कौन हैं DC के बल्लेबाज अभिषेक पोरेल? हाई कोर्ट ने रेप के आरोप में दिया गिरफ्तारी का आदेश, जानें पूरा मामला

आईपीएल के दिल्ली कैपिटल्स और बंगाल के लिए खेलने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक महिला की ओर से लगाए गए रेप के आरोप से जुड़े मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद पोरेल कानूनी विवाद में फंस गए हैं और अब आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार होगी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की जांच के तहत मोगरा पुलिस को अभिषेक पोरेल के मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त करने का आदेश दिया है। ऐसा इसलिए किया जाए ताकि शिकायत करने वाली महिला की तस्वीरें या वीडियो किसी भी तरह से आगे शेयर न हो सकें। महिला का आरोप है कि क्रिकेटर ने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए और दोनों के निजी पलों की रिकॉर्डिंग भी की।

अदालत ने आदेश में क्या कहा

अदालत के आदेश के मुतबिक, “6 जुलाई, 2026 की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिटीशनर से एक पेन ड्राइव/स्टोरेज डिवाइस जब्त किया गया है, जिसमें कुछ डेटा होने की बात सामने आई है। ऐसे में आरोपियों के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त करना जरूरी है, ताकि उनमें मौजूद डेटा किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर न किया जा सके।”

अदालत ने आगे कहा, “6 जुलाई, 2026 की रिपोर्ट में संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से आरोपियों को पकड़ने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया गया है। लेकिन, अब तक दोनों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इसलिए संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे रेस्पोंडेंट नंबर 6 और 7 को पकड़ने के प्रयास जारी रखें और उनके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त करें, ताकि उनमें मौजूद आपत्तिजनक सामग्री आगे प्रसारित न हो सके।”

कब हुई थी ये घटना

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिषेक पोरेल ने कथित तौर पर जनवरी 2023 में शिकायतकर्ता से संपर्क किया था, जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। क्रिकेटर अपने माता-पिता के घर पर नहीं होने के दौरान महिला को मनकुंडू स्थित अपने फ्लैट पर ले गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पोरेल ने वहीं उसके साथ जबरन फिजिकल रिलेशन बनाए। शिकायत के अनुसार, बाद में दोनों परिवारों के बीच शादी को लेकर बातचीत भी हुई थी। लेकिन, महिला का आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि अभिषेक पोरेल के अन्य महिलाओं के साथ भी संबंध थे। इसके बाद दोनों के रिश्ते में विवाद पैदा हो गया और मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया।

महिला को दी गई धमकियां

मोगरा पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, अभिषेक पोरेल ने कथित तौर पर महिला को गैरकानूनी तरीके से अपने पास रोके रखा, उसे खाना लेने की अनुमति नहीं दी और जानबूझकर उसे दूसरों से अलग-थलग रखा। 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली में हुई इस कथित घटना के बाद महिला की शारीरिक हालत बिगड़ गई और वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। अगले दिन उसकी फ्लाइट तय थी, लेकिन चोटों के कारण उसे तुरंत मेडिकल इलाज कराना पड़ा। एफआईआर में आगे आरोप लगाया गया है कि पोरेल ने अपने एक सहयोगी और एक अन्य मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर महिला को फोन और सोशल मीडिया के जरिए धमकियां भी दीं।

कौन है अभिषेक पोरेल

23 वर्षीय अभिषेक पोरेल पश्चिम बंगाल के चंदननगर से आते हैं और घरेलू क्रिकेट में बंगाल की टीम के लिए खेलते हैं। वह बाएं हाथ के विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जिन्हें आक्रामक बल्लेबाजी और फुर्तीली विकेटकीपिंग के लिए जाना जाता है। जूनियर स्तर पर भारत अंडर-19 और ईस्ट जोन टीम का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने अपनी पहचान बनाई। लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर पोरेल ने आईपीएल में भी जगह बनाई। आईपीएल में अभिषेक पोरेल दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा है। अभिषेक को दिल्ली में ऋषभ पंत के रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया गया था।

वाराणसी में बनेगा 500 बेड का अत्याधुनिक कामकाजी महिला छात्रावास, कैबिनेट में भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव को मिली मंजूरी

500 bed ultra-modern working women's hostel will be built in Varanasi

– 6000 वर्गमीटर सरकारी भूमि महिला कल्याण विभाग को होगी नि:शुल्क हस्तांतरित

– 'नो प्रॉफिट-नो लॉस' मॉडल पर संचालित होगी मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना

– शत-प्रतिशत राज्य सरकार के वित्त पोषण से होगा छात्रावास का निर्माण 

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना के तहत वाराणसी में 500 क्षमता वाले उच्च गुणवत्तापूर्ण महिला छात्रावास के निर्माण के लिए 6,000 वर्गमीटर सरकारी भूमि महिला कल्याण विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

 

यह भूमि हरिजन इंडस्ट्रियल गवर्नमेंट, उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज है जिसे अब महिला कल्याण विभाग के पक्ष में स्थानांतरित किया जाएगा। इस छात्रावास का निर्माण शत-प्रतिशत राज्य सरकार के वित्त पोषण से किया जाएगा।

 

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वाराणसी में 6000 वर्ग मीटर भूमि पर 500 क्षमता का एक छात्रावास बनाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी है। बजट में 7 छात्रावास बनाने का प्रावधान था, जिसमें से झांसी, आगरा, मेरठ और गोरखपुर के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। आज वाराणसी के लिए भी प्रस्ताव आज पास किया गया है। 

