Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक को समर्पित हैं गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस, जानें दोनों में क्या है अंतर और क्या है इतिहास

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि शिक्षक सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं देता, वह हमें जीने का, अपने उसूलों पर चलने और सही-गलत में फर्क करने की समझ भी देता है। इसलिए हमारे देश में दो खास दिन गुरु को समर्पित हैं। एक है गुरु पूर्णिमा और दूसरा है टीचर्स डे। अक्सर लोग ‘गुरु पूर्णिमा’ और ‘शिक्षक दिवस’ को एक ही मानते हैं। लेकिन असल में इन दोनों में मूल अर्थ में बहुत अंतर है। भारतीय संस्कृति और इतिहास में इन दोनों पर्वों के भाव और मायने में बहुत दिलचस्प फर्क है।

गुरु पूर्णिमा हजारों साल पुरानी आध्यात्मिक साधना और ‘अंधकार से प्रकाश’ की तरफ ले जाने वाले गुरु को समर्पित है। वहीं शिक्षक दिवस आधुनिक भारत के शैक्षणिक योगदान और महान दार्शनिक राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन का सम्मान है। एक पर्व तिथि और पंचांग से चलता है तो दूसरा कैलेंडर की तय तारीख से यानी 5 सितंबर को मनाया जाता है। शिक्षक दिवस 2026 के खास अवसर पर जनरल नॉलेज में जानिए ‘शिक्षक’ और ‘गुरु’ के बीच अंतर।

गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के बीच अंतर

बहुत से लोग गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस को एक ही समझते हैं। लेकिन इनका मूल अर्थ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न है। आइए आज समझें गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के बीच कुछ प्रमुख अंतर।

प्राचीन परंपरा और आधुनिक इतिहास

गुरु पूर्णिमा हमारे देश और हिंदू धर्म की प्राचीन संस्कृति से जुड़ा पर्व है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत और चारों वेदों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसीलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।

शिक्षक दिवस (5 सितंबर) आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़ा है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाया जाता है। जब डॉ. राधाकृष्णन के छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई तो उन्होंने कहा कि इसे देश के सभी शिक्षकों के सम्मान में समर्पित किया जाए।

‘शिक्षक’ और ‘गुरु’ की भूमिका में अंतर

‘शिक्षक’ शब्द का सीधा संबंध शिक्षा, किताबी ज्ञान और जीवन में इस्तेमाल आने वाले हुनर से है। शिक्षक गणित, विज्ञान, भाषा या कोई विषय सिखाते हैं जो प्रैक्टिकल लाइफ चलाने और आजीविका कमाने योग्य बनाता है। वे बौद्धिक विकास की नींव रखते हैं।

वहीं, ‘गुरु’ का अर्थ बहुत व्यापक और गहरा है। संस्कृत में ‘गु’ का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और ‘रु’ का अर्थ है प्रकाश (ज्ञान)। गुरु आपकी चेतना को जगाते हैं, जीवन दर्शन समझाते हैं और आत्मानुभूति करवाते हैं। शिक्षक साक्षर बनाते हैं, जबकि गुरु जीवन जीने का दृष्टिकोण बदल देते हैं। शिक्षक और छात्र का संबंध मुख्य रूप से औपचारिक होता है। वहीं, गुरु और शिष्य का नाता जीवनभर का और आत्मिक होता है।

मनाने का तरीका और पंचांग का नियम

गुरु पूर्णिमा का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा को पड़ता है। इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। इस दिन मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, चरण स्पर्श और आध्यात्मिक अनुष्ठान होते हैं। लेकिन, शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को ही आता है। यह स्कूल और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शिक्षकों को कार्ड या उपहार देने और उनका आभार व्यक्त करने का शानदार दिन होता है।

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शिक्षक दिवस पर सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि: जानिए क्यों देश भर में 5 सितंबर को ही मनाया जाता है यह खास दिन

शिक्षक दिवस पर सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि: जानिए क्यों देश भर में 5 सितंबर को ही मनाया जाता है यह खास दिन

