शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा भारत और वहीं देखिए कंगाल पाकिस्तान के एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का ऐसा हाल!

जहां एक तरफ भारत आज आधुनिक और शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी कंगाली और बदहाली के आंसू रो रहा है। भारत में जहां रिकॉर्ड समय में बड़े-बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा रहे हैं वहीं पाकिस्तान के आर्थिक संकट ने उसके सबसे प्रमुख शहरों के विकास को पूरी तरह से ठप कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब रावलपिंडी डिवीजन में अपने विकास खर्चों में भारी कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके चलते लंबे समय से वादे किए गए कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए हैं। इसने वहां के गवर्नेंस और अर्बन प्लानिंग के पैरालिसिस को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

रावलपिंडी डिवीजन के बजट में 60 फीसदी की भारी कटौती

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक नए वित्तीय वर्ष में रावलपिंडी डिवीजन में काम करने वाले सभी प्राधिकरणों के विकास आवंटन में भारी कटौती की गई है। इस फंड संकट के कारण छह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया गया है। रावलपिंडी, अटॉक, झेलम, चकवाल, तलगंग और मरी को कवर करने वाले वार्षिक जिला विकास कार्यक्रमों के बजट में करीब 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़ी कटौती के कारण अब नए सार्वजनिक निवेश के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। फंड की इस भारी किल्लत का मतलब यह है कि 30 जून 2027 से पहले किसी भी बड़े विकास कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत होने की कोई उम्मीद नहीं है।

अधर में लटका ‘लेह एक्सप्रेसवे’ और मियावाकी फॉरेस्ट

प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके साथ ही पूरे डिवीजन में मियावाकी जंगलों के विस्तार पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रावलपिंडी या उसके पड़ोसी जिलों में एक भी ऐसा अर्बन फॉरेस्ट विकसित नहीं किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन प्रोजेक्ट्स को अनिश्चित काल के लिए रोका गया है उनमें लेह एक्सप्रेसवे और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शामिल हैं। ये दोनों ही प्रोजेक्ट्स पूर्व आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद के राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और अब पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।

ये मेगा प्रोजेक्ट्स भी हुए डिले या पूरी तरह से ड्रॉप

फंड की कमी और आर्थिक तंगी की मार केवल एक्सप्रेसवे तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ी है। मरी रोड सिग्नल-फ्री कॉरिडोर प्रोजेक्ट को अब कम से कम दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। रावलपिंडी में बार-बार आने वाली शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए डिजाइन की गई प्रस्तावित भूमिगत सीवरेज टनल योजना को अब पूरी तरह से छोड़ दिया गया है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए गाजी बरोथा वॉटर प्रोजेक्ट को भी बंद कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह रही कि इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 17 अरब रुपये से बढ़कर लगभग 110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इसे वहन करना कंगाल पाकिस्तान के बस के बाहर था।

अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं का ही सहारा!

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने विकास एजेंसियों को साफ तौर पर सूचित कर दिया है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स अब केवल एक ही शर्त पर आगे बढ़ सकते हैं। अगर इनके लिए विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं से वित्तीय सहायता या लोन सुरक्षित किया जा सके। इसके बिना पाकिस्तान सरकार के पास इन्हें पूरा करने का कोई पैसा नहीं है। रावलपिंडी विकास प्राधिकरण (RDA) के पूर्व अध्यक्ष तारिक मुर्तजा ने इस बदहाली पर बात करते हुए बताया कि लेह एक्सप्रेसवे, सीवरेज टनल और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को उनके कार्यकाल के दौरान सभी आवश्यक मंजूरियां और फंडिंग मिल चुकी थी। लेकिन देश में हुए सरकार परिवर्तन के बाद इन सभी जनहित के प्रोजेक्ट्स को बंद कर दिया गया।

भारत की विकास की सफलताओं से प्रेरणा ले रहा है इंडोनेशिया, पीएम मोदी के दौरे से दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6-8 जुलाई 2026 को होने वाली इंडोनेशिया यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों की साझेदारी पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़ रही है। आज इंडोनेशिया भारत को न केवल एक रणनीतिक साझेदार के रूप में, बल्कि तकनीक, नीतिगत विचारों और विकास समाधानों के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में भी देख रहा है। खाद्य सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस से लेकर स्वास्थ्य सेवा, कृषि और रक्षा तक, भारत की सफल सार्वजनिक नीति मॉडल इंडोनेशिया की अपनी विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण रोल मॉडल बन रहे हैं।

