Stock Market Crash: ट्रंप के बयान से तबाही! सिर्फ 40 मिनट में सेंसेक्स 1000 अंक टूटा; अब तीन फैक्टर पर मार्केट की नजर

Stock Market Crash: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने बुधवार को दुनिया भर के बाजारों में भारी गिरावट (why market is down today) ला दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है। इसके बाद भारतीय शेयर बाजार में भी जोरदार बिकवाली शुरू हो गई। महज 40 मिनट में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं, बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX 27% उछल गया।

दोपहर 1:40 बजे सेंसेक्स 77,603.90 पर कारोबार कर रहा था। अगले 40 मिनट में यह करीब 1,076 अंक लुढ़ककर 76,527.81 पर आ गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15% टूटकर 76,503.60 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 516.65 अंक यानी 2.12% गिरकर 23,882.05 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही। करीब 3,095 शेयर गिरे, जबकि सिर्फ 1,000 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

ट्रंप ने ईरान सीजफायर पर क्या कहा?

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। उन्होंने साफ कहा कि अब वह ईरान के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने ईरानी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हुए, तो वह उनका इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रतिनिधि ईरान से बातचीत जारी रखेंगे। लेकिन उन्हें नहीं लगता कि उससे कोई नतीजा निकलेगा।

तनाव अचानक क्यों बढ़ गया?

ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने ईरान पर फिर से हवाई हमले किए हैं। साथ ही अमेरिका ने वह छूट भी खत्म कर दी है, जिसके तहत ईरान वैश्विक बाजार में तेल बेच रहा था।

इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने एक अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया है।

इसके बाद बहरीन और कुवैत में एयर रेड सायरन बजने लगे। कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के हमलों का जवाब दे रही है। हालांकि, अमेरिकी सेना की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बाजार गिरने के अन्य 6 बड़े वजह

कच्चे तेल में तेज उछाल: अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 6% उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल बाजार के लिए चिंता की बात है।

FII निवेश पर अनिश्चितता: Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, हाल में FII की खरीदारी से बाजार मजबूत हो रहा था। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव ने इस सकारात्मक माहौल पर फिलहाल सवाल खड़े कर दिए हैं।

FII खरीदारी बनी हुई है: पिछले तीन कारोबारी सत्र में FIIs ने करीब 1,991 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। हालांकि रकम बड़ी नहीं है, लेकिन लगातार खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

टेक्निकल संकेत अभी कमजोर: SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,120-24,140 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर यह टूटता है, तो अगला सपोर्ट 23,970-23,990 के बीच होगा। वहीं 24,370-24,390 के ऊपर निकलने पर तेजी फिर लौट सकती है।

ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली: फाइनेंशियल सर्विसेज, FMCG, ऑटो और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इससे बाजार की गिरावट और बढ़ गई।

बड़े शेयरों में भारी कमजोरी: मारुति सुजुकी में 3% से ज्यादा गिरावट आई। इसके अलावा IndiGo, Hindustan Unilever, UltraTech Cement और Bharat Electronics जैसे हैवीवेट शेयर भी दबाव में रहे।

India VIX में तेज उछाल: बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX इंट्राडे कारोबार में 23% से ज्यादा उछलकर 14.33 पर पहुंच गया। VIX में तेज बढ़त आमतौर पर आने वाले दिनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव का संकेत देती है।

बाजार में गिरावट पर एक्सपर्ट की राय

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि पश्चिम एशिया में फिर बढ़े तनाव ने भारतीय शेयर बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से महंगाई की चिंता फिर बढ़ गई है। इसका असर भारत और अमेरिका दोनों देशों के बॉन्ड यील्ड पर भी देखने को मिला।

उनके मुताबिक, India VIX में तेज उछाल यह दिखाता है कि निवेशकों के बीच डर बढ़ गया है। यही वजह रही कि लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। इसके साथ ही पहली तिमाही (Q1) के कमजोर नतीजों की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।

