“महिलाएं क्या पहनती हैं, क्या करती हैं…” रक्षा बंधन ऐड को लेकर ट्रोल हो रही कृति सेनन के सपोर्ट में आए राहुल गांधी

Kriti Sanon Controversy: रक्षाबंधन के एक विज्ञापन में कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना कर रहीं कृति सेनन के सपोर्ट में आए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक बयान शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि किसी महिला के कपड़ों और उसकी जीवनशैली को लेकर सोशल मीडिया पर निगरानी या रोक-टोक नहीं की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने लिखा, “महिलाएं क्या पहनती हैं, क्या करती हैं और कहां जाती हैं – यह उनकी अपनी पसंद है। अपनी आजादी का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को ट्रोल करना बंद करें।”

आलोचना पर कृति सेनन का जवाब

कृति सेनन ने मंगलवार को ही इस आलोचना का जवाब दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी महिला के कपड़ों से ही उसकी संस्कृति के प्रति सम्मान को क्यों आंका जाता है।

सेनन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किए गए एक नोट में कहा, “संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, कपड़ों की नेकलाइन में नहीं!… और हम महिलाओं को यह बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा कि एथनिक फैशन में समय के साथ बदलाव आया है, लेकिन जब सांस्कृतिक परंपराओं की बात आती है, तो महिलाओं को अक्सर उनके कपड़ों के आधार पर आंका जाता है।

कृति सेनन की यह प्रतिक्रिया एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर हुई ऑनलाइन आलोचना के एक दिन बाद आई।

कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी

इस विवाद पर एक्टर और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी और विज्ञापन में सानन की पोशाक की आलोचना की।

विज्ञापन में सानन राखी बांधते हुए आइवरी रंग का ब्रैलेट और स्कर्ट पहने और साथ में केप ओढ़े हुए दिखाई देती हैं। रनौत ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस लुक को “जानबूझकर अजीब” बताया।

कृति सेनन ने उस विज्ञापन के बारे में क्या कहा?

विज्ञापन का बचाव करते हुए सेनन ने कहा कि त्योहारों का महत्व कपड़ों के बजाय परंपराओं से जुड़ी भावनाओं और मूल्यों के जरिए समझा जाना चाहिए।

उन्होंने लिखा, “संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, कपड़ों के गले के डिजाइन में नहीं!”

सेनन ने अपने परिवार के लिए रक्षाबंधन के महत्व के बारे में भी बताया और कहा कि यह त्योहार भाई-बहनों के बीच सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “रक्षाबंधन सुरक्षा का बंधन है। मैं और मेरी बहन एक-दूसरे को राखी बांधते हैं। हम जानते हैं कि हम एक-दूसरे की सुरक्षा वैसे ही कर सकते हैं जैसे कोई भाई करता।”

उन्होंने आगे कहा कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं, और यही भावना उनके पालतू जानवरों के लिए भी है।

सेनन ने कहा, “आखिरकार, वे भी परिवार का ही हिस्सा हैं।”

विज्ञापन में सेनन को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए दिखाया गया है, जबकि उनका पालतू कुत्ता उन्हें देख रहा है। बाद में वह कुत्ते के पैर पर भी एक राखी बांधती हैं।

विज्ञापन की आलोचना क्यों हुई?

इस विज्ञापन के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने सेनन के पहनावे की आलोचना करते हुए कहा कि पारंपरिक त्योहार के हिसाब से यह ठीक नहीं था। वहीं, कुछ लोगों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि विज्ञापन में एक्ट्रेस एक कुत्ते को राखी बांध रही थीं।

इस आलोचना के कारण विज्ञापन का फोकस त्योहार के संदेश से हटकर महिलाओं के पहनावे, सांस्कृतिक परंपराओं और निजी पसंद से जुड़ी व्यापक बहस पर केंद्रित हो गया।

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Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: ‘वंदे मातरम’ पर शर्मिला टैगोर की बात सुन भड़की कंगना रनौत, बोलीं- आपको एक बार पढ़ना चाहिए

