IMD Weather Update: दक्षिण भारत में दस्तक दे रहा पूर्वोत्तर मानसून, 14 से 19 अक्टूबर तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

North-East Monsoon 2026: देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा और मौसमी बदलाव दर्ज किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक देश के शेष हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अगले दो दिनों के दौरान इसके पूरी तरह पीछे हटने के साथ ही दक्षिण प्रायद्वीप में पूर्वोत्तर मानसून की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का एक लंबा और व्यापक दौर शुरू होने वाला है।

पिछले 24 घंटों के मौसम की बात करें तो तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश हुई है जबकि पूर्वी राजस्थान में छिटपुट जगहों पर ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं।

दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय, इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

दक्षिण प्रायद्वीप में मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का जोर काफी बढ़ गया है। श्रीलंका तट के पास दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है जिससे जुड़ी एक ट्रफ रेखा मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली है। इसके अलावा दक्षिण अंडमान सागर पर भी एक चक्रवाती सिस्टम मौजूद है। इन प्रणालियों के असर से दक्षिण भारत के अलग अलग राज्यों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश का कड़ा पहरा रहेगाय़ तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान व्यापक बारिश होगी और कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

केरल और माहे में 15 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 15 से 18 अक्टूबर के दौरान और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर के बीच भारी बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा रायलसीमा के कुछ हिस्सों में 14 से 18 अक्टूबर तक भारी बारिश का दौर चलेगा। तेलंगाना में भी 17 अक्टूबर को भारी वर्षा का अनुमान है। तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के तटीय इलाकों में 15 से 17 अक्टूबर के दौरान 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और आकाशीय बिजली चमकने की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

उत्तर-पश्चिम भारत और पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ का असर

उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम पर नजर डालें तो उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर पर तथा उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान पर भी चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन प्रणालियों के असर से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 13 से 15 अक्टूबर के दौरान व्यापक रूप से बारिश और बर्फबारी होगी।

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 14 और 15 अक्टूबर को झमाझम बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किमी/घंटे की गति से तेज आंधी और ओलावृष्टि होने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी 13 से 19 अक्टूबर के बीच रुक-रुक कर बारिश और 15 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि व आंधी का दौर रहेगा। राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 14 से 16 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बौछारें और तेज हवाएं चल सकती हैं।

मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का मौसम हाल

मध्य भारत के छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में 13 से 19 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 13 और 14 अक्टूबर को व्यापक बारिश होगी, जबकि ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में 14 से 19 अक्टूबर के बीच छिटपुट बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 से 17 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा। पश्चिम भारत के कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान हल्की बारिश के साथ-साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

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2026 के इकोनॉमिक्स नोबेल का ऐलान आज:भारतीय मूल के अर्थशास्त्री राज चेट्टी का नाम भी चर्चा में; गरीबी से निकलने के मौके बताए

