Stock in News: रेलवे से पहली बार मिले दो ऑर्डर्स, खुलासे पर 4% उछल पड़ा यह शेयर

Hirect Share Price: हिरेक्ट (पूर्व नाम हिंद रेक्टिफायर्स) ने लगातार तीन दिनों तक तीन डिटेल्स एक्सचेंज फाइलिंग में दी और अब आज इसके शेयर 4% से अधिक ऊपर चढ़ गए। इसमें से एक जानकारी तो कंपनी ने ये भेजी है कि 24 जुलाई से इसका नाम हिंद रेक्टिफायर्स से हिरेक्ट हो गया तो बाकी में कंपनी ने बताया है कि इसे रेलवे से अपनी तरह का खास पहला ऑर्डर मिला है। इसने शेयरों की चमक बढ़ा दी। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया, जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 2.98% की बढ़त के साथ ₹1339.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 4.44% उछलकर ₹1,358.00 तक उछल गया था।

कैसे ऑर्डर्स मिले हैं Hirect (Hind Rectifiers) को रेलवे से

हिरेक्ट को रेलवे से ₹160 करोड़ के अपनी तरह के पहले ऑर्डर्स मिले हैं। इसमें से एक ₹60 करोड़ का एक ऑर्डर तो इसे मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) से मिला है। यह मेडेन ऑर्डर MEMU (मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट) ट्रेनसेट्स के लिए है, जिस पर कंपनी को 24 महीने के भीतर काम पूरा करना है। वहीं कंपनी को इंडियन रेलवे से वंदे मेट्रो (नमो भारत) के लिए पहला डेवलपमेंट ऑर्डर मिला है। ₹60 करोड़ के इस ऑर्डर के तहत कंपनी को 21 महीने के भीतर काम पूरा करना है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

हिरेक्ट के शेयरों ने निवेशकों का पैसा इस साल मार्केट की तेज उठा-पटक के बीच भी रॉकेट की स्पीड से बढ़ाया। महज छह महीने में ही यह 146% से अधिक ऊपर चढ़ गया यानी कि निवेशकों का पैसा करीब ढाई गुना हो गया। इस दौरान निफ्टी 4% से अधिक कमजोर हुआ था। हिरेक्ट के शेयर 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर ₹568.55 के भाव पर थे जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से छह ही महीने में यह 146.24% उछलकर 16 जुलाई 2026 को ₹1,400.00 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

5 वजहों से थमी 5 दिनों की गिरावट, उछले सेंसेक्स-निफ्टी 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Orient Tech Share Price: NPCI से ₹76 करोड़ का ऑर्डर, अब 27 जुलाई को शेयरों पर रहेगा फोकस

Orient Tech Share Price: आईटी सॉल्यूशंस मुहैया कराने वाली दिग्गज कंपनी ओरिएंट टेक्नोलॉजीज को NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) से ₹76.2 करोड़ (जीएसटी छोड़कर) का पर्चेज ऑर्डर मिला। कंपनी ने एक दिन पहले 24 जुलाई को रात में एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी और अब सोमवार 27 जुलाई को इसके शेयरों पर असर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर यह कमजोर मार्केट सेंटिमेंट के साथ 0.76% की बढ़त के साथ ₹259.05 के भाव पर बंद हुआ था जबकि घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी (Nifty) 0.43% की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ था।

कैसा ऑर्डर मिला है Orient Tech को?

