A-1 लिमिटेड बनी ईशान डाइज की प्राइमरी डीलर, 5 महीने में ₹40 करोड़ का कारोबार

लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल केमिकल सप्लाई करने वाली कंपनी A-1 लिमिटेड को ईशान डाइज एंड केमिकल्स लिमिटेड ने अपने सल्फर-बेस्ड इंडस्ट्रियल केमिकल्स का प्राइमरी ऑथराइज्ड डीलर बनाया है। कंपनी का कहना है कि इससे उसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो मजबूत होगा और इंडस्ट्रियल केमिकल बाजार में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी। फरवरी 2026 से अब तक दोनों कंपनियों के बीच करीब 40 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है।

कौन-कौन से प्रोडक्ट्स की होगी सप्लाई?

इस डील के तहत A-1 लिमिटेड अब सल्फ्यूरिक एसिड (98% और 70%), ओलियम (23% और 65%) और क्लोरो सल्फोनिक एसिड की सप्लाई करेगी। इन केमिकल्स का इस्तेमाल फर्टिलाइजर, फार्मा, डाइज, पेट्रोकेमिकल्स और वॉटर ट्रीटमेंट जैसे कई सेक्टर में होता है।

कंपनी के मुताबिक, इस साझेदारी से सल्फर-बेस्ड केमिकल्स की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही, ग्राहकों को समय पर और लगातार सप्लाई मिल सकेगी। A-1 लिमिटेड के पास 100 से ज्यादा गाड़ियों का नेटवर्क है, जिससे वह अपनी सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता को और मजबूत करेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

A-1 लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षदकुमार पटेल ने कहा कि यह नियुक्ति कंपनी के मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और भरोसेमंद सेवाओं पर ग्राहकों के विश्वास को दिखाती है। उनके मुताबिक, इससे इंडस्ट्रियल केमिकल्स कारोबार में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी। साथ ही, आने वाले समय में ग्रोथ को भी रफ्तार मिलेगी।

हाल में मिले कई बड़े ऑर्डर

हाल के महीनों में A-1 लिमिटेड को सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महाधन एग्रीटेक लिमिटेड और साईं बाबा पॉलीमर टेक्नोलॉजीज से करीब 35 करोड़ रुपये के सप्लाई ऑर्डर मिले हैं।

इसके अलावा कंपनी ने GNFC और सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया लिमिटेड के साथ 10,000 मीट्रिक टन नाइट्रिक एसिड की सप्लाई का समझौता किया है। कंपनी को 127.50 करोड़ रुपये का इंडस्ट्रियल यूरिया सप्लाई ऑर्डर भी मिला है।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भी रखा कदम

A-1 लिमिटेड ने हाल ही में A-1 सुरेजा इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% कर ली है। इसके बाद यह कंपनी उसकी सब्सिडियरी बन गई है। इसके साथ ही A-1 लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कारोबार में भी एंट्री कर ली है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की होल्डिंग कंपनी को मिल सकती है ‘डिफॉल्ट’ रेटिंग, कर्ज चुकाने में की देरी : सूत्र

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक की होल्डिंग कंपनी Jana Holdings Limited (JHL) की क्रेडिट रेटिंग घटकर ‘डिफॉल्ट’ कैटेगरी में जा सकती है। CNBC-TV18 को मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि इसकी वजह नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) की रकम तय समय पर नहीं चुका पाना है।

NCD भुगतान में हुई देरी

सूत्रों के मुताबिक, JHL ने NCD की भुगतान अवधि 30 जून 2026 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। यानी कंपनी को भुगतान के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिला है।

बताया जा रहा है कि यह फैसला डिबेंचर-होल्डर्स की सहमति से लिया गया है। इनमें प्रमुख निवेशक TPG Asia VI India Markets Pte भी शामिल है। ऐसे में इसे टेक्निकल डिफॉल्ट माना जा रहा है।

 Jana Holdings को क्यों आई दिक्कत?