2026 के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार का ऐलान आज होगा। संभावित दावेदारों में भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी का नाम भी चर्चा में है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री राज चेट्टी ने सरकारी आंकड़ों की मदद से यह समझाने की कोशिश की है कि किसी व्यक्ति के आगे बढ़ने के मौके किन बातों पर निर्भर करते हैं। उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि कुछ शहरों में गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी कमाई करने और बेहतर जिंदगी पाने के ज्यादा मौके क्यों मिलते हैं, जबकि दूसरी जगहों पर उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल होता है। नोबेल के लिए 6 और अर्थशास्त्री भी दावेदार राज चेट्टी के अलावा कंपनियों के विलय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोजगार और अमीर-गरीब के बीच बढ़ते अंतर पर रिसर्च करने वाले अर्थशास्त्रियों के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। 1. कंपनियों के विलय से कीमतों पर असर बताने वाले एरियल पेक्स हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एरियल पेक्स ने कंपनियों के बीच मुकाबले और उनके एक होने से बाजार पर पड़ने वाले असर पर रिसर्च की है। उन्होंने स्टीवन बेरी और जेम्स लेविनसोहन के साथ मिलकर 1995 में अमेरिकी कार बाजार पर एक अहम शोधपत्र लिखा था। उनकी रिसर्च से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि दो कंपनियों के एक होने से सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं या नहीं। इससे सरकार को यह तय करने में भी मदद मिलती है कि किसी कंपनी के विलय से ग्राहकों को नुकसान हो सकता है या नहीं। 2. AI से अर्थव्यवस्था समझने वाली सुसान एथी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सुसान एथी ने अर्थशास्त्र में AI और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर काम किया है। इन तकनीकों की मदद से बड़ी मात्रा में आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है। उनकी रिसर्च से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि किसी योजना से लोगों को वास्तव में फायदा हुआ या नहीं। उदाहरण के लिए, नौकरी की ट्रेनिंग देने से लोगों की कमाई बढ़ी या नहीं और किन लोगों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला। 2007 में एथी को जॉन बेट्स क्लार्क मेडल मिला था। यह 40 साल से कम उम्र के अर्थशास्त्रियों को उनके अहम काम के लिए दिया जाता है। वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली महिला थीं। 3. टैक्स और सरकारी कर्ज का लोगों की बचत पर असर बताने वाले रॉबर्ट बैरो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री रॉबर्ट बैरो ने इस बात पर रिसर्च की है कि भविष्य में टैक्स बढ़ने की आशंका लोगों के खर्च और बचत को कैसे बदल सकती है। मान लीजिए, सरकार कर्ज लेकर लोगों का टैक्स घटा देती है। ऐसे में कुछ लोग अतिरिक्त पैसे खर्च करने के बजाय बचा सकते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सरकार भविष्य में कर्ज चुकाने के लिए टैक्स बढ़ा सकती है। इस विचार को ‘रिकार्डियन इक्विवेलेंस’ कहा जाता है। हालांकि, इस पर अर्थशास्त्रियों के बीच लंबे समय से बहस होती रही है। 4. अमीर-गरीब के बीच बढ़ते अंतर पर रिसर्च करने वाले थॉमस पिकेटी और इमैनुएल साएज पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के थॉमस पिकेटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले के इमैनुएल साएज ने इस बात पर रिसर्च की है कि समाज की कुल कमाई और संपत्ति का कितना हिस्सा अमीर लोगों के पास जाता है। उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि अमीर और गरीब के बीच आर्थिक अंतर कैसे बढ़ता है और समय के साथ कमाई का बंटवारा किस तरह बदलता है। उनकी रिसर्च ने दुनिया भर में आर्थिक असमानता पर चर्चा को बढ़ावा दिया है। 5. तकनीक और विदेशी व्यापार का नौकरियों पर असर बताने वाले डेविड ऑटोर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के अर्थशास्त्री डेविड ऑटोर ने इस बात पर रिसर्च की है कि कंप्यूटर, नई तकनीक और दूसरे देशों से व्यापार बढ़ने का नौकरियों पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने चीन के साथ बढ़ते व्यापार का भी अध्ययन किया है। उनकी रिसर्च से यह समझने में मदद मिलती है कि सस्ते विदेशी सामान के आने से कुछ उद्योगों और उनमें काम करने वाले लोगों पर क्या असर पड़ सकता है। उनका काम आज AI और ऑटोमेशन के कारण नौकरियों में होने वाले बदलावों को समझने में भी उपयोगी है। 6. बच्चों की सेहत का भविष्य पर असर बताने वाली जेनेट करी येल यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री जेनेट करी ने बच्चों की सेहत और उनकी आर्थिक स्थिति के बीच संबंधों पर रिसर्च की है। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि बचपन में गरीबी, प्रदूषण और खराब स्वास्थ्य का असर बड़े होने के बाद भी कैसे बना रहता है। उनकी रिसर्च बताती है कि बचपन में खराब माहौल का असर आगे चलकर व्यक्ति की सेहत और कमाई पर पड़ सकता है। उनके काम से यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर माहौल देना क्यों जरूरी है। अर्थशास्त्र का नोबेल बाकी पुरस्कारों से अलग है अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की मूल वसीयत में शामिल नहीं था। स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने 1968 में इसकी शुरुआत की थी। इसका आधिकारिक नाम ‘अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान में स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार’ है। यह पुरस्कार ऐसे शोध को सम्मान देता है, जिसने अर्थव्यवस्था को समझने या उससे जुड़े फैसले लेने के तरीकों में अहम योगदान दिया हो। विजेता चुनते समय यह भी देखा जाता है कि किसी शोध का लंबे समय में कितना असर पड़ा है। ———————- ये खबर भी पढ़ें…. भारतवंशी नवनीतम पिल्लै को शांति का नोबेल:ट्रम्प पर तंज, दोस्तों से कहा- आप और तालियां बजाओगे, तो शायद यह पुरस्कार बांट लूं कनाडा की लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार दिया गया है। नोबेल समिति ने उन्हें ऐसी रचनाओं के लिए सम्मानित किया है, जिनमें उन्होंने पुराने यूनानी-रोमन साहित्य को आज की जिंदगी, प्यार, रिश्तों और दुख से जोड़ा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Weather Update: फिर बदलेगा मौसम! दिल्ली-NCR समेत 6 राज्यों में आंधी, ओलावृष्टि का खतरा! यूपी समेत इन राज्यों में बारिश की चेतावनी

IMD Rain Alert: देश भर से मानसून की विदाई के बीच पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती प्रणालियों के आपस में टकराने से मौसम में बड़ा और उग्र बदलाव आ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा रविवार 11 अक्टूबर को जारी मौसम बुलेटिन के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया है। मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर समेत 6 प्रमुख राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश, ओलावृष्टि और 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वाल का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है।

दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड में ओलावृष्टि और 70 kmph की आंधी

उत्तर-पश्चिम भारत के आसमान पर एक बेहद सक्रिय मौसमी प्रणाली असर दिखा रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आज 11 अक्टूबर को दिल्ली, NCR, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश हो सकती है। आज ही दिल्ली-एनसीआर और पंजाब में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलेंगी, जो बढ़कर 70 किमी/घंटे की गति तक पहुंच सकती हैं। इन सभी 6 राज्यों व पर्वतीय क्षेत्रों में आज ओलावृष्टि होने का खतरा जताया गया है।

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में 12 से 15 अक्टूबर के दौरान भी 40 से 50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की गति से तूफानी हवाएं चलने और बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। जम्मू-कश्मीर में 13 व 15 अक्टूबर को और हिमाचल प्रदेश में 14 व 15 अक्टूबर को व्यापक बारिश और बर्फबारी का अनुमान व्यक्त किया गया है।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश और झोंकेदार हवाओं का अलर्ट

उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी मौसम का रुख बदला हुआ है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11 से 16 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश होने का अनुमान है, जबकि आज 11 अक्टूबर को राज्य के पश्चिमी हिस्सों में बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बिजली चमकने का अलर्ट है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 15 और 16 अक्टूबर को बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

राजस्थान की बात करें तो पश्चिमी राजस्थान में 11 से 15 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है। आज 11 अक्टूबर को तथा 13 से 15 अक्टूबर के दौरान पश्चिमी राजस्थान में 30 से 40 किमी/घंटे (झोंके 50 किमी/घंटे) की गति से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। पूर्वी राजस्थान में 11 और 13 अक्टूबर को छिटपुट बौछारें गिर सकती हैं।

बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत का मौसम हाल

मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों में भी चक्रवाती परिसंचरणों का असर देखा जाएगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में आज 11 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ बिजली कड़कने और हल्की बारिश की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 12 से 17 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बारिश का दौर चलेगा, जहां 12 और 13 अक्टूबर को 40 से 50 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

पूर्वी भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आज 11 अक्टूबर को व्यापक बारिश होगी। बिहार में 11-12 अक्टूबर और 15-17 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बारिश हो सकती है, जबकि 16 और 17 अक्टूबर को बिहार में 30 से 40 किमी/घंटे की गति से तेज हवाएं चलेंगी। झारखंड में 11 से 13 अक्टूबर और ओडिशा में 11 से 17 अक्टूबर तक बारिश व गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी।

पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 11 से 17 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। आज 11 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में आकाशीय बिजली गिरने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 11 से 15 अक्टूबर के दौरान 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। केरल एवं माहे और लक्षद्वीप में 15 से 17 अक्टूबर के दौरान व्यापक बारिश होगी।

जबकि 16 और 17 अक्टूबर को केरल एवं तमिलनाडु में भारी बारिश दर्ज होने का अनुमान है। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 11 से 15 अक्टूबर के बीच तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी। पश्चिम भारत के तटीय इलाकों की बात करें तो कोंकण और गोवा क्षेत्र में आज 11 अक्टूबर को मौसम बेहद गर्म और उमस भरा बना रहने का अनुमान है।

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कांग्रेस के लिए उपचुनाव का संदेश

पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों और असम की एक लोकसभा सीट के नतीजों का संदेश यह है कि अब मुस्लिम भी भाजपा को वोट दे रहे हैं और साथ ही अपने नेता की तलाश भी कर रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो भाजपा किसी स्थिति में रेजीनगर विधानसभा सीट नहीं जीत सकती थी और नगांव लोकसभा सीट पर भी उसका जीतना मुमकिन नहीं था। लेकिन नगांव सीट पर भाजपा न सिर्फ जीती, बल्कि दूसरे स्थान पर रहे एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल और कांग्रेस की शिबोमणी बोरा दोनों को मिला कर जीतने वोट मिले उससे ज्यादा वोट भाजपा के देबाशीष शर्मा को मिले। इसी तरह की स्थिति रेजीनगर सीट पर भी रही। वहां तो सभी विपक्षी पार्टियां मिल कर भी भाजपा उम्मीदवार को मिले वोट से बहुत पीछे रहीं। यह बहुत दिलचस्प परिघटना है, जिस पर विचार करने की जरुरत है।

गौरतलब है कि असम में मुस्लिम मतदाताओं ने पहले कांग्रेस को छोड़ कर अजमल की पार्टी का साथ दिया था लेकिन पिछले दो चुनावों में उसने अजमल को छोड़ा और कांग्रेस के साथ खड़े हुए तभी इस बार कांग्रेस के 19 में से 18 विधायक मुस्लिम जीते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में धुबरी सीट पर कांग्रेस के हाथ अजमल 10 लाख से ज्यादा वोट से हारे थे। लेकिन अब फिर ऐसा लग रहा है कि मुस्लिम अजमल के साथ जा रहे हैं। अजमल साढ़े पांच लाख से ज्यादा वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस सवा लाख वोट के साथ बहुत पीछे तीसरे स्थान पर रही।

ध्यान रहे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस या लेफ्ट किसी ने भी यह नहीं कहा है कि असम की नगांव या पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम सीट पर वोट चोरी करके भाजपा जीती है। दबी जुबान में कुछ नेता बोल रहे हैं लेकिन पार्टियों ने नतीजे को स्वीकार किया है। असम की नगांव सीट कांग्रेस के प्रद्योत बोरदोलोई के इस्तीफे से खाली हुई थी। वहां से भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को टिकट दिया। वे नगांव के कलेक्टर रह चुके हैं और निजी तौर पर बहुत लोकप्रिय हैं। कहा जा रहा है कि इस वजह से मुस्लिम वोट उनको मिले। ध्यान रहे नगांव में मुस्लिम आबादी 60 फीसदी के करीब है। वहां से असम के सबसे बड़े मुस्लिम नेता बदरूद्दीन अजमल खुद लड़ने पहुंचे थे। लेकिन वे जीत नही सके। उन्होंने कांग्रेस को तो तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया पर देबाशीष शर्मा को हरा नहीं पाए। शर्मा डेढ़ लाख वोट से जीते। उनको 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिली। जाहिर है मुस्लिम समर्थन के बगैर वे इतना वोट नहीं ले सकते थे।

जहां तक रेजीनगर की बात है तो वहां हिंदू आबादी 30 फीसदी के करीब है। लेकिन भाजपा के उम्मीदवार को 50 फीसदी के करीब वोट मिले। अगर यह मान लिया जाए कि एक एक हिंदू वोट उन्हीं को मिला तब भी कम से कम 20 फीसदी मुस्लिम वोट उनको मिला है। यह बहुत दिलचस्प परिघटना है। यह मुर्शिदाबाद जिला है, जहां बेलडांगा में हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी और मई के चुनाव में रेजीनगर सीट पर 65 हजार वोट से जीते, उस सीट पर उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को भाजपा ने 75 हजार वोट से हराया। हुमायूं कबीर की पार्टी दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट तीनों के लिए यह बहुत ज्यादा चिंता की बात होनी चाहिए। तीनों को मिला कर भी 10 हजार वोट नहीं आए। असम की नगांव और पश्चिम बंगाल की रेजिनगर सीट का मैसेज कांग्रेस और दूसरी सेकुलर पार्टियों के लिए बहुत खराब है। कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं की पार्टियों को अब मुस्लिम बहुल इलाकों में ज्यादा समर्थन मिलेगा। पहले मुस्लिम सेकुलर पार्टियों को इसलिए वोट देता था क्योंकि उसको लगता था कि ये पार्टियां कुछ हिंदू वोट लेकर भाजपा को हरा सकती हैं। लेकिन अगर हिंदू इन पार्टियों को वोट नहीं दे रहा है तो फिर मुस्लिम भी अपनी पार्टी और अपना नेता खोज कर उसे वोट देंगे।

