पिता असम सरकार में मंत्री…बेटी छात्र प्रदर्शन में हुई शामिल, अब CM हिमंता सरमा ने कही ये बात

नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री केशव महंत की बेटी के शामिल होने के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान सामने आया है। मुख्‍यमंत्री ने कहा, ”हो सकता है वो (कैब‍िनेट मंत्री की बेटी) अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा को न मानती हों, इसके ल‍िए मेरे कैबिनेट सहयोगी को ट्रोल नहीं किया जाना चाहिएय़” बता दें कि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया गया कि दिबिसा महंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रही हैं और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  की ये अपील

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से अपील की कि मंत्री केशव महंता को उनकी बेटी के राजनीतिक विचारों के लिए निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति की अपनी अलग सोच और राय हो सकती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके पिता पर हमला करना या उन्हें ट्रोल करना सही है। हो सकता है कि उनकी बेटी की राजनीतिक सोच अपने पिता से अलग हो।” अपना उदाहरण देते हुए हिमंत सरमा ने कहा, “कल जब मेरा बेटा वकील बनेगा, तो हो सकता है कि वह ऐसे किसी व्यक्ति का पक्ष रखे जिसे मैं पसंद नहीं करता। इसका मतलब यह नहीं कि उसके फैसलों के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया जाए।”

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी भी माता-पिता को उनके बालिग बेटे या बेटी के राजनीतिक विचारों और उनके फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह प्रदर्शन के दौरान दिबिसा महंता की ओर से लगाए गए कथित नारों से सहमत नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “जब अगली बार मेरी उनसे मुलाकात होगी, तो मैं इस मुद्दे पर उनसे जरूर बात करूंगा और समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो बातें कही थीं, वे सही नहीं थीं।”

गुवाहाटी में भी हुआ था प्रदर्शन

गुवाहाटी में यह प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में पारदर्शिता की मांग के साथ तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई थी।इस पूरे विवाद पर मंत्री केशव महंता की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उधर, कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कई प्रमुख मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 37 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी।

Pralhad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री क्यों बनाया गया? माने जाते हैं मोदी सरकार के भरोसेमंद संकटमोचक

Pralhad Joshi: केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने की चर्चाओं के बीच उनकी प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक अनुभव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मोदी सरकार में उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से संभाली हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। अब उनके सामने देश की परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लंबित सुधारों को गति देने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। संसद में विभिन्न दलों के बीच समन्वय बनाने, विधेयकों को आगे बढ़ाने और जटिल राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने के कारण उन्हें सरकार का अनुभवी रणनीतिकार माना जाता है।

शिक्षा मंत्रालय के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

शिक्षा मंत्रालय का दायित्व मिलने के बाद जोशी की सबसे पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना होगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।

इसके अलावा परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने, नए कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और छात्रों के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में भी तेजी से काम करना होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर रहेगा फोकस

संकट प्रबंधन के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न प्रावधानों को लागू करना, उच्च शिक्षा में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जाएगा। सरकार की कोशिश होगी कि शिक्षा मंत्रालय की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया और दीर्घकालिक सुधार योजनाओं पर किसी तरह का असर न पड़े और छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले समय पर लिए जाएं।

नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है। धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार 25 जुलाई को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री भी हैं।

‘विनम्रता के साथ जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं’

प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने दायित्व और विनम्रता की भावना के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार की है। शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। जोशी को उपभोक्ता मामलों के मंत्री की अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी है। मैं इस जिम्मेदारी को कर्तव्य भावना और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है…प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगा।”

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इससे पहले, देशभर में CJP के नेतृत्व में नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। पिछले 10 दिनों में सामने आई घटनाओं को देखकर वह परेशान हैं।

Raveena Tandon:’कुछ लोग तो वहां रील्स बनाने आए थे…’, रवीना टंडन बोलीं उपद्रवियों और राजनीतिक पार्टियों ने छात्र विरोध प्रदर्शनों को किया था हाईजैक

