राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 7 साल में 17वीं बार आया जेल से बाहर

parole to gurmit ram rahim

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पैरोल मिल गई है। यौन शोषण के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को 17वीं बार पैरोल पर रिहा किया गया है। वह जेल से बाहर निकलकर सीधे सिरसा जाएगा। ALSO READ: बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

 

2 साध्वियों से दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा

गुरमीत राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2 साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया था। इसके तीन दिन बाद 28 अगस्त 2017 को अदालत ने दोनों मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इस तरह उसे कुल 20 साल की कारावास की सजा मिली। राम रहीम इसके अलावा एक पूर्व डेरा प्रबंधक और एक पत्रकार की हत्या के मामलों में भी दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने इन दोनों मामलों में उसे बरी कर दिया।
 

पैरोल मिलने की अनिवार्य शर्तें

पैरोल मिलने की सबसे बड़ी शर्त जेल के अंदर कैदी का आचरण है। यह भी देखा जाता है कि क्या उसने जेल के नियमों का पालन किया? राम रहीम को अक्सर उसके अच्छे व्यवहार के आधार पर ही पैरोल की रिपोर्ट मिलती है। आमतौर पर पैरोल तभी मिलती है जब कैदी अपनी सजा का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 1 या 3 साल) काट चुका हो। स्थानीय पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट ली जाती है कि क्या उस कैदी के बाहर आने से इलाके में 'लॉ एंड ऑर्डर' (कानून-व्यवस्था) बिगड़ने का खतरा तो नहीं है। कैदी को भारी सुरक्षा राशि (Bail Bond) जमा करनी पड़ती है और दो 'जमानतदारों' की गारंटी देनी होती है कि वह समय पर वापस आएगा। 

 

गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल मिलने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने पहले भी इस पर आपत्ति जताई है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि पैरोल नियमों के तहत दी जाती है। 

 

कब कब जेल से बाहर आया राम रहीम?

2020 (अक्टूबर) : 1 दिन

2021 (मई) : 1 दिन

2022 (फरवरी) : 21 दिन

2022 (जून) : 30 दिन

2022 (अक्टूबर) : 40 दिन

2023 (जनवरी) : 40 दिन

2023 (जुलाई) : 30 दिन

2023 (नवंबर) : 21 दिन

2024 (जनवरी) : 50 दिन

2024 (अगस्त) : 21 दिन

2024 (अक्टूबर) : 20 दिन

2025 (जनवरी) : 21 दिन

2025 (मई) : 20 दिन

2025 (सितंबर) : 21 दिन

2026 (फरवरी) : 20 दिन

2026 (मई) : 30 दिन

2026 (अगस्त) : 21 दिन

Top five CNG cars under Rs 10 lakh

Top five CNG cars under Rs 10 lakh
Best CNG SUVs under Rs 10 lakh

CNG cars are no longer considered budget options like before. Today, they are offered across multiple body styles and price points and even with automatic gearboxes. Moreover, with manufacturers now offering good features across the line-up, along with dual-tank or underbody CNG tank setups that free up boot space, these cars now don’t feel like a compromise made for lower running costs. Here, we have listed the best CNG cars under Rs 10 lakh that you can buy.

1. Maruti Suzuki Dzire CNG 

Price: Rs 8.11 lakh-Rs 9.11 lakh 

The Maruti Dzire is powered by a 1.2-litre 3-cylinder engine that produces 70hp and 102Nm of torque in the CNG spec. While performance is adequate for everyday driving, the Dzire really impresses with its great ride quality and tidy handling manners. The cabin is spacious, and with CNG available on the mid-spec VXi and ZXi trims, most features are covered, too. The Dzire gets a single large CNG tank in the boot but still offers some usable space.   

2. Maruti Suzuki Baleno CNG

Price: Rs 7.77 lakh-Rs 8.67 lakh

The Maruti Baleno uses a 1.2-litre 4-cylinder engine that develops 78hp and 98Nm of torque in the CNG spec. It’s a smooth, refined and efficient CNG powertrain. Like on the Dzire, CNG is available on the mid-spec Delta and Zeta trims that come reasonably well equipped. This car, too, has a very spacious cabin, although its boot space is compromised by a single large CNG tank. One can also consider its Toyota twin, the Glanza, which, too, is available with CNG on the equivalent mid-spec S and G trims. 