सुवेंदु सरकार को शत प्रतिशत अंक

नंदीग्राम से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव नतीजा रेजिनगर विधानसभा सीट का है, जहां से भाजपा के सखारव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को 75 हजार से अधिक वोट से हराया। रेजिनगर का परिणाम पश्चिम बंगाल के साथ साथ देश की राजनीति पर गंभीर असर डालने वाला है। यह चुनाव परिणाम विपक्ष की राजनीति को भी नए सिरे से व्याख्यायित करेगा।

यदि नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव को पांच महीने पुरानी सुवेंदु अधिकारी सरकार की परीक्षा मानें तो कह सकते हैं कि सुवेंदु शत प्रतिशत अंक के साथ उतीर्ण हुए हैं। नंदीग्राम सीट जीतने का जो रिकॉर्ड उन्होंने खुद बनाया था वह रिकॉर्ड उनकी उम्मीदवार हसीरानी रथ ने तोड़ दिया। इस रिकॉर्ड का टूटना सुवेंदु अधिकारी की अपनी उपलब्धि में शुमार होगा। सुवेंदु ने 2016 के चुनाव में एक रिकॉड बनाया था, जब उन्होंने सीपीआई के अब्दुल कबीर शेख को 81 हजार से ज्यादा वोट से हराया था। उसके 10 साल बाद 2026 के उपचुनाव में उनकी चुनी हुई उम्मीदवार हसीरानी रथ ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साझा उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक लाख 22 हजार से ज्यादा वोट से हराया। यह निजी तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व और उनकी सरकार के कामकाज पर सिर्फ नंदीग्राम की जनता की नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की जनता की स्वीकृति की मुहर है।

नंदीग्राम से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव नतीजा रेजिनगर विधानसभा सीट का है, जहां से भाजपा के सखारव सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को 75 हजार से अधिक वोट से हराया। रेजिनगर का परिणाम पश्चिम बंगाल के साथ साथ देश की राजनीति पर गंभीर असर डालने वाला है। यह चुनाव परिणाम विपक्ष की राजनीति को भी नए सिरे से व्याख्यायित करेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह चुनाव परिणाम दशकों से स्थापित कई राजनीतिक मान्यताओं और धारणाओं को तोड़ने वाला है।

रेजिनगर विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में आती है, जहां पूरे जिले में औसत मुस्लिम आबादी 55 से 60 फीसदी के करीब है। उसमें भी रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 70 फीसदी है। मुर्शिदाबाद जिले के ही बेलडांगा में हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी है। बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद उन्होंने एजेयूपी नाम से पार्टी का गठन किया और दो सीटों से चुनाव लड़े। तमाम निगेटिव प्रचार के बावजूद वे दोनों सीटों से जीते। रेजिनगर सीट पर हुमायूं कबीर 58 हजार से ज्यादा वोट से जीते थे। लेकिन उनके इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर उनके बेटे गुलाम नबी आजाद 75 हजार से ज्यादा वोट से हारे। हुमायूं कबीर जितने वोट से जीते थे उतना वोट भी उनके बेटे को नहीं मिला। रेजिनगर सीट के चुनाव परिणाम की एक विशेष बात यह भी रही कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की पारंपरिक प्रतिद्वंद्री पार्टियों यानी कांग्रेस, तृणमूल और वामपंथी तीनों को मिला कर सिर्फ 13 हजार वोट मिले। लगातार 15 साल पश्चिम बंगाल में राज करने वाली ममता बनर्जी की पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को सिर्फ 3,797 वोट मिले।

जिस विधानसभा सीट पर 70 फीसदी मुस्लिम आबादी हो उस सीट पर भाजपा के हिंदू उम्मीदवार को 63 फीसदी से ज्यादा वोट मिले। अगर तर्क के लिए यह मान लिया जाए कि सभी 30 फीसदी हिंदुओं ने भाजपा उम्मीदवार को वोट किया तब भी कम से कम 33 फीसदी मुस्लिम वोट भाजपा को मिले हैं। हर तीन में से एक मुस्लिम मतदाता ने भाजपा को वोट किया है। यह बहुत बड़ा और पश्चिम बंगाल के साथ साथ देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला घटनाक्रम इसलिए है क्योंकि पांच महीने पहले के चुनाव में इसी सीट पर भाजपा के हिंदू उम्मीदवार को सिर्फ 27 प्रतिशत वोट मिले थे। पांच महीने के अंदर 36 फीसदी वोट का स्विंग अभूतपूर्व है। यह मुस्लिम मतदाताओं के मतदान व्यवहार में आए एक बड़े बदलाव का संकेत है।