Raveena Tandon: एक्ट्रेस रवीना टंडन ने देश भर में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी राय शेयर की है। उन्होंने मिजोरम में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की तारीफ की, लेकिन साथ ही चिंता भी जताई कि दूसरी जगहों पर ऐसे आंदोलनों पर उन लोगों का कब्ज़ा हो गया जिनके अपने राजनीतिक मकसद थे या जो पब्लिसिटी चाहते थे। उनका यह पोस्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के एक दिन बाद आया है। प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हफ़्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दिया था।

इंस्टाग्राम पर रवीना ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि आख़िरकार स्टूडेंट्स की आवाज सुनी जा रही है और ये विरोध प्रदर्शन देश की शिक्षा व्यवस्था में सार्थक बदलाव ला सकते हैं। रवीना ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट (छात्रों के विरोध प्रदर्शन) ने उन्हें उम्मीद दी है।

उन्होंने लिखा, “खुशी और गर्व है कि आखिरकार लोगों की आवाज़ सुनी जा रही है (#studentsprotest #Rishikeshprotest) और उम्मीद जगी है। अब तक पर्यावरण, कम्युनिटी के जानवरों, वाइल्डलाइफ और पेड़ों की कटाई के खिलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे थे और नाकाम हो रहे थे। लोग जागरूक हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों को यह समझना होगा कि हमारे पास यही एक ग्रह है। कोई ‘प्लैनेट B’ नहीं है। बस यही है। उनके भविष्य के लिए हमें इसी को बचाना है।”

इसके बाद रवीना ने मिज़ोरम के छात्रों के प्रदर्शन करने के तरीके की तारीफ़ की। एक्ट्रेस ने कहा कि मिज़ोरम और दूसरे राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने एक मिसाल कायम की है। उन्हें सलाम। अफ़सोस की बात है कि कुछ राज्यों में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को गुंडों और राजनीतिक पार्टियों ने हाईजैक कर लिया, और कुछ लोग तो बस रील्स बनाने और लाइमलाइट पाने के मौके की तलाश में वहाँ मौजूद थे। आख़िरकार, यह जायज़ मांगों की जीत थी।”

एक्ट्रेस ने हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की भी निंदा की और कहा कि ऐसी हरकतें छात्रों के आंदोलन का हिस्सा नहीं थीं। “हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पीछे निश्चित रूप से उपद्रवी तत्व थे। वे गैर-छात्र इस विरोध प्रदर्शन को पटरी से उतार सकते थे। फिर भी, इसके बाद मैं हमारी शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और प्रार्थना कर रही हूं, जिसमें हमारे सरकारी स्कूलों से भी भ्रष्टाचार खत्म हो। सभी के लिए शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो। मैं अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रही हूँ। आपकी राय अलग हो सकती है, लेकिन मैं उसका भी सम्मान करती हूँ। जब पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया। जय हिंद। जय, हिंद की जनता-अवाम #indiafirst।”

NEET-UG 2026 परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। दिल्ली के जंतर-मंतर और कई अन्य राज्यों में हज़ारों छात्र जमा हुए और उन्होंने जवाबदेही, परीक्षा में सुधार और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की। इन विरोध प्रदर्शनों का नतीजा 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के रूप में सामने आया।

Vijay Varma: क्या विजय वर्मा ने आरक्षण और विशेषाधिकार के बारे में पोस्ट किया था शेयर? वायरल स्क्रीनशॉट पर एक्टर ने तोड़ी चुप्पी

Vijay Varma: कई दिनों से सोशल मीडिया पर विजय वर्मा की इंस्टाग्राम स्टोरी का एक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में एक्टर आरक्षण और विशेषाधिकार पर अपनी राय रखते हुए दिखे, जिससे अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इस पर काफी चर्चा और बहस छिड़ गई। जैसे-जैसे यह स्क्रीनशॉट और ज़्यादा चर्चा में आ रहा है, विजय ने अब इस वायरल दावे पर अपनी बात रखी है।

जैसे ही सोशल मीडिया पर यह स्क्रीनशॉट फैला, कई लोगों ने इसे असली मान लिया और इसमें कही गई बातें विजय की बताईं। इस पोस्ट से ऑनलाइन चर्चा तेज़ हो गई। लेकिन, जैसे-जैसे अटकलें बढ़ीं, विजय ने शनिवार को X (जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) पर आकर इस वायरल दावे पर सफाई दी।