भारत के डिजिटल भुगतान बना इंडोनेशिया का रोल मॉडल

इंडोनेशिया डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता का लाभ उठा रहा है। प्रस्तावित UPI-QRIS लिंकेज से दोनों देशों के यात्रियों और व्यवसायों के लिए बिना किसी रुकावट के सीमा-पार भुगतान संभव हो सकेगा। इस पहल से पर्यटन, व्यापार और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही लेनदेन तेज, सस्ता और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। इंडोनेशिया में व्यापार या निवेश करने वाले भारतीय व्यवसायों और हर साल बाली व इंडोनेशिया के अन्य स्थलों पर जाने वाले लगभग 17 लाख भारतीय पर्यटकों के लिए, एक लाइव UPI-QRIS कॉरिडोर क्रांतिकारी साबित होगा।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी सहयोग के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है। इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (ION) भारत के ONDC मॉडल से प्रेरित है और इसका उद्देश्य इंडोनेशिया में 65 मिलियन से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक अधिक खुला और समावेशी डिजिटल मार्केटप्लेस बनाना है। Beckn 2.0 ओपन प्रोटोकॉल पर आधारित ION का पहला लाइव लेनदेन 7 जुलाई को मोदी-प्राबोवो शिखर सम्मेलन के दौरान होने की उम्मीद है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय मॉडल को अपनाने की तैयारी में इंडोनेशिया

इंडोनेशिया के साथ भारत की डिजिटल साझेदारी अब सफल मॉडलों को साझा करने से आगे बढ़कर देश के अगली पीढ़ी के डिजिटल बैकबोन (बुनियादी ढांचे) के निर्माण में मदद करने की दिशा में बढ़ रही है। इंडोनेशिया की महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल नुसंतारा’ पहल का उद्देश्य एक एकीकृत और इंटरऑपरेबल राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, और इस यात्रा में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रही है।

आधार, UPI, डिजिलॉकर, ई-KYC और ONDC की सफलता का आधार बनने वाले भारतीय डिजिटल समाधान अब इंडोनेशिया के अपने डिजिटल बदलाव में भी प्रासंगिक साबित हो रहे हैं। यह बदलाव टेक्नोलॉजी अपनाने से आगे बढ़कर गहरे संस्थागत सहयोग की ओर है, जिसमें भारतीय कंपनियाँ सुरक्षित और बड़े पैमाने पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का अपना अनुभव साझा कर रही हैं। सहयोग का दायरा वित्तीय बाज़ारों तक भी बढ़ रहा है। दोनों पक्ष AI-आधारित बाज़ार निगरानी, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी-आधारित कैपिटल मार्केट सुधारों में भारत की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी के ज़रिए अपने स्टॉक मार्केट को आधुनिक बनाने का भारत का अनुभव इंडोनेशिया के साथ सहयोग के नए रास्ते खोल रहा है।

इंडोनेशिया का विज़न सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे आसियान (ASEAN) क्षेत्र में डिजिटल समाधानों का उत्पादक और निर्यातक बनने की बड़ी सोच रखता है। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत का ओपन, समावेशी और संप्रभु डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का दशकों पुराना अनुभव बहुत काम का साबित हो रहा है। इंडोनेशिया के कई प्रतिनिधिमंडलों ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण योजनाओं, जैसे कि हमारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), चावल फोर्टिफिकेशन योजना, उर्वरक सब्सिडी सुधार, AGRISTACK आदि से सीखने के लिए भारत का दौरा किया है।

भारत की समाज कल्याण की योजनाओं और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए तैयार इंडोनेशिया

इंडोनेशिया का महत्वाकांक्षी ‘मुफ़्त पौष्टिक भोजन कार्यक्रम’ भारत की ‘मिड-डे मील’ (PM POSHAN) योजना से प्रेरित है। इसी तरह, उनकी ‘रेड एंड व्हाइट विलेज कोऑपरेटिव्स’ पहल ‘जन औषधि’ मॉडल के ज़रिए सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए भारत के साथ सहयोग की संभावनाएँ तलाश रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बेहतर हो सकेगी। यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ रही है। इंडोनेशिया रक्षा निर्माण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सहयोग के मामलों में भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भारत का अनुभव लंबे समय तक सहयोग के नए अवसर पैदा कर रहा है।

ये सभी पहल मिलकर एक बड़े ट्रेंड को दर्शाती हैं। भारत की विकास यात्रा अब न केवल अपने नागरिकों को फ़ायदा पहुँचा रही है, बल्कि मित्र देशों के लिए भी एक रोल मॉडल के तौर पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान, ज्ञान-साझेदारी का यह बढ़ता हुआ दायरा द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मज़बूत स्तंभों में से एक के रूप में उभर रहा है, जिससे इनोवेशन, आर्थिक विकास और लंबे समय तक रणनीतिक सहयोग के अवसर पैदा हो रहे हैं।

