स्कूलों में बेटियों को गरिमा के साथ मिलेगी सुविधा, मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही योगी सरकार

स्कूलों में बेटियों को गरिमा के साथ मिलेगी सुविधा, मास्टर ट्रेनर तैयार कर रही योगी सरकार

बेटियों की शिक्षा किसी जैविक प्रक्रिया के कारण बाधित न हो और विद्यालय उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं संवेदनशील वातावरण का स्थान बने—योगी सरकार इस दिशा में व्यवस्थागत पहल को जमीन तक पहुंचा रही है। इसी क्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विषयों पर शिक्षकों की समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं। 

 

राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 13 अगस्त को 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण पूरा हुआ, जबकि शेष जनपदों से आए 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को होगा। इस प्रकार दो दिनों में कुल 223 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 

यह पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य प्रकरण के संदर्भ में विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण में यह समझ विकसित की जा रही है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सैनिटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और सहयोगी वातावरण से जोड़कर देखा जाए। प्रशिक्षण सामग्री में भी मासिक धर्म स्वास्थ्य को बालिकाओं की गरिमा, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। 

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी

प्रशिक्षण में 30 जनवरी 2026 के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य से संबंधित बताए गए व्यापक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण सामग्री के अनुसार मासिक धर्म स्वास्थ्य को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जोड़ा गया है तथा सुरक्षित और सम्मानजनक मासिक धर्म प्रबंधन उपलब्ध कराने में राज्य और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी पर बल दिया गया है। साथ ही सरकारी एवं निजी तथा ग्रामीण एवं शहरी सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाओं और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि मासिक धर्म के कारण किसी छात्रा की शिक्षा प्रभावित न हो। 

 

हर जनपद से तीन मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार

राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जनपद से नामित तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 37 जनपदों के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सहभागिता की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अंबेडकर नगर, अमेठी, औरैया, अयोध्या, आजमगढ़, बागपत, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हापुड़, हरदोई और हाथरस के प्रतिभागी शामिल रहे। शेष 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण 14 अगस्त को निर्धारित है।

 

मास्टर ट्रेनर पहुंचाएंगे प्रशिक्षण को विद्यालयों तक 

राज्य स्तर पर प्रशिक्षित तीनों मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जनपदों में जाकर सभी विद्यालयों के महिला एवं पुरुष शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस व्यवस्था के माध्यम से राज्य स्तर पर तैयार प्रशिक्षण सामग्री और समझ को सीधे विद्यालय स्तर तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों को मासिक धर्म स्वास्थ्य, बालिकाओं की गरिमा एवं गोपनीयता, संवेदनशील व्यवहार, आवश्यक सुविधाओं तथा विद्यालय में सहयोगी वातावरण तैयार करने से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इससे प्रशिक्षण का दायरा केवल चुनिंदा प्रतिभागियों तक सीमित न रहकर प्रत्येक विद्यालय और शिक्षक तक पहुंचेगा। प्रशिक्षण सामग्री में भी शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। बिना शर्म या भेदभाव के बालिकाओं का सहयोग करना, मासिक धर्म को सामान्य जैविक प्रक्रिया के रूप में समझाना तथा जरूरत पड़ने पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। 

 

‘पैड से आगे’ व्यापक व्यवस्था पर जोर

प्रशिक्षण में स्पष्ट किया जा रहा है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अर्थ केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं है। विद्यालयों में क्रियाशील बालिका शौचालय, पानी और साबुन की उपलब्धता, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था, गोपनीयता तथा आपात स्थिति में आवश्यक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण सामग्री में भी टॉयलेट, पानी, साबुन और सुरक्षित निस्तारण को मासिक धर्म स्वास्थ्य की आवश्यक आधारभूत व्यवस्था के रूप में रेखांकित किया गया है।

 

जागरूकता से बदलेगा विद्यालयी वातावरण

प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण पक्ष मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, झिझक और भेदभाव को दूर करना है। शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि संवेदनशील और वैज्ञानिक जानकारी से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है तथा मासिक धर्म के कारण होने वाली अनावश्यक अनुपस्थिति को कम करने में विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशिक्षण सामग्री में मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य, गरिमा, समानता, गोपनीयता और शिक्षा से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया है। 

 

विद्यालय स्तर पर जवाबदेही और व्यवस्थागत सुधार पर जोर

योगी सरकार की इस पहल का फोकस प्रशिक्षण के साथ-साथ विद्यालयी व्यवस्था को संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने पर है। शिक्षकों के माध्यम से बालिकाओं को आवश्यक सहयोग, सुरक्षित वातावरण और सही जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में मास्टर ट्रेनर महत्वपूर्ण कड़ी होंगे, जो राज्य स्तर की पहल को जनपद और फिर विद्यालय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएंगे।

 

कोट:

बालिकाओं की शिक्षा और गरिमा से जुड़ा कोई भी विषय संवेदनशीलता के साथ विद्यालय तक पहुंचना चाहिए। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षक को आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण मिले, ताकि विद्यालयों में बेटियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण तैयार हो। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर के माध्यम से यह प्रशिक्षण प्रदेश के सभी विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।

– संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

motivational thoughts

जीवन का सबसे कठिन समय वह नहीं होता, जब हमारे सामने समस्याएँ खड़ी होती हैं। सबसे कठिन समय वह होता है, जब हर प्रयास के बाद भी मन धीरे-धीरे यह मानने लगे कि शायद अब कुछ नहीं बदलेगा। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर उम्मीद थकने लगती है। ऐसे क्षणों में इंसान दुनिया से नहीं, स्वयं से हारने लगता है।

 

यदि आपने भी कभी ऐसा समय देखा है, तो यह लेख आपके लिए है। क्योंकि जीवन में ऐसा दौर लगभग हर व्यक्ति के सामने आता है। फर्क केवल इतना होता है कि कोई उसे शब्दों में कह देता है और कोई चुपचाप अपने भीतर सहता रहता है। हम अक्सर सोचते हैं कि इंसान केवल उम्मीद के सहारे जीता है। लेकिन अनुभव ने मुझे एक अलग बात सिखाई है। उम्मीद और साहस एक ही चीज़ नहीं हैं। उम्मीद कहती है— 'शायद सब ठीक हो जाएगा।' साहस कहता है— 'जब तक सब ठीक नहीं होता, तब तक मैं रुकूँगा नहीं।'

 

यही कारण है कि जब उम्मीद थकने लगती है, तब साहस की असली परीक्षा शुरू होती है। कुछ वर्ष पहले मेरी मुलाकात एक छोटे दुकानदार से हुई। उनका चेहरा बुझा-बुझा था। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'अब हर सुबह दुकान खोलने का मन नहीं करता। महीनों से मेहनत कर रहा हूँ, लेकिन लगता है जैसे जीवन एक ही जगह ठहर गया है।' मैंने उनसे पूछा, 'फिर भी रोज़ दुकान क्यों खोलते हैं?'

 

उन्होंने कुछ क्षण मेरी ओर देखा और फिर मुस्कुराकर बोले, 'क्योंकि अगर आज शटर नहीं खोलूँगा, तो कल बदलने की संभावना भी अपने हाथों से बंद कर दूँगा। सच कहूँ, अब मैं उम्मीद के भरोसे नहीं, अपने कर्तव्य के भरोसे दुकान खोलता हूँ।' उनकी यह बात सुनकर मैं कुछ देर तक मौन रहा। उस दिन पहली बार महसूस हुआ कि साहस हमेशा ऊँची आवाज़ में नहीं बोलता। कई बार वह हमारे भीतर चुपचाप इतना भर कहता है—'रुकना मत… बस अगला सही कदम उठाते रहो।'

 

उस दिन मुझे एक और बात समझ में आई। जीवन आगे बढ़ाने के लिए हमेशा बड़ी उम्मीदों की ज़रूरत नहीं होती। कई बार एक छोटा-सा कारण ही काफी होता है—परिवार की जिम्मेदारी, किसी अपने की मुस्कान, अपने काम के प्रति ईमानदारी या स्वयं से किया हुआ एक वादा। शायद इसी कारण किसान हर वर्ष फिर से बीज बोता है। उसे मौसम की गारंटी नहीं होती, लेकिन कर्म पर उसका विश्वास बना रहता है। विद्यार्थी कई असफलताओं के बाद भी फिर से किताब खोलता है। उसे परिणाम दिखाई नहीं देता, फिर भी वह सीखना नहीं छोड़ता।

 

एक पिता अपनी चिंताओं को अपने चेहरे तक नहीं आने देता, क्योंकि वह जानता है कि उसके बच्चों का आत्मविश्वास उसके चेहरे से ही जन्म लेता है। एक माँ अपने मन की थकान और अपनी चिंताओं को भीतर ही समेटे रखती है, फिर भी पूरे परिवार को यह एहसास नहीं होने देती कि वह स्वयं कितने संघर्षों से गुजर रही है।

 

ये लोग असाधारण नहीं हैं। ये हमारे आसपास के साधारण लोग हैं। लेकिन इन्हीं साधारण लोगों के भीतर छिपा साहस जीवन को आगे बढ़ाता है। कठिन समय हमें तोड़ने नहीं आता। वह हमें यह दिखाने आता है कि हमारे भीतर कितना धैर्य, कितना विश्वास और कितनी शक्ति अभी भी बची हुई है। जब परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं, तब हर व्यक्ति मजबूत दिखाई देता है। असली पहचान तब होती है, जब सब कुछ विपरीत हो और फिर भी इंसान अपने मूल्यों को न छोड़े।

 

हमारी एक भूल हमें और अधिक कमजोर बना देती है। हम अपने संघर्ष की तुलना किसी और की सफलता से करने लगते हैं। लेकिन हर जीवन की कहानी अलग होती है। किसी की यात्रा तेज होती है, किसी की गहरी। इसलिए तुलना नहीं, निरंतरता महत्वपूर्ण है। जब जीवन कठिन लगे, तब पूरी जिंदगी का निर्णय मत कीजिए। केवल इतना तय कीजिए कि आज का सही कदम क्या है। जीवन हमेशा अगले दस वर्षों के निर्णय से नहीं बदलता। कई बार वह केवल आज लिए गए एक सही निर्णय से बदलना शुरू होता है।

