Bhumi Pednekar: ‘आज हमारे… लिए एक बहुत बड़ा पल है’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भूमि पेडनेकर ने शेयर किया नोट

Bhumi Pednekar: एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा और कहा कि यह पल एक मज़बूत और निष्पक्ष भारत की शुरुआत का प्रतीक है। एक्ट्रेस ने यह उम्मीद भी जताई कि यह अहम पल कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की दिशा में एक सार्थक बदलाव लाएगा।

उन्होंने लिखा, “उम्मीद है कि इससे हमारा भारत और मज़बूत और बेहतर बनेगा। आज हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत अहम पल है। ऐसे नागरिक जिन्होंने हार नहीं मानी और ऐसी लीडरशिप जिसने उनकी बात सुनी। युवाओं ने अपनी बात रखी; उनका पक्का इरादा, उनकी हिम्मत और बदलाव की ताकत में उनका भरोसा वाकई प्रेरणा देने वाला था।”

उन्होंने आगे कहा, “उस मंच पर बहुत कुछ कहा गया, लेकिन आखिर में वही आवाज़ गूंजी जो छात्र सही मायने में चाहते थे। मेरे लिए, जवाबदेही का मतलब है असल और समाधान-केंद्रित बदलाव लाना। कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करना। ऐसा असली सुधार जो सच में हमारे छात्रों के भविष्य की चर्चा पर असर डाले। मुझे लगता है कि हर भारतीय के लिए—चाहे आप किसी सरकारी पद पर हों या आम नागरिक—देश, उसकी खुशहाली, उसके लोग और उसकी सुरक्षा हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए। जय हिंद।”

राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच हफ़्तों तक चले बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शनों और लगातार जन-आंदोलन के बाद, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया। छात्र परीक्षा में गड़बड़ियों, खासकर NEET-UG पेपर लीक को लेकर उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। उनका इस्तीफ़ा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बाद आया है।

पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और नाराज़ नागरिक बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर छात्रों का समर्थन करने के लिए उमड़ पड़े।

ये विरोध-प्रदर्शन दिल्ली से पहले मेट्रो शहरों और फिर छोटे कस्बों तक फैल गए। 18 जुलाई की सुबह, सोनम वांगचुक को 21 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी करने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से दिल्ली पुलिस द्वारा ज़बरदस्ती हटाए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन और तेज़ हो गए।

अधिकारियों ने उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरी सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं।

Dharmendra Pradhan Resigns: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर रणवीर शौरी ने उठाए सवाल, बोले- सपोटर्स की न सुनके सड़क पर मौजूद कॉकरोच…

Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।

अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।

जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”

हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।

फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।

Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव 14 दिन के लिए भेजे गए पटना के बेऊर जेल, NEET प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप

Tej Pratap Yadav: जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को ‘बिहार बंद’ के दौरान हुई तोड़-फोड़ और आगजनी के मामले में गिरफ्तारी के बाद पटना की एक अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया है। शनिवार देर रात बिहार पुलिस ने तेज प्रताप यादव को एक मॉल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस ने तेज प्रताप यादव को नीट पेपर लीक के खिलाफ शनिवार को ‘बिहार बंद’ के दौरान पटना में प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होने पर गिरफ्तार किया। यादव पटना के रामगुलाम चौक पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए, जिसके कुछ देर बाद ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वाहन में बैठा लिया। पुलिस द्वारा ले जाए जाने से पहले वाहन का दरवाजा पकड़े यादव ने कहा, “हम छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। जरूरत पड़ी तो मैं छात्रों के अधिकारों के लिए अपनी जान देने को भी तैयार हूं।”

यादव ने प्रदर्शन में शामिल होकर बंद को अपना समर्थन दिया था। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने प्रदर्शन में शामिल होने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग दोहराई।

अधिकारियों ने बताया कि नीट पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद के समर्थन में वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने शनिवार को बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई।

पुलिस ने बताया कि बंद का राज्यभर में मिलाजुला असर रहा। पटना में पथराव की घटनाएं हुईं। जबकि नालंदा, नवादा, जहानाबाद और रोहतास में बंद का बहुत कम असर देखने को मिला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प और पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। जब तेज प्रताप छात्रों के साथ रामगुलाम चौक से डाक बंगला चौराहे की ओर मार्च करने लगे, तो एग्जिबिशन रोड के पास पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

वकील ने क्या बताया?

तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह ने कहा, “FIR 26 तारीख को दर्ज की गई थी। जबकि गिरफ्तारी 25 तारीख को शाम 7:30 बजे सिटी सेंटर मॉल से हुई थी। मैंने अभी उनकी रिहाई के लिए जज के पास एक अर्जी दी है। उन्होंने मुझसे सोमवार को जमानत की मांग पर कार्रवाई करने को कहा।”

रविवार सुबह ANI से बातचीत में वकील ने आगे कहा, “मैं सुबह 10:30 बजे नौबतपुर पुलिस स्टेशन पहुंचा। वहां 2 SP थे… मैंने उनसे उनकी गिरफ्तारी का कारण पूछा। उनके परिवार वालों को यह भी नहीं पता कि वे शाम 7:30 बजे से हिरासत में थे… हमें अभी तक FIR की कॉपी भी नहीं मिली है।”

वहीं, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर JJD की बांकीपुर उपचुनाव उम्मीदवार वीणा मानवी ने कहा, “मैं कुछ नहीं कहना चाहती। 13 तारीख से हमें परेशान किया जा रहा है। पहले उन्होंने (पुलिस) मुझे नामांकन के दिन उठाया। फिर आज उन्हें उठा लिया। ऐसा लगता है कि पूरा बांकीपुर जिला अब जनशक्ति जनता दल पर निर्भर है।”

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उन्होंने आगे कहा, “अगर हम थोड़ा विरोध करते हैं तो क्या गलत है? उन्होंने क्या अपराध किया? अगर बच्चों के बीच एक बार राष्ट्रीय ध्वज दिखाया गया, तो क्या वह अपराध था? और अगर आपकी नज़र में यह अपराध था भी, तो उन्हें उसी समय वहां से ले जाना चाहिए था। लेकिन उन्हें तब उठाने का क्या मतलब है जब वे शाम को परिवार के साथ समय बिता रहे थे, खरीदारी करने जा रहे थे? मुझे भी इसके पीछे का कारण नहीं पता…।”

Dharmendra Pradhan Resigns: किसी विवाद के कारण इस्तीफा देने वाले मोदी सरकार के दूसरे मंत्री हैं धर्मेंद्र प्रधान, पहले कौन थे?

Dharmendra Pradhan Resigns: दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा समकालीन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना है। साल 2014 से नरेंद्र मोदी सरकार के लगातार तीन कार्यकाल और 12 से अधिक वर्षों के दौरान सार्वजनिक विवादों के कारण मंत्रियों के इस्तीफे की घटनाएं बहुत कम हुई हैं। असल में प्रधान मोदी सरकार में किसी बड़े विवाद के बीच इस्तीफा देने वाले केवल दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। इससे पहले विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर थे, जिन्होंने विवाद के बाद इस्तीफा दिया था।

सार्वजनिक विवाद के केंद्र में रहते हुए किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का एकमात्र पिछला उदाहरण 17 अक्टूबर 2018 का है। वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने एम.जे. अकबर ने विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दिया था। अकबर ने #MeToo आंदोलन के दौरान लगे कथित आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया था।

वर्ष 2018 में कई महिला पत्रकारों ने एम.जे. अकबर पर उनके पत्रकारिता के दौर से जुड़े आरोप लगाए थे। बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने मंत्री पद छोड़ते हुए कहा था कि वह व्यक्तिगत क्षमता में कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।

हालांकि, शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल ने 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध करते हुए नरेंद्र मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। लेकिन वे उस विवाद का मुख्य केंद्र नहीं थीं। उनका इस्तीफा तीन कृषि कानूनों के विरोध में था। वह खुद किसी व्यक्तिगत विवाद के केंद्र में नहीं थीं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा क्यों?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा मंत्रालय पर लगातार दबाव बना। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार की जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की चिंताओं को कम करना, परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल करना और संसद के मानसून सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना है।

2014 में स्थापित मौजूदा शासन मॉडल के तहत कैबिनेट की स्थिरता और संरचनात्मक निरंतरता मुख्य स्तंभ रहे हैं। हालांकि समय-समय पर कैबिनेट में फेरबदल या प्रशासनिक बदलावों के दौरान कई मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद छोड़ी है। लेकिन बाहरी राजनीतिक दबाव या सार्वजनिक विवादों के कारण इस्तीफे की घटनाएं अपवाद ही रही हैं।

