Gold Price Crash: रिकॉर्ड हाई से 29% टूटा सोना, अभी खरीदना सही या फिर करें और इंतजार? एक्सपर्ट ने ये बताया

Gold Price Fall: ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों और मजबूत होते डॉलर के कारण शुक्रवार, 26 जून को सोने की कीमतें लगातार चौथे हफ्ते गिरावट की राह पर रहीं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस समय $4000 प्रति औंस के लेवल के आस पास संघर्ष कर रहा है। बुधवार को यह नवंबर 2025 के बाद पहली बार $4000 के स्तर से नीचे भी फिसल गया था। अगर आप भी सोने या चांदी में निवेश करते हैं, तो ग्लोबल मार्केट का यह पूरा गणित आपके लिए समझना बेहद जरूरी है।

लगातार चौथे हफ्ते टूटा सोना

शुक्रवार को हाजिर सोना 0.6% गिरकर $4002.77 प्रति औंस पर आ गया। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी सोना वायदा भी 0.7% की गिरावट के साथ $4017.30 पर ट्रेड कर रहा था। इस पूरे हफ्ते की बात करें तो सोने ने करीब 3.8% की भारी गिरावट दर्ज की है।

रिकॉर्ड हाई से 29% की भारी गिरावट

इस साल 29 जनवरी को अमेरिका-इरान युद्ध के कारण बढ़ी वैश्विक महंगाई के चलते सोने ने $5594.82 प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन उसके बाद से अब तक सोने की कीमतों में करीब 29% की बड़ी करेक्शन आ चुकी है।

OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग का मानना है कि सोने में चल रहा यह गिरावट का दौर अभी और लंबा खिंच सकता है और लंबी अवधि में सोना फिसलकर $3400 के स्तर तक भी जा सकता है। यानी मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

क्यों आ रही है सोने की कीमतों में गिरावट?

सोने के दाम गिरने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

1. मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद से अपने सबसे मजबूत स्तर के करीब बना हुआ है। डॉलर लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की ओर है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं जैसे- भारतीय रुपया में सोना खरीदना काफी महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।

2. अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरें: गुरुवार को आए आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में खुदरा महंगाई मई महीने में 4% के पार निकल गई है, जो पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा है। आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सोने पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलता।

ट्रेडर्स को उम्मीद है कि अमेरिकी फेड इस साल तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसमें सितंबर में रेट हाईक होने की संभावना 64% तक जताई जा रही है।

चांदी, प्लेटिनम और पैलेडियम का भी बुरा हाल

सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं के लिए भी यह हफ्ता बेहद निराशाजनक रहा:

हाजिर चांदी: 2.6% टूटकर $56.39 प्रति औंस पर आ गई।

प्लेटिनम: 2% की गिरावट के साथ $1568.55 पर आ गया।

पैलेडियम: 0.6% फिसलकर $1177.12 पर ट्रेड कर रहा था।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Asian Market Today: टेक शेयरों में बिकवाली से एशियाई मार्केट में दबाव, निक्केई 4%, कोस्पी में 7% गिरा

Asian Market Today: वॉल स्ट्रीट पर उतार-चढ़ाव वाले सेशन के बाद शुक्रवार, 26 जून को एशियाई मार्केट में गिरावट आई। हैवीवेट टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में कमजोरी ने सेमीकंडक्टर कंपनियों से मिली अच्छी गाइडेंस से मिली उम्मीद को कम कर दिया।

सुबह 8.25 बजे के आसपास निक्केई करीब 4.18 फीसदी की गिरावट के  साथ 69,341.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.89 फीसदी की  कमजोरी दिखा रहा है।  ताइवान का बाजार 2.28 फीसदी  गिरकर 45,200.59 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 2.32 फीसदी की गिरावट के साथ 22,541.00  के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 7.38 फीसदी की गिरावट के साथ  कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 2.57 फीसदी की बढ़त के साथ 4,014.45 के स्तर पर दिख रहा है।

भारतीय स्टॉक मार्केट आज, 26 जून को मुहर्रम की छुट्टी के कारण बंद है। दोनों बड़े स्टॉक एक्सचेंज, BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर आज ट्रेडिंग बंद रहेगी।