Blue Star के शेयर में 18% तक उछाल का दम! ब्रोकरेज ने दी खरीदने की सलाह

एसी, एयर प्योरिफायर और वॉटर कूलर बनाने वाली ब्लू स्टार लिमिटेड के शेयरों में आगे 18 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसी उम्मीद प्रभुदास लीलाधर के टारगेट प्राइस से मिली है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया है। टारगेट प्राइस 1873 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह शेयर के मौजूदा भाव से 18 प्रतिशत ज्यादा है। बीएसई पर शेयर शुक्रवार, 3 जुलाई को 1583.60 रुपये पर बंद हुआ था।

ब्रोकरेज ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कहा कि ब्लू स्टार भारत की प्रमुख एयर कंडीशनिंग और कमर्शियल रेफ्रिजरेशन कंपनियों में से एक है। कंपनी की मौजूदगी रूम एयर कंडीशनर (RAC), कमर्शियल एयर कंडीशनर (CAC), इलेक्ट्रो-मैकेनिकल प्रोजेक्ट्स (EMP), कमर्शियल रेफ्रिजरेशन और इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस जैसे कई क्षेत्रों में है। कंपनी भारत में कूलिंग की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसके पीछे कारण हैं…

  • RAC की बढ़ती पहुंच और मार्केट शेयर में बढ़ोतरी
  • CAC और EMP में लीडरशिप
  • श्री सिटी फैसिलिटी के जरिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को समय पर बढ़ाना
  • डेटा सेंटर के विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से मिलने वाले नए मौके

प्रभुदास लीलाधर ने उम्मीद जताई है कि FY26-28E के दौरान ब्लू स्टार का रेवेन्यू 18.9%, EBITDA 22.9% और शुद्ध मुनाफा 24.9% CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगा। इसकी वजह यूनिटरी कूलिंग प्रोडक्ट्स (UCP) और EMP दोनों कारोबारों में लगातार मांग, क्षमता का बेहतर इस्तेमाल और ऑपरेटिंग लेवरेज है। कंपनी की अच्छी कमाई की संभावना, बेहतर मुनाफे और हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (HVAC) इंडस्ट्री में लीडरशिप को देखते हुए ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग और 1,873 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

Blue Star का शेयर 6 महीनों में 12 प्रतिशत कमजोर

Blue Star का मार्केट कैप 32500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 12 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में मार्च 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 36.49 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। BSE पर शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 2,049.95 रुपये और एडजस्टेड लो 1,450 रुपये है।

ज्वेलरी कंपनी 20 साल बाद लाई बोनस इश्यू, हर 3 शेयरों पर 1 नया शेयर फ्री; 10 जुलाई रिकॉर्ड डेट

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 3,862.88 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 162.93 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 11,779.23 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस बीच शुद्ध मुनाफा 385.10 करोड़ रुपये रहा।

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भूटान का भारत से E20 पेट्रोल लेने से इनकार:कहा- गाड़ियां खराब होने का खतरा, हमें नॉर्मल पेट्रोल ही दें

भारत सरकार के E20 यानी 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के फैसले पर जहां देश में विवाद और विरोध चल रहा है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय ऑयल कंपनियों (OMCs) के E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है। भूटानी मीडिया ‘द भूटानीज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान ने भारत से अनुरोध किया है कि जब तक भारतीय बाजार में नॉर्मल पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उन्हें बिना मिलावट वाला पुराना पेट्रोल ही सप्लाई किया जाए। पुरानी स्टोरेज और वाटर लीकेज सबसे बड़ा कारण भूटान के अधिकारियों के मुताबिक, देश का फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर काफी पुराना है। वहां के पेट्रोल पंपों के फ्यूल टैंक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बने हैं, जिनमें पानी रिसने यानी सीपेज का खतरा रहता है। नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल में हाइड्रोक्सिल ग्रुप होता है, जो हवा या आसपास की नमी को बहुत तेजी से सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक नेचर)। अगर E20 पेट्रोल को ऐसे टैंकों में रखा जाए जहां पानी का रिसाव हो, तो पेट्रोल में पानी मिल जाएगा। इस पानी को पेट्रोल से अलग करना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, टैंक में पानी होने से स्टील के टैंकों और पाइपलाइनों में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों के परफॉर्मेंस की चिंता भूटान का इलाका पूरी तरह से पहाड़ी और ऊंचा-नीचा है। ऐसी चढ़ाई वाले रास्तों पर गाड़ियों को चलने के लिए मैक्सिमम पावर यानी ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। भूटानी अधिकारियों को डर है कि एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल पहाड़ी रास्तों पर गाड़ियों को वो परफॉर्मेंस और पावर नहीं दे पाएगा, जो नॉर्मल पेट्रोल देता है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि एथेनॉल से माइलेज में मामूली कमी जरूर आती है, लेकिन इससे गाड़ी का पिकअप और इंजन परफॉर्मेंस बेहतर होता है। भूटान को कैसे पता चलेगा कि पेट्रोल में मिलावट है? भूटान अपनी जरूरत का पूरा ईंधन भारत से ही खरीदता है। फिलहाल भूटान भारत से महंगे और हाई-एक्सपोर्ट क्वालिटी वाले पेट्रोल-डीजल की खरीद करता है, जो भारतीय पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले फ्यूल से ज्यादा शुद्ध और महंगा होता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत गलती से E20 पेट्रोल भूटान भेज भी देता है, तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकता है। एथेनॉल वाले पेट्रोल में जरा सा भी पानी मिलते ही उसका रंग दूधिया हो जाता है, जिससे टेस्ट के दौरान तुरंत पकड़ में आ जाएगा। एडवांस नोटिस और लीक-प्रूफ टैंक की मांग चुनौतियों को देखते हुए भूटान सरकार ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से कहा है कि अगर वे भविष्य में एथेनॉल का ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ाते हैं या पूरी तरह एथेनॉल पेट्रोल ही सप्लाई करने का फैसला करते हैं, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। साथ ही भूटान ने भारत से लीक-प्रूफ टैंक उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

