Market Trend : बाजार में तेजी कायम, एक्सपर्ट के सुझाए इन दो शेयरों में हो सकती हैं अच्छी कमाई

Market Trend : भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन भी बढ़त देखने को मिल रही है। निफ्टी 24100 पर वापस आ गया है। निफ्टी में इंफोसिस, HCL टेक्नोलॉजीज,TCS,टेक महिंद्रा ओर इटरनल टॉप गेनर्स में शामिल हैं। जबकि NTPC,पावर ग्रिड कॉर्प,बजाज फाइनेंस,भारती एयरटेल और ONGC टॉप लूजर्स में से हैं। पावर,कैपिटल गुड्स और टेलीकॉम को छोड़कर बाकी सभी इंडेक्स हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं। IT इंडेक्स लगभग 3% ऊपर है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

निफ्टी पर रणनीति

ऐसे में आज के लिए अपनी रणनीति साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24097-24128 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24176-24209/24261 पर है। इसके लिए पहला बेस 23859-23910 पर और बड़ा बेस 23719/23766-23809 पर है। जैसा कल कहा था,नई सीरीज के पहले दिन काउंटर चाल दिखी। निफ्टी रजिस्टेंस-1 (24038) तक पहुंचा। FIIs की कैश मार्केट में बिकवाली जारी रही। निफ्टी और बैंक निफ्टी फ्यूचर्स में भी बिकवाली रही। FIIs का नेट शॉर्ट 4000 बढ़कर 2.60 लाख हो गया। 24000 पर या 100DEMA के नीचे कंसोलिडेशन के संकेत हैं।

कच्चा तेल 71 डॉलर पर है। यह बाजार के लिए बड़ा पॉजिटिव संकेत है। फिलहाल रजिस्टेंस-1 और बेस-1 के बीच ट्रेडिंग रेंज संभव है। 24000 पर ऑप्शन राइटर्स की मजबूत पकड़ है। बेस-1 पर 20 DEMA और 50 DEMA है। रजिस्टेंस-1 पर 100 DEMA है। इस रेंज में ऊपर बेचें, नीचे खरीदने की रणनीति रखें। निफ्टी IT कमजोर है। जबकि बैंक निफ्टी मजबूत है। 24128 के ऊपर रेंज ब्रेकआउट संभव है। 23809 के नीचे कमजोरी और बढ़ सकती है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 58241-58423/58567 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 58733-58839/59080 पर है। इसके लिए पहला बेस 57517 (10DEMA)-57710 पर है। बड़ा बेस 57710-57341 पर है। जैसा कहा था,बेस-1(10 DEMA)से शानदार रिवर्सल मिला। रेजिस्टेंस-1 का लक्ष्य भी हासिल हुआ। आखिरी घंटे में PSU बैंकों में जोरदार खरीदारी दिखी। मूविंग एवरजेज के क्लस्टर से मजबूत रिवर्सल आया। कच्चा तेल 71 डॉलर पर है। यह बैंकिंग के लिए बड़ा पॉजिटिव है। IT में कमजोरी के बीच,बैंक निफ्टी सबसे सुरक्षित दांव हो सकता है। 58000 पर कॉल-पुट की मजबूत पोजिशनिंग है। फिलहाल इंडेक्स 57710-58241 की रेंज में रह सकता है। 58241 के ऊपर निकलते ही 58567 तक तेजी की उम्मीद है। 58567 पर मजबूती की अगली बड़ी परीक्षा होगी। 58567 के ऊपर टिका तो रजिस्टेंस-2 का रास्ता खुलेगा फिलहाल बड़ी गिरावट की संभावना कम है। 57517-57438 के नीचे ही कमजोरी बढ़ेगी।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं इक्विनॉक्स रिसर्च एंड एडवाइजर्स (EQUINOX Research & Advisors) के पंकज रांदड़। इनका अदाणी एंटरप्राइजेज के फ्यूचर्स में 3152-3153 रुपए के आसपास, 3125 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 3220 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। एटरनल (जोमैटो) में भी इनकी 281.60 रुपए के ऊपर, 277 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ 290 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Trading Plan: जारी रह सकता है बुल्स का जोश, निफ्टी फिर से हासिल कर सकता है 24200 का लेवल, बैंक निफ्टी भी 58700 के लिए तैयार

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Insight : अच्छे शेयर और थीम्स खोजें और उनमें बने रहें, इंडेक्स में फिलहाल के लिए इंट्राडे ही रहें

Market Insight : आज बड़ी वाली एक्सपायरी का दिन है। आज बाजार के लिए तीन वजह से अहम दिन है। आज मंथ एंड,क्वार्टर एंड और सीरीज एंड तीनों एक साथ हैं। ऐसे में आज आखिरी 1 घंटे में काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है। आज के मूव को ट्रेंड न समझें,ट्रेंड कल से साफ होगा। बाजार में अभी भी अपट्रेंड है। यह टूटा नहीं है। जब तक निफ्टी 23,830 (20 DEMA) के ऊपर है,ट्रेंड ठीक है और बैंक निफ्टी अभी भी सबसे मजबूत इंडेक्स है। बैंक निफ्टी अब भी 10 और 20 DEMA के काफी ऊपर है। इंडिया VIX भी 200 DMA के नीचे ही चल रहा है। ये बातें सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडीटर अनुज सिंघल ने कही है।