वॉल स्ट्रीट की रैली की रफ़्तार पड़ी फीकी 

गुरुवार को US स्टॉक मार्केट मिला-जुला रहा, जिसमें नैस्डैक बड़े टेक शेयरों में गिरावट के कारण नीचे बंद हुआ।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 71.72 पॉइंट्स या 0.14% बढ़कर 51,920.62 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 0.73 पॉइंट्स या 0.01% गिरकर 7,357.49 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 118.03 पॉइंट्स या 0.46% गिरकर 25,358.60 पर बंद हुआ।

यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट पर मिले-जुले सेशन के बाद आई, जहां माइक्रोन टेक्नोलॉजी की अच्छी कमाई और गाइडेंस से मिली शुरुआती बढ़त को बनाए रखने में नाकाम रहने के बाद S&P 500 काफी हद तक बिना बदले बंद हुआ।

Apple सेंटीमेंट पर सबसे बड़ी रुकावट बनकर उभरा, जिसके शेयर 6.1% गिर गए, जब कंपनी ने Macs, iPads और होम डिवाइस की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की। इस गिरावट का असर टेक्नोलॉजी स्टॉक्स के बड़े मैग्निफिसेंट सेवन ग्रुप पर भी पड़ा।

होर्मुज स्ट्रेट की चिंता बनी रहने से तेल की कीमतों में नरमी

गुरुवार को बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट आई, जब होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल के हमले की खबरों ने दुनिया के सबसे अहम एनर्जी ट्रेड रूट में से एक के ज़रिए शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दीं।

इस बीच, US सेंट्रल बैंक के पसंदीदा महंगाई गेज के उम्मीद से कम बढ़ने के बाद बॉन्ड मार्केट ने फेडरल रिजर्व के ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया।

AI से चलने वाली अस्थिरता निवेशकों को सतर्क रखती है

ग्लोबल इक्विटी मार्केट एक अस्थिर हफ्ते के आखिर में इस चिंता के साथ खत्म होने वाले हैं कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बड़े निवेश से काफी रिटर्न मिलेगा, जिससे टेक्नोलॉजी स्टॉक में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

हालांकि माइक्रोन के मजबूत तिमाही नतीजों और आशावादी नजरिए ने निवेशकों को कुछ भरोसा दिया, लेकिन सावधानी अभी भी बनी हुई है। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स और S&P 500 दोनों ही तिमाही में अपनी पहली महीने की गिरावट दर्ज करने की राह पर हैं।

पिछली रैली के बाद चिप स्टॉक्स में गिरावट

हालांकि नैस्डैक 100 गुरुवार को 0.8% ऊपर बंद हुआ, जबकि सेशन के दौरान यह 2.1% तक बढ़ा था, लेकिन यह बढ़त एशियाई मार्केट में पॉजिटिव सेंटिमेंट बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

माइक्रोन के साथ-साथ, क्वालकॉम के शेयर भी बढ़े, जब कंपनी ने फिस्कल ईयर 2029 तक सालाना AI डेटा-सेंटर कंपोनेंट की बिक्री $15 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान लगाया।

हालांकि, शुक्रवार को एशियाई सेमीकंडक्टर स्टॉक्स ने रुख बदल दिया। पिछले सेशन में उछाल के बाद MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स पर SK हाइनिक्स, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और कियॉक्सिया होल्डिंग्स के शेयर सबसे बड़ी गिरावट में रहे।

ओपनAI के IPO में कथित तौर पर देरी हुई

इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की अंदरूनी बातचीत से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि ओपनAI अपनी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग को 2027 तक टालने की ओर झुक रहा है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Ratio: सोने के मुकाबले और ज्यादा गिर सकती है चांदी, चार्ट दे रहा बड़े संकेत; जानिए अब क्या करें निवेशक

Gold Silver Ratio: जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से चांदी की कीमत में करीब 50% की गिरावट आ चुकी है। सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले भी चांदी एक-तिहाई से ज्यादा कमजोर हो गई है। अब टेक्निकल चार्ट इशारा कर रहे हैं कि यह गिरावट अभी थमने वाली नहीं है। ऐसे में सोने के मुकाबले चांदी और कमजोर पड़ सकती है।

जनवरी के बाद क्यों बदला माहौल?