 

यह भी सच है कि हर प्रयास का परिणाम तुरंत नहीं मिलता। कुछ बीज मिट्टी के भीतर लंबे समय तक दिखाई नहीं देते। इसका अर्थ यह नहीं कि उनमें जीवन नहीं है। वे अपनी जड़ें मजबूत कर रहे होते हैं। मनुष्य का जीवन भी कुछ ऐसा ही है। कई बार हमारी सबसे बड़ी तैयारी दुनिया की नज़रों से छिपी होती है। याद रखिए, सफलता केवल मंज़िल तक पहुँचने का नाम नहीं है। कई बार सफलता यह भी होती है कि कठिन समय के बावजूद हमने अपने भीतर की अच्छाई, अपने कर्तव्य और अपने विश्वास को जीवित रखा।

 

यदि आज आपकी उम्मीद थक गई है, तो उसे दोष मत दीजिए। उम्मीद भी मन की एक अवस्था है। उसे लौटने में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन अपने साहस को कभी मत छोड़िए। क्योंकि साहस ही वह शक्ति है, जो थके हुए मन को फिर से उठाती है, बिखरे हुए विश्वास को जोड़ती है और अंधेरे में भी अगला कदम उठाने का हौसला देती है। जीवन धीरे-धीरे उन्हीं लोगों के सामने अपने द्वार खोलता है, जो परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय अपने कर्तव्य पर टिके रहते हैं। इसलिए जब उम्मीद थक जाए, तब उसके लौटने की प्रतीक्षा मत कीजिए। अपने भीतर के साहस का हाथ थाम लीजिए। क्योंकि अंत में जीवन उन लोगों की कहानी लिखता है, जिन्होंने सबसे कठिन दिनों में भी चलना बंद नहीं किया।

 

याद रखिए— उम्मीद हमें भविष्य की झलक दिखाती है, लेकिन उस भविष्य तक पहुँचाने का काम साहस करता है। इसलिए जब उम्मीद थक जाए, तब अपने भीतर की उस शांत आवाज़ को सुनिए, जो आज भी कह रही है— 'एक कदम और… बस एक कदम और।' कई बार यही एक कदम पूरी जिंदगी बदल देता है। अंत में बस इतना ही कहना चाहूँगा— उम्मीद हमें आगे देखने की वजह देती है, लेकिन आगे बढ़ने की ताकत साहस देता है।

|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

रितेश हिंडोचा को 3 साल की उम्र में Down Syndrome होने का पता चला। लेकिन उनके परिवार ने उन्हें कभी सीमाओं में नहीं बाँधा। Swimming, Speech Classes, Sports, लोगों से जुड़ना, हर कदम ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
45 साल की उम्र में भी रितेश उसी जोश के साथ ज़िंदगी जीते हैं। Covid के दौरान शुरू हुआ उनका Instagram आज लाखों लोगों तक मुस्कान और उम्मीद पहुँचा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में भी काम किया।
रितेश की कहानी याद दिलाती है कि सही साथ, प्यार और भरोसा किसी भी Diagnosis से बड़ा हो सकता है।

@riteshhindocha

Person with Down Syndrome Achievement, Family Support for Down Syndrome Child, Down Syndrome Influencer

खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha

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Nail care Astrology: आज ही बदल लें किसी भी दिन नाखून काटने की आदत, जानें ज्योतिष में क्या हैं नाखून काटने के नियम

Nail care Astrology: नाखून काटने के लिए इतना क्या सोचना, जब बढ़े हुए दिखें तभी काट लो। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आप गलत हैं। हमारे शास्त्रों में यानी हिंदू धर्म में साफ-सफाई से जुड़े इस तरह के कामों के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। इनकी अनदेखी करना जातक के लिए कई तरह की मुश्किलें खड़ी कर देता है। इसका असर आपकी किस्मत, पैसे और पॉजिटिविटी पर पड़ सकता है। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नाखून काटने के लिए कुछ दिन शुभ माने जाते हैं जबकि कुछ दिनों का बुरा असर होता है। नाखून काटने के लिए सबसे अच्छे और बुरे दिनों के बारे में ज्योतिषी क्या कहते हैं, आइए जानें।

नाखून काटने के लिए ये दिन चुनें

हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए सबसे सही दिन माने जाते हैं। ज्योतिषी प्रशांत ने न्यूज 18 को बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए अच्छे माने जाते हैं। इन दिनों में नाखून काटने से सकारात्मक ऊर्जा, खुशी और समृद्धि बढ़ती है। माना जाता है कि ये दिन ग्रहों के बुरे असर को दूर रखते हैं।