उन्होंने आगे कहा कि मार्केट ब्रेड्थ को लेकर दिक्कत बस कुछ दिनों की रही है। मिडकैप और स्मॉलकैप काफी चल चुके हैं। ऐसे में इनमें मुनाफावसूली लाजमी है। अगले हफ्ते बाजार का ट्रेंड एकदम क्लियर हो जाना चाहिए।

बाजार: आज के संकेत

आज NSE के सभी कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी का दिन है। निफ्टी,बैंक निफ्टी,फिन निफ्टी,मिडकैप सिलेक्ट की एक्सपायरी आज होगी। शेयरों की भी एक्सपायरी आज है। निफ्टी में सबसे ज्यादा बिल्डअप 24,000 कॉल और पुट में है। ऑप्शन राइटर्स की बेसिक रेंज 23,840-24,160 है। इन दोनों लेवल्स के टूटने पर ही बड़ा मूव आ सकता है।

प्राइवेट बैंकों पर नजर

आज प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के लिए बहुत बड़ी खबरें हैं। HDFC बैंक की दिक्कतें अब लग रहा है दूर हुई हैं। HDFC बैंक का नया पार्ट टाइम चेयरमैन अप्रूव हो गया है। जल्दी ही HDFC बैंक के CEO से जुड़ी अनिश्चितता भी दूर होनी चाहिए। एक्सिस बैंक के CFO पुनीत शर्मा HDFC बैंक के CFO होंगे। बंधन बैंक के CFO राजीव मंत्री एक्सिस बैंक से जुड़ सकते हैं।

US-ईरान तनाव जारी

कच्चा तेल $72.50 के पास है। US-ईरान के बीच आज कतर में बातचीत होने की संभावना पर सबकी नजर है। ट्रंप का दावा है कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया है। उधर ईरान का कहना है कि कुछ भी प्लान नहीं है। उधर US बाजारों में कल टेक और AI शेयरों के दम पर उछाल दिखा। नैस्डेक 2% चढ़ा, S&P 500 इंडेक्स 5 दिन की गिरावट के बाद 1.17% ऊपर बंद हुआ।

बाजार: कैसा है टेक्सचर?

बाजार में इस समय बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव है। लेकिन उसके बीच में इंट्राडे ट्रेंड निगेटिव है। पिछले 2-3 दिनों से पैसा बिकवाली करके बन रहा है। ऑप्शन राइटर्स के लेवल्स पर रिवर्स ट्रेड लेने से भी पैसा बना है। मगर जब तक बड़ा ट्रेंड पॉजिटिव है,शॉर्ट कैरी मत करें। बड़ा ट्रेंड 23,800 के नीचे बंद होने पर ही निगेटिव होगा। बैंक निफ्टी में बड़ा ट्रेंड 57,100 के नीचे ही बंद होगा। निफ्टी IT अभी भी बाजार का सबसे बड़ा पेन प्वाइंट है। कल परसिस्टेंट की खबर पर बाजार ने ओवररिएक्शन दिया है। आगे पता चलेगा कि शायद ये खरीदारी का मौका था।

इंडिया VIX और मार्केट ब्रेड्थ पर भी नजर रखनी होगी। जब तक इंडिया VIX 14.5 यानी 200 DMA के नीचे है,दिक्कत नहीं है। मार्केट ब्रेड्थ खराब हुई है लेकिन टूट नहीं हुई है। एक रिस्क बाजार में खुला है, यह है खराब क्वालिटी के IPOs का। साथ ही ब्लॉक डील्स और OFS भी एक बड़ा रिस्क रहा है। अच्छी बात ये है कि ट्रेडिंग विंडो कल से बंद हो जाएगी और अगले 45 दिन बाजार में प्रोमोटर्स की बिकवाली बंद होगी।

Market Trend : मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार में दबाव, फिर भी इन दो शेयरों में सही रणनीति से हो सकती है बंपर कमाई

बाजार: क्या हो रणनीति?

