Market cues : बाजार में घबराहट तो बढ़ी लेकिन अभी तक पैनिक की स्थिति नहीं, 23800 का सपोर्ट टूटने पर बढ़ सकती है गिरावट

Trade setup for today : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं,जिससे निफ्टी लगातार चौथे सेशन में दबाव में रहा। 23 जुलाई को इसमें 0.53% की गिरावट आई और यह अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे आ गया। मोमेंटम इंडिकेटर्स भी मंदी के रुझान के मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं। हालिया कमजोरी ने इंडेक्स को अहम 23,800 के सपोर्ट लेवल के करीब पहुंचा दिया है।

बाजार जानकारों का कहना है कि अगर निफ्टी 23,800 के सपोर्ट लेवल से नीचे गिरता है तो यह गिरावट 23,650-23,600 के जोन तक बढ़ सकती। अगर यह इस जोन से भी नीचे जाता है तो इंडेक्स 23,500 के लेवल तक गिर सकता है,जो अगला अहम सपोर्ट लेवल बन सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ 24,000-24,100 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बना रह सकता है

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,819, 23,776 और 23,706

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 23,959, 24,003 और 24,073

डेली चार्ट पर,निफ्टी ने दोनों तरफ शैडो वाली एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जो’हाई वेव’कैंडलस्टिक पैटर्न जैसी दिखती है। यह अपने सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे आ गया,जिससे पता चलता है कि मार्केट पर मंदड़ियों का कंट्रोल बढ़ रहा है। इंडेक्स जून के निचले स्तर से जुलाई के ऊंचे स्तर तक की हालिया रैली के 50 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के करीब भी पहुंच गया। इस लेवल को आम तौर पर एक मजबूत सपोर्ट माना जाता है।

रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स(RSI)गिरकर 45.36 पर आ गया,जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) जीरो लाइन के नीचे और गिर गया और रेड हिस्टोग्राम बार और बढ़ गया। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का रुझान मजबूत हो रहा है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,844, 56,975 और 57,188

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,420, 56,289 और 56,077

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,253, 59,247

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,441, 55,742

बैंक निफ्टी गैप-डाउन ओपनिंग के बाद 0.94 प्रतिशत गिर गया और दोनों तरफ विक्स (wicks) वाली एक बेयरिश कैंडलस्टिक बनाई। यह ज्यादा उतार-चढ़ाव के बीच कमजोरी का संकेत है। बैंकिंग इंडेक्स अपने 20-दिन, 50-दिन और 100-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज(EMA)से नीचे गिर गया। हालांकि इंट्राडे में यह 200-दिन के EMA से नीचे चला गया था,लेकिन यह उस लेवल से ऊपर बंद होने में कामयाब रहा।

शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज में गिरावट का ट्रेंड जारी रहा। मोमेंटम इंडिकेटर भी और कमज़ोर हुए और RSI गिरकर 44.2 पर आ गया। MACD में भी गिरावट का रुख बना रहा और रेड हिस्टोग्राम बार और बढ़ गया। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर बताते हैं कि बेयरिश मोमेंटम मज़बूत हो रहा है,हालांकि 200-दिन का EMA अभी भी एक अहम सपोर्ट लेवल बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

23 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और लगभग 3,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार दो सेशन तक बिकवाली करने के बाद खरीदारी की और 2,947 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने वाला इंडिया VIX कल ऊपर की ओर बढ़ा। यह 1.37 प्रतिशत बढ़कर 13.47 पर पहुंच गया,जो,तेजड़ियों के लिए परेशानी का संकेत है। हालांकि,जब तक यह 15 के स्तर से नीचे है,तब तक यह इंडेक्स चिंताजनक स्तर पर नहीं माना जाएगा। अगर यह लगातार 15 के ऊपर बना रहता है,तो बुल्स की बेचैनी बढ़ सकती है। कुल मिलाकर,इससे पता चलता है कि बाजार में घबराहट तो बढ़ रही है,लेकिन अभी तक पैनिक की स्थिति नहीं बनी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 23 जुलाई को पिछले सेशन के 0.84 से घटकर 0.80 हो गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

 

 

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Sotefin IPO Listing: ढहते मार्केट में अपर सर्किट, ₹187 के शेयरों ने लिस्टिंग पर मचाया धमाल

Sotefin IPO Listing: ऑटोमेटेड कार पार्किंग सिस्टम कंपनी सोटेफिन भारत के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹187 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹205.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 9.63% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹215.25 (Sotefin Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 15.11% मुनाफे में हैं।