उन्होंने वायरल स्क्रीनशॉट को रीपोस्ट करते हुए लिखा, “मैंने कभी ऐसा पोस्ट नहीं किया। यह सब झूठ है।” एक्टर ने फिर से स्क्रीनशॉट रीपोस्ट किया और अपनी बात दोहराते हुए कहा, “मैंने कभी ऐसा पोस्ट नहीं किया। यह मेरी कहानी नहीं है।”

विजय के नाम से जुड़े वायरल स्क्रीनशॉट में लिखा था, “मेरे जन्म के समय मेरे पिता ने मारुति 800 खरीदी थी। जब मैं 12वीं क्लास में पहुँचा, तो उन्होंने मेरे लिए होंडा सिविक खरीदी। मैं उसी कार से कोचिंग जाता था, जबकि मेरा सबसे अच्छा दोस्त, जो मारवाड़ी परिवार से था, तब भी 12 साल पुरानी हीरो होंडा चलाता था। हमने एक सरकारी परीक्षा दी। उसके अच्छे नंबर आए लेकिन उसे सीट नहीं मिली। रिज़ल्ट वाले दिन वह रोते हुए अपनी बाइक से घर लौटा, जबकि मैं ठीक था। मुझे रिज़र्वेशन की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन उसे थी। यह उसका अधिकार था। अगर वह नहीं, तो कम से कम उसे बराबरी का मौका तो मिलना ही चाहिए था।”

इस बीच, विजय ने कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हो रहे छात्र विरोध-प्रदर्शनों के लिए अपना समर्थन खुलकर ज़ाहिर किया है। उन्होंने छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर भी प्रतिक्रिया दी। इस घोषणा के बाद एक्टर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने फ़िल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ के गाने ‘चन्ना मेरेया’ की एक लाइन का इस्तेमाल किया।

फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (FTII) से ग्रेजुएट विजय ने ‘पिंक’, ‘राग देश’, ‘मंटो’ और ‘मिडल क्लास अब्बायि’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए थे। इसके बाद उन्हें जोया अख्तर की ‘गली बॉय’ में एक छोटा लेकिन चर्चा में रहने वाला रोल मिला, जिससे उन्हें पहचान मिली। पिछले कुछ सालों में, विजय ने ‘डार्लिंग्स’, ‘दहाड़’ और ‘मिर्ज़ापुर’ जैसी फिल्मों और शो में अपने काम के लिए काफी तारीफें बटोरी हैं।

उन्हें आखिरी बार ‘मटका किंग’ में देखा गया था। 1960 के दशक के मुंबई पर आधारित ‘मटका किंग’ का पहला सीज़न एक महत्वाकांक्षी कॉटन व्यापारी की कहानी है, जो सम्मान और पहचान पाने का सपना देखता है। वह ‘मटका’ नाम का एक नया जुए का खेल शुरू करता है, जो जल्द ही पूरे शहर में छा जाता है और एक ऐसे बिज़नेस को बदल देता है जो पहले सिर्फ अमीर और प्रभावशाली लोगों तक ही सीमित था। इस शो को क्रिटिक्स और दर्शकों, दोनों से ही अच्छे रिव्यू मिले। विजय वर्मा के अलावा, इस सीरीज़ में कृतिका कामरा, साई ताम्हणकर, सिद्धार्थ जाधव, भूपेंद्र जदावत और गुलशन ग्रोवर ने भी अहम भूमिकाएँ निभाईं। इस साल की शुरुआत में, ‘मटका किंग’ सीज़न 1 को मिले ज़बरदस्त रिस्पॉन्स के बाद प्राइम वीडियो ने आधिकारिक तौर पर इस शो को दूसरे सीज़न के लिए रिन्यू किया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद क्या होगा CJP का अगला कदम? कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद किया खुलासा

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) फिलहाल खुद को एक राजनीतिक पार्टी के बजाय युवाओं के आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। संगठन ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह भविष्य में पूरी तरह चुनावी राजनीति में उतरेगा या नहीं। 37 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के खत्म होने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समय संगठन का मुख्य लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता देशभर में संगठन का विस्तार करना, ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं तक पहुंचना और जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

क्या होगा सीजेपी का अगला कदम?