सूत्रों के अनुसार, JHL को उम्मीद थी कि वह Jana Small Finance Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचकर NCD का भुगतान कर देगी। लेकिन हिस्सेदारी का समय पर मोनेटाइजेशन नहीं हो पाया, जिससे भुगतान में देरी हुई।

JHL की हिस्सेदारी पहले 44% थी, जो TVS Venu Group को आंशिक हिस्सेदारी बेचने के बाद घटकर करीब 16.95% रह गई है। सूत्रों का कहना है कि अगर रीफाइनेंसिंग की जरूरत पड़ी, तो कंपनी अपनी बची हुई हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा भी बेच सकती है।

Jana Small Finance Bank पर कितना असर?

सूत्रों के मुताबिक, इस घटनाक्रम का Jana Small Finance Bank के कारोबार पर सीधा असर सीमित रहने की उम्मीद है। बैंक को जून 2022 के बाद से JHL की ओर से कोई नई पूंजी नहीं मिली है। फंडिंग के मामले में बैंक स्वतंत्र रूप से काम करता है।

इसके अलावा JHL और बैंक के बोर्ड में कोई साझा प्रतिनिधित्व नहीं है। दोनों के कर्ज भी आपस में जुड़े नहीं हैं। इसलिए होल्डिंग कंपनी की रेटिंग में गिरावट का सीधा वित्तीय असर बैंक पर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।

हालांकि, अगर JHL आगे अपनी बची हुई हिस्सेदारी भी बेचती है, तो इससे Jana Small Finance Bank के शेयर पर शॉर्ट टर्म में दबाव बन सकता है। फिलहाल इस मामले पर Jana Holdings और Jana Small Finance Bank की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RFBL Flexi Pack को मिला ₹20 करोड़ का ऑर्डर, 4 महीने में करेगी सप्लाई

पैकेजिंग कंपनी RFBL Flexi Pack को घरेलू बाजार से 20 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। कंपनी 3B Films को ट्रांसपेरेंट और मेटलाइज्ड फिल्म्स की सप्लाई करेगी। इस ऑर्डर को अगले चार महीनों में पूरा किया जाएगा।

कंपनी ने साफ किया कि यह किसी रिलेटेड पार्टी (Related Party) के साथ हुआ सौदा नहीं है। इस ऑर्डर में कंपनी के प्रमोटर या प्रमोटर ग्रुप की भी कोई हिस्सेदारी नहीं है।

RFBL Flexi Pack को मिलेगी मजबूती

कंपनी का कहना है कि इस ऑर्डर से फ्लेक्सिबल पैकेजिंग कारोबार में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। ट्रांसपेरेंट और मेटलाइज्ड फिल्म्स का इस्तेमाल फूड, FMCG, फार्मा और इंडस्ट्रियल पैकेजिंग में बड़े पैमाने पर होता है।

ये फिल्म्स पैकेजिंग को ज्यादा मजबूत बनाती हैं। साथ ही उत्पाद को सुरक्षित रखने और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी मदद करती हैं। कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर अलग-अलग इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने की उसकी रणनीति को और मजबूत करेगा।

UAE में भी बढ़ाएगी कारोबार

हाल ही में RFBL Flexi ने UAE में अपनी सब्सिडियरी बनाने का फैसला किया है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाना और विदेशी बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करना है।

मजबूत घरेलू कारोबार, बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और विदेशों में विस्तार की योजना के साथ RFBL Flexi Pack फ्लेक्सिबल पैकेजिंग इंडस्ट्री में अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रही है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Multi Cap vs Flexi Cap: मल्टीकैप या फ्लेक्सी कैप… जानिए कौन-सा म्यूचुअल फंड आपके लिए रहेगा बेहतर?

Multi Cap vs Flexi Cap: जब हम अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने की सोचते हैं, तो चाहते हैं कि पैसा सुरक्षित रहे और अच्छा रिटर्न भी मिले। ऐसे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड काफी लोकप्रिय विकल्प है। लेकिन यहां भी अक्सर लोग मल्टी-कैप (Multi Cap) और फ्लेक्सी-कैप (Flexi Cap) फंड को लेकर उलझ जाते हैं।

नाम सुनने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन निवेश का तरीका और रणनीति अलग है। मनीफ्रंट के को-फाउंडर और CEO मोहित गांग ने आसान शब्दों में समझाया कि दोनों फंड कैसे काम करते हैं और किस तरह के निवेशक के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर हो सकता है।

मल्टी-कैप फंड कैसे काम करता है?