Sotefin Bharat IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

सोटेफिन भारत का ₹90 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-20 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.99 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.82 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.05 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.78 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 48 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹20.13 करोड़ कोलकाता में एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹8.17 करोड़ प्रस्तावित नए ऑफिस प्रेमिसेज की जरूरतों, ₹40.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Sotefin के बारे में

सोफेटिन भारत मैकेनाइज्ड और ऑटोमेटेड पार्किस सॉल्यूशंस ऑफर करती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में फुल्ली ऑटोमेटेड रोबोटिक पार्किंग सिस्टम, पजल पार्किंग सिस्टम, टावर पार्किंग सिस्टम और स्टैक पार्किंग सिस्टम हैं। कंपनी O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) और आफ्टर सेल्स सर्विसेज भी ऑफर करती है। मार्च 2026 तक कंपनी 55 प्रोजेक्ट्स पूरे कर चुकी थी और फिलहाल देश कई कई शहरों के साथ-साथ अमेरिका और दुबई में 30 से अधिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 66% की अधिक रफ्तार से बढ़कर ₹17.37 करोड़ और टोटल इनकम 44% से अधिक तेजी से बढ़कर ₹118.23 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹24.01 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹70.57 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : अगर निफ्टी 24000 के नीचे बना रहता है तो 23800 तक बढ़ सकती है गिरावट, 24100 पर रेजिस्टेंस

Trade setup for today : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण 22 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतें $95 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इससे निफ्टी 50 पर बिकवाली का दबाव पड़ा और यह 0.8 प्रतिशत गिरकर 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से थोड़ा नीचे बंद हुआ। मोमेंटम इंडिकेटर बाजार में शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से भी नीचे आ गया है,जो बताता है कि बाजार में मंदड़िए मजबूत स्थिति में हैं।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी 24,000 के लेवल से नीचे बना रहता है,तो 23,800 तक गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस लेवल के टूटने पर मंदड़िए बाजार पर अपनी पकड़ और मजबूत कर सकते हैं। हालांकि,जानकारों के मुताबिक,अगर बाजार में रिकवरी होती है तो 24,100-24,200 का दायरा एक रेजिस्टेंस का काम कर सकता है

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,963, 23,915 और 23,836

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,120, 24,168 और 24,246

कुछ समय तक एक ही दायरे में रहने के बाद,निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक लंबी’बेयरिश कैंडल’बनाई और अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज (100-दिन के EMA) और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से नीचे आ गया। इससे पता चलता है कि बाजार में बिकवाली करने वालों का पलड़ा भारी हो गया है। RSI गिरकर 48.61 पर आ गया और इसमें नेगेटिव क्रॉसओवर देखा गया,जबकि MACD सिग्नल लाइन से और नीचे चला गया और हिस्टोग्राम में लाल बार और बड़ा हो गया,जो मंदी के रुझान(बेयरिश मोमेंटम)के मज़बूत होने का संकेत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,633, 57,835 और 58,161

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,981, 56,780 और 56,454

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,717

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,441, 55,742

बैंक निफ्टी में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह पिछले कई सेशन की कंसोलिडेशन रेंज से नीचे आ गया। डेली चार्ट पर इसने एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई,जो बढ़ते सेलिंग प्रेशर का संकेत है। बैंकिंग इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से काफी नीचे आ गया,हालांकि यह अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। RSI गिरकर 48.1 पर आ गया और बेयरिश क्रॉसओवर का संकेत देता रहा,जबकि MACD रेफरेंस लाइन से नीचे बना रहा और हिस्टोग्राम में लाल बार का आकार बढ़ता गया,जो शॉर्ट टर्म में कमजोरी का संकेत है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

22 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹819 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार दूसरे सेशन में बिकवाली जारी रखी और ₹418 करोड़ के शेयर बेचे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने वाला इंडिया VIX 5.5% बढ़कर 13.29 पर पहुंच गया और अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर चला गया। यह तेजड़ियो के लिए बढ़ती परेशानी का संकेत है। अगर यह 15 के लेवल की ओर और बढ़ता है तो बुलिश खेमे पर दबाव और बढ़ सकता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 22 जुलाई को पिछले सेशन के 1.01 से गिरकर 0.84 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Dr Reddy’s Shares: अमेरिकी मार्केट में 10% की गिरावट, तीन ब्रोकरेजेज से समझें आगे की स्ट्रैटेजी

