रांची स्टूडेंट प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके की एंट्री, देवेंद्र नाथ महतो का बड़ा फैसला

ranchi student protest

झारखंड में JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बातचीत की और पानी पीने की अपील की। सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी देवेंद्र महतो के समर्थन में रांची आ रहे हैं। इस बीच JPSC मामले में CID ने 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, कुल गिरफ्तारियां 14 पहुंचीं।

 

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की और उनका हाल-चाल जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

 

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं। कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।

 

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी। इसके बाद महतो ने पानी पीकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया। 

 

रांची जाएंगे अभिजीत दिपके

जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के जरिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने में सफल रहे सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने भी रांची जाकर देवेंद्र नाथ महतो का समर्थन करने का फैसला किया है। 

 

एग्जाम में गड़बड़ी मामले में अब तक 14 गिरफ्तार

CID झारखंड ने JPSC एग्जाम में कथित गड़बड़ियों की चल रही जांच के सिलसिले में 3 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों की संख्या अब 14 हो गई है।

कनाडा में प्रदर्शन कर रही पंजाबी छात्रा का दर्द:रोकर बोली- जमीन बेच पढ़ने भेजा, यहां वर्क परमिट नहीं दे रहे, घर में आटा भी नहीं आ रहा

कनाडा के पोर्टाज कॉलेज में पढ़ रहे पंजाबी छात्रों का आंदोलन में दर्द छलका है। पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के रिजेक्शन मिलने से स्टूडेंट्स 3 हफ्ते से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने आंकड़े शेयर करते हुए बताया कि हालिया पोल्स के मुताबिक, 485 रिजेक्शन के मुकाबले 50 से भी कम अप्रूवल मिले हैं। जबकि, पोटाज कॉलेज ने एडमिशन के वक्त वादा किया था कि उन्हें PGWP मिलेगा और उनकी डिग्री वैध होगी। अब जब उनके लाखों रुपए कोर्स पर बर्बाद हो गए तो घर जाने के लिए कह रहे हैं। पंजाब की एक छात्रा ने बताया- हालात ये हैं कि रेंट मांगकर भरना पड़ रहा है। 3 दिन भूखी रही। हफ्तों आटा नहीं आ पा रहा। मुझे भेजने के लिए ससुरालवालों ने जमीन तक बेच दी। 22 से 25 लाख रुपए बर्बाद हो गए। अब ससुराल वालों को क्या बताऊं, कैसे घर जाऊं? जो लोग सोचते हैं कि कनाडा में मजे हैं, वे देखे लें, ये यहां की कड़वी सच्चाई है। एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि कनाडा में वर्क परमिट के चक्कर में वह दादा की मौत पर नहीं जा पाई। अब पैसा बर्बाद हो चुका है। घरवालों को क्या बताएं? यह कहते ही वह रोने लगी। पिता की मौत पर 1 साल पहले घर गई छात्रा को कनाडा इमिग्रेशन विभाग ने यह कहते हुए वर्क परमिट देने से इनकार कर दिया कि उसकी एंट्री 2024 में नहीं हुई है। धरना दे रहे स्टूडेंट्स की ऐसी ही दर्द भरी कहानियां हैं। कुछ पर कर्ज का बोझ है तो कई पेरेंट्स को न बता पाने से डिप्रेशन में हैं। आइए जानते हैं, उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी… सड़कों पर धरना दे रहे स्टूडेंट्स ने परेशानियां बताईं… ससुरालवालों ने जमीन बेचकर भेजा, यहां भूखी रह रही हूं अपना नाम न बताते हुए एक मैरिड छात्रा ने बताया कि वह 2 साल से ज्यादा वक्त से कनाडा के पोर्टाज कॉलेज में पढ़ रही है। ससुराल वालों ने अपनी जमीन बेचकर उसे यहां भेजा था। अब इमिग्रेशन विभाग ने कहा कि उनकी डिग्री मान्य नहीं है। छात्रा ने बताया- हालात ये हैं कि किराए तक के पैसे नहीं हैं। गैस स्टेशन पर काम तक नहीं मिल रहा। मैं 3 दिन भूखी रही। 