UP RERA ने 1278 करोड़ के 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद और आगरा में नए घर, दुकानें खरीदनी हैं तो इनपर रखें नजर

New Housing projects in UP: उत्तर प्रदेश में अपना घर या दुकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने राज्य के चार प्रमुख जिलों में 10 नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक इन सभी प्रोजेक्ट्स में कुल मिलाकर लगभग 1278 करोड़ रुपये का अनुमानित इन्वेस्टमेंट होगा। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में हुई अथॉरिटी की बैठक में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन नए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से लखनऊ, नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), आगरा और गाजियाबाद में करीब 4498 आवासीय और व्यावसायिक यूनिट्स का विकास किया जाएगा।

लखनऊ: सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स और 2284 यूनिट्स को मिली मंजूरी

मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स और यूनिट्स की संख्या के मामले में राजधानी लखनऊ सबसे आगे है। लखनऊ में करीब 438.29 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश वाले 6 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन 6 प्रोजेक्ट्स में 5 आवासीय और 1 मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट शामिल है। इनके जरिए कुल 2284 यूनिट्स डेवलप की जाएंगी।

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा): निवेश के मामले में अव्वल, बनेंगे शॉप्स और स्टूडियो स्पेस

निवेश के मामले में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) सूची में सबसे ऊपर रहा है। यहां 496.27 करोड़ रुपये की लागत वाले 2 कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को रेरा से मंजूरी मिली है। इन प्रोजेक्ट्स के तहत कुल 981 कमर्शियल यूनिट्स विकसित की जाएंगी। इनमें दुकानें और स्टूडियो स्पेस शामिल होंगे।

आगरा और गाजियाबाद में भी रियल एस्टेट को रफ्तार

आगरा और गाजियाबाद जिलों के लिए भी नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाई गई है। आगरा में 223.04 करोड़ रुपये के एक आवासीय प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इसके तहत शहर में 761 हाउसिंग यूनिट्स (आवास) का विकास किया जाएगा। गाजियाबाद में 120.88 करोड़ रुपये के निवेश वाले एक कमर्शियल प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके तहत 472 कमर्शियल यूनिट्स बनाने की योजना है।

रोजगार के नए अवसर और समय पर पूरा करने की निगरानी

यूपी रेरा ने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स आवासीय, व्यावसायिक और मिक्स्ड-यूज विकास से जुड़े हैं। इनसे राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इनकी मदद से घरों और आधुनिक कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकेगा। अथॉरिटी ने साफ किया है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे हों। इन निवेशों से निर्माण कार्य के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही कंस्ट्रक्शन मैटेरियल, इंजीनियरिंग सर्विसेज, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में भी मांग बढ़ेगी।

प्रोजेक्ट्स को दी गई इस मंजूरी पर यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि अथॉरिटी रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स को समय पर मंजूरी मिलने और उनकी प्रभावी निगरानी से प्रमोटर्स और घर खरीदारों दोनों के लिए अधिक भरोसे का माहौल तैयार हो रहा है।

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चीन ने पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में चली बड़ी चाल, बंगाल की खाड़ी को लेकर उसकी ये योजना कान खड़े कर देगी

भारत के पूर्वी सीमा के आसपास पकड़ बनाने के लिए चीन पूरे दक्षिण एशिया में अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पहले चीन ने पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में बड़ा निवेश किया था। अब उसने एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत वह म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश तक एक नया आर्थिक कॉरिडोर बनाना चाहता है।

हालांकि, यह प्रस्ताव सिर्फ एक सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान नहीं लगता है, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक सोच भी है। इसका मकसद चीन के लिए समुद्री रास्तों तक आसान पहुंच बनाना है, खासकर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) तक। फिलहाल, भारत के लिए इस संदेश को नजरअंदाज करना मुश्किल है। लेकिन यह कॉरिडोर अभी हकीकत से बहुत दूर है, और यह हिंद महासागर के आस-पास अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की बीजिंग की लगातार कोशिशों को दिखाता है।

बीजिंग ने भारत को छोड़कर एक पुराने विचार को फिर से शुरू किया

यह प्रस्ताव बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान सामने आया। जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस विचार का समर्थन किया और इसे दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग का हिस्सा बताया।

तारिक रहमान के प्रवक्ता महदी अमीन के अनुसार, इस कॉरिडोर को आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स (logistics) को बेहतर बनाने के एक साधन के रूप में पेश किया जा रहा है।

अमीन ने कहा, “बैठक के दौरान एक प्रस्ताव आया कि म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश से चीन तक एक आर्थिक कॉरिडोर कैसे बनाया जा सकता है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस प्रस्ताव का मकसद “बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का विस्तार करना, आर्थिक लेन-देन बढ़ाना और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन को और बेहतर बनाना” है।