ओरिएंट टेक्नोलॉजीज ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से सर्वर सप्लाई करने के लिए ₹76.2 करोड़ (GST छोड़कर) का पर्चेज ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में सर्वर की सप्लाई के साथ-साथ बिक्री के बाद सपोर्ट सर्विसेज और सात साल की वारंटी भी शामिल है। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार इस ऑर्डर के तहत कंपनी को 18 हफ्ते के भीतर सप्लाई पूरा करना है।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल

ओरिएंट टेक के ₹215 करोड़ के आईपीओ के तहत निवेशकों को ₹206 के भाव पर शेयर जारी हुए थे। 28 अगस्त 2024 को 40% पर एंट्री के बाद शेयर अपर सर्किट पर चले गए और इसी पर बंद भी हुए थे। धांसू लिस्टिंग के बाद 4 महीने से भी कम समय में यह 197.57% चढ़कर 20 जनवरी 2025 को ₹613 पर पहुंच गया जो इसके लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है। हालांकि शेयरों की तेजी यहीं थम गई और इस हाई लेवल से टूटकर यह 30 मार्च 2026 को आईपीओ प्राइस के एकदम करीब ₹222.10 तक आ गया था। हालांकि इसमें ध्यान दें कि इसका मौजूदा भाव बोनस इश्यू के बाद का एडजस्टेड प्राइस है। कंपनी ने लिस्टिंग के बाद एक बार बोनस इश्यू जारी किया था जिसके तहत निवेशकों को 10 शेयरों पर एक शेयर बोनस में मिला था और इसकी एक्स-डेट 5 जनवरी 2026 थी।

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Market outlook : लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 27 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market outlook :24 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,800 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 331.62 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 पर बंद हुआ। लगभग 2050 शेयरों में बढ़त हुई,1961 शेयरों में गिरावट आई और 196 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस,एटरनल, M&M, श्रीराम फाइनेंस और भारती एयरटेल शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,विप्रो,सिप्ला,ITC और HDFC लाइफ शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी IT (0.8% ऊपर),निफ्टी PSU बैंक (0.5% ऊपर)और निफ्टी बैंक (0.18% ऊपर)रहे।

दूसरी ओर निफ्टी ऑटो सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.10% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी मेटल (0.55% नीचे),निफ्टी एनर्जी (0.57% नीचे),निफ्टी रियल्टी (0.55% नीचे),निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.46% नीचे),निफ्टी फार्मा (0.4% नीचे) और निफ्टी इंफ्रा (0.4% नीचे) रहे।

ब्रॉडर मार्केट भी अपने इंट्राडे निचले स्तरों से सुधरे। निफ्टी मिडकैप 100 बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि आने वाले समय में मार्केट का सेंटीमेंट खराब रह सकता है। तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने से मेन मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें संकट के समय के अपने पीक से काफी नीचे होने के बावजूद US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 52-हफ्ते के हाई पर पहुंच गए हैं। यह बॉन्ड मार्केट की उन चिंताओं को दिखाता है जो एनर्जी से जुड़ी महंगाई के जोखिम,मजबूत लेबर मार्केट की स्थिति और फेड के लगातार सख़्त रुख (hawkish stance) से जुड़ी हैं।

इन वजहों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इंपोर्ट पर वॉशिंगटन के नए टैरिफ ने एक्सपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टेक्नोलॉजी इंटेसिव मार्केट पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है,क्योंकि ग्रोथ पर ऊंची दरों का दबाव है और निवेशक दूसरे उभरते हुए मार्केट की ओर रुख करके जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अच्छे वैल्यूएशन और क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों के चलते बैंक निफ्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।

निफ्टी का आउटलुक

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23650-23600 के जोन में दिख रहा है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है,तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23450 और फिर 23300 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,निफ्टी के लिए तकाल रेजिस्टेंस 23950-24000 के जोन में है,जो 50-दिन के EMA के साथ मेल खाता है।

HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक पर पड़ी अमेरिका में हो रही जांच की मार,1% टूटा शेयर

बैंक निफ्टी का आउटलुक

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी में भी निफ्टी जैसी ही शुरुआती कमजोरी दिखी। यह निचले स्तर पर खुला और नीचे की ओर गया,लेकिन फिर इंट्राडे के निचले स्तरों से तेज रिकवरी हुई जिससे नुकसान की भरपाई हो गई। इस रिकवरी की वजह से डेली चार्ट पर एक बड़ी बुलिश कैंडल बनी और इंडेक्स ने अपना 200-डे का EMA फिर से हासिल कर लिया,जो ट्रेडर्स के लिए एक अहम लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57100-57200 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57600 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56300-56200 जोन में है।

