3500 रुपये के इन्वेस्टमेंट से खड़ा कर लिया 1.5 करोड़ का मिलेट बिजनेस! नासिक के इंजीनियर तुषार ने किया कमाल

Business idea: जीवन में कभी-कभी बड़ी कठिनाइयों के दौरान ही बड़े अवसर क्रिएट करने का मौका मिलता है। ऐसा ही कुछ हुआ नासिक के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट के साथ। भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना की महामारी से जूझ रही थी तो उसी समय इस इंजीनियर ने एक शानदार बिजनेस की शुरुआत के लिए कदम बढ़ा दिया। ये कहानी है तुषार तलवारे की जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान महज 3500 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने घर से मिलेट (बाजरा/मोटा अनाज) बेचने का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था।

आज उनका यह स्टार्टअप फूडोनिक नाम के एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है। इसका सालाना रेवेन्यू 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कंपनी आज पूरे भारत में मिलेट खाखरा, आटा, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के हेल्दी स्नैक्स बेच रही है।

कॉलेज के रूममेट और IIT बॉम्बे के सेमिनार से मिला आइडिया

तुषार की इस एंटरप्रेन्योरशिप जर्नी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। 30Stades के साथ एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि जब वह नवी मुंबई में पढ़ाई कर रहे थे तब उनके एक कॉलेज रूममेट ने उन्हें उनकी फिटनेस और वेलनेस के प्रति रुचि को देखते हुए हेल्दी फूड सेक्टर में करियर तलाशने की सलाह दी थी।

तुषार की यह रुचि तब एक ठोस बिजनेस आइडिया में बदल गई जब उन्होंने पवई स्थित IIT बॉम्बे में प्रसिद्ध मिलेट रिसर्चर डॉ खादर वली के एक सेमिनार में हिस्सा लिया। इस सेशन से उन्हें मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला और उन्होंने महसूस किया कि उस समय बाजार में मिलेट-आधारित प्रोडक्ट्स बहुत ही कम उपलब्ध थे।

इस सेक्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए तुषार ने कई दूसरे सेमिनार्स में हिस्सा लिया और मिलेट की खेती, इसके स्वास्थ्य लाभ व सप्लाई चेन को समझने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज भी पूरे किए।

₹3500 का पहला ऑर्डर और लॉकडाउन में डिलीवरी की चुनौती

बड़ा निवेश करने के बजाय तुषार ने पहले इस आइडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट करने का फैसला किया। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नासिक में अपने घर पर रहते हुए तुषार ने मात्र 3500 रुपये निवेश किए। उन्होंने डॉ खादर वली के नेटवर्क के जरिए तमिलनाडु के एक किसान से 5 अलग-अलग किस्मों के 5-5 किलो मिलेट्स खरीदे।

परिवार, दोस्तों और शुरुआती ग्राहकों से मिले सकारात्मक फीडबैक से उत्साहित होकर उन्होंने अपने अगले ऑर्डर को बढ़ाकर हर किस्म का 20-20 किलो कर दिया। लॉकडाउन के कारण जब लॉजिस्टिक्स सेवाएं पूरी तरह प्रभावित थीं तब तुषार ने ऑर्डर हासिल करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और लोगों की सिफारिशों का सहारा लिया। उस समय सिर्फ इंडिया पोस्ट की सेवाएं चालू थीं, इसलिए वे घर पर ही अपने हाथों से एक-एक किलो के पाउच पैक करते थे और डाक के जरिए पूरे देश में ग्राहकों को भेजते थे।

किफायती कीमत की वो रणनीति जो कर गई काम

मार्केट रिसर्च के दौरान तुषार ने देखा कि कई विक्रेता 5 किलो मिलेट्स के लिए करीब 1200 रुपये तक चार्ज कर रहे थे। चूंकि उनकी खरीद लागत काफी कम थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स की कीमत को किफायती रखने का फैसला किया। तुषार बताते हैं कि उतनी ही मात्रा के लिए उनकी खरीद लागत सिर्फ 400 रुपये के आसपास थी।

इसलिए उन्हें अपने पैक्स की कीमत पोस्टल चार्ज और प्रॉफिट मार्जिन मिलाकर 700 रुपये रखी। इससे ग्राहकों को काफी किफायती दाम में हेल्दी फूड मिलने लगा और तुषार को भी एक बेहतर मार्जिन मिला। यह प्राइसिंग स्ट्रेटजी पूरी तरह सफल रही और देश के अलग अलग हिस्सों से ताबड़तोड़ ऑर्डर आने शुरू हो गए।

₹1.5 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का सफर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी तुषार ने नासिक में ही 2000 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया और अपने काम को वहां शिफ्ट कर दिया। रेडी-टू-ईट मिलेट प्रोडक्ट्स की मांग को देखते हुए उन्होंने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप की और आटा, पास्ता व नूडल्स जैसे प्रोडक्ट तैयार करवाने लगे जबकि उनका खुद का ध्यान ब्रांडिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर रहा।

कंपनी ने भी फिर रफ्तार पकड़ी। साल 2020 में 1.5 लाख का टर्नओवर, साल 2021 में 12 लाख के टर्नओवर में बदल गया। साल 2023 में उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में मिलेट चिवड़ा, फ्लेक्स और दूसरे स्नैक्स शामिल किए।

कारोबार के विस्तार के साथ तुषार को केंद्र सरकार की PMFME योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस मदद से उन्होंने 15 अलग-अलग वैरायटी के मिलेट खाखरा बनाने के लिए अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।