असल में, यह प्रोजेक्ट लंबे समय से चर्चा में रहे बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार  (BCIM) कॉरिडोर को फिर से शुरू करता है, लेकिन इसमें एक बड़ा बदलाव है: भारत अब इसका हिस्सा नहीं है।

बता दें कि शुरुआती BCIM कॉरिडोर में चारों देशों को जोड़ने वाली सड़क और रेल कनेक्टिविटी की योजना थी। हालांकि, भारत ने सावधानी बरती और चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ में कभी शामिल नहीं हुआ; इसकी कुछ वजहें संप्रभुता से जुड़ी चिंताएं और बीजिंग की बढ़ती भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं थीं।

अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक

CPEC के नजरिए से देखने पर चीन की बड़ी रणनीति और साफ हो जाती है। दरअसल, बीजिंग ने पाकिस्तान के जरिए, ग्वादर पोर्ट के माध्यम से अरब सागर तक पहुंच हासिल की। हालांकि ​​इस प्रोजेक्ट की भारत लंबे समय से आलोचना करता रहा है क्योंकि यह गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, जिसे भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला इलाका मानता है।

वहीं, अब,बांग्लादेश-म्यांमार रूट से चीन को एक और रणनीतिक पहुंच मिल सकती है, जो इस बार भारत के पूर्वी समुद्री पड़ोस के ज्यादा करीब होगी। इससे बीजिंग को मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है, जो दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील शिपिंग चोकपॉइंट्स में से एक है।

बांग्लादेश की नजर बंदरगाह, व्यापार और चीनी निवेश पर

ढाका ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से एक आर्थिक अवसर के तौर पर पेश किया है। खबरों के मुताबिक, बातचीत मुख्य रूप से चट्टोग्राम बंदरगाह और मोंगला बंदरगाह के आस-पास बुनियादी ढांचे पर केंद्रित रही।

बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मेहदी अमीन ने कहा, “हम इस बात पर काम करना चाहते हैं कि इस बंदरगाह [मोंगला बंदरगाह] को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कैसे विकसित किया जाए, जो न केवल बांग्लादेश बल्कि अन्य देशों के लिए भी काम आए।”

बांग्लादेश ने हाल के समय में चीनी समर्थित इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की ओर भी रुख किया है। मोंगला के आसपास की जमीन, जिसे पहले 2015 के एक द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत समर्थित आर्थिक परियोजना के लिए रखा गया था, उसे 2025 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हटा दिया।

रहमान की यात्रा के दौरान, ढाका ने उस आर्थिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए चीन की सरकारी कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

‘द डेली स्टार’ के अनुसार, यह प्रस्तावित रूट चीन के कुनमिंग से शुरू होकर म्यांमार के मांडले तक जाएगा, फिर यह दो हिस्सों में बंटकर यांगून और क्याउकफ्यू पोर्ट तक पहुंचेगा, और आगे चलकर बांग्लादेश के चट्टोग्राम और कॉक्स बाजार से जुड़ेगा।

म्यांमार सबसे कमजोर कड़ी बना

इस प्रस्ताव को लेकर जितनी भी उम्मीदें हैं, उनमें सबसे बड़ी चुनौती म्यांमार है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर ऐसे इलाकों से होकर गुजरेगा जो लंबे समय से गृहयुद्ध और अस्थिरता से प्रभावित हैं।

रखाइन राज्य (Rakhine State), जहां रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्याउकफ्यू (Kyaukphyu) डीप-सी पोर्ट स्थित है, वहां सेना और सशस्त्र समूहों के बीच भारी संघर्ष चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वहां की कई जगहों पर सेना का नियंत्रण भी कमजोर पड़ चुका है। इस वजह से किसी बड़े ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को पूरी तरह लागू करना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

The Daily Star की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में पहले से मौजूद चीनी निवेश भी गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना कर रहा है, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में रुकावट और संपत्तियों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने जैसी समस्याएं शामिल हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो, जब तक म्यांमार के रास्ते एक सुरक्षित और स्थिर मार्ग नहीं बनता, यह पूरा कॉरिडोर फिलहाल सिर्फ एक सैद्धांतिक योजना ही बना रहेगा।