रॉयटर्स के मुताबिक, 30 जनवरी के बाद से सोना और चांदी दोनों में दबाव बढ़ने लगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाजार को लगने लगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब ब्याज दरों में कटौती करने के मूड में नहीं है। इसके उलट, अगर महंगाई बढ़ती रही तो ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

इस बीच ईरान युद्ध के बाद महंगाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गईं। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए और कीमती धातुओं में बिकवाली तेज हो गई।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों आया?

सोने की तुलना में चांदी पर असर ज्यादा पड़ा। इसकी वजह सिर्फ निवेशकों की बिकवाली नहीं है। दरअसल, चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कई उद्योगों में होता है।

इसलिए जब अर्थव्यवस्था या निवेशकों के जोखिम लेने के रुख को लेकर चिंता बढ़ती है तो चांदी पर दबाव भी ज्यादा आता है। एक वजह यह भी रही कि इससे पहले चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी आई थी। ऐसे में मुनाफावसूली शुरू होने पर इसमें गिरावट भी ज्यादा देखने को मिली।

टेक्निकल चार्ट क्या कह रहा है?

एनालिस्टों के मुताबिक, गोल्ड टु सिल्वर रेशियो यानी सोने और चांदी के भाव का अनुपात लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में यह 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के ऊपर निकल गया है।

टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का अहम पैमाना माना जाता है। किसी भी एसेट का इसके ऊपर या नीचे जाना अक्सर बाजार की दिशा का बड़ा संकेत देता है।

अब 70 के स्तर पर रहेगी नजर

अब इस अनुपात का अगला बड़ा लक्ष्य 70 माना जा रहा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। ट्रेडर्स अक्सर ऐसे गोल आंकड़ों पर खास नजर रखते हैं।

अगर गोल्ड टु सिल्वर रेशियो मजबूती से 70 के ऊपर निकल जाता है, तो इसके बाद 6 फरवरी के 72.74 के स्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके बाद अगला लक्ष्य 75.25 हो सकता है। यह अप्रैल 2025 के बाद सोने के मुकाबले चांदी की गिरावट के दायरे का लगभग आधा स्तर है।

अगर चांदी वापसी करती है तो क्या होगा?

हालांकि, चांदी के लिए उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर चांदी में फिर से खरीदारी लौटती है, तो सबसे पहले गोल्ड टु सिल्वर रेशियो को 200-डे मूविंग एवरेज (66.76) के नीचे आना होगा। इसके बाद यह 22 जून के 62.68 के स्तर तक फिसल सकता है।

अगर यह अनुपात 60.56 से भी नीचे चला जाता है, तो इसे चांदी के पक्ष में मजबूत संकेत माना जाएगा। ऐसे में बाजार में चांदी की तेजी को नई ताकत मिल सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब

अभी के संकेत बताते हैं कि निवेशकों का झुकाव चांदी की बजाय सोने की ओर ज्यादा है। जब तक गोल्ड टु सिल्वर रेशियो ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तब तक माना जाएगा कि सोना, चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

लेकिन अगर यह अनुपात नीचे आने लगता है, तो इसका मतलब होगा कि चांदी फिर से मजबूत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त चांदी में दोबारा खरीदारी दिख सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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Market Outlook : हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जून को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 25 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स ने दिन के दौरान हुई ज्यादातर बढ़त गंवा दी और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। निफ्टी 24,050 के आसपास रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 109.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर और निफ्टी 34.35 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056.00 पर सेयल हुआ। लगभग 1544 शेयरों में बढ़त हुई,2488 शेयरों में गिरावट आई और 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन,M&M,मैक्स हेल्थकेयर,मारुति सुजुकी और टाटा कंज्यूमर शामिल रहे। जबकि ONGC,पावर ग्रिड कॉर्प,हिंडाल्को और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक महिंद्रा में गिरावट देखने को मिली।

सेक्टोरल इंडेक्स मिले-जुले रहे। FMCG में 0.7%,रियल्टी में 0.3% और ऑटो इंडेक्स में 2% से ज्यादा की बढ़त हुई। जबकि IT,एनर्जी,मीडिया,मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 0.5-1% नीचे रहे। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि दिन के शुरुआती कारोबार में हुई बढ़त के बाद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से घरेलू बाजार बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से रुपये को सहारा मिला और कुछ राहत भी मिली,लेकिन यह बढ़त की रफ़्तार बनाए रखने के लिए काफी नहीं थी।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसकी वजह रही मेटल की कीमतों में नरमी,सप्लाई चेन की दिक्कतों में कमी और महीने के दौरान रिटेल डिमांड में सुधार।