7-7 दिन घर पर आटा नहीं आ रहा है। अब मैं अपने ससुरालवालों से क्या कहूं और उनका 22 लाख रुपए का कर्ज कैसे लौटाऊं? जब यहां कोई काम ही नहीं मिल रहा है। 32 हजार डॉलर फीस भरी गई। हम 24 घंटे नियमों और कायदों के दायरे में रहे और कभी कोई गलत काम नहीं किया। मुझे पता है कि उन्होंने फीस के पैसे कैसे जुटाए थे। कॉलेज के खिलाफ वकील तक नहीं कर सकते पंजाबी स्टूडेंट जशन सिंह ने बताया कि किसी को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी। वह अपना 2 साल का डिप्लोमा पूरा कर वर्क परमिट के लिए आए थे, लेकिन हाल ही में नियम बदलने के कारण बड़ी संख्या में रिजेक्शन मिलने लगे हैं। उनका सवाल यह है कि अगर मंजूरी या रिजेक्शन मिल रहा है, तो वह किस आधार पर दिया जा रहा है? जशन ने कहा- हम मुख्य कैंपस भी गए थे और इस मुद्दे पर बात की थी, लेकिन वहां से कोई समाधान नहीं मिला। कॉलेज प्रशासन का साफ कहना था कि वे न तो वकील कर सकते हैं और न ही किसी तरह की मदद कर सकते हैं। दादा की मौत पर पंजाब नहीं जा पाई, यहां भी सब बर्बाद हो गया पंजाबी छात्रा जसमीत कौर ने रोते हुए बताया कि वह यहां 3 साल पहले एल्गोमा यूनिवर्सिटी आई थी, लेकिन फीस ज्यादा होने के कारण उसने अपनी पढ़ाई बदल ली। उसने यहां सब पता किया था कि कोर्स के बाद PGWP मिलेगा और इसका भविष्य में अच्छा स्कोप है। 2 साल पढ़ाई करने के बाद अब सब कुछ बेकार लग रहा है। जसमीत कौर ने कहा- मेरे लगभग 32 हजार डॉलर डूब गए हैं। इसी दौरान मेरे दादा की मौत हो गई। अगर मुझे पहले से पता होता कि ऐसा सब होने वाला है, तो मैं सब कुछ छोड़कर तुरंत वापस चली जाती, ताकि कम से कम आखिरी बार अपने दादा को देख पाती। अब न तो वे वापस आ सकते हैं और न ही पैसे वापस मिल सकते हैं। कॉलेज की भेजी हुई ईमेल भी, फिर भी नहीं मान रहे एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि उनके कॉलेज की तरफ से उन्हें साफ कहा गया था कि वे PGWP के लिए एलिजिबल हैं। इसके लिए उनके पास कॉलेज की भेजी हुई ईमेल भी है। कॉलेज ने उन्हें एक पत्र भी दिया था, ताकि वे उसका उपयोग कर वर्क परमिट ले सकें, लेकिन अब इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) उस पत्र को भी खारिज कर रही है और कह रही है कि यह मान्य कारण नहीं है। छात्र मई 2023 में पढ़ाई के लिए आए थे और जब नवंबर 2024 में नया नियम लागू हुआ, तब तक उनकी पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी थी। आशीष बोले- सांसद और विधायक प्रदर्शन में साथ दें स्टूडेंट आशीष बूरा ने कहा कि सभी छात्र आज अपनी मांग उठाने के लिए एकत्र हुए हैं। पहले वे सिटी हॉल गए थे, लेकिन वहां ज्यादा देर रुकने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए फिर उन्होंने इस जगह पर इकट्ठा होने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि अब उनके कई साथी भाई-बहन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। वहां काफी संख्या में छात्र जमा हैं और उन्होंने लोगों से समर्थन मांगने के लिए हॉर्न बजाने की अपील करने वाले पोस्टर लगाए हैं, जिस पर सड़कों से गुजरने वाले लोग लगातार हॉर्न बजाकर अपना पूरा समर्थन दिखा रहे हैं। आशीष ने स्थानीय सांसदों (MP) और विधायकों (MLA) से भी इस प्रदर्शन में साथ देने की