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: अभी ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाने के मौजूदा चलन के बजाय इसके छह पद गाने को लेकर राजनीतिक हंगामा चल रहा है। इसी मुद्दे पर दो अभिनेत्रियों के बीच बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर—जिनका रिश्ता राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है—ने सुझाव दिया कि ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं, क्योंकि बाद के पदों में दुर्गा और काली जैसे हिंदू देवी-देवताओं का ज़िक्र है, जिन्हें एक ईश्वर को मानने वाले लोग शायद स्वीकार न कर पाएं।

कंगना रनौत ने इस विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया और उनसे “हिंदू-मुस्लिम सोच” से आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने समझाया कि देवी-देवताओं का जिक्र रचनात्मक रूपक (metaphors) के तौर पर किया गया है, जिसका मकसद राष्ट्रीय शक्ति को जगाना है, न कि ये कोई धार्मिक आदेश हैं।

छह पदों में क्या कहा गया है? विवाद क्या था?

IANS के साथ एक इंटरव्यू में, अनुभवी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लिखी कविता के सिर्फ दो छंदों (stanzas) को गाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में कई धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं और उन्हें कई देवी-देवताओं का नाम लेने में असहजता महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि जो लोग कड़ाई से एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर में विश्वास) को मानते हैं, उनके लिए “वंदे काली, वंदे दुर्गा” जैसे वाक्यांशों का उच्चारण करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी धार्मिक समुदायों को एकजुट करने के लिए, कविता के शुरुआती दो छंदों तक ही सीमित रहना सबसे समावेशी तरीका है।

कंगना रनौत ने क्या कहा

एक्टर और BJP की लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर तीखी आलोचना की, साथ ही यह भी कहा कि वह अब भी उन दिग्गज स्टार को व्यक्तिगत रूप से पसंद करती हैं और उनका सम्मान करती हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि कोई कलाकार कविता को इतने शाब्दिक अर्थ में कैसे ले सकता है।

उन्होंने कहा कि गानों में शब्दों, कल्पनाओं और उपमाओं का मकसद भावनात्मक असर पैदा करना होता है, न कि धार्मिक क्रियाओं को ठीक-ठीक परिभाषित करना। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान बंकिम चंद्र का दुर्गा या शक्ति का ज़िक्र करना नागरिकों के भीतर आंतरिक उग्रता और शक्ति को जगाने के लिए एक काव्यात्मक आह्वान था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उदाहरण दिय, जिसमें उन्होंने ऐसे युवाओं की ज़रूरत बताई थी जिनकी “नसों में बिजली दौड़ती हो”; उन्होंने कहा कि विवेकानंद मौसम का पूर्वानुमान नहीं दे रहे थे, बल्कि शक्ति की मांग कर रहे थे।

उन्होंने लिखा, “कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ऊर्जा को ‘शक्ति’ कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपना समझकर अपनाएं।”

Kangana Ranaut: कंगना रनौत बोलीं जंतर-मंतर पर जमा भीड़ में ‘शबाना आजमी जैसे’ लोग थे, ‘ये Gen Z कैसे हो सकते हैं?’

Kangana Ranaut: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना झेलने के बाद, कंगना रनौत ने अपने विवादित “जेनरेशन गटर” वाले बयान पर एक और स्पष्टीकरण दिया है। एक्टर और बीजेपी सांसद ने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी पूरी पीढ़ी को निशाना नहीं बनाया था और कहा कि उनकी टिप्पणी केवल प्रदर्शनकारियों के एक खास वर्ग के लिए थी, जिन्हें उन्होंने प्रदर्शन के वीडियो में देखा था।

गुरुवार को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने सवाल किया कि इस भीड़ को आम तौर पर ‘जेन जेड’ (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन क्यों कहा जा रहा है और तर्क दिया कि असल में देश की युवा आबादी का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इसमें शामिल हुआ था।

कंगना ने ‘जेन ज़ेड प्रोटेस्ट’ लेबल पर सवाल उठाए

अपने वीडियो में कंगना ने इस बात को चुनौती दी कि यह प्रदर्शन पूरे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जेन ज़ेड आबादी का अनुमान लगभग 30 से 35 करोड़ लगाया और इस संख्या की तुलना जंतर-मंतर पर जमा हुए लोगों की संख्या से की। उन्होंने कहा, “पूरे देश के युवा? अगर आप सिर्फ जेन जेड की बात करते हैं, तो लगभग 30-35 करोड़ के पास इनकी आबादी होने वाली है।”