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने शासकीय आवास पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सीएम धामी ने भारतीय शिक्षा और संस्कृति को दिशा देने में उनके योगदान को याद किया और उनके जीवन मूल्यों को सभी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। ALSO READ: उत्तराखंड: सीएम धामी ने 9.91 लाख से अधिक पेंशनर्स के खातों में ट्रांसफर किए 147 करोड़, 5,605 नए लाभार्थी भी जुड़े

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि शिक्षक दिवस के अवसर पर शासकीय आवास पर महान शिक्षाविद्, पूर्व राष्ट्रपति, ‘भारत रत्न’ डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन जी ने अपने ज्ञान, विचारों और जीवन मूल्यों से भारतीय शिक्षा एवं संस्कृति को नई दिशा प्रदान की। उनका समर्पित जीवन और शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। ALSO READ: द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

5 सितंबर को क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस?

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, जो भारत के दूसरे राष्ट्रपति (1962-1967) और एक महान दार्शनिक, शिक्षक और विचारक भी थे। जब डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तो उनके छात्रों और दोस्तों ने उनका जन्मदिन, 5 सितंबर, एक विशेष दिन के रूप में मनाने का अनुरोध किया।

 

डॉ. राधाकृष्णन ने इसका उत्तर देते हुए कहा, 'मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय, अगर इसी दिन को शिक्षक के रूप में मेरे योगदान को याद करते हुए 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।' 

 

अर्थात् डॉ. राधाकृष्णन का यह विचार दर्शाता है कि वे शिक्षा और शिक्षकों को कितना महत्व देते थे। वे मानते थे कि एक समाज की नींव उसके शिक्षक होते हैं, और अगर देश को प्रगति करनी है, तो शिक्षकों को सम्मान देना जरूरी है। उनकी इसी भावना के चलते 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाने लगा, ताकि समाज में शिक्षकों के योगदान को सम्मानित किया जा सके। तब से हर साल यह दिन पूरे भारत में शिक्षकों के सम्मान में मनाया जाता है।

RSS चीफ मोहन भागवत लंदन के मंदिर-गुरुद्वारे में पहुंचे:ब्रिटेन के 20 संगठनों ने मेयर को लेटर लिखकर दौरे का बॉयकॉट किया