इस चुनाव परिणाम के अलग अलग आयामों को समझने की आवश्यकता है। सबसे पहला और स्पष्ट आय़ाम यह है कि सुवेंदु अधिकारी ने अपने पांच महीने के छोटे से कार्यकाल में जो काम किया है उससे उन्होंने समाज के सभी वर्गों का भरोसा जीता है। इसमें समान रूप से मुस्लिम भी शामिल हैं। आंकड़े इसकी कहानी खुद बता रहे हैं। रेजिनगर में भाजपा के उम्मीदवार को जितना वोट हिंदुओं का मिला है उससे ज्यादा वोट मुसलमानों का मिला है। यह किसी भय या दबाव का नतीजा नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि मुसलमानों ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व को स्वीकार किया है। यह उनके व्यक्तित्व का कमाल है कि उन्होंने मुस्लिमों का आह्वान किया और दोस्ती का मौका दिया तो मुस्लिम समाज ने इसे दिल खोल कर स्वीकार किया। उन्होंने भाजपा के प्रति अपने पूर्वाग्रह को छोड़ दिया। सुवेंदु अधिकारी उनको यह भरोसा दिलाने में सफल रहे हैं कि उनका हिंदुत्व किसी दूसरे धर्म को मानने वाले को नुकसान पहुंचाने या प्रताड़ित करने वाला नहीं है। उनका हिंदुत्व समावेशी है। मुसलमानों के मन में यह भरोसा इसलिए भी बना क्योंकि सुवेंदु सरकार ने सरकार की समस्त लोक कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से जारी रखा, किसी के साथ भेदभाव नहीं किया।

ऐसे ही कानून व्यवस्था बहाल करने और राज्य में हिंसा, वसूली, तोलाबाजी, कट-मनी आदि की संस्कृति को समाप्त करने के लिए भी सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने जो काम किया वह किसी जाति या धर्म को ध्यान में रख कर नहीं किया। असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जिससे समाज में शांति बहाल हुई है। समाज में शांति बहाली का लाभ हर धर्म व जाति के लोगों को मिलता है। दशकों तक लेफ्ट और फिर डेढ़ दशक तक तृणमूल कांग्रेस के शासन में अराजकता, हिंसा और लूट से हर जाति व धर्म के लोग त्रस्त थे। उनको लेफ्ट व तृणमूल शासन में हुए शोषण का अहसास हुआ है। तभी उनके लिए सुवेंदु का शासन ताजा हवा के झोंके की तरह है। कह सकते हैं कि सरकार ने पांच महीने की छोटी सी अवधि में जिस तरह से शांति और सौहार्द्र स्थापित किया है उसी का परिणाम है कि भाजपा रेजिनगर जैसी सीट पर जीती और नंदीग्राम में जीत का रिकॉर्ड स्थापित किया।

यहां इस बात का जिक्र करना भी आवश्यक है कि रेजिनगर जैसी ही सामाजिक संरचना वाली असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी जीती है। नगांव में लगभग 60 फीसदी आबादी मुस्लिम है। इसके बावजूद इस सीट पर भाजपा के देबाशीष शर्मा डेढ़ लाख वोट से चुनाव जीते। असम में मुसलमानों के मसीहा माने जाने वाले जमात और एआईयूडीएफ के नेता बदरूद्दीन अजमल खुद उस सीट पर चुनाव लड़े थे। इसके बावजूद 40 फीसदी हिंदू आबादी वाली सीट पर भाजपा उम्मीदवार को 50 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस की शिबोमणी बसु को सवा लाख से भी कम वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं। नगांव सीट की जीत भी समावेशी और लोक कल्याण की राजनीति की जीत है। यह भी मुस्लिम मतदाताओं के बदलते व्यवहार का संकेत है। ध्यान रहे जब बदरूद्दीन अजमल ने पार्टी बनाई थी, तब राज्य के बड़े हिस्से में मुस्लिम कांग्रेस को छोड़ कर उनके साथ गए थे। पिछले दो चुनावों में दिखा कि मुस्लिम अजमल को छोड़ कर कांग्रेस की ओर लौटे। लेकिन इस साल मई में आए विधानसभा चुनाव नतीजों से सबक लेकर मुस्लिम मतदाता अब अपनी नई पोजिशनिंग करते दिख रहे हैं। कुछ मुस्लिम मतदाता कांग्रेस और एआईयूडीएफ की बाइनरी से निकल कर भाजपा को भी एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। यह दोनों की राजनीति के लिए चिंता की बात होगी।

अगर रेजिनगर व नंदीग्राम विधानसभा और नगांव लोकसभा सीट के चुनाव परिणामों के व्यापक असर की बात करें तो राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी इसका एक बड़ा संदेश है। इससे यह धारणा निर्णायक रूप से टूटी है कि मुस्लिम किसी हाल में भाजपा को वोट दे ही नहीं सकता है। अगर सरकार समावेशी हो, लोक कल्याणकारी हो और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली हो तो मुस्लिम भी उसको वोट कर सकते हैं। वैसे भी तीन तलाक समाप्त होने और उसे अवैध बनाए जाने के बाद से मुस्लिम महिलाओं का एक हिस्सा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का समर्थन करता है और उनकी पार्टी को वोट करता है। चुनाव बाद जुटाए गए कई राज्यों के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। धीरे धीरे ही सही लेकिन इस तरह का बदलाव अगर मुस्लिम मतदाताओं के व्यवहार में दिखता है तो उससे सामाजिक व राजनीतिक विभाजन कम होगा। भारत का समाज भी समावेशी बनेगा और तुष्टिकरण की राजनीति भी समाप्त होगी।