भारत इस प्रस्ताव को क्यों नजरअंदाज नहीं कर सकता

भारत के नजरिए से देखें तो इस योजना से तुरंत कोई बड़ा खतरा न भी हो, लेकिन लंबे समय में इसके रणनीतिक असर काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अगर चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर पूरी तरह काम करने लगता है, तो इससे चीन की मौजूदगी बंगाल की खाड़ी के आसपास और मजबूत हो जाएगी। वह बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक ढांचे के जरिए इस पूरे क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ा सकता है। इससे चीन का प्रभाव भारत के पड़ोसी क्षेत्र में और गहरा होगा और उसे हिंद महासागर (Indian Ocean) तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार सुबीर भौमिक ने Rediff में लिखा कि युन्नान स्थित थिंक टैंक से जुड़े चीनी विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि बीजिंग अपनी व्यापक समुद्री रणनीति के तहत चीन-म्यांमार आर्थिक कॉरिडोर को बांग्लादेश तक विस्तारित करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम पर “दिल्ली और वाशिंगटन की नजर रहेगी और वे इससे खुश नहीं होंगे”।

अभी के लिए यह प्रोजेक्ट से ज्यादा एक संकेत है

फिलहाल चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई पूरी तरह मंजूर किया गया प्रोजेक्ट नहीं। लेकिन इस स्तर पर भी, यह एक साफ संकेत देता है।

भारत के बेल्ट एंड रोड पहल से बाहर रहने और BCIM कॉरिडोर के लगभग खत्म हो जाने के बावजूद, चीन लगातार ऐसे वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, जिनसे वह दक्षिण एशिया में अपना आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव बढ़ा सके।

चाहे यह कॉरिडोर आगे जाकर बने या न बने, बीजिंग की मंशा अब साफ होती जा रही है—हिंद महासागर तक पहुंच के लिए कई रास्ते तैयार करना और भारत के आसपास के क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना।

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जापान की PM ताकाइची राष्ट्रपति भवन पहुंची:गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत;  आज मोदी से निवेश और सुरक्षा सहयोग द्विपक्षीय चर्चा होगी

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्वागत समारोह में मौजूद रहे। ताकाइची आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच निवेश, व्यापार, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। यह प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची का पहला भारत दौरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है। मार्च 2026 तक उसका कुल निवेश ₹4.58 लाख करोड़ पहुंच चुका था। भारत-जापान ने साल 2025 में अगले 10 साल के लिए 10 ट्रिलियन जापानी येन (₹5.84 लाख करोड़) के जापानी निजी निवेश का टारगेट तय किया। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और हाई-टेक डिफेंस उद्योगों में होगा। एक सर्वे के मुताबिक, जापानी कंपनियों के लिए भारत दुनिया का सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद निवेश देश है। भारत में व्यापार कर रही 75% से अधिक जापानी कंपनियां मुनाफे में हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 2025 में एक विशेष रणनीतिक डायलॉग शुरू किया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पूरी तरह जापानी शिनकानसेन तकनीक और जापानी लोन की मदद से आगे बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है। ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…

UP के मजदूरों को बड़ी राहत, अब हर दिन मिलेंगे कम से कम ₹300, 125 दिन रोजगार की भी गारंटी

उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नई योजना के तहत अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी।

इस योजना के समुचित कार्यान्वयन के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है। करीब 20 वर्षों तक ग्रामीण रोजगार की रीढ़ रहे मनरेगा की जगह अब यह नया ढांचा ले रहा है। यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार बढ़ाएगा और गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देगा।

 

यूपी के ग्रामीण परिवारों को होगा फायदा

 

उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े ग्रामीण आबादी वाले राज्यों में शामिल है, जहां लाखों परिवार रोजगार के लिए मनरेगा पर निर्भर रहे हैं। नई योजना लागू होने के बाद यूपी के ग्रामीण मजदूरों को कई बड़े लाभ मिलने वाले हैं। अब प्रदेश के पात्र ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों के बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी। साथ ही नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। इससे राज्य के लाखों ग्रामीण मजदूरों को सीधा फायदा मिलेगा। राष्ट्रीय औसत मजदूरी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है। योगी सरकार ने बढ़ी हुई मजदूरी देने के लिए सारे प्रबंध पहले से कर रखे हैं। 

 

वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी 

 

मनरेगा की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव जियोस्पेशियल प्लानिंग को लेकर देखा जा रहा है। पहले जहां स्थानीय मांग के आधार पर कार्यों को मंजूरी दी जाती थी, वहीं अब गांवों में सैटेलाइट डेटा, भूमि रिकॉर्ड और बुनियादी ढांचे की जरूरतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन्हीं योजनाओं के अनुसार तय होगा कि सरकारी धन कहां और किस कार्य पर खर्च किया जाएगा। वहीं अब पहले की तरह केवल मांग के आधार पर रोजगार नहीं मिलेगा। प्रदेश के गांवों में पहले से तैयार विकास योजनाओं के आधार पर काम तय किए जाएंगे।