3. Hyundai Exter CNG

Price: Rs 6.99 lakh-Rs 9.42 lakh 

The Hyundai Exter has a 1.2-litre 4-cylinder engine that produces 69hp and 95Nm of peak torque. It has a wide spread of CNG variants, with top trims being particularly well equipped. The Exter also gets twin CNG tanks that don’t take up too much boot space, and its smooth engine and compact dimensions make it very user-friendly. However, interior space isn’t as good as some other cars here.

4. Tata Punch CNG

Price: Rs 6.80 lakh-Rs 10.67 lakh 

The Tata Punch uses a 1.2-litre 3-cylinder engine that produces 73hp and 103Nm of torque in CNG mode. The Punch CNG is the only one on this list to offer an AMT gearbox. It’s also the best-equipped CNG model here, with a wide spread of variants, but the top ones are quite expensive. Performance is just about adequate, but ride and handling are good, and twin CNG tanks leave usable boot space. 

5. Nissan Gravite CNG

Price: Rs 6.59 lakh-Rs 8.94 lakh 

The Nissan Gravite is powered by a 1.0-litre 3-cylinder engine. However, since the CNG kit on the Gravite is a dealer-level fitment and has not been homologated, specific power and torque figures aren’t available. The Gravite’s real USP is its excellent packaging and flexible 7-seat configuration. As the CNG kit comes as a dealer fitment, it can be had on all trims. The Gravite is, however, not as well equipped as some other models here; the performance is quite dull, and the twin CNG tanks in the boot leave no usable space.

Gold Price Today: विदेश में 3 महीने के हाई के करीब पहुंचा सोना, जैक्सन होल से पहले फेड के कदम पर बाजार की नजर

Gold Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बॉन्ड मार्केट में US ट्रेजरी के आने वाले कदमों का आकलन कर रहे हैं। यह आकलन एक अप्रत्याशित दखल के बाद हो रहा है जिसने फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।

COMEX गोल्ड में 1% यानी 46.90 की बड़ी बढ़त हुई और यह पिछले क्लोज 4,710.10 से बढ़कर 4,744.70 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, COMEX सिल्वर 1.26% या 0.861 बढ़कर 69.455 पर पहुंच गई, जबकि पिछला क्लोज 68.96 था।

ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-टर्म सरकारी कर्ज की बायबैक (वापसी खरीद) बढ़ाने के बाद लगातार चार सेशन में 7% से अधिक की बढ़त के साथ बुलियन की कीमत $4,680 प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।

इस अप्रत्याशित कदम ने कर्ज लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और डॉलर पर दबाव डाला है। जिससे सोना (जिसकी कीमत डॉलर में तय होती है) कई खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है।

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की अपनी तैयारी का संकेत दिया है, हालांकि सोमवार को उन्होंने कोई अतिरिक्त संकेत नहीं दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि केविन वॉर्श शुक्रवार को सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल बैंक के चेयरमैन के तौर पर लगातार बनी हुई महंगाई पर फेडरल रिजर्व को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे।

US कर्ज की लागत को मैनेज करने के हालिया कदमों ने महंगाई और डॉलर की कमजोरी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे उस ‘डीबेसमेंट नैरेटिव’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट की धारणा) की वापसी का संकेत मिलता है, जिसने 2025 में सोने की जबरदस्त तेजी में योगदान दिया था।

सोने की इस उल्लेखनीय रिकवरी ने धातु को महत्वपूर्ण 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसे अक्सर तेजी का संकेत (बुलिश टेक्निकल इंडिकेटर) माना जाता है।

बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) से इस धातु की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) वाली खासियत को भी चुनौती मिल रही है। US ने ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बातचीत विफल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कनाडा के साथ व्यापारिक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: चारों महानगरों में सबसे महंगा गोल्ड दिल्ली में, चेक करें 10 शहरों में 24 से 18 कैरट सोना कहां सबसे सस्ता