मल्टी-कैप फंड को आप ऐसे परिवार की तरह समझ सकते हैं, जहां हर खर्च पहले से तय होता है। SEBI के नियमों के मुताबिक, इस फंड को अपनी कुल रकम का कम से कम 75% शेयर बाजार में निवेश करना होता है।

इसके अलावा फंड मैनेजर को 25% लार्ज-कैप, 25% मिड-कैप और 25% स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करना ही पड़ता है। बाकी 25% रकम वह अपनी रणनीति के हिसाब से कहीं भी लगा सकता है।

मोहित गांग के मुताबिक, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी सीमा भी। फायदा यह है कि आपका पैसा हर तरह की कंपनियों में बंटा रहता है। लेकिन अगर बाजार में गिरावट आए और स्मॉल-कैप शेयर लगातार कमजोर चल रहे हों, तब भी फंड मैनेजर वहां से पूरा पैसा नहीं निकाल सकता। उसे नियमों के मुताबिक निवेश बनाए रखना पड़ता है। इससे जोखिम बढ़ सकता है।

फ्लेक्सी-कैप फंड में क्या खास है?

फ्लेक्सी-कैप फंड में फंड मैनेजर के पास ज्यादा आजादी होती है। इसे सिर्फ अपनी कुल रकम का कम से कम 65% शेयरों में निवेश करना होता है। इसके बाद वह बाजार की स्थिति के हिसाब से निवेश का फैसला ले सकता है।

अगर उसे लगता है कि आने वाले समय में स्मॉल-कैप कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी, तो वह वहां ज्यादा पैसा लगा सकता है। अगर बाजार में जोखिम बढ़ता दिखे, तो वह निवेश का बड़ा हिस्सा लार्ज-कैप कंपनियों में शिफ्ट कर सकता है। जरूरत पड़ने पर वह स्मॉल-कैप में निवेश शून्य भी कर सकता है।

मोहित गांग का कहना है कि फ्लेक्सी-कैप की सबसे बड़ी ताकत यही लचीलापन है। फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से रणनीति बदल सकता है। इससे गिरावट के दौर में जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

आपके लिए कौन-सा फंड सही रहेगा?

यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। मोहित गांग के मुताबिक, अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा परेशान नहीं होते, तो मल्टी-कैप फंड आपके लिए बेहतर हो सकता है। इसमें मिड और स्मॉल-कैप का हिस्सा तय होने की वजह से लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसमें जोखिम भी ज्यादा होता है।

अगर आप चाहते हैं कि बाजार की स्थिति के हिसाब से आपका पोर्टफोलियो बदलता रहे और जोखिम कुछ कम रहे, तो फ्लेक्सी-कैप फंड बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से निवेश का अनुपात बदल सकता है।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: 1 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 9 स्टॉक्स, दिख सकता है तगड़ा एक्शन

Stocks to Watch: बुधवार, 1 जुलाई के कारोबार में कई शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कहीं नए प्रोडक्ट और बड़ी डील का असर दिख सकता है, तो कहीं टैक्स विवाद और जून महीने के बिक्री आंकड़े निवेशकों की नजर में रहेंगे। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

KPIT Technologies

टेक्नोलॉजी कंपनी KPIT Technologies ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद से कमजोर रह सकती है। कंपनी को रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 1% की गिरावट का अनुमान है। वहीं EBITDA और नेट मार्जिन भी पिछली तिमाही के मुकाबले घट सकते हैं। हालांकि, कंपनी को दूसरी छमाही में कारोबार में सुधार और चौथी तिमाही में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

L&T Technology Services

इंजीनियरिंग और टेक कंपनी L&T Technology Services ने AI बेस्ड प्लेटफॉर्म Ainfonix 4.0 लॉन्च किया है। इसकी मदद से इंजीनियरिंग डॉक्युमेंट्स और तकनीकी रिकॉर्ड को डिजिटल डेटा में बदला जा सकेगा।