 

निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी 

 

अब यूपी के गांवों में विकास कार्यों की योजना और निगरानी जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल प्लानिंग टूल्स के जरिए होगी। इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। इसमें सड़क निर्माण, सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण परियोजनाएं और स्थायी सामुदायिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। अब विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं को आपस में जोड़कर परियोजनाओं को लागू किया जा सकेगा। इससे कार्यों के दोहराव को रोका जा सकेगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों की दक्षता में सुधार आएगा।

इन 5 iPhones पर मिल रहा शानदार ऑफर, कीमत बढ़ने से पहले चेक करें डील

अगर आप नया iPhone खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह आपके लिए सबसे सही समय हो सकता है। जही हां, दरअसल कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple जल्द ही iPhone की कीमतें बढ़ा सकता है, और इसकी सबसे बड़ी वजह AI-बेस्ड मेमोरी चिप की कमी है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ रही है। हालांकि, Cupertino की इस टेक कंपनी ने कीमतों में बदलाव की जानकारी तो नहीं दी है, लेकिन हालिया लीक्स से संकेत मिलता है कि आने वाली iPhone 17 लाइनअप काफी महंगी हो सकती है। अब चलिए कीमतों की बढ़ोतरी से पहले, iPhone की बेहतरीन डील्स के बारे में सब कुछ जानते हैं।

iPhone की कीमतें क्यों बढ़ सकती हैं

टिपस्टर संजू चौधरी की ओर से सामने आई हालिया जानकारी से पता चलता है कि Apple के अगले iPhone लाइनअप की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। इस जानकारी के अनुसार, iPhone 17 Pro Max की कीमत ₹1,49,900 से बढ़कर लगभग ₹1,99,900 हो सकती है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 17 की कीमत ₹82,990 से बढ़कर ₹94,900 हो सकती है। हाल ही में पेश किए गए iPhone 17e की कीमत भी ₹64,900 से बढ़कर ₹74,900 होने की उम्मीद है। हालांकि, Apple ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, इसलिए फिलहाल इन्हें सिर्फ अटकलें ही माना जाना चाहिए। लेकिन, यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब DRAM और NAND मेमोरी की बढ़ती लागत के बीच iPhone बनाने वाली कंपनी ने कई बाजारों में MacBook, iPad और HomePod के कई मॉडल्स की कीमतें बढ़ाई हैं। इंडस्ट्री के जानकारों ने इन कीमतों में बढ़ोतरी को AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से जोड़ा है, जिसकी वजह से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में सप्लाई की दिक्कतें पैदा हुई हैं।

अभी देखने लायक पांच iPhone डील्स

अगर खबरों के मुताबिक कीमतें बढ़ती हैं, तो अभी मिल रहे इन ऑफर्स से ग्राहकों के काफी पैसे बच सकते हैं।

  1. iPhone 17 Pro Max

Flipkart ने कन्फर्म किया है कि 4 जुलाई से शुरू होने वाली Flipkart Goat Sale 2026 के दौरान, फ्लैगशिप iPhone 17 Pro Max 1,27,900 रुपये की प्रभावी कीमत पर उपलब्ध होगा। इस फोन को कंपनी ने 1,49,900 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया था, यानी इस हैंडसेट पर सीधे 22,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है।

  1. iPhone 17 Pro और iPhone 17

iPhone 17 Pro असल में ₹1,12,900 में मिलेगा, जिस पर ₹22,000 की छूट भी मिल रही है। वहीं, स्टैंडर्ड iPhone 17 को ₹70,900 में खरीदा जा सकता है, जबकि लॉन्च के समय इसकी कीमत ₹82,900 थी।

  1. iPhone Air

Apple का सबसे पतला स्मार्टफोन, iPhone Air, अभी ₹95,900 में मिल रहा है, जो इसकी लॉन्च कीमत ₹1,19,900 से काफी कम है।

  1. iPhone 17e

जो लोग कम कीमत वाला ऑप्शन ढूंढ रहे हैं, वे iPhone 17e को ₹60,900 में खरीद सकते हैं, जो इसकी रिटेल कीमत से ₹4,000 कम है।

  1. iPhone 16

पिछले साल लॉन्च हुआ iPhone 16, जिसकी कीमत ₹79,990 थी, अभी Croma पर ₹66,490 में लिस्टेड है। यानी इस पर लगभग ₹13,500 की छूट मिल रही है।