कंगना ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में लगभग 10,000 लोग मौजूद थे और इस सभा में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी का जिक्र करते हुए, जो मार्च में शामिल हुई थीं, उन्होंने कहा, “जो जंतर-मंतर है वहाँ पर 10,000 लोग एक साथ आए थे जिनमें से आधे से ज्यादा लोग शबाना आज़मी जैसे थे, आपने देखा कि हर तरह के आयु वर्ग के लोग घूम रहे थे।”

इसके बाद उन्होंने दावा किया कि सभा में केवल लगभग 2,000 लोग ही जेनरेशन Z से थे और सवाल किया कि इस विरोध प्रदर्शन को पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधि क्यों बताया जा रहा है। कंगना ने कहा कि “अगर हम युवाओं की बात करते हैं, जेन ज़ेड की हम विशेष रूप से बात करते हैं तो लग भाग वाह 2000 जेन ज़ेड पर, तो कैसे ये लोग इसको जेन ज़ेड विरोध कह रहे हैं? क्या पूरे देश की जेन ज़ेड विरोध कर रहे हैं?”

‘मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती’

कंगना ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनकी पिछली टिप्पणियां खास तौर पर उन लोगों के बारे में थीं, जिन्हें उन्होंने विरोध प्रदर्शन में देखा था, न कि सभी युवा भारतीयों के बारे में। उन्होंने कहा, “यहां जो भीड़ जमा हुई थी, मैंने खास तौर पर उन्हीं के बारे में कहा था।” इसके बाद एक्ट्रेस ने उन लोगों को “खुली चुनौती” दी जो उन पर पूरी पीढ़ी का अपमान करने का आरोप लगा रहे थे।

उन्होंने कहा, “मैं आपको खुली चुनौती देती हूं, मेरा कोई ऐसा खास बयान बताइए जिसमें मैंने पूरी पीढ़ी को शामिल किया हो? मेरे साथ इस तरह का फालतू एजेंडा मत चलाइए!” कंगना ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि वह युवाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती क्योंकि मैं खुद युवा हूं।”

कंगना ने पहले क्या कहा था

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा था, “मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स देखकर उल्टी आती है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं… मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी हर फ्रेम में सब कुछ इतना अजीब और भद्दा एक साथ नहीं देखा… मैं उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहती हूँ। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं…”

उनकी इन बातों पर लोगों ने नाराज़गी जताई और आलोचकों ने उन पर युवा प्रदर्शनकारियों के बारे में सामान्य और तीखी टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कंगना पहले ही अपनी ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सफाई दे चुकी थीं। आलोचना के बाद, कंगना ने ANI को बताया था कि उनका मकसद विरोध प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों के बारे में कोई सामान्य टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह “कुछ लोगों या कुछ महिलाओं” के बारे में बात कर रही थीं।

अपनी टिप्पणी के एक और विवादित हिस्से पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, और हम कहते हैं कि कॉकरोच गटर से निकलते हैं, तो इसमें क्या गलत है?” कंगना ने आगे कहा कि अगर कोई खुद को कॉकरोच बताता है, तो उन्हें उन्हें गटर से जोड़ने में कोई विरोधाभास नहीं दिखता।

उन्होंने कहा, “मैं खुद को कॉकरोच बिल्कुल नहीं मानती। अगर कोई कहे कि मैं गटर में रहती हूँ, तो मैं इससे इनकार करूँगी। लेकिन अगर कोई खुद को कॉकरोच कहता है, तो ज़ाहिर है कि वह गटर में ही रहेगा और कहां रहेगा?” उन्होंने फिर कहा, “लेकिन यह कहना कि मैं सभी युवाओं की बात कर रही थी, बिल्कुल गलत है।”

शबाना आज़मी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं

शबाना आज़मी उन लोगों में शामिल थीं, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 75 वर्षीय अभिनेत्री ने मार्च की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिनमें उन्हें ट्रक में यात्रा करते और प्रदर्शनकारियों के साथ बैरिकेड पार करते हुए देखा जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान अभिनेता प्रकाश राज भी उनके साथ दिखे