तीन फैक्टर तय करेंगे बाजार की चाल

विनोद नायर का कहना है कि सिर्फ कंपनियों के नतीजे ही बाजार की दिशा तय नहीं करेंगे। निवेशकों की नजर मैनेजमेंट की कमेंट्री और भविष्य ग्रोथके आउटलुक पर भी रहेगी। इससे पता चलेगा कि कमाई में कमजोरी दूसरी तिमाही (Q2) तक बनी रहती है या नहीं।

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल तीन बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई की मौद्रिक नीति। दूसरा, अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ ट्रूस की अवधि खत्म होने का असर। और तीसरा, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या कम होता है, क्योंकि यही आगे बाजार की दिशा तय करेगा।

ट्रंप ने खत्म किया सीजफायर! अब तेल, सोना और चांदी पर क्या होगा असर; जानिए एक्सपर्ट्स से

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Market Trend : पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ने से दबाव में बाजार, कमजोर मार्केट में भी इन दो शेयरों में होगी बंपर कमाई

Market Trend : पश्चिम एशिया में टेंशन फिर बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में ईरान की ओर से तीन टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने भी जवाबी हवाई हमले किए हैं। US ने ईरान के ग्लोबल मार्केट में तेल बेचने पर दी गई छूट भी वापस ले ली है। कच्चा तेल 4% उछलकर 76 डॉलर के करीब पहुंच गया है। पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल में उछाल से ग्लोबल बाजारों का मूड खराब हो गया है। गिफ्ट निफ्टी में 200 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट है। वहीं FIIs की कैश में लगातार तीसरे दिन खरीदारी हुई है। FIIs ने थोड़े शॉर्ट्स भी कवर किए हैं।

एशिया में मिला-जुला कारोबार हो रहा है। कल की भारी गिरावट के बाद KOSPI में हल्की रिकवरी है। US इंडेक्सों में भी ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली दिखी है। डॉलर इंडेक्स 101 के पार निकल गया है। US बॉन्ड यील्ड में भी तेज उछाल दिखा है। इधर FOMC मिनट्स से पहले सोने और चांदी में भी गिरावट है। चांदी 3 फीसदी फिसली है।

निफ्टी पर रणनीति

ऐसे में आज क्या हो ट्रेडिंग रणनीति, इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24424-24477/531 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24571-24589/623 पर है। इसके लिए पहला बेस 24261-24193 पर और बड़ा बेस 24139-24088/24011 पर है। एक्सपायरी पर आखिरी घंटे में हल्की बिकवाली दिखी। निफ्टी 200 DMA के अहम लेवल से लौटा। FIIs की कैश खरीदारी हुई। निफ्टी में खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग भी हुई। जियोपॉलिटिकल टेशंन से कच्चा तेल 76 डॉलर के पार चला गया है। AI थीम में अब भी दबाव जारी है। 24,400-24,600 जोन में भारी कॉल राइटिंग हुई। सपोर्ट पर नजर बनाए रखें। फिलहाल निफ्टी की चाल को समझने में समय लगेगा।

बेस-1 टूटने पर पोजिशनल लॉन्ग से निकलने की सलाह होगी। बेस-1 के नीचे टिकने पर बेस-2 की संभावना बढ़ेगी। गिरावट पर खरीदारी के लिए बेस-1 का होल्ड होना जरूरी है। AI थीम में कमजोरी के बीच निफ्टी IT सबसे अहम है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए के लिए पहला रजिस्टेंस 58512-58640 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58891-59067/59273 पर है। इसके लिए पहला बेस 58010-57810 पर और बड़ा बेस 57531-57410/338 पर है। 58,500 जोन पर कॉल राइटिंग से रेजिस्टेंस मजबूत है। PSU बैंकों के दबाव से बैंक निफ्टी पर असर है। पिछले 10-12 सत्रों से 10 DMA मजबूत सपोर्ट बना है। 58,000 जोन में पुट राइटर्स का मजबूत सपोर्ट है। बेस -1 के ऊपर बैंक निफ्टी में मजबूती बरकरार है। 57,810 के नीचे टिकने पर बेस-2 की संभावना बढ़ेगी।

Market cues : निफ्टी के 24500 के नीचे बने रहने तक बाजार में कंसोलीडेशन जारी रहने की उम्मीद

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं Prakashgaba.com के प्रकाश गाबा। इनकी आज HDFC Life में 567 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 580 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, Jubliant food में 450 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 470 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: US-ईरान युद्ध बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 2% बढ़ीं, ब्रेंट क्रूड $75 प्रति बैरल से ऊपर

Crude Oil Price:  होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर तेहरान के हमलों के जवाब में अमेरिका के ईरान पर नए हमले करने के बाद बुधवार को तेल की कीमतें बढ़ गई। अगस्त डिलीवरी के लिए US बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 2.1% बढ़कर $71.87 प्रति बैरल हो गया, जबकि सितंबर डिलीवरी के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.9% बढ़कर $75.53 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेज़ी है?

