका जवाब मिलेगा, 2 दिन मैं नहीं आया, 3 दिन मैं नहीं आया, 4 दिन मैं नहीं आया तो फिर पांचवे दिन हम यहां आ गए।’

शबाना का विरोध प्रदर्शन में शामिल होना, क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में उनके सार्वजनिक बयान के कुछ दिनों बाद हुआ। सोनम वांगचुक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल हुए थे और 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अपनी यात्रा के दौरान, शबाना ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके से मुलाकात की, जो खुद भी अभी भूख हड़ताल पर हैं।

शबाना आज़मी के अलावा, प्रकाश राज और पूनम पांडे जैसी हस्तियां भी जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में देखी गईं। इससे पहले, सोनी राज़दान, ज़ीनत अमान, अभय देओल, सोनाक्षी सिन्हा, ओमी वैद्य, इमरान खान, नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह ने सोशल मीडिया के ज़रिए सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल का समर्थन किया था।

CJP Delhi Protest : जंतर-मंतर पर भारी बवाल, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बरसाई लाठियां

CJP Sansad March Lathicharge: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो मार्च’ के बीच भारी बवाल हो गया है। संसद भवन की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स लगा रखे थे, लेकिन जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया है।

इस समय जंतर-मंतर और दिल्ली के वीआईपी इलाकों में क्या हालात हैं, आइए जानते हैं अब तक के सभी बड़े अपडेट्स।

बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश के बाद एक्शन, पुलिस का लाठीचार्ज

सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP के नेतृत्व में हजारो प्रदर्शनकारी संसद की तरफ मार्च निकालने के लिए जंतर-मंतर पर जमा हुए है। नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू होने के कारण पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से मार्च न निकालने की अपील कर रही थी।

जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग और रफी मार्ग की तरफ बढ़ने के लिए पुलिस के मल्टी-लेयर बैरिकेड्स को धक्का देना और उन्हें पार करना शुरू किया, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया।

सफदरजंग अस्पताल में भी बढ़े सुरक्षा घेरे, समर्थक आक्रोशित

जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के बाद सफदरजंग अस्पताल के बाहर भी हलचल काफी तेज हो गई है। अस्पताल में भर्ती पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पहले से ही अनशन पर बैठे हैं। CJP समर्थकों का आरोप है कि शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकाल रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस ने जानबूझकर बल प्रयोग किया है, जिससे कई लोग घायल हुए हैं।

लुटियंस जोन पूरी तरह ठप, ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई

लाठीचार्ज और हंगामे के बाद पूरी नई दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है, जिससे लुटियंस दिल्ली में ट्रैफिक पूरी तरह चरमरा गया है। पार्लियामेंट स्ट्रीट, रायसीना रोड, रफी मार्ग और अशोक रोड को सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।

पटेल चौक और विजय चौक पर पर सुरक्षा बलों और दंगा नियंत्रण वाहनों (RAF) की भारी तैनाती के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। ऑफिस जाने वाले लोगों और आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति धारा 163 के नियमों का उल्लंघन कर सड़कों पर हुड़दंग मचाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

CJP Parliament March: दिल्ली मेट्रो के ये 5 स्टेशन बंद, घर से निकलने से पहले देख लें ट्रैफिक एडवाइजरी

CJP Parliament March: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोमवार (20 जुलाई) को सुरक्षा कारणों से राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से निकाले जा रहे विरोध मार्च के मद्देनजर उठाया गया है। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक पोस्ट में कहा कि अगले आदेश तक ये पांचों मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। CJP ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विरोध मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। संसद के मानसून सत्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए सोमवार को दिल्ली पुलिस अत्यधिक सतर्क है। जंतर-मंतर, संसद और अन्य प्रमुख स्थानों के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

अनशन पर अड़े वांगचुक, रखीं ये शर्तें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को कहा कि उनकी भूख हड़ताल प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च के बाद भी जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल में हुई विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी या राजनीतिक दलों के नेता उन्हें यह भरोसा देंगे कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक संदेश में वांगचुक ने लिखा, “आपमें से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं, पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी 20 जुलाई तक स्वीकार करती है, तो मैं अपना अनशन समाप्त कर दूंगा।”