अच्छा नहीं इन दिनों में नाखून काटना

ज्योतिष में मंगलवार और गुरुवार के दिन भूलकर भी नाखून नहीं काटने चाहिए। इन दिनों को इस काम के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और वैवाहिक जीवन में झगड़े बढ़ सकते हैं।

मंगलवार मंगल ग्रह से जुड़ा दिन है। पारंपरिक रूप से इसे भगवान हनुमान से जोड़ा जाता है। इस दिन नाखून काटने से गुस्सा, बहस, पैसे की परेशानी और जीवन में दूसरी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, गुरुवार का स्वामी बृहस्पति है और इसे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताएं इस दिन नाखून काटने से मना करती हैं, क्योंकि इससे धन, पैसे की स्थिरता और छात्रों की एकाग्रता पर असर पड़ता है।

इसी तरह, हिंदू परंपराओं में शनिवार को नाखून काटना अशुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से मन की शांति भंग हो सकती है और मेहनत का फल मिलने में देरी हो सकती है। शनिवार का दिन कर्म और न्याय के देवता भगवान शनि से जुड़ा है।

इन दिनों का भी रखें ध्यान

रविवार का दिन सूर्य का होता है और इस दिन छुट्टी होती है। हालांकि, पारंपरिक ज्योतिष इस दिन नाखून काटने की सलाह नहीं देता है। माना जाता है कि इससे आत्मविश्वास, सम्मान और पेशेवर तरक्की में कमी आती है।

इसके अलावा, हिंदू परंपरा में अमावस्या का भी खास आध्यात्मिक महत्व है। कुछ लोग इस दिन नाखून काटना ठीक नहीं मानते हैं। इनके अनुसार, ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, पूर्वज नाराज होते हैं और मानसिक चिंताएं बढ़ती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

नीलम चमकाएगा किस्मत या बढ़ाएगा परेशानी! पहनने से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम

क्या आपका बच्चा पढ़ने बैठता है लेकिन ध्यान भटक जाता है? रोज की ये 5 आदतें तेज याददाश्त और फोकस बेहतर करने में करेंगी मदद

जैसे ही नया शैक्षणिक वर्ष शुरू होता है, कई माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे ध्यान भटकाने वाली चीज़ों को छोड़कर अपने स्कूल के काम पर बेहतर ढंग से ध्यान दें। हालांकि, आज की आधुनिक दुनिया में, स्मार्ट टेलीविजन, फ़ोन, सोशल मीडिया और किसी विषय को पूरी तरह से न समझ पाना पढ़ाई के दौरान रुकावटें पैदा कर सकता है।

ध्यान और याददाश्त को बेहतर बनाने के उपाय खोजने से पहले, ध्यान (फ़ोकस) और एकाग्रता (कॉन्सेंट्रेशन) के बीच के अंतर को समझना ज़रूरी है। फ़ोकस का मतलब है किसी गतिविधि या विचार पर ध्यान देना, जबकि एकाग्रता का मतलब है किसी चीज़ पर लगातार ध्यान बनाए रखने की क्षमता। फ़ोकस और एकाग्रता दोनों ही ज़रूरी कौशल हैं जिनकी बच्चों को सीखने, लक्ष्य हासिल करने, अपनी भावनाओं को संभालने और रचनात्मक रूप से सोचने में सफलता के लिए आवश्यकता होती है। बच्चों को कामों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने के कई कारण हैं।

ध्यान और एकाग्रता कौशल में सुधार एक क्रमिक प्रक्रिया है जिसके लिए धैर्य, निरंतरता और निश्चित रूप से माता-पिता, शिक्षकों और साथियों से उचित सहयोग की आवश्यकता होती है। आज की दुनिया में, जो ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से भरी है, ऐसे कौशल विकसित करना एक रोज़मर्रा की दिनचर्या बन सकती है जो बच्चों को पढ़ाई में सफल होने और अधिक आत्मविश्वासी और मज़बूत व्यक्ति बनने में मदद करती है। हमने संस्कृति ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स के शिक्षक और ट्रस्टी प्रणीत मुंगाली से बात की, जिन्होंने 5 ऐसी आदतें बताईं जिनका अभ्यास स्कूली बच्चे कर सकते हैं और जो याददाश्त और फ़ोकस को बेहतर बनाने में सार्थक बदलाव ला सकती हैं:

1. शारीरिक व्यायाम को बढ़ावा देना

शारीरिक व्यायाम मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने के साथ-साथ एकाग्रता और समन्वय कौशल को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

a. योग और गहरी सांस लेने को बढ़ावा दें। योग मुद्राएं जैसे ‘ट्री पोज़’ (वृक्षासन) और ‘वॉरियर पोज़’ (वीरभद्रासन) शरीर में समन्वय बनाने और खुद पर नियंत्रण विकसित करने में मदद करती हैं। गहरी सांस लेने से बच्चे शांत और फिर से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होंगे।

b. क्रॉस-लेटरल मूवमेंट (शरीर के दोनों हिस्सों का इस्तेमाल करने वाली गतिविधियां) शुरू करें। ऐसी गतिविधियां जैसे अपने दाहिने कोहनी को अपने बाएं घुटने से छूना, मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का उपयोग करने में मदद करती हैं।