हीरो हैं ये 8 महिलाएं: बिना किसी केमिकल के तैयार होता है खाखरा

फैक्ट्री स्थापित करना तो केवल शुरुआत थी, मिलेट खाखरा को बड़े पैमाने पर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। शुरुआत में आटा मशीनों से चिपक जाता था और सही खाखरा नहीं बन पाता था। फूड कंसल्टेंट्स ने इसमें बाइंडर्स और एडिटिव्स मिलाने की सलाह दी लेकिन तुषार इसे 100% नेचुरल रखना चाहते थे।

महीनों की कड़ी मेहनत और 2000 किलो से अधिक मिलेट आटा इस्तेमाल करने के बाद उनकी टीम ने परफेक्ट रेसिपी तैयार की। ये खाखरे बिना किसी प्रिजर्वेटिव, एडिटिव्स या सिंथेटिक बाइंडर्स के बनाए जाते हैं और स्वाद को बरकरार रखने के लिए कंपनी अपने खुद के मसालों का मिश्रण तैयार करती है।

वर्तमान में नासिक स्थित Fudonik की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को 8 महिलाएं संभाल रही हैं। बाजार में खाखरा लॉन्च करने से पहले कंपनी ने 6 महीने तक ग्राहकों का फीडबैक लिया और लैबोरेटरी टेस्ट भी पूरे किए।

भविष्य की योजनाएं

आज यह कंपनी इन-हाउस खाखरा और चिवड़ा बनाती है जिसके पास 2500 से अधिक रिटेल ग्राहक हैं और यह अपने B2B बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। अपनी आगे की योजनाओं को लेकर तुषार बताते हैं कि वे अगले साल मिलेट कुकीज भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से थर्ड पार्टी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करता है।

‘हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये…’, मरीज ने शेयर किया मुंबई के अस्पताल का बिल, लोगों के उड़े होश

अस्पताल में चार दिन रहना…, एक आम सर्जरी… और 11 लाख रुपये से ज्यादा का बिल। मुंबई के एक अस्पताल में हर्निया की सर्जरी के लिए एक मरीज द्वारा 11.04 लाख रुपये चुकाने का दावा करने वाली एक वायरल पोस्ट ने बहस छेड़ दी है। इस दावे ने भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर की बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह चर्चा तब शुरू हुई जब X यूजर निखिल झा ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि उनके एक फॉलोअर की मुंबई के एक नामी अस्पताल में इंग्वाइनल हर्निया की सर्जरी हुई थी। पोस्ट के अनुसार, मरीज से इलाज के लिए 11.04 लाख रुपये लिए गए।

जानकारी शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा था, “कल एक फॉलोअर ने हमें मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अपनी हर्निया सर्जरी के बारे में मैसेज किया। कुल खर्च 11.04 लाख रुपये था। हां, हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये।” आगे अपनी बात रखते हुए झा ने लिखा, “हम इतनी बड़ी रकम देखकर हैरान और स्तब्ध रह गए। अगर छोटी सी हर्निया सर्जरी का खर्च इतना है, तो बड़ी सर्जरी का खर्च क्या होगा? तो क्या मुंबई में अस्पताल में भर्ती होना कोई अपराध बनता जा रहा है? क्या शहर में अच्छी हेल्थकेयर ऐसी लग्जरी बन गई है, जिसे सिर्फ बहुत अमीर लोग ही उठा सकते हैं?”

पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जो इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट का मैसेज लग रहा था। इमेज के अनुसार, कुल मेडिकल खर्च 11,04,100 रुपये था, जबकि सेटल किया गया इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट 4,64,000 रुपये था। डॉक्यूमेंट से पता चला कि मरीज को इंग्वाइनल हर्निया से जुड़े इलाज के लिए 6 जुलाई से 10 जुलाई, 2026 तक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

हालांकि, पोस्ट में इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, जैसे कि कौन सी सर्जरी हुई, कमरे की कैटेगरी, डॉक्टर की फीस, अतिरिक्त प्रक्रियाएं या क्या मरीज़ को अतिरिक्त मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। इसके बावजूद, पोस्ट ने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने प्राइवेट अस्पतालों के खर्च और मेडिकल इलाज के खर्च को उठाने की क्षमता पर अपनी राय दी। जहां कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि हर्निया की सर्जरी का बिल इतना ज्यादा कैसे हो सकता है, वहीं दूसरों ने कहा कि मामले को ठीक से समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है।

एक डॉक्टर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11 लाख रुपये बहुत ज़्यादा हैं। क्या इसमें हेलीकॉप्टर से पिक-अप और ड्रॉप भी शामिल था?” एक यूजर ने हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता के बारे में चिंता जताई और लिखा, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये? यह भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 11 लाख रुपये से ज़्यादा की आम हर्निया सर्जरी कई मध्यम-वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। इंश्योरेंस होने पर भी, अगर क्लेम सीमित हैं या रिजेक्ट हो जाते हैं, तो ऐसे खर्च आर्थिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अस्पताल की कीमतों, इंश्योरेंस सेटलमेंट और मेडिकल बिलिंग में ज़्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी की हेल्थकेयर सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं होनी चाहिए।”

एक और यूजर ने शहरों के बीच इलाज के खर्च की तुलना की और लिखा, “सूरत में हर्निया की सर्जरी का खर्च 1.5 लाख रुपये है, जबकि मुंबई के एक बड़े अस्पताल में उसी प्रक्रिया का खर्च 11.04 लाख रुपये है। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद, पॉलिसीहोल्डर एक जैसा प्रीमियम देते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बड़े मेट्रो अस्पतालों में इलाज का बढ़ता खर्च सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ अस्पताल का बिल पूरी मेडिकल स्थिति को नहीं समझा सकता। यूजर ने लिखा, “यह मैसेज यह नहीं बताता कि कौन सी प्रक्रिया की गई थी। यह समझने के लिए कि क्या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन हुआ था और क्या उसे ICU में रहना पड़ा था, हमें ऑपरेशन नोट्स और डिस्चार्ज समरी देखने की जरूरत है।”

क्या हैं AI डेटा सेंटर और क्यों हो रहा है इनका विरोध?

