बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

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भारत-जहां बुद्ध की शांति, महावीर की अहिंसा, कबीर का भ्रातृभाव और गांधी का सत्याग्रह पला-बढ़ा, आज वही देश कड़वे, विवादास्पद और घृणास्पद बयानों के तीर से बार-बार छलनी हो रहा है। हाल के समय में, चाहे वह राजनीति का गलियारा हो, धार्मिक मंच हों, या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स- ऐसे बयानों की एक बाढ़ सी आ गई है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा भारत को अराजक रास्ते पर ले जा रही है। इस बाढ़ में सभी बह रहे हैं।

 

“शब्द यदि विचारपूर्वक न बोले जाएं, तो वे बाण से भी अधिक घातक सिद्ध होते हैं। बाण शरीर को बेधता है, किंतु अनुचित शब्द देश और समाज की आत्मा को घायल कर देते हैं।”

 

1. भाषा का गिरता स्तर और राजनीतिक मर्यादाएं

हाल के दौर में हमने देखा है कि सार्वजनिक संवाद में गरिमा की जगह तीखे व्यक्तिगत हमलों और भड़काऊ बयानबाजी ने ले ली है।

ध्रुवीकरण की राजनीति: चुनावी रैलियों और जनसभाओं के दौरान अक्सर ऐसे बयान देखने को मिलते हैं जहाँ विरोधी दल के नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल होता है।

पहचान पर प्रहार: हालिया बहसों और भाषणों में अक्सर किसी वर्ग, क्षेत्र या धर्म विशेष के लोगों को 'फर्जी', 'घुसपैठिया' या 'अराष्ट्रीय' करार देने की होड़ दिखाई देती है। राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली यह बयानबाजी समाज में स्थायी दरार पैदा करती है।

 

2. नफ़रत भरे बयान (Hate Speech) और सामाजिक दरार

विभिन्न रिसर्च और रिपोर्टों (जैसे इंडिया हेट लैब और मानवाधिकार अध्ययन) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में घृणास्पद भाषणों (Hate Speech) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

आस्था बनाम उकसावा: धार्मिक आयोजनों और रैलियों के मंचों से कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं, जहाँ एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काया जाता है या उनके बहिष्कार की बात की जाती है।

सहिष्णुता का ह्रास: जब ऐसे बयान सामने आते हैं, तो यह सदियों पुरानी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और आपसी भाईचारे की भावना को गहराई से चोट पहुँचाते हैं।

 

3. सोशल मीडिया: आग में घी का काम

आज के डिजिटल युग में एक भड़काऊ बयान केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहाँ वह बोला गया।

टीआरपी और एल्गोरिदम का खेल: सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) विवादित बयानों को मिनटों में वायरल कर देते हैं।

अधूरी जानकारी और नफ़रत का प्रसार: भ्रामक संदर्भों और विवादित वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल युवाओं के मन में आक्रोश और ज़हर घोलने के लिए किया जा रहा है।

 

4. बयानों से भारत को होने वाले नुकसान

सामाजिक समरसता: समाज में अविश्वास और भय का माहौल बनता है, जिससे आपसी सौहार्द नष्ट होता है।

वैश्विक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक लोकतांत्रिक और सहिष्णु राष्ट्र की छवि को आघात पहुँचता है।

आर्थिक प्रगति: जिस देश या राज्य में सामाजिक अस्थिरता होती है, वहाँ निवेशक और उद्योग आने से हिचकिचाते हैं।

युवाओं पर प्रभाव: संवाद की आक्रामकता देखकर भावी पीढ़ी तर्क और विचारशीलता के स्थान पर नफ़रत को सामान्य मानने लगती है।

 

5. समाधान का मार्ग: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिक को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) इसके साथ युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) भी जोड़ता है- अर्थात् यह स्वतंत्रता किसी को नफ़रत फैलाने या लोक व्यवस्था (Public Order) को बिगाड़ने का अधिकार नहीं देती।

कानूनी सख्त कार्रवाई: हेट स्पीच पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव से परे हटकर निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेताओं और जिम्मेदार पदों का आत्म-नियमन: सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों को समझना होगा कि उनके हर एक शब्द का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल साक्षरता और संयम: आम जनता को भी सोशल मीडिया पर किसी भड़काऊ बयान को बढ़ावा देने या शेयर करने से बचना चाहिए।

 