कुल मिलाकर बाजार का मूड पॉजिटिव रहा। हालांकि,FII की लगातार बिकवाली से तेजी सीमित हो सकती है। आने वाले समय में,Q1 के नतीजों को लेकर कमजोर उम्मीदों और मॉनसून की असमान स्थिति का असर बाजार के मूड पर पड़ सकता है,इसलिए इन पर नजर रखनी होगी।

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, HNI ​एंड डेरिवेटिव्स,रियांक अरोड़ा का कहना है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में आज का ट्रेडिंग सेशन थोड़ा पॉजिटिव रहा। दिन भर उतार-चढ़ाव सीमित दायरे में रहने के बावजूद बेंचमार्क इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर बने रहना लगातार खरीदारी की रुचि को दिखाता है। मार्केट में नए ट्रिगर्स आने से पहले निवेशक सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।

निफ्टी 30 अंक यानी 0.12%) बढ़कर 24,050 पर बंद हुआ। यह इंडेक्स 24,000 के अहम लेवल के ऊपर बना हुआ है,जो बताता है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 24,000–23,950 के आसपास है और इसके बाद 23,850 के आसपास मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, रेजिस्टेंस 24,100–24,150 और उसके बाद 24,250 पर दिख रहा है। लगातार इन लेवल के ऊपर बने रहने से और बढ़त का रास्ता खुल सकता है।

BSE सेंसेक्स 105 अंक यानी 0.14% बढ़कर 77,100 पर बंद हुआ। इंडेक्स सीमित दायरे में ट्रेड करता रहा लेकिन पॉजिटिव जोनन में बंद होने में कामयाब रहा,जो निचले लेवल पर लगातार खरीदारी का सपोर्ट दिखाता है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,900–76,700 के आसपास है। जबकि रेजिस्टेंस 77,300–77,500 के पास दिख रहा है। इस जोन के ऊपर ब्रेकआउट से बुलिश मोमेंटम और मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर मार्केट पॉजिटिव रुख के साथ कंसोलिडेट होता रहा,जिससे पता चलता है कि सेशन के दौरान सीमित बढ़त के बावजूद खरीदारों का दबदबा बना हुआ है। जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने हुए हैं,तब तक मार्केट का स्ट्रक्चर पॉजिटिव बना रहेगा। ट्रेडर्स अच्छे रिस्क मैनेजमेंट के साथ गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, क्योंकि मुख्य ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर आना ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की कहानी में एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव मांग में कमी के कारण नहीं,बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की वजह से आया है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इससे सप्लाई में आई वह रुकावट दूर हो रही है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक देश भारत के लिए यह निश्चित रूप से अच्छी खबर है। तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की गिरावट से भारत का सालाना आयात बिल लगभग 12 से 15 अरब डॉलर कम हो जाता है। इससे करंट अकाउंट पर दबाव कम होता है और भारतीय रिजर्व बैंक को विकास को बढ़ावा देने के लिए उधार की लागत (ब्याज दरों) को अनुकूल बनाए रखने की अधिक गुंजाइश मिलती है।

घरेलू बाजारों ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। 25 जून को सेंसेक्स 77,000 के स्तर को पार कर गया और निफ्टी 24,100 के आसपास मज़बूत बना रहा। इसमें ऑटो,एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयरों ने बढ़त में अहम भूमिका निभाई। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए निकट भविष्य का आउटलुक अच्छा दिख रहा है,बशर्ते क्रूड की कीमतें 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में स्थिर रहें और मॉनसून उम्मीद के मुताबिक अच्छा रहे।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिज़नेस हेड,अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में लंबी छुट्टी से पहले,निवेशकों ने कारोबारी सत्र के अंतिम हिस्से में मुनाफावसूली की,जिससे बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। चूंकि मुहर्रम के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहेंगे,इसलिए निवेशकों ने अपनी इक्विटी होल्डिंग कम कर दी। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमी पर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं,ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज में VP टेक्निकल रिसर्च अमोल अठावले ने कहा कि इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। काफी उतार-चढ़ाव के बाद,निफ्टी 0.18 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स में 297 अंकों की बढ़त हुई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई,जबकि मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट हुई और यह 4.40 प्रतिशत नीचे आया। हफ्ते के दौरान,तेज गिरावट के बाद मार्केट को 50 डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज)के पास सपोर्ट मिला और इसमें तेजी से सुधार हुआ। हालांकि,एक बार फिर इसे 24,200/77,800 के रेजिस्टेंस जोन के पास प्रॉफिट बुकिंग का सामना करना पड़ा।