सौरव दास ने कहा कि संगठन का लक्ष्य अभी पूरी तरह साफ है। उनकी प्राथमिकता आंदोलन को देश के हर हिस्से और गांव-शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए संगठन पूरे भारत में दौरा करेगा और युवाओं से सीधे बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि हाल के अनुभवों से यह पता चला है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में हमें महसूस हुआ कि बहुत से लोगों के पास अपनी समस्याएं और बातें रखने के लिए कोई मंच नहीं है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की बात सुनेंगे और उनसे जुड़ेंगे।”

सौरव दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चर्चा हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर संगठन के लंबे आंदोलन ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य

सौरव दास ने कहा कि संगठन का लक्ष्य अभी पूरी तरह साफ है। उनकी प्राथमिकता आंदोलन को देश के हर हिस्से और गांव-शहर तक पहुंचाना है। इसके लिए संगठन पूरे भारत में दौरा करेगा और युवाओं से सीधे बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि हाल के अनुभवों से यह पता चला है कि युवाओं और सरकार के बीच संवाद की बड़ी कमी है। उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में हमें महसूस हुआ कि बहुत से लोगों के पास अपनी समस्याएं और बातें रखने के लिए कोई मंच नहीं है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर जाकर लोगों की बात सुनेंगे और उनसे जुड़ेंगे।” सौरव दास का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चर्चा हो रही है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भविष्य में चुनावी राजनीति में उतर सकती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर संगठन के लंबे आंदोलन ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

फिलहाल संगठन ने चुनाव लड़ने की कोई घोषणा नहीं की है। सौरव दास के बयान से साफ है कि अभी उनकी प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाना है। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक फैसले से पहले संगठन देशभर में अपना नेटवर्क मजबूत करेगा और लोगों की आवाज़ बनने की कोशिश जारी रखेगा।

खत्म हुआ आंदोलन

केंद्र सरकार की ओर से संगठन की कई मांगों पर विचार करने का भरोसा मिलने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया। संगठन की प्रमुख मांगों में नीट के उन अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था, जिन्होंने आत्महत्या की, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा करना भी शामिल था।

विरोध प्रदर्शन उसी दिन खत्म हुआ, जिस दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने इसे “युवाओं की बड़ी जीत” बताया।

अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद उन्हें काफी राहत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “अब मैं सुकून से सो सकता हूं और अपने घर में बिना किसी चिंता के सुबह उठ सकता हूं। अब यह सोचने की जरूरत नहीं रहती कि आगे क्या होगा या शाम तक क्या स्थिति बनेगी। मन में अब कोई घबराहट नहीं है।” उन्होंने आंदोलन का साथ देने वाले सभी समर्थकों का धन्यवाद किया। दिपके ने कहा कि कई लोगों ने आलोचनाओं के बावजूद संगठन पर भरोसा बनाए रखा और हर कदम पर उनका साथ दिया। साथ ही, उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया जिन्होंने आंदोलन और उसके अभियान पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, ऐसी आलोचना और सवालों से संगठन को अपनी कमियों को समझने और खुद को पहले से बेहतर बनाने में मदद मिली।

Dharmendra Pradhan Resigns: CJP प्रोटेस्ट के पहले दिन ही धर्मेंद्र प्रधान ने कर दी थी इस्तीफे की पेशकश! फिर किसने मना कर दिया?