अपील की है, क्योंकि यह पूरी बिरादरी और समाज का मामला है। उनकी सरकार से बस यही मांग है कि सभी छात्रों के साथ पूरा इंसाफ और न्याय किया जाए। मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे पंजाबी स्टूडेंट्स छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे मानसिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उनके हेल्थ कार्ड और सिन (SIN) नंबर एक्सपायर हो चुके हैं, जिससे वे काम भी नहीं कर पा रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि अगर छात्र कोई नियम तोड़ते हैं तो उन पर पेनल्टी लगती है या फीस दोबारा ली जाती है। अब जब IRCC और कॉलेज अपनी कही बातों से मुकर रहे हैं और अचानक नियम बदलकर गलतियां कर रहे हैं, तो वे इसका हर्जाना छात्रों को क्यों नहीं देते? पूर्व सांसद छात्रों के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैलगरी के पूर्व सांसद और वकील देवेंद्र शौरी ने छात्रों के समर्थन में कहा कि कनाडा सरकार को अपने नियमों में मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। छात्रों को एक रास्ता दिखाया गया था, उन्होंने पैसे और समय लगाया और जब वे मंजिल के पास पहुंचे तो उनसे सीढ़ी खींच ली गई, जो पूरी तरह से गलत है। PGWP किसे मिलता है? PGWP एक ऐसा ओपन वर्क परमिट है जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को कनाडा में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देता है। इसके लिए जरूर है कि छात्र ने किसी डेजिग्नेटेड लर्निंग इंस्टीट्यूशन (DLI) से पढ़ाई पूरी की हो जो PGWP देने के लिए पात्र हो। इसके अलावा, प्रोग्राम की अवधि कम से कम 8 महीने की होनी चाहिए। 8 महीने से छोटे कोर्स के लिए PGWP नहीं मिलता। पढ़ाई के दौरान छात्र का लगातार फुल-टाइम स्टूडेंट रहना अनिवार्य है। कोर्स पूरा होने के 180 दिनों के भीतर आवेदन करना होता है। आवेदन के समय छात्र के पास वैध स्टडी परमिट या लीगल टेंपररी स्टेटस होना चाहिए। वे नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम जिन पर PGWP नहीं मिल रहा क्रेडिट प्रोग्राम वे कोर्स हैं जो किसी आधिकारिक डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट की ओर ले जाते हैं। इनके अंक यूनिवर्सिटी या कॉलेज की मुख्य शैक्षणिक डिग्री में जुड़ते हैं। वहीं, नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम ऐसे कोर्स होते हैं जो आमतौर पर व्यक्तिगत विकास, भाषा सीखने, स्किल ट्रेनिंग, या कम अवधि के वोकेशनल सर्टिफिकेट के लिए होते हैं। इनके अंक मुख्य डिग्री में नहीं जुड़ते। कनाडा के अप्रवासन नियमों के तहत नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम PGWP के लिए पात्र नहीं होते। यदि किसी छात्र ने ऐसा कोर्स किया है जिसमें एकेडमिक क्रेडिट नहीं मिलते, तो उसे पढ़ाई के बाद वर्क परमिट नहीं दिया जाता। IRCC ने ये नियम बदले ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… कनाडा में आंधी-बारिश में सड़कों पर 500 पंजाबी छात्र, बोले- लाखों का कोर्स किया, अब वर्क परमिट से इनकार कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 1000 भारतीय छात्र संकट में हैं। ये पिछले 3 हफ्ते से अल्बर्टा के कैलगरी में प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ ने 29 जुलाई से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इनमें 500 छात्र पंजाबी हैं। जो बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र अल्बर्टा के कैलगरी में सड़कों पर डटे हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