Dr Reddy’s Share Price: दिग्गज फार्मा कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजे पर अमेरिका में लिस्टेड इसके शेयर यानी ADR (अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स) धड़ाम हो गए। अमेरिकी मार्केट में यह 10% टूट गया। अब ऐसे में अब भारतीय स्टॉक मार्केट खुलने पर इसके शेयरों में भी तेज गिरावट की आशंका दिखने लगी है। इससे पहले रिजल्ट आने वाले दिन यानी 22 जुलाई को बीएसई पर यह नतीजे आने से पहले 1.95% की गिरावट के साथ ₹1183.00 पर बंद हुआ था।

एक साल में इसके शेयरों के चाल की बात करें तो 21 जनवरी 2026 को बीएसई पर एक साल के निचले स्तर ₹1149.00 से पांच ही महीने में यह 23.10% चढ़कर 29 जून 2026 को यह एक साल के हाई ₹1414.40 पर पहुंच गया था। आगे की बात करें तो इस कवर करने वाले ओवरऑल 41 एनालिस्ट्स में से 16 ने खरीदारी, 10 ने होल्ड और 15 ने सेल रेटिंग दी है।

Dr Reddy’s पर क्या है ब्रोकरेजेज का रुझान

घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने डॉ रेड्डीज की न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है लेकिन टारगेट प्राइस घटाकर ₹1125 कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि सेमाग्लूटाइड से जुड़े रेगुलेटरी इश्यू को सुलझाने पर काम हो रहा है तो b-abatacept से कमर्शियल फायदा मार्च 2028 तिमाही से मिलने की उम्मीद है। हालांकि ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि वित्त वर्ष 2026 के हाई बेस के चलते वित्त वर्ष 2027 में कमाई घट सकती है और वित्त वर्ष 2028 से फिर सुधार दिख सकती है

सीएलएसए ने भी इस वित्त वर्ष 2027 के लिए डॉ रेड्डीज के रेवेन्यू के अनुमान को घटा दिया है क्योंकि इसे बिक्री में 30-40 लाख पेन का झटका लगने की आशंका है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि सेमाग्लूटाइड से जुड़ी दिक्कते नवंबर तक सुलझ सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने अगले तीन वर्षों के लिए मार्जिन अनुमान भी घटा दिए हैं। सीएलएसए ने इसे होल्ड रेटिंग दी है और ₹1240 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है।

जेपी मॉर्गन ने ₹1,100 के टारगेट प्राइस पर डॉ रेड्डीज को अंडरवेट रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि रेवेन्यू में 52% हिस्सेदारी ब्रांडेड बिजनेस की होने के बावजूद कंपनी की कोर प्रॉफिटेबिलिटी अभी भी कमजोर बनी हुई है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक अगर कनाडा में सेमाग्लूटाइड और एबेटेसेप्ट की लॉन्चिंग में और देरी होती है या बिक्री उम्मीद से सुस्त रहती है, तो इससे FY2028–FY2029 की कमाई पर बड़ा असर पड़ सकता है, क्योंकि इन दोनों की कंपनी की कमाई में 20% से अधिक हिस्सेदारी होने का अनुमान है। इन दोनों प्रोडक्ट्स को हटाकर ब्रोकरेज का मानना है कि डॉ रेड्डीज का बेस बिजनेस FY27 की अनुमानित कमाई के मुकाबले 32 गुने और FY28 की अनुमानित कमाई के मुकाबले 30 गुने के महंगे भाव पर है

Semaglutide को लेकर क्या है दिक्कत

इस महीने की शुरुआत में डॉ रेड्डीज ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया था कि प्रोडक्ट में API से जुड़ी दिक्कत के चलते सेमाग्लूटाइड के कुछ बैच तय मानकों के हिसाब से नहीं पाए गए थे। इस खुलासे के बाद 9 जुलाई को इसके शेयर 6% टूट गए थे। हालांकि मैनेजमेंट को सेमाग्लूटाइड मामले में आगे किसी और प्रोविजन के आसार नहीं दिख हे हैं और उनका मानना है कि वे इसकी असल वजह का पता लगाने पर काम कर रहे हैं। बता दें कि ₹240 करोड़ के सेमाग्लूटाइड एपीआई प्रोविजन के चलते जून 2026 तिमाही में कंपनी के प्रॉफिटेबिलिटी को झटका लगा।

Dr Reddy’s Q1 Results: डॉ रेड्डीज का प्रॉफिट 69 फीसदी गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हाहाकार, ₹4 लाख करोड़ स्वाहा, Sensex तीसरे दिन लाल, Nifty टूटकर 24000 के नीचे बंद

Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में कच्चे तेल में और उबाल आया तो मार्केट में आज भी इसकी आंच महसूस हुई। घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन फिसले। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24,000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी आज काफी दबाव दिखा और स्मॉलकैप स्पेस में तो थोड़ी अधिक ही। निफ्टी मिडकैप 100 में डेढ़ फीसदी से थोड़ी अधिक गिरावट आई तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 1% से अधिक टूटकर बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आज ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की लेकिन बाकी अहम सेक्टर्स के दबाव में घबराहट गायब नहीं हो पाई। निफ्टी एफएमसीजी आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ तो निफ्टी ऑटो भी बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं रियल्टी सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स ढाई फीसदी से अधिक, निफ्टी पीएसयू बैंक करीब 2%, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% से अधिक, निफ्टी आईटी डेढ़ फीसदी, और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक कमजोर हुआ। बिकवाली के इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹4 लाख करोड़ से अधिक घट गया यानी निवेशकों की दौलत ₹4 लाख करोड़ से अधिक कम हो गई।

इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के एक दिन पहले आज सेंसेक्स (Sensex) 715.06 प्वाइंट्स यानी 0.92% की कमजोरी के साथ 76,755.05 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 191.45 प्वाइंट्स यानी 0.79% की गिरावट के साथ 23,996.25 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 828.92 प्वाइंट्स टूटकर 76,641.19 और निफ्टी 226.30 प्वाइंट्स गिरकर 23,961.40 तक आ गया था।

निवेशकों के ₹4.16 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 21 जुलाई 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,84,21,297.62 करोड़ था। आज यानी 21 जुलाई 2026 को यह घटकर ₹4,80,04,542.03 करोड़ रह गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹416,755.59 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 12 शेयर ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें से आज सिर्फ 12 ही ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। सबसे अधिक तेजी आज जोमैटो की एटर्नल, एचयूएल और पावरग्रिड में रही। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट आज इंडिगो, एक्सिस बैंक और इंफोसिस में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

sensex 145

114 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4418 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 1473 शेयर आज मजबूत हुए तो 2762 में गिरावट रही जबकि 183 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 114 शेयर एक साल के हाई और 100 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IndiaMART Shares: 7% टूटकर शेयर एक साल के निचले स्तर पर, इन दो वजहों से धड़ाम, अब आगे ये है रुझान

IndiaMART Share Price: कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में आज इंडियामार्ट इंटरमेश के शेयर धड़ाम हो गए। जून तिमाही के कारोबारी नतीजे उम्मीद के मुताबिक रही लेकिन लगातार तीसरी तिमाही में पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट और कलेक्शन ग्रोथ में सुस्ती से सेंटिमेंट प्रभावित हुआ और शेयर फिसल गए। शेयर 7% से अधिक टूटकर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद शेयर संभल नहीं पाए और अब भी यह काफी कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 4.63% की गिरावट के साथ ₹1830.35 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.51% फिसलकर एक साल के निचले स्तर ₹1,775.00 पर आ गया था। पिछले साल 25 अगस्त 2025 को यह एक साल के हाई ₹2686.55 पर था।

IndiaMART के शेयरों को क्यों लगा झटका

जून 2026 तिमाही में ऑनलाइन बी2बी मार्केटप्लेस इंडियामार्ट का कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 12.2% बढ़कर ₹172.2 करोड़ और ऑपरेशनल रेवेन्यू 11.4% बढ़कर ₹414.4 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो इस दौरान कंपनी का ईबीआईटीडीए 9.4% बढ़कर ₹145.9 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 35.8% से 35.4% पर आ गया। सालाना आधार पर कंपनी का कस्टमर कलेक्शंस 8% बढ़ गया जोकि पांच तिमाहियों में सबसे सुस्त ग्रोथ। इससे पहले चार तिमाहियों में यह हर तिमाही 10%-17.5% की रफ्तार से बढ़ा था। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी ने ₹163 करोड़ का कैश जेनेरेट किया।

निवेशकों के लिए एक मुख्य चिंता पेइंग सब्सक्राइबर्स की संख्या में लगातार गिरावट है। मार्च तिमाही में इसके 2.20 लाख सब्सक्राइबर्स थे, जो घटकर जून तिमाही के आखिरी तक 2.18 लाख रह गए। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब इसमें गिरावट आई। हालांकि पेइंग सप्लायर्स में बेहतर कमाई के चलते ARPU (औसतन रेवेन्यू प्रति यूजर) सालाना आधार पर 7.8% बढ़कर ₹69,000 पर पहुंच गया। इसके अलावा बोर्ड ने रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर एक पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी इंडियामार्ट फाइनेंस बनाने को मंजूरी दी है जो बिजनेस यूजर्स को शॉर्ट-टर्म वर्किंग कैपिटल को लेकर मदद करेगी।

इंडियामार्ट पर ब्रोकरेजेज क्यों है बेयरेश?