टेक्निकल तौर पर मार्केट ने एक रेंज-बाउंड पैटर्न बनाया है। नीचे की तरफ,इसे 50 डे SMA या 23,800/76,200 के पास सपोर्ट मिला है,जबकि 24,200-24,250/77,800-78,000 के रेजिस्टेंस लेवल के पास लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। पोजीशनल ट्रेडर्स के लिए, 24,000/77,000 एक इमीडिएट सपोर्ट जोनन का काम करेगा। इस लेवल के ऊपर,मार्केट 24,200/77,800 को फिर से टेस्ट कर सकता है। 24,200/77,800 के लेवल को सफलतापूर्वक पार करने पर मार्केट 24,400-24,500/78,400-78,700 की ओर बढ़ सकता है।

दूसरी ओर 24,000/77,000 के नीचे जाने पर मार्केट 23,800/76,200 तक गिर सकता है। गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है और इंडेक्स 23,650/75,700 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी के लिए,सपोर्ट जोन 57,800 और 57,500 पर हैं। इन लेवल के ऊपर,तेजी 58,700-59,000 की ओर जारी रह सकती है। इसके उलट, 57,500 के नीचे जाने पर अपट्रेंड कमजोर हो सकता है।

 

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डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

CSB Bank का शेयर 6% लुढ़का, फेयरफैक्स के पूरी हिस्सेदारी बेच सकने की रिपोर्ट से भारी बिकवाली

प्राइवेट सेक्टर के CSB Bank के शेयरों में 25 जून को दिन में 6 प्रतिशत तक की गिरावट दिखी। बीएसई पर भाव 322 रुपये के लो तक गया। शेयर में गिरावट की दो वजहें सामने आ रही हैं। पहली मुख्य वजह यह है कि ऐसी खबर है कि कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की अगुवाई वाली फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स, CSB बैंक में अपनी पूरी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। मनीकंट्रोल को सूत्रों से पता चला है कि फेयरफैक्स ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक नई बोली लगाई है।

इस सौदे से सरकार और LIC, दोनों मुख्य शेयरधारकों को लगभग 50,000 करोड़ रुपये या 5 अरब डॉलर से कुछ अधिक मिलने की संभावना है। संशोधित प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और सौदा सही दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

इसलिए CSB Bank में बेच सकती है पूरा हिस्सा

संबंधित लोगों का यह भी कहना है कि फेयरफैक्स ने प्रतिबद्धता जताई है कि बैंकिंग क्षेत्र में IDBI बैंक ही उसका एकमात्र निवेश होगा। नतीजतन, IDBI Bank का अधिग्रहण करने पर वह CSB बैंक में अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह से बेच देगी। ऐसा इसलिए क्योंकि RBI के नियमों के तहत कोई प्रमोटर दो बैंकिंग लाइसेंस नहीं रख सकता है।

फेयरफैक्स ने 2018 में CSB बैंक (जिसे तब कैथोलिक सीरियन बैंक के नाम से जाना जाता था) को बचाने के लिए एक बेलआउट डील के तहत 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। एक साल बाद बैंक को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया।

गोल्ड की कीमत में गिरावट भी एक वजह

सोने की कीमतों में दबाव के कारण गुरुवार को गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। साथ ही CSB बैंक लिमिटेड जैसे गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े लेंडर्स के शेयरों में भी गिरावट है। गोल्ड के फिसलने की वजह है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते US फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने और उसके बाद US डॉलर के मजबूत होने का डर बना हुआ है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई है, जो पिछले 7 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है। CSB Bank के कुल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा लगभग 42-45% है।