US सेंट्रल कमांड के अनुसार, US ने कमर्शियल शिपिंग पर हमलों के लिए बड़ी कीमत लगाने के मकसद से “ताकतवर हमले” किए। ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक द्वीप पर धमाकों की खबर है, जबकि डिप्टी विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने चेतावनी दी कि तेहरान जवाबी कार्रवाई करेगा।

एक अलग कदम में, US ट्रेजरी ने ईरान को तेल एक्सपोर्ट करने की इजाज़त देने वाले सेंक्शन में मिली छूट को रद्द कर दिया, जिससे तेहरान के साथ अंतरिम शांति समझौते का एक अहम नियम पलट गया। यह बढ़ोतरी स्ट्रेटेजिक वॉटरवे में तीन जहाजों पर हमलों के बाद हुई, जिसमें एक गैस कैरियर और एक सऊदी ऑयल टैंकर शामिल थे, जिससे पिछले महीने डील लागू होने के बाद से मंगलवार ऐसी घटनाओं के लिए सबसे बिज़ी दिन बन गया।

बढ़े हुए तनाव ने यूरोपियन नेचुरल गैस की कीमतों को भी बढ़ा दिया, फ्यूचर्स 4.9% तक बढ़ गए।

दूसरी तिमाही में गिरावट के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया, जब क्षेत्रीय तनाव कम होने से क्रूड पर असर पड़ा था। कमर्शियल जहाजों पर हुए नए हमलों और US मिलिट्री एक्शन से उम्मीद है कि शिपिंग कंपनियां और क्षेत्रीय तेल प्रोड्यूसर होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करने से डिसकरेज होंगे, जो फारस की खाड़ी के एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है।

नए डेवलपमेंट से पहले, गोल्डमैन सैक्स जैसे बैंकों ने चेतावनी दी थी कि क्रूड मार्केट सरप्लस में वापस आ सकता है क्योंकि क्षेत्रीय प्रोड्यूसर प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं और स्ट्रेट के ज़रिए शिपिंग एक्टिविटी ठीक हो रही है। उसी समय, OPEC+ ने प्रोडक्शन में कटौती को वापस लेने की अपनी योजना जारी रखी।

होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल वॉशिंगटन और तेहरान के बीच झगड़े का एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मंगलवार को, ईरान ने यूनाइटेड नेशंस की शिपिंग एजेंसी को बताया कि वह वॉटरवे के कुछ हिस्सों पर अधिकार रखता है, जो शांति के समय में दुनिया के रोज़ाना के तेल ट्रेड का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता था।

इस बीच, ब्रेंट क्रूड का प्रॉम्प्ट स्प्रेड वापस बैकवर्डेशन में चला गया—एक बुलिश मार्केट स्ट्रक्चर जहां कम समय के कॉन्ट्रैक्ट बाद के कॉन्ट्रैक्ट के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड होते हैं। बुधवार को स्प्रेड 23 सेंट प्रति बैरल था, जो हफ्ते की शुरुआत में देखे गए 25-सेंट के कॉन्टैंगो, जो कि उल्टा प्राइसिंग स्ट्रक्चर था, से उलटा था।

Crude Oil Price: 60 डॉलर से नीचे जा सकता है कच्चा तेल! एक्सपर्ट बोले- चीन बदलेगा पूरा खेल

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol-Diesel Price Today: 8 जुलाई के लेटेस्ट रेट जारी, जानें किस शहर में कितना मिल रहा है पेट्रोल और डीजल