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कानपुर से कबरई जाने में 3.5 की बजाय लगेंगे डेढ़ घंटे, यूपी में BOT मोड में NH-34 पर 4/6 लेन का एक्सेस सेक्शन पास, जानिए डिटेल

Kanpur–Kabrai section: केंद्र सरकार की कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने नेशनल हाईवे-34 (NH-34) के कानपुर–कबरई सेक्शन पर 117.7 किलोमीटर लंबे 4/6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। करीब ₹7,145.14 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना बीओटी (टोल) मॉडल पर विकसित की जाएगी। इससे बुंदेलखंड समेत मध्य प्रदेश के कई इलाकों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब कानपुर–कबरई सेक्शन पर आधुनिक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे का निर्माण शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। 117.7 किलोमीटर लंबी यह सड़क परियोजना उत्तर प्रदेश के परिवहन नेटवर्क को नई मजबूती देगी और क्षेत्रीय विकास को गति प्रदान करेगी।

सरकार ने बताया कि नया कॉरिडोर 16 आर्थिक नोड्स (Economic Nodes) और 9 सामाजिक नोड्स (Social Nodes) को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे औद्योगिक निवेश, रोजगार के अवसर और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही एजुकेशन, हेल्थ और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी आसान होगी।

प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर कुल ₹7,145.14 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। इसका निर्माण बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) (टोल) मॉडल के तहत किया जाएगा। इसमें निजी कंपनी सड़क का निर्माण और संचालन करेगी। वहीं, निर्धारित अवधि तक टोल वसूलेगी। इस हाईवे के निर्माण से कानपुर, कबरई, सागर, भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के बीच तेज एवं सुरक्षित आवागमन संभव होगा।

समय की होगी बचत

इस हाईवे के बनने से कानपुर और कबरई के बीच यात्रा समय 3.5 घंटे से घटकर लगभग 1.5 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। वहीं, तेज और सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा। इससे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।

यह परियोजना सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक बेहतर और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगी। साथ ही, कबरई के खनन क्षेत्र से खनिज, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों के परिवहन को भी गति मिलेगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की संभावना है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में विकास की रफ्तार

सरकार के अनुसार, यह कॉरिडोर 16 आर्थिक नोड्स और 9 सामाजिक नोड्स को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे उद्योग, व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कबरई क्षेत्र अपनी खनिज संपदा और स्टोन माइनिंग के लिए जाना जाता है।

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बेहतर सड़क संपर्क मिलने से खनिज, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की ढुलाई तेज होगी। इससे परिवहन लागत कम होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। कानपुर-कबरई एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना उत्तर प्रदेश के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। बेहतर कनेक्टिविटी, कम यात्रा समय और तेज माल परिवहन के जरिए यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को भी नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

प्रोजेक्ट की बड़ी बातें

  • 117.7 किमी लंबा हाईटेक 4/6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे बनेगा।
  • इस परियोजना की लागत ₹7,145.14 करोड़ है।
  • अब कानपुर–कबरई यात्रा का समय 3.5 घंटे से घटकर 1.5 घंटे रह जाएगा।
  • मध्य प्रदेश के सागर, भोपाल सहित कई शहरों तक बेहतर सड़क संपर्क बढ़ेगा।
  • खनन, कृषि और औद्योगिक उत्पादों के तेज परिवहन से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • 16 आर्थिक और 9 सामाजिक नोड्स की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

Rules Changing From July 1 2026:  1 जुलाई से देश में कई जरूरी फाइनेंशियल और और नीतिगत बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर इनकम टैक्स, सैलरीड क्लास, पेंशन पाने वालों, बैंक कस्टमर और विदेश यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ने जा रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और पासपोर्ट फीस से लेकर ईपीएफओ सेवाओं, आधार नियमों और क्रेडिट कार्ड के फायदों में कई बड़े अपडेट किए गए हैं। आइए आपको इन बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं ताकि आप किसी तरह की असुविधा से बचें और बजट को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएं।

1- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता, घरेलू दाम स्थिर

सरकार ने 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। इससे होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। इस कटौती के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3113.50 से घटकर ₹2930 हो गई है। हालांकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कटौती 2026 की पहली छमाही के दौरान कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई कई तेज वृद्धियों के बाद आई है।

2- FY 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। ऐसे करदाता जो ITR-3 और ITR-4 दाखिल करते हैं और जिन पर टैक्स ऑडिट की आवश्यकता लागू नहीं होती है, उनके पास अपना रिटर्न जमा करने के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय है। तय समय-सीमा चूकने पर जुर्माना लग सकता है, टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है और नुकसान को आगेल कैरी फॉरवर्ड करने की सर्विस से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

