GK: किस देश में सबसे पहले बनीं थी बिरयानी? कहानी भले ही उलझी है, लेकिन खुशबू और स्वाद लाजवाब

चाहे वह हैदराबाद की स्मोकी दम बिरयानी हो, कोलकाता की मशहूर आलू वाली बिरयानी हो या लखनऊ की खुशबूदार अवधी बिरयानी….खाने के शौकीनों के बीच बहुत पसंद की जाती है। फिर भी एक सवाल दशकों से बहस का विषय बना हुआ है- असल में बिरयानी किस देश में बनी थी? हालांकि बहुत से लोग मानते हैं कि इसकी शुरुआत भारत में हुई थी, लेकिन इतिहासकारों का मानना ​​है कि इसका जवाब खुद इस डिश की तरह ही कई परतों वाला और कठिन है।

ज्यादातर खाने-पीने के इतिहासकार बिरयानी की शुरुआत प्राचीन फारस (आज का ईरान) से मानते हैं। माना जाता है कि ‘बिरयानी’ शब्द भी फारसी शब्दों ‘बिरिंज’ (जिसका मतलब है चावल) और ‘बिरयान’ (जिसका मतलब है ‘तला हुआ’ या ‘पकाने से पहले भुना हुआ’) से बना है। फारसी रसोइए चावल के साथ मीट, जड़ी-बूटियां, सूखे मेवे और केसर की परतें लगाकर शानदार चावल के व्यंजन बनाते थे। इसी से उस चीज की नींव पड़ी जो बाद में आधुनिक बिरयानी बनी।

बिरयानी असल में भारत कैसे पहुंची, यह आज भी बहस का विषय है। एक प्रचलित थ्योरी का श्रेय मुगल साम्राज्य को जाता है। माना जाता है कि वहां के शाही रसोइयों ने सैनिकों के लिए चावल, मांस और खुशबूदार मसालों को मिलाकर एक पौष्टिक ‘वन-पॉट मील’ (एक ही बर्तन में बनने वाला खाना) तैयार किया था। एक और मत यह है कि यह डिश फारसी व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और रईसों के साथ बहुत पहले ही आ गई थी, जो मुगल आने से पहले काफी पहले दक्कन में बस गए थे।

कुछ इतिहासकार दक्षिण भारत में और भी पुराने कनेक्शन की ओर इशारा करते हैं। ऐतिहासिक संदर्भों में बताया गया है कि दूसरी सदी ईस्वी में ही आज के तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में योद्धाओं को चावल और मांस से बना एक खास व्यंजन परोसा जाता था। हालांकि यह आज की बिरयानी से अलग था, लेकिन ऐसे व्यंजनों के होने से पता चलता है कि सदियों के दौरान भारत की अपनी पाक-कला परंपराएं शायद फारसी खाना पकाने के तरीकों के साथ मिलकर कुछ बिल्कुल नया बन गईं।

जैसे-जैसे बिरयानी पूरे उपमहाद्वीप में फैली, हर इलाके ने इसमें अपनी खास पहचान जोड़ी। अवध की शाही रसोई में नाज़ुक लखनवी बिरयानी को और बेहतर बनाया गया, जिसमें खुशबूदार चावल और हल्के मसालेदार मीट को अलग-अलग पकाया जाता है और फिर उनकी परतें एक साथ लगाई जाती हैं। वहीं, हैदराबाद ने मशहूर ‘दम’ स्टाइल को बेहतरीन बनाया। इसमें मैरीनेट किए हुए मीट, केसर वाले चावल और खुशबूदार मसालों को एक बर्तन में सील करके धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है, जब तक कि चावल के हर दाने में स्वाद न समा जाए।

बिरयानी को साधारण पुलाव से जो चीज असल में अलग बनाती है, वह है इसे बनाने का खास तरीका और इसकी परतें। पारंपरिक रूप से, मीट को दही, मसालों, लहसुन और प्याज के साथ मैरीनेट करके थोड़ा पकाया जाता है। इसके बाद, खुशबूदार बासमती चावल, केसर वाला दूध, घी और साबुत मसालों की परतें लगाई जाती हैं और फिर बर्तन को ‘दम’ पर पकाने के लिए सील कर दिया जाता है। धीरे-धीरे भाप में पकाने की इस तकनीक से सभी स्वाद आपस में मिल जाते हैं और चावल भी खिले-खिले और खुशबूदार बने रहते हैं।