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 08 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Sabang Port Deal: ग्रेट निकोबार से सिर्फ 100 मील दूर! PM मोदी कर आये वो डील जो हिंद महासागर में चीन को देगी शिकस्त

होर्मुज की अहमियत को देखने के बाद भारत ने स्ट्रेट ऑफ मलक्का में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने जा रहा है। भारत और इंडोनेशिया ने इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के उत्तरी हिस्से में स्थित रणनीतिक रूप से अहम सबांग बंदरगाह को मिलकर विकसित करने के लिए एक समझौता किया है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और मजबूत होगा। साथ ही, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति भी और बेहतर होगी। सबांग पोर्ट भारत में बन रहे ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट पोर्ट से करीब 160 किलोमीटर दूर है। यह मलक्का स्ट्रेट के पास स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार और तेल-गैस की आपूर्ति होती है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब भारत विदेशी पोर्ट पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और पूर्वी हिंद महासागर में अपनी समुद्री ताकत और मौजूदगी को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

सबांग पोर्ट क्यों है इतना अहम?

मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार और तेल-गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। चीन के लिए भी यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है। उसके कच्चे तेल का करीब 80 प्रतिशत आयात और लगभग 60 प्रतिशत सामान का व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत के लिए सबांग पोर्ट की अहमियत भी काफी ज्यादा है। यह परियोजना भारत में बन रहे ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट पोर्ट को और मजबूत करेगी। दोनों बंदरगाह मिलकर मलक्का स्ट्रेट के आसपास भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रणनीतिक महत्व के साथ-साथ सबांग बंदरगाह भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को भी मजबूती देगा। इससे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और इंडोनेशिया के आचे प्रांत के बीच समुद्री संपर्क बेहतर होगा। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाओं का भी विस्तार होने की उम्मीद है।

व्यापार और भविष्य की संभावनाएं

फिलहाल सबांग एक छोटा पोर्ट है, जहां करीब 50 हजार टन तक के जहाज आ सकते हैं। यहां माल चढ़ाने और उतारने का काम अभी ज्यादातर जहाजों में लगी क्रेनों की मदद से किया जाता है। समुद्री मामलों के जानकारों का मानना है कि भविष्य में सबांग को एक बड़े क्षेत्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया के छोटे बंदरगाहों तक सामान पहुंचाना आसान होगा और इस क्षेत्र में व्यापार को नई गति मिलेगी।

नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के पूर्व निदेशक विजय सखूजा के अनुसार, भविष्य में सबांग बंदरगाह को बंगाल की खाड़ी के कई बड़े बंदरगाहों, जैसे चट्टोग्राम और यांगून, से कंटेनर जहाजों के जरिए जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा हल्दिया, चट्टोग्राम और दावेई जैसे बंदरगाहों के साथ कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, लौह अयस्क, उर्वरक और अनाज जैसी वस्तुओं की आवाजाही भी आसान हो सकती है।

एक्सपर्ट का मानना है कि यह सिर्फ व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर पूर्वी हिंद महासागर में गश्त, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के दौरान भारतीय नौसेना इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईंधन भरने, जरूरी सामान उपलब्ध कराने और जहाजों के रखरखाव के लिए भी कर सकती है। इससे भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

24 घंटे में तीन टैंकरों पर अटैक…होर्मुज में फिर टेंशन, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आई बड़ी खबर

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तीसरे कॉमर्शियल जहाज पर हमला किया गया है। इस घटना के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने और सीजफायर पर सहमति बनी हुई है।

बीते 24 घंटे में तीसरे जहाज पर हमला 

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ के मुताबिक, ताजा घटना में एक तेल टैंकर पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला किया गया। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी के घायल होने या जहाज को बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी इस घटना ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले मंगलवार को भी दो अलग-अलग हमले हुए थे। इनमें कतर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ले जाने वाले जहाज पर हमला और सऊदी अरब के झंडे वाले कच्चा तेल ले जा रहे टैंकर को नुकसान पहुंचने की घटना शामिल है।