कंगना का ताज़ा बयान उनकी पहले दी गई सफाई को ही और मज़बूत करता है। उनका कहना है कि उनकी बातों की आलोचना करते हुए, एक खास ग्रुप पर की गई टिप्पणी को गलत तरीके से देश की पूरी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) आबादी पर हमले के तौर पर पेश किया गया है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

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संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्ष के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने काफी दान किया। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में दान पात्र में 2 लाख 14 हजार रुपए का चंदा हासिल हुआ। सपा सांसदों ने गुरुवार को इस रकम को कनाट पैलेस स्थित हनुमान मंदिर में जमा करा दिया। ALSO READ: नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

 

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, मनोज झा समेत सभी विपक्षी सांसदों ने इस दान पात्र में पैसा डाला था। अब सपा सांसदों ने इस रकम को हनुमान मंदिर में जमा कराया है। उनका कहना है कि हम हनुमान मंदिर में यह दान इसलिए जमा करा रहे हैं क्योंकि वह धर्म के रक्षक माने जाते हैं।

 

चढ़ावा चोरी मामले में प्रदर्शन के दौरान जब सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद पहुंचे तो बवाल मच गया। भाजपा ने पप्पू यादव की इस हरकत की जमकर आलोचना की तो कई स्थानों पर साधु संतों ने भी उनका विरोध किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पर हमला भी हुआ। ALSO READ: कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला- सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं सुनते

 

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन जब समाजवादी पार्टी के सांसद रुचि वीरा और अक्षय यादव ने दान पात्र खोला तो मकर द्वार के बाहर रोज एक घंटे के लिए रखे जाने वाले दानपात्र में 2 लाख 15 हजार 3 सौ 90 रुपए से ज्यादा का चंदा इकट्ठा हुआ।

 

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर तक में चढ़ावा चोरी कर दी और संसद में चर्चा तक नहीं करा रहे हैं। इसी के चलते हमने दान पात्र रखकर विरोध किया है।

Kangana Ranaut: ‘पाकिस्तान के प्यार में मारे रहते हैं’, कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को सुनाई खरी-खोटी

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणियों पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें “लोमड़ी” कहा। अब कंगना ने अपनी बात का बचाव किया है और एक्टर पर “पाकिस्तान के प्रति उनके प्यार” को लेकर निशाना साधा है, साथ ही फिल्म इंडस्ट्री पर “दोहरेपन” का आरोप भी लगाया है।

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने का बचाव किया

ANI के साथ बातचीत में, कंगना ने फ़िल्म इंडस्ट्री के “लगातार बने हुए रवैये” की आलोचना की और जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मची अफरातफरी को याद किया। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान, उनके कई सांसद दोस्तों की गाड़ियों पर लोग चढ़ गए थे और उनकी खिड़कियां तोड़ दी थीं, जबकि उनके घर के बाहर करीब 2,500 लोग जमा हो गए थे, जिसके कारण भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और उनके परिवार को रात भर जागना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा, “तो जब जंतर-मंतर पर ऐसी स्थिति बन रही थी, तो वे सभी मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे। लेकिन अब जब झारखंड में बच्चे इस तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, तो क्या वे भी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) नहीं हैं? क्या कोई व्यक्ति तभी ‘जेन ज़ी’ माना जाता है जब वह देश के खिलाफ काम करता है या प्रधानमंत्री को अपशब्द कहता है? उन्हें खुद ही युवाओं के खिलाफ दिखाया गया है। फिल्म इंडस्ट्री का यह पाखंड नहीं चलेगा। फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग जंतर-मंतर के लिए जो मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, उन्हें झारखंड के बच्चों के लिए भी वैसे ही आंसू बहाने चाहिए।”

इसके बाद उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में अपनी “लोमड़ी” टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा, “मैंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो बनाया था जिसमें वे इस तरह की धमकियां दे रहे थे। और जब भी आप उनकी फिल्में, साक्षात्कार या बयान देखें, बात हमेशा पाकिस्तान की ही होती है। ये पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी? जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में ये मरे रहते हैं। अब बंटवारे को भी इतने साल हो गए हैं तो ये प्रेम कहानी खत्म क्यों नहीं हो रही है?”