Dharmendra Pradhan Resigns: मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने दावा किया है कि तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले दिन ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आलकमान के सामने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। विजयवर्गीय ने शनिवार 25 जुलाई को इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में प्रधान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें जो भी दायित्व सौंपा जाता है, वह उसे बड़ी ईमानदारी और समर्पण से निभाते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “पहले दिन से जैसे ही (छात्र) आंदोलन शुरू हुआ था, प्रधान ने पार्टी (BJP) अध्यक्ष से कहा कि अगर उन्हें ऐसा लगता है, तो वह (शिक्षा मंत्री के पद से) इस्तीफा दे देते हैं।” विजयवर्गीय के मुताबिक BJP अध्यक्ष ने उस समय प्रधान को यह कहते हुए इस्तीफा देने के लिए मना कर दिया था कि जब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वह इस्तीफा नहीं देंगे और किसी व्यक्ति से इस्तीफे की बात तक नहीं करेंगे।

BJP के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय ने कहा कि बाद में बनीं परिस्थितियों के चलते जब पार्टी ने प्रधान के इस्तीफे का निर्णय लिया, तो उन्होंने तुरंत इस्तीफा दे दिया। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “प्रधान के इस्तीफे से उन सब विदेशी ताकतों के मंसूबे खत्म हो गए जो बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह भारत में हिंसा फैलाकर अस्थिरता पैदा करना चाहती थीं। इसलिए प्रधान ने जो काम किया है, उसके लिए मैं उनको बधाई भी देता हूं।”

कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला

प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस नेताओं के जश्न मनाने पर विजयवर्गीय ने एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा कि पड़ोसी के घर में बच्चा पैदा होने पर कांग्रेस ढोलक बजा रही है। उन्होंने कहा, “छात्र आंदोलन में कांग्रेस की क्या भूमिका थी? बच्चों ने आंदोलन किया, वे (कांग्रेस) जाकर उसके पीछे खड़े हो गए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष बिल्कुल निराश हो गया है और निराशा के पल में उन्हें आशा की एक किरण कॉकरोच जनता पार्टी में दिखी।”

मंत्री ने पूछा कि क्या छात्र आंदोलन में किसी कांग्रेस नेता ने पुलिस का एक भी लट्ठ खाया है? लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दीमक का काम करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था को अंदर से खोखला कर दिया है।

इस बयान पर पलटवार करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, “मुझे राहुल गांधी की राजनीतिक विचारधारा और उनकी बुद्धि पर बहुत तरस आता है। मुझे लगता है कि उन्हें अभी जरा समझना पड़ेगा कि संघ है क्या?” उन्होंने कहा कि देश आज सही दिशा में जा रहा है और इसके पीछे संघ की मेहनत है।

प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला

नवनियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है। धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री भी हैं।

नीट पेपर लीक होने के खिलाफ देशभर में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनों के के बीच, प्रधान ने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने अपने त्यागपत्र में कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। पिछले 10 दिनों के दौरान हुई घटनाओं से वह व्यथित हैं।

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PM मोदी ने गिनाई भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की ताकत, INS महेंद्रगिरि और पिनाका रॉकेट सिस्टम को बताया बड़ी उपलब्धि, Mann Ki Baat में क्या बोले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं के साहस के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना में शामिल किए गए INS महेंद्रगिरि को भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आधुनिक युद्धपोत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है और इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

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पीएम मोदी ने कहा, “यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।” प्रधानमंत्री ने भारत में विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का भी उल्लेख किया। यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक आधुनिक और सटीक निशाना लगाने वाली आर्टिलरी रॉकेट प्रणाली है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सामूहिक मेहनत है। पिनाका LRGR-120 की मारक क्षमता 60 किलोमीटर से 120 किलोमीटर तक बताई गई है।

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'खुशा मिसाइल' परीक्षण को बताया बड़ी उपलब्धि

 

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में खुशा मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास भारत को रक्षा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

 

कारगिल विजय दिवस पर जवानों को किया याद

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़ने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस हर भारतीय के लिए गर्व का अवसर है और यह सशस्त्र बलों के अद्भुत साहस की याद दिलाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के वीर जवानों का त्याग और पराक्रम हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

उन नीट विद्यार्थियों की कहानी, जो पेपर लीक के बाद चले गए

cjp jantar mantar protest

जंतर मंतर पर चल रहे विद्यार्थियों के प्रदर्शन में शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन प्रदर्शनकारी उन 21 नीट अभ्यर्थियों का जिक्र नहीं करते थे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सुनते ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्टेज पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उस पोस्टर को सबसे पहले मंगवाया जिसमें उन नीट अभ्यर्थियों के नाम थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