AI data center

– विनम्र मिश्रा (डेटा इंजीनियर, मुंबई)

 

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में जितनी चर्चा एआई (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर हुई है, शायद ही किसी और तकनीक पर हुई हो। लेकिन बीते कुछ महीनों से डेटा सेंटर का विषय अधिक चर्चा में है, जिस पर आज की यह एआई तकनीक और इसका भविष्य टिका हुआ है। दुनिया भर में एआई डेटा सेंटरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

 

लोगों का दावा है कि ये डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं। बीते कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोप के कई देशों में डेटा सेंटर के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए हैं। हाल ही में अमेरिकी संसद में सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने जॉर्जिया प्रांत के एक डेटा सेंटर के कारण स्थानीय लोगों को होने वाली समस्याओं को उजागर किया है। आइए, आज इस विषय को विस्तार से समझते हैं।

 

क्या है डेटा सेंटर?

डेटा सेंटर को आप एक ऐसे विशाल ढांचे या इमारत के रूप में देख सकते हैं, जहाँ हजारों सर्वर या कंप्यूटर रखे होते हैं। आप जिस भी एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे का पूरा दिमाग इन्हीं सर्वर्स को समझिए। जाहिर है, दिमाग चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार, ये सर्वर भी भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। आज तेजी से काम करने वाले आधुनिक सुपरकंप्यूटर, जिन पर एआई काम करता है, वे आपके सामान्य कंप्यूटर से कई गुना अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। जिस एआई तकनीक का आज हम उपयोग कर रहे हैं या आगे करेंगे, उसके लिए एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों और हजारों सर्वर्स की जरूरत होती है।

 

क्यों बढ़ रही है लोगों की चिंता?

ये कंप्यूटर न केवल अत्यधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि काम करते समय गर्मी (Heat) के रूप में भारी ऊर्जा बाहर भी निकालते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद आपका कंप्यूटर या स्मार्टफोन थोड़ा गर्म हो जाता है। इसे आप स्कूल या कॉलेज की कंप्यूटर लैब के उदाहरण से भी समझ सकते हैं।

 

कंप्यूटर लैब में जहाँ कई कंप्यूटर होते हैं, वहाँ उनसे निकलने वाली गर्मी इतनी अधिक हो सकती है कि वह कंप्यूटर के हार्डवेयर को नुकसान पहुँचा दे। इसीलिए कंप्यूटर लैब को हमेशा वातानुकूलित (Air Conditioned) रखा जाता है।

 

इसी प्रकार, बड़े डेटा सेंटरों में इतनी भीषण गर्मी पैदा होती है कि वह सर्वर्स के हार्डवेयर को जलाकर नष्ट कर सकती है। ऐसे में उन्हें ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है। डेटा सेंटर के स्तर पर केवल एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल करने से बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी कारण कई डेटा सेंटर कूलिंग (ठंडा करने) के लिए पानी का उपयोग करते हैं। सर्वर्स के रैक (जहाँ कई सारे सर्वर रखे होते हैं) के पास से पानी की पाइपलाइन गुजारी जाती है, जो गर्मी सोखती है और बाद में यह गर्म पानी भाप बनकर उड़ जाता है।

 

डेटा सेंटरों को लगातार ठंडा रखने की इस प्रक्रिया में पानी की भारी बर्बादी होती है। उदाहरण के लिए, गूगल के डेटा सेंटरों द्वारा वर्ष 2022 में उपभोग किया गया 5.6 बिलियन गैलन (लगभग 2,120 करोड़ लीटर) पानी, भारत के किसी मध्यम आकार के शहर के लगभग 4.3 लाख लोगों की पूरे साल की पानी की जरूरत के बराबर है।

 

ध्वनि प्रदूषण भी है एक बड़ी समस्या

डेटा सेंटरों में बिजली और पानी की यह बेलगाम खपत कई जगहों पर स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। लोगों का विरोध है कि उनके हक का पानी और बिजली इन डेटा सेंटरों को दी जा रही है। लेकिन परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; डेटा सेंटरों से निकलने वाली तेज आवाज (ध्वनि) भी एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेटा सेंटरों से लगातार एक कम आवृत्ति वाली (Low-Frequency) भारी आवाज निकलती रहती है, जिससे आसपास के घरों में कंपन महसूस होता है। 'अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन' ने भी माना है कि ऐसी लो-फ्रीक्वेंसी ध्वनि लगातार 24 घंटे सुनने के कारण हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

 

आज दुनिया भर में जहाँ एआई पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है और टेक कंपनियाँ तथा सरकारें एआई की इस अंधी दौड़ में भाग रही हैं, ऐसे में डेटा सेंटरों को लेकर आम जनता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों की शिकायत बिल्कुल जायज है कि सरकारें और बड़ी कंपनियाँ विकास की आड़ में पर्यावरण के नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।

 

‘महीने में 10 लाख कमा कर 5 लाख दे रहा हूं टैक्स’, कनाडा में 18 महीने काम करने के बाद भारत लौटे व्यक्ति ने बयां किया दर्द

कई भारतीयों के लिए कनाडा एक ऐसी जगह है, जहां बेहतर मौके और आरामदायक जिंदगी का इंतजार होता है। लेकिन तब क्या होता है जब कोई ऐसा व्यक्ति, जिसने वह सपना जी लिया हो, कहे कि यह सब बेकार था? क्या सिर्फ ज्यादा कमाई से विदेश में बेहतर जिंदगी की गारंटी मिल सकती है?

