Delhi Protest: रात के अंधेरे में भी रिकॉर्डिंग करने वाले बॉडी कैमरों से लैस हुए दिल्ली पुलिस के जवान, समझिए क्या है तैयारी

जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए शनिवार 10 अक्टूबर को पूरी राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े और हाई-टेक इंतजाम किए गए हैं। इस बार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के जवान आधुनिक नाइट-विजन बॉडी-वॉर्न कैमरों (BWCs) से लैस नजर आ रहे हैं। यह विशेष बॉडी कैमरे जवानों की यूनिफॉर्म पर लगाए गए हैं, जो दिन के उजाले के साथ-साथ रात के घने अंधेरे में भी हाई क्वॉलिटी की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करने में सक्षम हैं।

यह कैमरे हमारी और जनता दोनों की सुरक्षा के लिए हैं: जवान ने समझाई उपयोगिता

ANI की एक एक्स पोस्ट में दिल्ली में तैनात पुलिस जवान अपनी यूनिफॉर्म पर यह कैमरे पहने हुए दिखाई दिए। सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के जवान दीपक चौधरी ने इन कैमरों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा कि यह बॉडी कैमरे जवानों के साथ-साथ आम जनता और प्रदर्शनकारियों दोनों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन या हाथापाई की स्थितियों में अक्सर दिल्ली पुलिस के ऊपर एकतरफा आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसे में यह बॉडी कैमरे निष्पक्ष सबूत के तौर पर काम करेंगे और यह साबित करेंगे कि पुलिस ने किसी के साथ कुछ गलत किया है या नहीं। यह कैमरे मौके पर होने वाली हर एक गतिविधि को लगातार रिकॉर्ड करेंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की थी अनिवार्य बॉडी कैमरे लगाने वाली याचिका

बॉडी कैमरों की यह तैनाती ऐसे समय में देखने को मिली है, जब कुछ ही दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का अनिवार्य और लगातार इस्तेमाल करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। 7 अक्टूबर को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन सांबरे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को केंद्र सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन के रूप में विचार करने को कहा था। अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की थी कि इस मामले में ऐसा कोई कानूनी पेंच नहीं है जहां कोर्ट को निर्देश जारी करने की जरूरत पड़े। अदालत ने कहा था कि जब भी विधायिका की कोई मंशा होती है, वे वैधानिक प्रावधानों में नियम तय कर देते हैं।

जुलाई में हुए प्रदर्शन का हवाला देकर दायर की गई थी याचिका

यह याचिका एडवोकेट चाहत राघव द्वारा भारत सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त, सीआरपीएफ के महानिदेशक और बीपीआरएंडडी के खिलाफ दायर की गई थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण में तैनात अधिकारियों के लिए कैमरे पहनना और उन्हें चालू रखना अनिवार्य किया जाए। साथ ही रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने, डेटा सुरक्षा और सबूत के तौर पर उसके इस्तेमाल के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए।

याचिका में जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर CJP और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के प्रदर्शनों का जिक्र किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के अधिकांश वीडियो आम जनता या राहगीरों के मोबाइल फोन से सामने आए थे, न कि किसी आधिकारिक पुलिस रिकॉर्डिंग सिस्टम से। याचिका में कहा गया था कि 21 जुलाई की घटनाओं में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों दोनों को चोटें आई थीं, जबकि 23 जुलाई की समीक्षा बैठक में आरएएफ के महानिरीक्षक (IG) ने कथित तौर पर माना था कि इस्तेमाल किए गए बल के कुछ तरीके तय मानकों के अनुरूप नहीं थे।

1,500 कैमरों के लिए टेंडर और कानूनी प्रावधानों की मांग

याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2020 की बॉडी-वॉर्न कैमरों से जुड़ी एडवाइजरी सिर्फ एक सिफारिश थी, जो अधिकारियों के लिए कैमरे चालू रखना अनिवार्य नहीं बनाती। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस द्वारा गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए लगभग ₹7.4 करोड़ की अनुमानित लागत से 1500 बॉडी कैमरों की खरीद के लिए निकाले गए टेंडर का भी जिक्र किया था, जिसमें प्रति कैमरा लागत करीब ₹49333 बैठती है।

याचिका में मांग की गई थी कि कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाए जिसे कोई जवान बदल न सके, साथ ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 के तहत प्रमाणीकरण और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों का पालन हो। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह कैमरे किसी भीड़ पर चेहरा पहचानने वाला जाल नहीं, बल्कि पुलिस और नागरिकों के बीच संवाद का एक पारदर्शी रिकॉर्ड हैं जो बैरिकेड के दोनों तरफ मौजूद लोगों की सुरक्षा करते हैं।