Delhi Power Cut 5 July: दिल्ली में 5 जुलाई को बिजली कटौती! इन इलाकों में कई घंटे रहेगा पावर आउटेज

Delhi Power Cut 5 July: दिल्ली के कई इलाकों में रविवार, 5 जुलाई को बिजली की समस्या रहेगी। यह कटौती BSES राजधनी पावर लिमिटेड (BRPL) द्वारा किए जा रहे मेंटेनेंस काम के कारण की जा रही है। बिजली वितरण कंपनी के अनुसार, मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए अलग-अलग इलाकों में बिजली सप्लाई कुछ समय के लिए बंद रहेगी। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे उसी हिसाब से अपने दिन की योजना बनाएं और बिजली कटौती से पहले जरूरी इंतजाम कर लें।

निर्धारित बिजली कटौती इस प्रकार है:

जनकपुरी डिवीजन: सुबह 10:07 बजे से 12:07 बजे तक मीनाक्षी गार्डन और अशोक नगर इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी।

जनकपुरी  डिवीजन: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक डिस्ट्रिक्ट सेंटर, जनकपुरी में बिजली सप्लाई बाधित रहेगी।

टैगोर गार्डन: सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक ब्लॉक B-2, रघुबीर नगर (टैगोर गार्डन एक्सटेंशन) में पावर कट रहेगा।

मुंडका डिवीजन: सुबह 11:00 बजे से 1:00 बजे तक सविता विहार, मुंडका एक्सटेंशन और ब्लॉक C (मुंडका) में बिजली बाधित रहेगी।

मुंडका डिवीजन: दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक RMU में केबल एंट्री होल ओपन कार्य के कारण मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया और नेताजी सुभाष विहार में बिजली प्रभावित रहेगी।

मुंडका डिवीजन: दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक वीणा एन्क्लेव (वेस्ट कैबिन ब्लॉक) और मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी।

अलकनंदा: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक B-ब्लॉक, ओखला फेज-1 में पावर टक की समस्या रहेगी।

क्यों हो रही बिजली कटौती?

बता दें कि इस समय दिल्ली में भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में सिस्टम को स्थिर रखने और आगे बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए यह मेंटेनेंस जरूरी माना जा रहा है।

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BaaS मॉडल के साथ Hyundai की Creta Electric लॉन्च, कीमत में आई भारी गिरावट

Hyundai Creta Electric: अगर आप इलेक्ट्रिक SUV खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। दरअसल, Hyundai Motor India Ltd ने Creta Electric के लिए ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BaaS) ओनरशिप मॉडल पेश किया है। इस कदम से इलेक्ट्रिक SUV की शुरुआती कीमत, बैटरी की लागत को छोड़कर, रेगुलर ₹18.03 लाख से घटकर ₹10.99 लाख (एक्स-शोरूम) हो गई है।

इस नई व्यवस्था के तहत, खरीदारों के पास गाड़ी अलग से खरीदने और बैटरी के लिए EMI प्लान (जो ₹3.9 प्रति किलोमीटर से शुरू होगा) चुनने का विकल्प होगा, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने की शुरुआती लागत कम हो जाएगी।

Hyundai का मकसद EV को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ऑटो कंपनियां भारत में ग्राहकों के सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्या यानी ज्यादा शुरुआती कीमत को कम करने के लिए अलग-अलग ओनरशिप मॉडल अपना रही हैं। बैटरी की कीमत को गाड़ी की कीमत से अलग करने से शुरुआती खरीद लागत कम हो जाती है, जबकि गाड़ी की लिस्ट कीमत पर कोई असर नहीं पड़ता। इससे इलेक्ट्रिक वाहन ज्यादा किफायती और आसान हो जाते हैं।

फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लॉन्च के मौके पर Hyundai Motor India Ltd के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO तरुण गर्ग ने कहा, “हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक के लिए ‘बैटरी-एज-ए-सर्विस’ (BaaS) की शुरुआत भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है।”

उन्होंने कहा, शुरुआती कीमत को काफी कम करके और फ्लेक्सिबल बैटरी रेंटल प्लान देकर देकर, हम ज्यादा ग्राहकों को भरोसे के साथ EV अपनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे वे हुंडई की भरोसेमंद तकनीक, सुरक्षा और इनोवेशन का लाभ उठा सकें।

क्रेटा इलेक्ट्रिक की कीमत अभी ₹18.02 लाख से ₹24.55 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच है। यह दो बैटरी पैक ऑप्शन के साथ आती है: एक 42 kWh यूनिट जिसकी ड्राइविंग रेंज 420 km बताई गई है, और दूसरी 51.4 kWh यूनिट जिसकी रेंज 510 km बताई गई है। यह SUV DC फास्ट चार्जिंग को भी सपोर्ट करती है, जिससे बैटरी को लगभग 39 मिनट में 10% से 80% तक तेजी से चार्ज किया जा सकता है।

इस मॉडल की अन्य खूबियों में व्हीकल-टू-लोड (V2L) क्षमता, हुंडई स्मार्टसेंस लेवल 2 ADAS, डिजिटल की, सिंगल ड्राइव (i-पेडल), एक्टिव एयर फ्लैप्स और 8 साल/1.6 लाख km की बैटरी वारंटी शामिल हैं।

Hyundai भारत में EV इकोसिस्टम को मजबूत करने की योजना बना रही है

अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाने के साथ-साथ, हुंडई देश में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रही है। फॉर्च्यून इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अगले सात सालों में लगभग 600 फास्ट पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रही है। साथ ही, कंपनी ने पहले ही 183 जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है, जिसमें 214 DC चार्जर और 399 चार्जिंग पॉइंट शामिल हैं।

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नोएडा की तर्ज पर यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बसेगा न्यू आगरा, यहां 14 लाख में मिलेगा घर! प्रॉपर्टी को रॉकेट बना देगी YEIDA की ये तैयारी

ऐतिहासिक शहर आगरा में भीड़भाड़ को कम करने और इसके टूरिज्म के साथ इंडस्ट्रियल स्कोप को और मजबूत करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के किनारे दो बड़ी आवासीय परियोजनाएं न्यू आगरा और ग्रेटर आगरा विकसित की जा रही हैं। आधुनिक आवासीय कॉलोनियों और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस इन शहरों को लाखों लोगों के रहने के लिए तैयार किया जा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे बसने वाले इस नए शहर को न्यू आगरा अर्बन सेंटरनाम दिया गया है। यह पूरी टाउनशिप ग्रेटर नोएडा और आगरा के बीच, आगरा जिले की सीमाओं के भीतर वहां विकसित की जाएगी जहां यमुना एक्सप्रेसवे समाप्त होता है।

नोएडा से आधा होगा आकार, 44 गांवों की जमीन चिन्हित

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए आगरा जिले के 44 गांवों में फैली लगभग 14480 हेक्टेयर भूमि की पहचान की गई है। इस लिहाज से यह आगामी नया शहर आकार में नोएडा का करीब आधा होगा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) को अपने मास्टर प्लान 2041 के एक मुख्य हिस्से के रूप में इस नए शहर को डिजाइन और विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के फॉर्मूले को अपनाते हुए न्यू आगरा को भी तीन अलग-अलग जोन में बांटा जाएगा।

14 लाख घर और पर्यावरण अनुकूल उद्योग

इस टाउनशिप में करीब 1.4 मिलियन (14 लाख) लोगों के रहने के लिए नागरिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। यहां करीब 14 लाख घर बनाने का प्रस्ताव है। इनमें से कुछ घरों की कीमत लगभग 14 लाख रुपये के आसपास होगी। यह पूरा क्षेत्र ताजमहल के पास ताज ट्रेपेजियम जोन में आता है इसलिए योजना प्रक्रिया में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का विशेष ध्यान रखा गया है। न्यू आगरा इंडस्ट्रियल एरिया में केवल गैर-प्रदूषणकारी और सॉफ्ट उद्योगों जैसे कि इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री चलाने की ही इजाजत मिलेगी।

पर्यटन हब और 10 लाख नौकरियों के अवसर

क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस नए शहर में एक विशाल थीम पार्क, मनोरंजन क्षेत्र और बजट होटलों के साथ-साथ लग्जरी फाइव-स्टार और सेवन-स्टार प्रॉपर्टीज तैयार की जाएंगी। बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और एक समर्पित टूरिज्म हब की बदौलत इस शहर में करीब 10 लाख नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