कनाडा में 500 पंजाबी स्टूडेंट्स पर डिपोर्टेशन का खतरा:आंधी-बारिश में सड़कों पर डटे; लड़कियां डिप्रेशन में, बोलीं- पढ़ाई में ₹20 लाख खर्च

कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 500 पंजाबी छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। इसके विरोध में करीब 1,000 भारतीय छात्र पिछले तीन हफ्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं। बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र अल्बर्टा के कैलगरी में सड़कों पर डटे हुए हैं। कनाडाई इमिग्रेशन अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए कुछ छात्रों ने 29 जुलाई से भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। छात्रों का कहना है कि जिन नियमों और भरोसे के आधार पर उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया, लाखों रुपए खर्च कर पढ़ाई पूरी की, अब उसी पढ़ाई को नॉन-क्रेडिटेबल बताकर वर्क परमिट से इनकार किया जा रहा है। इससे कई लड़कियां डिप्रेशन में हैं, सिर पर परिवार का कर्ज है। उन्होंने कनाडा में पढ़ाई की है, इसलिए उन्हें वहां काम करने का मौका मिलना चाहिए। वे चाहते हैं कि कनाडाई अधिकारी उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करें। इधर, कनाडा सरकार और अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि वह पोर्टेज कॉलेज को सीधे तौर पर फर्जी डिग्री देने वाला संस्थान नहीं कहेंगी, लेकिन उनका मानना है कि संस्थान ने स्थायी निवास (PR) को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर जानकारी दी हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों का वीजा खत्म हो जाएगा और जिनके पास स्थायी निवास (PR) नहीं होगा, उन्हें अपने देश वापस लौटना होगा। छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे, 4 पॉइंट में जानिए… गुरुद्वारा कमेटी आई आगे, कहा- लंगर की फिक्र न करें, हिम्मत रखें
कैलगरी के लोकल गुरुद्वारा साहिब ने छात्रों के लिए दरवाजे खोले हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह समय बहुत कठिन है, लेकिन कोई भी बच्चा पैनिक होकर गलत कदम न उठाए। परिवार से कोई बात न छुपाएं। गुरु घर के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। किसी को राशन, लंगर या रहने की दिक्कत हो तो निसंकोच आएं, पूरी मदद की जाएगी। लीगल एक्सपर्ट्स बोले- री-अप्लाई न करें, कोर्ट जाएं
बैठक में पहुंचे कानूनी सलाहकार रमन चहल और हरवीर सिद्धू ने छात्रों को कानूनी रास्ते समझाए। वकीलों ने बताया कि इमिग्रेशन विभाग को तुरंत वेब-फॉर्म के जरिए री-कंसीडरेशन की रिक्वेस्ट भेजी जाए। CS इमिग्रेशन ने ऐलान किया है कि वे सभी छात्रों के लिए यह काम मुफ्त करेंगे। रिफ्यूजल मिलने के 15 दिनों के अंदर छात्रों को फेडरल कोर्ट में मामले को चुनौती देनी होगी। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि छात्र दोबारा वर्क परमिट के लिए री-अप्लाई न करें। अगर फाइल दोबारा रिजेक्ट हुई, तो तुरंत देश छोड़ने का नोटिस आ सकता है। 90 दिनों में नए कॉलेज में एडमिशन से बचा सकते स्टेटस
कानूनी सलाहकार रमन चहल और हरवीर सिद्धू ने कहा कि छात्रों को सलाह दी गई है कि कानूनी लड़ाई के साथ-साथ 90 दिनों के भीतर किसी मान्यता प्राप्त पब्लिक कॉलेज में नया कोर्स लेकर अपना स्टूडेंट स्टेटस रीस्टोर करें, ताकि वे कनाडा में लीगल रह सकें। **************** ये खबर भी पढ़ें: कनाडा में 9 हजार पंजाबियों पर डिपोर्टेशन की तलवार लटकी: नए इमिग्रेशन कानून से शरणार्थी की मान्यता खत्म, 30 हजार स्टूडेंट्स को मिला नोटिस कनाडा में नया इमिग्रेशन बिल पास होने के बाद 9 हजार पंजाबियों पर डिपोर्टेशन की तलवार लटक गई है। इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने C-12 बिल पास होने के बाद 30 हजार शरणार्थियों को नोटिस जारी किए हैं। नए बिल में शरणार्थियों की मान्यता खत्म कर दी गई है। (पढ़ें पूरी खबर)

अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

शिक्षामंत्री का इस्तीफा: किसी की जीत नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित है

A picture of students protesting at Jantar Mantar against the education system and the NEET-UG exam

क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,

कर्तव्य पथ पर जो मिला, यह भी सही वह भी सही। — अटल बिहारी वाजपेयी

 

राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जब बात देश के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और करोड़ों विद्यार्थियों के हित की आती है, तब केवल और केवल राष्ट्र प्रथम का विचार ही सर्वोपरि रहता है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में हुआ नेतृत्व परिवर्तन केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह परिपक्व राजनीति, नैतिक उच्चता और देश को अस्थिर करने व अराजकता फैलाने का प्रयास करने वाली ताकतों को दिया गया मजबूत और करारा संदेश है।

 

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या कुर्सी से कहीं ऊपर देश और युवाओं का भविष्य है, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वयं लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है। जब जंतर-मंतर पर विभिन्न आंदोलनों और उपद्रवों की आड़ में देश को उद्वेलित करने और असंतोष फैलाने की साजिश रची जा रही थी, तब उन्होंने देश की युवाशक्ति के भविष्य को भ्रम और अनिश्चितता से बचाने के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।

 

उन्होंने पहले ही दिन से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सीबीआई जांच सौंपी और कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड जैसी व्यवस्थाएं लागू की। जब यह साफ दिखने लगा कि विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में देशविरोधी और असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने का एजेंडा चला रहे हैं, तब उन्होंने पद त्याग कर विरोधियों की पूरी साजिश को एक झटके में नाकाम कर दिया। उनके इस कदम से सिद्ध हुआ कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के लिए पद नहीं, बल्कि देश और विद्यार्थियों का हित ही सर्वोपरि है।

 

यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी पहले भी इस्तीफा दे सकते थे? लेकिन जैसे ही पेपर लीक का विषय सामने आया, उन्होंने जिम्मेदारियों से भागने के बजाय नीट-यूजी की परीक्षा का पुनः आयोजन पूर्ण पारदर्शिता के साथ करवाया।

उन्होंने नीट का परिणाम आने और पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता से संपन्न होने के बाद ही अपना इस्तीफा सौंपा। यदि वे विवाद के शुरुआती दौर में इस्तीफा दे देते, जब पूरा विपक्ष और असामाजिक तत्व चील की तरह नज़रें गड़ाए बैठे थे, तो इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया में प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो सकता था। अतः पूरी प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के उपरांत ही इस्तीफा सौंपना अत्यंत व्यावहारिक, रणनीतिक और सही कदम था।

 

राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रहलाद जोशी को सौंपी है। वे एक बहुत ही अनुशासित, दृढ़ और परिणाम-उन्मुख नेता माने जाते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर्नाटक के हुबली स्थित ईदगाह मैदान में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने के प्रखर राष्ट्रवादी संकल्प से हुई थी।

केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला व खान मंत्री के रूप में उन्होंने कई कठिन विधायकी कार्यों और संकटपूर्ण परिस्थितियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। वे अपने सख्त अनुशासन, प्रशासनिक पकड़ और स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों को बिना किसी गतिरोध के आगे बढ़ाने में वे पूरी तरह सक्षम हैं। 

 

एक घोर राष्ट्रवादी और दृढ़ नेतृत्व के हाथों में शिक्षा मंत्रालय आने से देश की शिक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होने की आशा है। फिर भी इन सबके बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा अब पूरी तरह जनता के सामने आ चुकी है।