अच्छे शेयर और थीम्स खोजें और उनमें बने रहें। इंडेक्स में फिलहाल के लिए इंट्राडे रहें। हमें निफ्टी में 1000-2000 अंकों का ट्रेंड पकड़ने में मजा आता है। हर 100-200 अंकों के मूव पकड़ने में टेंशन ज्यादा है और मुनाफा कम। जब बड़ा 1000-2000 अंकों का मूव समझ आएगा,तब साफ नजरिया बनाएंगे। बैंक निफ्टी में अभी भी 60,000 का मूव बचा हुआ है। मगर 57,100 के नीचे बंद हुए तो ये ट्रेड कैंसल हो जाएगी। डॉनल्ड ट्रंप वाला रिस्क फैक्टर अभी भी बाकी है। अभी भी बीच-बीच में उनके बयान आते हैं जो मूड खराब करते हैं।

कच्चा तेल भी अब युद्ध से पहले वाले लेवल पर आ चुका है। अब ब्रेंट $70 के नीचे आए तो बैंक निफ्टी में बहुत बड़ी वाली रैली आएगी। डॉलर-रुपए पर भी नजर रखें,ग्लोबली डॉलर मजबूत है। एक अच्छी बात ये कि मेटल्स की कीमतें नीचे आ रही हैं। ये हमारे कई सेक्टर्स के लिए थोड़ा पॉजिटिव है,जैसे कि ऑटो।

निफ्टी पर रणनीति

इसकी आज की बेसिक रेंज 23,840-24,160 है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 23,850-23,900 है। SL 23,750 पर रखें। बिकवाली का सबसे अच्छा जोन 24,050-24,150 है। इसके लिए SL 24,250 पर रखें। अगर रेंज ब्रेक होती दिखे तो कॉल के जरिये दांव लगाएं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी में आज थोड़ा सतर्क रहें। बैंक निफ्टी में 5 मिनट की 300 अंकों की बड़ी कैंडल बन सकती है। ऐसे में चाहें तो आज बैंक निफ्टी से दूर रहें। कम्पल्सिव ट्रेडर 57,200-58,200 की रेंज को ट्रेड करें।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

Crude Oil Price: मंगलवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि इन्वेस्टर्स दोहा में होने वाली US-ईरान बातचीत के नतीजे का इंतज़ार कर रहे थे, जबकि दोनों पक्षों ने वीकेंड में मिसाइल हमले किए, जिससे चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से किया गया अंतरिम सीजफ़ायर दबाव में आ गया।

मंगलवार को एक्सपायर होने वाला अगस्त डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.03%, या 75 सेंट गिरकर $72.40 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा एक्टिवली ट्रेड होने वाला सितंबर ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 0.54%, या 40 सेंट गिरकर $73.51 प्रति बैरल पर आ गया।

इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.66%, या 47 सेंट गिरकर $70.32 प्रति बैरल पर आ गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी के हवाले से रॉयटर्स ने सोमवार को कहा कि ईरानी और ओमानी एक्सपर्ट्स आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ट्रांजिट रूट को फिर से तय करने पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जहाजों को तय शिपिंग लेन से बाहर जाने से रोकने की कोशिश करेगा।

साथ ही, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने साफ किया कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी लेवल पर कोई मीटिंग या बातचीत तय नहीं है।

संभावित बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेतों ने 17 जून के सीज़फ़ायर समझौते की कमज़ोरी को दिखाया, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए दुनिया भर में तेल शिपमेंट में रुकावट डालने वाली दुश्मनी को कुछ समय के लिए रोक दिया था और नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक पॉलिटिकल टेस्ट खड़ा कर दिया था।

इज़राइल अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया से बाहर रहा है और उसने सार्वजनिक रूप से इस समझौते से खुद को दूर रखा है।

शिपिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नए हमलों और अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों के बावजूद, मिडिल ईस्ट के एनर्जी प्रोड्यूसर कच्चे तेल और LNG कार्गो लोड करना जारी रखे हुए हैं।

Crude Oil Price: US- ईरान शांति वार्ता अटकी, क्रूड में उबाल, $70 के ऊपर बना है भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

जब दुनिया थमने लगी, तब भारत ने दिखाया दम! युद्ध के बीच जारी रही पेट्रोल-डीजल और LPG की सप्लाई, ईंधन संकट से बचने की अनकही कहानी

Fuel Crisis News: फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, तो पूरी दुनिया पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर हड़कंप मच गया। होर्मुज वह रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। भारत के लिए यह स्थिति किसी बड़ी आपदा से कम नहीं थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल और 60% एलपीजी (LPG) आयात करता है। ईंधन संकट की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि भारत का 50% तेल और 90% एलपीजी इसी रास्ते से आता था, जो अगले चार महीनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया।

संकट के बीच भारत ने दिखाया दम

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके बावजूद भारत ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए संभावित ईंधन संकट को टाल दिया। सरकार का दावा है कि करीब चार महीने तक आपूर्ति बाधित रहने के बावजूद देश में कहीं भी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राशनिंग लागू नहीं करनी पड़ी। इस दौरान ईंधन की उपलब्धता सामान्य बनी रही।

जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है भारत

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत और एलपीजी का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंच गई। जबकि ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। एलपीजी के आयात में भी करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सरकार ने कई मोर्चों पर बनाई रणनीति