नए पेइंग सब्सक्राइबर्स में गिरावट के चलते नोमुरा ने इंडियामार्ट को रिड्यूस रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹1,810 फिक्स किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि मीडियम से लॉन्ग टर्म में इन्हें आकर्षित करने के लिए प्रोडक्ट इवॉल्यूशन बहुत ज़रूरी है। नोमुरा का कहना है कि शेयरों में जोरदार तेजी के जरूरी है कि नए सब्सक्राइबर्स की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए।

एक और ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इंडियामार्ट पर बेयरेश रुझान अपनाया है और इसे ₹1650 के टारगेट प्राइस के साथ अंडरपरफॉर्म रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पेड सप्लायर बेस में गिरावट कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका है। जेफरीज का कहना है कि सब्सक्राइबर जोड़ने में लगातार कमजोरी से इसके नेटवर्क इफेक्ट पर असर पड़ सकता है जिसका फ़ायदा इस प्लेटफॉर्म को पहले मिलता रहा है।

18% टूटे Medplus के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद यह बात पड़ी भारी

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

18% टूटे Medplus Health के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद कमजोर रिजल्ट पड़ा भारी

Medplus Health Share Price: देश की सबसे बड़ी रिटेल फार्मेसी ओमनी चैनल मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों को जून तिमाही के रिजल्ट से तगड़ा शॉक लगा है। इसके झटके से मेडप्लस के शेयर करीब 18% टूट गए और फिसलकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। शेयरों को निवेश के दो बड़े ऐलान से भी सपोर्ट नहीं मिल पाया। अभी की बात करें तो फिलहाल 14.95% की गिरावट के साथ मेडप्लस का शेयर ₹676.45 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 17.80% टूटकर ₹653.80 तक आ गया था।

Medplus Health Services Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.7% गिरकर ₹33.17 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू इस दौरान 21.84% बढ़कर ₹1879.60 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 1.9% बढ़कर ₹130.7 करोड़ पर पहुंचा लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.5% से फिसलकर 7.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी ने 146 नए स्टोर खोले जिसमें 131 फ्रेंचाइजी स्टोर्स थीं।

कहां निवेश कर रही मेडप्लस?

एक्सचेंज फाइलिंनग में नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने बताया कि इसकी मुख्य सब्सिडियरी ऑप्टिवल हेल्थ सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तेलंगाना के हैदराबाद में एक फूड पार्क बनाने की योजना बना रही है। इसमें कोल्ड प्रेस ऑयल निकालने वाली यूनिट भी शामिल होगी। इसमें करीब ₹40 करोड़ की पूंजी लगेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना हैदराबाद में एक कॉन्सिअर्ज हेल्थ एंड वेलनेस सर्विसेज फैसिलिटी शुरू करने की भी है। इसमें करीब ₹115 करोड़ का निवेश होगा जिसमें ₹90 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

मे़डप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को कुछ ही महीने में बीमार कर दिया। 21 मई 2026 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 35.92% फिसलकर आज 22 जुलाई 2026 को ₹653.80 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार 22 जुलाई को 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की नई टाइमलाइन का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद अब सन फार्मा (Sun Pharma), ल्यूपिन (Lupin), सिप्ला (Cipla) समेत देश की कई दवा कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका में आयात होने वाली दवाईयों पर सभी जेनेरेकि दवाओं पर अब दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक इसके बाद 1 अगस्त 2028 से इन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा।

Trump Tariffs: अमेरिका के लिए कितना अहम है जेनेरिक्स?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुकाबिक जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका में करने के लिए टैरिफ पॉलिसी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन्हें टैरिफ झेलना पड़ेगा। इससे पहले ट्रंप ने जो टैरिफ लगाए थे, उसके दायरे में ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाईयां थीं, जिसमें अभी भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले वाली पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयां शामिल नहीं थीं क्योंकि अमेरिका में डॉक्टर्स करीब 90% जेनेरिक्स दवाईयां ही लिखते हैं। ट्रंप सरकार ने ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर फार्मा इंडस्ट्री की जांच भी शुरू की थी। इसके अलावा आम लोगों सीधे सस्ती दवाओं की बिक्री के लिए Trump RX नाम से एक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर?