कनेक्टिविटी का दमदार जाल: नमो भारत और मल्टीमॉडल कार्गो

कनेक्टिविटी को इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश किया गया है। न्यू आगरा शहर जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर होगा। जेवर एयरपोर्ट को आगरा से जोड़ने के लिए एक नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर का भी प्रस्ताव है। इससे यात्रियों के यात्रा समय में भारी कटौती होगी। माल ढुलाई को आसान बनाने के लिए टूंडला जंक्शन के पास स्थित फ्रेट कॉरिडोर टर्मिनल को रेल लिंक के जरिए न्यू आगरा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा यहां एक इंटीग्रेटेड रेल-रोड-एयर फ्रेट सुविधा विकसित की जाएगी। इसे मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल कहा गया है।

ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट पर भी काम तेज, 29 जून से बुकिंग

न्यू आगरा के साथ-साथ आगरा विकास प्राधिकरण आगरा शहर के भीतर ही रायपुर और रहनकलां में 449 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रेटर आगरा नाम से एक अलग टाउनशिप क्लस्टर डेवलप कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत 10 छोटी टाउनशिप स्थापित की जा रही हैं। इनमें गंगापुरम और यमुनापुरम जैसी टाउनशिप शामिल हैं। इस परियोजना में करीब 30000 परिवारों को आवासीय प्लॉट मिलेंगे।

आगरा विकास प्राधिकरण के अनुसार ग्रेटर आगरा परियोजना के तहत गंगापुरम और नर्मदापुरम टाउनशिप में प्लॉट्स के लिए बुकिंग 29 जुलाई तक जारी रहेगी। इसके लिए जनहित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। ग्रेटर आगरा को शहर के इनर रिंग रोड के साथ रहनकलां और रायपुर महुआ खेड़ा गांवों के पास बनाया जा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे और लखनऊ एक्सप्रेसवे दोनों के एंट्री पॉइंट्स के करीब होने के कारण यहां से दिल्ली, नोएडा और लखनऊ की यात्रा काफी आसान हो जाएगी।

देश की पहली अंडरग्राउंड केबलिंग और वर्ल्ड क्लास सुविधाएं

ग्रेटर आगरा को एक स्मार्ट सिटी डिजाइन के तहत 10 सेक्टरों में बांटा गया है। यह आगरा का पहला ऐसा क्षेत्र होगा जहां अंडरग्राउंड केबलिंग के साथ-साथ 24 घंटे पावर और वॉटर बैकअप मिलेगा। टाउनशिप के भीतर मुख्य सड़कें 45 से 60 मीटर चौड़ी होंगी। अंदर की सड़कें कम से कम 9 से 12 मीटर की होंगी। ग्रेटर आगरा में एक वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स एकेडमी, एक बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, एक सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, इंटरनेशनल स्कूल और यूनिवर्सिटी कैंपस भी होंगे। शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉर्पोरेट ऑफिस और फाइव-स्टार होटलों के लिए बड़े कमर्शियल प्लॉट रखे गए हैं। सस्टेनेबल प्लानिंग के तहत टाउनशिप के कुल क्षेत्र का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा पार्कों और ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित किया गया है।

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बुलेट ट्रेन को लेकर भारत-जापान की बड़ी डील! 2027 की टाइमलाइन और 7000 किमी नेटवर्क पर काम अब दौड़ेगा

भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर कोलैबरेशन को बड़ा पुश देते हुए जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना के प्राथमिकता वाले सेक्शन पर साल 2027 तक कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम साने ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है। इसके मुताबिक यह फ्लैगशिप बुलेट ट्रेन परियोजना दोनों नेताओं के बीच एक व्यापक संयुक्त समझौते का मुख्य आधार है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस नेटवर्क में E10 ट्रेनों को शामिल करने के मील के पत्थर जैसे लक्ष्य को भी स्वीकार किया।

7000 किलोमीटर के नेशनल नेटवर्क के लिए पीएम मोदी का न्यौता

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत के भावी हाई-स्पीड कॉरिडोर में भागीदारी के अवसर तलाशने के लिए स्पष्ट रूप से आमंत्रित किया है। इसका उद्देश्य 7000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के भारत के व्यापक विज़न को हकीकत में बदलना है। इस ट्रांजिट अलाइनमेंट को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक एमओयू साइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जापान की हाइटेक मोबिलिटी तकनीकों को भारत की बाजार क्षमता और मानव संसाधनों के साथ जोड़ना है।