समय के साथ, बिरयानी में स्थानीय स्वाद और सामग्री के हिसाब से बदलाव आए। तटीय इलाकों में झींगे और मछली से सीफ़ूड बिरयानी बनाई गई, जबकि पनीर, सब्ज़ियों या कटहल वाली वेज बिरयानी भी उतनी ही लोकप्रिय हुई। कोलकाता ने इसमें आलू जोड़े, मालाबार में खुशबूदार छोटे दाने वाले चावल का इस्तेमाल हुआ, सिंधी बिरयानी अपने तेज़ मसालों के लिए मशहूर हुई और कश्मीर ने इसमें सूखे मेवे और नट्स शामिल किए, जिससे यह साबित हुआ कि कोई भी दो बिरयानी बिल्कुल एक जैसी नहीं होतीं।

आज, कोई भी एक देश सचमुच बिरयानी पर अपना मालिकाना हक नहीं जता सकता। हो सकता है कि इसकी शुरुआती प्रेरणा फारस से मिली हो, लेकिन इसे भारतीय उपमहाद्वीप में ही वह रूप मिला-खूब सारे मसालों वाली और अलग-अलग इलाकों की खासियत वाली डिश-जिसे लाखों लोग पसंद करते हैं। बिरयानी सिर्फ एक खाना नहीं है, बल्कि यह इस बात की एक स्वादिष्ट याद दिलाती है कि कैसे अलग-अलग संस्कृतियां, व्यापार, लोगों का आना-जाना और सदियों से खाने-पीने में हुए नए प्रयोग मिलकर दुनिया की सबसे मशहूर डिश में से एक बना सकते हैं।

भारत का बॉर्डर रेल प्रोजेक्ट! चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर 45000 करोड़ खर्च कर बिछेगा रेलवे का जाल

Indian Rail Border Project: बदलती रीजनल मोबिलिटी और रणनीतिक चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘ब्लूमबर्ग’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपनी स्ट्रैटिजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिशों के तहत चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अपनी सीमाओं पर रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अपग्रेडेशन के लिए लगभग ₹45000 करोड़ ($4.7 बिलियन) के निवेश की योजना बना रहा है। आने वाले 18 से 24 महीनों के भीतर लागू होने वाली यह परियोजना अगले दो वर्षों के लिए नियोजित कुल रेलवे इंफ्रा आउटले का करीब 22 फीसदी हिस्सा है।

इन सीमावर्ती राज्यों में बिछेगा रेलवे का जाल

रिपोर्ट के मुताबिक इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस खर्च का इस्तेमाल देश के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में नई पटरियां बिछाने, नए प्लेटफॉर्म बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। इस योजना में पाकिस्तानी सीमा से लगते पश्चिमी राज्य पंजाब और राजस्थान, बांग्लादेश सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटे पश्चिम बंगाल और असम के रणनीतिक क्षेत्र, चीन सीमा के पास और सुदूर पर्वतीय क्षेत्र वाले हिमाचल और पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं।

आपको बता दें कि ये नया प्लान भारत सरकार के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क, पुल और सुरंगों बनाने के उस $3.4 बिलियन ($340 करोड़) के प्लान से भी बड़ा है, जिसकी जानकारी पहले सामने आई थी।

संवेदनशील सीमाओं पर बदलती रणनीतिक स्थितियां

सीमावर्ती कनेक्टिविटी पर भारत का ये फोकस तब सामने आया है जब पड़ोसी देशों के साथ संबंध नए फेज में आगे बढ़े हैं। 6 साल पहले हुई घातक झड़प के बाद चीन के साथ संबंधों में अब स्थिरता आई है। आपको बता दें कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ एक ब्रीफ कॉन्फ्लिक्ट देखने को मिला था। इसके अलावा साल 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक उलटफेर ने भारत के पहले से स्थिर साझेदारी के संबंधों को जटिल बना दिया है।