ईंधन संकट के शुरुआती दिनों में ही केंद्र सरकार ने नियंत्रण संबंधी आदेश जारी किए। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैकल्पिक देशों से तेल और गैस की खरीद तेज कर दी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया कि वे बढ़ी हुई लागत का अधिकांश बोझ खुद वहन करें ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिली। इस फैसले से केंद्र सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू का त्याग करना पड़ा।

बीते एक दशक में मजबूत हुई ऊर्जा सुरक्षा

सरकार का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए निवेश का लाभ इस संकट के दौरान मिला। वर्ष 2014 में जहां देश में 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, अब उनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इसी अवधि में एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई।

इसके अलावा भारत अब 27 की बजाय 41 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों को भी सप्लाई चेन में शामिल किया गया है। रूस और अमेरिका से भी आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ने वैकल्पिक समुद्री रूट्स का भी इस्तेमाल बढ़ाया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई।

एथेनॉल मिश्रण से भी मिली राहत

सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से भी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली। सरकार का कहना है कि इससे हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की बचत हो रही है।

तेल कंपनियों पर पड़ा भारी वित्तीय बोझ

सरकार के अनुसार, सार्वजनिक तेल कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। इसके बावजूद कंपनियां एक समय प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अंडर रिकवरी का सामना कर रही थीं। यह बाद में घटकर करीब 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गई। अनुमान है कि चालू तिमाही में तेल कंपनियों को 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आसमान छूती कीमतें और सरकार पर बढ़ता दबाव

होर्मुज होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गईं। भारत जो तेल $70 प्रति बैरल में खरीद रहा था, उसकी कीमत महज चार हफ्तों में $120 के पार पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के अपने उच्चतम स्तर पर जा पहुंच गया। दूसरी ओर, एलपीजी की कीमतों में 46% की भारी बढ़ोतरी हुई। इससे एक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की आयात लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई। जहाजों का युद्ध-जोखिम बीमा (War-risk insurance) भी कई गुना बढ़ चुका था।

संकट के चक्रव्यूह को भारत ने कैसे तोड़ा?

इस अभूतपूर्व संकट के बीच भारत सरकार, तेल कंपनियों और कूटनीतिज्ञों ने मिलकर एक बहुआयामी रणनीति तैयार की, ताकि आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े:-

1. 10 साल की तैयारी आई काम (इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेड)

भारत पिछले 10 वसालों से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) पर लगातार निवेश कर रहा था। साल 2014 में जहाँ देश में केवल 11 एलपीजी आयात टर्मिनल थे। वहीं, 2026 में इनकी संख्या बढ़कर 22 हो गई। इस वजह से एलपीजी आयात क्षमता 12 मिलियन टन (2014) से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। इसने संकट के समय एक बड़े सुरक्षा कवच का काम किया.

2. नए देशों से दोस्ती और नए रास्ते की खोज

भारत ने केवल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय आक्रामक आपूर्ति की नीति अपनाई। साल 2014 में भारत जहां 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 41 देश हो गई। भारत ने लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देशों से तेल मंगाना शुरू किया। साथ ही अमेरिका और रूस से तेल के आयात को और गहरा किया। नए समुद्री रास्तों की खोज की गई, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता पहले के मुकाबले काफी कम हो गई।

3. घरेलू मोर्चे पर राहत और सरकारी खजाने पर बोझ

सरकार ने तुरंत डिमांड मैनेजमेंट (Demand-management) लागू किया और घरेलू स्तर पर तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाया। इसके अलावा, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के ऊंचे स्तर ने एक बड़ा सहारा दिया। इससे हर साल भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात की बचत होती है।

सबसे बड़ा फैसला यह था कि सरकार ने कीमतों का बोझ सीधे आम जनता पर नहीं डाला। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। बाद में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में केवल 7 रुपये प्रति लीटर की मामूली बढ़ोतरी की। इस वजह से तेल कंपनियों को प्रति दिन करीब 650 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस तिमाही में उन्हें कुल 1 लाख करोड़ से 1.2 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।

अर्थव्यवस्था पर सीमित रहा असर

सरकार का दावा है कि पूरे संकट के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर बना रहा। चालू खाते का घाटा नियंत्रण में रहा। साथ ही खुदरा महंगाई भी भारतीय रिजर्व बैंक की तय सीमा के भीतर रही। जीडीपी वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही।

दूसरे देशों से अलग रही भारत की रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, जहां कई देशों को पेट्रोल-डीजल की राशनिंग लागू करनी पड़ी। वहीं भारत ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों ने ईंधन संकट से निपटने के लिए अलग-अलग प्रतिबंध लगाए। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग किया। साथ ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी।

भारत में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न तो ईंधन की राशनिंग लागू की गई और न ही स्कूल बंद करने या वर्किंग डे घटाने जैसे कदम उठाए गए। केवल कमर्शियल एवं थोक एलपीजी तथा डीजल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

अब सामान्य हो रही स्थिति

सरकार के अनुसार, होर्मुज फिर से खुलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं। भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का लगभग दो महीने का भंडार उपलब्ध है। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (ISPRL) की क्षमता बढ़ाने का काम भी जारी है। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। हालांकि, खबर है कि अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है।