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को लंदन के मंदिरों और गुरुद्वारे के दौरे के साथ अपने विदेश दौरे के ब्रिटेन चरण की शुरुआत की। यह जानकारी RSS ने दी। RSS के केंद्रीय कार्यकारी दल के सदस्य सुनील अंबेकर और ब्रिटेन दौरे के समन्वयक संगठन Integral UK के संयोजक रोहित अंबेकर ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में बताया कि भागवत इस दौरान धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, रिसर्चर्स और अन्य प्रमुख लोगों से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भागवत RSS के निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सद्भाव के अनुभव के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, का संदेश साझा करेंगे। RSS के मुताबिक, लंदन का कार्यक्रम भागवत के अमेरिका और कनाडा दौरे में दिए गए संदेश को आगे बढ़ाता है। यह RSS की शताब्दी वर्ष से जुड़े तीन देशों के आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है। मंदिर और गुरुद्वारे पहुंचे सुनील अंबेकर और रोहित अंबेकर ने बताया कि अंतरधार्मिक संवाद के तहत भागवत विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा जा चुके हैं। उन्हें लंदन के एक जैन मंदिर में भी जाना है। ब्रिटेन दौरे का मुख्य कार्यक्रम रविवार को होगा। इसमें ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ थीम पर सामुदायिक नेताओं का स्वागत समारोह और ‘सभ्यतागत संवाद’ रखा गया है। यह कार्यक्रम ब्रिटेन में 1966 में स्थापित हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS) UK ने शुरू किया है। इसे Integral UK का समर्थन मिला है। प्रवक्ताओं के मुताबिक, पूरे ब्रिटेन के 310 से ज्यादा सामुदायिक संगठन और एसोसिएशन इसमें शामिल होने की उम्मीद है। बंद कमरे में बैठकें और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भागवत बुधवार को लंदन पहुंचे थे। गुरुवार को उन्होंने ‘बंद कमरे में हुई गोलमेज बैठकों’ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद कारोबार और राजनीति से जुड़े प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख लोगों की बड़ी सभा हुई। सुनील अंबेकर ने बताया कि ब्रिटेन के लोग RSS को समझने में काफी रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने लोगों की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर बात की। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिकों के साथ ब्रिटेन के नेता, संसद से जुड़े लोग, कारोबारी, करोड़पति और अरबपति तथा FTSE 100 कंपनियों और अन्य कॉरपोरेट्स से जुड़े लोग शामिल थे। हालांकि, प्रवक्ता ने कार्यक्रम में शामिल लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया था, ताकि चर्चा खुलकर हो सके। भागवत के दौरे पर उठी चिंताओं पर RSS का जवाब ब्रिटेन में कुछ सिविल सोसाइटी समूहों और सांसदों ने भागवत के दौरे को लेकर चिंता जताई है। इस पर सुनील अंबेकर ने कहा, “हम शांति, एकीकरण और एकता के लिए यहां हैं। इसलिए हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं। ऐसी आवाजें उठना सामान्य बात है।” उन्होंने कहा कि RSS को लेकर कई गलतफहमियां हैं, क्योंकि बुनियादी समझ में कमी है। उनके मुताबिक, “भारत किसी राष्ट्र-राज्य की राजनीतिक अवधारणा जैसा नहीं है। यह एक सांस्कृतिक अवधारणा है।” सुनील अंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व कोई स्थिर अवधारणा नहीं है। इसमें हर तरह के धर्म और सभी धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास की बात है। उन्होंने कहा, “यही हिंदुत्व है, यही भारत है। मुझे लगता है कि यह दौरा इन विचारों को साफ करने में मदद करेगा।” रविवार को सार्वजनिक संबोधन RSS प्रमुख का रविवार को प्रवासी भारतीय समुदाय को दिया जाने वाला सार्वजनिक संबोधन लाइव प्रसारित किए जाने की उम्मीद है। RSS प्रमुख के साथ ब्रिटेन के मीडिया के लिए कोई बातचीत नहीं रखी गई है। भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता: हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है। पूरी खबर पढ़ें…

Teachers Day Special: इस शिक्षक दिवस अपने प्रिय गुरुजनों को भेजें ये 10 अनमोल संदेश, जो सीधे दिल तक पहुँचेंगे

Teachers Day Special: इस शिक्षक दिवस अपने प्रिय गुरुजनों को भेजें ये 10 अनमोल संदेश, जो सीधे दिल तक पहुँचेंगे

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Teachers Day Special: हर साल 5 सितंबर का दिन हमारे जीवन की उस नींव को याद करने का दिन है, जिसे हमारे शिक्षकों ने अपने निस्वार्थ भाव और मेहनत से गढ़ा है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाया जाने वाला 'शिक्षक दिवस' केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और प्यार जताने का एक खूबसूरत ज़रिया है। अगर आप भी इस बार अपने टीचर्स को कुछ खास और यादगार अंदाज़ में विश करना चाहते हैं, तो शब्दों के इस प्यारे से गुलदस्ते में से चुनें अपने मनपसंद संदेश।

 

1. 

दिल से निकला पहला धन्यवाद

आप केवल किताबों के पन्ने पलटना नहीं सिखाते,

बल्कि जीवन के पन्नों पर मुस्कुराकर जीना सिखाते हैं।

आप मेरे जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।

शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएँ!

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2.

चुनौतियों से लड़ना सिखाने वाले के नाम

आपने सिर्फ किताबी पाठ नहीं पढ़ाया,

बल्कि हर मुश्किल से टकराने का हौसला भी दिया।

जीवन के हर मोड़ पर रोशनी दिखाने के लिए शुक्रिया।

 

3.

अटूट कृतज्ञता का अहसास

मेरी सोच, मेरी पहचान और मेरी दिशा को संवारने में

आपका योगदान सबसे खास है।

मैं आपका/आपकी हमेशा आभारी रहूँगा/रहूँगी।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

 

4.

सजीव वरदान जैसे शिक्षक के लिए

आपके रूप में मुझे एक ऐसा गुरु मिला जिसने

मुझे खुद पर और अपने सपनों पर यकीन करना सिखाया।

आप जैसा शिक्षक मिलना किसी ईश्वर के आशीर्वाद से कम नहीं!