CSB Bank का मार्केट कैप घटकर 5600 करोड़ रुपये रह गया है। शेयर साल 2026 में अब तक 33 प्रतिशत गिरा है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Trading Strategy: अब अगली तेजी 24250 के ऊपर निकलने पर आएगी, जब तक निफ्टी 24100 के ऊपर है ट्रेंड रहेगा मजबूत

Trading Strategy: लार्जकैप के दम पर आज मार्केट में तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि मार्केट ब्रेथ कमजोर है। नरम क्रूड और रुपये की मजबूती से सेंटिमेंट अच्छे हुए हैं। निफ्टी 170 प्वाइंट से ज्यादा चढ़कर 24200 के ऊपर दिख रहा है। बैंक निफ्टी भी 58500 के पार कारोबार कर रहा है। मिडकैप में भी रौनक है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX 3% फिसलकर 13 के नीचे आ गया है। कच्चे तेल में गिरावट और ब्याज दरें ना बढ़ने की उम्मीद में ऑटो शेयरों में फर्राटा रफ्तार आई है। मारुति करीब 5% उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना है। साथ ही M&M,मदरसन और TVS मोटर भी 4% दौड़े हैं।

रियल्टी,NBFCs और FMCG में भी अच्छी तेजी है। तीनों सेक्टर इंडेक्स करीब 1 फीसदी चढ़े हैं। रियल्टी में प्रेस्टीज,गोदरेज प्रॉपर्टीज और लोढ़ा 2 फीसदी चढ़े हैं। लेकिन मजबूत डॉलर इंडेक्स से मेटल शेयरों में लगातार तीसरे दिन मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।

बाजार: लार्ज कैप में रैली

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल, इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आज फिर बाजार में चुनिंदा लार्ज कैप शेयरों में रैली हुई है। निफ्टी चला है लेकिन ब्रेथ खराब है। हालांकि 1-2 दिन की चाल को ट्रेंड नहीं समझ सकते। लेकिन ऐसा चलता रहा तो रिस्क का रास्ता खुलेगा। खैर,अगले हफ्ते उसका भी जवाब मिल जाएगा। फिलहाल आज का दिन निफ्टी के लिए बढ़िया रहा। 24,250 की रजिस्टेंस पार करने बाद रुका। ऑटो शेयरों के लिए आज शानदार दिन है। तकरीबन हर ऑटो एंसिलरी शेयर में रैली है। इंटरग्लोब फिर से आज रफ्तार का घोड़ा बना। सिर्फ मेटल में आज गिरावट आई। मेटल शेयरों की गिरावट के लिए सुबह ही तैयार किया था।

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बाजार: अब क्या?

अब अगली तेजी 24,250 के ऊपर निकलने पर आएगी। 24,100 के ऊपर जब तक हैं,ट्रेंड मजबूत है। अगर 24,200 के ऊपर क्लोजिंग हो जाए तो शानदार रहेगा। बैंक निफ्टी में 58,500 का पहला टारगेट हासिल हुआ। 59,000 और 59,500 के टापगेट अभी बाकी हैं। ऑरेकल ने फिर से आवाज के दर्शकों को मोटी कमाई कराई है। इंटरग्लोब में भी 4000 से 5400 की एकतरफा रैली रही।

निफ्टी -बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,050-24,100 पर सपोर्ट और 24,200-24,250 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 58,200-58,400 पर सपोर्ट और 58,800-59,000 पर रेजिस्टेंस है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : GIFT Nifty में बढ़त को देखते हुए,भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स 25 जून को बढ़त के साथ शुरुआत करने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 24,081.50 के आसपास ट्रेड कर रहा था। करेंसी और इक्विटी बाजारों में आज क्या हो रहा है यह जानने के लिए मनीकंट्रोल के साथ बने रहें। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

24 जून को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। IT,रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर निफ्टी ने 24,000 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेतों के बाद तेल सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं,जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 790.54 अंक या 1.04 प्रतिशत बढ़कर 76,991.22 पर और निफ्टी 197.55 अंक या 0.83 प्रतिशत बढ़कर 24,021.65 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