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प्रदेश में निजी, सरकारी और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही महिला कार्यबल की जरूरतों को देखते हुए महिला कल्याण विभाग कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती छात्रावासों का निर्माण करा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को सस्ती दरों पर सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार के अधीन कार्यरत महिला कल्याण विभाग इस योजना का संचालन 'नॉन-कॉमर्शियल, नो प्रॉफिट-नो लॉस' सिद्धांत पर करेगा। इसी सामाजिक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए वाराणसी में छात्रावास निर्माण के लिए सरकारी भूमि महिला कल्याण विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जा रही है।

 

248.30 लाख रुपए की लागत से तैयार होगा 112 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास

लखनऊ 21 जुलाई। उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में छात्राओं की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने वाराणसी स्थित वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट फोर्ट में छात्राओं के लिए 112 सीटों वाले नए छात्रावास भवन के निर्माण को मंजूरी दे दी।

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उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय का एक संघटक महाविद्यालय है। यह पिछले 112 वर्षों से अध्ययन के क्षेत्र में सेवा कर रहा है और ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ चल रहा है। अब तक एक छात्रावास था। जिसमें 220 छात्राओं के लिए सुविधा थी। 

 

उन्होंने बताया कि एक 248.30 लाख रुपए की लागत से त्वरित आर्थिक विकास योजना के अंतर्गत एक महिला छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। यह छात्रावास 112 छात्राओं के लिए होगा।

नौकरी छोड़े महीनों बीते, लेकिन अटका रहा वेतन; कोलकाता प्रोफेशनल ने साझा किया दर्द

कोलकाता के एक प्रोफेशनल की LinkedIn पोस्ट ने इन दिनों नौकरी, वेतन भुगतान और कर्मचारी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व कर्मचारी ने दावा किया है कि संगठन छोड़ने के लगभग एक साल बाद भी उसकी करीब ₹10,000 की बकाया सैलरी का भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक छोटी रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सम्मान और भरोसे से जुड़ा है, जिसकी उम्मीद हर कर्मचारी अपने काम के बदले करता है। पोस्ट में उन्होंने बताया कि कई बार संपर्क करने और इंतजार करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से साझा करने का फैसला किया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर कर्मचारियों के अधिकारों, कंपनियों की जिम्मेदारी और बेहतर वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अक्टूबर 2025 में छोड़ी थी नौकरी

पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, उसने Go Future Digital Team में अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक काम किया था। उसने 13 अक्टूबर 2025 को इस्तीफा दिया और 15 अक्टूबर उसका आखिरी कार्यदिवस था। उसका दावा है कि अक्टूबर के बाकी दिनों की सैलरी को लेकर उसने ज्यादा उम्मीद नहीं रखी, लेकिन करीब ₹10,000 की राशि अब तक लंबित है।

बार-बार संपर्क के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

LinkedIn पोस्ट में कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने कंपनी के मालिक Ayon Chatterjjee से कई बार संपर्क कर बकाया राशि का भुगतान करने की कोशिश की। उसके अनुसार, हर बार उसे कुछ और समय इंतजार करने को कहा गया और जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन रकम कभी जारी नहीं हुई।

एक हफ्ते चुप रहो, पेमेंट हो जाएगा’ वाले मैसेज का दावा

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें उसने कंपनी प्रतिनिधि के साथ भुगतान को लेकर हुई बातचीत का दावा किया। एक स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर जवाब दिया गया कि सात दिन तक कॉल और मैसेज न करने पर भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पब्लिक पोस्ट करने की बताई वजह

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि शुरुआत के करियर में ऐसा अनुभव काफी निराशाजनक रहा। उसने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अन्य नौकरी तलाशने वालों को सतर्क करना है। उसने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे जॉइन करने से पहले कंपनी की भुगतान व्यवस्था समझें और सभी जरूरी दस्तावेज व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया समर्थन

पोस्ट वायरल होने के बाद कई LinkedIn यूजर्स ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की मेहनत की कमाई समय पर मिलनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव भी साझा किए और दावा किया कि उन्हें भी वेतन भुगतान से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

वर्क कल्चर और कर्मचारियों के अधिकारों पर फिर चर्चा

इस मामले ने एक बार फिर नौकरी की दुनिया में वेतन भुगतान, कर्मचारियों के सम्मान और कंपनियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। हालांकि, LinkedIn पोस्ट में किए गए आरोपों और कमेंट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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कमजोर मानसून का असर: खरीफ बुवाई पिछले साल से 6% पीछे, दालों-तिलहन की खेती पर पड़ा ये इंपैक्ट

Weak Monsoon Impact: देश के कई प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की भारी कमी और बारिश में देरी का सीधा असर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। मनी कंट्रोल के ईशान गेरा की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत पीछे चल रहा है। किसानों ने इस अवधि तक 65.82 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई की है जबकि 2025 की इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 70.05 मिलियन हेक्टेयर था। बारिश की इस लगातार बनी हुई कमी से सबसे ज्यादा मार दालों, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की खेती पर पड़ी है। आइए जानते हैं कि मानसून की सुस्ती ने किस फसल की बुवाई को कितना प्रभावित किया है और देश में पानी के जलाशयों का क्या हाल है.

दालों की बुवाई में आई सबसे बड़ी गिरावट (15.1% की कमी)

खरीफ फसलों में दालों की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। दालों का कुल रकबा पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर से 15.1 प्रतिशत घटकर अब 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरहर की बुवाई में करीब 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 2.48 मिलियन हेक्टेयर पर आ गई है। मूंग का रकबा 11 प्रतिशत घटकर 2.398 मिलियन हेक्टेयर रहा। उड़द की बुवाई में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है और यह 1.351 मिलियन हेक्टेयर दर्ज की गई।

क्यों चिंताजनक है यह गिरावट?

