Sensex में 443 अंकों की गिरावट, Nifty लाल बंद, फिर भी इस कारण ₹1.83 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में कच्चा तेल उबल पड़ा। इसकी उबाल में आज घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) समेत दो और दिग्गज प्राइवेट बैंकों की गिरावट पर सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24150 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रौनक दिखी और मिडकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक बढ़त आई तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी आई।

सेक्टरवाइज आज प्राइवेट बैंकों ने मार्केट पर तगड़ा दबाव बनाया। सेंसेक्स के टॉप 4 लूजर में मारुति को छोड़ बाकी तीन प्राइवेट सेक्टर के बैंक हैं तो इसका निफ्टी इंडेक्स 2% से अधिक कमजोर हुआ है। हालांकि मार्केट को इस गिरावट से उबारने के लिए सरकारी बैंकों और फार्मा सेक्टर ने काफी कोशिश की। निफ्टी पीएसयू बैंक आज ढाई फीसदी से अधिक तो निफ्टी फार्मा करीब डेढ़ फीसदी मजबूत हुआ है। इस मिले-जुले माहौल में ओवरऑल आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक की तेजी आई है।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आज सेंसेक्स (Sensex) 442.93 प्वाइंट्स यानी 0.57% की कमजोरी के साथ 77,708.52 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 95.80 प्वाइंट्स यानी 0.39% की गिरावट के साथ 24,238.50 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 783.16 प्वाइंट्स गिरकर 77,368.29 और निफ्टी 198.45 प्वाइंट्स फिसलकर 24,135.8 तक आ गया था।

₹1.83 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 17 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,80,82,764.50 करोड़ था। आज यानी 20 जुलाई 2026 को यह बढ़कर ₹4,82,66,717.85 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹1,83,953.35 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 19 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें से 19 आज ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज ट्रेंट, पावरग्रिड और एनटीपीसी में रही। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट आज एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और मारुति में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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124 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4514 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2226 शेयर आज मजबूत हुए तो 2039 में गिरावट रही जबकि 249 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 124 शेयर एक साल के हाई और 107 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 13 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 15 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: 10 साल नहीं, 20 साल तक करें SIP… फर्क देखकर रह जाएंगे हैरान; समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: हर महीने ₹1,000, ₹5,000 या ₹10,000 की SIP करना आसान लगता है। मुश्किल तब होती है, जब उसे लंबे समय तक जारी रखना पड़ता है। कई लोग 8-10 साल निवेश करने के बाद सोचते हैं कि अब काफी पैसा बन गया होगा। लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू होता है।

दरअसल, SIP में सिर्फ आपका पैसा काम नहीं करता। समय भी आपके लिए कमाई करता है। यही वजह है कि 20 साल की SIP का नतीजा, 10 साल की SIP से सिर्फ दोगुना नहीं होता। फर्क कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

12% रिटर्न मिले तो क्या होगा?

नीचे दिए गए आंकड़े इस आधार पर हैं कि आपने हर महीने तय रकम की SIP की और पूरे समय औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला।

हर महीने SIP10 साल बाद फंड20 साल बाद फंड
₹1,000₹2.30 लाख₹9.99 लाख
₹5,000₹11.50 लाख₹49.95 लाख
₹10,000₹23.00 लाख₹99.90 लाख

नोट : ये रकम 12% रिटर्न पर अनुमानित हैं। वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

10 साल में पैसा चार गुना?