प्रशासनिक मतभेदों या पॉलिसी से जुड़ी चुनौतियों के ज्यादातर मामलों में सरकार ने तुरंत राजनीतिक इस्तीफ़े के बजाय ढांचे में बड़े बदलाव, विभागीय जांच या एजेंसी से जांच कराने को प्राथमिकता दी है। यह तरीका जल्दबाज़ी में राजनीतिक रियायतें देने के बजाय पॉलिसी को जारी रखने और संस्थागत स्थिरता को अहमियत देता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे की वजह?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए खास है क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन का सीधा जवाब है। आम राजनीतिक विवादों के उलट, NEET-UG विवाद ने देश भर के लाखों युवा उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर सीधा असर डाला।

सरकार ने दो मुख्य मकसद हासिल करने की कोशिश की!

युवाओं की चिंता कम करना: छात्रों को यह संकेत देना कि सरकार जवाबदेह है और जनता को परीक्षा की निष्पक्षता के बारे में भरोसा दिलाना।

संसद का कामकाज सुचारू बनाना: विपक्षी दलों के साथ टकराव के एक बड़े मुद्दे को खत्म करना ताकि मानसून सत्र के दौरान जरूरी कानूनों को आसानी से पास कराया जा सके।

जवाबदेही के लिए एक रणनीतिक तरीका

2018 में एम.जे. अकबर और धर्मेंद्र प्रधान दोनों का हटना मंत्रियों की जवाबदेही तय करने के एक सोचे-समझे तरीके को दिखाता है। दोनों ही मामलों में बड़े नेताओं के इस्तीफे का इस्तेमाल रणनीतिक कदम के तौर पर किया गया ताकि संस्थागत गतिरोध को दूर किया जा सके। साथ ही जनता के तनाव को कम किया जा सके और प्रशासन अपने मुख्य गवर्नेंस एजेंडे पर आगे बढ़ सके।

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NEET विवाद के बीच प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, पदभार संभालते ही कही बड़ी बात

छात्रों के विरोध प्रदर्शन और नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के  इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वह 'पूर्ण विनम्रता और कर्तव्य भावना' के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। पदभार संभालने के बाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन पर भरोसा जताते हुए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि वह उनके मार्गदर्शन में पूरी ईमानदारी से काम करेंगे तथा शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

 

63 वर्षीय प्रह्लाद जोशी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले चार से पांच वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

जोशी ने कहा, “पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और शिक्षा क्षेत्र में कई अहम पहल की गईं। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत देश ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।”

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वह अपनी पूरी क्षमता और समर्पण के साथ नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों—उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय—का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।

 

धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्रों के हित और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आंदोलन का दुरुपयोग “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न कर सकें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है।

 

प्रधान ने अपने पत्र में कहा, “जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो स्थिति बनी है, उसका फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतों को नहीं उठाने दिया जाना चाहिए। देश की एकता बनी रहनी चाहिए और भारत के प्रत्येक छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में नहीं फंसना चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है।”

 

उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों व आयोजकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के आश्वासन के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा 49 दिनों का आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।

 

यह फैसला सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच हुई तीन दौर की वार्ता के बाद लिया गया। इन बैठकों में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी शामिल रहे। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त किया है और उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत शर्तों को लागू किया जाएगा।

LPG Cylinder Price Today: एलपीजी गैस को लेकर आया बड़ा अपडेट! घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमत जारी, जानिए पूरी लिस्ट

LPG Cylinder Price Today: घरेलू रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए राहत और कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। 26 जुलाई 2026 को 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जबकि इस महीने की शुरुआत में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 तक की कटौती की गई थी। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है।

दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 पर स्थिर बनी हुई है। वहीं, 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब ₹2,930 में मिल रहा है। ये पिछले महीने 3,113.50 रुपये में मिल रहा था। पिछले 12 महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमत में कुल ₹89 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि मार्च 2026 में एक बार में ₹60 की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। दूसरी ओर, कमर्शियल सिलेंडर में मई 2026 में रिकॉर्ड ₹993 की बढ़ोतरी हुई थी। लेकिन जुलाई में इसमें ₹183.50 की राहत दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू LPG की कीमतों को स्थिर रखकर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। जबकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम घटने से खाद्य एवं आतिथ्य उद्योग की लागत में कमी आएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बड़ी उथल-पुथल नहीं होती है, तो अगले कुछ समय तक घरेलू LPG की कीमतों में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

कीमतों में अब कब होगा बदलाव?