ये सवाल एंटरप्रेन्योर हर्ष गुप्ता की एक वायरल सोशल मीडिया पोस्ट के केंद्र में हैं। वे परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पर टोरंटो गए थे, लेकिन सिर्फ 18 महीने बाद ही लौट आए। अपने बिजनेस से महीने में लगभग 10 लाख रुपये कमाने के बावजूद, गुप्ता ने कहा कि ज्यादा टैक्स, रहने का बहुत ज्यादा खर्च, हेल्थकेयर में देरी और कॉम्पिटिटिव जॉब मार्केट ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया।

थ्रेड्स पर अपना अनुभव शेयर करते हुए गुप्ता ने लिखा, “अगर आप भारतीय हैं और कनाडा जाने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये 10 बातें आपको पता होनी चाहिए।” उन्होंने विदेश जाने की योजना बना रहे किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक – अच्छी नौकरी खोजने – से शुरुआत की। गुप्ता के अनुसार, कनाडा में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलना बहुत से लोगों की उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा है, सैलरी भारत की तुलना में थोड़ी ही ज्यादा है और हर नौकरी के लिए हजारों लोग अप्लाई करते हैं।

गुप्ता ने लिखा, “अच्छी नौकरियां मिलना मुश्किल है। सैलरी भारत की तुलना में थोड़ी ही ज्यादा है। Shopify के अलावा कोई भी ग्लोबल लेवल की बड़ी कंपनी नहीं है। ज्यादा लोग CAD 15/घंटा (1,000 रुपये) पर काम कर रहे हैं। रहने का खर्च आपकी कमर तोड़ देगा। मैं डाउनटाउन टोरंटो में रहता था। एक साधारण 600 sq ft के अपार्टमेंट के लिए महीने का किराया 2 लाख रुपये था।”

फिर टैक्स का झटका लगा। गुप्ता ने कहा कि सबसे बड़े सरप्राइज में से एक वह टैक्स था, जो उन्हें अच्छी कमाई के बावजूद देना पड़ा। “टैक्स बहुत ज्यादा हैं। मैं अपने बिजनेस से महीने में 10 लाख रुपये कमाता था और 5 लाख रुपये टैक्स में देता था।”

एंटरप्रेन्योर ने कनाडा के हेल्थकेयर सिस्टम पर भी सवाल उठाए और कहा कि मेडिकल केयर मिलना उतना आसान नहीं था, जितना उन्होंने सोचा था। उन्होंने लिखा, “मुफ्त हेल्थकेयर एक मिथक है।” गुप्ता ने बताया कि उन्हें फैमिली डॉक्टर मिलने में छह महीने का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट लेने में दो महीने से ज्यादा का समय लगा। उन्होंने दवाओं की कीमत को भी एक और चिंता का विषय बताया।

मौसम भी एक चुनौती थी। गुप्ता के लिए, कनाडा की लंबी सर्दियां सिर्फ कम तापमान की बात नहीं थीं। उन्होंने रोज़मर्रा की जिंदगी पर भी असर डाला। उन्होंने लिखा, “यहां ठंड है और उदासी भी। अक्टूबर से अप्रैल तक, कोई बाहर नहीं निकलता। मैं टोरंटो की बात कर रहा हूं, किसी छोटे शहर की नहीं। हर दिन ढेरों कपड़े पहनने पड़ते हैं।”

गुप्ता का कहना था कि कनाडा में रहने का ज्यादा खर्च और तुलनात्मक रूप से कम सैलरी ने लोगों की जीवन की गुणवत्ता और नजरिए पर असर डाला है। उन्होंने यह भी कहा कि कई काबिल लोग बेहतर मौकों की तलाश में दूसरी जगहों पर चले जाते हैं। उनके अनुसार, परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि इसमें बहुत समय लगता है और एलिजिबिलिटी कट-ऑफ लगातार बढ़ रहे हैं।

गुप्ता ने अपनी बात यह कहते हुए खत्म की कि कनाडा शायद हर किसी के लिए सही जगह नहीं है। उन्होंने समझाया, “यह उन लोगों के लिए बना है, जिनके पास कोई बेहतर विकल्प नहीं है। अगर फ़ूड डिलीवरी, ट्रकिंग, खेती या ब्लू-कॉलर काम ही आपकी सीमा है, तो यह ठीक है। अगर आपमें महत्वाकांक्षा और पैसा कमाने की चाह है, तो यह जगह आपके लिए नहीं है। इंटरनेट पर दिखने वाले सुंदर नजारों, साफ हवा और ‘शांति’ के झांसे में न आएं। यह साल में 4-5 महीने तो बहुत अच्छा लगता है। बाकी समय सब कुछ उदास और फीका रहता है।”