दालों की बुवाई में यह कमी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत घरेलू उत्पादन और खपत के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए पहले से ही आयात पर निर्भर रहता है।

धान, मोटे अनाज, तिलहन और कपास का क्या है हाल?

राहत की बात यह है कि धान की बुवाई पर मानसून की कमी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है। यह 16.64 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि के 16.78 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम है। मोटे अनाज के रकबे में 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। यह पिछले साल के 13.41 मिलियन हेक्टेयर से गिरकर 11.9 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें बाजरा की बुवाई में 18.5 प्रतिशत और मक्का की बुवाई में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। तिलहन का रकबा 5.5 प्रतिशत घटकर 14.71 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। कपास की बुवाई में भी 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मानसून में 24% की कमी, इन राज्यों में गंभीर सूखा

1 जून से 19 जुलाई के बीच भारत में 253.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य स्तर से 24 प्रतिशत कम है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का यह घाटा अलग अलग है-

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश
  • दक्षिण प्रायद्वीप: 27 प्रतिशत की कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 23 प्रतिशत की कमी
  • मध्य भारत: 14 प्रतिशत की कमी

राज्यों के स्तर पर बारिश का घाटा

कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण कई राज्यों में बारिश का गंभीर संकट बना हुआ है। बिहार में सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश हुई है। झारखंड में 41 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। पंजाब में ये कमी 41 प्रतिशत की है। केरल में 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तेलंगाना में 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। तटीय कर्नाटक में 31 फीसदी कम बारिश देखने को मिली है।

जलाशयों का जलस्तर पिछले साल से 39% नीचे

कम बारिश की वजह से देश के जलाशयों में पानी का भंडारण भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अभी देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 34.46 प्रतिशत पानी ही बचा है। यह उपलब्ध पानी पिछले साल की इसी अवधि के जलस्तर का सिर्फ 60.84 प्रतिशत ही है। यानी 39 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। यह जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत स्तर से भी 1.8 प्रतिशत नीचे चला गया है।

दिल्ली जाने का नया ट्रेंड, लग्जरी बस से रोड ट्रिप पर कम खर्च में पाएं फाइव-स्टार जैसा सफर

बारिश का मौसम रोड ट्रिप का मजा कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में अब कई ट्रैवलर फ्लाइट की बजाय लग्जरी बसों को चुन रहे हैं। आरामदायक सीटें, मॉडर्न सुविधाएं और रास्तेभर दिखने वाले खूबसूरत नज़ारे इस सफर को सिर्फ जर्नी नहीं, बल्कि यादगार एक्सपीरियंस बना देते हैं:

 

सफर की शुरुआत बिना भागदौड़ के

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फ्लाइट पकड़ने के लिए घंटों पहले एयरपोर्ट पहुंचने और लंबी सुरक्षा जांच से गुजरने की जरूरत होती है। वहीं लग्ज़री बस में तय समय पर पहुंचकर आसानी से अपनी सीट पर बैठ सकते हैं। इससे जर्नी की शुरुआत ही स्ट्रेस फ्री हो जाती है।

 

 

 

आरामदायक सुविधाएं बनाती हैं लंबा सफर आसान

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आज की प्रीमियम बसों में रिक्लाइनर या स्लीपर सीट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, एसी, पढ़ने की लाइट और साफ-सुथरा इंटीरियर जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे रातभर का सफर भी काफी आरामदायक महसूस होता है।

 

 

 

रास्ते के खूबसूरत नज़ारों का मिलता है आनंद

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मानसून (monsoon) के दौरान हरे-भरे पहाड़, झरने, जंगल और बादलों से ढकी रोड जर्नी को खास बना देती हैं। बस की खिड़की से इन प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है, जो फ्लाइट में पॉसिबल नहीं होता।

 

 

 

जेब पर भी पड़ता है कम असर

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कई बार अचानक बढ़े हुए फ्लाइट किराए की तुलना में लग्ज़री बसें काफी किफायती ऑप्शन साबित होती हैं। खासकर वीकेंड (weekend) या मानसून ट्रिप के दौरान यह बजट में कम्फर्टेबल ट्रैवल का अच्छा ऑप्शन बन जाती हैं।

 

 

टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक सीधी पहुंच

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दिल्ली से मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश, धर्मशाला, कसौली और आगरा जैसे कई पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए लग्ज़री बस सेवाएं आसानी से अवेलेबल हैं। इससे बार-बार वाहन बदलने की परेशानी भी कम हो जाती है और सफर ज्यादा सुविधाजनक बनता है।

वांगचुक की हालत बेहद नाजुक! सोनम ने अस्पताल में दवा और ड्रिप लेने से किया इनकार

Sonam Wangchuk Health Update

Sonam Wangchuk Health Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद वांगचुक ने डॉक्टरों के इलाज को पूरी तरह ठुकरा दिया है। गंभीर डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और चयापचय संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने नसों के माध्यम से दिए जाने वाले तरल पदार्थ (IV Fluids) और किसी भी तरह की दवा लेने से साफ इनकार कर दिया है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश की जनता से छात्रों के इस आंदोलन में कूदने का बड़ा आह्वान किया है।

सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की बढ़ी चिंता

अस्पताल प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सोनम वांगचुक को इस वक्त सख्त चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। 21 दिनों की भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर के कई महत्वपूर्ण पैरामीटर्स बिगड़ चुके हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस बीच, डॉक्टरों ने वांगचुक के परिवार और उनके सहयोगियों को गंभीर चेतावनी दी है कि यदि बिना किसी देरी के तुरंत इलाज शुरू नहीं करने दिया गया तो स्थिति हाथ से बाहर निकल सकती है और अंगों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। ALSO READ: जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी गई, सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद भूख हड़ताल पर बैठे CJP प्रमुख