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो उनका अनशन जारी रहेगा। वांगचुक ने कहा कि वह अपना अनशन तब भी समाप्त कर देंगे, यदि कॉकरोच जनता पार्टी का नेतृत्व और वह स्वयं संसद के गेट तक पहुंचते हैं और वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद तथा नेता उन्हें यह आश्वासन देते हैं कि वे इस मुद्दे को अब संसद में उठाएंगे।

उन्होंने कहा, “यदि मेरी सेहत या अन्य कारणों से मैं संसद तक नहीं पहुंच पाता, तो विभिन्न दलों के सम्मानित सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे यही आश्वासन दें।” वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।

उन्होंने लिखा, “मैं सफदरजंग अस्पताल में अवैध हिरासत में हूं, जहां मेरी आवाजाही, अभिव्यक्ति और हर तरह के संचार की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई है।” शनिवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा था कि यदि राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल आकर उन्हें यह भरोसा दें कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

आंग्मो ने ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल समर्थकों से वांगचुक की ओर से शांति बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की अपील भी की थी कि आंदोलन का किसी तरह दुरुपयोग न हो। वांगचुक ने कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके के आंदोलन का समर्थन करते हुए 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।

लगातार 21 दिन तक अनशन करने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। उनके समर्थकों का आरोप है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले आंदोलन में आया बड़ा मोड़

sonam wangchuk hunger strike

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने के लिए राजी है लेकिन उन्होंने इसके लिए 3 शर्ते रखी है। ALSO READ: क्‍या अनशन खत्‍म करेंगे सोनम वांगचुक, अस्पताल में ही चलेगा इलाज, अनशन को लेकर क्‍या बोली पत्‍नी?

 

क्या है सोनम वांगचुक की 3 शर्ते?

समर्थकों को लिखे पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि आप में से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि—

 

(क) सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया विफलताओं (जैसे पेपर लीक आदि) की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

 

(ख) यदि मैं और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का नेतृत्व संसद पहुंच जाएं, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता हमें यह आश्वासन दें कि वे इस मुद्दे को संसद में अवश्य उठाएंगे।

 

(ग) यदि मेरी स्वास्थ्य स्थिति या अन्य कारणों से यह संभव न हो, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे ऊपर दिया गया आश्वासन दें। ALSO READ: Sonam Wangchuk News : 20 जुलाई को आजादी का दूसरा आंदोलन, सोनम का X पर पोस्ट, पत्नी की हाईकोर्ट में याचिका

 

पत्र के अंत में वांगचुक ने लिखा, सफदरजंग अस्पताल में कथित अवैध हिरासत से, जहां मेरी आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभी प्रकार के संचार के अधिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को वांगचुक को निजी अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना मनमाना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और उपचार उनकी सहमति से किया जा रहा है।

संसद मार्च पर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से जिंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।

सोनम वांगचुक को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सफदरजंग अस्पताल में ही रहेंगे भर्ती…सरकार–पुलिस से मांगा जवाब

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला सही था। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि, सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों का पूरा सहयोग करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का सरकार का फैसला कोई मनमाना कदम नहीं था, बल्कि उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह जरूरी था।

सुनवाई के दौरान अस्पताल की मेडिकल टीम के एक डॉक्टर ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक ने अब लिक्विड आइटम, पोटैशियम क्लोराइड और शुगर-फ्री ओआरएस (ORS) लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद उन्होंने कई बार नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV) लेने से इनकार किया है।

वांगचुक ने IV फ्लूइड लेने से किया इनकार

सुनवाई के दौरान सफदरजंग अस्पताल के एक डॉक्टर ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज लगातार जारी है। डॉक्टर के मुताबिक, मेडिकल टीम लगातार उन्हें नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV) लेने के लिए समझा रही है, लेकिन उन्होंने अब तक इसके लिए सहमति नहीं दी है। डॉक्टर ने अदालत को बताया कि वांगचुक के शरीर में विटामिन की कमी है। साथ ही पोटैशियम और ब्लड शुगर जैसे कुछ जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य से कम या सीमा के करीब हैं, इसलिए उनका इलाज सावधानी से किया जा रहा है। डॉक्टर की बात सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक से अपील की कि वह अपना इलाज कर रही मेडिकल टीम का पूरा सहयोग करें। वहीं, वांगचुक और उनकी पत्नी की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक न तो किसी हिरासत में हैं और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। ऐसे में उन्हें यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वे किस अस्पताल में अपना इलाज कराना चाहते हैं।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