नागरिक सुविधा के साथ सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती

इस भारी निवेश से डुअल यूजर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये सिविलियन रेलवे नेटवर्क होंगे जिनका इस्तेमाल आम नागरिकों की आवाजाही के लिए तो होगा ही, साथ ही आपात स्थिति में ये सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी पूरा सहारा देंगे।

हिमालयी क्षेत्रों, सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसी संवेदनशील सीमाओं तक उच्च क्षमता वाले, ऑल-वेदर रेल नेटवर्क को मजबूत करके ट्रूप मोबलाइजेशन टाइम को भी स्ट्रैटिजकली कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिजनल प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ यह अहम सप्लाई लाइन को भी सुरक्षित करता है।

सीमावर्ती बुनियादी ढांचे पर पीएम मोदी का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को लगातार प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार ने इसे लेकर लगातार कदम उठाए हैं। पाकिस्तान सीमा के पास 1450 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। डोकलाम के करीब इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर है।

पिछले साल कश्मीर घाटी को बाकी भारत से जोड़ने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का उद्घाटन किया गया। पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत में लगभग 1700 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गई हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के इस्तेमाल के लिए 1962 से निष्क्रिय पड़े एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से सक्रिय किया गया है।

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चीन की ओर से भी जारी है निर्माण

रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी तरफ चीन ने भी 2017 में डोकलाम में हुए सैन्य गतिरोध के बाद से अपनी ओर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण काफी तेज कर दिया है। चीन अपनी सीमा में एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। चीन के इस विस्तार ने उपकरण और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के जरिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को बढ़ाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भारत के रेल मंत्रालय की ओर से इस निवेश योजना पर कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं आई है।

Share Market New Timing: एक-दो नहीं, तीन क्लोजिंग टाइम; आज 3 अगस्त से बदल रही पूरी ट्रेडिंग

Share Market New Timing: आज तीन अगस्त है और आज से शेयर मार्केट की टाइमिंग पूरी तरह से बदल रही है। अब शाम 03:30 PM पर ही इक्विटी मार्केट में शेयरों का लेन-देन बंद नहीं होगा बल्कि 10 मिनट और मिलेंगे। हालांकि यह सुविधा सभी स्टॉक्स के लिए नहीं होगी। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मार्केट की एफिसिएंसी और ट्रांसपैरेंसी बढ़ाने और लिक्विडिटी को बेहतर करने के साथ-साथ भारतीय शेयर मार्केट को वैश्विक मानकों के हिसाब से बनाने के लिए नया ट्रेडिंग फ्रेमवर्क लागू किया है। इसके तहत एफएंडओ (F&O) डेरिवेटिव्स सेगमेंट का समय बढ़ाकर 3:40 PM तक कर दिया गया है। हालांकि मॉर्निंग टाइम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस नए बदलाव से निवेशकों से लेकर ट्रे़डर्स तक सभी पर असर पड़ेगा।

Share Market New Timing: क्या हुआ है बदलाव

नए नियमों के तहत सेबी ने F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) सेगमेंट के ट्रेडिंग टाइम को 10 मिनट के लिए बढ़ा दिया है। स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स यानी एफएंडओ सेगमेंट में अब सुबह 9:15 AM से 3:40 PM तक ट्रेडिंग की जा सकेगी। हालांकि जो स्टॉक्स एफएंडओ सेगमेंट में नहीं हैं, उनकी ट्रेडिंग का समय पहले की तरह ही रहेगा और उनका लेन-देन 3:30 PM तक ही हो सकेगा। नए नियमों के तहत F&O वाली कंपनियों के शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस सिर्फ आखिरी 30 मिनट के औसत भाव से तय नहीं होगा, बल्कि एक नीलामी प्रक्रिया के जरिए तय होगा।

अब ये है नियम

मार्केट में सबसे बड़ा बदलाव तो ये है कि अब एक नहीं बल्कि तीन क्लोजिंग टाइम होगा।

जो स्टॉक्स एफएंडओ सेगमेंट से बाहर हैं, उनकी सामान्य ट्रे़डिंग 03:30 तक होगी। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