आंदोलन के नाम पर अनशन, उग्र और अश्लील नारों तथा सनातन धर्म एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निशाने पर लेने का प्रयास किया गया। सोनम वांगचुक जैसे चेहरों की भूख हड़ताल को आगे रखकर व्यवस्था पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की गई, लेकिन देश के जागरूक नागरिकों ने इस विघटनकारी सोच को अच्छी तरह समझ लिया है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने तथाकथित छात्र नेताओं और आंदोलनकारियों के दोहरे मापदंडों की भी पोल खोल दी है। जो खुद को छात्रों का रहनुमा बताते फिर रहे हैं, वे गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना में हुए पेपर लीक मामलों पर पूरी तरह खामोश बैठे हैं और मीडिया के सवालों से कतराते दिख रहे हैं।

लेकिन इन छात्र संगठनों और प्रवक्ताओं द्वारा वहां के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की जा रही? यह चुप्पी साबित करती है कि यह आंदोलन छात्रों के हित में नहीं, बल्कि केवल भाजपा से राजनीतिक द्वेष के तहत विपक्ष द्वारा प्रेरित था।

 

वहीं सरकार ने इस पूरे एजेंडे के जवाब में एक साथ कई बड़े रणनीतिक लक्ष्य साध लिए हैं। आंदोलन की आड़ में संसद का काम रोकने और देश का माहौल खराब करने का लक्ष्य पूरी तरह विफल हो गया है।

विपक्षी पार्टियों की पोल खुली है कि उनके लिए देश से पहले पार्टी है। वहीं हिंसक गतिविधियों और उपद्रव में लिप्त तत्वों की पहचान हो चुकी है, जिससे अब कानून के अनुसार उन पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही, विपक्षी राज्यों में भी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर वहां की सरकारों को घेरने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

कहते हैं अधर्म और षड्यंत्र रचने वाली शक्तियों को लगता है कि वे कुछ समय के लिए भ्रम फैला सकती हैं, लेकिन इतिहास साक्षी है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने भी धर्म की स्थापना के लिए चुनौतियों का सामना किया और अंततः रावण तथा कंस जैसी ताकतों का समूल नाश हुआ।

सनातन संस्कृति और देश को अस्थिर करने वाले अपने ही जाल में उलझकर रह गए हैं। उनका देश को नेपाल और बांग्लादेश बनाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है। सत्य और धर्म की राह में सामयिक चुनौतियां अवश्य आती हैं, किंतु जीत राष्ट्रहित की ही होती है। एक बार फिर सिद्ध हो चुका है कि भारत की नीतियां किसी दबाव या षड्यंत्र से तय नहीं होंगी, वे केवल और केवल राष्ट्रहित से ही संचालित होंगी।

जंतर-मंतर के बाद अब पंजाब में पेपर लीक पर हल्ला बोलेगी सीजेपी! अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बात

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने रविवार को पंजाब में कथित पेपर लीक मामले को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि संगठन इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी अगली योजनाओं की घोषणा करने के लिए थोड़ा समय चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिपके ने कहा, “हमारा विरोध प्रदर्शन अभी कल ही खत्म हुआ है। कृपया हमें थोड़ा समय दीजिए, इसके बाद हम आगे की योजना साझा करेंगे।”

36 दिनों से चल रहा थी आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में संगठन की स्थापना की थी। यह कदम उस समय उठाया गया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस संगठन की शुरुआत की। 6 जून को अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत लौटे और नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया। इस दौरान संगठन ने उन 20 छात्रों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर नीट पेपर लीक मामले से जुड़ी परिस्थितियों के बाद आत्महत्या कर ली थी। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े। उन्होंने घोषणा की कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहेंगे। वांगचुक के शामिल होने के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन और गति मिली।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर में हो रहा था प्रदर्शन

शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर 36 दिनों से चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। यह फैसला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद लिया गया। मंत्री का इस्तीफा संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल था, जिसे लेकर सीजेपी लगातार आंदोलन कर रही थी। कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना अभिजीत दिपके ने इस साल की शुरुआत में की थी। संगठन की शुरुआत उस समय हुई, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद दिपके ने युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए इस मंच का गठन किया।आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान किया, जिसके बाद इस आंदोलन को देशभर में और अधिक समर्थन मिलने लगा।

 