शब्द ही जोड़ते हैं और शब्द ही तोड़ते हैं। भारत अगर विभिन्नताओं में एकता की विशाल मिसाल है, तो इस मिसाल को बनाए रखने का दायित्व हम सभी का है। जब तक सार्वजनिक जीवन में भाषण की गरिमा, मर्यादा और सत्य निष्ठा वापस नहीं लौटती, तब तक देश की आत्मा बयानों के इस ज़हर से घायल होती रहेगी। अब समय आ गया है कि हम “बोलो, पर जोड़ने के लिए; तोड़ो, पर केवल नफ़रत के बंधनों को” का विचार अपनाएं। चलिए अब जान लेते हैं 10 विवादित बयान।

 

10 विवादित बयान: 

राज बब्बर, रशीद मसूद, मायावती, अखिलेश यादव, फारूख अब्दुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, चंदन मित्रा, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, बाबा रामदेव, अरविन्द केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, बाल ठाकरे, संजय राउत, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद, लालू यादव, गिरिराज सिंह, डेरेक ओ ब्रायन, ममता बनर्जी, सायली घोष आदि कई लोग हैं जो समय समय पर बयानवीर का खिताब लेते रहे हैं। देश की हर पार्टी में एक से बढ़कर एक बयानवीर भरेपड़े हैं।

 

1. “अनुपवेशकों और अधिक बच्चों वालों को धन बांटने” पर पीएम मोदी का बयान (2024)

बयान: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के घोषणापत्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि संपत्ति का सर्वे कराकर उसे “अनुप्रवेशकर्ताओं” (Infiltrators) और “जिनके ज्यादा बच्चे हैं” को बांट दिया जाएगा।

विवाद: विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और धुव्रीकरण पैदा करने वाला बयान बताया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

 

2. “सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया की तरह है”– उदयनिधि स्टालिन (2023)

बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा कि “सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि डेंगू और मलेरिया की तरह इसे समाप्त कर देना चाहिए।” उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि “कोई भी ऐसा धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता, जो इंसानों में भेदभाव करता है और सम्मान नहीं देता, वह बीमारी के समान है।”

विवाद: इस बयान पर देश भर में भारी आक्रोश फैला। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे बहुसंख्यक आबादी की आस्था का अपमान बताते हुए अदालतों में याचिकाएं दायर कीं। बीजेपी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बयान को सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर सीधा प्रहार बताया। इसके बाद प्रियांक खरगे और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

 

3. “मोदी सरनेम” टिप्पणी– राहुल गांधी (2019/कानूनी कार्रवाई 2023)

बयान: चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “सब चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?”

विवाद: इस बयान के खिलाफ गुजरात में मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ। मार्च 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जिसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहाल) हो गई थी।

 

4. “शक्ति” से लड़ने संबंधी बयान– राहुल गांधी (2024)

बयान: भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में राहुल गांधी ने कहा, “हिंदू धर्म में एक शब्द है 'शक्ति'। हम एक शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

विवाद: प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस बयान को हिंदू आस्था और नारियों की 'शक्ति' के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक घमासान मचा।

 

5. “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” – अनुराग ठाकुर (2020)

बयान: दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली में नारा लगवाया: “देश के गद्दारों को… गोली मारो सा… को।”

विवाद: इस बयान को चुनावी माहौल में नफरत और हिंसा भड़काने वाला माना गया। चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था।

 

6. “अगर रोड खाली नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे”– कपिल मिश्रा (2020)

बयान: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के जाने तक हम शांत हैं, लेकिन अगर रास्ते खाली नहीं कराए गए तो हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।”

विवाद: इस बयान के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसके लिए कई रिपोर्टों में इस भाषण को जिम्मेदार माना गया।

 

7. रामचरितमानस और पांडुलिपियों पर विवादित टिप्पणी– स्वामी प्रसाद मौर्य (2023)

बयान: समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “इनमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान किया गया है, इसलिए इस ग्रंथ या इसके विवादित अंशों पर बैन लगना चाहिए।”

विवाद: इस बयान से साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष पैदा हुआ और देश भर में जगह-जगह मौर्य के पुतले फूंके गए थे।

 

8. किसान आंदोलन और “100-100 रुपये में आने वाली महिलाएं”- कंगना रनौत (2020)

बयान: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने एक बुजुर्ग महिला (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में बैठने आ जाती हैं।” उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंगना ने 'जेन जी' (Gen Z) को गटर जनरेशन कहा है।

विवाद: इस बयान से किसान संगठन बेहद नाराज हुए। इसी बयान के गुस्से के कारण जून 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सुरक्षाकर्मी महिला (CISF कांस्टेबल) ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

 