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ क्यों कहा?

पिछले हफ्ते, अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर, कंगना ने नसीरुद्दीन की टिप्पणी पर अभिनेता पीयूष मिश्रा की एक टिप्पणी को दोबारा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने झारखंड में छात्र विरोध प्रदर्शन पर अनुभवी अभिनेता की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने एक अलग नोट जोड़ा जिसमें लिखा था, “सच तो ये है कि हर कोई न किसी का कुत्ता है लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूं उसकी रखवाली करती हूं, उसके लिए लड़की हूं। नसीर साहब खाते तो इस देश के हैं लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं।” (सच्चाई यह है कि हममें से हर कोई किसी न किसी का पालतू है। मुझे गर्व है कि मैं उसी घर की रक्षा और बचाव करता हूं जहां से मुझे खाना मिलता है। लेकिन नसीर साहब इस जमीन से खाते हैं और पड़ोसी देश की रक्षा करते हैं)।”

उन्होंने आगे कहा, “PS: आज के समय में कुत्ता कहलाना एक तारीफ़ है क्योंकि वफ़ादारी और क्यूटनेस बहुत कम देखने को मिलती है। मैं नसीरुद्दीन की तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना ज़्यादा पसंद करूंगी।” इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने NEET पेपर लीक को लेकर CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस बर्बरता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी।

Bharat Bhhagya Viddhaata OTT Release: कंगना रनौत स्टारर इस दिन ओटीटी पर दे रही है दस्तक

Bharat Bhhagya Viddhaata OTT Release: कंगना रनौत की फ़िल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ अब सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के बाद डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर आ रही है। मनोज तापड़िया के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और यह 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की घटनाओं पर आधारित है।

तारीफ़ मिलने के बावजूद, फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। अब इसकी OTT रिलीज़ के बारे में ज़रूरी जानकारी दी गई है, जिसमें यह भी शामिल है कि आप इसे कब और कहां देख सकते हैं।

‘भारत भाग्य विधाता’ 14 अगस्त को ZEE5 पर प्रीमियर होने के लिए तैयार है। प्लेटफ़ॉर्म के ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम हैंडल ने इस घोषणा के लिए एक नया ट्रेलर शेयर किया। साथ ही, उन्होंने कैप्शन में लिखा, “आम नर्सों की एक अनकही कहानी, जिन्होंने 26/11 की सबसे काली रात में असाधारण हिम्मत दिखाई। कुछ हीरो कभी सामने नहीं आए। उनकी कहानियाँ कभी नहीं बताई गईं। अब तक। ‘भारत भाग्य विधाता’ का ट्रेलर अब आ गया है। #BharatBhhagyaViddhaata का प्रीमियर 14 अगस्त को हिंदी ZEE5 पर होगा।”

इस घोषणा के तुरंत बाद, कंगना के फैंस ने कमेंट सेक्शन में अपना उत्साह ज़ाहिर किया। एक फैन ने लिखा, “वाह, आखिरकार।” दूसरे फैन ने लिखा, “इसे दोबारा देखने का बेसब्री से इंतज़ार है।” कुछ लोगों ने फायर इमोजी भी पोस्ट किए।

ज़्यादातर कामा और एल्ब्लेस हॉस्पिटल में सेट यह फ़िल्म गीता माधव गंधारे (कंगना रनौत) की कहानी है, जो एक नर्स हैं और खुद को और अपने साथियों को अचानक हुए आतंकी हमले के बीच फंसा हुआ पाती हैं। जब हथियारबंद आतंकवादी अस्पताल को निशाना बनाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ़ गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं समेत सैकड़ों मरीज़ों की जान बचाने के लिए समय से होड़ करता है।

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बिना किसी हथियार या लड़ाई की ट्रेनिंग के, नर्सें और अस्पताल के दूसरे कर्मचारी मरीज़ों को सुरक्षित रखने के लिए हिम्मत, तेज़ी से सोचने की क्षमता और टीमवर्क का सहारा लेते हैं। यह फ़िल्म कामा हॉस्पिटल की नर्स अंजलि कुल्थे की असल ज़िंदगी की बहादुरी से प्रेरित है और उन गुमनाम नायकों पर रोशनी डालती है जिन्होंने 26/11 के हमलों के दौरान दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी।