HDFC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life Insurance को GST मामले में झटका लगा है। थाणे के कमिश्नर (अपील) ने ब्याज और जुर्माने समेत 132.7 करोड़ रुपये की GST डिमांड को बरकरार रखा है।

Kotak Mahindra Bank

प्राइवेट सेक्टर के Kotak Mahindra Bank ने Deutsche Bank के साथ डील की है। कोटक इसके तहत बैंक के भारत में रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार को करीब 281.7 करोड़ रुपये में खरीदेगा।

Paras Defence

डिफेंस कंपनी Paras Defence and Space Technologies ने Tandem Defense LLC के साथ Guardian-1 Interceptor तकनीक के लिए IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है।

Prestige Estates Projects

रियल एस्टेट कंपनी Prestige Estates Projects ने मुंबई के मुलुंड में Prestige Forest Hills प्रोजेक्ट का दूसरा चरण लॉन्च किया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 2,200 करोड़ रुपये है।

Auto Stocks

ऑटो सेक्टर की कंपनियां जून महीने के बिक्री आंकड़े जारी करेंगी। अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26% और दोपहिया वाहनों की बिक्री में 18% की सालाना बढ़ोतरी हो सकती है।

Hexaware Technologies

आईटी कंपनी Hexaware Technologies ने Tensai for Reasoning Ops नाम का नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसका मकसद एंटरप्राइज आईटी ऑपरेशंस में एजेंटिक AI का इस्तेमाल बढ़ाना है।

Zaggle Prepaid Ocean Services

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid Ocean Services ने APAC Financial Services के साथ 5 साल का समझौता किया है। इसके तहत कंपनी अपने एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म की सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

 

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

HDFC म्यूचुअल फंड के नवनीत मुनोत ने कहा-भारत में अब लोग सेविंग्स की जगह निवेश करने लगे हैं

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड के सीईओ नवनती मुनोत ने इंडिया में निवेश की बदलती तस्वीर के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि देश में म्यूचुअल फंड स्टोरी अब सिर्फ मार्केट रिटर्न तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। इसमें परिवार फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए लंबी अवधि का निवेश कर रहे हैं। मनीकंट्रोल म्यूचुअल फंड समिट 2026 में मनीकंट्रोल के मैनेजिंग डायरेक्टर नलिन मेहता से बातचीत में उन्होंने इनवेस्टमेंट को लेकर कई अहम बातें बताईं।

भारत में अब लोग सेविंग्स की जगह निवेश कर रहे हैं

मुनोत ने कहा कि भारत अब ‘सेविंग्स करने वाले लोगों की जगह निवेश करने वाला देश बन रहा है।’ यह सोशल और सांस्कृतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “यह पहली पीढ़ी है जो अनुशासित तरीके से निवेश कर वित्तीय आजादी हासिल करने की कोशिश कर रही है। मैं इसे इंडिया का 401(K) मूवमेंट कहता हूं।” उनका संकेत अमेरिकी रिटायरमेंट सेविंग्स सिस्टम से था। इसमें इनवेस्टर्स मार्केट लिंक्ड कंट्रिब्यूशन के जरिए लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट वेल्थ क्रिएट करते हैं।

लोग अनुशासित निवेश से खुद की रिटायरमेंट सिक्योरिटी बना रहे 

उन्होंने कहा कि इस तरह (अमेरिका जैसा) के बदलाव की शुरुआत इंडिया में हो रही है। बड़ी संख्या में लोग यह सोचने लगे हैं कि वे नियमित रूप से निवेश के जरिए अपनी खुद की रिटायरमेंट सिक्योरिटी बना सकते है। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब भारत में म्यूचुअल फंड आम लोगों के सेविंग्स प्लान का प्रमुख हिस्सा बन गया है। इसमें सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और व्यापक वित्तीय जागरूकता का बड़ा हाथ है।

यह भी पढ़ें: Flexicap या Multicap, किस फंड में निवेश से आपको होगा ज्यादा फायदा?