F&O स्टॉक्स (कैश मार्केट) 03:15 PM तक जारी रहेगी और उसके बाद 03:35 PM तक CAS (क्लोजिंग ऑक्शन सेशन) चलेगा।

स्टॉक और इंडेक्स एफएंडओ ट्रे़डिंग 03:40 PM तक चालू रहेगी।

क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए क्यों पड़ी CAS की जरूरत

ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के मुताबिक किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस और उसका आखरी ट्रेड प्राइस (LTP) एक नहीं होता। मान लीजिए एक शेयर पूरे दिन ₹1,000 से ₹1,010 के बीच ट्रेड हो रहा था लेकिन 3:29 PM पर किसी ने जल्दबाजी में 10 शेयर ₹980 में बेच दिए। अगर ₹980 को ही क्लोजिंग प्राइस मान लिया जाए, तो यह उस शेयर की असली वैल्यू नहीं दिखाएगा। अब तक इससे बचने के लिए VWAP (वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस) मेथड का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब आज 3 अगस्त 2026 से सेबी इसे और ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लाया है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

E20 पेट्रोल पर नया विवाद, जयराम रमेश ने माइलेज और इंजन खराबी को लेकर सरकार से पूछे सवाल

jairam ramesh questions E-20 petrol

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने E20 पेट्रोल को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि E20 लागू होने के बाद माइलेज में कमी, इंजन की समस्या और पुराने वाहनों में खराबी की शिकायतें बढ़ी हैं। ALSO READ: बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया 'खेला', भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई 2026 को संसद में E20 पेट्रोल के देशभर में रोलआउट पर नितिन गडकरी के जवाब ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दावा किया कि E20 को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है।

 

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक लगातार निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं-

 

  • माइलेज में कमी
  • इंजन के प्रदर्शन में गिरावट
  • E20 ईंधन का वाहनों पर दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता
  • 2023 से पहले के वाहनों में इंजन की कम्पैटिबिलिटी, कोल्ड-स्टार्ट की समस्या और इंजन के तेजी से घिसने की शिकायतें
  • पुराने वाहनों में फ्यूल इंजेक्टर जाम होना, फ्यूल लाइन में जंग लगना और रबर के पुर्जों में दरारें आने की बढ़ती घटनाएं
  • आम उपभोक्ताओं के पास E20 पेट्रोल के अलावा व्यावहारिक रूप से कोई दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा गया।

 

उन्होंने कहा कि जून 2026 में 2023 से पहले के पेट्रोल वाहनों के 44,000 से अधिक मालिकों पर किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में पाया गया कि E20 लागू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने वाहनों पर प्रतिकूल प्रभाव महसूस किया। ALSO READ: Lovlina Borgohain ने ग्लास्गो के रेस्टोरेंट में पकड़ी बड़ी गलती, भारत के नक्शे पर जताई आपत्ति

 

सितंबर 2025 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बायोफ्यूल के कारण वाहन या इंजन को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायतों को “BS” (bullshit) करार दिया था। इसके बावजूद मोदी सरकार लगातार इन दावों को खारिज करती रही है, जबकि जुलाई 2026 की ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट और नीति आयोग के 2021 एथेनॉल पॉलिसी रोडमैप-जिसका संसद में स्वयं नितिन गडकरी ने हवाला दिया था-स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं कि-

 

  • E20, E10 ईंधन के लिए डिज़ाइन किए गए वाहनों में रबर के पुर्जों-जैसे होज़, सील, गैस्केट और O-rings-को अधिक तेजी से खराब करता है।
  • ड्यूरेबिलिटी परीक्षणों के दौरान यात्री वाहनों में इंजन की खराबी और फेलियर दर्ज किए गए।
  • E20 फ्यूल टैंक और अन्य आंतरिक धातु के पुर्जों में जंग लगने का जोखिम बढ़ाता है।
  • E20 के कारण पुराने चार पहिया वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी 6-7%, पुराने दो पहिया वाहनों की 3-4% और E20-अनुकूल चार पहिया वाहनों की भी 1-2% तक कम हो जाती है।