छावनी में तब्दील हुई दिल्ली: 25,000 जवान, मेट्रो पाबंदी और इंटरनेट बंद

शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस और पैरामिलिट्री के लगभग 25,000 जवानों को तैनात किया गया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 120 से अधिक कंपनियां सुरक्षा में लगाई गई हैं। शनिवार सुबह 6:00 बजे से ही कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक समेत 30 से ज्यादा पॉइंट्स पर सख्त ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। दिल्ली की सभी सीमाओं पर गाड़ियों की सघन चेकिंग की जा रही है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर असर

सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बैन लागू है, नमो भारत के दो स्टेशन बंद हैं और ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में एहतियात के तौर पर 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। आपको बता दें कि यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है, जिसके विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन बुलाया गया है।

Delhi Internet Shutdown: दिल्ली में आज रात 10 बजे से कल रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद, 4 किमी के दायरे में रहेगी पाबंदी

Delhi Internet Shutdown: चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच Cockroach Janata Party (CJP) दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन की तैयारी में है। इसी को देखते हुए मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में आज रात 10 बजे से सभी इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

बता दें कि, दिल्ली पुलिस ने CJP और कुछ छात्र संगठनों को 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। नई दिल्ली रेंज की जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नूपुर प्रसाद ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, आवेदन देर से दिया गया था और दूसरा, CJP के पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ था।

नूपुर प्रसाद ने कहा, “हमें Cockroach Janata Party के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से आवेदन मिला है। इसमें 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की सूचना दी गई थी।”

4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट नहीं

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद, नई दिल्ली में जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी।

इस रोक में सभी तरह की मोबाइल इंटरनेट टेक्नोलॉजी शामिल होगी। दिल्ली पुलिस ने टेलीकॉम कंपनियों एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, जियो और MTNL को इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है। बता दें कि यह आदेश टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 और टेलीकॉम सेवाओं के अस्थायी निलंबन नियम, 2024 के तहत जारी किया गया है।

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दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद रहेंगे

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजधानी में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और इन स्टेशनों पर ट्रेनों की फ़्रीक्वेंसी कम करने का ऐलान किया है। पुलिस की जानकारी के मुताबिक, ये उपाय शुक्रवार रात 9 बजे से शुरू होंगे और 10 अक्टूबर को हालात सामान्य होने तक लागू रहेंगे। इस अनुरोध में दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के 57 स्टेशन शामिल हैं।

यह कदम तब उठाया गया है जब ट्रांसपोर्ट रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस ने DMRC से चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर ज़रूरी उपाय करने का अनुरोध किया। उन्होंने नई दिल्ली जिले में जंतर-मंतर और दूसरी जगहों पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों और संवेदनशील इलाकों की ओर बेकाबू भीड़ के बढ़ने की आशंका का हवाला दिया।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कथित “वोट चोरी” को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

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Delhi Protest: नमो भारत के सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्टेशन रहेंगे बंद, जानिए आनंद विहार से मेरठ रूट पर क्या पड़ेगा असर

Delhi Protest: दिल्ली में शनिवार 10 अक्टूबर को होने वाले बड़े विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर कड़े कदम उठाए गए हैं। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने शुक्रवार शाम एडवाइजरी जारी कर जानकारी दी है कि दिल्ली में नमो भारत ट्रेन (RRTS) के दो प्रमुख स्टेशनों सराय काले खां और न्यू अशोक नगर को अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। अगर आप शनिवार को नमो भारत ट्रेन से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले रूट और स्टेशनों से जुड़ी यह अहम जरूरी जानकारी जान लें।

शुक्रवार रात से शनिवार रात तक बंद रहेंगे दोनों स्टेशन

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक NCRTC की ओर से जारी आधिकारिक एडवाइजरी के मुताबिक, सराय काले खां और न्यू अशोक नगर नमो भारत स्टेशनों को शुक्रवार रात 9 बजे से शनिवार (10 अक्टूबर) रात 10 बजे तक आम यात्रियों के लिए पूरी तरह बंद रखा जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। इस दौरान इन दोनों स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर रोक रहेगी। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं।

आनंद विहार से मोदीपुरम (मेरठ) रूट पर क्या पड़ेगा असर?

नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि पूरी ट्रेन सेवा ठप नहीं होगी। NCRTC ने साफ किया है कि दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन से लेकर उत्तर प्रदेश में मेरठ के मोदीपुरम तक नमो भारत ट्रेन की सेवाएं अपने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार सामान्य रूप से चलती रहेंगी। यानी जो यात्री आनंद विहार से गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर या मेरठ की तरफ जाना चाहते हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। सिर्फ सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्टेशनों पर ट्रेनें नहीं रुकेंगी और ये स्टेशन बंद रहेंगे।

कनॉट प्लेस (CP) के बाजार भी रहेंगे बंद

शनिवार को होने वाले प्रदर्शन का असर दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों पर भी देखने को मिलेगा। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने एक सर्कुलर जारी कर कनॉट प्लेस की सभी दुकानों, दफ्तरों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को शनिवार को बंद रखने की सलाह दी है। NDTA के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने बताया कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन की सलाह के आधार पर एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। व्यापारी संगठन ने यह फैसला संभावित भीड़, संपत्ति के नुकसान और किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए लिया है।

क्यों हो रहा है दिल्ली में प्रदर्शन?

दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने और स्टेशनों व बाजारों को बंद करने के पीछे शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़ा विरोध-प्रदर्शन है। कॉकरोच जनता पार्टीने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस तथा अन्य एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

₹1500 के टिकट का हिसाब मांग रही पुलिस! जंतर-मंतर आंदोलन से पहले इस बात पर भड़के अभिजीत दीपके

Abhijeet Dipke CJP Delhi Protest: देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन होने वाला है। इस प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक हलचलों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

दीपके का दावा है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान कर रही है और उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर रही है।

‘1500 रुपये की टिकट से क्या दिक्कत?’

अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की कार्रवाई पर तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सबसे बेहतरीन पुलिस फोर्स है और दिल्ली पुलिस को उनसे सीखना चाहिए। लेकिन यह बेहद दुखद है कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस थमाकर जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्सा न लेने की हिदायत दी है। पुलिस कार्यकर्ताओं से यह भी पूछ रही है कि उनके दिल्ली सफर का खर्च कौन उठा रहा है और पैसे कहाँ से आए?’

दीपके ने सवाल उठाया कि क्या अब देश का कोई आम नागरिक अपनी जेब से 1,000 या 1,500 रुपये का रेल टिकट खरीदकर राजधानी नहीं जा सकता? उन्होंने कहा कि यात्रा के मामूली खर्चों पर सवाल उठाना और कार्यकर्ताओं को रोकना खुलेआम तानाशाही है।

‘क्या पुलिस ने पहले ही हिंसा का प्लान बना रखा है?’

पुलिस नोटिस में आंदोलन के संभावित रूप से ‘हिंसक’ होने की बात लिखे जाने पर सीजेपी प्रमुख ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पुलिस को इतने दिन पहले ही कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होने वाला है? क्या पुलिस ने पहले से ही कुछ योजना बना रखी है?’

साथ ही, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने के निर्देशों पर भी दीपके ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर चलती है, तो पुलिस इसे हिंसक कैसे मान सकती है?

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की वजह क्या है?

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी की मुख्य मांगें ये हैं:

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विरोध: केंद्र सरकार की इस योजना पर निशाना साधते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक नारा है और इसके पीछे की असली मंशा ‘वन नेशन, वन पॉलिटिकल पार्टी’ (एक देश, एक ही राजनीतिक दल) लागू करना है।

पुलिसिया कार्रवाई और नोटिस के बावजूद सीजेपी का कहना है कि वे दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के फैसले पर कायम हैं।

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Delhi Protest: दिल्ली में पुलिसकर्मियों पर 3 महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न का आरोप, क्राइम जांच ने शुरू की जांच

Delhi Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है जिसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शिकायतों को क्राइम ब्रांच ट्रांसफर कर दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ नयी दिल्ली जिला पुलिस को ये शिकायतें मिली थीं। उन्होंने बताया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई दिल्ली जिला पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

अधिकारी के अनुसार, ये आरोप तीनों महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए हैं। उन्होंने बताया कि अपराध शाखा आरोपों की गहन जांच करेगी और शिकायतकर्ता महिला पत्रकारों तथा संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज करेगी। दिल्ली पुलिस ने रविवार (4 अक्टूबर) को X पर एक पोस्ट में कहा, “03-10-26 को नई दिल्ली इलाके में विरोध-प्रदर्शन के दौरान, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की स्थिति में, तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। नई दिल्ली ज़िले को उनकी शिकायतें मिली हैं और निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है।”

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ बदसलूकी किए जाने के आरोपों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शनिवार को जवाब मांगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए अमित शाह को इस मामले में जवाब देना चाहिए। गांधी ने कहा, “जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वह भी नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि शनिवार को ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। गांधी ने कहा, “महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।” उन्होंने कहा, “और यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अधिकारी महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं-मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।” उन्होंने कहा, “और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है- वह आखिर किसकी हिफाजत कर रही है?” राहुल गांधी ने आगे कहा, “दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है।”