2. ऐसी गतिविधियां करें जो आपके मस्तिष्क को सक्रिय करें

मज़ेदार ब्रेन गेम्स ध्यान देने, याद रखने और तार्किक रूप से सोचने की आपकी क्षमता को विकसित करते हैं।

a. अंतर पहचानें या छिपी हुई वस्तु खोजें। यह अवलोकन कौशल, दृश्य स्मृति और लंबे समय तक ध्यान बनाए रखने की क्षमता विकसित करने के लिए किया जाता है।

b. पैटर्न की नकल करें और उन्हें आगे बढ़ाएं। रंगीन मोतियों, ब्लॉकों या किसी अन्य आकार का उपयोग करके पैटर्न बनाना और उन्हें आगे बढ़ाना अनुक्रमण कौशल, तार्किक सोच और फ़ोकस विकसित करता है।

c. स्टोरी चेन एक्टिविटी- हर बच्चे को कहानी में एक वाक्य जोड़ना होता है, जिसमें उन्हें यह याद रखना होता है कि पहले क्या कहा गया था। इससे सुनने की क्षमता, मौखिक याददाश्त और रचनात्मकता को विकसित करने में मदद मिलती है।

3. बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटें

कभी-कभी बच्चे काम से ध्यान हटा लेते हैं क्योंकि उन्हें वे काम बहुत मुश्किल लगते हैं। किसी नए या मुश्किल काम को कई आसान स्टेप्स में बांटने से उसे समझना, करना और याद रखना आसान हो जाता है।

4. पोमोडोरो तकनीक

पोमोडोरो तकनीक में कुछ समय (20-25 मिनट) तक किसी काम पर ध्यान देने और फिर थोड़ा ब्रेक (5 मिनट) लेने का सुझाव दिया जाता है। इस तकनीक से दिमाग की थकान कम होती है, प्रोडक्टिविटी बढ़ती है और ध्यान लगाने की क्षमता बेहतर होती है।

5. पढ़ाई के लिए ऐसी जगह बनाएं जहां ध्यान न भटके

बच्चों को पढ़ाई के लिए शांत और व्यवस्थित जगह देना बहुत ज़रूरी है। साथ ही, यह पक्का करें कि होमवर्क करते समय गैजेट्स जैसी चीज़ें उनका ध्यान न भटकाएं। आखिरी टिप लाइफ़स्टाइल के बारे में है। सही खान-पान, भरपूर पानी और अच्छी नींद से दिमाग बेहतर काम करता है, और ध्यान लगाने व याद रखने की क्षमता में सुधार होता है।

मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

13 साल की लक्ष्मी अपनी हिम्मत और मेहनत से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। शरीर से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपने स्कूल का काम पूरा करने का रास्ता खुद खोज लिया। वह पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और हर दिन यह साबित कर रही हैं कि मुश्किल हालात भी किसी के हौसले को रोक नहीं सकते।

सरकारी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली स्टूडेंट का जज्बा उन बच्चों के लिए भी इंस्पिरेशन है, जो किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ने का एक जरिया है। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, कोशिश जारी रखी जाए तो रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।

 

1. लक्ष्मी का डेली रूटीन

लक्ष्मी का स्कूल का रोज काम करने का तरीका काफी अलग है। वह अपने स्कूल बैग के पास बैठकर सबसे पहले उसे खोलती हैं और अपने पैरों की मदद से बैग के अंदर रखा सामान बाहर निकालती हैं। वह नोटबुक और पेन को सावधानी से निकालती हैं, फिर कॉपी को अपने सामने सही जगह पर रखती हैं। इसके बाद वह पन्ने पलटकर अपना काम शुरू कर देती हैं। आम बच्चों के लिए ये छोटे-छोटे काम बहुत आसान होते हैं, लेकिन लक्ष्मी को इन्हें करने के लिए ज्यादा मेहनत और ध्यान लगाना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने काम खुद करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने धीरे-धीरे इस तरीके को अपना डेली रूटीन बना लिया है।

 

2. पढ़ाई के प्रति लगन

लक्ष्मी की पढ़ाई के प्रति लगन उनकी सबसे खास बात है। वह अपने पैरों से पेन पकड़कर कॉपी में लिखती हैं और इसी तरह अपना स्कूल का काम पूरा करती हैं। वीडियो में वह बिना किसी जल्दबाजी के पूरे ध्यान से लिखती हुई दिखाई देती हैं। उनके लिए लिखना और कॉपी संभालना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया है। जिस काम के लिए दूसरे बच्चों को हाथों का सहारा मिलता है, उसके लिए लक्ष्मी अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए उन्हें रोज अभ्यास और मेहनत करनी पड़ती होगी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पढ़ाई के बीच रुकावट नहीं बनने दिया। उनका शांत तरीके से अपने काम पर ध्यान देना दिखाता है कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर कितनी गंभीर हैं।

 