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कच्चे तेल की नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिम कम होने से इन सेक्टर्स को होगा फायदा, इन पर रहे नजर

अमर सिंह

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के तौर पर,भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा तेल आयात करता है। इसलिए,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से उसे फायदा होता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल $1 की गिरावट से देश के सालाना आयात बिल में आम तौर पर लगभग 10,000 से 13,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।

इसके साथ ही जियोपॉलिटिकल जोखिम कम हो रहे हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव का घटना,ईरान-इजरायल युद्ध का समाधान,होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही का शुरू होना भी भारत के लिए फायदेमंद है। इससे देश को महंगाई कम होने,करंट अकाउंट घाटा घटने,रुपये को सहारा मिलने और RBI व सरकार के लिए पॉलिसी बनाने की बेहतर गुंजाइश मिलने जैसे फायदे होंगे।

इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में भारी गिरावट (जैसे 2014-16 के दौरान) ने कुछ खास सेक्टर को काफी फायदा पहुंचाया है,भले ही ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी रही हो। मौजूदा हालात से फायदे में रहने वाले सेक्टर एक जैसे नहीं हैं। ये फायदे उन इंडस्ट्रीज़ तक सीमित हैं जहां फ्यूल या कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत का हिस्सा बहुत ज्यादा होता है,या जहां कम महंगाई और ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम से बिक्री की मात्रा(वॉल्यूम)सीधे तौर पर बढ़ती है।

कच्चे तेल के भाव कम होने से एविएशन सेक्टर को सीधा और बड़ा फायदा मिलता है। भारतीय एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF)का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट से ATF की कीमतें तुरंत कम हो जाती हैं,जिससे इंडिगो,एयर इंडिया और स्पाइसजेट के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होती है।

तेल के भाव घटने से एयरलाइंस या तो अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकती हैं या कम किराए के जरिए डिमांड बढ़ा सकती हैं। ये दोनों ही बातें इस सेक्टर के लिए अच्छी हैं। कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने से हेजिंग की लागत भी कम हो जाती है। पहले के दौर में,तेल की कीमतों में बदलाव पर एयरलाइन शेयरों ने अच्छी तेजी दिखाई है। घरेलू हवाई ट्रैफिक में अभी भी मजबूत बढ़त बनी हुई है,इसलिए ईंधन की कम लागत इनके मुनाफे और क्षमता बढ़ाने में आने वाली एक बड़ी रुकावट को दूर कर सकती है।

इसके बाद डाउनस्ट्रीम ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)और कच्चे तेल से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का नंबर आता है। इंडियन ऑयल,BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को कच्चा तेल खरीदने की कम लागत का फायदा मिलता है। जब रिटेल फ्यूल की कीमतों में बदलाव में देरी होती है या टैक्स की वजह से कीमतों में आई गिरावट का कुछ हिस्सा एडजस्ट हो जाता है। ऐसे में इनका मार्केटिंग मार्जिन बढ़ जाता है। इनको इन्वेंट्री से होने वाला फायदा भी मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कमी से पेंट सेक्टर को फायदा होता है। इनके कच्चे माल की लागत (जैसे सॉल्वैंट्स,रेजिन और कुछ एडिटिव्स)का 35-50 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है। ऐसे में कच्चे तेल में नरमी से एशियन पेंट्स,बर्जर पेंट्स और ऐसी दूसरी कंपनियों को अच्छे मार्जिन या कीमतें तय करने में लचीलेपन का फायदा मिलता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों (अपोलो टायर्स,MRF,सिएट,JK टायर)को सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक की लागत में कमी से राहत मिल रही है। लुब्रिकेंट्स और कुछ खास केमिकल सेगमेंट को भी इसका फायदा हो रहा है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है तो इन कंपनियों के लिए लागत कम,मार्जिन ज्यादा वाली क्लासिक स्थितियां बनती हैं।

तेल की कीमतों में कमी से ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लागत और मांग,दोनों ही फ्रंट पर फायदा होता है। टू-व्हीलर और पैसेंजर गाड़ियों के मामले में,पेट्रोल और डीजल की कम कीमतें गाड़ियों की कुल ओनरशिप लागत (टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप)को बेहतर बनाती हैं। कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में यह खरीदारी का एक अहम कारण होता है। पहले भी देखा गया है कि जब ईंधन की कीमतें कम रही हैं,तब एंट्री-लेवल और मास-मार्केट सेगमेंट में रिटेल बिक्री में तेजी आई है।

इसके अलावा क्रूड की कीमतों में कमी से कमर्शियल गाड़ियों और बड़े लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम (ट्रकिंग,लास्ट-माइल डिलीवरी)को डीजल खर्च पर सीधे बचत होती है,जो वेरिएबल कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा होता है। इससे लॉजिस्टिक्स कंपनियों की ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर होती है और ज्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में वॉल्यूम रिकवरी में मदद मिल सकती है। भारत में सामान की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन ही मुख्य जरिया (70%) है,इसलिए सप्लाई चेन पर इसका मल्टीप्लायर असर काफी अहम है।