पहली नजर में लगता है कि 20 साल, 10 साल से सिर्फ दोगुना है। इसलिए पैसा भी दोगुना होना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होता। मान लीजिए आपने हर महीने ₹10,000 की SIP शुरू की। 10 साल में आपका कुल निवेश होगा ₹12 लाख। फंड बनेगा करीब ₹23 लाख।

अगर आप यही SIP 10 साल और जारी रखते हैं, तो कुल निवेश ₹24 लाख होगा। लेकिन फंड पहुंच जाएगा करीब ₹1 करोड़। यानी आपने निवेश तो सिर्फ ₹12 लाख और बढ़ाया, लेकिन फंड में करीब ₹77 लाख की बढ़ोतरी हो गई। यही कंपाउंडिंग का कमाल है।

आम के पेड़ से समझिए हिसाब

मान लीजिए आपने अपने घर के आंगन में आम का पौधा लगाया। पहले कुछ साल वह सिर्फ बढ़ता है। फल बहुत कम देता है। कई बार लगता है कि मेहनत बेकार गई।

लेकिन जब पेड़ बड़ा हो जाता है, तो हर मौसम में भरपूर आम देता है। तब समझ आता है कि असली फायदा इंतजार करने वालों को मिला। SIP भी बिल्कुल ऐसी ही है। शुरुआती साल तैयारी के होते हैं। बाद के साल कमाई के।

जल्दी SIP बंद करना गलती

बहुत से लोग 8-10 साल बाद घर, कार या दूसरी जरूरत के लिए SIP बंद कर देते हैं। उन्हें लगता है कि अच्छा-खासा पैसा मिल गया। लेकिन ऐसा करके वे कंपाउंडिंग के सबसे ताकतवर दौर से बाहर निकल जाते हैं।

आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि कंपाउंडिंग शुरुआत में धीमी दिखती है। लेकिन समय के साथ उसकी रफ्तार तेजी से बढ़ती है।

अगर ₹5,000 की SIP करें तो?

₹5,000 महीने की SIP में 10 साल बाद करीब ₹11.50 लाख का फंड बन सकता है।

अगर यही निवेश 20 साल तक जारी रखें, तो फंड करीब ₹49.95 लाख तक पहुंच सकता है। यानी सिर्फ समय बढ़ाने से फंड में करीब ₹38 लाख का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है।

छोटी SIP से भी बड़ा फंड

कई लोग सोचते हैं कि ₹1,000 या ₹2,000 की SIP से क्या होगा।

लेकिन ₹1,000 महीने की SIP भी 20 साल में करीब ₹10 लाख तक पहुंच सकती है, अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिले। यह रकम बच्चों की पढ़ाई, बाइक, कार की डाउन पेमेंट या किसी दूसरे बड़े लक्ष्य में अच्छी मदद कर सकती है।

निवेशकों के लिए क्या सबक है

SIP में सबसे बड़ी ताकत रकम नहीं, बल्कि समय होता है। अगर आप जल्दी शुरुआत करते हैं और बीच में निवेश नहीं रोकते, तो कंपाउंडिंग धीरे-धीरे आपके हक में काम करने लगती है।

इसलिए अगर आपकी SIP चल रही है और कोई बड़ी मजबूरी नहीं है, तो उसे 10 साल पर रोकने की बजाय 20 साल या उससे भी ज्यादा समय तक जारी रखने पर विचार करें। कई बार अतिरिक्त 10 साल ही आपके फंड को लाखों से करोड़ तक पहुंचाने का रास्ता बना देते हैं।

Market Correction vs SIP: मार्केट क्रैश का इंतजार पड़ सकता है भारी! जानें क्यों एक्सपर्ट्स दे रहे हैं हर महीने SIP की सलाह

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

UltraTech Cement Q1 Results: मुनाफा 17% बढ़ा, रेवेन्यू रहा 16% ज्यादा; शेयर 2% उछला

आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत बढ़ गया। आंकड़ा 2599.28 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले यह 2225.90 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडटेड रेवेन्यू 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 24648.20 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में यह 21275.45 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि जून 2026 तिमाही में कुल खर्च बढ़कर 21286.19 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 18405.19 करोड़ रुपये के थे। जून 2026 के आखिर तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 59.33 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

UltraTech Cement का मार्केट कैप 3.51 लाख करोड़ रुपये

20 जुलाई को अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में तेजी है। दिन में BSE पर कीमत पिछले बंद भाव से 2 प्रतिशत चढ़कर 12000 रुपये के हाई तक गई। कंपनी का मार्केट कैप 3.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 13,104 रुपये है। एडजस्टेड लो 10,329 रुपये है।