सोनम वांगचुक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि वांगचुक किसी हिरासत में नहीं हैं और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी नहीं चल रहा है। ऐसे में उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का पूरा अधिकार है। सिब्बल ने कहा कि वांगचुक इलाज से इनकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने का पिछला आदेश एकतरफा था, क्योंकि उस समय उनकी ओर से अदालत में कोई पक्ष नहीं सुना गया था।

वहीं इन दलीलों पर जवाब देते हुए जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि अदालत को पूरे मामले को व्यापक नजरिए से देखना होगा। उन्होंने कहा कि भले ही सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, लेकिन उनकी पत्नी, भाई और जीजा को उनसे मिलने की अनुमति दी गई है। अदालत ने संकेत दिया कि फिलहाल सबसे अहम बात उनकी सेहत और इलाज सुनिश्चित करना है।

पत्नी ने निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की

दिल्ली हाई कोर्ट में यह सुनवाई सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर याचिका पर हो रही है। याचिका में मांग की गई है कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में इलाज के लिए शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए। डॉ. गीतांजलि आंग्मो का आरोप है कि इलाज के नाम पर सोनम वांगचुक को गैर-कानूनी तरीके से अस्पताल में रोका गया है। उन्होंने सरकारी अस्पताल में मिल रहे इलाज और मेडिकल देखभाल पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बेहतर इलाज के लिए वांगचुक को परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

‘सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं…’, हाईकोर्ट पहुंची सोनम वांगचुक की पत्नी, कर दी ये बड़ी मांग

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की पत्नी ने उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग की है। पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। आंगमो का कहना है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं है। बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले तीन सप्ताह से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पत्नी ने लगाए ये आरोप 

गीतांजलि आंग्मो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि अब उन्हें सरकारी अस्पताल पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक की पोटैशियम जांच रिपोर्ट में गंभीर गड़बड़ी हुई है। उनके मुताबिक, अस्पताल ने परिवार को बताया कि वांगचुक का पोटैशियम स्तर घटकर 2.9 रह गया है, जिसे डॉक्टरों ने खतरनाक बताया। लेकिन परिवार की ओर से कराई गई एक स्वतंत्र लैब जांच में पोटैशियम का स्तर 3.5 आया, जिसे उन्होंने सामान्य सीमा में बताया। इसी वजह से परिवार ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है।

सफदरजंग अस्पताल बोला- वांगचुक की हालत स्थिर

सफदरजंग अस्पताल का कहना है कि सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है और वह पूरी तरह होश में हैं। हालांकि, उनमें शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद वांगचुक ने कई बार मुंह से तरल पदार्थ पीने और नसों के जरिए फ्लूइड (IV) लेने से इनकार किया है।

प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की मांग

वहीं, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने या किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी। उनका यह भी दावा है कि अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण परिवार के लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगी हुई है। उन्होंने इस स्थिति को “गैर-कानूनी हिरासत” बताया। आंग्मो ने कहा कि परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है ताकि वांगचुक की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वांगचुक की सेहत को कोई नुकसान होता है, तो इसके लिए अस्पताल प्रशासन और सरकार जिम्मेदार होगी।

वांगचुक ने समर्थकों से संसद मार्च में शामिल होने की अपील की

शनिवार को गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उनकी अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को कोई दवा या फ्लूइड (तरल पदार्थ) नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूख हड़ताल के दौरान वांगचुक की सेहत पर नजर रखने वाले डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, आंग्मो की ओर से साझा किए गए एक संदेश में सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इस अभियान को “भारत का दूसरा आजादी का आंदोलन” बताया और लोगों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने का आग्रह किया।

Sonam Wangchuk : सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, भूख हड़ताल के दौरान डिहाइड्रेशन के संकेत, डॉक्ट्रों ने दी चेतावनी

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जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान तबीयत खराब होने लगी है। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि वांगचुक में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचने के लिए उन्हें तुरंत तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी की जरूरत है।

 

हालांकि, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद सोनम वांगचुक और उनके परिवार ने अभी तक यह उपचार लेने की सहमति नहीं दी है। अस्पताल ने शनिवार रात जारी बयान में कहा कि वांगचुक फिलहाल होश में हैं और उनकी हीमोडायनामिक स्थिति स्थिर है। उनकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य सीमा में हैं, लेकिन लंबे समय तक उपवास के प्रभाव को देखते हुए डॉक्टरों ने चिंता जताई है।