कच्चे तेल में नरमी से कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर और फाइनेंशियल सेक्टर को मैक्रो-लेवल पर दूसरे दौर के फायदे मिलते हैं। फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की लागत कम होने से महंगाई कम होती है। इससे RBI को पॉलिसी रेट्स को मैनेज करने के लिए ज्यादा गुंजाइश मिलती है। इससे क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। जिन बैंकों और NBFCs का रिटेल और SME पोर्टफोलियो मज़बूत है,उन्हें कम महंगाई,स्थिर या कम रेट्स और बेहतर होते कॉर्पोरेट कैश फ्लो के अच्छे चक्र से फायदा होता है।

इसके अलावा ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर खर्च कम होने से’कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी’और कुछ खास FMCG कैटेगरी में खर्च करने लायक आय(डिस्पोजेबल इनकम)में थोड़ी लेकिन वास्तविक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। अगर कम महंगाई और बेहतर फिस्कल हेडरूम (ईंधन सब्सिडी का दबाव कम होने से)से बेहतर कैपेक्स(पूंजीगत व्यय)माहौल बनता है या ब्याज दरों पर निर्भर मांग में सुधार होता है,तो रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से इन प्रभावों का असर सिर्फ तेल के गणित से कहीं ज्यादा बढ़ जाता है। ग्लोबलअनिश्चितता कम होने से इक्विटी रिस्क प्रीमियम घटता है,FII निवेश को बढ़ावा मिलता है और कुल मिलाकर जोखिम लेने की क्षमता बेहतर होती है। ग्लोबल ट्रेड और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़े सेक्टर जैसे कुछ कैपिटल गुड्स,चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज़्म/हॉस्पिटैलिटी शेयरों के लिए अनुकूल माहौल बनता है। सप्लाई-चेन में स्थिरता से आयात पर निर्भर असेंबली इंडस्ट्रीज को भी मदद मिलता है।

सस्ती एनर्जी और शांत भू-राजनीतिक स्थिति का मेल वोलैटिलिटी के उन मुख्य कारणों में से एक को घटाता है,जिन्होंने समय-समय पर भारत की विकास गाथा में बाधा डाली है।

एक बार होने वाले इन्वेंट्री या मार्जिन से मिलने वाले फायदे और लगातार होने वाली कमाई में बढ़ोतरी के बीच फ़र्क करना जरूरी है। ग्राहकों को कितना फायदा होगा और कंपनियां कितना फायदा अपने पास रखेंगी,यह टैक्स पॉलिसी,कॉम्पिटिशन की तीव्रता और प्राइसिंग डिसिप्लिन पर निर्भर करेगा। फायदा पाने वाले सेक्टर की हर कंपनी को एक जैसा फायदा नहीं होगा। बैलेंस-शीट की मजबूती,प्राइसिंग पावर और ऑपरेशनल क्षमता के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां ज्यादा बेहतर स्थिति में रहेंगी।

बुनियादी नज़रिए से देखें तो,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कम होते जियोपॉलिटिकल तनाव का मेल भारत के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे बाहरी फैक्टर का दबाव कम होता है,महंगाई पर लगाम लगती है और ज्यादा कर्ज वाले सेक्टर में कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है। जब तेल की कीमतें गिरती हैं और तो बाजार अक्सर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है।

इस स्थिति में निवेशकों को ऐसी कंपनियों पर फोकस करना चाहिए जिनका ऑपरेटिंग लेवरेज ज़्यादा हो (खासकर ईंधन या कच्चे तेल से जुड़े इनपुट के मामले में),जिनकी बैलेंस शीट मज़बूत हो (ताकि वे किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें) और जिनकी वॉल्यूम ग्रोथ भरोसेमंद हो। ऐसे माहौल में, एविएशन,OMCs,पेंट,टायर,ऑटोमोबाइल,लॉजिस्टिक्स और ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले फाइनेंशियल सेक्टर में चुनिंदा निवेश करना,भारत की जारी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने का एक भरोसेमंद तरीका है।

अमर सिंह एंजेल वन में रिसर्च के सीनियर VP हैं.