Tips Music Share Price: बंपर खरीद से 11% तक भागा शेयर, बायबैक की तैयारी में कंपनी; 22 जुलाई को लग सकती है मोहर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Axis, HDFC और Kotak Bank; Q1 रिजल्ट के बाद शेयर धड़ाम, अब ट्रेडिंग के लिए चार्ट पर मार्क करें ये लेवल्स

Banking Stocks: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की तेज होती आंच में कच्चा तेल उबल पड़ा और प्रति बैरल यह $90 के पार पहुंच गया। इसके चलते घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) धड़ाम हो गए। इन पर प्राइवेट सेक्टर के हैवीवेट बैंकिंग स्टॉक्स एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank) और कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने काफी दबाव डाला और इनके शेयर 5.5% तक फिसल गए। इन बैंकों के मार्जिन पर जून तिमाही में दबाव दिखा था और अब एनालिस्ट्स को इस तिमाही भी दबाव के आसार हैं।

जेफरीज के एनालिस्ट्स प्रखर शर्मा और विनायक अग्रवाल के मुताबिक कॉर्पोरेट लोन की हिस्सेदारी बढ़ने और हाल ही में होलसेल प्राइसिंग में तेजी पर बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर असर पड़ा और अब सितंबर तिमाही में मार्जिन पर दबाव बने रहने के आसार हैं। अब जून तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद इन तीन स्टॉक्स की ट्रेडिंग कैसे करनी चाहिए, इसे लेकर बोनांजा के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट विराट जागड़ ने कुछ टेक्निकल लेवल्स सुझाएं है और चार्ट पर रेजिस्टेंस-सपोर्ट मार्क किया है।

Kotak Mahindra Bank

कोटक महिंद्रा बैंक एक बड़े सिमेट्रिकल ट्राईएंगल पैटर्न के अंदर ट्रेड कर रहा है, जो किसी बड़ी हलचल से पहले कंसोलिडेशन का संकेत है। हाल ही में इसे ₹390–₹397 के आस-पास ऊपरी ट्रेंडलाइन के पास रेसिस्टेंस झेलना पड़ा और प्रॉफिट बुकिंग दिखी तो नीचे की तरफ ₹370–₹375 के आस-पास निचली ट्रेंडलाइन से जरूरी सपोर्ट मिल रहा है। RSI न्यूट्रल 45 लेवल के आस-पास बना हुआ है, जिससे इसमें किसी भी तरफ मजबूत मोमेंटम नहीं होने का संकेत मिल रहा है। अगर यह शेयर ₹397 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह ₹420–435 की तरफ बढ़ सकता है। दूसरी तरफ अगर यह ₹370 के नीचे गिरता है, तो इसमें गिरावट बढ़ सकती है और अगला सपोर्ट ₹350 के आस-पास हो सकता है।

Axis Bank

₹1,300–₹1,320 के अहम रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिके रहने में नाकामी के बाद एक्सिस बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। यह मुनाफावसूली का संकेत है और अभी भी यह अपने मीडियम-टर्म ट्रेंडलाइन सपोर्ट यानी ₹1,250–₹1,260 के आस-पास बना हुआ है। अगर यह इस जोन के नीचे जाता है, तो यह ₹1,220 और ₹1,180 की तरफ फिसल सकता है। RSI के 50 के से नीचे आने से मोमेंटम में कमजोरी दिख रही है और शेयर शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे है। ऊपर की तरफ शेयर के लिए ₹1,305 और ₹1,320 पर रेजिस्टेंस है। अगर यह ₹1,320 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो नई खरीदारी शुरू हो सकती है और ₹1,380–1,400 तक जाने का रास्ता खुल सकता है।