 

5.

अज्ञानता के अंधेरे को मिटाने वाला संदेश

जब भी मैं भटका, आपने ज्ञान का वो दीया जलाया

जिसने मेरे रास्ते की हर धुंध को साफ कर दिया।

दिल से आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

 

6.

व्यक्तित्व को निखारने वाले गुरु के नाम

आपका धैर्य, आपकी ममता और आपका मार्गदर्शन…

इन्हीं की बदौलत आज मैं एक बेहतर इंसान बन पाया हूँ।

शिक्षक दिवस की अनगिनत शुभकामनाएँ!

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7.

हौसलों की नई उड़ान के लिए

आपकी एक छोटी सी थपकी और प्रोत्साहन के दो बोल,

मेरे लिए हर बड़ी चुनौती को आसान बना देते हैं।

आप मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ हैं!

शिक्षक दिवस की ढेरों शुभकामनाएँ!

 

8.

दुनिया बदल देने वाले विचार

इस शिक्षक दिवस पर शब्दों में तो बयां नहीं कर सकता/सकती,

पर सच यह है कि आपने मेरी पूरी दुनिया ही बदल दी।

आपको शिक्षक दिवस की दिल से अनंत शुभकामनाएँ!

 

9.

अनमोल सीख और स्नेह का आभार

आपका दिया ज्ञान मेरी पूँजी है और आपका स्नेह मेरी ताकत।

आप जैसा गुरु पाकर मैं खुद को दुनिया का सबसे भाग्यशाली शिष्य मानता/मानती हूँ।

 

10.

भविष्य के निर्माता को नमन

आज मैं जो कुछ भी हूँ या कल जो बनूँगा,

उसकी नींव आपने ही रखी है।

आपके प्रति यह आदर और सम्मान जीवन भर यूँ ही रहेगा।

शिक्षक दिवस की सादर शुभकामनाएँ!

Teacher day essay : शिक्षक दिवस पर बच्चो के लिए निबंध

Teacher day essay : शिक्षक दिवस पर बच्चो के लिए निबंध

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प्रस्तावना:

प्रतिवर्ष 5 सितंबर का दिन भारत में 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पूरी तरह से गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा और शिक्षकों के समर्पण को याद करने के लिए है। भारत की संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव से बहुत ऊँचा और पवित्र रहा है। मानव जीवन में शिक्षकों के सही योगदान और महत्व को समझाने के लिए ही इस विशेष दिन को मनाया जाता है।

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माता-पिता और गुरु का स्थान

हमारे जीवन में माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है, क्योंकि वे हमें इस दुनिया में लाते हैं और हमारा पालन-पोषण करते हैं। इसीलिए कहा भी जाता है कि बच्चे के जीवन के पहले गुरु उसके माता-पिता ही होते हैं। लेकिन इस दुनिया में जीने का सही तरीका और ज्ञान हमें शिक्षक ही प्रदान करते हैं। शिक्षक ही हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं और जीवन में सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँचाते हैं।

 

शिक्षक दिवस: कब और क्यों?

शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस (5 सितंबर 1888) के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का शिक्षा और अध्यापन के प्रति गहरा लगाव था। जब उनके शिष्यों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने कहा कि “यदि मेरे जन्मदिन को शिक्षकों के सम्मान के रूप में मनाया जाए, तो मुझे सबसे अधिक गर्व होगा।”

 

वे एक कुशल राजनयिक, महान विचारक और आदर्श शिक्षक थे। इस दिन पूरे देश में भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाता है।

 

शिक्षक दिवस पर तैयारियाँ और आयोजन

शिक्षक दिवस पर देश के सभी स्कूल-कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में उत्सव जैसा माहौल रहता है:

सांस्कृतिक कार्यक्रम: छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में नाटक, गीत, नृत्य और भाषण प्रस्तुत करते हैं।

शिक्षकों की भूमिका में छात्र: कई स्कूलों में वरिष्ठ छात्र पूरे दिन शिक्षक बनकर कक्षाएं चलाते हैं और अध्यापन का अनुभव प्राप्त करते हैं।