 

उन्होंने कहा कि लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। लोग जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, मोदी सरकार के मंत्री किसी को भी यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहे हैं कि E20 से कोई नुकसान नहीं होता- क्योंकि इसके बारे में कोई ठोस डेटा या रिपोर्ट मौजूद नहीं है।

हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के बिना भी भारत ने Commonwealth Games में जीते 39 मेडल

commonwealth games

कई मुख्य खेल जैसे कि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के ना होने के बावूजद भी भारत ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दम दिखाया और 39 मेडल पाकर अंकतालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। ऐसा माना जा रहा था जहां भारत के सफलतम वैश्विक खेल नदारद है वहां मेडल तालिका में भारत अंकतालिका में शीर्ष दस देशों में आ जाए तो बड़ी बात होगी।

टेबल टेनिस में भी सिर्फ पुरुष और महिला के टीम मैच हुए थे, एकल और युगल नहीं। टेबल टेनिस में भारत ने मलेशिया को हराकर दोनों स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।लेकिन भारोत्तोलन, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फी्लड इवेंट के साथ पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने झंडे गाढे़।

भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है।भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते।

मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते।निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया।

कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई।ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।

हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के बिना भी भारत ने Commonwealth Games में जीते 39 मेडल

commonwealth games

कई मुख्य खेल जैसे कि हॉकी, कुश्ती और शूटिंग के ना होने के बावूजद भी भारत ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दम दिखाया और 39 मेडल पाकर अंकतालिका में चौथा स्थान प्राप्त किया। ऐसा माना जा रहा था जहां भारत के सफलतम वैश्विक खेल नदारद है वहां मेडल तालिका में भारत अंकतालिका में शीर्ष दस देशों में आ जाए तो बड़ी बात होगी।

टेबल टेनिस में भी सिर्फ पुरुष और महिला के टीम मैच हुए थे, एकल और युगल नहीं। टेबल टेनिस में भारत ने मलेशिया को हराकर दोनों स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।लेकिन भारोत्तोलन, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स के ट्रैक एंड फी्लड इवेंट के साथ पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने झंडे गाढे़।


भारतीय खिलाड़ियों ने 11 दिन तक चले खेलों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन करके साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल खेल महाशक्तियों में से एक है।भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक जीते। आस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण समेत 171 पदक जीतकर शीर्ष रहा जबकि इंग्लैंड ने 110 और कनाडा ने 62 पदक जीते।

मेजबान स्कॉटलैंड 39 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा। मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत समेत दस पदक जीते। जूडो खिलाड़ियों ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन करके पदक जीते।निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेल नहीं होने से भारत के पदकों की संख्या कम हुई है लेकिन बाकी खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया।

कुछ घटनाओं ने निराश भी किया जैसे खेलों से पहले ही जूडो खिलाड़ी तूलिका मान डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठिकाने का पता बनाने में तीन बार नाकाम रहने के कारण अस्थायी तौर पर निलंबित हो गई और खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई।ग्लास्गो से विदा लेने के बाद अब नजरें अहमदाबाद पर होंगी जहां 2030 में खेल होने हैं।

अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या होता है? जानें इसका मतलब और इसे कैसे बेहतर करें

अपने क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना खुद की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है. भारत में आपको लोन, क्रेडिट कार्ड्स या दूसरी क्रेडिट फैसिलिटीज आसानी से तभी मिल सकती हैं, जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो. ट्रांसयूनियन CIBIL की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक 119 मिलियन भारतीयों ने अपना CIBIL स्कोर चेक किया था. ये पिछले साल के मुकाबले 51% ज्यादा है, यानी 43.6 मिलियन ज्यादा लोग अपने क्रेडिट स्टेटस को लेकर एक्टिव हुए हैं. खास बात ये कि Gen Z और मिलेनियल्स 77% हिस्सेदारी के साथ इसमें सबसे आगे हैं.