भारत में LPG सिलेंडर की कीमतों में आमतौर पर हर महीने की 1 तारीख को बदलाव किया जाता है। सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL और HPCL) अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों, कच्चे तेल के भाव, डॉलर-रुपये की कीमत और अन्य लागतों की समीक्षा के बाद नई दरें जारी करती हैं।

हालांकि, हर महीने कीमत बदलना जरूरी नहीं होता। कई बार लगातार कई महीनों तक घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर रहते हैं। जबकि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ज्यादा बार बदलाव देखने को मिलता है। हाल ही में 1 जुलाई 2026 को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत ₹183.50 घटाई गई थी। जबकि 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया।

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भारत में एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें राज्य और स्थानीय टैक्स (VAT) के कारण अलग-अलग शहरों में भिन्न होती हैं। तेल कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दामों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य के आधार पर हर महीने एलपीजी सिलेंडर की दरें संशोधित करती हैं। प्रमुख शहरों में रसोई गैस (14.2 किग्रा घरेलू सिलेंडर) और कमर्शियल गैस (19 किग्रा सिलेंडर) के आज के नवीनतम रेट इस प्रकार हैं:-

देश के प्रमुख शहरों में LPG के ताजा रेट (14.2 किग्रा/19 किग्रा)

घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)

नई दिल्ली: ₹942.00

मुंबई: ₹941.50

कोलकाता: ₹968.00

चेन्नई: ₹957.50

लखनऊ: ₹979.50

पटना: ₹1,031.50

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम)

नई दिल्ली: ₹2,930.00

मुंबई: ₹2,885.50

कोलकाता: ₹3,081.50

चेन्नई: ₹3,106.00

लखनऊ: ₹3,052.50

पटना: ₹3,227.00

Pralhad Joshi: शिक्षा मंत्री बनने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, धर्मेंद्र प्रधान के बारे में क्या कहा?

Pralhad Joshi: नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार (25 जुलाई) को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं इसे अपनी पूरी क्षमता से निभाऊंगा।

प्रह्लाद जोशी ने पत्रकारों से कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”

इससे पहले, देशभर में कॉजपा के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।

आंदोलनकारी छात्रों की नए शिक्षा मंत्री से तीन बड़ी मांगें

नीट पेपर लीक को लेकर करीब एक महीने तक जंतर-मंतर पर डटे रहने वाले छात्रों का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनकी एक बड़ी मांग पूरी हुई है। वह उम्मीद कर रहे हैं कि नए शिक्षा मंत्री व्यवस्था में कुछ ठोस बदलाव करेंगे।

प्रधान के इस्तीफे के बाद अपनी मांग पूरी होने का जश्न मना रहे छात्रों से जब पीटीआई ने सवाल किया कि नए शिक्षा मंत्री से उनकी क्या उम्मीदें है तो अलग-अलग राज्यों से आए प्रदर्शनकारियों की बातों में तीन मांगें बार-बार सामने आईं और वह थीं- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सरकारी स्कूलों एवं प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना।

पिछले करीब एक महीने यानी आंदोलन की शुरुआत से ही धरने में शामिल गाजियाबाद के राज यादव ने कहा कि सरकार को सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना चाहिए। धरना स्थल पर मौजूद छात्रों की अलग-अलग आवाजों में भले ही शब्द अलग थे। लेकिन उनकी अपेक्षाएं लगभग एक जैसी रहीं।

‘शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है’

उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री का बदलना केवल शुरुआत है। असली बदलाव तब माना जाएगा, जब शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी होगी। सरकारी स्कूल में बेहतर शिक्षा दी जाएगी। योग्य शिक्षक उपलब्ध होंगे और मेहनत करने वाले छात्रों को पेपर लीक तथा महंगी शिक्षा जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

दिल्ली के लक्ष्मी नगर की रहने वाली सृष्टि का कहना है कि महंगी शिक्षा ने पढ़ाई को कई छात्रों के लिए संघर्ष बना दिया है। उन्होंने बताया कि अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें खुद काम करना पड़ता है और ऐसे में अगर पेपर लीक हो जाए तो केवल परीक्षा ही नहीं। बल्कि मेहनत, समय और पैसे..तीनों पर पानी फिर जाता है।