Bhumi Pednekar: ‘आज हमारे… लिए एक बहुत बड़ा पल है’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भूमि पेडनेकर ने शेयर किया नोट

Bhumi Pednekar: एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखा और कहा कि यह पल एक मज़बूत और निष्पक्ष भारत की शुरुआत का प्रतीक है। एक्ट्रेस ने यह उम्मीद भी जताई कि यह अहम पल कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की दिशा में एक सार्थक बदलाव लाएगा।

उन्होंने लिखा, “उम्मीद है कि इससे हमारा भारत और मज़बूत और बेहतर बनेगा। आज हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत अहम पल है। ऐसे नागरिक जिन्होंने हार नहीं मानी और ऐसी लीडरशिप जिसने उनकी बात सुनी। युवाओं ने अपनी बात रखी; उनका पक्का इरादा, उनकी हिम्मत और बदलाव की ताकत में उनका भरोसा वाकई प्रेरणा देने वाला था।”

उन्होंने आगे कहा, “उस मंच पर बहुत कुछ कहा गया, लेकिन आखिर में वही आवाज़ गूंजी जो छात्र सही मायने में चाहते थे। मेरे लिए, जवाबदेही का मतलब है असल और समाधान-केंद्रित बदलाव लाना। कमियों को पहचानना और उन्हें दूर करना। ऐसा असली सुधार जो सच में हमारे छात्रों के भविष्य की चर्चा पर असर डाले। मुझे लगता है कि हर भारतीय के लिए—चाहे आप किसी सरकारी पद पर हों या आम नागरिक—देश, उसकी खुशहाली, उसके लोग और उसकी सुरक्षा हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए। जय हिंद।”

राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच हफ़्तों तक चले बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शनों और लगातार जन-आंदोलन के बाद, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया। छात्र परीक्षा में गड़बड़ियों, खासकर NEET-UG पेपर लीक को लेकर उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। उनका इस्तीफ़ा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बाद आया है।

पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और नाराज़ नागरिक बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर छात्रों का समर्थन करने के लिए उमड़ पड़े।

ये विरोध-प्रदर्शन दिल्ली से पहले मेट्रो शहरों और फिर छोटे कस्बों तक फैल गए। 18 जुलाई की सुबह, सोनम वांगचुक को 21 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी करने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से दिल्ली पुलिस द्वारा ज़बरदस्ती हटाए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन और तेज़ हो गए।

अधिकारियों ने उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरी सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर हैं।

Dharmendra Pradhan Resigns: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर रणवीर शौरी ने उठाए सवाल, बोले- सपोटर्स की न सुनके सड़क पर मौजूद कॉकरोच…

Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।

अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।

जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”

हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।

फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।

‘अभी खाली नहीं होगा जंतर-मंतर…’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान

पेपर लीक मामले और राजधानी दिल्ली में जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक की जिम्मेदारी मैंने पहले दिन ही ले ली थी। इससे पहले CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का पहला रिएक्शन सामने आया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि, ” यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन हमारी दो और मांगें हैं। हम ऐसे ही नहीं मानेंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्हें यह मिलना चाहिए। उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। और दूसरी बात, 20 तारीख को जिन पुलिस वालों ने गुंडागर्दी की, उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

इससे पहले सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे। हम किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होंगे।”

बता दें कि, CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के साथ ही देश के कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थी। वहीं NEET पेपर लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

Dharmendra Pradhan Resign: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया

दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।  NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर देशभर में जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उन्होंने यह फैसला लिया।

सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से मैंने इस पर जिम्मेदारी ली। इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प रहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे। हम किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होंगे।”

बता दें कि, CJP की अगुवाई में छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने से भी अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के साथ ही देश के कई राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही थी। वहीं NEET पेपर लीक को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को लिखा ये पत्र 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बने हालात का कोई भी देश-विरोधी तत्व गलत फायदा न उठा सके, देश में एकता बनी रहे और छात्र किसी कानूनी विवाद में न फंसें। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता छात्रों की पढ़ाई और उनका भविष्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया।

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