आइसा ने भी लगाए आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। आइसा ने एक बयान में कहा, “पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की। कई महिलाओं ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर उन्हें अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया है।” संगठन ने कहा, “महिलाओं को न्याय दिलाने का दावा करने वाला पुलिस बल भीड़ को कंट्रोल करने के बुनियादी नियमों का पालन नहीं कर सका। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ खुलेआम दुर्व्यवहार किया और (वे) बेहद गैर-पेशेवर तरीके से पेश आए।”

200 लोगों को हिरासत में लिया गया

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शनिवार को हुए प्रदर्शन के सिलसिले में लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर आदेश न मानने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने तथा उनपर हमला करने से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं। नई दिल्ली जिले में पाबंदी आदेश लागू होने के बावजूद, छात्र संगठनों और नागरिक संगठन के सदस्यों समेत प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की कोशिश की।

हिरासत में लिए गए लोगों में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण शामिल थे। आइसा ने बताया कि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, नित्या रामकृष्णन और पल्लव सिसोदिया भी प्रदर्शन में शामिल हुए। पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई हैं।

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‘CM विजय को गले लगाना है…’ जंतर-मंतर सड़क पर लेटी महिला की अनोखी मांग, Video वायरल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला का अलग अंदाज देखने को मिला। सोशल मीडिया पर महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला प्रदर्शन स्थल से हटने से इनकार कर दिया। महिला ने कहा कि वह एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मिलकर उन्हें गले लगाना चाहती है। महिला की इस बात को लेकर मौके पर कुछ देर तक लोगों के बीच चर्चा होती रही। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक महिला सड़क पर लेटी नजर आ रही है। वीडियो में दो महिला पुलिसकर्मी उस महिला के पास जाती नजर आती हैं और उसे वहां से उठाने की कोशिश करती हैं। लेकिन महिला वहां से हटने को तैयार नहीं होती। जब एक पुलिसकर्मी उसे उठाने की कोशिश करती हे महिला तुरंत विरोध करते हुए कहती है, “मुझे मत छुओ।” जब उससे इसकी वजह पूछी जाती है, तो वह कहती है कि वह एक्टर और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलना चाहती है और उन्हें गले लगाना चाहती है। इसके बाद महिला पुलिसकर्मी उसे वहां से अपने साथ ले जाती हैं।

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के लोग जुटे। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई और कई लोगों को हिरासत में भी लिया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ AISA, SFI, NSUI और दूसरे छात्र संगठन भी शामिल हुए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा के मद्देनजर जंतर-मंतर व आसपास के इलाकों में सख्त पाबंदियां लागू की गई थीं।

मेट्रो स्टेशन को किया गया बंद

शुक्रवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें आम आदमी पार्टी के नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा और संजय सिंह भी शामिल थे। प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और कई मेट्रो स्टेशनों पर कुछ समय के लिए आने-जाने पर रोक लगाई गई।

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Delhi protest: NEET आंदोलन से फिर करीब आए राहुल-अखिलेश? यूपी चुनाव से पहले युवाओं के मुद्दों पर BJP को घेरने की तैयारी

NEET protest: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब लगभग छह महीने का समय बचा है। ऐसे में NEET परीक्षा विवाद ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक नया और मजबूत राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े विपक्षी अभियान का रूप ले चुका है। इसमें पेपर लीक, बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।

दोनों दलों का मानना है कि ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर उत्तर प्रदेश के करोड़ों युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है। आगामी चुनाव में यह बड़ा चुनावी हथियार साबित हो सकता है।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच फिर दिखा तालमेल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बढ़ता तालमेल ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति निर्णायक दौर में एंट्री  कर रही है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों का चर्चित ‘दो लड़के’ अभियान मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रहा था। गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका दिया। इससे दोनों दलों का आत्मविश्वास बढ़ा और गठबंधन को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली।

डिंपल यादव ने आंदोलन में निभाई सक्रिय भूमिका

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद और अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव जंतर-मंतर पहुंचीं। अपनी पहचान बन चुकी गुलाबी साड़ी में पहुंचीं डिंपल कई घंटों तक घायल छात्रों के बीच रहीं। उन्होंने घायल छात्रों का हौसला बढ़ाया। बेहोश हुए एक छात्र की मदद की की। योगत्यता उपलब्ध कराने में सहयोग किया और प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार मौजूद रहीं।