शिंकेन्सन तकनीक से बदल जाएगी भारतीय रेलवे की तस्वीर

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के प्रयासों में एक बड़ा मील का पत्थर है। देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में यह इंटर सिटी मोबिलिटी को पूरी तरह से बदलने और घरेलू रेलवे क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से पूरी की जा रही है। यह पूरा कॉरिडोर जापान की प्रसिद्ध शिंकेन्सन तकनीक और परिचालन मानकों का उपयोग करके डेवलप कियाजा रहा है। इसमें ट्रैक्शन, इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन्स के लिए हाइटेक टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है।

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का रणनीतिक विकास

रेलवे के बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर दोनों नेताओं ने ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक लचीले भारत-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया है। जापान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क नेटवर्क, पुलों और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए मजबूत समर्थन का संकल्प लिया। दोनों देशों ने इस क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी और बिम्सटेक भागीदारों से जोड़ने वाली औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं को विकसित करने की भी प्रतिबद्धता जताई।

इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी हो रही है तेज प्रगति

दोनों देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए जापानी विकास सहायता से जुड़े चार अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी लगातार प्रगति हो रही है:

  • मुंबई मेट्रो लाइन 11
  • बेंगलुरु मेट्रो फेज 3
  • महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा का बुनियादी ढांचा
  • पंजाब में सस्टेनेबल हॉर्टिकल्चर
  • पर्यटन, संस्कृति और जापानी भाषा को बढ़ावा

इन आर्थिक और ढांचागत समझौतों को मजबूती देने के लिए दोनों देश लोगों के बीच आपसी संपर्क और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ा रहे हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि साल 2025 में दोनों देशों के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों की संख्या 540000 को पार कर गई है। उन्होंने द्विपक्षीय पर्यटन को बढ़ावा देने और कांसुलर मामलों पर बातचीत का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत में निहंगो पार्टनर्स कार्यक्रम के माध्यम से जापानी भाषा की शिक्षा को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। साथ ही युवाओं के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने में एनिमे, मंगा, गेमिंग और फिल्मों जैसे रचनात्मक उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

भारत के राज्यों और जापानी प्रांतों के बीच दोस्ती का नया नेटवर्क

इस रिश्ते को जमीनी स्तर पर और ठोस बनाने के लिए सब-नेशनल डिप्लोमेसी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्थानीय आर्थिक नेटवर्क बनाने में भारतीय राज्यों और जापानी प्रान्तों और नगर पालिकाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच इंडिया-जापान गवर्नर्स नेटवर्क फॉर फ्रेंडशिप एंड एक्सचेंज की स्थापना का स्वागत किया गया। वर्तमान में इन क्षेत्रीय जोड़ियों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग सक्रिय है-

  • उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रान्त
  • आंध्र प्रदेश और टोयामा प्रान्त
  • गुजरात और शिज़ुओका प्रान्त
  • अहमदाबाद और हमामात्सू शहर
  • महाराष्ट्र और वाकायामा प्रान्त
  • केरल और सैन’इन क्षेत्र
  • तमिलनाडु और एहिमे प्रान्त
  • दिल्ली और फुकुओका प्रान्त
  • तेलंगाना और किताक्युशु शहर

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जापानी कंपनियों को भारत के गांवों तक लेकर आएंगे श्रीधर वेम्बु! इसके लिए वो पहुंच रहे जापान और उनका ये है प्लान

Sridhar Vembu: जोहो (Zoho) के सह-संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बु ने एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वेम्बु जापान की यात्रा पर जा रहे हैं। उनका मकसद जापान की छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के साथ साझेदारी तलाशना है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य जापान की इन कंपनियों को भारत के ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों से जोड़ना है ताकि देश के गांवों में कारीगरी व शिल्प कौशल की संस्कृति को फिर से जीवित किया जा सके।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए श्रीधर वेम्बु ने अपने इस पूरे एजेंडे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह जापान के छोटे शहरों में स्थित व्यवसायों के साथ काम करना चाहते हैं और उनकी विशेषज्ञता को भारत के छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचाना चाहते हैं। वेम्बु ने लिखा कि मैं कल जापान जा रहा हूं। एजेंडा जापान के छोटे शहरों की छोटी से मध्यम आकार की कंपनियों के साथ साझेदारी करना और उन्हें भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लाना है।

शिल्प कौशल और कारीगरी को पुनर्जीवित करने पर फोकस

श्रीधर वेम्बु की मुताबिक इस पहल की जड़ें पारंपरिक शिल्प कौशल को फिर से बहाल करने की इच्छा से जुड़ी हैं। इसे उन्होंने तमिल शब्द आसारी (Aasaari) और संस्कृत शब्द विश्वकर्मा (Vishwakarma) के जरिए भी अपने विजन को समझाने की कोशिश की है।