3- EPFO 3.0: UPI आधारित पीएफ विड्रॉल की सुगबुगाहट

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बहुप्रतीक्षित EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जा रहा है। इसके तहत ईपीएफ सब्सक्राइबर्स को यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से तुरंत पैसे निकालने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

4- पासपोर्ट फीस में हुआ भारी इजाफा

सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन करके पासपोर्ट आवेदन शुल्क में बदलाव किया है। ये बदलाव भी 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है। अब 36 पन्नों के नए सामान्य पासपोर्ट की फीस 1500 से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। इसी कैटेगरी में तत्काल शुल्क को 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है। 60 पन्नों के पासपोर्ट और खोए या कटे-फटे पासपोर्ट को बदलने की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। वरिष्ठ नागरिकों और 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नए आवेदनों पर 10 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी।

5- आधार (Aadhaar) में ईमेल अपडेट करना हुआ फ्री

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधिकारिक आधार मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकृत ईमेल पते को अपडेट करने पर लगने वाले ₹75 के शुल्क को माफ कर दिया है। यह मुफ्त सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

6- मिस-सेलिंग पर RBI की सख्ती, टेलीमार्केटिंग का समय तय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री को रोकने और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम पेश किए हैं। अगर किसी ग्राहक को उचित सहमति के बिना या भ्रामक तरीकों से उत्पाद बेचे जाते हैं तो वे रिफंड और मुआवजे के हकदार होंगे। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे टेलीमार्केटिंग और प्रमोशनल कॉल्स को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही सीमित रखें।

7- HDFC बैंक ने क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड और लाउंज नियमों को बदला

एचडीएफसी बैंक ने अपने रेगेलिया गोल्ड और डाइनर्स क्लब प्रिविलेज क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर और ट्रैवल बेनिफिट्स में बदलाव किया है। रिवॉर्ड कैलकुलेशन से जुड़े बदलाव पहले ही लागू किए जा चुके हैं जबकि एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस से जुड़ी संशोधित शर्तें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। नए नियमों के मुताबिक रेगेलिया गोल्ड कार्डधारकों को कॉम्प्लीमेंट्री डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ उठाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60000 रुपये खर्च करने होंगे।

8- SBI कार्ड ने लगाई रिवॉर्ड पॉइंट्स पर कैपिंग

एसबीआई कार्ड ने अपने दो वेरिएंट्स PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव की घोषणा की है। 1 जुलाई से प्रभावी नियमों के तहत कंपनी ग्राहकों द्वारा कमाए जाने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स पर मंथली कैप लगाएगी। इंश्योरेंस से जुड़े खर्चों और अन्य श्रेणियों के खर्चों के लिए अलग-अलग सीमाएं लागू होंगी। ऑनलाइन लेनदेन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स को भी कम कर दिया गया है।

Stocks to Watch: 5 स्टॉक्स की लिस्टिंग; Kotak Bank, Advit Jewels और RailTel समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर

Stocks to Watch: वैश्विक बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच आज गिफ्ट निफ्टी से घरेलू मार्केट में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 19.50 प्वाइंट्स यानी 0.08% की मामूली गिरावट के साथ 23,985.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 30 जून को निफ्टी-बैंक निफ्टी की मंथली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 249.70 प्वाइंट्स यानी 0.33% की गिरावट के साथ 76,478.67 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 80.50 प्वाइंट्स यानी 0.34% की फिसलन के साथ 23,865.75 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

KPIT Technologies

पिछले कुछ हफ्ते में रेवेन्यू में एकाएक गिरावट के चलते केपीआईटी टेक ने जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू के उम्मीद से कमजोर होने के आसार जताए हैं और सालाना आधार पर डॉलर रेवेन्यू में 1% की गिरावट आ सकती है। कंपनी ने तिमाही आधार पर EBITDA मार्जिन में भी गिरावट की आशंका जताई है। हालांकि कंपनी को इस वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में प्रॉफिटेबल ग्रोथ का भरोसा है और मार्च 2027 तिमाही में तिमाही आधार पर अच्छी ग्रोथ दिख सकती है।

Cupid

जून 2026 तिमाही में क्यूपिड को ₹150 करोड़ से अधिक रेवेन्यू की उम्मीद है। मैनेजमेंट ने इस वित्त वर्ष 2027 के रेवेन्यू आउटलुक में कम से कम 10% बढ़ा दिया है।

Hexagon Nutrition Q4 (Consolidated YoY)

मार्च 2026 तिमाही में हेग्जागन न्यूट्रिशन का कंसालिडेटेड प्रॉफिट सालाना आधार पर 40.6% बढ़कर ₹10.9 करोड़ और रेवेन्यू 8% उछलकर ₹115 करोड़ पर पहुंच गया।