 

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HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक पर पड़ी अमेरिका में हो रही जांच की मार,1% टूटा शेयर

HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक के शेयर में आज 1 फीसदी की गिरावट है। अमेरिका की तीन शेयरहोल्डर लॉ फर्मों ने HDFC बैंक के खिलाफ अमेरिकी फेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर अलग-अलग जांच शुरू की है। इस साल की शुरुआत में मीडिया में आई उन खबरों के बाद यह जांच शुरू की गई है जिनमें बैंक की ओर से कथित अनियमित भुगतान और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं की आंतरिक जांच का ज़िक्र किया गया था।

ग्लैंसी प्रोंगै वोल्के एंड रोटर LLP (Glancy Prongay),फ्रैंक आर. क्रूज़ के लॉ ऑफिस (Frank R. Cruz) और हॉवर्ड जी.स्मिथ के लॉ ऑफिस (Howard G. Smith) ने इस हफ्ते अलग-अलग बिज़नेस वायर नोटिस जारी करके इन जांचों का ऐलान किया है।

HDFC बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs)न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हैं। इसकी वजह से बैंक पर US सिक्योरिटीज कानून के तहत जानकारी देने की शर्तें लागू होती हैं।

ग्लैंसी प्रोंगै ने कहा है कि उसने HDFC बैंक के निवेशकों की ओर से कंपनी द्वारा फ़ेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन के मामले में जांच शुरू कर दी है। वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने निवेशकों को कारोबार से जुड़ी ऐसी जानकारी दी जो काफी हद तक गुमराह करने वाली थी, और/या क्या उसने फ़ेडरल सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन किया है।

इसी तरह ‘द लॉ ऑफ़िसेज ऑफ़ हॉवर्ड जी स्मिथ’ ने कहा है कि वह फ़ेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर HDFC बैंक की जांच कर रही है। इसमें यह भी शामिल है कि क्या कंपनी ने झूठे और/या गुमराह करने वाले बयान जारी किए और/या निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया।

इसके अलावा,फ्रैंक आर क्रूज़ के लॉ ऑफिस ने भी कंपनी द्वारा फ़ेडरल सिक्योरिटीज कानूनों के संभावित उल्लंघन के मामले में निवेशकों की ओर से जांच की घोषणा की है।

तीनों लॉ फर्म उन निवेशकों को संपर्क करने के लिए कह रही हैं जिन्हें नुकसान हुआ है,ताकि वे संभावित दावों का आकलन कर सकें।

अमेरिका में किस वजह से शुरू हुई HDFC बैंक की जांच ?

तीनों लॉ फर्मों की इन नोटिस में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’की 27 मई को छपी एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने अपने मार्केटिंग डिपार्टमेंट के जरिए किए गए पेमेंट की इंटरनल विजिलेंस जांच की थी। लॉ फर्म के नोटिस के मुताबिक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को ज्यादा ब्याज देने के लिए ₹45 करोड़ को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया था।

फर्मों का यह भी कहना है कि रिपोर्ट छपने के बाद,27 मई,2026 को HDFC बैंक के शेयर की कीमत 1.02 डॉलर यानी 4.1% गिरकर 23.78 डॉलर प्रति शेयर पर बंद हुए। इससे निवेशकों को नुकसान हुआ।

HDFC बैंक ने किसी भी गलत काम से किया इनकार

मई में रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद,HDFC बैंक ने CNBC-TV18 को दिए एक बयान में इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया था। बैंक ने कहा था “उसके पास मज़बूत इंटरनल निगरानी,ऑडिट और कंट्रोल प्रोसेस और सिस्टम हैं। सभी मामलों को बैंक के तय नियमों के अनुसार निपटाया जाता है और किसी भी इंटरनल रिव्यू के बाद अंतिम फैसला लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या दोषी होने की धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हैं”।

इस जांच का क्या होगा असर?