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लंबे उपवास से स्वास्थ्य पर पड़ा असर: अस्पताल

सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल के कारण वांगचुक में डिहाइड्रेशन के स्पष्ट चिकित्सकीय संकेत मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) या नसों के जरिए फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी देना जरूरी है। दिल्ली स्थित AIIMS के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ डॉक्टर ने भी वांगचुक की जांच की और इलाज कर रहे डॉक्टरों की राय से सहमति जताई कि उन्हें तुरंत रिहाइड्रेशन थेरेपी की आवश्यकता है।

 

अस्पताल ने बताया कि AIIMS के डॉक्टर भी अब मेडिकल टीम में शामिल हो गए हैं और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों के साथ मिलकर वांगचुक की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

 

वांगचुक ने इलाज लेने से किया इनकार

 

अस्पताल के मुताबिक, इलाज कर रही टीम और AIIMS विशेषज्ञ की सलाह के बावजूद सोनम वांगचुक ने:

नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV Fluids) ORS दवाइयां लेने से इनकार कर दिया है। अस्पताल ने बताया कि उनके परिवार ने भी अभी तक जरूरी इलाज के लिए सहमति नहीं दी है।

 

डॉक्टरों ने दी गंभीर खतरे की चेतावनी

 

हालांकि फिलहाल वांगचुक के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेत (Vital Parameters) सामान्य हैं, लेकिन डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक शरीर में पानी की कमी रहने से स्वास्थ्य तेजी से खराब हो सकता है। अस्पताल ने कहा कि वांगचुक को लगातार निगरानी में रखा गया है और डॉक्टर उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें और उनके परिवार को इलाज के लिए समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

NEET विवाद को लेकर 28 जून से जारी है भूख हड़ताल

 

सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया था। वह 28 जून से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं। यह प्रदर्शन NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इससे जुड़े छात्र मौत के मामलों को लेकर CJP के नेतृत्व वाले आंदोलन के समर्थन में किया जा रहा है। वांगचुक के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन कार्यकर्ता भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में शामिल हैं।

Sonam Wangchuk: अब कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने दी यह जानकारी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस 21वें दिन वहां से हटाकर अस्पताल ले गई है। दिल्ली पुलिस ने साफ कहा कि हाई कोर्ट के आदेश और मेडिकल एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वहीं सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। हालांकि, लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने की वजह से उनके शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, वांगचुक की नाड़ी, ब्लड प्रेशर और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है। लेकिन लंबे समय तक उपवास करने के कारण उनकी सेहत पर असर पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि हालत बिगड़ने और किसी गंभीर परेशानी से बचाने के लिए तुरंत इलाज की जरूरत है।

अस्पताल के मुताबिक, दिल्ली एम्स के एक विशेषज्ञ डॉक्टर ने भी वांगचुक की जांच की है। उन्होंने इलाज कर रही टीम की राय से सहमति जताई है कि उन्हें नसों के जरिए तरल पदार्थ (आईवी फ्लूइड) और इलेक्ट्रोलाइट देना चिकित्सकीय रूप से जरूरी है। एम्स के डॉक्टर भी अब इलाज करने वाली टीम में शामिल हो गए हैं और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखेंगे।

अस्पताल के हेल्थ बुलेटिन की अहम बातें

  • सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
  • उनकी ब्लड प्रेशर और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है।
  • लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने की वजह से उनके शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के लक्षण मिले हैं।
  • डॉक्टरों का कहना है कि हालत बिगड़ने और किसी गंभीर समस्या से बचाने के लिए तुरंत इलाज जरूरी है।
  • एम्स के एक विशेषज्ञ डॉक्टर ने भी वांगचुक की जांच की और इलाज कर रही टीम की राय से सहमति जताई।
  • एम्स का एक डॉक्टर अब इलाज करने वाली टीम का हिस्सा है और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

डॉक्टरों ने सोनम वांगचुक को मुंह से तरल पदार्थ (ओरल फ्लूइड) या नस के जरिए तरल पदार्थ (आईवी फ्लूइड) और इलेक्ट्रोलाइट देने की सलाह दी है। अस्पताल के अनुसार, कई बार समझाने के बावजूद वांगचुक ने आईवी फ्लूइड, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और दवाएं लेने से इनकार कर दिया है। अस्पताल का कहना है कि वांगचुक के परिवार ने भी अभी तक डॉक्टरों की ओर से सुझाए गए इलाज के लिए सहमति नहीं दी है। फिलहाल वांगचुक की लगातार मेडिकल निगरानी की जा रही है। डॉक्टर उन्हें और उनके परिवार को समझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे इलाज के लिए सहमत हो जाएं और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।