एक यूजर ने कमेंट किया, “सैलरी ‘भारत से बस थोड़ी ज्यादा’ है – किस गलतफहमी वाली दुनिया में एक विकसित देश में औसत सैलरी भारत से ‘बस थोड़ी’ ज्यादा होती है??” दूसरों ने कहा कि उनका अनुभव बहुत अलग रहा है। एक यूजर ने लिखा, “एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो सच में कनाडा जाकर बसा है, मेरा नजरिया बहुत अलग है। मैं भारत के एक बड़े शहर से आया हूं, और एक महिला और नए माता-पिता के तौर पर, मेरा सच में मानना ​​है कि परिवार पालने के लिए कनाडा सबसे अच्छे देशों में से एक है। हां, रहने का खर्च ज्यादा है। लेकिन अगर दोनों पार्टनर कड़ी मेहनत करने को तैयार हों, तो समय के साथ जिंदगी बेहतर होती जाती है। रातों-रात कुछ नहीं होता, लेकिन चीजें बेहतर जरूर होती हैं।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “कृपया वहां वापस चले जाएं, जहां से आप आए थे। जो लोग सच में दिलचस्पी रखते हैं, उन्हें इस पोस्ट की जरूरत नहीं है क्योंकि यह गलत है। पहली बात, जो लोग CAD में कमाते हैं, वे चीजों को समझने के लिए INR में नहीं बदलते। क्या आप कभी मुंबई में किराए के घर में रहे हैं? उससे यह पता नहीं चलता कि पूरे भारत में किराया और रहने का खर्च ज्यादा है। अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल है, तो तैयारी करें और इंटरव्यू पास करें!”

हालांकि, कुछ लोगों को लगा कि गुप्ता ने ऐसी चिंताएं उठाई हैं जिनका सामना हाल के सालों में कनाडा आए कई नए लोगों ने किया है। एक यूजर ने कहा, “मुझे उन सभी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए बुरा लगता है, जो कोविड के बाद बड़े पैमाने पर हुए इमिग्रेशन के दौरान यहां आए थे। भारत में रिक्रूटरों ने उन्हें कनाडा की खूबसूरत तस्वीर और PR स्टेटस का वादा करके धोखा दिया। कनाडा का इमिग्रेंट्स के प्रति रवैया निश्चित रूप से बदला है। यह दुखद है।”

Gold Price Today: सोने में तेजी लौटी, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक बढ़े दाम; चेक करें 10 बड़े शहरों का रेट

देश में सोने की कीमत में तेजी लौट आई है। ज्यादातर शहरों में दाम चढ़ा है। 16 जुलाई की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई और कोलकाता में भाव 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम और चेन्नई में 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,029.66 डॉलर प्रति औंस पर है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत मंगलवार के 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ही बनी रही।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 143730 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131760 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 143790 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 131810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 143580 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 131610 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली131760143730
मुंबई131610143580
अहमदाबाद131660143630
चेन्नई131810143790
कोलकाता131610143580
हैदराबाद131610143580
जयपुर131760143730
भोपाल131660143630
लखनऊ131760143730
चंडीगढ़131760143730

HSBC ने कहा है कि 2026 में गोल्ड की औसत कीमत 4,560 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। 2027 में गोल्ड की औसत कीमत 4,925 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। इस साल के अंत में कीमत 4,750 डॉलर तक जा सकती है। अगले साल के अंत तक कीमत 5,025 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है।

चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में गिरावट है। 16 जुलाई की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। आभूषण विक्रेताओं और इंडस्ट्रीज की ओर से कम खरीद के कारण घरेलू बाजार में चांदी में मंदी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 58.26 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

भारत के इन 3 शहरों ने मारी बाजी, 2026 की वर्ल्ड बेस्ट सिटीज लिस्ट में छाया इनका जलवा!

भारत के तीन खूबसूरत शहरों ने दुनिया के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन में अपनी जगह बनाई है। ‘ट्रैवल + लेज़र’ के ‘वर्ल्ड्स बेस्ट अवार्ड्स 2026’ में उदयपुर, जयपुर और मुंबई को दुनिया के टॉप 25 शहरों में शामिल किया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के 6.61 लाख से ज्यादा रीडर्स के वोट और उनके ट्रेवल एक्सपीरियंस के बेस पर तैयार की गई है, आइए जानते हैं आखिर ये तीनों भारतीय शहर दुनिया के बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट में क्यों शामिल हुए और यहां घूमने की क्या खास वजह है:

दुनिया की टॉप 25 लिस्ट में तीन भारतीय शहर

Must Visit Countries In Southern Europe With A Schengen Visa

‘ट्रैवल + लेजर’ के ‘वर्ल्ड्स बेस्ट अवार्ड्स 2026’ में भारत के उदयपुर, जयपुर और मुंबई ने दुनिया के टॉप 25 शहरों में जगह बनाई। यह लिस्ट लाख से भी ज्यादा लोगों के ग्लोबल रीडर सर्वे के बेस पर तैयार की गई है, जिसमें शहरों को उनके टूरिस्ट एक्सपीरियंस, संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए आंका गया।

उदयपुर बना सबसे ऊंची रैंक वाला भारतीय शहर

शीश महल के बारे में जानकारी – Swan Tours – Blogs

उदयपुर दुनिया में 12वें और एशिया में 8वें स्थान पर रहा। इसे ‘झीलों का शहर’ कहा जाता है। यहां की पिछोला झील, सिटी पैलेस, फतेह सागर झील, हेरिटेज होटल और राजस्थानी संस्कृति पर्यटकों को बेहद पसंद आती है।

अगर आप शाही माहौल, शांत झीलों में बोट राइड और खूबसूरत सूर्यास्त का आनंद लेना चाहते हैं, तो उदयपुर जरूर जाएं। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है।

जयपुर ने भी बनाई खास पहचान

जयपुर में आपका स्वागत है: भारत का गुलाबी शहर » अगोडा: कम खर्च में दुनिया देखें

जयपुर ने दुनिया में 16वीं और एशिया में 10वीं रैंक हासिल की। ‘पिंक सिटी’ अपने ऐतिहासिक किलों, हवेलियों, महलों और रंग-बिरंगे बाजारों के लिए मशहूर है।