सोशल मीडिया पर उनके पुलिस बैरिकेड पर चढ़ने, घायल छात्रों की मदद करने और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े रहने के वीडियो तेजी से वायरल हुए। सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए उन्होंने कहा, “यह NEET नहीं, CHEAT है।” उनकी लगातार मौजूदगी ने समाजवादी पार्टी को युवाओं और छात्रों के प्रति संवेदनशील दल के रूप में पेश करने में मदद की।

युवाओं के जरिए बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार पहलों और राष्ट्रवादी राजनीति के जरिए पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के बीच मजबूत आधार बनाया है। विपक्ष का मानना है कि NEET विवाद बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के आरोप और बढ़ती बेरोजगारी युवाओं में असंतोष पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस और सपा इसी नाराजगी को राजनीतिक समर्थन में बदलना चाहती हैं। दोनों दल खुद को छात्रों और युवाओं की आवाज के रूप में स्थापित कर इस आंदोलन को चुनावी मुद्दे में बदलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ जॉइंट आंदोलन

NEET आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश में भी तेजी से दिखाई दिया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ सहित कई जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शन किए। दोनों दलों के छात्र संगठनों ने आंदोलन का नेतृत्व किया। कई जगह पुलिस के साथ झड़पें हुईं। विपक्षी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी हुई, जिससे यह आंदोलन लगातार सुर्खियों में बना रहा। अब दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी संयुक्त विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बनाई है।

सिर्फ NEET नहीं, कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

दोनों दलों के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अब अपने अभियान को केवल NEET तक सीमित नहीं रखेंगी।

गठबंधन की योजना में शामिल प्रमुख मुद्दे हैं:-

कथित पेपर लीक

बेरोजगारी

सरकारी भर्तियों में देरी

राम मंदिर दान चोरी विवाद

किसानों के लिए खाद की कमी

नकली दवाओं का मुद्दा

बढ़ते बिजली बिल और बिजली दरें

विपक्ष की रणनीति है कि चुनाव तक जनता का ध्यान इन मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए, ताकि बीजेपी पहचान की राजनीति और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए चुनावी एजेंडा तय न कर सके।

फिलहाल सीट बंटवारे का विवाद भी पड़ा ठंडा

कुछ समय पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बराबर सीटों की हिस्सेदारी चाहेगी। गौतम ने कांग्रेस को गठबंधन का ‘बड़ा भाई’ तक बताया था।

इन बयानों से दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे। हालांकि, छात्र आंदोलन के बाद फिलहाल बातचीत का केंद्र सीटों की बजाय संयुक्त राजनीतिक अभियान बन गया है। इससे दोनों दल एकजुटता का संदेश देने में सफल रहे हैं।

युवा वोट बना सबसे बड़ा चुनावी रणक्षेत्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं को सबसे बड़ा चुनावी मैदान मान रही हैं। सपा का पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक अभी भी उसके साथ माना जाता है। जबकि कांग्रेस ऊंची जातियों, दलितों, शहरी मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे जाति और धर्म से ऊपर उठकर लगभग हर वर्ग के छात्रों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन्हें राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावी माना जा रहा है।

बीजेपी भी करेगी कड़ा मुकाबला

हालांकि बीजेपी इस चुनौती को आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं है। 2024 लोकसभा चुनाव में झटका लगने के बावजूद भगवा पार्टी ने बाद के विधानसभा उपचुनावों में अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया है। बीजेपी आगामी चुनाव में अपनी कल्याणकारी योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी भर्ती अभियानों और सुशासन के रिकॉर्ड को प्रमुखता से जनता के सामने रखेगी। पार्टी को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में उसका बूथ स्तर तक फैला मजबूत संगठन विपक्ष पर बढ़त बनाए रखेगा।

क्या NEET आंदोलन बनेगा चुनावी गेम चेंजर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NEET आंदोलन 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा बदल पाएगा। यदि राहुल गांधी और अखिलेश यादव युवाओं के गुस्से को चुनाव तक बनाए रखने और पेपर लीक, बेरोजगारी तथा छात्रों की आकांक्षाओं को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने में सफल रहते हैं, तो कांग्रेस-सपा गठबंधन 2024 के बाद बीजेपी के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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वहीं यदि बीजेपी बहस का केंद्र फिर से विकास, सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं और नेतृत्व पर ले जाने में सफल हो जाती है, तो जंतर-मंतर से उठी यह भावनात्मक लहर चुनाव तक पहुंचने से पहले कमजोर भी पड़ सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य के करोड़ों युवा मतदाता आखिर किस राजनीतिक दल पर सबसे अधिक भरोसा जताते हैं।