9. 'कॉकरोच' (Cockroach) शब्द वाली टिप्पणी और विवाद- CJI (2026) 

बयान: कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) की टिप्पणी में कहा गया था कि “बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह सोशल मीडिया, पत्रकारिता और RTI कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं”। उन्होंने कहा था कि कई युवा नौकरी या वकालत के पेशे में जगह न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) एक्टिविज़्म या अन्य माध्यमों से सिस्टम पर हमला करने का जरिया ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह टिप्पणी फर्जी और जाली डिग्रियों (Fake Degrees) के जरिए वकालत या अन्य पेशों में पिछले दरवाजे से घुसे लोगों और फर्जी पत्रकारों/एक्टिविस्टों के लिए थी, न कि देश के ईमानदार छात्रों और युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।

विवाद: जब इस बयान पर देशभर के युवाओं में भारी विरोध और बहस छिड़ी, तो CJI ने स्पष्टीकरण जारी किया कि उनकी इस टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस एक बयान ने CJP पार्टी को जन्म देकर देश में एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा कर दिया और फिर जो हुआ उसे सभी ने देखा है।

 

10. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान: 

बयान: अप्रैल 2023 में कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने सीधे हिंदू धर्म पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए 'सांप' का उदाहरण दिया था। बीजेपी/आरएसएस की विचारधारा एक जहरीले सांप की तरह है। अगर आप सोचेंगे कि यह जहरीला है या नहीं, और इसे चाटकर (जांचकर) देखेंगे, तो आप मारे जाएंगे। इसलिए पहले इस सांप को मारना जरूरी है।'

विवाद: भाजपा ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा और पार्टी का अपमान करने के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

Lock Upp 2: ‘मेरे पापा भी मुझे इतना किस नहीं करते’, राम कपूर के ऑन-कैमरा किस करने पर भड़की श्रेया कालरा

Lock Upp 2: ‘लॉक अप सच या सजा’ में हुई एक तीखी बहस ने कंटेस्टेंट श्रेया कालरा और राम कपूर को चर्चा में ला दिया है। हाल ही में हुए लीडरशिप टास्क के बाद, श्रेया ने अपने साथी कंटेस्टेंट पर पर्सनल बाउंड्री पार करने का आरोप लगाया और शिल्पा शिंदे से बात करते हुए कड़ी बातें कहीं।

यह बात तब सामने आई जब कंटेस्टेंट्स ने अपने टीम लीडर्स को चुनने के लिए वोट किया। शिवांगी जोशी को सबसे ज्यादा वोट मिले और वह टीम लीडर बनीं, जबकि आकांक्षा चमोला, जिन्हें दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा वोट मिले, उन्हें दूसरा लीडर चुना गया। बाद में, लॉकर रूम एरिया में शिल्पा से बात करते हुए, श्रेया ने शिवांगी के टास्क के दौरान राम कपूर से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “जब शिवांगी अपना टास्क कर रही थीं, तो राम सर उनके बहुत करीब आ गए। तब हर्षद ने कहा, ‘इतने करीब मत आइए’। जैसे ही वह पीछे हटे, उन्होंने सॉरी कहा। कैसा सॉरी? वह आदमी आता है और थूकता है। उनके मुंह पर कहो। उन्होंने सचमुच हर जगह थूक दिया था।”

श्रेया ने निजी सीमाओं को बनाए रखने के बारे में आगे बात की और आरोप लगाया कि राम ने उन्हें असहज महसूस कराया। “कुछ सीमाएं तो रखनी चाहिए। इस बार, अगर वह मुझे किस की कोशिश करेगा, तो मैं उसका मुंह पकड़ लूंगी और कहूंगी कि मेरे पिता भी मुझे इतना नहीं किस, अब मत किस करो। मैंने तुम्हें तीन बार बचाया है, और तुम एक उंगली भी नहीं उठाते। मुझे उसकी सीनियर्टी पर शर्म आती है। मैं ऐसे सीनियर्स पर थूकती हूं।”

जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि एक एपिसोड में, श्रेया के टास्क जीतने और उस हफ्ते के लिए राम को सुरक्षित करने के बाद, राम ने उसके गाल पर किस किया था। ‘लॉक अप सच या सज़ा’ को अभी फराह खान और रितेश देशमुख होस्ट कर रहे हैं। कंटेस्टेंट्स की लिस्ट में आकांक्षा चौधरी, सुनीता आहूजा, राम कपूर, श्रेया कालरा, शिवांगी जोशी, हर्षद चोपड़ा, सूफी मोतीवाला, धीरज धूपर और वरुण यादव शामिल हैं।