तीनों लॉ फर्मों की घोषणाओं को HDFC बैंक के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई या मुकदमा नहीं माना जा सकता। अमेरिका में ऐसी जांच आम बात है,खासकर तब जब किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर की कीमत बुरी खबर के बाद तेजी से गिरती है।

शेयरहोल्डर लॉ फर्म्स अक्सर यह तय करने के लिए जांच नोटिस जारी करती हैं कि क्या निवेशकों को भ्रामक खुलासों के कारण हुए नुकसान के आरोप में सिक्योरिटी क्लास एक्शन दायर करने का कोई आधार है।

अभी इन फर्मों ने जांच की घोषणा की है और निवेशकों से जानकारी मांगी है। अभी यह एक्शन शेयरहोल्डर लॉ फर्मों की ओर से जांच से जुड़े नोटिस हैं,न कि कोई रेगुलेटरी कार्रवाई या अदालती कार्यवाही। अब देखना यह होगा कि क्या यह आगे चलकर औपचारिक सिक्योरिटीज क्लास एक्शन (शेयरधारकों के सामूहिक कानूनी मुकदमे)में बदलेगा। अभी तक तो किसी निवेशक ने मुकदमे में रुचि नहीं दिखाई है।

CNBC-TV18 ने इस पर HDFC बैंक से प्रतिक्रिया मांगी है,प्रतिक्रिया का इंतजार है। शुक्रवार को HDFC बैंक के शेयर 4.45 रुपए यानी 0.60 फीसदी गिरकर 742.80 रुपए पर बंद हुए हैं। इंट्राडे में इसमें 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। आज का इसका दिन का लो 737.25 रुपए है। पिछले वीकेंड में जून तिमाही के नतीजे आने के बाद से यह स्टॉक लगातार पांचवें दिन नीचे आया है। इस साल अब तक यह स्टॉक 25% गिर चुका है।

 

Hindustan Zinc Q1 Results: मुनाफा 145% बढ़ा, रेवेन्यू 77% की बढ़ोतरी के साथ अब तक के सबसे हाई लेवल पर

हिंदुस्तान जिंक का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 144.8 प्रतिशत बढ़कर 5469 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले मुनाफा 2234 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 13747 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में यह 7771 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में उसके कुल खर्च 6749 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 5065 करोड़ रुपये के थे। EBITDA एक साल पहले से 109 प्रतिशत बढ़कर 8074 करोड़ रुपये रहा, जो कि किसी तिमाही में दर्ज किया गया अब तक का सबसे ज्यादा EBITDA है।

जून 2026 तिमाही में हिंदुस्तान जिंक का माइन्ड मेटल प्रोडक्शन 268 KT रहा। रिफाइंड मेटल प्रोडक्शन सालाना आधार पर 4% की बढ़ोतरी के साथ 260 KT दर्ज किया गया। जिंक के प्रोडक्शन की कॉस्ट 851 डॉलर प्रति टन रही, जो कि किसी एक तिमाही में देखी गई लोएस्ट कॉस्ट है। सिल्वर प्रोडक्शन 149 टन दर्ज किया गया।

Meesho Share Price: घाटे में कमी के बावजूद बिकवाली का दबाव, शेयर 6% तक लुढ़का

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Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

Top Stock Picks : शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखने को मिल रही है। अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बना हुआ। फिलहाल सेंसेक्स 571.57 अंक या 0.75 प्रतिशत गिरकर 75,819.82 पर और निफ्टी 163.20 अंक या 0.68 प्रतिशत गिरकर 23,706.40 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 0.5% की गिरावट दर्ज देखने को मिल रही है।