होर्मुज में तीसरे टैंकर पर हमला

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूकेएमटीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक और तेल टैंकर पर हमला हुआ है। एजेंसी के अनुसार, किसी अज्ञात वस्तु के टकराने से जहाज को नुकसान पहुंचा है। यूकेएमटीओ ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक टैंकर की संरचना को नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है और न ही फिलहाल तेल रिसाव या समुद्री प्रदूषण के कोई संकेत मिले हैं। एजेंसी ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।

बता दें कि, इससे पहले होर्मुज की ताजा घटना से कुछ घंटे पहले कतर ने ईरान पर अपने एलएनजी ले जा रहे जहाज अल रेकय्यात पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह जहाज रात के समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जहाज की ओर से बताया गया कि उस पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे इंजन वाले हिस्से में आग लग गई। हालांकि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित रहे और उन्हें बाहर निकालने का काम तुरंत शुरू कर दिया गया।

कच्चे तेल में आएगी गिरावट, सोना और चांदी खरीदने के लिए करें इंतजार : Citi

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज मैक्स लेटन का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों तक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ना है। वहीं, बैंक का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सोने और चांदी में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों की कीमतों में अभी और कमजोरी आ सकती है।

कच्चे तेल पर क्यों है दबाव?

मैक्स लेटन का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं। अगर ईरान से जुड़ा कोई समझौता होता है, तो बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ चीन से मांग कमजोर बनी हुई है। दूसरे देशों का उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऐसे में बाजार में जरूरत से ज्यादा कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।

Citi का अनुमान है कि अगर मौजूदा बातचीत सफल रही, तो साल के आखिर तक Brent Crude की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। लेटन ने निवेशकों को सलाह दी है कि अगर तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसे मुनाफावसूली का मौका मानना चाहिए।

गोल्ड और सिल्वर पर क्या राय?

मैक्स लेटन का कहना है कि पिछले 18 से 24 महीनों में सोने की तेज रैली की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की मजबूत खरीदारी थी। अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में अगले कुछ हफ्तों तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

उनके मुताबिक, ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से फिलहाल सोने में कमजोरी रह सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि अगले दो महीनों में अगर कीमतें गिरती हैं, तो वही खरीदारी का बेहतर मौका हो सकता है। Citi को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में ब्याज दरों और महंगाई के नरम पड़ने से सोने को फिर सहारा मिल सकता है।

मैक्स लेटन का कहना है कि चांदी भी फिलहाल सोने की दिशा में ही चल सकती है। उनके मुताबिक, हालिया तेजी की बड़ी वजह निवेशकों की खरीदारी थी, न कि औद्योगिक मांग। हालांकि, सोलर जैसे सेक्टरों से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों की वजह से दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे शॉर्ट टर्म में चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।

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LPG Cylinder Price Today: क्या आज सस्ता हुआ घरेलू LPG सिलेंडर? चेक करें अपने शहर का रेट

LPG Cylinder Price Today: आज भी देशभर में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं। जबकि 1 जुलाई को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 183.50 रुपये घटाए गए थे। बता दें कि इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इसकी कीमत बढ़कर 3100 रुपये के पार पहुंच गई थी। वहीं, रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार बदलाव जून महीने में हुआ था, जब इसके दाम में 29 रुपये तक की कमी की गई थी। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 942 रुपये और 19- किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2930 रुपये है।

चेक करें अपने शहर का रेट

शहर घरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली942.0 रुपये2930.0 रुपये
मुंबई941.5 रुपये2885.5 रुपये
कोलकाता968.0 रुपये3082.0 रुपये
चेन्नई957.5 रुपये3106.0 रुपये
नोएडा939.50 रुपये2917.0 रुपये
देहरादून961.0 रुपये2983.5 रुपये
हैदराबाद934.0 रुपये2052.5 रुपये
गोवा पणजी956.0 रुपये3006.5 रुपये
तिरुवनंतपुरम 951.0 रुपये2970.5 रुपये

सऊदी अरब ने कर दिया बड़ा ऐलान

सऊदी अरब ने एशियाई देशों में अपने खरीदारों को कम कीमत पर कच्चा तेल बेचना शुरू कर दिया है। इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात सामान्य होना और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ना है। जिस वजह से तेल बेचने वाली कंपनियों के बीच कंपटीशन भी तेज हो गया है।

सोमवार को जारी प्राइस लिस्ट के हवाले से ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको अगले महीने के लिए अपने प्रमुख ग्रेड ‘अरब लाइट’ कच्चे तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती करने जा रही है। नई कीमत क्षेत्रीय बेंचमार्क से करीब 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम होगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 के बाद यह पहली बार है जब किसी एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी कटौती की गई है। इससे एशियाई खरीदारों को सस्ते दाम पर तेल मिलने की उम्मीद है।

क्या अब कम हो जाएगी LPG की कीमत?

