Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना।

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

MF Investment : वाइजइन्वेस्ट के CEO हेमंत रुस्तगी से जाने बाजार में निवेश के मंत्र, क्या हैं स्टेप-अप SIP के फायदे

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए भारतीय इक्विटी इंडेक्स, जानिए 20 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : 17 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,300 के ऊपर रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 964.58 अंक या 1.25 प्रतिशत बढ़कर 78,151.45 पर और निफ्टी 261.55 अंक या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 24,334.30 पर बंद हुआ। लगभग 1632 शेयरों में बढ़त हुई, 2419 शेयरों में गिरावट आई और 175 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,टेक महिंद्रा,TCS,जियो फाइनेंशियल और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में हिंडाल्को,डॉ. रेड्डीज़ लैब्स,विप्रो,सन फार्मा और मैक्स हेल्थकेयर शामिल रहे। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2 प्रतिशत की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी बैंक रहा,जिसमें 1.6 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी IT में 1.7 प्रतिशत की तेजी आई।

दूसरे बढ़त वाले सेक्टरों में निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी में 1.3-1.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1 प्रतिशत और निफ्टी FMCG में 0.7 प्रतिशत की बढ़त हुई। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा में 1.4 प्रतिशत और मेटल में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

बाजार जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार के लिए पहली तिमाही के नतीजे मेन ट्रिगर होंगे,जिससे अलग-अलग सेक्टर और शेयरों में हलचल दिखेगी। हालांकि,मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अहम डिसाइडिंग फैक्टर बने रहेंगे। इनसे ब्याज दरों,कंपनियों की अर्निंग, महंगाई और देश के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक के अनुमानों पर असर पड़ने की संभावना है।

टाटा म्यूचुअल फंड को उम्मीद है कि बेहतर होते मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल के दम पर FY27 में निफ्टी की अर्निंग्स में 15-17% की बढ़ोतरी होगी। इसका कहना है कि निफ्टी का वैल्यूएशन अपने लान्ग टर्म एवरेज से नीचे आ गया है,जो अगले 12-18 महीनों में इक्विटी रिटर्न के लिए एक अच्छा माहौल बनाता है। भारत का लॉन्ग-टर्म इक्विटी आउटलुक, बेहतर होते इन्वेस्टमेंट साइकल,क्रेडिट ग्रोथ,मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहे सपोर्ट,रियल एस्टेट में रिकवरी और मज़बूत बैंकिंग फंडामेंटल्स की वजह से अच्छा बना हुआ है। FII की लगातार बिकवाली के बावजूद,घरेलू संस्थागत निवेशकों का मज़बूत निवेश भारतीय इक्विटी को सपोर्ट कर रहा है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि मार्केट की चाल में बदलाव दिख रहा है, जिसमें IT और बैंकिंग सेक्टर की अगुवाई में लार्ज-कैप शेयरों की ओर जबरदस्त रुझान है। बिजनेस अपडेट्स और Q1 की कमाई की उम्मीदों को लेकर अच्छे माहौल से इसे सपोर्ट मिल रहा है। यह ट्रेंड मुख्य रूप से घरेलू संस्थागत निवेशकों की वजह से दिख रहा है,जो महंगे मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों से निकलकर बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल और आकर्षक वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

साथ ही,FY27 की दूसरी छमाही (H2) में घरेलू मांग अच्छी रहने की उम्मीद में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी खरीदारी का रुझान दिख रहा है। कुल मिलाकर भारत के लिए बेहतर होते आउटलुक के बीच चुनिंदा शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग और खरीदारी के साथ ब्रॉडर मार्केट का रुख पॉजिटिव बना हुआ है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स पांच दिन के कंसोलिडेशन फेज से बाहर निकल गया है। यह ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के बढ़ते भरोसे का संकेत है। बाजार का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है क्योंकि इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा,RSI बुलिश क्रॉसओवर में आ गया है,जिससे पॉजिटिव मोमेंटम और मजबूत हुआ है। आने वाले समय में निफ्टी के मजबूत बने रहने और 24,800 के लेवल की ओर बढ़ने की संभावना है। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। अगर यह इस लेवल से नीचे गिरता है तो कंसोलिडेशन का दौर शुरू हो सकता है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार रिलायंस इंडस्ट्रीज,HDFC बैंक और ICICI बैंक के Q1FY27 नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा। इनसे बाजार की निकट भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर,बाजार के स्टॉक-स्पेसिफ़क रहने की संभावना है। अच्छी कमाई करने वाली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

 

इंश्योरेंस सेक्टर के लिए आईं दो बड़ी एक्सक्लूसिव खबरें, ICICI प्रू लाइफ और SBI लाइफ को बड़ी राहत संभव

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Union Bank of India Q1 results: मुनाफा 30% बढ़कर ₹5,332.30 करोड़ पर पहुंचा, नतीजों के बाद शेयर 3% चढ़ा

Union Bank of India Q1 results: पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने बुधवार, 15 जुलाई को बताया कि चालू फ़ाइनेंशियल ईयर (Q1FY27) की अप्रैल-जून तिमाही में उसका स्टैन्डर्डलोन प्रॉफ़िट साल-दर-साल (YoY) 29.6% बढ़कर ₹5,332.30 करोड़ हो गया। पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में लेंडर का प्रॉफ़िट ₹4,115.53 करोड़ था।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया Q1FY27 की खास बातें

1. जून तिमाही में बैंक की कुल इनकम साल- दर- साल आधार पर 1.3% बढ़कर ₹31,806.20 करोड़ हो गई। Q1FY26 में, इसकी कुल इनकम ₹31,405.03 करोड़ थी।

2. यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया का ऑपरेटिंग खर्च पिछले साल की इसी तिमाही के ₹6,689.67 करोड़ से 0.80%सालना आधार पर घटकर ₹6,637.66 करोड़ हो गया।

इस तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही के ₹6,908.66 करोड़ से लगभग 16% सालना बढ़कर ₹8,002.58 करोड़ हो गया।

3. टैक्स के अलावा इसके प्रोविज़न और कंटिंजेंसीज़, Q1FY27 में घटकर ₹979.42 करोड़ हो गए, जो पिछले फ़ाइनेंशियल ईयर की इसी तिमाही में ₹1,664.51 करोड़ और Q4FY26 में ₹1,054.98 करोड़ थे।

4. तिमाही के दौरान ग्रॉस एडवांस में सालाना आधार पर 12.50% की बढ़ोतरी हुई, जबकि टोटल डिपॉज़िट में साल- दर साल आधार पर 3.50% की बढ़ोतरी हुई, जून तिमाही के आखिर तक टोटल डिपॉज़िट बेस ₹12,83,366 करोड़ था। बैंक ने कहा कि 30 जून 2026 तक उसका टोटल बिज़नेस ₹23,79,697 करोड़ था।

5. इस साल 30 जून तक ग्रॉस NPA (%) सालाना आधार पर 87 bps घटकर 2.65% और नेट NPA (%) सालाना आधार पर 15 bps घटकर 0.47% हो गया।

6. Q1FY27 के दौरान बैंक का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) क्रमशः 1.36% और 17.23% रहा।

7. सालाना आधार पर नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 10.15% और तिमाही आधार पर 6.71% बढ़कर ₹10,037 करोड़ हो गई, जबकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) YoY में 4 bps और QoQ में 16 bps बढ़कर 2.80% हो गया।

स्टॉक का परफॉर्मेंस

बुधवार को BSE पर दोपहर 1 बजे के आसपास यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयर 3% बढ़कर ₹175 पर ट्रेड कर रहे थे।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।