जेनेरिक्स पर अमेरिकी टैरिफ का भारतीय कंपनियों पर बहुत असर पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि भारतीय दवा कंपनियों का अमेरिका में जितना सेल्स वॉल्यूम है, उसका करीब 90% तो जेनेरिक्स दवाईयों का है तो अमेरिका जितना जेनेरिक्स आयात करता है, उसमें 40% भारत से है। भारत से अमेरिका को करीब $1 हजार करोड़ का फार्मा एक्सपोर्ट है। इसके अलावा भारत के बाहर अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से मंजूरी मिली हुई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में सबसे अधिक भारतीय कंपनियों की ही हैं, जिनकी संख्या लगभग 670 है।

अमेरिका की तुलना में भारत में क्यों बनती हैं अधिक दवाईयां

भारत में दवा बनाने की लागत अमेरिका की तुलना में 30-50% तक सस्ती पड़ती है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना है कि अभी यह देखना बाकी है कि इस नीति को वास्तव में कैसे लागू किया जाएगा और ट्रंप के कार्यकाल के बाद इस पर क्या होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लगातार कीमतों में गिरावट, तगड़े कॉम्पटीशन , अलग-अलग प्रकार की डोजेज और सख्त मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी के चलते अमेरिका में बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अमेरिका में बड़े वॉल्यूम में प्रोडक्शन कैपेसिटी डेवलप करने में कई दशक लग सकते हैं, क्योंकि कम लागत वाली जेनेरिक दवाइयां बनाने को लेकर अमेरिका की क्षमता काफी हद तक कम हो चुकी है।

अमेरिका में किन भारतीय कंपनियों की है मौजूदगी

कई भारतीय कंपनियों की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। अरबिंदो फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी मौजूदगी है तो डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, सिप्ला और जाइडस लाइफ जैसी कंपनियों का भी अमेरिका में कारोबार फैला हुआ है। वहीं एल्केम लैब्स और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियां पूरी तरह से भारत में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर निर्भर हैं और अमेरिका से उनकी कमाई बहुत अधिक नहीं होती है। बायोकॉन जैसी कंपनियां बायोसिमिलर और जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन के लिए भारत और मलेशिया की यूनिट्स पर निर्भर हैं, जबकि सेनोरेस फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी है।

Market Insight : IT की रैली पर फिर मंडरा रहा खतरा, ट्रंप ने फार्मा सेक्टर को  दिया झटका, जानिए इनमें अब क्या हो रणनीति

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: खास वजहों से IT-Pharma Sector में बिकवाली की आंधी, 500 प्वाइंट्स टूट गया Sensex

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी फिसल गए। फार्मा सेक्टर में जेनेरिक्स दवाईयों पर अमेरिकी टैरिफ और एआई से जुड़े शेयरों में तेजी के चलते भारतीय आईटी स्टॉक्स पर दबाव में सेंसेक्स 500 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24000 के एकदम करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी तक की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:34 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 564.77 प्वाइंट्स यानी 0.73% की गिरावट के साथ 76,905.34 और निफ्टी (Nifty) 158.00 प्वाइंट्स यानी 0.65% की फिसलन के साथ 24,029.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 581.61 प्वाइंट्स टूटकर 76,888.50 और निफ्टी 168.30 प्वाइंट्स गिरकर 24,019.40 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

US-Iran War

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हवाई हमले किए। इन हमलों में मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसने मार्केट में सेंटिमेंट कमजोर किया है।

आईटी-फार्मा सेक्टर में तेज बिकवाली

मार्केट पर आज सबसे अधिक दबाव फार्मा सेक्टर ने बनाया है। ट्रंप ने अपनी पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयों को भी शामिल किया तो इस सेक्टर की कंपनियों को झटका लगा और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक फिसल गया। इसके अलावा एआई से जुड़े स्टॉक्स में तेजी के चलते भारतीय मार्केट में आईटी कंपनियों पर दबाव पड़ा और निफ्टी आईटी 1% से अधिक टूट गया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी बिकवाली का तेज दबाव है और सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 3.25% की गिरावट के साथ 13.01 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

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US-Iran War: अब आर-पार के मूड में ट्रंप! अमेरिका ने ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर पर की बमबारी, होर्मुज में बढ़ा तनाव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।