HDFC Bank

₹810–815 के रेजिस्टेंस जोन के पास रिजेक्शन झेलने के बाद एचडीएफसी बैंक शॉर्ट-टर्म सेलिंग प्रेशर में है। तेज गिरावट के साथ एक बेयरेश कैंडल बनी। फिलहाल यह शेयर अपने अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो कमजोरी का संकेत है, तो ₹745–750 के पास लॉन्ग-टर्म ट्रेंडलाइन एक अहम सपोर्ट का काम कर रही है। RSI भी ओवरबॉट जोन से नीचे आ गया है जो बुलिश मोमेंटम कम होने का संकेत दे रहा है। जब तक यह स्टॉक ₹815 के नीते है, इसके ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित है। नीचे की तरफ बात करें तो इसे ₹775 और फिर ₹750 पर सपोर्ट दिख रहा है तो ऊपर की तरफ ₹815 और फिर ₹850 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है। अगर यह ₹815 के ऊपर लगातार बना रहता है तो इसमें बुलिश मोमेंटम फिर से शुरू हो सकता है और शेयर ₹850–870 की तरफ बढ़ सकता है।

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मार्केट कर रहा नए बुल रन की तैयारी! दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा की बड़ी भविष्यवाणी, जानें कब तक आएगी तेजी

Shankar Sharma Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो दशकों में निवेशकों ने जिस तरह छप्परफाड़ कमाई की है, अब उन्हें अपनी उम्मीदों को थोड़ा कम करने की जरूरत है। ऐसा मानना है दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का। उन्होंने ये भी कहा कि, भारत में अगला बड़ा और मजबूत बुल मार्केट आने में अभी कम से कम एक से दो साल का वक्त लग सकता है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि अगला बुल रन पिछले रिकॉर्ड्स के मुकाबले काफी धीमी रफ्तार वाला होगा और इससे मिलने वाला रिटर्न भी काफी कम रहेगा।

मनीकंट्रोल की सीनियर कॉरेस्पोंडेंट जोया स्प्रिंगवाला को दिए एक इंटरव्यू में शंकर शर्मा ने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार का आकार अब इतना बड़ा हो चुका है कि पहले जैसी तूफानी रफ्तार को बरकरार रखना नामुमकिन है। आइए जानते हैं शंकर शर्मा ने मार्केट को लेकर और क्या-क्या कहा।

अब केवल 8-10% रिटर्न की ही उम्मीद रखें निवेशक

शंकर शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि आने वाले समय में निवेशकों को अपने रिटर्न के नजरिए को बदलना होगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले एक-दो सालों में हमें बाजार में एक ठोस बुल रैली देखने को मिलेगी। लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि लंबी अवधि के रिटर्न का स्तर अब नीचे खिसक चुका है। भारत अब उस तरह का रिटर्न नहीं देगा जो हमारी पीढ़ी ने कमाया है।’

जहां पिछले दो दशकों में भारतीय निवेशकों को औसतन 14-15% का सालाना रिटर्न मिलने की आदत हो चुकी है, वहीं शंकर शर्मा के मुताबिक अब लंबी अवधि में 8-10% का सालाना रिटर्न ही मिलने की उम्मीद करनी चाहिए।

शंकर शर्मा की ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी क्या है?

शर्मा ने बाजार के इतिहास का विश्लेषण करते हुए अपनी ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी समझाई। उनके मुताबिक, 1991 के उदारीकरण के बाद भारत ने केवल एक बार पूरी तरह से टिकाऊ और बड़ा बुल मार्केट देखा है, जो 2003 से 2007 के बीच आया था। उन्होंने हर्षद मेहता वाले दौर को मार्केट की एक स्वाभाविक रैली नहीं माना।

साल 2003-2007 के बुल रन में निफ्टी ने करीब 55% का सालाना रिटर्न दिया था। इसके मुकाबले कोरोना महामारी के बाद आए उछाल में निफ्टी ने लगभग 31% का रिटर्न दिया, जो पिछले बार से 40% कम था। उनके अनुसार, अगला बुल मार्केट इससे भी निचले स्तर पर रहेगा।

क्यों धीमी होगी बाजार की रफ्तार?