रिपोर्ट कहती है कि 46% लोग, जो रेगुलर अपने CIBIL स्कोर और रिपोर्ट चेक करते हैं, 6 महीने में अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर कर लेते हैं. ये उन 41% लोगों से ज्यादा है, जो अपने स्कोर पर ध्यान नहीं देते. यानी क्रेडिट को एक्टिवली मैनेज करने से स्कोर बेहतर होता है, जिससे कम इंटरेस्ट रेट्स, अच्छे ऑफर्स और ज्यादा क्रेडिट लिमिट मिल सकती है. आइए, समझते हैं कि अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या है और इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है.

क्रेडिट स्कोर क्या है?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर है, जो आपकी क्रेडिटवर्थिनेस दिखाता है, यानी आप उधार लिया पैसा चुकाने में कितने काबिल हैं. ये आपके क्रेडिट हिस्ट्री पर बेस्ड होता है. भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 तक होता है. 750 से 900 का स्कोर सबसे अच्छा माना जाता है.

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क्रेडिट स्कोर की रेंज को ऐसे समझें:

  • 750-900: ये शानदार स्कोर है. इस रेंज में आपको क्रेडिट आसानी से मिलेगा और अच्छे टर्म्स पर.
  • 650-749: ये अच्छी रेंज है. आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ठीक है, लेकिन टॉप स्कोर जितनी मजबूत नहीं.
  • 550-649: ये एवरेज रेंज है. क्रेडिट मिल सकता है, लेकिन इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा हो सकते हैं और टर्म्स उतने अच्छे नहीं.
  • 550 से नीचे: ये कमजोर स्कोर है. इस रेंज में क्रेडिट पाना मुश्किल हो सकता है.

भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो हैं, इनमें ट्रांसयूनियन CIBIL, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और CRIF हाई मार्क शामिल हैं. हर ब्यूरो की रेंज और इंटरप्रिटेशन में थोड़ा अंतर हो सकता है.  

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

आपके क्रेडिट स्कोर को ये चीजें प्रभावित करती हैं:

  • पेमेंट हिस्ट्री: लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI टाइम पर चुकाना बहुत जरूरी है. लेट पेमेंट्स या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नीचे ला सकते हैं.
  • क्रेडिट यूसेज: अपनी क्रेडिट लिमिट का ज्यादा यूज करना स्कोर को नुकसान पहुंचाता है. कोशिश करें कि 30% से ज्यादा लिमिट इस्तेमाल न हो.
  • लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके स्कोर को बेहतर करता है, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट बिहेवियर की ज्यादा जानकारी मिलती है.
  • क्रेडिट टाइप्स: क्रेडिट कार्ड्स और लोन जैसे अलग-अलग क्रेडिट का मिक्स होना अच्छा है, बशर्ते आप इन्हें जिम्मेदारी से मैनेज करें.
  • नए क्रेडिट एप्लिकेशंस: छोटे वक्त में कई क्रेडिट कार्ड्स या लोन के लिए अप्लाई करना स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. हर एप्लिकेशन से हार्ड इन्क्वायरी होती है, जो स्कोर को थोड़ा कम करती है.

क्रेडिट स्कोर कैसे बेहतर करें?

क्रेडिट स्कोर को बेहतर करना आसान नहीं, लेकिन थोड़ी मेहनत से यह संभव है. ये रहे कुछ टिप्स:

  • टाइम पर बिल्स पे करें: क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स और लोन EMI हमेशा टाइम पर चुकाएं. ऑटोमैटिक पेमेंट्स सेट करें ताकि ड्यू डेट मिस न हो.
  • क्रेडिट कम यूज करें: अपनी क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा यूज न करें. इससे लेंडर्स को लगता है कि आप क्रेडिट को जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट रेगुलर चेक करें और कोई गलती या फ्रॉड दिखे तो ठीक करवाएं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.
  • नए क्रेडिट के लिए ज्यादा जल्दबाज़ी न करें: हर एप्लिकेशन से स्कोर थोड़ा कम हो सकता है. जरूरत पड़ने पर ही नए क्रेडिट के लिए अप्लाई करें.
  • हेल्दी क्रेडिट मिक्स रखें: सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड क्रेडिट का बैलेंस आपके स्कोर को बेहतर कर सकता है.