सुबह 07.40 बजे के आसपास गिफ्ट निफ्टी 87 अंक यानी 0.36 फीसदी की बढ़त के साथ 24,108.50 के आसपास कारोबार कर रहा था।

एशियाई बाजार

एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान के निक्केई में 3.55 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं,स्ट्रेट टाइम्स 0.15 फीसदी की तेजी दिखा रहा है। हैंगसेंग 1.43 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान के बाजार में 1.13 फीसदी की बढ़त है। कोस्पी 4.62 फीसदी ऊपर दिख रहा है। वहीं,शांघाई कंपोजिट में 0.14 फीसदी की गिरावट नजर आ रही है।

अमेरिकी बाजार

बुधवार को नैस्डैक और S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी वजह टेक शेयरों में आई गिरावट थी। हालांकि,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस और ट्रैवल से जुड़े शेयरों को फायदा हुआ और डाओ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 अंक या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया,जबकि S&P 500 में 7.24 अंक या 0.10% की गिरावट आई और यह 7,358.22 पर बंद हुआ। वहीं,नैस्डैक कम्पोजिट 110.40 अंक या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

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डॉलर इंडेक्स

गुरुवार को डॉलर तेजी से ऊपर चढ़ते हुए चार्ट रेजिस्टेंस के स्तर को पार कर गया। यह लगभग एक साल की अपनी सबसे बड़ी मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। ट्रेडर्स को उम्मीद है कि मज़बूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को सहारा देगी,साथ ही वे महंगाई के अहम आंकड़ों का भी इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल डॉलर इंडेक्स 101.58 के स्तर पर नजर आ रहा है।

US बॉन्ड यील्ड

अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड एक बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.40% हो गई है। जबकि 2-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड मामूली रूप से बढ़कर 4.14% हो गई है।

एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा कमजोर दिख रहा है। इसमें 0.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन में 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। चीनी रेनमिनबी पर भी दबाव बना हुआ है और इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि ताइवान डॉलर 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

उधर मलेशियाई रिंगित 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे कारोबार कर रहा है। इसके बाद फिलीपीन पेसो का नंबर है, जिसमें 0.12 प्रतिशत की मजबूती आई है। थाई बाहत में 0.07 प्रतिशत की बढ़त हुई है। जबकि, जापानी येन और सिंगापुर डॉलर में 0.03 प्रतिशत और 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त है।

कच्चे तेल में नरमी

गुरुवार को तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है और यह युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुच गया है। ईरान के साथ US इज़राइल युद्ध को खत्म करने के शुरुआती समझौते के बाद,फंसे हुए टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बाहर निकल गए हैं,जिससे तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं कम हुईं है,इसका असर तेल कीमतों पर देखने को मिल रहा है। WTI क्रूड में 0.91 फीसदी की और ब्रेंट क्रूड में 1.03 फीसदी की गिरावट आई है।

गोल्ड

गुरुवार को सोने की कीमतों में और गिरावट आई है और ये सात महीने से ज्यादा के निचले स्तर के आस-पास ही बना हुआ है। कोमेक्स पर गोल्ड में 0.38 फीसदी की गिरावट दिख रही है। वहीं,चांदी 0.39 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है।

विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर एक नजर

24 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,843 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹3,637 करोड़ के शेयर खरीदे,जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला।

Gold Silver Price Outlook: ‘गिरावट पर खरीदें सोना-चांदी, नया रिकॉर्ड हाई कर रहा इंतजार’, स्विस एशिया कैपिटल की सलाह

Gold Silver Price Outlook: हाल में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। इससे बहुत से निवेशक घबरा गए हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इसे खतरे की घंटी नहीं, बल्कि खरीदारी का मौका मानना चाहिए। Swiss Asia Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) जुएर्ग कीनर का मानना है कि मौजूदा कमजोरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं आगे चलकर नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती हैं।

पिछले कुछ समय से सोना और चांदी दबाव में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। हालांकि कीनर का कहना है कि लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी में तेजी आने के कई कारण हैं। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर ऐसी गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका होती है। हम हमेशा गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ाने में भरोसा रखते हैं।’