 

अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि वांगचुक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक छात्रों के भविष्य और नीट परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह सत्याग्रह अस्पताल के भीतर भी जारी रहेगा। दूसरी ओर, सीजेपी नेता अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद अनशन स्थल पर बवाल खड़ा हो गया। 

अब चुप रहने का वक्त नहीं

वांगचुक को नाटकीय ढंग से धरना स्थल से उठाए जाने और उनकी बिगड़ती सेहत की खबर मिलते ही सियासत पूरी तरह गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को देश की जनता और छात्रों से एक भावुक और आक्रामक अपील की।

 

केजरीवाल ने सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली (NEET) में आमूलचूल सुधार की मांग को लेकर हमारे देश के देशभक्त और छात्र जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूखे बैठे हैं। सोनम वांगचुक की स्थिति गंभीर है। यह समय घरों में बैठने का नहीं है। मैं देश के हर नागरिक, हर माता-पिता और युवाओं से अपील करता हूं कि वे जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शामिल हों और तानाशाही के खिलाफ इन प्रदर्शनकारियों का हाथ मजबूत करें। ALSO READ: सोनम वांगचुक सफदरगंज अस्पताल में भर्ती, क्या कहती है उनकी मेडिकल रिपोर्ट?

20 जुलाई का संसद मार्च

सोनम वांगचुक को भले ही पुलिस ने शारीरिक रूप से जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल भेज दिया हो, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों ने ऐलान किया है कि वांगचुक की अनुपस्थिति में विरोध प्रदर्शन और तेज होगा। पार्टी ने आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद मार्च' को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली पुलिस ने भी इस मार्च को देखते हुए नई दिल्ली और संसद भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है। वांगचुक की ओर से भी कहा गया है कि वे भी 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल होंगे। 

 

Skyroot Vikram-1: भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ऐतिहासिक उड़ान को तैयार, जानें कब और कहां से देखें इसकी लॉन्चिंग

Skyroot Vikram-1 Update: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज 18 जुलाई का दिन एक स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। देश की निजी स्पेस एजेंसी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले पूर्ण विकसित और स्वदेशी ऑर्बिटल-क्लास (कक्षीय श्रेणी) रॉकेट विक्रम-1 को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस ऐतिहासिक मिशन को मिशन आगमन नाम दिया गया है। ये वैश्विक लॉन्चिंग कारोबार में भारत के प्राइवेट सेक्टर की धमाकेदार एंट्री का प्रतीक बनने जा रहा है। यह पहली बार होगा जब पूरी तरह से किसी निजी कंपनी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया ऑर्बिटल-श्रेणी का रॉकेट भारतीय धरती से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरेगा।

आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी और आप इसे घर बैठे लाइव कैसे देख सकते हैं।

कब और कहां से होगी लॉन्चिंग?

विक्रम-1 रॉकेट की यह पहली टेस्ट फ्लाइट आज यानी शनिवार को सुबह 11:30 बजे उड़ान भरेगी। यह 7 मंजिला ऊंचा रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) के ऐतिहासिक ‘प्रथम लॉन्च पैड’ से गरजना भरते हुए अंतरिक्ष की ओर रवाना होगा।

घर बैठे कहां और कैसे देखें लाइव लॉन्चिंग?

यदि आप भारत के इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहते हैं, तो स्काईरूट एयरोस्पेस इस पूरे इवेंट की लाइव स्ट्रीमिंग करने जा रहा है। कंपनी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर जानकारी दी है कि भारत के इस पहले प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च को आज YouTube पर लाइव देखा जा सकता है। आप नीचे दिए गए आधिकारिक लिंक पर जाकर अपना रिमाइंडर सेट कर सकते हैं और सीधे लाइव लॉन्चिंग देख सकते हैं-

स्काईरूट विक्रम-1 लॉन्च लाइव यूट्यूब लिंक (https://www।youtube।com/live/-lLd1cI7v0U)

अंतरिक्ष जाएगा पीएम मोदी का हाथ से लिखा संदेश

इस मिशन की सबसे खास और अनोखी बात यह है कि ‘विक्रम-1’ अपने साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बेहद खास संदेश लेकर अंतरिक्ष जा रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस के मुताबिक, इस टेस्ट फ्लाइट के विशेष पेलोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने हाथों से लिखा गया एक पोस्टकार्ड शामिल है। इस पोस्टकार्ड पर वंदे मातरम लिखा हुआ है जिस पर पीएम मोदी के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। इस हस्तलिखित पोस्टकार्ड पर 26 जून 2026 की तारीख दर्ज है।

कितना शक्तिशाली है ‘विक्रम-1’ और क्या है इसकी खासियत?

इस रॉकेट का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले महान वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। नवंबर 2022 में स्काईरूट द्वारा लॉन्च किए गए विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट की सफलता के बाद यह कंपनी का अगला सबसे बड़ा मील का पत्थर है। विक्रम-एस केवल सबऑर्बिटल फ्लाइट पर गया था (जो कुछ समय के लिए अंतरिक्ष में जाकर वापस आ गया था) लेकिन विक्रम-1 एक ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसका मतलब है कि यह सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की एक निश्चित और स्थिर कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।

इस मिशन के तहत रॉकेट का लक्ष्य 60° झुकाव पर 450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक पहुंचना है। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक के छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निचली कक्षा (LEO) में ले जाने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। 7 मंजिला ऊंचे इस बहु-चरणीय रॉकेट का निर्माण पूरी तरह से कार्बन-मिश्रित संरचना से किया गया है। इसे ताकत देने के लिए कंपनी का खुद का प्रोपल्शन सिस्टम लगा है जिसमें 3D-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल रॉकेट बूस्टर शामिल हैं।

इस टेस्ट फ्लाइट का मुख्य उद्देश्य क्या है?