‘लॉक अप’ का पहला सीज़न 2022 में शुरू हुआ था, जिसमें कंगना रनौत होस्ट थीं और करण कुंद्रा जेलर थे। मुनव्वर फारुकी इस पहले सीज़न के विनर बने थे। दूसरे सीज़न में 14 कंटेस्टेंट्स, दो जेलर और एक लॉक-अप है, और यह मुकाबला छह हफ़्ते तक चलेगा। कंटेस्टेंट्स को गेम में करेंसी कमाने के लिए टास्क पूरे करने होते हैं; इस करेंसी का इस्तेमाल खाना, ज़रूरी सामान और दूसरी सुविधाओं जैसी बेसिक चीज़ें पाने के लिए किया जाता है।

International Kissing Day 2026: ऐश्वर्या राय से लेकर शबाना आजमी तक, जब स्टार्स के किस सीन पर खूब हुआ बवाल

International Kissing Day 2026: हर साल 6 जुलाई को ‘इंटरनेशनल किसिंग डे’ मनाया जाता है। यह दिन यूनाइटेड किंगडम में शुरू हुआ था और अब इसे दुनिया भर में प्यार और भावनाओं को जाहिर करने वाले एक इनफॉर्मल मौके के तौर पर मनाया जाता है। आइए, बॉलीवुड के 5 सबसे विवादित ऑन-स्क्रीन किस पर एक नजर डालते हैं।

1-माधुरी दीक्षित और विनोद खन्ना (1988)

फिल्म ‘दयावान’ में विनोद खन्ना ने डायरेक्टर के ‘कट’ कहने के बाद भी माधुरी दीक्षित को किस करना जारी रखा था। इतना ही नहीं उनके होंठ पर काट तक लिया था। 20 साल की इस सीन को फिल्माने के बाद इतना सहम और दर गईं थी कि सेट पर रोने लगी थीं। इस इंटीमेट सीन पर काफी हंगामा हुआ था। कहा जाता है कि इस हादसे के बाद से माधुरी ने फिर कभी विनोद खन्ना के साथ काम नहीं किया।

2-श्रीदेवी और उमेश मेहरा (1980)

फिल्म ‘गुरु’ के दौरान, श्रीदेवी ने किसिंग सीन करने से साफ मना कर दिया था। लेकिन डायरेक्टर ने बॉडी डबल का इस्तेमाल करके इस सीन शूट किया था। फिल्म में ऐसा दिखाया कि वह एक्ट्रेस ही थीं। श्रीदेवी की मां ने इस धोखे की कड़ी आलोचना की थी और इसे इंडस्ट्री में अपना सबसे बुरा अनुभव बताया।

3-ऐश्वर्या राय-ऋतिक रोशन (धूम 2 2006)

2006 में ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्म ‘धूम 2’ में को-स्टार ऋतिक रोशन के साथ ऑन-स्क्रीन किसिंग सीन की वजह से ऐश्वर्या राय को काफी विवाद का सामना करना पड़ा था। इस सीन पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, क्योंकि उन्होंने पहले कभी ऑन-स्क्रीन किस नहीं किया था और कई लोग उन्हें कल्चरर रोल मॉडल मानते थे।

कंगना रनौत और वीर दास (2014)

ऐसी खबरें आईं थी कि ‘रिवॉल्वर रानी’ में किसिंग सीन के दौरान दास ने रनौत को “चोट पहुंचाई” थी। दास ने इन दावों को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है और बाद में रनौत ने उनका बचाव किया था। उन्होंने एक्टर्स का फायदा उठाने के लिए पत्रकार की निंदा की थी। हाल में एक बार फिर से ये मामला उठा था।

धर्मेंद्र-शबाना आजमी(2023)

धर्मेंद्र वैसे तो हमेशा से रोमांटिक हीरो के तौर पर पसंद किए गए हैं। लेकिन 2023 में करण जौहर की फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में 88 साल की उम्र में उन्होंने शबाना आजमी के साथ लिप-लॉक सीन देकर हर किसी को हैरान कर दिया था। इस सीन के बाद खूब हंगामा हुआ था।

उदित नारायण फैन इंटरेक्शन (2025)

फिल्मों से हटकर, दिग्गज सिंगर उदित नारायण को एक वायरल वीडियो के कारण काफी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें वे एक महिला फैन के साथ दिखे थे। इस घटना ने पब्लिक बाउंड्रीज़ और आर्टिस्ट-फैन इंटरेक्शन पर बहस छेड़ दी थी।