यहां आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस और लोकल मार्केट घूमने लायक हैं। हिस्ट्री, आर्किटेक्टर, शॉपिंग और राजस्थानी खाने का मजा लेना चाहते हैं, तो जयपुर एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है।

मुंबई की संस्कृति और लाइफस्टाइल को मिली पहचान

मुंबई महाराष्ट्र के गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास तथा महत्वपूर्ण जानकारी | SamanyaGyan

मुंबई दुनिया में 21वें और एशिया में 12वें स्थान पर रही। यह शहर मॉडर्न लाइफस्टाइल और ट्रेडिशन का शानदार ब्लेंड है। यहां गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, बॉलीवुड, स्ट्रीट फूड और नाइटलाइफ टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं।

अगर आप समुद्र किनारे घूमना, अलग-अलग तरह का खाना चखना और शहर की तेज रफ्तार जिंदगी का एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं, तो मुंबई जरूर जाएं। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी है।

दुनिया के टॉप 5 शहर कौन-से हैं?

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इस साल की ग्लोबल रैंकिंग में सैन मिगुएल डी एलेंडे (मेक्सिको) पहले स्थान पर रहा। इसके बाद क्योटो (जापान), चियांग माई (थाईलैंड), होई आन (वियतनाम) और ओआक्साका (मेक्सिको) ने टॉप 5 में जगह बनाई।

भारत के तीन शहरों का इस लिस्ट में शामिल होना देश के टूरिस्म के लिए बड़ा अचीवमेंट माना जा रहा है।

सही जवाब पता थे फिर भी IIT एग्जाम में लिखे गलत उत्तर, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

भारत में IIT में दाखिला पाना लाखों छात्रों का सपना होता है, लेकिन एक युवक ने इस दौड़ से हटकर ऐसा फैसला लिया जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। जब बाकी छात्र IIT में पहुंचने के लिए पूरी मेहनत कर रहे थे, तब ऋषभ खनेजा ने जानबूझकर अपनी परीक्षा में गलत जवाब लिखे। हैरानी की बात यह थी कि उन्हें सही उत्तर पता थे। उनका यह कदम असफलता नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की दिशा खुद चुनने का प्रयास था।

परिवार और समाज की तय उम्मीदों से अलग रास्ता चुनना आसान नहीं था, लेकिन ऋषभ ने वही किया जो उन्हें सही लगा। आज उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि सफलता का मतलब सिर्फ बड़ी डिग्री या नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि अपने उद्देश्य और खुशी को पहचानना भी है।

IIT की रेस में शामिल था

ऋषभ खनेजा ने Humans of Bombay के साथ अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जानबूझकर IIT प्रवेश परीक्षा में असफल होने का फैसला किया था। उनका कहना है कि यह कदम किसी डर या कमजोरी की वजह से नहीं था, बल्कि इसलिए था क्योंकि वह ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहते थे जो उन्हें अपनी नहीं लगती थी।

उन्होंने बताया कि परीक्षा हॉल में बैठकर वह जानते थे कि सही जवाब क्या हैं, फिर भी उन्होंने कुछ सवालों के गलत उत्तर चुने।

परिवार ने देखा था एक तय रास्ता

ऋषभ परिवार के बड़े बेटे थे और उनके लिए भविष्य का रास्ता पहले से तय माना जाता था। विज्ञान से पढ़ाई, इंजीनियरिंग, MBA और फिर कॉर्पोरेट नौकरी यह वही सफर था जिसे समाज सफलता की पहचान मानता है।

हर पारिवारिक समारोह में IIT और बड़ी नौकरी पाने वाले लोगों की कहानियां सुनाई जाती थीं। लेकिन ऋषभ के मन में एक सवाल था क्या यही रास्ता वास्तव में उन्हें खुश रखेगा?

दूसरों की सफलता देखकर उठे सवाल

ऋषभ ने महसूस किया कि जिन लोगों ने समाज के हिसाब से बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं, उनमें से कई लोग अंदर से खुश नहीं दिखते थे। इसी बात ने उन्हें अपनी जिंदगी और फैसलों पर सोचने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने इंजीनियरिंग की जगह मुंबई के Mithibai College से Arts की पढ़ाई करने का फैसला किया। उस समय कई लोगों को लगा कि उन्होंने अपना करियर खराब कर लिया है।

एक क्लासरूम ने बदल दी सोच

बाद में ऋषभ Teach For India से जुड़े और मुंबई के मानखुर्द इलाके में बच्चों को पढ़ाने लगे। यही अनुभव उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ बना। उन्होंने बताया कि बच्चों के साथ काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि असली संतुष्टि सिर्फ बड़े पद या ऑफिस की सफलता में नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने में भी मिल सकती है।

कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी, चुना अपना रास्ता

ऋषभ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया। अच्छी सैलरी और अच्छे माहौल के बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि कुछ कमी रह गई है। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर तीन महीने की बाइक यात्रा की। इस सफर ने उन्हें खुद को बेहतर समझने का मौका दिया।

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आज रचनात्मक दुनिया में बना रहे पहचान

अब ऋषभ हिमाचल प्रदेश के बीड़ में रहते हैं और लेखक, फोटोग्राफर व कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं। साथ ही वह लोगों को अपनी रचनात्मकता से दोबारा जुड़ने में मदद करते हैं।