सम्मान समारोह: छात्र अपने शिक्षकों को धन्यवाद कार्ड, फूल और उपहार देकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

संकल्प दिवस: शिक्षक भी इस दिन गुरु-शिष्य परंपरा को बनाए रखने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेते हैं।

 

गुरु-शिष्य संबंध का महत्व

गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का एक स्वर्णिम हिस्सा है। शिक्षक उस माली के समान होता है जो अलग-अलग प्रकार के पौधों को सींचकर एक सुंदर बगीचा तैयार करता है। वह छात्रों को जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने की सीख देता है। एक आदर्श गुरु ही शिष्य में नैतिकता और अच्छे चरित्र का निर्माण करता है।

 

वर्तमान परिप्रेक्ष्य और चुनौतियाँ

  • आज के आधुनिक दौर में गुरु-शिष्य परंपरा में कुछ कमियाँ भी देखने को मिल रही हैं:
  • शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से गुरु और शिष्य के संबंध में आत्मीयता की कमी आई है।
  • आए दिन मीडिया में शिक्षकों और विद्यार्थियों के एक-दूसरे के प्रति दुर्व्यवहार की खबरें देखने को मिलती हैं, जो हमारी प्राचीन संस्कृति पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
  • डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से छात्रों का ध्यान पढ़ाई और संस्कारों से भटक रहा है।

 

उपसंहार

शिक्षक दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि गुरुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने का दिन है।

विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वे अपने शिक्षकों का सदैव सम्मान करें और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को जीवन में अपनाएं। वहीं शिक्षकों को भी चाहिए कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखें और विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाकर एक सशक्त समाज और देश के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

बंगाल में खुलेंगे RSS के 1000 नए स्कूल, शिक्षा विभागों का होगा विलय; जानें बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक योजना के बारे में जानकारी दी है। इसके तहत अगले एक साल में हर जिले, नगर पालिका और पंचायत में RSS से जुड़ी संस्था विद्या भारती के कम से कम 1,000 स्कूल खोलने का लक्ष्य है। इसके अलावा राज्य के चार शिक्षा विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने की भी बात कही गई है। इस योजना के तहत मदरसा शिक्षा के लिए अलग विभाग नहीं होगा। सीएम ने विद्या भारती की 74वीं वर्षगांठ के मौके पर रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में आयोजित कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी है। वहीं इस कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने संस्था की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।

सीएम ने इन जगहों पर स्कूलों खोलने की कही बात

उन्होंने विद्या भारती से बच्चों को देश और समाज से जुड़ी शिक्षा देने की दिशा में काम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सचिवालय बुलाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक करने और इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संस्था से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन इलाकों में ज़्यादा एंटी-नेशनल एक्टिविटीज होने का दावा भी किया। अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर शिक्षा का माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विद्या भारती जैसी संस्थाओं को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए।

टीएमसी पर लगाए ये आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान शिक्षा का माहौल खराब हो गया था। उन्होंने टीएमसी पर लोगों को बांटने के लिए बंगाली पाठ्यक्रम में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ‘मां’ की जगह ‘अम्मा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पाठ्यक्रम में ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को भी नजरअंदाज किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के “एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान” के नारे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सोच शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होनी चाहिए।

सीएम ने क्या कहा

सीएम ने कहा कि, “हम ऐसा कोई इंतजाम नहीं होने देंगे जहां हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट सभी यूनिवर्सिटीज को देखेगा, वहीं दूसरा डिपार्टमेंट आलिया यूनिवर्सिटी को देखेगा।” आलिया यूनिवर्सिटी को अभी राज्य का माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट मैनेज करता है। सीएम ने आगे कहा,” मैंने बोर्ड टॉपर्स को सम्मानित किया। बाद में, माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट ने 27 मुस्लिम स्टूडेंट्स के नामों वाली एक अलग फाइल भेजी। मैंने पूछा क्यों? मैं पहले ही 20 स्टूडेंट्स को सम्मानित कर चुका हूँ, और उनमें मुस्लिम, जैन और बौद्ध शामिल हैं।” पश्चिम बंगाल में फिलहाल विद्या भारती के 313 स्कूल चल रहे हैं, जबकि पूरे देश में यह संस्था 12,000 से ज्यादा स्कूल और 10,000 बाल संस्कार केंद्र संचालित करती है।