3. बनी आम जनता की प्रेरणा

लक्ष्मी की लोगों ने उनकी मेहनत और हिम्मत की जमकर तारीफ की। कई लोगों को उनकी एकाग्रता और पढ़ाई के प्रति लगन काफी पसंद आई। लोगों ने उनके लिए अच्छे भविष्य, खुशी और सफलता की कामना करते हुए रियेक्ट किया। किसी ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें बहुत हिम्मती बताया, तो किसी ने उनके जज्बे को देखकर इंस्पिरेशन मिलने की बात कही। यही कारण है कि उनकी छोटी सी कोशिश कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गयी।

 

4. आगे बढ़ने का तरीका

लक्ष्मी की कहानी सिर्फ उनके स्कूल का काम करने या पैरों से लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देने की जरूरत भी दिखाती है। दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसा माहौल होना जरूरी है, जहां वे अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ाई कर सकें और बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। उनकी कहानी हमें यह समझाती है कि हर बच्चे के सीखने और आगे बढ़ने का तरीका अलग हो सकता है।

13 साल की लक्ष्मी की यह कहानी पढ़ाई के प्रति लगन को दिखाती है। पैरों से लिखकर स्कूल का काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। जो हमें सिखाती है कि सही मौका, सहयोग और मजबूत इरादे मिलें तो मुश्किल रास्ते भी आसान किए जा सकते हैं।

Sun Transit 2026: सूर्य इस दिन करने वाले हैं स्वराशि सिंह में गोचर, 4 राशियों के करियर और कारोबार में लगाएंगे चार चांद

Sun Transit 2026: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को यश, पिता और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति विशेष रूप से देखी जाती है। यह ग्रह जब राशि या नक्षत्र परिवर्तन करता है, तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। हर माह राशि परिवर्तन करने वाले इस ग्रह के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। अगस्त माह में सूर्य की सिंह संक्रांति होगी यानी सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि 17 अगस्त 2026 को सूर्य कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह गोचार विशेष रूप से चार राशि के जातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे उनके करियर और कारोबार में जबरदस्त उछाल आ सकता है। आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता पर पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने और आय के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

चार राशियों को होगा लाभ

मिथुन राशि : इस राशि के जातकों को यह परिवर्तन बड़ा ही शुभ परिणाम देने वाला रहेगा। इस दौरान व्यक्तित्व में निखार, आकर्षण और आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरीपेशा जातकों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, साथ ही प्रमोशन और वेतनवृद्धि के अवसर बनेंगे। व्यापारियों के लिए नई योजनाएं लाभदायक साबित हो सकती हैं।

सिंह राशि : ग्रहों के राजा सूर्य का यह परिवर्तन इस राशि के जातकों के लिए बड़ा शुभ परिणाम लेकर आया है। आय के नए स्रोत खुलने की संभावना है और लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आ सकती है। अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं, जिससे आर्थिक मजबूती मिलेगी।

तुला राशि : इस राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रह का यह गोचर सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान मानसिक तनाव कम होगा और शांति और संतुलन बना रहेगा। किस्मत का साथ मिलने के संकेत हैं। कार्य आसानी से पूरे हो सकते हैं। अविवाहित लोगों के रिश्तों में शुभ प्रगति होने की संभावना बन सकती है।

वृश्चिक राशि : इस राशि के जातकों के लिए आने वाला समय शुभ संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां दूर होने के योग बन रहे हैं और कार्यक्षेत्र में पदोन्नति के अवसर भी मिल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय बदलाव और प्रगति का साबित हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Surya Grahan impact: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण आज, शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती वाली राशियों पर 15 दिन मंडराएगा खतरा

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन शिवरात्रि पर एक साथ बन रहे हैं 4 राजयोग, 4 राशियों पर बरसेगी भगवान की कृपा और मिलेगा मान-सम्मान

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो कर इसी दिन भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन ढेरों शिवभक्त पवित्र नदियों से कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। खास बात यह है कि इस साल शिवरात्रि पर एक साथ कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक तो सावन शिवरात्रि का पर्व दूसरे मंगला गौरी व्रत के साथ पड़ रहा है। इसके अलावा यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से 4 प्रभावशाली राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इनमें हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग शामिल हैं। इन शुभ योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिल सकता है। लेकिन 4 राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। इन राशियों को करियर में सफलता, कारोबार में लाभ, आर्थिक मजबूती और समाज में मान-सम्मान मिलने के योग बन सकते हैं। आइए जानते हैं कि वे शुभ राशियां कौन सी हैं।

इन चार राशियों को होगा लाभ

वृषभ राशि : इन शुभ योगों के बनने से वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है। करियर में लंबे समय से अटके काम अब गति पकड़ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ प्रमोशन के अवसर भी बन सकते हैं। व्यापारियों को नए ग्राहक मिलने और आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

कर्क राशि : इस राशि के जातकों के लिए चारों राजयोगों का सबसे शुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होंगे।

तुला राशि : इस राशि के जातकों को यह राजयोग सफलता की सीढ़ी चढ़ा सकता है। इस अवधि में व्यापार से जुड़े जातकों को अच्छे लाभ के अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट गति पकड़ेंगे और उन्हें पूरा करने में सफलता मिल सकती है।