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जंतर मंतर पर चल रहे विद्यार्थियों के प्रदर्शन में शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन प्रदर्शनकारी उन 21 नीट अभ्यर्थियों का जिक्र नहीं करते थे जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। हालांकि सरकार ने इस बात को नहीं कहा है लेकिन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इन बच्चों ने नीट पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या कर ली थी। रेमा बेगम भी इनमें से एक थीं। भारतीय राज्य के एक दूरदराज गांव में अपनी बीमार मां के साथ बड़ी हुई रेमा बेगम डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं, लेकिन उनकी मौत के साथ ही उनका यह सपना अधूरा रह गया।

 

कई साल की पढ़ाई और महंगी कोचिंग क्लासों के बाद, 20 साल की रेमा को विश्वास था कि उन्होंने आखिरकार एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पाने के लिए पर्याप्त मेहनत कर ली है। फिर खबर आई कि जिस मेडिकल प्रवेश परीक्षा में वे बैठी थीं, उसका प्रश्नपत्र लीक हो गया था और दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया।

 

 कुछ ही दिनों बाद, बेगम की मौत हो गई। इस घटना के बाद अपनी जान गंवाने वाले कम से कम 20 छात्रों में वे भी शामिल थीं। उनकी मौत के एक महीने बाद भी, बेगम के पिता रजऊल इस्लाम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी लाडली बेटी हिम्मत कैसे हार गई। लेकिन उनका मानना है कि दोबारा परीक्षा के ऐलान ने सब कुछ बदल दिया। न्यूज एजेंसी एएफपी को फोन पर इस्लाम ने बताया,”परीक्षा के बाद, उसे पूरा भरोसा था कि वह इसे पास कर लेगी। लेकिन जब पेपर लीक होने के कारण दोबारा परीक्षा की घोषणा हुई, तो वह बिल्कुल बदल गई और खुद में सिमट गई।”

 

उन्होंने कहा कि परिवार की कोई भी बात उसे सांत्वना नहीं दे सकी। मछली का कारोबार करने वाले इस्लाम ने अपनी बेटी की तैयारी पर काफी खर्च किया था और उसे दो साल के लिए बड़े शहरों के कोचिंग सेंटरों में भेजा था। उन्होंने कहा,”मैंने उसकी पढ़ाई पर बहुत पैसा खर्च किया था, इसलिए उसे चिंता थी कि यह सब बेकार चला जाएगा।”

 

परीक्षा की नई तारीख से कुछ दिन पहले बेगम ने आत्महत्या कर ली। उनकी मौत भारत में विद्यार्थियों पर उस दबाव को उजागर करती है, जहां किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलना आर्थिक सुरक्षा के सबसे बड़े साधनों में से एक माना जाता है।साहित्यकार और पूर्व प्रोफेसर जी। एन। देवी ने नीट का जिक्र करते हुए कहा, “इसलिए नीट परीक्षा पास करने का मतलब कई परिवारों के लिए एक खुशहाल और आरामदायक जीवन का आश्वासन है। लेकिन इन सीटों की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों की संख्या देश में मौजूद संस्थानों की तुलना में बहुत अधिक है।” इस साल भी करीब बीस लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने देश भर में लगभग 1,37,000 मेडिकल सीटों के लिए नीट की परीक्षा दी। राजस्थान में, किसान राजेश कुमार ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी और 11 लाख रुपये का कर्ज लिया ताकि उनका बेटा प्रदीप मीणा तीन साल तक कोचिंग क्लास जा सके। कुमार ने एएफपी को बताया, “मैंने खेत में रोजाना 16 घंटे तक मजदूरी की ताकि वह कोचिंग जा सके। मुझे लगा कि अगर वह डॉक्टर बन जाता है तो यह सब सार्थक होगा, और मैं अपने बुढ़ापे में एक आरामदायक जीवन जी सकूंगा। परीक्षा के बाद, मीणा को पूरा भरोसा था कि वे सफल हो गए हैं। कुमार ने याद किया कि उनके बेटे ने उन्हें गले लगाया और कहा कि अब भगवान भी मुझे डॉक्टर बनने से नहीं रोक सकते। दोबारा परीक्षा की घोषणा के एक दिन बाद, 22 साल के प्रदीप ने अपनी जान दे दी।