म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन से बढ़ा है लोगों का भरोसा

मुनोत ने कहा कि इंडस्ट्री (म्यूचुअल फंड) की ग्रोथ सिर्फ डिस्ट्रिब्यूशन की जगह परफॉर्मेंस और ट्रस्ट पर आधारित है। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री ने कड़ी मेहनत की है। मेरा मानना है कि यह ट्रैक रिकॉर्ड है, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम हुआ है। इनवेस्टर्स की संख्या 2 करोड़ से 6 करोड़ तक पहुंच गया है। मेरा मानना है कि इस ट्रैक रिकॉर्ड की वजह से बड़ा फर्क आया है।” उन्होंने कहा कि ग्रोथ की संभावनाएं काफी ज्यादा है। भारत में परिवारों की 14 लाख करोड़ डॉलर की बैलेंसशीट में से सिर्फ 6 फीसदी का निवेश अभी शेयरों में है।

Multibagger Stocks: रामदेव अग्रवाल ने बताया अच्छे स्टॉक खरीदने का फॉर्मूला, इन 10 बातों से होगी पहचान

Multibagger Stocks: शेयर बाजार में सफल निवेश सिर्फ शेयर की कीमत या बाजार की चाल देखने से नहीं होता। अनुभवी निवेशकों का मानना है कि किसी कंपनी की असली ताकत उसके फाइनेंशियल नतीजों में छिपी होती है।

Motilal Oswal Group के चेयरमैन और दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने The Alpha Bets में ऐसे 10 फाइनेंशियल इंडिकेटर के बारे में बताया है, जिन्हें देखकर निवेशक किसी कंपनी की मजबूती का बेहतर आकलन कर सकते हैं। इससे मल्टीबैगर स्टॉक्स मिलने की संभावना भी बेहतर हो जाती है।

1. मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी

सिर्फ बिक्री बढ़ना काफी नहीं है। कंपनी का मुनाफा भी लगातार बढ़ना चाहिए। इससे पता चलता है कि कंपनी खर्च पर नियंत्रण रखते हुए बेहतर कमाई कर रही है।

2. कम कर्ज

कर्ज से कारोबार बढ़ सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज जोखिम बढ़ा देता है। कम कर्ज वाली कंपनियां मुश्किल समय में भी बेहतर स्थिति में रहती हैं।

3. मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो

ऑपरेटिंग कैश फ्लो बताता है कि कंपनी अपने रोजमर्रा के कारोबार से कितना नकद कमा रही है। इसे मुनाफे के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें हेरफेर करना आसान नहीं होता।

4. लगातार बढ़ता रेवेन्यू

रेवेन्यू यानी कंपनी की बिक्री से होने वाली कमाई। अगर किसी कंपनी का रेवेन्यू कई साल तक लगातार बढ़ रहा है, तो यह अच्छी बात मानी जाती है। इससे पता चलता है कि उसके प्रोडक्ट या सर्विस की मांग बनी हुई है।

5. ऊंचा ROE

रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) बताता है कि कंपनी शेयरधारकों के पैसे का कितना बेहतर इस्तेमाल कर रही है। ऊंचा ROE मजबूत मैनेजमेंट और बेहतर बिजनेस का संकेत माना जाता है।

6. बढ़ता प्रॉफिट मार्जिन

मार्जिन बताता है कि हर रुपये की बिक्री में से कंपनी के पास कितना मुनाफा बच रहा है। अगर मार्जिन बढ़ रहा है, तो इसका मतलब कंपनी पहले से ज्यादा कुशल तरीके से काम कर रही है।

7. मजबूत फ्री कैश फ्लो

फ्री कैश फ्लो वह रकम होती है, जो सभी खर्च और निवेश के बाद कंपनी के पास बचती है। इससे कंपनी विस्तार, डिविडेंड, कर्ज चुकाने या नए निवेश जैसे फैसले आसानी से ले सकती है।

8. प्रमोटर्स की मजबूत हिस्सेदारी

अगर प्रमोटर्स लंबे समय तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हैं, तो यह कंपनी के भविष्य पर उनके भरोसे का संकेत माना जाता है। हालांकि, अगर उनकी हिस्सेदारी लगातार घट रही हो, तो निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।