 

Market View : गिरते बाजार में वोलैटिलिटी को खतरा नहीं,मौका मानें, डेट से पैसा निकालकर इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका

 

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Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानें आपके शहर में क्या है आज का भाव

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 28 जून 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 83.09 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 86 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 93.50 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 91.50 रुपये प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 97 रुपये प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 90.91 रुपये प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.75 रुपये प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर।

अहमदाबाद: डीजल 82.25 रुपये प्रति लीटर।

पुणे: डीजल 92.50 रुपये प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Iran-US War: अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरी बार किया हमला, ट्रंप बोले- ‘तेहरान का अब अस्तित्व ही नहीं रहेगा’

Iran-US War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू हो गया है। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों की वजह एक कमर्शियल जहाज पर हुआ हमला बताया गया है। शनिवार 27 जून को हुए ये नए हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के तहत लागू हुआ सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर सीजफायर को तोड़ा है।

अमेरिकी सेना ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते को नहीं मानता तो उसकी अस्तिव ही नहीं रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार तड़के कहा कि अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते का फिर से उल्लंघन करने के बाद की गई।

‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी विमानों ने युद्धविराम समझौते का ‘फिर से’ उल्लंघन करने के कारण ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया है!” उन्होंने आगे कहा, “बहुत मुमकिन है कि वे कभी न सीखें! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था।”

ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!” अमेरिकी सेना के अनुसार, ये हमले ट्रंप के निर्देश पर किए गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि शनिवार को एक कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद अमेरिकी सैन्य विमानों ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

ईरान में कहां किया हमला?

CENTCOM ने बताया कि इस ऑपरेशन में ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को निशाना बनाया गया। बाद में यह साफ किया गया कि इन हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और उसके आसपास कई जगहों पर ईरान के 10 मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सेना ने कहा कि ईरान के पास सीजफायर समझौते का सम्मान करने का मौका था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, उसकी सेनाओं ने कथित तौर पर ‘किकू’ (Kiku) नाम के ऑयल टैंकर पर वन-वे ड्रोन से हमला किया।

अमेरिका ने हमलों को ऑयल टैंकर पर हुए हमले से जोड़ा

CENTCOM के अनुसार, जब ‘किकू’ होर्मुज स्ट्रैट से गुज़र रहा था, तब उस पर हमला हुआ। उस समय उसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) लदा हुआ था। यह टैंकर पिछले हफ्ते की शुरुआत में कतर के एक ऑयल फील्ड से निकला था और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) में स्थित संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था।

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की शिप-ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार, ऐसा लग रहा था कि यह जहाज ओमान के तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। यह रूट ईरान द्वारा अपने जलक्षेत्र से तय किए गए रास्ते के विकल्प के तौर पर उभरा है।

ये भी पढ़ें- Kotak Mahindra Bank के एमडी और सीईओ अशोक वासवानी इस साल के अंत में पद छोड़ देंगे

Petrol Diesel Price Today: देशभर में जारी हुए पेट्रोल और डीजल के नए भाव, देखें लेटेस्ट रेट

Petrol Diesel Price Today:  हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 27 जून 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 83.09 रुपये प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 86 रुपये प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 93.50 रुपये प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 91.50 रुपये प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल 102.77 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 91.70 रुपये प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल 110.93 रुपये और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल 109.92 रुपये प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल 98.10 रुपये प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल 115.69 रुपये और डीजल 97 रुपये प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 90.91 रुपये प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 95.75 रुपये प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल 113.35 रुपये प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल 115.49 रुपये प्रति लीटर।

अहमदाबाद: डीजल 82.25 रुपये प्रति लीटर।

पुणे: डीजल 92.50 रुपये प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें! आम आदमी को लग सकता है बड़ा झटका, वेनेजुएला में भयंकर तबाही से मंडराया बड़ा खतरा

Venezuela Earthquake: बीते दिन वेनेजुएला में एक के बाद एक दो भीषण भूकंप आए जिससे पूरे देश में भयंकर तबाही मची है। अब इन दोनों भूकंपों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन इस आपदा ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भी हलचल पैदा कर दी है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक होने के कारण अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वेनेजुएला के संकट से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं?

हालांकि, अभी तक तेल की सप्लाई रुकने का कोई बड़ा सबूत नहीं मिला है, लेकिन कच्चे तेल के लिए वेनेजुएला पर भारत की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए अगले कुछ दिन बेहद अहम होने वाले हैं।

भारत के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है वेनेजुएला?

इस संकट की टाइमिंग भारत के लिए थोड़ी चिंताजनक है। पिछले दो महीनों में मिडिल ईस्ट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल और मई 2026 में वेनेजुएला भारत के सबसे बड़े क्रूड सप्लायर्स में से एक बनकर उभरा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में जहां वेनेजुएला से हर महीने औसतन 64000 मीट्रिक टन क्रूड आता था, वहीं अप्रैल-मई 2026 में यह आंकड़ा उछलकर 10 लाख मीट्रिक टन प्रति माह के पार पहुंच गया है। भारतीय रिफाइनरियां वेनेजुएला के हैवी क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, इसलिए सरकार इसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानती है।

क्या भूकंप से तेल रिफाइनरियों को पहुंचा है नुकसान?