स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, 18 जुलाई की यह उड़ान मुख्य रूप से एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन (तकनीकी प्रदर्शन) फ्लाइट है। इसका मुख्य मकसद यह जांचना है कि स्काईरूट की बनाई गई तकनीक और उसके ऑनबोर्ड सिस्टम असल उड़ान की परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करते हैं। इस मिशन के दौरान जो भी डेटा मिलेगा, उसका इस्तेमाल कंपनी अपनी तकनीक को गहराई से सीखने, उसमें सुधार करने, भविष्य के वर्शन्स को और बेहतर बनाने और नियमित लॉन्च ऑपरेशन्स स्थापित करने की अपनी योजनाओं को सहारा देने के लिए करेगी।

इस ऐतिहासिक मिशन में भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कंपनियों जैसे ग्रेहा स्पेस, डीक्यूब्ड और कॉस्मोसर्व के कई तकनीकी प्रदर्शन पेलोड भी शामिल हैं, जो देश के स्पेस इकोसिस्टम में प्राइवेट प्लेयर्स की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं।

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‘पंजाब में ‘कट्टर बेईमान’ पार्टी का राज…’, जालंधर से PM मोदी का AAP सरकार पर बड़ा हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने AAP को “कट्टर बेईमान” पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था, ड्रग्स, भ्रष्टाचार और जनता के पैसे के गलत इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है।

जालंधर में ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत 20 राज्यों में 75 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने पंजाब के इतिहास का जिक्र करते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा, “यह ‘शेर-ए-पंजाब’ महाराजा रणजीत सिंह की धरती है… लेकिन आज पंजाब में जो हो रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है। यहां विज्ञापनों के जरिए धोखे की सच्चाई को छिपाने की कोशिश की जा रही है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराध और जबरन वसूली का बोलबाला है।

उन्होंने कहा, “आज पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कोई नहीं बता सकता कि कब और कहां गैंगवार छिड़ जाए या किस तरफ से गोलियां चलने लगें।” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस स्टेशन तक सुरक्षित नहीं हैं और उन पर “अक्सर हमले” होते रहते हैं।

पंजाब के युवाओं को ड्रग्स से सबसे ज्यादा नुकासन

प्रधानमंत्री कहा कि पंजाब के युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। सबसे दुखद बात यह है कि पंजाब का भविष्य बर्बाद हो रहा है। ड्रग्स बेचने वाले खुलेआम घूम रहे हैं और पंजाब के युवाओं को नशे की दलदल में धकेल रहे हैं।

अपने हमले को और तेज करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि पार्टी के कामकाज में ईमानदारी और सच्चाई की कमी है। उन्होंने कहा, “जनता की सेवा के लिए ईमानदार इरादों और सच्चाई की भावना की जरूरत होती है। लेकिन पंजाब में अभी जो पार्टी सत्ता में है, उसमें ये दोनों ही चीजे नहीं हैं। इसे ‘कट्टर बेईमान पार्टी’ के तौर पर जाना जाता है।”

पंजाब के लोगों को सरकार की योजनाओं का मिले लाभ

प्रधानमंत्री ने कहा, “केंद्र सरकार यह पक्का करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है कि पंजाब के लोगों को उसकी सभी योजनाओं का फायदा मिले। फिर भी, इस ‘कट्टर बेईमान पार्टी’ के राज में खुलेआम लूट मची हुई है। पिछले 12 सालों में, केंद्र ने पंजाब को लाखों करोड़ रुपये भेजे हैं… लेकिन पंजाब सरकार इस पैसे का सही इस्तेमाल नहीं कर पाई।”

उन्होंने आगे कहा, “और तो और, यह लूट उधार के पैसे से चल रही है। पंजाब के नाम पर कर्ज लिए जा रहे हैं। जहां राज्य का बजट इस कर्ज के ब्याज चुकाने में ही खर्च हो जाता है, वहीं सरकार चलाने वाले उसी पैसे पर ऐश कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कोर्ट के फैसले को लेकर आप सरकार पर साधा निशाना

पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी पर गुजरात कोर्ट के हालिया फैसले को लेकर भी निशाना साधा है, जो पार्टी के एक विधायक के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि यह मामला सरकारी अधिकारियों के साथ मारपीट और जबरन वसूली से जुड़ा था।

उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले ही गुजरात की एक अदालत ने उनके एक विधायक को 7 साल की जेल की सजा सुनाई। यह सजा सरकारी अधिकारियों के साथ मारपीट और जबरन वसूली के मामले में सुनाई गई। जबरन वसूली और अवैध कब्जा उनके राजनीतिक सिस्टम की पहचान बन गई है।”

AAP नेताओं पर लगे कई कानूनी मामलों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अभी कई लोग ऐसे ही कई मामलों में जमानत पर बाहर हैं। पंजाब को ही देख लीजिए: जिसे स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया था, उसे रिश्वतखोरी के कारण हटाना पड़ा। एक मंत्री पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं। उनके विधायक रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जा रहे हैं। अगर हम इसी तरह गिनती करें, तो उनकी सरकार और पार्टी में बहुत कम लोग ऐसे मिलेंगे जिन पर कोई दाग न हो।”