कुंभ राशि : शुभ राजयोग से कुंभ राशि के जातकों की किस्मत चमक सकती है। नौकरी में बदलाव या करियर की नई शुरुआत करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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Dwi Dwadash Yog: बुध-मंगल ने दुर्लभ द्विद्वादश योग बनाया, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत और बढ़ेगी धन-संपत्ति

विराट पर ब्रेट ली का बड़ा खुलासा, जब कोहली की बल्लेबाजी देखकर रह गए थे हैरान…बताया ये किस्सा

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने भारत के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली की जमकर तारीफ की है। ली के मुताबिक, कुछ खिलाड़ी शुरुआत में सबसे बेहतरीन नजर नहीं आते, लेकिन उनका मजबूत सोचने का तरीका उन्हें आगे चलकर सफल बनाता है। विराट कोहली भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। ली ने बताया कि कोहली के शुरुआती दौर में उनकी बल्लेबाजी से ज्यादा उनकी आंखों में दिखने वाला आत्मविश्वास और जोश उन्हें प्रभावित करता था। वहीं कोहली का आक्रामक और मुकाबला करने वाला अंदाज इंटरनेशनल क्रिकेट में शुरुआती दिनों से ही दिखाई देता था।

विराट के अंदर जीतने की जबरदस्त इच्छा

ब्रेट ली के मुताबिक, विराट कोहली के अंदर शुरू से ही जीतने की जबरदस्त इच्छा थी, जिसने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाई। ब्रेट ली ने बीयर बाइसेप्स के पॉडकास्ट पर बात करते हुए कहा, “आप इसे उनकी आंखों में देख सकते हैं। कुछ खिलाड़ियों में यह खास बात होती है। हो सकता है कि शुरुआत में उनमें ज्यादा टैलेंट न दिखे, लेकिन उनका मानसिक रवैया मजबूत होता है। उनमें यह सोच होती है कि क्या वे बाकी खिलाड़ियों से ज्यादा फोकस कर सकते हैं।”

विराट की तारीफ की

ली ने कहा, “आपने उनकी आंखें देखी हैं। वह सीधे आपकी तरफ देखते हैं और ऐसा लगता है जैसे कह रहे हों, ‘गेम शुरू हो गया है और तुम मुझे आउट नहीं कर पाओगे।’ जब मैंने उनके खिलाफ खेला था, तब मैंने यह चीज उनमें देखी थी।” पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने आगे कहा, “आज आप देख सकते हैं कि उनका करियर कितना शानदार रहा है।” ब्रेट ली की बातों से विराट कोहली के करियर के पीछे की सोच और मेहनत की झलक मिलती है।

बड़े क्रिकेटरों में शामिल है

ली के मुताबिक, कोहली की सफलता को सिर्फ उनके रनों और रिकॉर्ड के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में बड़ा स्टार बनना अपने साथ काफी दबाव भी लेकर आता है। कोहली ने इस दबाव के बीच लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और खुद को देश के सबसे बड़े क्रिकेट सितारों में शामिल किया। उन्होंने कहा, “दूसरी बात ये है कि आप अलग-अलग दौर के खिलाड़ियों की तुलना नहीं कर सकते। जरा सोचिए कि सनी भाई ने क्या किया था। सनी गावस्कर बहुत बड़े खिलाड़ी थे। इसके बाद सचिन तेंदुलकर आए, जिन्होंने उनकी जगह लेने और उस मुकाम तक पहुंचने की कोशिश की।”

ली ने आगे कहा, “उस समय सचिन के साथ करीब 1.5 अरब लोगों की उम्मीदें जुड़ी थीं। पूरा देश उन्हें सपोर्ट करता था और उन्हें इन उम्मीदों का दबाव अपने कंधों पर उठाना पड़ता था। इसके बाद विराट कोहली आए, जिन्होंने सचिन की जगह लेने की जिम्मेदारी संभाली।”

18,000 रुपये की सैलरी से शुरू हुआ सफर, अब हर महीने ₹10 लाख कमाते हैं शब्बीर, जानें कैसे बदली किस्मत

रात की नौकरी और दिनभर की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन शब्बीर मिठाईवाला ने कई साल तक इसी चुनौतीपूर्ण जिंदगी को अपनी मेहनत का हिस्सा बनाया। UAE में बचपन बिताने के बाद पढ़ाई के लिए मुंबई आए शब्बीर के सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के लिए उन्होंने नौकरी करने का फैसला किया। एक कॉल सेंटर से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आगे चलकर उनके करियर और जिंदगी की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। दिन में कॉलेज, पढ़ाई और रात की शिफ्ट के बीच उन्होंने लगातार मेहनत की।

उस दौर में उनकी कमाई भले ही आज की तुलना में छोटी थी, लेकिन अनुभव और संघर्ष ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। कई साल बाद जब परिस्थितियों ने उन्हें एक बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया, तब मुंबई में सीखी मेहनत और आत्मनिर्भरता उनके काम आई। उनकी कहानी अब संघर्ष से सफलता तक के सफर की मिसाल बन गई है।