‘सफलता और मंजूरी में से चुनना सबसे मुश्किल‘

ऋषभ का कहना है कि उनके और उनके माता-पिता के सपने अलग नहीं थे। माता-पिता भी सिर्फ उनकी खुशी चाहते थे, लेकिन उन्हें अपनी खुशी तक पहुंचने का रास्ता खुद तलाशना था। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता का मतलब हमेशा वही रास्ता चुनना नहीं होता जिसे दुनिया सही मानती है, बल्कि वह रास्ता चुनना होता है जो व्यक्ति को अंदर से संतुष्ट करे।

‘आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए’— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 18 दिन से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्होंने देश की अंतरात्मा जगा दी। ALSO READ: सोनम वांगचुक के अनशन पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस; कल तक मांगा जवाब

थरूर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखते हुए कहा कि मैं आज आपको एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में संबोधित कर रहा हूं जो भारतीय युवाओं की वर्तमान पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है।

 

मैं आज आपको एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में संबोधित कर रहा हूं जो भारतीय युवाओं की वर्तमान पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है।

 

उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए एक व्यक्तिगत मामला है। मेरा जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। मेरे पिता समाचार पत्र में एक वेतनभोगी कर्मचारी थे और मेरी मां एक गृहणी थीं, जिन्हें एक ही आय में तीन बच्चों को पढ़ाना-लिखाना था। हमारे जैसे परिवार के लिए, 'योग्यता' (मेरिट) कोई नारा नहीं थी। स्कॉलरशिप, निष्पक्ष परीक्षाएं, ईमानदारी से आने वाले परिणाम — यही एकमात्र जरिया थे जिससे एक वेतन पर तीन बच्चों के सपनों को पूरा किया जा सकता था।

थरूर ने कहा कि मैंने मुंबई और कोलकाता में स्कूल की पढ़ाई की, यहाँ दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई की, यूनिवर्सिटी टॉप की और आईआईएम (IIM) में दाखिला पाया — लेकिन इसके बजाय मैंने स्कॉलरशिप पर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने का फैसला किया। मुझे कुछ भी विरासत में नहीं मिला था; सब कुछ कड़ी मेहनत और हां, परीक्षाओं के बल पर कमाया गया था। इसलिए मैं जानता हूं कि एक निष्पक्ष और योग्यता-आधारित व्यवस्था ही निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए आगे बढ़ने की एकमात्र सीढ़ी है। ALSO READ: 18 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत गंभीर, 8.5 किलो वजन घटा; अनशन खत्म कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा मामला

 

पत्र में उन्होंने कहा कि जब वह सीढ़ी टूट जाती है (पेपर लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं, भरोसा टूटता है) तो अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को नुकसान नहीं होता। उनके पास दूसरी सीढ़ियाँ होती हैं। धोखा आपके सपनों और आपके परिवारों के बलिदानों के साथ (और दुखद रूप से, कुछ घरों में युवाओं की कीमती जानों के साथ) होता है।

 

कांग्रेस सांसद ने कहा कि जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए युवाओं और पूरे भारत में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने वाले साथियों: यह देश आपकी आवाज सुन रहा है। आपका गुस्सा कोई अनुशासनहीनता नहीं है — यह उस पीढ़ी की पीड़ा है जिसने सब कुछ सही किया और फिर भी जिसे धोखा मिला। आप अकेले नहीं हैं।

 

और चुपचाप देख रहे करोड़ों युवा भारतीयों से मैं कहना चाहता हूं: आपकी पीढ़ी कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे सिर्फ 'मैनेज' किया जाए। आप भारत के भविष्य का जवाब हैं। उम्मीद मत खोइए। यह सीढ़ी फिर से बनाई जाएगी — आपके द्वारा, और आपके साथ खड़े हर भारतीय द्वारा।

 

उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है; अनशन का मकसद भी यही होता है। आने वाले लंबे रास्ते के लिए भारत को आपकी आवाज की जरूरत है।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि सोमवार से संसद का सत्र फिर से शुरू हो रहा है, ऐसे में हमारे पास हमारे लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर छात्रों के मुद्दों को उठाने का अवसर होगा। इस समस्या का समाधान वहीं होना चाहिए, न कि आमरण अनशन के जरिए। कृपया मेरी प्रार्थना स्वीकार करें।

 

थरूर ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि आप आगे बढ़ें और उस संवाद की शुरुआत करें जो हमारा लोकतंत्र अपने युवा नागरिकों का कर्जदार है। यह कमजोरी नहीं है; यह एक कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता है।

कल का मौसम : अगले 12 घंटों में बदलेगा इन 22 राज्यों का मिजाज! IMD ने जारी किया भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

Weather conditions in these 22 states set to change over next 12 hours, IMD issues alert for heavy rain   and thunderstorms

देशभर में मॉनसून एक बार फिर से बेहद आक्रामक रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दोपहर ताजा बुलेटिन जारी करते हुए अगले 12 से 24 घंटों के भीतर देश के 22 राज्यों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। अगर आप भी कल यानी 16 जुलाई को किसी जरूरी काम या यात्रा के लिए घर से बाहर निकलने वाले हैं, तो पहले अपने शहर और राज्य के मौसम का हाल जरूर जान लें।

 

बंगाल की खाड़ी में एक्टिव हुआ नया सिस्टम

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) सक्रिय हो गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिख रहा है कि समंदर से भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बादलों का एक विशाल 'व्हाइट जोन' तेजी से बढ़ रहा है।

 

इस सिस्टम के कारण मॉनसून की ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मध्य, उत्तर और पश्चिमी भारत में भारी नमी वाली हवाएं टकरा रही हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 12 घंटों के भीतर इन हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।

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किन 22 राज्यों में है भारी बारिश की चेतावनी?