आम आदमी पार्टी का ‘असली चेहरा’ आया सामने

AAP के पुराने वादों और कामकाज के रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए PM मोदी ने कहा कि अब पार्टी का ‘असली चेहरा’ सबके सामने आ गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज पंजाब में जो लोग सत्ता में हैं, वे कभी बड़े घमंड से कहते थे कि वे देश की राजनीति बदल देंगे। लेकिन आज पूरा देश उनका असली चेहरा देख रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “सिर्फ 2-3 दिन पहले दिल्ली की एक अदालत ने उनकी पार्टी से जुड़े एक नेता को दोषी ठहराया है। उन पर (ताहिर हुसैन) दंगे भड़काने और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी की हत्या जैसे गंभीर आरोप हैं। इसके बावजूद वे अदालत के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और इसे धर्म और आस्था के नजरिए से देख रहे हैं, क्योंकि उनका वोट बैंक प्रभावित हो रहा है।”

प्रधानमंत्री ने 5,470 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन

बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर में 5,470 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली रेल और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का उद्घाटन किया और उनकी आधारशिला रखी। साथ ही उन्होंने ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत जालंधर कैंट समेत 75 नए रूप में तैयार किए गए रेलवे स्टेशनों का भी उद्घाटन किया।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 20 राज्यों में 75 अमृत स्टेशनों का उद्घाटन एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह योजना दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन पुनर्विकास कार्यक्रमों में से एक है।

लगभग 1,570 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इन स्टेशनों को आधुनिक और यात्रियों के लिए सुविधाजनक सुविधाओं में बदला गया है। ‘विरासत भी, विकास भी’ की भावना के साथ रीडेवलप किए गए इन स्टेशनों में स्थानीय संस्कृति, विरासत और आर्किटेक्चर की झलक मिलती है।

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सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता (फिर इंदौर) हमारा

London Trip

Trip To London: मेरा कथन न तो आत्म मुग्धता है, न अतिशयोक्ति। हर किसी को अपनी माटी, अपना घर, अपने लोग पसंद होते हैं। वह उन सबके साथ सुविधाजनक स्थिति में होता है। फिर भी कोई तो ऐसी बात है कि सैकड़ों साल की गुलामी और लाखों सितम के बाद भी हमारे अभिमान के लिए एक वाक्य ही काफी है कि 'हस्ती मिटती नहीं हमारी'। इसका मतलब यह भी नहीं कि दुनिया में कहीं कुछ हमसे अच्छा नहीं, हमसे बेहतर नहीं। बेहतर तो बहुत है। तकनीक, विज्ञान, शिल्प, शिक्षा, शिष्टाचार, प्राकृतिक संसाधन, व्यवहार वगैरह बहुत कुछ भिन्न और उम्दा बहुत सारी जगह है।

फिर भी हम 140 करोड़ की चिल्लर जैसी आबादी के साथ, मामूली-सी प्राकृतिक और खनिज संपदा (मुगल और अंग्रेज अधिकांश तो लूट ले गए) के साथ, बैसाखी वाली शिक्षा के सहारे, लोकतंत्र के नाम पर लूटमार वाली राजनीतिक व्यवस्था के बीच, जातिवाद, भेदभाव, तुष्टिकरण, भाई-भतीजावाद के नासूर के बावजूद यदि आज दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच पा रहे हैं तो यह है फिनिक्स जैसी जिजीविषा, चट्‌टान जैसी दृढ़ता और पानी जैसी प्रकृति की वजह से, जो किसी भी तरह आगे बढ़ने का रास्ता निकाल लेता है। तो आइए, इस किस्त में कुछ अन्य पहलुओं को टटोलते हैं। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

मेरी यह दृढ़ मान्यता है कि जहां से जो अच्छा मिले, उसे ग्रहण करें। यह भी कि जिसने भी इस ब्रह्मांड की रचना की, उसने किसी एक की झोली में सब कुछ नहीं डाला। कमीबेशी के साथ जीवन दिया है। यदि उत्तर, पश्चिम को ठंडा माहौल, बर्फ से ढंकी वादियां दीं तो पूरब को प्रचुर जल संपदा, विविध भौगोलिक संरचना, नदियां, दुनिया में सर्वाधिक बोलियां, विभिन्न संस्कृतियां, रस्म, त्यौहार, परंपराओं वाली प्रकृति दी। इसलिए किसी को कमतर व किसी को बेहतर हम बताते रहें, लेकिन वे सब अपने आप में भिन्न और कुछ विशेषता लिए हैं। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

 

ब्रिटेन का प्रमुख शहर व राजधानी लंदन 90 लाख से अधिक आबादी वाला है, लेकिन यहां अंग्रेज केवल 36.8 प्रतिशत हैं। शेष एशियाई, अरब, अफ्रीकन, यहूदी व दुनिया भर के अन्य लोग हैं। लंदन में साढ़े 6 लाख भारतीय, 3 लाख 22 हजार बांग्लादेशी व 2 लाख 90 हजार पाकिस्तानी हैं। आपको किसी भी मॉल, शॉपिंग सेंटर, कार टैक्सी, सिक्यूरिटी सर्विस, एअरपोर्ट ग्राउंड टी, रेस्टारेंट, ग्रासरी स्टोर्स पर मालिक या कर्मचारी के तौर पर भारत, पाक, बांग्लादेश के चेहरे मिल जाएंगे। आप इस चक्कर में न रहें कि कोई भारतीय आपकी ओर देखकर मुस्कराएगा। जबकि, हम इंदौरियों को कोई भटिंडा में भी दिख जाए तो चेहरा खिल उठता है। फिर इंदौर में उससे कभी न मिले हों, बस कहीं देखा भर हो। ALSO READ: London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

 