ऐसे में टेक्नो फंडा नजरिए के साथ बाजार पर बात करते हुए जेएम फाइनेंशियल्स (JM Financial Services) के PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से बाजार में काफी अनसर्टेनिटी देखने को मिल रही है। क्रूड ने फिर से 100 डॉलर का लेवल हासिल कर लिया है। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में एआई डेटा सेंटर रिलेटेड पूरी थीम में अच्छी-खासी बिकवाली देखने को मिली है। ताइवान, कोरिया और यूएस जैसे मार्केट में एआई पर भारी कैपेक्स के चलते दबाव बना है। इस भारी कैपेक्स के चलते Apple जैसे शेयरों की रेवेन्यू विजिबिलिटी काफी कम नजर आ रही है। इसके चलते बाजार में काफी अनिश्चितता देखने को मिल रही है।

इस बीच अगर पश्चिम एशिया का संकट और बढ़ता है तो दुनिया के सभी बाजारों पर इसका असर देखने को मिलेगा। अपने बाजार की बात करें तो निफ्टी ने बहुत दिनों तक अपने 200 डे मूविंग एवरेज को मेंटेन करने की कोशिश की। बैंकिंग सेक्टर में भी हमे ड्रॉप देखने को मिल रहा है। निफ्टी तो ऑलरेडी 200 डे मूविंग एवरेज को क्रॉस ही नहीं कर पा रहा है। ऐसे में बाजार में थोड़ा सा अनसर्टेनिटी का माहौल है। इसको ध्यान में रखते हुए बाजार में वेट एंड वॉच की अप्रोच मेंटेन रखने की सलाह होगी। निफ्टी के 23500- 23400 के पिछले कुछ सपोर्ट बने हुए हैं। अगर ये सपोर्ट टूटते होते हैं तो और कमजोरी आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हमें थोड़ी वेट एंड वॉच की अप्रोच रखनी चाहिए। इंडेक्स में लॉन्ग और शॉर्ट दोनों ही साइड में कोई जल्दबाजी करने से बचें।

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि उनकी सबसे पहली पसंद हैं हॉस्पिटल स्टॉक्स। इस समय हॉस्पिटल इंडस्ट्री में बहुत बड़ा कंसोलिडेशन चल रहा है। बड़े हॉस्पिटल लगातार छोटे हॉस्पिटल्स को बहुत कम और रीजनेबल वैल्यूएशन पर एक्वायर कर रहे हैं। कहीं ना कहीं इन हॉस्पिटल्स की तीन क्रिटिकल चीजें इंप्रूव हो रही है। इनका एवरेज लेंथ ऑफ स्टे कम हो रहा है। इनके मिक्स हायर मार्जिन साइड में शिफ्ट हो रहे हैं । तीसरी बात यह है कि इनकी ऑक्युपैंसी रेट्स बढ़ रही है। कुल मिलाकर कहें तो आगे हॉस्पिटल सेगमेंट काफी अच्छा प्रदर्शन करेगा। यहां पर लार्ज हॉस्पिटल में अपोलो हॉस्पिटल और मैक्स हॉस्पिटल जैसे स्टॉक काफी अच्छे लग रहे हैं।

अगर मिड एंड स्मॉल सेगमेंट में देखें तो एस्टरडीएम (Aster DM) और पार्क मेडी जैसी कंपनियां काफी इंटरेस्टिंग नजर आ रही हैं। इसके अलावा फार्मा जुड़े कुछ दूसरे शेयर भी अच्छे लग रह हैं। हालांकि, जेरिक साइड पर हमें कुछ अनसर्टेनिटी नजर आ रही है। लेकिन हम अगर इस सेक्टर के स्पेशियलिटी सीडीएमओ और सीआरडीएमओ स्पेस की बात करें तो हमें लगता है यह एरिया टैरिफ से जुड़ी अनसर्टेनिटी से काफी सेफ है। इसके चलते हमें लगता है कि किसी गिरावट में नवीन फ्लोरीन, बायोकॉन और लॉरस लैब जैसे स्टॉक्स में खरीदारी की जा सकती है।