क्रेडिट स्कोर को कैसे मैनेज करें?

क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब आपके पास सही टूल्स हों. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. ये प्लेटफॉर्म आपको आपकी क्रेडिट हेल्थ की लेटेस्ट अपडेट देता है. चाहे आप अपना स्कोर जानना चाहें या उसे बेहतर करना चाहें, मनीकंट्रोल के टूल्स और इनसाइट्स आपकी मदद करेंगे.

कुल मिलाकर अच्छा क्रेडिट स्कोर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और मौकों को आसान बनाता है. भारत में 750 या उससे ज्यादा का स्कोर शानदार माना जाता है और लेंडर्स के लिए आपका फेवर बढ़ाता है. क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर और उसे मैनेज करने के लिए सही कदम उठाकर आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं और अच्छे क्रेडिट टर्म्स पा सकते हैं.

CM धामी ने की बालेश्वर मंदिर आने की अपील, जानिए क्यों खास है चंपावत का यह शिवधाम?

baleshwar temple champawat

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं को चंपावत के प्राचीन बालेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोगों से चंपावत आगमन पर इस शिवधाम दर्शन करने की भी अपील की। 

 

सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जनपद में स्थित प्राचीन बालेश्वर मंदिर भगवान शिव की दिव्य आस्था, समृद्ध इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला का अनुपम संगम है। पत्थरों पर उकेरी गई इसकी बेजोड़ नक्काशी और प्राचीन शिल्पकला सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की गौरवगाथा सुनाती है।

उन्होंने कहा कि पने चंपावत आगमन पर इस पावन शिवधाम के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और हमारी समृद्ध विरासत का अविस्मरणीय अनुभव अवश्य प्राप्त करें।

 

क्यों खास है यह मंदिर

उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और कलात्मक मंदिर है। इसका निर्माण चंद वंश के राजाओं द्वारा 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच कराया गया था। अपनी बेजोड़ पत्थर की नक्काशी और अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध यह ऐतिहासिक स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में एक राष्ट्रीय धरोहर है।

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में बाली ने यहां असुरों से शांति के लिए शिव जी की पूजा की थी, इसलिए इसे 'बालेश्वर' कहा जाता है। बालेश्वर मंदिर के अलावा इस परिसर में रत्नेश्वर मंदिर और चंपावती दुर्गा मंदिर भी स्थित हैं। मंदिर परिसर के पास एक प्राचीन प्राकृतिक जल स्रोत है, जिसके पवित्र जल का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।

भारतीय पेसर जसप्रीत बुमराह श्रीलंका दौरे से हुए बाहर, COE का बना मजाक

Jasprit Bumrah

कुछ दिनों पहले ही यह खबर आई थी कि जसप्रीत बुमराह ने अपने सभी फिटनेस टेस्ट पास कर लिए हैं। लेकिन रविवार को जब खबर आई कि जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरे श्रीलंका दौरे से ही बाहर हो गए हैं तो बैंगलूरू स्थित सैंटर ऑफ एक्सिलेंस पर भारतीय क्रिकेट फैंस सवाल उठाने लग गए।

श्रीलंका में स्पिन की मुफीद पिचें भारत का इंतजार करेंगी ऐसे में जसप्रीत बुमराह को ऐसी पिच पर आराम देने की सलाह रविचंद्रन अश्विन ने दी थी। लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशित चक्र 2025-27 को देखते हुए अब भारत की टीम ज्यादा जोखिम नहीं ले सकती। टीम इंडिया के लिए बचे हुए 9 मैचों में से 7 जीतने आवश्यक है।ऐसे में जसप्रीत बुमराह श्रीलंका के खिलाफ अगर भारत के लिए सलामी गेंदबाजी करते तो मैच जल्दी समाप्त करने में अहम भूमिका निभा सकते थे।