 

उत्तर प्रदेश में, एक और परिवार को अपने 21 साल के बेटे ऋतिक मिश्रा की मौत के बाद ऐसा ही दुख सहना पड़ा। उनके पिता अनूप कुमार मिश्रा ने परीक्षा का जिक्र करते हुए कहा, “यह उनकी तीसरी कोशिश थी और उन्होंने कहा था कि इस बार उनका पेपर अच्छा गया है।” परीक्षा लीक की खबर सामने आने के एक दिन बाद उनके बेटे की मौत हो गई।

 

उन विद्यार्थियों के लिए जिन्होंने आखिरकार दोबारा परीक्षा दी, यह अनुभव बहुत थका देने वाला था। 19 साल चैतन्य अग्रवाल ने कहा, “यह मानसिक रूप से बहुत हताश करने वाला है। आप अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और फिर आपको इसे दोबारा देने के लिए मजबूर किया जाता है।” शिक्षकों का कहना है कि इसके भावनात्मक प्रभाव को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। पूर्वी शहर कोलकाता के एक कोचिंग सेंटर के शिक्षक अभिजीत पात्रा ने कहा, “परीक्षा की तैयारी करना और उसे देना बहुत तनावपूर्ण अनुभव है, और यह सब फिर से करना आसान नहीं है। पेपर लीक इस मुश्किल अनुभव को और भी बदतर बना देता है।” 

 

 

पूर्व प्रोफेसर देवी कहते हैं कि कई परिवारों के लिए, पेपर लीक सालों के त्याग के बाद एक विश्वासघात जैसा था। उन्होंने कहा कि प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी अक्सर आर्थिक रूप से नुकसानदेह और सामाजिक रूप से थका देने वाली होती है, खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए जो महंगे निजी विश्वविद्यालयों या विदेश में पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते। देवी कहती हैं, “वे आशा के साथ तैयारी की यह यात्रा शुरू करते हैं, इसलिए जब उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है या बेच दिया गया है, तो वे ठगा हुआ महसूस करते हैं।”

 

राजधानी नई दिल्ली में विरोध स्थल से हजारों किलोमीटर दूर, बेगम का परिवार अभी भी जवाब तलाश रहा है। उनके पिता ने कहा, “मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह परीक्षाओं में अनियमितताओं को गंभीरता से ले। उन्हें समझना चाहिए कि गरीब परिवार के बच्चे के लिए बेहतर जिंदगी का सपना देखना और उसके लिए काम करना आसान नहीं होता।”

 

तमिलनाडु की 17 साल की विद्यार्थी एस अनिता ने भी नीट की परीक्षाओं के बाद आत्महत्या कर ली थी। लेकिन मौत से पहले उन्होंने नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी डाली थी कि नीट की परीक्षा ग्रामीण और राज्य शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों को अलग थलग करती है। कॉकरोच जनता पार्टी और प्रदर्शनकारियों की मांग यह भी है कि जिन स्टूडेंट्स की जान गई, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

Pakistan को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी, आतंक और धमकियों पर नहीं झुकेगा भारत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अलावा पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। द्रास में करगिल युद्ध स्मारक पर करगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि पड़ोसी देश के साथ भविष्य में कोई भी बातचीत केवल पाक कब्‍जे वाले कश्‍मीर के मुद्दे पर होगी, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे के तहत भारत का एक अभिन्न अंग है।

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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपनी राज्य नीति के हिस्से के रूप में आतंकवाद को संस्थागत रूप दिया है और उसके सैन्य प्रतिष्ठान और आतंकवादी संगठनों के बीच कोई अंतर नहीं है। सिंह ने कहा कि भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कड़ा जवाब दिया है कि भारत में किसी भी शत्रुतापूर्ण कृत्य का और भी अधिक बल के साथ जवाब देने की क्षमता है।
 

उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने की हर कोशिश का हमारे सशस्त्र बल मुंहतोड़ जवाब देंगे।