चांदी की सप्लाई अब भी तंग

कीनर के मुताबिक, कीमती धातुओं का भंडार अभी भी काफी कम है। खासकर चांदी में सप्लाई की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि एशियाई और पश्चिमी बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर इस बात का संकेत है कि फिजिकल सप्लाई अभी भी तंग बनी हुई है।

उनका कहना है कि बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है और सप्लाई भी सीमित है। ऐसे में कीमतों को लंबे समय तक नीचे बनाए रखना आसान नहीं होगा।

महंगाई फिर बन सकती है बड़ा फैक्टर

हाल के महीनों में निवेशकों का ध्यान ब्याज दरों पर ज्यादा रहा है। लेकिन कीनर का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई फिर से बाजार का बड़ा मुद्दा बन सकती है। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो सोना और चांदी जैसे ऐसे एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। इन पर भले ही ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है।

उनका यह भी मानना है कि दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक कमजोर आर्थिक वृद्धि से जूझ रही अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देते रहेंगे। इससे भी कीमती धातुओं को फायदा मिल सकता है। कीनर ने कहा कि यही अगली बड़ी तेजी की वजह बन सकती है और कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर तक जा सकती हैं।

माइनिंग-इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी बुलिश

कीनर सिर्फ सोने-चांदी पर ही नहीं, बल्कि माइनिंग कंपनियों के शेयरों को लेकर भी सकारात्मक हैं। उनका कहना है कि मजबूत कैश फ्लो होने के बावजूद कई माइनिंग शेयरों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के लिए अवसर बने हैं।

उन्होंने कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स पर भी भरोसा जताया। उनके मुताबिक, इन धातुओं में भी सप्लाई और मांग का संतुलन बिगड़ा हुआ है और भंडार कम हैं। इसलिए बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

कच्चे तेल पर क्या है राय?

कीनर का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक भंडार अभी भी कम हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन भंडारों को फिर से भरने की जरूरत होगी, जिससे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है।

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इकोनॉमी पर भी पड़ेगी कमजोर मानसून की मार, S&P ने कहा- घट सकती है भारत की GDP ग्रोथ

रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6.6% रह सकती है। एजेंसी का मानना है कि गैस-तेल के ऊंचे दाम, कमजोर मानसून और वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.7% रही थी। वहीं FY25 में यह 7.1% थी। S&P का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6.6% के अनुमान के बराबर है। महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए S&P को उम्मीद है कि RBI इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

क्यों घट सकती है GDP ग्रोथ?

S&P के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एनर्जी मार्केट दबाव में हैं। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और महंगाई के जोखिम में इजाफा होता है।

एजेंसी ने यह भी कहा कि अल नीनो के असर से मानसून कमजोर पड़ा है। 22 जून तक देश में बारिश सामान्य से 43% कम दर्ज की गई थी। कमजोर मानसून का असर खेती और ग्रामीण मांग दोनों पर पड़ सकता है।

स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के लिए वैकल्पिक फसल योजनाएं तैयार की हैं। इनमें कम बारिश की स्थिति में होने वाली फसलों की सिफारिश की गई है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

S&P का कहना है कि तेल का दाम बढ़ने से उद्योगों का खर्च बढ़ रहा है। सप्लाई चेन पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। इसके अलावा उर्वरक (Fertiliser) महंगे होने से खेती की लागत बढ़ सकती है। यह फैक्टर खाद्य उत्पादन और खाद्य कीमतों दोनों पर असर डाल सकता है।

एजेंसी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर 5.1% तक पहुंच सकती है। तीसरी तिमाही में महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत अंक तक ज्यादा रह सकती है।

S&P के मुताबिक, कंपनियां तेल के बढ़े दाम का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। हाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी भी महंगाई बढ़ाएगी।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर क्या कहा?

अपनी रिपोर्ट ‘Economic Outlook Asia-Pacific Q3 2026: AI-Exposed Markets To Outperform’ में S&P ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की तस्वीर तीन बड़े फैक्टर से तय होगी। इनमें वैश्विक आर्थिक गतिविधियों की मजबूती, कच्चे तेल का दबाव और AI बेस्ड टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट में तेजी शामिल है।

एजेंसी का कहना है कि फिलहाल भारत समेत पूरे क्षेत्र पर कच्चे तेल की लागत और महंगाई का दबाव बना हुआ है। इसका असर आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

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