Lock Upp 2: आकांक्षा चमोला ने श्रेया कालरा को बताया ईविल, फैंस ने एक्ट्रेस का किया सपोर्ट

Lock Upp 2: जब से एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने ‘लॉक अप सच या सजा’ में एंट्री की है, तब से वह चर्चा में बनी हुई हैं। शो के हालिया एपिसोड में तब एक बड़ा मोड़ आया जब आकांक्षा को पता चला कि श्रेया कालरा—जिसे वह अपनी दोस्त मानती थीं—ने उनका एक राज़ खोल दिया है, जिसकी वजह से उन्हें गेम में अपनी एक ‘लाइफलाइन’ गंवानी पड़ी। गुस्से में आकर आकांक्षा ने श्रेया से सवाल-जवाब किए और उन्हें “बुरी इंसान” कहा, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर दर्शकों ने उनके समर्थन में खूब मैसेज किए।

इस हफ़्ते की शुरुआत में, जब आकांक्षा ने श्रेया को बचाने का फ़ैसला नहीं किया, तो श्रेया ने सूफ़ी मोतीवाला के साथ आकांक्षा के एक राज के बारे में बात की। हाल के एपिसोड में, वह क्लिप आकांक्षा को दिखाई गई। इसके बाद उन्होंने बताया कि वह राज उनके बायसेक्शुअल होने और गौरव खन्ना से शादी करने से पहले महिलाओं के साथ रिश्ते में रहने के बारे में था। हालांकि आकांक्षा ने सच को खुलकर स्वीकार किया, लेकिन जिस तरह से यह बात सामने आई, उसे लेकर वह रो पड़ीं।

बाद में, एलिमिनेशन से बचने के बाद, आकांक्षा घर लौटी और अन्य प्रतियोगियों के सामने श्रेया का सामना किया। उसने कहा, “मैं सबके सामने कहना चाहती हूं कि मैंने दुनिया में इससे ज्यादा दुष्ट, निर्दयी और असंवेदनशील इंसान कभी नहीं देखा। तुमने जो सूफी के साथ मेरा राज साझा किया है ना, बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे बोल रही हो, मैंने तुम्हारा साथ नहीं दिया? लेकिन जो तुमने सूफी को बताया, वो मैंने तुम्हें बताया तक नहीं। हमारी बैकस्टेज पर बातचीत हुई थी। तुमने उसे सुन लिया और उसका इस्तेमाल किया।”

आकांक्षा ने आगे कहा, “इस औरत पर भरोसा मत करो। यह बात शो का हिस्सा भी नहीं थी, लेकिन वह इसे खेल में ले आई। इसलिए, साफ-साफ बता दूं, अब मेरे पास कोई सहारा नहीं है। वह पीठ पीछे छुरा घोंपने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। भगवान आपका भला करे। आशा है भगवान और तुम्हारा कर्म थोड़ा सुख और शांति दे और तुम्हारे अंदर जो लोगों के लिए गंदगी और नफरत है ना वो कभी तो कम हो।

यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गई। कई दर्शकों ने आकांक्षा का समर्थन किया और श्रेया के व्यवहार की आलोचना की। एक यूज़र ने लिखा, “श्रेया इस शो की सबसे बुरी इंसान है। सिर्फ़ गेम के चक्कर में उसने अपनी इंसानियत खो दी है। शर्म की बात है।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “उसने कंगना रनौत से भी बेहतर तरीके से उसकी क्लास लगाई।” तीसरे ने लिखा, “इस सीन को देखने के बाद जो संतुष्टि मिली, वह कमाल की थी।” एक और यूज़र ने कहा, “उसने वही कहा जो दर्शक महसूस कर रहे थे,” जबकि एक फ़ैन ने कमेंट किया, “श्रेया बस फरहाना भट्ट बनने की कोशिश कर रही है।” एक और ने कहा, “आकांक्षा ने जो कुछ भी कहा, वह बिल्कुल सही है।”

रितेश देशमुख और फ़राह खान द्वारा होस्ट किए गए ‘लॉक अप’ सीज़न 2 का प्रीमियर 27 जून को हुआ। इस जेल-थीम वाले रियलिटी शो में 15 सेलिब्रिटीज़ को बंद किया गया है, जो अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत साबित करने के लिए मुकाबला कर रहे हैं। हालिया एपिसोड में सीज़न का पहला एविक्शन हुआ, जिसमें श्रेष्ठा अय्यर को शो से बाहर कर दिया गया। मेकर्स ने एक नए वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट की एंट्री का भी हिंट दिया है।