1999 के करगिल युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए, रक्षा मंत्री ने इस संघर्ष को न केवल एक सैन्य और कूटनीतिक जीत बताया, बल्कि एक ऐसा निर्णायक क्षण भी बताया जिसने दुनिया के सामने भारतीय सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को प्रदर्शित किया।
 

उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध स्मारक पर अंकित शहीदों के नाम देश के हर क्षेत्र, धर्म और समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारत की एकता को दर्शाते हैं और देश को बांटने की कोशिश करने वालों को एक कड़ा संदेश देते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच तुलना करते हुए सिंह ने कहा कि भारत नवाचार, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और अंतरिक्ष अन्वेषण के माध्यम से प्रगति कर रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा पार घुसपैठ को बढ़ावा दे रहा है।
 

उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, उपग्रह और डिजिटल बुनियादी ढांचा बना रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और छद्म युद्ध को बढ़ावा दे रहा है, और कहा कि सशस्त्र बल किसी भी शत्रुतापूर्ण मंसूबे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। करगिल युद्ध के दौरान दी गई कुर्बानियों को याद करते हुए सिंह ने कहा कि कई सैनिक अपनी जवानी के शुरुआती दौर में थे, जिनके कई सपने और अरमान थे, फिर भी उन्होंने खुशी-खुशी देश की सेवा में अपनी जान दे दी। उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों—जिनमें उनकी माताएं, पत्नियां और बच्चे शामिल थे—द्वारा सहे गए गहरे दुख को भी याद किया।
 

करगिल विजय दिवस के मौके पर, रक्षा मंत्री ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें भारत माता के समर्पित सपूत बताया, जिनके साहस और बलिदान से आने वाली पीढ़ियां हमेशा प्रेरित होती रहेंगी।

Anti-Paper Leak Bill: ₹50 लाख का जुर्माना और 10 साल की जेल… पेपर लीक रोकने वाले नए बिल में क्या-क्या है?

Anti-Paper Leak Bill: दो साल पुराने ‘क्वेश्चन पेपर लीक’ विरोधी कानून में बदलाव करने वाला एक बिल सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल में आरोपियों पर तेजी से मुकदमा चलाने के लिए हर राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और सजा को और सख़्त करने का प्रस्ताव है। ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ के अनुसार, क्वेश्चन पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के अंदर पूरी होनी चाहिए।

बिल पेश करने से पहले सदस्यों को दी गई कॉपी के अनुसार, क्वेश्चन पेपर लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को कम से कम पांच साल और ज्यादा से ज्यादा 10 साल की जेल हो सकती है। साथ ही ₹50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है। ऑर्गनाइज्ड क्राइम (संगठित अपराध) के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इसे जल्द से जल्द संसद में पेश करने का निर्देश दिया। उम्मीद है कि यह बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा।

मौजूदा कानून में क्या है?

मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल की जेल का प्रावधान है। जबकि संगठित धोखाधड़ी और क्वेश्चन पेपर लीक में शामिल लोगों को पांच से 10 साल की जेल और कम से कम ₹1 करोड़ का जुर्माना हो सकता है। इस बिल को सोमवार को लोकसभा में पेश करने, उस पर विचार करने और उसे पास कराने के लिए लिस्ट किया गया है। आम तौर पर किसी बिल को एक ही दिन पेश करने और पास कराने के लिए लिस्ट नहीं किया जाता है।

सरकार ने घोषणा की है कि वह प्रस्तावित कानून ला रही है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल के दिनों में NEET क्वेश्चन पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था। हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन समाप्त हो गया है।

एक हफ्ते नहीं चल पाया संसद

NEET मुद्दे पर विपक्षी दलों के विरोध के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले हफ्ते की कार्यवाही में बाधा आई थी। नए बिल पर विपक्ष का रुख़ अभी साफ़ नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ेंगे।

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा अन्य माँगें मान लिए जाने के बाद CJP ने शनिवार को अपना 36 दिन लंबा विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया। इस बिल में 15 गैर-कानूनी कामों को शामिल किया गया है। इनमें क्वेश्चन पेपर लीक करना, OMR शीट के साथ छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना शामिल है।