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, राहत की बात यह है कि वेनेजुएला का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर इस भयानक भूकंप के बाद भी बड़े नुकसान से बच गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़े ऑपरेशन्स में अभी तक किसी बड़े व्यवधान की खबर नहीं है।

भूकंप का सबसे ज्यादा असर राजधानी काराकास और उसके आस-पास के रिहायशी इलाकों, ट्रांसपोर्ट और पब्लिक सुविधाओं पर पड़ा है। हालांकि, इंडस्ट्रियल इलाकों, बड़ी पाइपलाइनों, स्टोरेज टैंकों और एक्सपोर्ट टर्मिनल्स का बारीकी से निरीक्षण अभी भी जारी है। अगर बाद में किसी बड़े स्ट्रक्चरल डैमेज का पता चलता है, तो आने वाले दिनों में सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

क्या भारत में पैदा हो सकता है तेल का संकट?

इसकी उम्मीद बेहद कम है। भारत अपनी जरूरत का क्रूड ऑयल किसी एक देश से नहीं बल्कि 35 से ज्यादा देशों से खरीदता है। इस समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। इसके अलावा इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका, ब्राजील और कई अफ्रीकी देशों से भी भारत तेल मंगाता है।

एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वेनेजुएला से तेल की सप्लाई कुछ समय के लिए धीमी भी होती है, तो भारत के पास दूसरे विकल्प मौजूद हैं। साथ ही, भारतीय तेल कंपनियां हमेशा बैकअप इन्वेंट्री बनाकर रखती हैं।

सप्लाई नहीं रुकी, तो फिर क्यों डर रहा है बाजार?

बाजार की चिंता की बड़ी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों में जारी तनाव के बीच भारत ने जानबूझकर वेनेजुएला से खरीदारी बढ़ाई थी ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।

अब अगर एक तरफ मिडिल ईस्ट का रास्ता असुरक्षित रहता है और दूसरी तरफ भूकंप के चलते वेनेजुएला का एक्सपोर्ट भी प्रभावित होता है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कमी हो जाएगी। भारत अपनी जरूरत का 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा देती है, जिससे देश का चालू खाता घाटा और महंगाई दोनों बढ़ने का खतरा रहता है।

क्या आपकी जेब पर पड़ेगा असर?

इसका जवाब है- फिलहाल नहीं। भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें केवल क्रूड ऑयल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स और सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के फैसले शामिल होते हैं। इसलिए, वेनेजुएला में आए इस भूकंप का तुरंत भारतीय पेट्रोल पंपों पर कोई असर नहीं दिखेगा।

लेकिन, अगर आने वाले दिनों में वेनेजुएला के ऑयल फील्ड्स में लंबा नुकसान सामने आता है और ग्लोबल मार्केट में क्रूड के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो आगे चलकर भारतीय उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन का सामना करना पड़ सकता है।

Crude Oil Price: होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट फिर से शुरू होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट क्रू़ड $75 के नीचे फिसला

Crude Oil Price: शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और हफ़्ते में भारी गिरावट की ओर बढ़ रही है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से ज़्यादा फंसे हुए तेल टैंकरों के निकलने के बाद सप्लाई की चिंता कम हो गई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.56% गिरकर $74.84 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.50% गिरकर $71.56 प्रति बैरल पर आ गया।

इस हफ़्ते ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों में लगभग 7% की गिरावट आने वाली है।

पिछले सेशन में, ओमान के पास एक कार्गो जहाज़ के किसी अनजान प्रोजेक्टाइल से टकराने के बाद दोनों बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट्स में 2% से ज़्यादा की तेज़ी आई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने कहा कि होर्मुज के तय रास्तों के बाहर से गुज़रने वाले जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट से ट्रैफिक बढ़ा

डेटा से पता चला है कि सीजफायर डील के बाद वॉटरवे को फिर से खोलने के बाद, इस हफ़्ते होर्मुज स्ट्रेट से क्रूड शिपमेंट फरवरी में US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को लड़ाई शुरू होने से पहले, स्ट्रेट से रोज़ाना औसतन 125 जहाज़ गुज़रते थे, लेकिन कुल ट्रैफिक बहुत कम रहा।

इस बीच, गुरुवार को वेनेजुएला में आए भूकंप से भी सप्लाई की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश के बड़े तेल, गैस और रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अब तक कम नुकसान हुआ है।

इस हफ्ते की शुरुआत में, पर्शियन गल्फ का तेल युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे तेज रफ़्तार से पानी के रास्ते से बाहर निकल रहा था। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक. ने कहा कि उसे लगता है कि गल्फ एक्सपोर्ट अब नॉर्मल लेवल के लगभग दो-तिहाई पर चल रहा है, जबकि ग्लोबल इन्वेंट्री में दिख रही गिरावट की रफ़्तार धीमी हो गई है। फ़ारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर तेज़ी से प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं, लेकिन तेल बाहर ले जाने के लिए टैंकर मिलना मुश्किल हो रहा है। कमी की वजह से इराक को अपने एक खास फ़ील्ड में प्रोडक्शन रोकने का ऑर्डर देना पड़ा है। यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत और क़तर सभी सप्लाई बढ़ा रहे हैं।

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