उन्होंने कहा कि जापान की कई छोटी कंपनियां आज भी इन मूल्यों को संजोए हुए हैं। इन कंपनियों ने प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और अन्य अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले क्षेत्रों में विश्व स्तरीय क्षमताएं विकसित की हैं। वेम्बु ने कहा कि जापानी लोग उन क्षेत्रों में वैश्विक लीडर हैं जिनमें जटिल और बारीक शिल्प कौशल की आवश्यकता होती है।

पुराने दोस्त ब्रिट्टो-सान से मिली इस मिशन की प्रेरणा

वेम्बु ने बताया कि इस पूरे मिशन में उन्हें उनके एक पुराने मित्र ब्रिट्टो से मार्गदर्शन मिल रहा है। मूल रूप से मदुरै के रहने वाले ब्रिट्टो ने जापान में कई दशक बिताए हैं और वहां की व्यावसायिक संस्कृति की उन्हें गहरी समझ है। ब्रिट्टो ने बाद में ताकुमी मोशन कंट्रोल्स की स्थापना की थी। जोहो के संस्थापक ने रेखांकित किया कि जापानी शब्द ताकुमी का अर्थ शिल्पकार होता है। ये जो जापानी विनिर्माण परंपराओं के प्रति उनके साझा सम्मान को दर्शाता है। वेम्बु ने लिखा कि जापानी शिल्प कौशल के प्रति हमारे आदर और प्रशंसा ने ब्रिट्टो-सान और मुझे एक साथ जोड़ा। अब यह हमारे लिए एक मिशन बन गया है।

वेम्बु के रूरल-फर्स्ट विजन से मेल खाती है यह पहल

यह घोषणा ग्रामीण विकास और विकेंद्रीकरण पर वेम्बु के लंबे समय से चले आ रहे फोकस के बिल्कुल अनुकूल है। वे पिछले कई वर्षों से लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि विश्व स्तरीय तकनीक और नवाचार का निर्माण बड़े महानगरों से बाहर भी किया जा सकता है। इसी सोच के तहत जोहो छोटे शहरों और गांवों में अपने परिचालन और प्रशिक्षण पहलों का विस्तार कर रही है।

यह जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कुछ ही दिन पहले वेम्बु ने बताया था कि जोहो के रेवेन्यू का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत के बाहर से आता है। भारतीय सरकार से उन्हें सिर्फ 2 प्रतिशत रेवेन्यू मिलता है। जोहो की वैश्विक स्तर पर बड़ी मौजूदगी है। इसके कार्यालय जापान, अमेरिका, नीदरलैंड, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में हैं।

ग्रामीण भारत के विकास के लिए पहले भी किए हैं बड़े प्रयास

जोहो प्रमुख का यह ताजा जापान मिशन उनके उस ग्रामीण-विकास दर्शन का हिस्सा है जिसकी वे एक दशक से अधिक समय से वकालत कर रहे हैं। उनका मानना है कि भारत के गांवों और छोटे शहरों में अपार प्रतिभा छिपी है, और यदि उन्हें अवसर व इंफ्रास्ट्रक्चर मिले तो वे नवाचार, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बन सकते हैं।

तेनकासी का सफल मॉडल

इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए जोहो ने 2011 में ग्रामीण तमिलनाडु के तेनकासी जिले के एक गांव मथलमपराई में एक टेक्नोलॉजी सेंटर शुरू किया था। उद्योग की इस धारणा को तोड़ते हुए कि हाई-एंड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल बड़े शहरों में हो सकता है, यह सेंटर आज एक बड़े रूरल टेक इकोसिस्टम में बदल चुका है। यहां सैकड़ों स्थानीय पेशेवर काम करते हैं। चेन्नई जैसे बड़े शहरों में नौकरियों के अत्यधिक संकेंद्रण को रोकने के लिए वेम्बु ने जानबूझकर ग्रामीण क्षेत्रों का रुख किया। इसके तहत तिरुनेलवेली, मदुरै और कुंभकोणम क्षेत्रों सहित पूरे तमिलनाडु में अतिरिक्त ग्रामीण परिसर और सैटेलाइट कार्यालय स्थापित किए गए हैं।

स्थानीय स्टार्टअप्स में निवेश

महानगरों से बाहर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ड्रोन स्टार्टअप याली एयरोस्पेस और पावर-टूल्स वेंचर करुवी जैसे स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी उपक्रमों में भी निवेश किया है।

गांवों की तरफ रिवर्स माइग्रेशन की अपील

श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में गांवों की ओर रिवर्स माइग्रेशन का आह्वान किया है। उनका तर्क है कि दशकों से बड़े शहरों की ओर हो रहे पलायन ने ग्रामीण समुदायों से प्रतिभाओं को पूरी तरह निचोड़ लिया है। वेम्बु के मुताबिक, ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को दोबारा खड़ा करने के लिए लोगों के निवास स्थान के करीब ही रोजगार, उद्यमिता और दीर्घकालिक निवेश लाने की सख्त जरूरत है।

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Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

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