9. पूंजी का सही इस्तेमाल

अच्छी कंपनी सिर्फ मुनाफा नहीं कमाती, बल्कि उस मुनाफे का सही इस्तेमाल भी करती है। बेहतर मैनेजमेंट पूंजी को सही जगह निवेश करता है, कर्ज संभालता है और जरूरत पड़ने पर शेयरधारकों को भी फायदा पहुंचाता है।

10. लगातार बढ़ती कमाई

बेहतरीन कंपनियां सिर्फ अच्छे समय में नहीं, बल्कि मुश्किल दौर में भी कमाई बढ़ाने की क्षमता रखती हैं। लगातार बढ़ती आय मजबूत बिजनेस मॉडल और प्रतिस्पर्धी बढ़त का संकेत देती है।

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Gold-Silver Price Today: चांदी ने लगाई ₹6000 की छलांग, सोना हुआ सस्ता; जानिए आज का रेट

Gold-Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजार में मांग कमजोर रहने की वजह से 24 कैरेट सोना 800 रुपये सस्ता होकर 1,45,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) पर आ गया। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोमवार को सोने का भाव 1,46,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

चांदी में जोरदार वापसी

वहीं, चांदी ने लगातार चार कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद जोरदार वापसी की। इसकी कीमत 6,000 रुपये बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।

सोना क्यों टूटा, चांदी क्यों चमकी?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने पर दबाव बना रहा। वहीं, हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चांदी में निचले स्तर पर खरीदारी की, जिससे कीमतों में तेज उछाल आया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,021.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर में करीब 1% की तेजी रही और यह 58.81 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

एक्सपर्ट की राय

LKP Securities के वीपी (रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने गोल्ड में निचले स्तर पर खरीदारी की संभावना जताई है।

जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, अब बाजार की नजर अमेरिका के आर्थिक और रोजगार के आंकड़ों पर रहेगी। इन आंकड़ों से सोने और चांदी की कीमतों की अगली दिशा तय हो सकती है।

Gold Silver Buy or Sell: सोने-चांदी में रिकॉर्ड गिरावट, क्या यह खरीदारी का सबसे सही मौका है या फटाफट बेचने में ही भलाई? एक्सपर्ट्स से समझें

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PPF, SCSS और NSC पर नहीं बढ़ा ब्याज, सरकार ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए जारी कीं नई दरें; देखें पूरी लिस्ट

Small Savings Schemes Interest Rates: अगर आप भी अपनी कमाई को पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में निवेश करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी खबर है। सरकार ने मंगलवार, 30 जून 2026 को लगातार नौवीं तिमाही के लिए पीपीएफ, एनएससी, और केवीपी जैसी तमाम छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही (1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक) के लिए ब्याज दरें बिल्कुल वैसी ही रहेंगी जैसी पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में थीं। बाजार को इस बार दरों में संशोधन की उम्मीद थी, लेकिन सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों को फिलहाल पुरानी दरों से ही संतोष करना होगा।

अब किस स्कीम पर कितना मिल रहा है ब्याज?

जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए सभी चर्चित स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की वर्तमान ब्याज दरें इस प्रकार है:

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में आखिरी बार बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में किया गया था

आखिरी बार कब बदली थीं ब्याज दरें?

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में आखिरी बार बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में किया गया था। इसके बाद अप्रैल 2024 में सरकार ने केवल दो स्कीमों में बढ़ोतरी की थी 3-वर्षीय टाइम डिपॉजिट की दर 7% से बढ़ाकर 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) की दर 8% से बढ़ाकर 8.2% की गई थी। तब से लेकर अब तक यानी लगातार 9 तिमाहियों से बाकी सभी योजनाओं की ब्याज दरें जस की तस बनी हुई हैं।

कैसे तय होती हैं इन योजनाओं की ब्याज दरें?