जहां तक विपक्ष की बात है तो मुख्य विपक्षी कांग्रेस और उसकी सहयोगी तृणमूल कांग्रेस के लिए इन नतीजों में दो बड़े संकेत छिपे हैं। पहला, मुसलमानों के मन में भाजपा के प्रति नफरत का भाव भरने के तमाम प्रयासों के बावजूद मुसलमान पूर्वाग्रह छोड़ कर भाजपा के साथ जा सकते हैं। दूसरा, तुष्टिकरण के तमाम प्रयासों के बावजूद कांग्रेस और तृणमूल जैसी पार्टियों से मुसलमानों का मोहभंग हो रहा है। कम से कम पश्चिम बंगाल और असम जैसी 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले राज्यों में मुस्लिम अब पारंपरिक सेकुलर पार्टियों की बजाय मुस्लिम नेताओं वाली पार्टियों की ओर देख रहे हैं। तभी नगांव में बदरूद्दीन अजमल और रेजिनगर में गुलाम नबी आजाद दूसरे स्थान पर रहे। दोनों सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस को ठुकराया।  (लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)

Agniveer Retirement Benefits: अग्निवीरों का पहला बैच इस दिन होगा रिटायर, 10 लाख रुपये और सरकारी नौकरी में आरक्षण के साथ जानिए मिलेंगी क्या सुविधाएं

Agniveer Retirement Benefits: देश की तीनों सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती 4 साल पहले हुई थी। इस योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों का पहला बैच भारतीय नौसेना में चार साल की सेवा पूरी करके 21 नवंबर 2026 को रिटायर होने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पल होने के साथ ही बेहद अहम भी होगा, क्योंकि अब सभी का ध्यान सेना से सेवा निवृत्त होने वाले इन युवाओं के भविष्य पर होगा। सरकार ने इनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम किए हैं।

अग्निपथ योजना के तहत देश की सेनाओं में 4 साल पहले अग्निवीरों की भर्ती के समय देशभर में इसको लेकर भारी चर्चा और बहस छिड़ी थी। भारतीय नौसेना से अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर 2026 को 4 साल की सेवा पूरी करके रिटायर होगा। अग्निपथ योजना के तहत लगभग 75% अग्निवीर सेवा मुक्त हो जाएंगे। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 25% युवाओं को सेना में स्थायी (Permanent) कर लिया जाएगा। खबर है कि तीनों सेनाएं रिटेंशन रेट को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इस संबंध में सरकार को नया प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।

सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को मिलेंगी ये सुविधाएं

सेवा निधि पैकेज : रिटायर हो रहे हर अग्निवीर को एकमुश्त लगभग 10.04 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलेगा. यह रकम टैक्स-फ्री होगी। इसमें युवा का अपना योगदान, सरकार का बराबर का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल होता है।

जीवन बीमा कवर : सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। यह उनके और उनके परिवार के लिए बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।

स्किल सर्टिफिकेट : रिटायर होने वाले अग्निवीरों को स्किल सर्टिफिकेट (कौशल प्रमाण पत्र) दिया जाता है। इससे उन्हें आगे प्राइवेट या सरकारी नौकरी में इंटरव्यू के दौरान प्राथमिकता मिल सकेगी। हालांकि, इन्हें ग्रेच्युटी, पेंशन या मेडिकल और कैंटीन की आजीवन सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

रिटायर अग्निवीरों के भविष्य के लिए सरकार का प्लान

सरकार के साथ कई मंत्रालय सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्प तैयार किए हैं। आइए जानें :

अर्धसैनिक बलों (CAPF) में 50% आरक्षण : बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स जैसी सुरक्षा बलों में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। इनके लिए ‘पूर्व-अग्निवीर’ नाम से नई कैटेगरी भी बनाई गई है।

गृह मंत्रालय का नया पोर्टल : पूर्व अग्निवीरों को कॉरपोरेट और सरकारी सेक्टर में आसानी से एडजस्ट करने के लिए गृह मंत्रालय विशेष पोर्टल तैयार कर रहा है। इसके जरिए इन्हें नौकरी के ढेरों विकल्प मिलेंगे।

राज्य सरकारों का कोटा और आयु में छूट : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकारों ने पुलिस और अन्य विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 से 20 प्रतिशत तक पद रिजर्व किए हैं। साथ ही, आयु सीमा में 3 से 5 साल तक की छूट का ऐलान भी किया गया है, जिससे ये युवा आसानी से सरकारी नौकरी पा सकें।

फिजिकल और लिखित परीक्षा से छूट : इन सुरक्षा बलों में भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दी जाएगी।

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Weather Alert: दिल्ली समेत कई राज्यों में कल बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 kmph की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; मुंबई में लू की चेतावनी

Weather Alert: महाराष्ट्र में जहां मुंबई और कोंकण के तटीय इलाकों में लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने के आसार फिलहाल कम हैं, वहीं उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश और तेज हवाएं मौसम का मिजाज बदल सकती हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली में कल यानी 11 अक्टूबर को बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और महाराष्ट्र के तटीय कोंकण इलाके में 12 अक्टूबर तक लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम में बदलाव की वजह उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे इलाकों के ऊपर बना पश्चिमी विक्षोभ है। इसके साथ ही हरियाणा और उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर हवा में एक चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इसके असर से रविवार, 11 अक्टूबर को दिल्ली के कई इलाकों में बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है।

IMD ने दक्षिण भारत के कई इलाकों के लिए भी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान जताया है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 12 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जबकि कुछ जगहों पर हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, कई इलाकों में सतह के पास तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

मुंबई और कोंकण में 12 अक्टूबर तक लू का अलर्ट

मौसम विभाग ने महाराष्ट्र में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और कोंकण के तटीय इलाकों के लिए 12 अक्टूबर तक हीटवेव की चेतावनी जारी की है। दक्षिण कोंकण में कुछ जगहों पर हीटवेव की स्थिति हो सकती है, जबकि उत्तर कोंकण में कुछ जगहों पर गर्मी और उमस बनी रह सकती है। MMR एक शहरी इलाका है जिसमें मुंबई और उससे सटे ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों के नौ नगर निगम शामिल हैं।