Kotak Mahindra Bank

कोटक महिंद्रा बैंक ने भारत में ड्यूश बैंक के रिटेल बैंकिंग, प्राइवेट बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस को खरीदने के लिए एक डेफिनिटिव एग्रीमेंट किया है। इस बिजनेस में लगभग ₹29,000 करोड़ के लोन, ₹16,000 करोड़ की डिपॉजिट्स और ₹10,500 करोड़ का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) शामिल हैं। इसमें 1,000 एंप्लॉयीज काम कर रहे हैं और इसके करीब 1.5 लाख ग्राहक हैं।

RailTel Corporation of India

रेलटेल को महानदी कोलफील्ड्स से 60 महीनों के लिए रेंटल बेसिस पर MPLS VPN नेटवर्क सेटअप करने के लिए ₹107.6 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है।

Tata Communications

जीनियस वोंग ने टाटा कॉम के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट ( कोर और नेक्स्ट-जेन कनेक्टिविटी सर्विसे) और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी इस्तीफा 31 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा। रूपेश चोकशी को 1 अगस्त से एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल बिज़नेस हेड (नेटवर्क सर्विसेज) नियुक्त किया गया है, जबकि विवेक श्रीवास्तव को 17 अगस्त से एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड (क्लाउड और साइबरसिक्योरिटी सर्विसेज) नियुक्त किया गया है।

Rane (Madras)

हिंदुस्तान कम्पोजिट्स के फ्रिक्शन बिजनेस को राणे (मद्रास) खरीद रही है। दोनों के बीच गोइंग कंसर्न के तौर पर स्लम्प सेल के आधार पर ₹370 करोड़ के एंटरप्राइज वैल्यू पर इस लेन-देन के लिए एक एग्रीमेंट हुआ है।

RHI Magnesita India

आरएचआई मैग्नेसाइटा इंडिया के बोर्ड ने पंकज मल्हान को 1 जुलाई, 2026 से कंपनी का एमडी और सीईओ बनाने का ऐलान किया है। बोर्ड ने यह भी ऐलान किया है कि कंपनी के चेयरमैन, एमडी और सीईओ प्रमोद सागर चेयरमैन बने रहेंगे।

SRF

एसआरएफ के शेयरहोल्डर्स ने सालाना आम बैठक में कार्तिक भरत राम को 1 जून, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक के अगले कार्यकाल के लिए जॉइंट एमडी के तौर पर फिर से नियुक्त करने को मंजूरी दी।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Genus Power Infrastructures

जीआईसी ग्रुप की सहयोगी कंपनी चिस्विक इन्वेस्टमेंट ने तीन ट्रांजैक्शन के जरिए जीनस पावर के कुल 3.35 करोड़ इक्विटी शेयर (11.03% हिस्सेदारी) बेचे। इनमें से 89.28 लाख शेयर ₹282.15 के भाव, 1.42 करोड़ शेयर ₹282.58 के भाव और 1.03 करोड़ शेयर ₹290 के भाव पर बिके। मार्च 2026 तक इसकी कंपनी में 15.11% हिस्सेदारी थी।

इनमें से बॉयंट अपॉर्चुनिटीज स्ट्रैटेजी और आकाश माणिक भंसाली की कंपनी प्रॉफिटेक्स शेयर्स एंड सिक्योरिटीज ने लगभग ₹130 करोड़ में 44.82-44.82 लाख शेयर खरीदे, जो जीनस पावर में 1.47% हिस्सेदारी के बराबर हैं। जाने-माने निवेशक मधु केला की पत्नी माधुरी मधुसूदन केला ने ₹40 करोड़ में 13.79 लाख शेयर (0.45% हिस्सेदारी खरीदे। इन तीनों ने शेयर प्रति शेयर ₹290 के भाव पर खरीदारी की। इनके अलावा मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने प्रति शेयर ₹283.68 के औसत भाव पर ₹40.76 करोड़ में 14.37 लाख शेयर, इरेज ब्रोकिंग सर्विसेज ने ₹286.83 के भाव पर ₹91.48 करोड़ में 31.89 लाख शेयर, D3 स्टॉक विजन ने ₹281.66 के भाव पर ₹44.5 करोड़ में 15.8 लाख शेयर खरीदे।

Indo Tech Transformers

प्रमोटर शिर्डी साई इलेक्ट्रिकल्स ने इंडो टेक ट्रांसफॉर्मर्स के प्रति शेयर ₹3,231.23 के भाव पर 68,048 शेयर और ₹3,215.39 के भाव पर 1.31 लाख शेयर बेचे। कुल मिलाकर 1.88% हिस्सेदारी के बराबर शेयरों ₹66.41 करोड़ में बिक्री हुई। सोमवार को भी प्रमोटर ने इंडो टेक ट्रांसफॉर्मर्स में 1.88% हिस्सेदारी बेची थी।