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम तुरंत कम नहीं होंगे। जानकारों के मुताबिक, अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर लंबे समय तक बना रहता है, तो जुलाई के अंत या अगस्त में घरेलू कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

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होर्मुज में तेल टैंकर पर भीषण मिसाइल हमला, सीजफायर खत्म होते ही तबाही की आहट; कच्चे तेल की कीमतों में लग सकती है आग!

Iran US Conflict Near Strait of Hormuz: वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के पास सोमवार को एक बड़े तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, ओमान के तट से करीब 8 समुद्री मील दूर एक अज्ञात मिसाइल या ड्रोन टकराने के बाद तेल टैंकर में भीषण आग लग गई।

इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने जानबूझकर दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ एक हफ्ते का संघर्ष विराम समझौता खत्म हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का खतरा फिर से बढ़ गया है।

UKMTO और अमेरिका का क्या है दावा?

ब्रिटिश नौसेना की विंग UKMTO के अनुसार, यह तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था, तभी इसके पोर्ट साइड पर एक मिसाइल आकर लगी। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने या किसी तरह के बड़े पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की तैयारी

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए दो यूएस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने दो व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में अमेरिका अब ईरानी ठिकानों पर जवाबी सैन्य हमले करने की तैयारी कर रहा है।

क्यों टूटा अमेरिका-ईरान का शांति समझौता?

यह हमला ठीक उस समय हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के लिए हुआ एक हफ्ते का समझौता समाप्त हो गया। केवल तीन हफ्ते पहले ही दोनों देशों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जो अब पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है। पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के भविष्य को लेकर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।

इससे पहले भी ईरान ने इस रास्ते की घेराबंदी कर दी थी और कई कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी की थी। पिछले महीने हुए समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई थी, जो अब दोबारा खतरे में है।

ईरान अब जहाजों से वसूलेगा ‘टोल’

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा, जहां जहाजों को इस रास्ते से मुफ्त में गुजरने की आजादी थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज उसके तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से बाहर नहीं जाएगा।

बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान ईरानी राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फजली ने बड़ा बयान देते हुए कहा, ‘चूंकि होर्मुज का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रादेशिक जल क्षेत्र में आता है, इसलिए ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से ‘सर्विस फीस’ वसूलेगा। हालांकि उन्होंने इसे टैक्स या टोल टैक्स कहने से इनकार किया’।

ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि जो देश मुश्किल वक्त में ईरान के साथ खड़े रहे जैसे- भारत और अन्य मित्र देश, उन्हें इस सर्विस फीस में ‘विशेष छूट’ दी जाएगी।

दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’?

होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से एशिया तक कच्चे तेल के निर्यात का सबसे बड़ा लाइफलाइन रूट है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह मात्रा पूरी दुनिया की कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) है। यही कारण है कि यहां होने वाली मामूली हलचल भी दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है।

Petrol Diesel Price Today: आज के ताजा रेट जारी, जानें आपके शहर में कितना महंगा या सस्ता हुआ ईंधन

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 07 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.20 रुपये

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये | डीजल 97.83 रुपये

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये | डीजल 99.82 रुपये

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये | डीजल 99.55 रुपये

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये | डीजल 95.44 रुपये

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये | डीजल 95.56 रुपये

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये | डीजल 98.80 रुपये

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये | डीजल 100.92 रुपये

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये | डीजल 86.09 रुपये

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये | डीजल 103.82 रुपये

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये | डीजल 97.78 रुपये

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये | डीजल 95.55 रुपये

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये | डीजल 99.36 रुपये

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये | डीजल 104.40 रुपये

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।