Mausam 4 Sep: आज इन राज्यों में मूसलाधार बारिश! MP में ऑरेंज कलर अलर्ट जारी, जानें दिल्ली-यूपी से लेकर दक्षिण भारत तक के मौसम का हाल

थिएटर में नंगे पैर ‘हनुमान अंश’ देखते नजर आया मुस्लिम शख्स, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह सिनेमा हॉल में ‘हनुमान अंश’ फिल्म देख रहा है। कई लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि फिल्म देखते समय वह बिना जूते-चप्पल के बैठा है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी खूब पसंद की जा रही है।

वीडियो में वह व्यक्ति सफेद कुर्ता-पायजामा और सफेद टोपी पहने हुए बिना जूते-चप्पल के थिएटर में बैठा दिखाई दे रहा है। वह फिल्म देखने में पूरी तरह मग्न है और उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि कोई उसका वीडियो बना रहा है।

वीडियो ऑनलाइन पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। एक यूज़र ने लिखा, “बिना राजनीति वाला भारत।” दूसरे ने लिखा, “वे दशकों से चल रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण से उसके मन को दूषित करने में नाकाम रहे।”

नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच यह वायरल क्लिप लोगों का ध्यान खींच रही है। हाल ही में मिराज सिनेमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने नीम करोली बाबा के लिए सीट नंबर 9 आरक्षित करने का फैसला किया है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि बाबा अपने भक्तों के साथ फिल्म देखेंगे।

नंगे पैर फिल्म देखने आए एक व्यक्ति का वीडियो और उस पर ऑनलाइन मिली प्रतिक्रियाओं ने ‘हनुमान अंश’ फिल्म के बारे में चर्चा को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह फिल्म सिनेमाघरों में लगातार लोगों का ध्यान खींच रही है।

नीम करौली बाबा, जिनका जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में लक्ष्मण नारायण शर्मा के रूप में हुआ था। वे हनुमान के परम भक्त थे। 1960 और 1970 के दशक में कैंची धाम और वृंदावन में अपने आश्रमों के माध्यम से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उनकी शिक्षाओं ने पश्चिमी देशों के कई साधकों को आकर्षित किया, जिनमें हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्परट (राम दास) और आध्यात्मिक साधक भगवान दास प्रमुख थे।

उनकी शिक्षाओं में निस्वार्थ सेवा और भक्ति पर जोर दिया गया था, जिसे संक्षेप में “सब से प्रेम करो, सबकी सेवा करो, सबको भोजन कराओ” कहा जाता है। हालांकि उनके अनुयायियों द्वारा बताई गई बातों में उनके जीवन से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाओं का जिक्र मिलता है, लेकिन ये कहानियाँ उनके आध्यात्मिक जीवन-वृत्तांत का हिस्सा हैं, न कि प्रमाणित इतिहास का।

11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनके निधन के बाद, उनकी विरासत दुनिया भर में फैली और स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी प्रमुख पश्चिमी हस्तियों को प्रभावित किया; इन सभी ने उनके कैंची धाम आश्रम का दौरा किया था।

खबरों के अनुसार, 1.8 करोड़ रुपये के कम बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने भारत में लगभग 10 लाख रुपये की शुरुआती कमाई की और 28वें दिन तक 62 करोड़ रुपये से अधिक की नेट कमाई कर ली। फिल्म निर्माताओं का मानना ​​है कि लोगों के बीच फिल्म की अच्छी चर्चा (वर्ड ऑफ माउथ) के कारण ही यह फिल्म इतने लंबे समय तक सिनेमाघरों में चल पाई।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गोविंद देव गिरि के प्रमोशन पर उठे सवाल

​ram mandir trust govind dev giri: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। चढ़ावा विवाद के चलते चंपत राय की जिम्मेदारी अब गोविंद देव गिरि को सौंपी गई है। दिल्ली के महेश भागचंदका को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। गिरि को महासचिव बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है उनके कोषाध्यक्ष रहते हुए ही चढ़ावा में चोरी की घटना हुई थी। कोष के लिए कोषाध्यक्ष ही सीधे जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में महासचिव के रूप में गोविंद गिरि का नाम लोगों के गले नहीं उतर रहा है। 

क्या कहा गोविंद देव गिरि ने?

​ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि नई टीम का मुख्य लक्ष्य अयोध्या को दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करना और मंदिर निर्माण के साथ-साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज को पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ाना है।

 

​बैठक में वित्तीय व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने, चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और SIT जांच से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का रुख स्पष्ट किया गया। आने वाले दिनों में जरूरत पड़ने पर ज्वाइंट या डिप्टी CEO की नियुक्ति के लिए जल्द ही SOP और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।

चंपतराय का दबदबा बरकरार

महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय का सीधे-सीधे तो नहीं, लेकिन परोक्ष रूप से ट्रस्ट में उनका दबदबा बरकरार है। दरअसल, नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। चंपत राय इस ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के नए सदस्य महेश पांडेय को भी चंपत राय का करीबी माना जाता है। हालांकि अध्यक्ष और महासचिव के पद अब संत समाज के पास हैं।  

 

उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन को सुदृढ़ करने के लिए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चुना गया है। इस पद के लिए 16 अभ्यर्थियों में से तीन नाम—एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज—शॉर्टलिस्ट किए गए थे, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम सहमति बनी।

 

​इनके अलावा अयोध्या निवासी ​वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में रामलला की ओर से प्रभावी कानूनी पैरवी की थी। शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया। 

बिना किसी बड़े स्टार और PR के नीम करोली बाबा पर मूवी बना 60 करोड़ पार! जानिए कौन हैं हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी

राइटर-डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ 2026 की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफ़िस सरप्राइज़ फ़िल्मों में से एक बनकर उभरी है। 7 अगस्त को सिर्फ़ 10 लाख रुपये की ओपनिंग के बावजूद, यह स्पिरिचुअल ड्रामा फ़िल्म – जिसे लगभग 2 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया था – भारत में 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई करने में सफल रही।

इस फ़िल्म ने 41,245 शो में कुल मिलाकर 72.97 करोड़ रुपये और नेट कलेक्शन के तौर पर 61.88 करोड़ रुपये कमाए हैं। अपने 26वें दिन, ‘हनुमान अंश’ ने 8.50 करोड़ रुपये (नेट) कमाए, जिससे इसने यश की फ़िल्म ‘टॉक्सिक’ की 8.20 करोड़ रुपये की कमाई का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

फ़िल्म की लगातार अच्छी रफ़्तार को देखते हुए अब यह सवाल तेज़ी से उठ रहा है कि क्या ‘हनुमान अंश’ 100 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच पाएगी। इस बड़ी हिट के बाद, फ़ैंस यह जानना चाहते हैं कि विशाल चतुर्वेदी कौन हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के अनुसार, विशाल चतुर्वेदी एक फ़िल्ममेकर और ‘स्वंभू मीडिया नेटवर्क’ के फ़ाउंडर हैं।

उन्हें कंटेंट प्रोडक्शन, फ़िल्ममेकिंग और पाक कला (culinary arts) में 14 साल से ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने ‘सेतु’ (2023) और ‘रब करे तू भी’ (2021) में राइटर के तौर पर काम किया है। ‘हनुमान अंश’ की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित है, जिसे चतुर्वेदी ने लिखा और डायरेक्ट किया है।

लोगों के बीच फ़िल्म की तारीफ़ (word-of-mouth) ने 10 लाख रुपये की ओपनिंग वाली इस फ़िल्म की किस्मत बदल दी और आख़िरी हफ़्तों में इसकी कमाई में ज़बरदस्त उछाल आया। यह फ़िल्म इस साल की सबसे चौंकाने वाली थिएटर सक्सेस स्टोरीज़ में से एक है और चौथे हफ़्ते में इसका प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, अब ‘हनुमान अंश’ को ‘होम्बले फ़िल्म्स’ द्वारा दुनिया भर में रिलीज़ किया जा रहा है। यह फ़िल्म अब 11 सितंबर को दुनिया भर में रिलीज़ होगी।