शंकर शर्मा का मानना है कि इस मंदी या कम रिटर्न का कारण वैश्विक राजनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या ब्याज दरें नहीं हैं, बल्कि इसका असली कारण भारत की ‘स्केल’ है। भारत अब 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन चुका है। इस आकार पर सिर्फ अपनी जगह बने रहने के लिए भी हर साल जीडीपी में सैकड़ों अरब डॉलर जोड़ने पड़ते हैं। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाएं बड़ी होती हैं, उनकी ग्रोथ स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है।

उन्होंने एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा, ‘आज कोई भी एचडीएफसी बैंक से 35-40% की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद नहीं करता, क्योंकि यह बहुत बड़ा हो चुका है। देशों की अर्थव्यवस्था भी ठीक इसी तरह काम करती है।’

लार्ज-कैप के मुकाबले स्मॉल-कैप पर बड़ा दांव

शंकर शर्मा का मानना है कि भविष्य में जब भी अगला बुल मार्केट आएगा, उसकी अगुवाई आज के मुख्य सूचकांकों में शामिल दिग्गज लार्ज-कैप (Blue-chip) शेयर नहीं करेंगे। मेन इंडेक्स की मैच्योर हो चुकी कंपनियों के मुकाबले छोटी कंपनियों (Small-caps) में अर्निंग ग्रोथ और वेल्थ क्रिएशन की गुंजाइश कहीं ज्यादा है।

शंकर शर्मा ने कहां लगाया है पैसा?

अपने इसी भरोसे के चलते शंकर शर्मा ने खुद ₹100-200 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप कंपनियों में किया है। उन्होंने विशेष रूप से भारत के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा-सेंटर इकोसिस्टम से जुड़े सेक्टर्स को चुना है, क्योंकि ये सेक्टर्स अभी अपने ग्रोथ साइकिल के शुरुआती चरण में हैं।

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Market Correction vs SIP: मार्केट क्रैश का इंतजार पड़ सकता है भारी! जानें क्यों एक्सपर्ट्स दे रहे हैं हर महीने SIP की सलाह

Market Crash Timing vs SIP Strategy: हर निवेशक के मन में कभी न कभी यह विचार जरूर आता है कि ‘जब मार्केट गिरेगा, तब पैसा लगाऊंगा’। सुनने में यह रणनीति बहुत समझदारी भरी लगती है कम कीमत पर खरीदो और बंपर मुनाफा कमाओ। लेकिन शेयर बाजार की सबसे बड़ी हकीकत यह है कि बाजार कभी ढिंढोरा पीटकर नहीं गिरता और न ही बढ़ता है।

भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। ऐसे में निवेशकों के बीच एक पुरानी बहस फिर से छिड़ गई है क्या हर महीने SIP के जरिए निवेश करनी चाहिए, या फिर कैश बचाकर रखना चाहिए और बाजार में बड़ी गिरावट आने पर ही एकमुश्त पैसा लगाना चाहिए? आइए इसे समझते हैं।

बीते वक्त को देखना आसान है, बॉटम पकड़ना नामुमकिन

हर कोई चाहता है कि वह बाजार के बिल्कुल निचले स्तर यानी बॉटम पर शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे। लेकिन दिक्कत यह है कि जब बाजार गिर रहा होता है, तब कोई नहीं बता सकता कि बॉटम कहां है। बाजार कभी सीधी लकीर में नहीं चलता। अगर मार्केट 10% गिर चुका है, तो वहां से वह 10% और गिर सकता है या वहीं से रिकवरी शुरू कर सकता है।

‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में निवेशक अक्सर इस उम्मीद में बैठे रह जाते हैं कि कीमतें थोड़ी और गिरेंगी। नतीजा यह होता है कि जब तक बाजार में भरोसा लौटता है, तब तक मार्केट बहुत ऊपर निकल चुका होता है और निवेश का सही मौका हाथ से निकल जाता है।

एसआईपी क्यों है सबसे बेस्ट?