सृष्टि ने नए शिक्षा मंत्री से मांग की कि सभी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नियुक्त किए जाएं। शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जाए और सरकारी स्कूलों में बच्चों के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएं। करीब 15 से 20 दिनों से प्रदर्शन में शामिल राजस्थान के विक्रम चौधरी का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत प्राथमिक विद्यालयों से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने, शिक्षा का बजट बढ़ाने और यूपीएससी, नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकारी स्तर पर बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है। नीट की तैयारी कर रहे 11वीं कक्षा के छात्र शौर्य ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से उनकी उम्मीद जगी है।

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प्रदर्शन में 20 जुलाई से शामिल उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी गौरव तोमर ने प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने, सरकारी स्कूलों में कौशल विकास को बढ़ावा देने और महंगी शिक्षा पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की। राजस्थान के जैसलमेर निवासी श्रवण कुमार ने कहा कि छात्रों को बार-बार पुनर्परीक्षा की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े। दूर-दराज में परीक्षा केंद्र आवंटित करने जैसी समस्याओं का समाधान किया जाए।

तेज प्रताप यादव को पटना पुलिस ने हिरासत में लिया, जानिए क्यों पुलिस में उठाया ये बड़ा कदम

बिहार की राजधानी पटना में हुए 25 जुलाई को हुए छात्रों के प्रदर्शन में जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। तेज प्रताप यादव को राजधानी पटना के सिटी सेंट्रल मॉल से पुलिस ने गिरफ्तार किया और फिर वहीं से उन्हें अपने साथ ले गई।

पटना से लिया गया हिरासत में 

PTI आई की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी पटना में कथित नीट पेपर लीक के विरोध में ‘बिहार बंद’ के दौरान प्रदर्शन किया जा रहा था। इसी बीच पुलिस ने तेज प्रताप यादव को शहर के एक शॉपिंग मॉल से हिरासत में लिया। सिटी एसपी के नेतृत्व में पुलिस टीम उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच सरकारी वाहन से अपने साथ ले गई।

पुलिस ने नहीं दी कोई जानकारी 

हालांकि, पटना पुलिस ने तेज प्रताप यादव को हिरासत में लेने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले दिन में तेज प्रताप गांधी मैदान के पास राम गुलाम चौक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी कथित नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। इस दौरान भी पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया था।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कही थी ये बात

इससे पहले  धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद छोड़ देना चाहिए था। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “बीजेपी दफ्तर में मिठाइयां बांटी जानी चाहिए। यह इस्तीफा काफी पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन सिर्फ इस्तीफे से युवाओं की समस्याएं खत्म नहीं होंगी।”

तेज प्रताप यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से अलग होने के बाद अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कॉकरोच पीपल्स पार्टी (सीपीपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके से बिहार आने की अपील की। उन्होंने लिखा, “मैं अभिजीत दीपके से विशेष अनुरोध करता हूं कि वे जल्द से जल्द बिहार आएं।” यह अपील ऐसे समय में आई, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली में चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान किया।

कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी? जानिए उनकी पढ़ाई और पूरा राजनीतिक सफर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे कई बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

कितने पढ़े लिखे हैं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की पढ़ाई की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बल्ली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि प्रह्लाद जोशी ने कला (आर्ट्स) विषय से पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक जीवन और संसदीय कामकाज का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब केंद्र सरकार कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है।

इस कॉलेज से की है पढ़ाई

प्रह्लाद जोशी ने अपनी स्कूली शिक्षा कर्नाटक के हुब्बल्ली में पूरी की। इसके बाद उन्होंने के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और यहां से कई प्रमुख राजनेता, अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पढ़ाई कर चुके हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2004 से हैं लगातार सांसद

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब तक पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया है और केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जब कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में है। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग उठाई। छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने उनकी कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर सख्ती बढ़ाने के लिए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ संसद में लाने की तैयारी भी की जा रही है।

Dharmendra Pradhan: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। बता दें कि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने फैसला किया है कि प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वह अभी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे बड़े छात्र आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का लगातार हो रहे सड़क विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ना बेहद कम देखने को मिलता है।

प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। बैठक से पहले सीजेपी नेताओं ने साफ कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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