कंगना के अलावा, फ़िल्म में गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, आशा शेलार, प्रिया अरुण बेर्डे, रसिका अगाशे, सुहिता थत्ते और ईशा डे भी हैं, साथ ही अमृता नामदेव, आदित्य मिश्रा, सुनील पालवाल और सुयश कुकरेजा सहायक भूमिकाओं में हैं।

Kangana Ranaut: क्या कंगना रनौत ने सोनाक्षी सिन्हा पर तंज कसा? एक्ट्रेस की ‘पॉकेटमार’ वाली कमेंट ने मचाई खलबली

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। इसकी वजह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक स्क्रीनशॉट है, जिसने ऑनलाइन काफी बहस छेड़ दी है। इस तस्वीर में कंगना को एक इंस्टाग्राम पोस्ट लाइक करते हुए दिखाया गया है, जिसमें हालिया विरोध प्रदर्शनों पर एक अज्ञात एक्ट्रेस के ओवररिएक्ट करने की आलोचना की गई थी। हालांकि, ‘क्वीन’ फिल्म की एक्ट्रेस ने इस पोस्ट से किसी भी तरह के जुड़ाव से साफ इनकार किया है और स्क्रीनशॉट को मनगढ़ंत बताया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह स्क्रीनशॉट फैला। कई लोगों का दावा था कि कंगना ने उस पोस्ट को सपोर्ट किया है, जिसमें एक एक्ट्रेस पर निशाना साधा गया था—आरोप था कि वह एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तो बोलती है, लेकिन दूसरे पर चुप रहती है।

कंगना ने तुरंत स्थिति साफ करते हुए कहा कि वह तथाकथित “लाइक” उनके अकाउंट से कभी नहीं किया गया था। एक्ट्रेस ने क्रिप्टिक अंदाज़ में अपनी बात साफ़ की। वायरल हो रहे दावे को खारिज करते हुए, कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर कड़े शब्दों में एक मैसेज भी पोस्ट किया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों से जल्द ही नई अटकलें शुरू हो गईं।

कंगना ने अपने नोट में लिखा कि वह किसी को भी ‘बॉडी-शेम’ करने में यकीन नहीं रखतीं, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने “एक एक्ट्रेस” को देखा है, जिसके स्टाइल और पब्लिक अपीयरेंस में ज़बरदस्त बदलाव आया है। उन्होंने उस एक्ट्रेस का नाम लिए बिना कहा कि वह अब “जेबकतरे की तरह कपड़े पहनती और बात करती है” और हाल के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान “गटरछाप व्यवहार” को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

कंगना ने आगे कहा कि एक्ट्रेस के फ़ैशन से उनके पर्सनल रिश्ते की हालत का पता चलता है और ऐसा लगता है कि उनमें पहले जैसी ग्रेस (अदा) नहीं रही। अपनी बात को व्यंग्य के साथ खत्म करते हुए, कंगना ने ज़रूरत पड़ने पर उनकी स्टाइलिंग में मदद करने की पेशकश भी की। इतनी तीखी बातें कहने के बावजूद, कंगना ने उस व्यक्ति का नाम नहीं बताया जिसके बारे में वह बात कर रही थीं।

हालांकि इंस्टाग्राम स्टोरी में किसी का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को यह अंदाज़ा लगाने में ज़्यादा समय नहीं लगा कि यह किसके बारे में कहा गया है। इंटरनेट पर कुछ लोगों ने कंगना की बातों को एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा से जोड़ा; कई यूज़र्स का कहना था कि कंगना का बताया हुलिया सोनाक्षी के हालिया पब्लिक अपीयरेंस से मेल खाता है। हालाँकि, ये सिर्फ़ सोशल मीडिया के अंदाज़े हैं और कंगना ने खुद इस बात की न तो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है कि उनकी बातें सोनाक्षी के बारे में थीं।