IMD द्वारा जारी आधिकारिक चेतावनी के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान भारत के तीन बड़े हिस्सों में मौसम का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है :

 

1. उत्तर और मध्य भारत (North & Central India)

दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश : दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद सहित पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में कल सुबह से ही रुक-रुक कर तेज बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

 

मध्य प्रदेश और राजस्थान : एमपी के पूर्वी हिस्सों (जैसे जबलपुर, रीवा) और राजस्थान के दक्षिणी जिलों (जैसे उदयपुर, कोटा) में भारी से अत्यंत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहाँ कुछ इलाकों में 120mm तक बारिश दर्ज की जा सकती है।

 

पंजाब और हरियाणा : इन राज्यों के तराई वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश की उम्मीद है।

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2. पश्चिमी और तटीय क्षेत्र (West & Coastal Regions)

महाराष्ट्र और मुंबई : कोंकण और मुंबई के तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने और निचले इलाकों में जलजमाव (Waterlogging) की आशंका जताई गई है। मछुआरों को अगले दो दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

 

गुजरात और गोवा : गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में मानसून की सक्रियता बढ़ने से भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है।

 

3. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत (East & Northeast India)

ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार : नए मौसमी सिस्टम का सबसे पहला असर ओडिशा और बंगाल के तटीय जिलों पर दिखेगा। यहां आज रात से ही मूसलाधार बारिश शुरू होने का अनुमान है।

 

असम और मेघालय : पूर्वोत्तर के इन राज्यों में पहाड़ी इलाकों पर भूस्खलन (Landslide) की चेतावनी जारी की गई है।

 

IMD की एडवायज़री : भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें, बिजली के खंभों के पास खड़े न हों और यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय ट्रैफिक व वेदर अपडेट्स की जांच अवश्य कर लें।

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आपके शहर में कल कैसा रहेगा तापमान?

बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में उमसभरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली-NCR में अधिकतम तापमान गिरकर 31°C और न्यूनतम तापमान 25°C के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस नीचे जा सकता है, जिससे मौसम खुशनुमा बना रहेगा।

 

मौसम की पल-पल की लाइव रिपोर्ट और अपने जिले के सटीक पूर्वानुमान के लिए हमारे साथ बने रहें।

Weather Update : उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश पर लगा ब्रेक, इन राज्‍यों में बढ़ा तापमान, जानें देशभर का मौसम

Rain breaks in northwest India, temperatures rise in these states

Weather Update News : दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल बारिश पर ब्रेक लग गया है। आईएमडी ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अगले छह-सात दिनों तक भारी बारिश का अनुमान जताया है, जबकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी और उमस बनी रहेगी। मानसून ब्रेक ने उत्तर भारत के राज्यों में तापमान बढ़ा दिया है। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पिछले 3 दिन से तेज गर्मी पड़ रही है। उधर असम में बाढ़ का पानी 6 जिलों में फैल गया है, जिससे 12 रेवेन्यू सर्कल और 99 गांव प्रभावित हुए हैं।

 

उत्तर भारत के राज्यों में बढ़ा तापमान 

दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल बारिश पर ब्रेक लग गया है। आईएमडी ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अगले छह-सात दिनों तक भारी बारिश का अनुमान जताया है, जबकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी और उमस बनी रहेगी। मानसून ब्रेक ने उत्तर भारत के राज्यों में तापमान बढ़ा दिया है। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पिछले 3 दिन से तेज गर्मी पड़ रही है।

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शिमला में भारी बारिश का यलो अलर्ट

उधर असम में बाढ़ का पानी 6 जिलों में फैल गया है, जिससे 12 रेवेन्यू सर्कल और 99 गांव प्रभावित हुए हैं। हिमाचल प्रदेश में लगातार धूप और कुछ स्थानों पर बादलों के बीच दिन के तापमान में 1 से 2 डिग्री का अंतर आया है। कुछ स्थानों पर वृद्धि तो कुछ में गिरावट दर्ज की गई है। इस सबके बीच इन दिनों अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने 18 व 19 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और शिमला में भारी वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

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कैसा है मध्य प्रदेश का मौसम?

मध्य प्रदेश में आज मानसून पूरी तरह एक्टिव बना हुआ है। प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह से ही बादल छाए रहने के साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। वैसे कुछ जिलों में तेज बारिश की भी संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, नर्मदापुरम, सागर, रीवा, शहडोल, बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला, सीधी, डिंडोरी और आसपास के क्षेत्रों बारिश हो सकती है। ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश के आसार लग रहे हैं। बारिश के कारण लोगों को उमस से राहत मिलेगी। 

 

अरुणाचल प्रदेश के 4 जिलों में बाढ़

पिछले 24 घंटे में अरुणाचल प्रदेश के 4 जिलों में बाढ़, लैंडस्लाइड और भारी बारिश से घरों को नुकसान पहुंचा। राज्य में बारिश-बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 102917 हो गई है। बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाओं में अब तक राज्य में 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 29 लोग घायल हुए हैं। दिल्ली में एनसीआर में आज मौसम सामान्य रहने की संभावना है। हालांकि दिन का तापमान 38 डिग्री के आसपास बना रहेगा।

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इन राज्‍यों में बारिश का अलर्ट

उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर 24 घंटे में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे अगले 7 दिनों के दौरान बारिश बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने आज बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, मेघालय और मणिपुर में बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने ओडिशा के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।