लंदन में यहूदी भी भरपूर नजर आते हैं और मुस्लिमों की तरह अपनी स्पष्ट पहचान के साथ रहते हैं। जैसे मुस्लिम को टोपी-दाढ़ी से परहेज नहीं, वैसे ही ये लांग काला कोट और काली पेंट, सफेद शर्ट पहनते हैं, जिसमें से डोरियां बाहर लटकती रहती हैं। सिर पर हैट भी पहनते हैं। शनिवार को अपने पूजा स्थल सपरिवार जाएंगे। ये आम तौर पर किसी से बात नहीं करते। इनमें भी अधिक बच्चों का चलन है। तीन-चार बच्चे आम बात है। इस शहर में भिखारी, स्ट्रीट डॉग, मच्छर व मक्खियां नहीं हैं। यहां मांगने का तरीका थोड़ा हटकर है। जैसे, कोई फुटपाथ पर कोई स्वांग रचकर लेट-बैठ जाएगा। कोई संगीत पेश करेगा। कोई मेट्रो स्टेशन पर बाकायदा पूरा बैंड सजाकर गाएगा-बजाएगा। आपकी इच्छा हो तो दो नहीं तो निकल लो। ALSO READ: London Trip: सड़कें संकरी, फुटपाथ चौड़े, फिर भी जाम नहीं लगता

 

जब ब्रिटिश हुकूमत के तहत दुनिया के करीब 60-65 देश गुलाम थे, तब कहा जाता था कि विक्टोरिया के राज में कभी सूर्य अस्त नहीं होता। यह दुनिया के करीब 35 प्रतिशत हिस्से पर कब्जे के समय की बात है, लेकिन भौगोलिक कारणों से आज भी ब्रिटन में नाम को ही सूर्यास्त होता है। रात साढ़े नौ बजे तक उजाला रहता है और सुबह 4 बजे फिर से प्रकाश फैल जाता है। यूरोप में भी प्राय: ऐसा होता है।

 

लंदन या ब्रिटेन में टेलिफोन, ऑप्टिकल फाइबर या किसी भी तरह की केबल सड़क के ऊपर नजर नहीं आएगी। सब अंडरग्राउंड। इनके चैंबर पर लिखा भी होगा कि कौन-सी लाइन है। सिवरेज, वाटर सप्लाय, पोस्टल सर्विस, स्ट्राम वाटर लाइन के अलग-अलग चैंबर हैं, जिन पर स्पष्ट अक्षरों में अंकित रहता है। यहां टेलिफोन का उपयोग अभी-भी बहुतायत से होता है- खासकर वरिष्ठ नागरिक इसका उपयोग करते हैं। उनके लिए आपातकालीन सेवा के नंबर याद रखना आसान होता है। यहां सौ-दो सौ साल पुराने भवन मिलना सामान्य बात है। तमाम मकान लाल ईंट व कवेलू के होते हैं और समूचे ब्रिटेन, यूरोप में मकान की छत ढलान वाली होती है, ताकि बर्फ व पानी बहकर नीचे गिर जाए। 

 

इनमें टैरेस या गच्ची नहीं होती, जहां खड़े होकर पतंग उड़ाई जा सके। न छत पर पानी की टंकी या अवैध पेंट हाउस होता है। वास्तु शिल्प बेजोड़ होता है। 400 से एक हजार साल पुराने विशालकाय भवन हैं, जो पत्थरों के बने हैं। ये प्रमुखत: चर्च हैं। स्कॉटलैंड का चर्च 900 साल पुराना और लंदन का सैंट पॉल कैथेड्रल 400 साल पुराना है। जबकि वेस्टमिंस्टर चर्च 1066 से अभी तक कायम है। इसमें ब्रिटिश राजाओं के राज्याभिषेक होते रहे हैं तथा शादियां भी होती हैं। यहां राजा, रानियों, आइजैक न्यूटन व स्टीफन हाकिंग जैसे वैज्ञानिकों, कवियों को दफनाया गया है।

 

यहां आपको दो सौ, तीन सौ साल पुराने रेस्टारेंट भी मिल जाएंगे, जिनके संचालक तो काफी बदल गए, लेकिन रंगत वही बनी रही। ये रेस्टारेंट किसी प्रतीक से पहचाने जाते हैं। जैसे पैवैलियन, फोर सिस्टर्स, हेलमेट। तब इनसे रास्ता बताना आसान होता था। यहां की प्रसिद्ध नदी टेम्स का पानी साल भर मटमैला होता है, जबकि यूरोप में आम तौर पर नदियां साफ पानी वाली होती हैं। टेम्स की तलहटी मिट्‌टी वाली है, जो उसे साफ नहीं रहने देती।

 

यहां लंदन से अन्यत्र जाने वाली ट्रेन भी मेट्रो या वंदे भारत जैसी होती हैं, जिनमें हवाई जहाज जैसी सुविधाएं होती हैं। इनमें बैठने के लिए सीट होती हैं और भारत की तरह कुछ बोगियां और आरक्षित बोगी में भी कुछ सीट बिना आरक्षण के होती हैं। उन पर लिखा रहेगा- अवेलेबल। पूरे रास्ते उद्घोषणा होती रहती है। बस, मेट्रो, ट्रेन में दिव्यांग, बुजुर्ग के लिए सीट अलग होती हैं। उन पर आप बैठ सकते हैं, लेकिन किसी के आने पर उठना होता है।

 

बातें तो काफी हैं, लेकिन हर एक का उल्लेख जरूरी नहीं। मैंने अभी तक ब्रिटेन, यूरोप के सात देश, मॉरीशस, दुबई, थाईलैंड की यात्रा की है। अपने इस भ्रमण के मद्देनजर एक ही बात कह सकता हूं- सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा और हिंदोस्ता में सबसे अच्छा इंदौर हमारा। दुनिया घूमें, लेकिन इंदौर जैसा खान-पान, आत्मीयता, शांति-सद्भाव, उल्लास, उत्सवप्रियता, सुरक्षित वातावरण, दिलदार लोग, आसपड़ोस, पता पूछने पर गली या मकान तक छोड़ने आने का उत्साह जैसे अनेक कारण हैं, जिनकी वजह से इंदौर लाजवाब है। (समाप्त) 