‘हनुमान अंश’ की भारत में शानदार सफलता के बाद, ‘होम्बले फिल्म्स’ मूवी की करने जा रहा ग्लोबल रिलीज

नीम करौली बाबा का नाम आते ही महावीर हनुमान का खयाल दिल को छू जाता हैं, ऐसे में उनकी कहानी देश में लोगों को प्रभावित करने के बाद अब विदेशों तक पहुंच रही है। बता दें कि नीम करौली बाबा वही हैं, जिनके आध्यात्मिक प्रभाव ने स्टीव जॉब्स, मार्क जकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी बड़े नामों को भी प्रभावित किया है।

भारतीय सिनेमाघरों में शानदार परफॉर्मेंस के बाद, हिंदी डिवोशनल ड्रामा फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ अब इंटरनेशनल दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है। ऐसे में इसकी इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन की कमान होम्बले फ़िल्म्स संभाल रही है। बता दें कि यह फ़िल्म 11 सितंबर, 2026 को ग्लोबल लेवल पर रिलीज़ होने के लिए तैयार है।

हनुमान अंश की कहानी नीम करोली बाबा की ज़िंदगी पर आधारित, जिसे विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखा और डायरेक्ट किया गया है। भक्तों द्वारा भगवान हनुमान के अवतार माने जाने वाले बाबा को लोग महाराज-जी के नाम से भी जानते हैं। बाबा को उनकी भक्ति के साथ साथ भक्त उनके प्यार और सेवा की अपनी शिक्षाओं के लिए भी जानते हैं। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि बाबा का प्रभाव भारत से ज्यादा पश्चिमी देशों में देखा गया है, खासकर 1960 और 1970 के दशक में जब ज्यादातर साधक देश में उनके दर्शन के लिए आए थे।

हनुमान अंश फिल्म थिएटर्स में अच्छा परफॉर्मेंस कर रही है। रिपोर्ट की माने तो फिल्म ने महज 10 लाख की ओपनिंग करने के बाद अच्छी रफ्तार पकड़ी है और देखते ही देखते बॉक्स ऑफिस पर 26वें दिन तक ₹63.82 करोड़ का आंकड़ा अपने नाम कर लिया है। फिल्म की अच्छी कहानी को ज़बरदस्त वर्ड-ऑफ़-माउथ का फायदा मिला है, जिसकी वजह से लोगों की फिल्म देखने को लेकर दिलचस्पी बढ़ते हुए देखने मिल रही है।

बाबा के देश से लेकर विदेश में तक भक्त हैं। भक्तों की बात करें तो इसमें दुनिया के कुछ सबसे प्रभावशाली हस्तियों का नाम शामिल है, जैसे कि स्टीव जॉब्स, मार्क ज़करबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स। वहीं, भारत में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा भी कैंची धाम बाबा का आशीर्वाद लेने आ चुके हैं।

साल 1974 में स्टीव जॉब्स ने महाराज-जी को ढूंढने के लिए भारत का रुख किया था। इसके बाद स्टीव जॉब्स की बात मानते हुए एक कठिन समय में मार्क ज़करबर्ग ने भी कैंची धाम की यात्रा की थी। इसके अलावा जूलिया रॉबर्ट्स ने भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में खुलकर बात करते हुए नीम करोली बाबा के नाम और उनके प्रभाव का जिक्र किया था।

होम्बले फिल्म्स हनुमान अंश फिल्म की कहानी को न सिर्फ ग्लोबल मार्केट में ला रहा है बल्कि एक ऐसे संत की कहानी को विदेशों में पहुंचाने का काम करने जा रहा है जिसका असर सरहदों से भी आगे था। कहना होगा कि यह फिल्म सभी के लिए एक अलग अनुभव होने वाली है और इसके साथ और भी दुनिया भर के दर्शक भक्त के रूप में जुड़ने वाले हैं। इस भक्तिमय फिल्म के साथ कैंची धाम से लेकर दुनिया भर के दर्शकों तक, महाराज जी की कहानी अब देश से लेकर विदेश तक के दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है।