इसी तरह, सोनाक्षी ने वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट, कंगना की सफाई या पोस्ट को लेकर हो रही अटकलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक्ट्रेस की पहचान के बारे में कोई पुष्टि नहीं। फिलहाल, यह चर्चा मुख्य रूप से ऑनलाइन अटकलों तक ही सीमित है। हालांकि कंगना ने साफ तौर पर ओरिजिनल इंस्टाग्राम पोस्ट को लाइक करने से इनकार किया है, लेकिन उनके बाद के बयान ने बहस की एक नई लहर पैदा कर दी है, और यूज़र्स इसके अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं।

चूंकि न तो कंगना और न ही सोनाक्षी ने सीधे तौर पर उन अटकलों पर बात की है जिनमें दोनों को जोड़ा जा रहा है, इसलिए इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि एक्टर का वह रहस्यमयी मैसेज किसके लिए था। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह बातचीत ज़ोर पकड़ रही है, जहां फैंस और आलोचक कंगना की पोस्ट की हर लाइन का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं।

Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

धमकी के बाद छिपकर रहे थे दीपके के माता-पिता, CJP नए आंदोलन की तैयारी में

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party: 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार पर आए राजनीतिक दबाव और धमकियों के सनसनीखेज मामले ने तूल पकड़ लिया है। अभिजीत की मां अनीता दीपके ने 29 जुलाई को एक मराठी समाचार चैनल के सामने खुलासा किया कि उनके बेटे को एक वीडियो के जरिए सीधे धमकी दी गई थी। इस वीडियो में साफ चेतावनी दी गई थी कि अगर अभिजीत भाजपा में शामिल नहीं हुए तो उनके माता-पिता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, सीजेपी ने कहा कि उसे न सरकार पर भरोसा और न ही सुप्रीम कोर्ट पर। अब वह सरकार के खिलाफ अगले आंदोलन की तैयारी कर रही है। 

16 दिनों तक कोंकण में छिपा रहा परिवार

अभिजीत दीपके के नई दिल्ली से वापस लौटने से पहले मराठी समाचार चैनल से बातचीत करते हुए उनकी मां अनीता दीपके का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने बताया कि धमकी के बाद परिवार में ऐसा डर समा गया था कि उन्हें अपना घर छोड़कर कोंकण क्षेत्र में अपने एक रिश्तेदार के घर पर 16 दिनों तक शरण लेनी पड़ी। ALSO READ: जेन-जी को 'गटर जनरेशन' कहकर घिरीं कंगना रनौत, CJP ने दिया करारा जवाब

आप यह वीडियो मत देखना

अनीता दीपके ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि अभिजीत को काफी समय से धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उसने शुरुआत में हमें परेशान न करने की नीयत से कुछ नहीं बताया। बाद में उसने एक धमकी भरे वीडियो का जिक्र किया और मुझसे खास हिदायत दी कि मैं उस क्लिप को बिल्कुल न देखूं। उस क्लिप में अभिजीत को खुली चेतावनी दी गई थी कि यदि वह बीजेपी में शामिल नहीं होता है, तो उसके माता-पिता के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। इस सीधी धमकी के बाद अभिजीत ने खुद हमसे घर छोड़कर कहीं सुरक्षित जगह पर चले जाने का आग्रह किया। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

 

मां अनीता ने कहा कि अभिजीत खुद ऐसी धमकियों और राजनीतिक दबाव से नहीं डरते हैं, लेकिन चूंकि उनका परिवार राजनीति और इन खतरनाक चीजों का आदी नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने माता-पिता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। अभिजीत दीपके के पिता ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में काम करने वाले व्यक्ति को आलोचनाओं का सामना करना ही पड़ता है। लेकिन कुछ लोग 'फिक्स्ड सोच' के होते हैं जो रचनात्मक विरोध के बजाय सीधी धमकियों और दुश्मनी पर उतर आते हैं। ALSO READ: CJP के आंदोलन की चेतावनी के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पार्टी का आरोप- राज्यों में जारी है गिरफ्तारियां, कानूनी सहायता के लिए बनाया फंड

