UGC NET June 2026 Re-Exam: 9 और 10 सितंबर को होने वाले री-एग्जाम के लिए जारी हुआ एडमिट कार्ड, जानें कैसे मिलेगा एडमिट कार्ड

UGC NET June 2026 Re-Exam: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी नेट जून 2026 के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी पेपर्स के री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। ये पेपर्स 9 और 10 सितंबर को पूरे देश में होने वाले हैं। इस परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थी अपने लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके ऑफिशियल वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in से अंडरटेकिंग के साथ अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा के दिन किसी भी परेशानी से बचने के लिए एडमिट कार्ड पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। इनमें परीक्षा के दिन की खास गाइडलाइंस, क्या ले जाना है, रिपोर्टिंग टाइम, ड्रेस कोड और दूसरी जरूरी जानकारी शामिल है। एडमिट कार्ड डाउनलोड करते समय किसी भी तरह की दिक्कत होने या उस पर दिए गए विवरण में कोई गड़बड़ी होने पर, कैंडिडेट्स को एनटीए हेल्पडेस्क से 011-40759000 पर संपर्क करना चाहिए या ugcnet@nta.ac.in पर लिखना चाहिए।

कैंडिडेट्स को उनके परीक्षा शहर और तारीख के बारे में 1 सितंबर को जारी एडवांस सिटी इंटिमेशन स्लिप के जरिए पहले ही बता दिया गया था।

परीक्षा एजेंसी ने 28 अगस्त को 87 में से 84 सब्जेक्ट्स के यूजीसी नेट जून 2026 के रिजल्ट घोषित किए।

एनटीए को मुख्य परीक्षा में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी, तीन विषयों के पेपर में गलतियों के बारे में कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद परीक्षा एजेंसी ने इनके लिए दोबारा परीक्षा की घोषणा की।

इसके बाद एनटीए ने बताई गई गलतियों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई। कमेटी ने पाया कि तीनों पेपर्स में कई फैक्ट्स, टाइपिंग और ट्रांसलेशन की गलतियां थीं। इनमें जाने-माने स्कॉलर्स के नामों की गलत स्पेलिंग, किताबों के टाइटल में गड़बड़, क्वेश्चन स्टेम्स के शब्दों में गलतियां, ग्रामर की गलतियां, जेंडर और नंबर एग्रीमेंट की गलतियां, पंक्चुएशन की गलतियां और पहले से मौजूद कॉन्सेप्ट्स के लिए बनाए गए नॉन-स्टैंडर्ड शब्द शामिल थे। इसने यह भी पाया कि पहले हुए एग्जाम्स से काफी सारे सवाल रिपीट किए गए थे।

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक को समर्पित हैं गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस, जानें दोनों में क्या है अंतर और क्या है इतिहास

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक को समर्पित हैं गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस, जानें दोनों में क्या है अंतर और क्या है इतिहास

Guru Purnima vs Teachers Day Difference: शिक्षक का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि शिक्षक सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं देता, वह हमें जीने का, अपने उसूलों पर चलने और सही-गलत में फर्क करने की समझ भी देता है। इसलिए हमारे देश में दो खास दिन गुरु को समर्पित हैं। एक है गुरु पूर्णिमा और दूसरा है टीचर्स डे। अक्सर लोग ‘गुरु पूर्णिमा’ और ‘शिक्षक दिवस’ को एक ही मानते हैं। लेकिन असल में इन दोनों में मूल अर्थ में बहुत अंतर है। भारतीय संस्कृति और इतिहास में इन दोनों पर्वों के भाव और मायने में बहुत दिलचस्प फर्क है।

गुरु पूर्णिमा हजारों साल पुरानी आध्यात्मिक साधना और ‘अंधकार से प्रकाश’ की तरफ ले जाने वाले गुरु को समर्पित है। वहीं शिक्षक दिवस आधुनिक भारत के शैक्षणिक योगदान और महान दार्शनिक राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन का सम्मान है। एक पर्व तिथि और पंचांग से चलता है तो दूसरा कैलेंडर की तय तारीख से यानी 5 सितंबर को मनाया जाता है। शिक्षक दिवस 2026 के खास अवसर पर जनरल नॉलेज में जानिए ‘शिक्षक’ और ‘गुरु’ के बीच अंतर।

गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के बीच अंतर

बहुत से लोग गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस को एक ही समझते हैं। लेकिन इनका मूल अर्थ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न है। आइए आज समझें गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के बीच कुछ प्रमुख अंतर।

प्राचीन परंपरा और आधुनिक इतिहास

गुरु पूर्णिमा हमारे देश और हिंदू धर्म की प्राचीन संस्कृति से जुड़ा पर्व है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत और चारों वेदों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसीलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।

शिक्षक दिवस (5 सितंबर) आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़ा है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के रूप में मनाया जाता है। जब डॉ. राधाकृष्णन के छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई तो उन्होंने कहा कि इसे देश के सभी शिक्षकों के सम्मान में समर्पित किया जाए।

‘शिक्षक’ और ‘गुरु’ की भूमिका में अंतर

‘शिक्षक’ शब्द का सीधा संबंध शिक्षा, किताबी ज्ञान और जीवन में इस्तेमाल आने वाले हुनर से है। शिक्षक गणित, विज्ञान, भाषा या कोई विषय सिखाते हैं जो प्रैक्टिकल लाइफ चलाने और आजीविका कमाने योग्य बनाता है। वे बौद्धिक विकास की नींव रखते हैं।

वहीं, ‘गुरु’ का अर्थ बहुत व्यापक और गहरा है। संस्कृत में ‘गु’ का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और ‘रु’ का अर्थ है प्रकाश (ज्ञान)। गुरु आपकी चेतना को जगाते हैं, जीवन दर्शन समझाते हैं और आत्मानुभूति करवाते हैं। शिक्षक साक्षर बनाते हैं, जबकि गुरु जीवन जीने का दृष्टिकोण बदल देते हैं। शिक्षक और छात्र का संबंध मुख्य रूप से औपचारिक होता है। वहीं, गुरु और शिष्य का नाता जीवनभर का और आत्मिक होता है।

मनाने का तरीका और पंचांग का नियम

गुरु पूर्णिमा का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा को पड़ता है। इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। इस दिन मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, चरण स्पर्श और आध्यात्मिक अनुष्ठान होते हैं। लेकिन, शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को ही आता है। यह स्कूल और कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शिक्षकों को कार्ड या उपहार देने और उनका आभार व्यक्त करने का शानदार दिन होता है।

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