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यह है कि यह बाजार को टाइम करने की टेंशन को पूरी तरह खत्म कर देता है। बाजार का सेंटिमेंट कैसा भी हो चाहे वह तेजी पर हो या मंदी पर आपकी तय रकम हर महीने खुद-ब-खुद निवेश हो जाती है।

ITR Filing 2026: क्या आपको पता हैं लीव ट्रैवल अलाउंस के ये नियम? टैक्स छूट का दावा करने से पहले ध्यान रखें ये बातें

जब बाजार गिरता है, तो आपकी SIP को ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। जब बाजार चढ़ता है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इससे आपकी खरीद की लागत खुद ही एवरेज हो जाती है। निवेशकों को रोज-रोज यह नहीं सोचना पड़ता कि आज निवेश करने का सही दिन है या नहीं।

कैश होल्ड करना गलत नहीं, पर यह रणनीति का हिस्सा हो

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हाथ में नकदी रखना हमेशा एक गलत फैसला होता है। अनुभवी और मझे हुए निवेशक हमेशा अपने पोर्टफोलियो में कुछ कैश रिजर्व रखते हैं। यह कैश किसी आगामी जरूरी खर्च या बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए होता है। कैश रखना आपकी वित्तीय रणनीति का एक हिस्सा होना चाहिए, न कि बाजार की हर छोटी-बड़ी भविष्यवाणी करने का कोई जुआ।

रिकवरी मिस करना पड़ सकता है बहुत महंगा

बाजार में सुधार आने या क्रैश होने का इंतजार करने का सबसे बड़ा रिस्क यह है कि बाजार हमेशा उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से रिकवर करता है। इतिहास गवाह है कि शेयर बाजार में सबसे बड़ी और सबसे तेज बढ़त अक्सर एक बहुत तेज गिरावट के तुरंत बाद आती है।

जो निवेशक पूरी स्पष्टता के इंतजार में बैठे रहते हैं, वे इस शुरुआती और सबसे कमाऊ उछाल को मिस कर देते हैं। इसलिए वित्तीय सलाहकार हमेशा सलाह देते हैं कि जब तक आपके पास कोई बहुत ठोस योजना न हो, केवल सुधार के भरोसे कैश लेकर न बैठें।

बैलेंस्ड अप्रोच ही दिलाएगी सफलता

लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए आपको SIP या कैश में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए:

लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए आपको SIP या कैश में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए:

कुल मिलाकर आपको बता दें कि बाजार को प्रेडिक्ट करना जितना आसान दिखता है, असल में उतना होता नहीं है। एक आम और लंबी अवधि के निवेशक के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि वह बाजार में कब एंट्री लेता है बल्कि असली चुनौती यह है कि वह हर परिस्थिति में बाजार में टिका रहता है और अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी को बिना रुके जारी रखता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

Gold Price : सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आई है। निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर लगी है। मिडिल ईस्ट का संकट गहराने से तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं। साथ ही,अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक और पॉलिसी मेकर ने संकेत दिया है कि बढ़ती महंगाई के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल हाजिर बाजार में सोने का भाव 0.3% गिरकर 4,004.63 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है। अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर 4,008.70 डॉलर पर आ गया है।

सोमवार को लगातार नौवें दिन अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतों में 3% से अधिक की तेजी आई है। फिर से शुरू हुई लड़ाई में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों संख्या बढ़कर तीन हो गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं।

गोल्डसिल्वर सेंट्रल के मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रायन लैन का कहना है कि युद्ध अभी भी जारी है। ऐसे में बाजार की फोकस तेल की बढ़ती कीमतों पर बना हुआ है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और सोने पर दबाव बना हुआ है। हालांकि,गोल्ड के लिए 4,000 डॉलर का स्तर काफी अहम रहा है और यह दिखाता है कि जब भी गोल्ड स्तर से नीचे गिरता है तो उसे सपोर्ट मिलता है।

तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने के डर और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहने की आशंका को मजबूत कर रही हैं। हालांकि सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव (हेज) के रूप में देखा जाता है,लेकिन ऊंची ब्याज दरें बिना रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) में बने रहने की अवसर लागत (opportunity cost) को बढ़ा देती हैं।

क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक ने उन पॉलिसी मेकर्स का सपोर्ट किया है जिनका तर्क है कि महंगाई में बढ़त को रोकने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। ऐसे में 29 जुलाई को फेड की अगली बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना दिख रही है।

CME फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स अब दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 82% संभावना देख रहे हैं, जबकि पिछले सप्ताह यह 73% थी। OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग की राय है कि लंबे समय के नजरिए से वे सोने को लेकर अधिक सतर्क है और 3,886 डॉलर के अहम लेवल पर नजर रखे हुए हैं। अगर यह स्तर नीचे की ओर टूटता है,तो सोने में और कमजोरी आ सकती है और यह 3,500 डॉलर की गिर सकता है।

वहीं दूसरी ओर,स्पॉट सिल्वर की प्राइस 1.3% बढ़कर 56.61 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। जबकि प्लेटिनम 0.3% गिरकर 1,587.20 डॉलर पर आ गया गया है। पैलेडियम 0.3% घटकर 1,243.99 डॉलर पर पहुंच गया है।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का कहना है कि आज के सेशन में सोने के लिए 3,989 डॉलर और 3,945 डॉलर पर सपोर्ट है,जबकि 4,040 डॉलर और 4,074 डॉलरप्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है। वहीं,चांदी के लिए 55.50 डॉलर और 54.40 डॉलर पर सपोर्ट है और 57.50 डॉलर और 58.80 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस है।

मनोज कुमार जैन का सुझाव है कि लॉन्ग-टर्म निवेशक बाजार में इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी जमा कर सकते हैं,लेकिन ट्रेडर्स को लॉन्ग पोजीशन में क्लोजिंग के आधार पर सोने के लिए 1,39,650 रुपए और चांदी के लिए 2,14,000 रुपए पर स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए और हर बढ़त पर मुनाफा बुक करना चाहिए।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

₹23 के नीचे आया Yes Bank, धमाकेदार रिजल्ट के बावजूद 4% टूटा शेयर, ये है वजह

Yes Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज लेंडर येस बैंक के लिए पिछले वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही धमाकेदार रही। बैंक का मुनाफा 33% से अधिक बढ़ गया लेकिन प्रोविजंस में दोगुने से अधिक बढ़ोतरी पर शेयरों ने ऐसा दबाव बनाया कि यह करीब 4% टूट गया। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद यह संभल नहीं पाया और अब भी यह काफी दबाव में है। फिलहाल बीएसई पर यह 2.75% की गिरावट के साथ ₹22.98 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 3.85% टूटकर ₹22.72 तक आ गया था। आगे की बात करें तो रिजल्ट के बाद ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने इसक रेटिंग को सेल से अपग्रेड कर रिड्यूस कर दिया है और टारगेट प्राइस ₹17 से बढ़ाकर ₹22 किया है यानी कि इसके शेयर अभी टारगेट प्राइस से ऊपर हैं।

Yes Bank Q1 Results: खास बातें

येस बैंक के लिए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। स्टैंडएलोन लेवल पर इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 33.7% बढ़कर ₹1,070.99 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक की ब्याज से शुद्ध कमाई यानी NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) ₹2,371.47 करोड़ से 17.5% बढ़कर ₹2,786.46 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान बैंक का नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) भी डिपॉजिट्स की कम लागत और पीएसएल शॉर्टफाल डिपॉजिट्स में गिरावट के दम पर 2.5% से सुधरकर 2.7% पर पहुंच गया।

बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी सालाना आधार पर 25.5% बढ़कर ₹1704 करोड़ तो नॉन-इंटेरेस्ट इनकम 2.6% उछलकर ₹1,798 करोड़ पर पर पहुंच गया। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार हुआ है। तिमाही आधार पर बैंक का ग्रास एनपीए 1.6% से 1.3% पर आ गया तो नेट एनपीए रेश्यो भी 0.3% से 0.2% पर आ गया। हालांकि प्रोविजंस तिमाही आधार पर ₹187.55 करोड़ से 110.33% उछलकर ₹394.48 करोड़ पर पहुंच गया।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

येस बैंक के शेयरों ने इस साल कुछ ही महीने में निवेशकों को रॉकेट की स्पीड से रिटर्न दिया था। 30 मार्च 2026 को बीएसई पर यह ₹17.19 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से तीन महीने में यह 49.91% उछलकर 18 जून 2026 को ₹25.77 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

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Wadia Realty को झटका, ठाणे में नीलाम हो रही 95 एकड़ जमीन, ये है मामला

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SBI Funds IPO GMP: कल बाजार में मचेगा तहलका? लिस्टिंग से ठीक पहले GMP में भारी उछाल! जानें कितना हो सकता है मुनाफा

SBI Funds Management IPO GMP Update: देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड मैनेजर, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की कल यानी मंगलवार, 21 जुलाई को घरेलू शेयर बाजार में एंट्री होने जा रही है। बाजार में कदम रखने से ठीक पहले ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है और यह करीब 18 फीसदी के मजबूत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।

यह आईपीओ सब्सक्रिप्शन के मामले में देश का पांचवां सबसे बड़ा आईपीओ बन चुका है। जिन निवेशकों ने इस आईपीओ में पैसा लगाया है, वे बेसब्री से कल सुबह की लिस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। आइए जानते हैं ग्रे मार्केट का ताजा हाल क्या है और संभावित लिस्टिंग प्राइस क्या हो सकती है।

देश का 5वां सबसे बड़ा आईपीओ, लगी थी बोलियों की झड़ी

₹9,813 करोड़ के इस विशाल आईपीओ को लेकर निवेशकों में गजब का क्रेज देखा गया। 14 जुलाई से 16 जुलाई तक खुले इस आईपीओ को रिकॉर्ड तोड़ रिस्पांस मिला था। यह आईपीओ कुल मिलाकर 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा रिकॉर्ड 140.11 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

आईपीओ से जुड़ी कुछ अन्य बड़ी बातें

₹545 से ₹574 के प्राइस बैंड वाला यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसके तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और अमुंडी इंडिया होल्डिंग (Amundi India Holding) ने मिलकर 20.37 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे हैं। चूंकि यह ओएफएस था, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम प्रमोटर्स के पास जाएगी, कंपनी को कोई फंड नहीं मिलेगा।

मार्केट लीडर है कंपनी

साल 1992 में स्थापित हुई यह कंपनी देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड ‘एसबीआई म्यूचुअल फंड’ का इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट संभालती है। साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹16.32 लाख करोड़ था और भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में इसकी हिस्सेदारी 15.5 फीसदी की है।

ग्रे मार्केट में दमदार प्रदर्शन, 18% मुनाफे के संकेत

आईपीओ पर नजर रखने वाले प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ‘इन्वेस्टरगेन’ और ‘आईपीओ वॉच’ के मुताबिक, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹103 प्रति शेयर चल रहा है। इस जीएमपी के हिसाब से देखें तो आईपीओ के अपर प्राइस बैंड ₹574 के मुकाबले यह शेयर बाजार में ₹677 पर लिस्ट हो सकता है।

यानी कल पहले ही दिन निवेशकों को प्रति शेयर करीब 18% का तगड़ा लिस्टिंग गेन मिलने की उम्मीद है। कल सुबह 10 बजे जैसे ही बाजार खुलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह शेयर ग्रे मार्केट के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए कोई नया रिकॉर्ड बनाता है या नहीं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।