Infosys Share Price : इंफोसिस के नतीजे खराब,लेकिन डिजास्टर नहीं, अब कुछ समय एक दायरे में रह सकता है यह शेयर-अनुज सिंघल

तीसरी थीम डिफेंस स्पेस से है। इस सेक्टर पर सरकार का लगातार फोकस बना हुआ है। डिफेंस कंपनियों का ऑर्डर इनफ्लो काफी स्ट्रांग है। ये कंपनियां डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग दोनों साइड पर काफी फोकस कर रही हैं। इस बात को देखते हुए एरोस्पेस इंजीनियरिंग और डिफेंस एक ऐसा बास्केट होगा जिसमें गिरावट पर खरीदारी की जानी चाहिए।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Swiggy Share Price: स्विगी का शेयर क्रैश, कंपनी के इस ऐलान से शेयरों में बड़ी बिकवाली

Swiggy Share Price: स्विगी का शेयर 24 जुलाई को क्रैश कर गया। सुबह में शेयर कमजोर खुला। फिर बिकवाली दबाव बढ़ने पर 7 फीसदी तक क्रैश कर गया। शेयर का प्राइस अब तक के अपने सबसे निचले स्तर की तरफ बढ़ रहा है। इसकी वजह कंपनी का एक ऐलान है। स्विगी फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म है।

कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 45.5 फीसदी तय करने का प्लान

Swiggy ने 23 जुलाई की शाम स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि बोर्ड ने कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 49.5 फीसदी तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अभी 100 फीसदी तक विदेशी हिस्सेदारी की इजाजत है। इस प्रस्ताव को अब 18 अगस्त को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इस प्रस्ताव के एप्रूवल के लिए स्पेशल रिजॉल्यूशन की जरूरत पड़ेगी।

शेयर बाजारों के ग्लोबल सूचकांकों से बाहर हो सकती है स्विगी

नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटेटिव रिसर्च के अभिलाष पगाड़िया ने कहा, “इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं रह जाएगी। इससे स्विगी शेयर बाजार के ग्लोबल सूचकांकों से बाहर हो सकती है।” इससे स्विगी के शेयरों में बिकवाली दिख सकती है। इसका असर शेयर की कीमतों पर पड़ेगा।

ग्लोबल सूचकांकों से बाहर होने पर शेयरों में होगी बड़ी बिकवाली

अभी MSCI Standard Index में स्विगी का वेटेज 28 बेसिस प्वाइंट्स है। पगाड़िया का मानना है कि इस सूचकांक से स्विगी के बाहर होने से स्विगी के शेयरों में 34 करोड़ डॉलर की बिकवाली दिख सकती है। इसका मतलब है कि कंपनी के करीब 12.5 करोड़ शेयरों की बिक्री हो सकती है। FTSE Index में भी स्विगी का 24 बेसिस प्वाइंट्स का वेटेज है। इस सूचकांक से बाहर होने पर करीब 4.6 करोड़ शेयरों की बिक्री हो सकती है।

 कंपनी फर्स्ट पार्टी इनवेंट्री मॉडल पर ऑपरेट कर सकेगी

इस प्रस्ताव के लागू होने पर स्विगी फर्स्ट पार्टी इनवेंट्री मॉडल पर अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस को ऑपरेट कर सकेगी। अभी Blinkit और Zepto इस मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। अनुमान है कि इससे स्विगी का मार्जिन बढ़ सकता है। 11 बजे स्विगी का शेयर 6.11 फीसदी गिरकर 245.58 रुपये पर चल रहा था। इस साल यह शेयर 37 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट 

उधर, शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों पर लगातार पांचवें दिन दबाव देखने को मिला। निफ्टी और सेंसेक्स सुबह में कमजोर खुले। उसके बाद उनमें तेज गिरावट देखने को मिली। 11 बजे Nifty 1 फीसदी यानी 242 अंक गिरकर 23,627 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.10 फीसदी यानी 842 अंक गिरकर 75,543 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.84 फीसदी की गिरावट दिखी।