IMD ने कहा कि महाराष्ट्र में रविवार और सोमवार (11 और 12 अक्टूबर) को हालात सामान्य होने की उम्मीद है और पूरे राज्य में ‘ग्रीन वॉर्निंग’ लागू हो जाएगी। ग्रीन वॉर्निंग का मतलब है कि मौसम से जुड़ी किसी खास सावधानी या कार्रवाई की जरूरत नहीं है। हालांकि, अगले 48 घंटों में महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान धीरे-धीरे 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है और उसके बाद इसमें 1-3 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी हो सकती है। महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाकों में 10 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 37-39 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

कई उत्तरी, मध्य और पूर्वोत्तर इलाकों में बारिश और आंधी-तूफान का भी अनुमान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11 अक्टूबर को बारिश हो सकती है। उत्तराखंड में 11 से 14 अक्टूबर के बीच कहीं-कहीं बारिश हो सकती है, साथ ही 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और हवा के झोंके 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। हिमाचल प्रदेश में 13 और 14 अक्टूबर को कहीं-कहीं बारिश हो सकती है, जबकि राजस्थान के कुछ हिस्सों में 11 और 12 अक्टूबर के बीच बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर भारत में बारिश के आसार

वहीं, शनिवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में काफी ज्यादा इलाकों में बारिश हो सकती है, साथ ही कहीं-कहीं आंधी-तूफान और बिजली गिरने की भी संभावना है। 11 अक्टूबर को असम और मेघालय में बारिश होने की उम्मीद है, और इसके बाद 13 और 14 अक्टूबर को फिर से बारिश हो सकती है। 11 से 14 अक्टूबर के बीच नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कहीं-कहीं या छिटपुट बारिश हो सकती है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तेज हवाओं का अलर्ट

IMD ने पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी कहीं-कहीं या छिटपुट बारिश का अनुमान लगाया है। रविवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिनकी गति 50 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।

झारखंड से अगले चार दिनों में लौटेगा मानसून

झारखंड से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अगले चार दिनों में होने की संभावना है। इससे पहले राज्य के उत्तर-पश्चिमी और मध्य हिस्सों के कई जिलों से मानसून लौट चुका है। IMD के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में अब तक सामान्य से 2% कम बारिश दर्ज की गई है।

इन इलाकों में भी जारी रह सकता है बारिश का दौर

इस पूर्वानुमान में तटीय कर्नाटक, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, लक्षद्वीप, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भी शामिल हैं। IMD के अगले कुछ दिनों के पूर्वानुमान से पता चलता है कि कई इलाकों में बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा, साथ ही झारखंड से मॉनसून की वापसी भी होगी।

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Ranji Trophy में खेलेंगें रविंद्र जड़ेजा अपनी घरेलू टीम सौराष्ट्र के लिए

Ravindra Jadeja

सौराष्ट्र ने स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा को छत्तीसगढ़ के खिलाफ रणजी ट्रॉफी 2026-27 के पहले मैच के लिए अपनी 16 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। अनुभवी बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट टीम की कप्तानी करेंगे।

जडेजा हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की 2-1 से वनडे सीरीज जीत का हिस्सा थे, जहां उन्होंने दो मैचों में दो विकेट लिए, लेकिन उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। रणजी ट्रॉफी इस बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर को अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के दो टेस्ट मैचों के दौरे से पहले अपनी लाल गेंद की क्रिकेट का फॉर्म हासिल करने का मौका देगी। टेस्ट सीरीज वेलिंग्टन में 19-23 नवंबर तक शुरू होगी, जिसके बाद दूसरा मैच क्राइस्टचर्च में 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक खेला जाएगा।

सौराष्ट्र अपने अभियान की शुरुआत 11 अक्टूबर को राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में करेगा। पूर्व चैंपियन टीम को एलीट ग्रुप बी में आंध्र, असम, छत्तीसगढ़, हैदराबाद, कर्नाटक, पंजाब और त्रिपुरा के साथ रखा गया है। सौराष्ट्र ने पिछले सीज़न की टीम से 14 खिलाड़ियों को बरकरार रखा है, जबकि तेज़ गेंदबाज़ नील पांड्या और ऑलराउंडर अर्थ यादव दो नए खिलाड़ी हैं। टीम 2025-26 सीज़न में ग्रुप-स्टेज से बाहर होने के अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहेगी।

Jaydev Unadkat

उनादकट ससेक्स के साथ शानदार प्रदर्शन के बाद तेज गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभालेंगे, जहां उन्होंने सात मैचों में 22.21 की औसत से 28 विकेट लिए थे। उनके प्रदर्शन में हैम्पशायर के खिलाफ 5/32 के आंकड़े के साथ एक बार पांच विकेट और दो बार चार विकेट लेना शामिल था।

सौराष्ट्र, जिसने उनादकट की कप्तानी में 2019-20 और 2022-23 में रणजी ट्रॉफी जीती थी, के आक्रमण में बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ चेतन सकारिया भी शामिल होंगे। हार्विक देसाई विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि बल्लेबाजी लाइन-अप में अनुभवी खिलाड़ी अर्पित वासवदा, चिराग जानी और जय गोहिल शामिल हैं।इस सीजन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले बाएं हाथ के स्पिनर धर्मेंद्रसिंह जडेजा के जाने से पार्थ भुट पर स्पिन विभाग में बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।

सौराष्ट्र रणजी टीम: जयदेव उनादकट (कप्तान), रवींद्र जड़ेजा, हार्विक देसाई (विकेटकीपर), अर्पित वासवदा, चिराग जानी, प्रेरक मांकड़, जय गोहिल, चेतन सकारिया, अंकुर पंवार, सम्मर गज्जर, पार्थ भूत, विश्वराजसिंह जाडेजा, हेतविक कोटक, नील पंड्या, और अर्थ यादव, तरंग गोहेल।

मुस्लिम बहुल सीटों पर भी जीती भाजपा!