18-19 घंटे की जिंदगी, पांच साल तक यही रूटीन

कमाई का इस्तेमाल किराए, खाने और पढ़ाई के खर्चों को संभालने में होता था, लेकिन इसके लिए उन्हें बेहद व्यस्त दिनचर्या अपनानी पड़ती थी। सुबह 11 बजे तक कॉलेज, दोपहर से शाम तक CA की कोचिंग और रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नौकरी। यानी कई बार दिन का करीब 18-19 घंटे हिस्सा पढ़ाई और काम में गुजरता था। शब्बीर के मुताबिक, करीब पांच साल तक उन्होंने इसी तरह काम किया और इसी अनुभव ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में शुरुआत से कुछ खड़ा करने का आत्मविश्वास दिया।

पिता की आंख की रोशनी गई, तो बदल गई जिंदगी की दिशा

CA की पढ़ाई पूरी करने के दौरान उन्हें पता चला कि उनके पिता की एक आंख की रोशनी चली गई है। उनके पिता 1984 से दुबई में पिक्चर-फ्रेम का कारोबार चला रहे थे, लेकिन 2013 में जब शब्बीर UAE लौटे, तब परिवार का बिजनेस गंभीर आर्थिक संकट में था। कारोबार में कैश-फ्लो की समस्या थी और करीब 10 लाख दिरहम का कर्ज जमा हो चुका था। दूसरी ओर, परिवार को शब्बीर के छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना था।

CA का सपना छोड़ा, परिवार का कारोबार चुना

शब्बीर के सामने बड़ा सवाल था जिस CA करियर के लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की, उसे आगे बढ़ाएं या परिवार के मुश्किल दौर में कारोबार संभालें? उन्होंने CA करियर छोड़कर परिवार के बिजनेस में लौटने का फैसला किया। मुंबई के वर्षों के संघर्ष ने उन्हें दोबारा शून्य से शुरुआत करने का हौसला दिया था। दुबई लौटने के बाद उन्होंने एक बार फिर करीब 19-20 घंटे काम करने वाली दिनचर्या अपना ली।

पिक्चर फ्रेम से आर्किटेक्चरल ग्लास तक बदला कारोबार

शब्बीर सिर्फ पुराने बिजनेस को बचाने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कारोबार के लिए नया रास्ता तलाशना शुरू किया। पारंपरिक रूप से परिवार का काम पिक्चर फ्रेम बनाने पर केंद्रित था, लेकिन उन्होंने इसे एक नए बाजार की ओर ले जाने का फैसला किया। 2017 में उन्होंने Glass R Us Industries की शुरुआत की, जिसके जरिए कंपनी ने आर्किटेक्चरल ग्लास सॉल्यूशंस की दिशा में कदम बढ़ाया। कारोबार अब रेजिडेंशियल, कमर्शियल और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए ग्लास सॉल्यूशंस देने की ओर बढ़ गया।

करीब 7 साल लगे कर्ज से बाहर निकलने में

कारोबार को नई दिशा देने के बावजूद आर्थिक मुश्किलें तुरंत खत्म नहीं हुईं। शब्बीर के मुताबिक, परिवार को करीब छह से सात साल का समय लगा पूरा कर्ज चुकाने में। कर्ज खत्म होने के बाद उनका फोकस सिर्फ कारोबार चलाने पर नहीं रहा। उन्होंने इसे आगे बढ़ाने और एक लग्जरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया।

खुद की सैलरी भी रखी सीमित

करीब 10 लाख दिरहम के कर्ज का अनुभव शब्बीर की वित्तीय सोच पर भी गहरा असर डाल गया। अब वह कर्ज लेने और खर्च करने को लेकर काफी सावधानी बरतते हैं। उनके मुताबिक, कंपनी से वह हर महीने करीब 40,000 दिरहम यानी लगभग ₹10 लाख लेते हैं, जबकि वह इससे ज्यादा रकम भी निकाल सकते हैं। लेकिन वह अपने व्यक्तिगत खर्च और जरूरतों का हिसाब लगाकर सैलरी की सीमा तय करते हैं और बाकी पैसा कारोबार में वापस लगाते हैं।

अब लक्ष्य है इंटरनेशनल मार्केट और रोजाना $1 मिलियन

शब्बीर की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ पारिवारिक कारोबार को सफल बनाने तक सीमित नहीं है। वह अपने ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य सुनकर शायद कई लोग चौंक जाएं। शब्बीर का कहना है कि वह भविष्य में हर दिन 1 मिलियन डॉलर कमाने का लक्ष्य रखते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक बड़ी रकम का सपना नहीं, बल्कि सोच को बड़े स्तर पर ले जाने का लक्ष्य है। मुंबई की रात की शिफ्ट से शुरू हुई उनकी कहानी अब दुबई से ग्लोबल बिजनेस बनाने की महत्वाकांक्षा तक पहुंच चुकी है।

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