निजी डॉक्टर ने उठाए सवाल

इससे पहले दिन में सोनम वांगचुक के निजी डॉक्टर डॉ. नितिन दिघे ने भी अस्पताल की कुछ मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। डॉ. दिघे का कहना है कि शुक्रवार दोपहर जब वांगचुक का ब्लड सैंपल लिया गया था, तब उनके शरीर में पोटेशियम का स्तर सामान्य था। उन्होंने कहा कि वह इसकी पुष्टि के लिए एक स्वतंत्र लैब में दोबारा ब्लड टेस्ट कराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल ने परिवार को मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई।

पत्नी ने भी मेडिकल रिपोर्ट पर जताई आपत्ति

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए और स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि परिवार की यह मांग नहीं मानी गई कि वांगचुक की जांच किसी दूसरी लैब में कराई जाए और उनके खून के नमूने स्वतंत्र जांच के लिए परिवार को दिए जाएं। आंग्मो ने यह भी दावा किया कि परिवार ने वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की थी, ताकि उन्हें अपनी पसंद के किसी दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जा सके।

वांगचुक की हालत बेहद नाजुक! सोनम ने अस्पताल में दवा और ड्रिप लेने से किया इनकार

Sonam Wangchuk Health Update

Sonam Wangchuk Health Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद वांगचुक ने डॉक्टरों के इलाज को पूरी तरह ठुकरा दिया है। गंभीर डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और चयापचय संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने नसों के माध्यम से दिए जाने वाले तरल पदार्थ (IV Fluids) और किसी भी तरह की दवा लेने से साफ इनकार कर दिया है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश की जनता से छात्रों के इस आंदोलन में कूदने का बड़ा आह्वान किया है।

सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की बढ़ी चिंता

अस्पताल प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सोनम वांगचुक को इस वक्त सख्त चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। 21 दिनों की भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण पैरामीटर्स बिगड़ चुके हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस बीच, डॉक्टरों ने वांगचुक के परिवार और उनके सहयोगियों को गंभीर चेतावनी दी है कि यदि बिना किसी देरी के तुरंत इलाज शुरू नहीं करने दिया गया तो स्थिति हाथ से बाहर निकल सकती है और अंगों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। ALSO READ: जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद भूख हड़ताल पर बैठे CJP प्रमुख

 

अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि वांगचुक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक छात्रों के भविष्य और नीट परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह सत्याग्रह अस्पताल के भीतर भी जारी रहेगा। दूसरी ओर, सीजेपी नेता अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद अनशन स्थल पर बवाल खड़ा हो गया। 

अब चुप रहने का वक्त नहीं

वांगचुक को नाटकीय ढंग से धरना स्थल से उठाए जाने और उनकी बिगड़ती सेहत की खबर मिलते ही सियासत पूरी तरह गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को देश की जनता और छात्रों से एक भावुक और आक्रामक अपील की।

 

केजरीवाल ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली (NEET) में आमूलचूल सुधार की मांग को लेकर हमारे देश के देशभक्त और छात्र जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूखे बैठे हैं। सोनम वांगचुक की स्थिति गंभीर है। यह समय घरों में बैठने का नहीं है। मैं देश के हर नागरिक, हर माता-पिता और युवाओं से अपील करता हूं कि वे जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शामिल हों और तानाशाही के खिलाफ इन प्रदर्शनकारियों का हाथ मजबूत करें। ALSO READ: सोनम वांगचुक सफदरगंज अस्पताल में भर्ती, क्या कहती है उनकी मेडिकल रिपोर्ट?

20 जुलाई का संसद मार्च

सोनम वांगचुक को भले ही पुलिस ने शारीरिक रूप से जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल भेज दिया हो, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों ने ऐलान किया है कि वांगचुक की अनुपस्थिति में विरोध प्रदर्शन और तेज होगा। पार्टी ने आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद मार्च' को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली पुलिस ने भी इस मार्च को देखते हुए नई दिल्ली और संसद भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है। वांगचुक की ओर से भी कहा गया है कि वे भी 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होंगे।