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मनमाने रवैए के खिलाफ चल रहे विपक्ष के प्रदर्शन के बीच भाजपा को बड़ी जीत मिली है। उसने पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों और असम की लोकसभा सीट पर उपचुनाव जीत लिया है। पुडुचेरी के सीट भी एनडीए के खाते में गई है, जबकि तमिलनाडु की दोनों सीटें सत्तारूढ़ टीवीके ने जीती है।

असम की नगांव लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के देबाशीष शर्मा ने एआईयूडीएफ के बदरूद्दीन अजमल को चुनाव हराया। करीब 60 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर भाजपा डेढ़ लाख से ज्यादा वोट से जीती। उसे 50 फीसदी के करीब वोट मिले। कांग्रेस की शिबोमणी बसु तीसरे स्थान पर रहीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के प्रद्योत बोरदोलोई ने जीती थी, जो विधानसभा चुनाव के समय पाला बदल कर भाजपा में चले गए। उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हुई थी।

सबसे ज्यादा चौंकाना वाला नतीजा पश्चिम बंगाल की रेजीनगर सीट से आया, जहां 60 हजार से ज्यादा वोट से जीते हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद बुरी तरह से चुनाव हार गए हैं। करीब 65 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर भाजपा के शंखरव सरकार ने आजाद को 75 हजार से ज्यादा वोट से हराया। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई नंदीग्राम सीट पर भाजपा की हसीरानी रथ ने सारे रिकॉर्ड़ तोड़ दिए। वे 1,22,753 वोटों से जीतीं। उन्हें कुल 1,64,427 वोट मिले। यह 1967 के सीट के अस्तित्व में आने के बाद जीत का सबसे बड़ा अंतर है।

उधर तमिलनाडु की दो सीटों पर उपचुनाव हुए थे। धारापुरम सीट पर टीवीके की सत्यभामा ने और मदुरंतकम सीट पर के कुमारवेल ने जीत हासिल की। दोनों सीटें पिछली बार इन्हीं दो महिलाओं ने अन्ना डीएमके की टिकट पर जीती थीं। बाद में दोनों विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हो गई थीं। टीवीके ने उन्हें फिर से टिकट देकर उपचुनाव में उतारा। दोनों सीटों पर डीएमके दूसरे स्थान पर रही।

उपचुनाव के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को धन्यवाद दिया। शुक्रवार को असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के उपचुनावों में भाजपा और एनडीए को चार सीटों पर मिली जीत को लेकर मोदी ने लोगों का आभार जताया और कहा कि यह जीत एक बार फिर दिखाती है कि लोगों का गठबंधन के सुशासन के एजेंडे से “गहरा जुड़ाव” है।

कल का मौसम: 10 अक्टूबर को राजस्थान से लेकर उत्तराखंड तक आंधी-तूफान का अलर्ट, IMD ने जारी किया ये अलर्ट

Weather Tomorrow: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से मानसून की औपचारिक विदाई के बाद भी पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) और तटीय चक्रवाती प्रणालियों के असर से देश के कई हिस्सों में मौसमी उथल-पुथल जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा शनिवार 10 अक्टूबर के लिए जारी ताजा अलर्ट के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी और मैदानी राज्यों में बादलों की तेज गड़गड़ाहट और तूफानी हवाओं की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। मौसम विभाग ने राजस्थान से लेकर उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारत के तटीय राज्यों में चक्रवाती परिसंचरणों के कारण मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने का अनुमान है।

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राजस्थान से उत्तराखंड तक 40 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में शनिवार को मौसम का रुख बदला हुआ रहेगा। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 10 अक्टूबर को राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, तटीय व आंतरिक आंध्र प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में बादलों की गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है।

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के पर्वतीय इलाकों में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने और हल्की बौछारें पड़ने का अनुमान जताया गया है। मध्य भारत के पूर्वी मध्य प्रदेश में भी बिजली चमकने के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब में 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

दिल्ली-एनसीआर और आसपास के मैदानी राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ का असर अधिक उग्र दिख सकता है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के अलग-अलग इलाकों में आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

केरल और तमिलनाडु में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

दक्षिण भारत के राज्यों में मौसमी चक्र की सक्रियता से तेज बारिश का सिलसिला बना रहेगा। 10 अक्टूबर को दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों में भारी बारिश दर्ज होने का अनुमान है। केरल और माहे में भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में कई जगह मूसलाधार पानी गिरने के आसार हैं।

केरल व माहे, लक्षद्वीप और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में बादलों की तेज गर्जना के साथ 40 से 50 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलेंगी। तटीय आंध्र प्रदेश के मैदानी इलाकों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

पूर्वोत्तर राज्यों का हाल और तटीय इलाकों में गर्मी-उमस

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मौसमी हलचल बनी रहेगी। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। पश्चिमी और दक्षिणी तटों पर नमी बढ़ने से गर्मी परेशान करेगी। कोंकण व गोवा और तटीय कर्नाटक के इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर मौसम बेहद गर्म और उमस भरा बना रहने का अनुमान है। तटीय इलाकों में तूफानी हवाओं के बावजूद समुद्र के भीतर स्थितियां नियंत्रित रहेंगी।

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