क्या आप जानते हैं कि सरकार इन स्कीम्स का ब्याज कैसे तय करती है? दरअसल, स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें मार्केट यील्ड यानी बाजार के रिटर्न से जुड़ी होती हैं। वित्त मंत्रालय इसके लिए एक खास फॉर्मूले का पालन करता है, जो समान मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G-Secs) के रिटर्न पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, अगर 5 साल के सरकारी बॉन्ड का रिटर्न बढ़ता या घटता है, तो उसी हिसाब से 5 साल की पोस्ट ऑफिस एफडी की दरें भी तय की जाती हैं।

वैसे भले ही इस तिमाही ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी न हुई हो, लेकिन बैंकों की आम एफडी की तुलना में आज भी सुकन्या समृद्धि (8.2%), सीनियर सिटीजन स्कीम (8.2%) और एनएससी (7.7%) जैसी सरकारी योजनाएं पूरी सुरक्षा के साथ बेहतरीन रिटर्न दे रही हैं।

Flexicap या Multicap, किस फंड में निवेश से आपको होगा ज्यादा फायदा?

क्या आप लंबी अवधि के लिए शेयरों पर दांव लगाना चाहते हैं? अगर हां तो यह समझ लेना जरूरी है कि मार्केट में किसी एक सेगमेंट का प्रदर्शन हमेशा अच्छा नहीं रहता है। कभी लार्जकैप शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो कभी मिडकैप या स्मॉलकैप का प्रदर्शन बेहतर रहता है। ऐसे में सवाल है कि आपको कैसे पता चलेगा कि आगे किस तरह के शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहने वाला है? आपके लिए इस समस्या का समाधान फ्लेक्सी-कैप और मल्टीकैप फंड्स हैं।

फ्लेक्सी-कैप फंड लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश करता है। खास बात यह है कि इस फंड पर इनमें से किसी एक कैटेगरी में मैक्सिमम या मिनिमम निवेश की शर्त नहीं होती है। जब तक शेयरों में फंड का कुल निवेश कम से कम 65 फीसदी तक बना रहता है तब तक फंड मैनेजर को ऐलोकेशन को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अगर फंड मैनेजर को लगता है कि अभी समय लार्जकैप शेयरों का है तो वह इन शेयरों में निवेश बढ़ा सकता है। इसी तरह अगर बाद में उसे मिडकैप या स्मॉलकैप शेयर अट्रैक्टिव लगते हैं तो वह इनमें निवेश बढ़ा सकता है। इसका मतलब है कि बाजार की स्थितियों के मुताबिक इस फंड का ऐलोकेशन बदलता रहता है।

मल्टीकैप फंड के लिए नियम थोड़े सख्त हैं। उसे कम से कम 75 फीसदी निवेश शेयरों में करना जरूरी है। इसमें से लार्जकैप में 25 फीसदी, मिडकैप में 25 फीसदी और स्माॉल कैप में 25 फीसदी निवेश होना चाहिए। इस ऐलोकेशन का पालन हर समय करना जरूरी है। इसका मतलब है कि बाजार में चाहे जैसी भी स्थिति हो, मल्टीकैप फंड के मैनेजर को तीनों तरह के शेयरों में एकसमान निवेश बनाए रखना पड़ता है।

इस स्ट्रेटेजी का फायदा यह है कि तीनों तरह के शेयरों में इस फंड का ऐलोकेशन बना रहता है। बाकी 25 फीसदी निवेश को लेकर फंड मैनेजर को आजादी होती है। डायवर्सिफिकेशन के लिहाज से मल्टीकैप फंड सही है। इसकी वजह यह है कि इसके फंड मैनेजर को हर समय तीनों तरह के शेयरों में एक समान निवेश बनाए रखना होता है।

अगर रिटर्न की बात की जाए तो लंबी अवधि में मल्टीकैप फंड्स का रिटर्न फ्लेक्सीकैप फंड के मुकाबले ज्यादा रहता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से दोनों फंड्स सही हैं। जो इनवेस्टर्स डायवर्सिफिकेशन चाहते हैं उनके लिए मल्टीकैप फंड सही है। अगर कोई इनवेस्टर्स बाजार की स्थितियों के हिसाब से निवेश चाहता है तो उसके लिए फ्लेक्सीकैप फंड सही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों फंड की फिलोसॉफी अलग-अलग है।