गौरतलब है कि जसप्रीत बुमराह ने कार्यभार प्रबंधन के तहत बोर्ड को पिछले साल इंग्लैंड टेस्ट दौरे पर यह बताया था कि वह 5 में से सिर्फ 3 मैचों का हिस्सा रहेंगे। यह सीरीज जब 2-2 से बराबर हुई तो जसप्रीत बुमराह को साफ शब्दों में बताया गया कि वह पूरी सीरीज के लिए उपलब्ध रहें या फिर पूरी सीरीज से आराम ले लें।

तेज गेंदबाज हर्षित राणा और ऑलराउंडर नीतीश रेड्डी चोटिल होने के कारण श्रीलंका के खिलाफ श्रृंखला में नहीं खेल पाएंगे। ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पहले टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं जबकि तेज गेंदबाज आकाशदीप अभी तक पीठ की दर्द से नहीं उबर पाए हैं।

Lovlina Borgohain ने ग्लास्गो के रेस्टोरेंट में पकड़ी बड़ी गलती, भारत के नक्शे पर जताई आपत्ति

Lovlina Borgohain

ग्लासगो के रेस्टोरेंट में भारत के नक्शे से नॉर्थ ईस्ट का हिस्सा गायब, बॉक्सर लवलीना ने जताई नाराजगी

स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 पदक अपने नाम किए। भारत ने स्पर्धा में चौथा स्थान हासिल किया है। जीत का जश्न मनाने एक रेस्टोरेंट पहुंची मुक्केबाजों की टीम उस समय हैरान रह गई जब उन्हें मिले नैपकिन से पूर्वोत्तर गायब मिला। जम्मू कश्मीर को भी गलत तरीके से दिखाया गया था।

 

रेस्टोरेंट में शनिवार को डिनर के दौरान रजत पदक विजेता बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने बड़ी गलती पकड़ी। उन्होंने भारतीय रेस्टोरेंट में डिनर के दौरान मिले नैपकिन पर बने भारत के नक्शे से नॉर्थ-ईस्ट को गायब करने पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। उनके साथ भारतीय दल के अधिकारी भी थे। लवलीना बोरगोहेन की इस आपत्ति को वहां के लोगों ने गंभीरता से लिया। 

ग्लासगो के पॉपुलर भारतीय रेस्टोरेंट मिस्टर सिंग्स इंडिया में भारतीय मुक्केबाजों का दल यहां डिनर के लिए पहुंचा था। टेबल पर रखी नैपकिन पर नजर पड़ते ही खुशियों का माहौल अचानक गर्मा गया। स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने ध्यान दिया कि रेस्टोरेंट के नैपकिन पर भारत का जो नक्शा छपा था, उसमें से नॉर्थ ईस्ट इंडिया का पूरा हिस्सा गायब था। इस गंभीर लापरवाही पर लवलीना ने तुरंत अपनी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट के नैपकिन पर छपे नक्शे से हमारा नॉर्थ ईस्ट इंडिया गायब है। भारत का हर एक हिस्सा बेहद अहम है और हर जगह देश का सही और पूरा नक्शा ही दिखाया जाना चाहिए।

 

BFI अध्यक्ष ने भी किया लवलीना का समर्थन

उनकी आपत्ति का बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने भी तत्काल समर्थन किया। अजय सिंह ने न केवल उत्तर-पूर्व के बारे में बोरगोहेन की बात का समर्थन किया, बल्कि उसी नक्शे में जम्मू-कश्मीर को गलत तरीके से दिखाए जाने की ओर भी इशारा किया।

 

उन्होंने बताया कि इस नक्शे में सिर्फ नार्थ ईस्ट इंडिया ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर को भी सही तरीके से नहीं दिखाया गया था। अजय सिंह ने रेस्टोरेंट प्रबंधन से इन सभी नैपकिन को तुरंत हटाने और सही नक्शे का इस्तेमाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देने वाले किसी भी स्थान पर ऐसी बड़ी गलतियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। ग्लासगो में मेहमाननवाजी के लिए मशहूर 'मिस्टर सिंह्स इंडिया' रेस्टोरेंट ने इस भौगोलिक गलती को सुधारने पर तत्काल ही ध्यान दिया और शीघ्र ही इसको दुरुस्त किया जाएगा।