बड़ी टीमों ने नहीं इन 4 असोसिएट टीमों ने ICC को नए फॉर्मेट पर दिखाया आईना

अगले साल होने वाले 50 ओवर के विश्व कप के नए प्रारूप को लेकर आईसीसी के फै़सले पर एसोसिएट देशों के खिलाड़ियों ने नाराज़गी और हैरानी जताई है। नामीबिया, नीदरलैंड्स और स्कॉटलैंड के कप्तानों ने सार्वजनिक रूप से इन बदलावों की आलोचना की है। नए प्रारूप के तहत दो टीमें सिर्फ़ शुरुआती दो मैच खेलने के बाद ही विश्व कप से बाहर हो जाएंगी।

अगले साल दक्षिण अफ़्रीका, ज़िम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले विश्व कप में तकनीकी रूप से 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इससे पहले 2019 और 2023 संस्करणों में10 टीमों ने हिस्सा लिया था। लेकिन सबसे निचली रैंकिंग की क्वालीफ़ाई करने वाली टीमों के बीच टूर्नामेंट की शुरुआत तीन टीमों वाली राउंड-रॉबिन ‘सुपर सीरीज़’ से होगी, जिसके बाद दो टीमें केवल दो मैच खेलकर ही बाहर हो जाएंगी।

इस फै़सले से प्रमुख एसोसिएट देशों के खिलाड़ी नाराज़ हैं, क्योंकि सबसे ज़्यादा असर उन्हीं पर पड़ने की संभावना है। साथ ही उन्होंने मौजूदा क्रिकेट विश्व कप लीग 2 की उपयोगिता पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें आठ एसोसिएट टीमें 36-36 मैच खेलकर सिर्फ़ अगले साल होने वाले वैश्विक क्वालिफ़ायर में जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।

विश्व क्रिकेट खिलाड़ियों के वैश्विक संगठन (डब्ल्यूसीए) की ओर से जारी बयान में नीदरलैंड्स के कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स ने कहा, “किसी भी देश के लिए वनडे विश्व कप में जगह बनाना बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। ऐसे में वर्षों की तैयारी के बाद अगर उस अवसर की वास्तविकता बदल दी जाए, तो यह बेहद निराशाजनक है।”

नीदरलैंड्स ने 2023 विश्व कप के लिए आयरलैंड, ज़िम्बाब्वे और वेस्टइंडीज जैसी टेस्ट टीमों को पीछे छोड़कर क्वालीफ़ाई किया था। उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका और बंगलादेश को हराकर बड़े उलटफेर भी किए थे। लेकिन उस सफलता के बावजूद उन्हें इसके बाद से किसी भी आईसीसी पूर्ण सदस्य देश के ख़िलाफ़ एक भी वनडे खेलने का मौक़ा नहीं मिला है।

नामीबिया के कप्तान गेर्राड इरास्मस ने कहा, “कई देशों के खिलाड़ियों के लिए वनडे विश्व कप सिर्फ़ एक और टूर्नामेंट नहीं होता। यही हमारा प्रमुख प्रारूप है, इसी के इर्द-गिर्द करियर बनते हैं और पीढ़ियां सपने देखती हैं। हम सभी मानते हैं कि विश्व कप में जगह कमानी पड़ती है, लेकिन क्वालीफ़ाई करने के बाद सबसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा का वास्तविक अवसर भी मिलना चाहिए। यह एसोसिएट स्तर पर लंबे समय से चले आ रहे सीमित अवसरों की परंपरा को ही आगे बढ़ाता है।”

डब्ल्यूसीए ने भी आईसीसी की निर्णय प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें पारदर्शिता, संवाद और परामर्श की कमी रही। संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉम मॉफैट ने कहा कि आईसीसी के “क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने” के घोषित लक्ष्य और टूर्नामेंट के प्रारूप में इस तरह के बड़े बदलाव के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल है।

जब आईसीसी ने पांच साल पहले 14 टीमों वाले विश्व कप की घोषणा की थी, तब प्रस्तावित प्रारूप में सात-सात टीमों के दो ग्रुप और उसके बाद ‘सुपर सिक्स’ चरण शामिल था। इसी योजना के अनुसार टीमों ने पूरे चक्र की तैयारी की, लेकिन टूर्नामेंट से सिर्फ़ 15 महीने पहले उन्हें पता चला कि प्रारूप में बड़ा बदलाव कर दिया गया है।

स्कॉटलैंड के कप्तान रिची बेरिंगटन ने कहा, “खिलाड़ी यह उम्मीद नहीं करते कि हर फै़सला वही लें, लेकिन ऐसे फै़सलों पर, जिनका खेल और खिलाड़ियों के करियर पर बड़ा असर पड़ता है, उनसे सार्थक तरीके से परामर्श जरूर किया जाना चाहिए। अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आने से बेहतर फै़सले लिए जा सकते हैं और हम चाहते हैं कि खेल में ऐसा सही तरीके से शुरू हो।” दुनिया की 12वीं रैंकिंग वाली आयरलैंड टीम के वनडे कप्तान पॉल स्टर्लिंग ने कहा कि मौजूदा 48 टीमों वाले फीफा विश्व कप ने दिखाया है कि कम स्थापित खेल राष्ट्र भी वैश्विक आयोजनों में कितना मूल्य और आकर्षण जोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “क्रिकेट को भी इसी तरह का रास्ता अपनाना चाहिए ताकि खेल को आगे बढ़ाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा अवसर मिल सकें।”