Ivalue Infosolutions

360 वन पाइप फंड ने आईवैल्यू इन्फोसोल्यूशन्स के 19.23 लाख शेयर (3.52% हिस्सेदारी) ₹260 प्रति शेयर के भाव पर ₹50 करोड़ में खरीदे। इसके अलावा जाने-माने इन्वेस्टर आशीष कचोलिया की इन्वेस्टमेंट फर्म बंगाल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट ने प्रति शेयर ₹262.13 के भाव पर आईवैल्यू के 3 लाख शेयर ₹7.86 करोड़ में और खरीदे। वहीं साउथ और साउथ-ईस्ट एशिया पर फोकस करने वाली प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रीडोर की सहयोगी कंपनी सुंडरा (मॉरिशस) ने मंगलवार को आईवैल्यू से एग्जिट किया। उसने अपने सभी 56.98 लाख शेयर (10.43% हिस्सेदारी) ₹260.2 के भाव पर ₹148.27 करोड़ में बेच दिए।

Krishna Defence and Allied Industries

प्रमोटर्स पल्लवी अश्विन शाह, अंकुर अश्विन शाह और प्रेयल अंकुर शाह ने कृष्णा डिफेंस के 7 लाख शेयर (4.68% हिस्सेदारी) ₹84.21 करोड़ में बेच दिए। वहीं 360 वन पाइप फंड ने 4.41 लाख शेयर (2.95% हिस्सेदारी) ₹1,203.47 के भाव पर ₹53.15 करोड़ में खरीदे हैं।

Filatex Fashions

प्रमोटर प्रभात सेठिया ने फिलाटेक्स फैशन्स के 7.2 करोड़ शेयर (0.86% हिस्सेदारी) 1.29 करोड़ में प्रति शेयर ₹0.18 के भाव पर बेच दिए। 21 मई, 2026 तक कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 4.85% थी।

Shankara Building Products

प्रमोटर एंटिटी द बालीगंज फैमिली ट्रस्ट ने शंकर बिल्डिंग प्रोडक्ट्स में 4.13% हिस्सेदारी वाले अतिरिक्त 10.02 लाख शेयर ₹12.75 करोड़ रुपये में प्रति शेयर ₹127.25 के भाव पर खरीदे हैं।

Axiscades Technologies

प्रमोटर जुपिटर कैपिटल ने एक्सिसकेड्स टेक्नोलॉजीज के 10 लाख शेयर (2.35% हिस्सेदारी) ₹166.77 करोड़ में प्रति शेयर ₹1,667.76 के भाव पर बेचे।

Prozone Realty

प्रमोटर एंटिटी एपैक्स ट्रस्ट ने प्रोजोन रियल्टी के 13.02 लाख शेयर (0.85% हिस्सेदारी) ₹5.8 करोड़ में प्रति शेयर ₹44.67 के भाव पर और खरीदा है।

Energy Infrastructure Trust

ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट मैनेजर ब्रुकफील्ड कॉर्पोरेशन की सब्सिडियरी रैपिड होल्डिंग्स 2 ने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट की 3.97 करोड़ यूनिट ₹302.13 करोड़ में प्रति यूनिट ₹76.01 के भाव पर बेच दी। इनमें से नियो रियल एसेट यील्ड फंड 39.25 लाख यूनिट ₹29.83 करोड़ में, HDFC सिक्योरिटीज ने 1.31 करोड़ यूनिट ₹99.94 करोड़ में और अरवेस्टा फाइनेंशियल सर्विसेज ने 33 लाख यूनिट ₹25.08 करोड़ में प्रति यूनिट ₹76 के भाव पर खरीदे हैं।

लिस्टिंग

अद्वित ज्वेल्स और वाटरवेज लेजर टूरिज्म के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर आज एंट्री होगी। वहीं श्रीधर स्पिनर्स के शेयरों की एनएसई एसएमई तो जिविल इंडस्ट्रीज और रियासत लाइफस्टाइल की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

आज डीसीएम श्रीराम केमिकल्स और ग्रोवी इंडिया के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी:रुपए-येन में लेनदेन होगा, PM मोदी-ताकाइची बैठक में हो सकता है ऐलान

भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी:रुपए-येन में लेनदेन होगा, PM मोदी-ताकाइची बैठक में हो सकता है ऐलान

भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली। पूरी खबर यहां पढ़ें…