नए आंदोलन की तैयारी में सीजेपी

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी CJP को एतराज है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि उन प्रदर्शनकारियों के साथ कोई नरमी न बरती जाए, जिनका आपराधिक रिकार्ड रहा है, जबकि सीजेपी नेता सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की बात कह रहे हैं। सीजेपी ने पेपर लीक रोकने की सरकार की पहल को भी नाकाफी बताया है। अब सीजेपी नए आंदोलन की तैयारी में जुट गई है। सीजेपी ने सरकार से बातचीत के बाद धरना-प्रदर्शन तो रोक दिया, लेकिन सरकार पर शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए फिर से आंदोलन की चेतावनी भी दी है। 

 

दरअसल, पेपर लीक रोकने के लिए सरकार के कानून से सीजेपी संतुष्ट नहीं है। उसके प्रवक्ता आशुतोष रांका कहते हैं कि सरकार ने जो बिल लोकसभा में पास कराया है, वह कारगर नहीं होगा। उनका कहना है कि परीक्षाओं के पेपर लीक रोकने के लिए सीजेपी ने कई सुझाव दिए थे, पहले उन पर अमल होना चाहिए।

अभिजीत दीपके का कंगना पर तीखा तंज, उन्हें गंभीरता से लेता ही कौन है?

kangana ranaut gutter generation controversy

kangana ranaut gutter generation controversy: युवाओं और Gen-Z पीढ़ी को 'गटर जनरेशन' बताने और प्रदर्शनकारी लड़कियों पर अश्लीलता का आरोप लगाकर घिरीं बीजेपी सांसद व अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपने बयान पर मचे बवाल के बीच कंगना ने एक नया सेल्फी वीडियो जारी कर अपने बयानों को सही ठहराने की कोशिश की, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कंगना रनौत की दलीलों और टिप्पणियों को पूरी तरह बेतुका करार देते हुए उन पर करारा तंज कसा है।

उन्हें गंभीरता से कौन लेता है?

कंगना रनौत के नए वीडियो और सफाई के बाद CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने चुटकी लेते हुए कंगना के वजूद पर ही सवाल उठा दिया। दीपके ने बेहद बेबाक अंदाज में कहा कि अरे, उन्हें (कंगना रनौत को) गंभीरता से लेता ही कौन है? दीपके के इस तंज ने कंगना के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए यह संदेश दिया कि सांसद के रूप में उनके ऐसे विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयानों की राजनीति में कोई गंभीरता नहीं रह गई है। ALSO READ: कंगना रनौत का गटर ज्ञान, Gen Z को 'गटर जनरेशन' कहकर काटा बवाल, कांग्रेस और सोशल मीडिया ने लिया आड़े हाथ

कंगना रनौत ने वीडियो जारी कर दी सफाई

इससे पहले, अपने विवादित बयानों से घिरीं कंगना रनौत ने एक सेल्फी वीडियो जारी कर अपने रुख को जायज ठहराने की कोशिश की। मीडिया और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कंगना ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील आचरण और अभद्र भाषा को किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

 

कंगना ने वीडियो में कहा कि हम अपने समाज में इस तरह के बर्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते। हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे यह सब देखें या बुजुर्गों के सामने शर्मिंदा होना पड़े। उन्होंने कहा कि संविधान और सीमाओं का पालन करना होगा। तथाकथित 'फेमिनाजी' युवाओं को जानवरों जैसा बर्ताव करना सिखा रही हैं। इनके बहकावे में आकर जिंदगी बर्बाद न करें, वरना अंत में जेल जाना पड़ेगा। ALSO READ: 'राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों को PM आवास क्यों ले जा रहे थे?' CJP प्रदर्शन के बीच कंगना रनौत का बड़ा हमला

कैसे शुरू हुआ था 'जनरेशन गटर' विवाद?

यह पूरा विवाद तब भड़का था जब कंगना रनौत ने बिना मेहनत किए 'इन्डिपेन्डेन्ट वुमन' बनने की नकल करने वाली महिलाओं पर तंज कसा था। उन्होंने ऐसी महिलाओं को 'भ्रष्ट', 'नशे में धुत' और 'मल्टीपल बॉडी काउंट रखने वाली' बताते हुए पूरी जनरेशन को 'गटर जनरेशन' कह दिया था। इस बयान के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास और कई छात्र संगठनों ने कंगना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।