Gold Rate Today in India: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते गोल्ड की चमक आज लगातार दूसरे दिन मजबूत हुई है तो इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी से चांदी पर दबाव दिखा। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की स्थिरता के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹890 और 22 कैरट वाला ₹810 महंगा हुआ है। 23 अगस्त की स्थिरता से पहले लगातार तीन दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट की शुद्धता वाला गोल्ड ₹8120 और 22 कैरट वाला ₹7450 महंगा हुआ है। अब आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 मजबूत हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी चमक फीकी हुई है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव नीचे आए हैं। एक किलो चांदी आज ₹100 सस्ती हुई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,64,130₹1,50,460₹1,23,090
मुंबई₹1,63,980 ं₹1,50,310₹1,22,940
कोलकाता₹1,63,980₹1,50,310₹1,22,940
चेन्नई₹1,63,980₹1,50,310₹1,28,010
बेंगलुरू₹1,63,980₹1,50,310₹1,22,940
हैदराबाद₹1,63,980₹1,50,310₹1,22,940
लखनऊ₹1,64,130₹1,50,460₹1,23,090
पटना₹1,64,030₹1,50,360₹1,22,990
जयपुर₹1,64,130₹1,50,460₹1,23,090
अहमदाबाद₹1,64,030₹1,50,360₹1,22,990

तीन दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज इसके भाव कम हुए हैं। इन तीन दिनों की स्थिरता से पहले लगातार दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,500 ऊपर चढ़ी थी तो उससे भी एक दिन पहले 19 अगस्त को एक किलो चांदी ₹5000 नीचे आई थी। अब आज की बात करें तो दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,59,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,75,100 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग के चलते घरेलू बाजार में सोना तेजी से ऊपर चढ़ा। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी है। स्पॉट गोल्ड $42.45 यानी करीब 1% बढ़कर प्रति औंस $4,646.54 पर पहुंच गया। वहीं चांदी प्रति औंस करीब $69 पर स्थिर रही।

एनालिस्ट्स के मुताबिक अब गोल्ड की चाल सिर्फ जियो-पॉलिटिकल टेंशन से नहीं तय होगी बल्कि महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) कायनात चेनवाला का कहना है कि पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। मार्केट की नजर इस बात पर रहेगी कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा रिस्क पैदा होता है।

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Asian Market Today: टेक शेयरों में बिकवाली बढ़ने से एशिया में गिरावट, Nvidia के नतीजों से पहले KOSPI 3% से ज़्यादा लुढ़का

Asian Market Today:  आज एशिया मार्केट में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशकों ने टेक शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की, क्योंकि आने वाली कमाई की रिपोर्ट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रैली को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.4% गिर गया। शुरुआती एशियाई कारोबार में जापान और दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई। Kospi 3.37% और Nikkei 225 0.93% गिरे, जबकि Topix में मामूली 0.015% की बढ़त हुई। इसके उलट, Hang Seng फ्यूचर्स में 0.6% की बढ़त हुई।

यह क्षेत्रीय गिरावट चिप बनाने वाली कंपनियों में भारी बिकवाली के बाद आई, जिससे सोमवार को Nasdaq 100 लगभग 1% गिर गया था। Nvidia Corp के शेयरों में लगातार सातवें सेशन में गिरावट आई, जो 2022 के बाद से इस स्टॉक की सबसे लंबी गिरावट का दौर है।

चिप बनाने वाली कंपनी के शेयरों में और 2.9% की गिरावट आई, जब उसने ग्राहकों को बताया कि वह अगले साल की शुरुआत में शिप होने वाले AI सिस्टम की कीमतें बढ़ाएगी। शुरुआती एशियाई कारोबार में US इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में भी मामूली गिरावट देखी गई।

निवेशकों का कहना है कि यह बिकवाली इस बढ़ती चिंता को दिखाती है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारी खर्च से उतना ही मुनाफ़ा होगा। बुधवार को आने वाली Nvidia की कमाई की रिपोर्ट को इस भरोसे के लिए एक अहम परीक्षा माना जा रहा है। ट्रेडर्स इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि क्या चिप शेयरों में हालिया गिरावट जारी रहेगी।

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और यह $92 प्रति बैरल के आसपास बना रहा। US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ़ आर्थिक दंड की चेतावनी दी थी।

सोमवार को बेंचमार्क में 2% से ज़्यादा की गिरावट आई थी, जिससे छह दिनों की लगातार बढ़त का सिलसिला टूट गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.3% बढ़कर $85.23 प्रति बैरल हो गया।

ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से सोमवार को US ट्रेजरी बॉन्ड को सहारा मिला और 10-साल की यील्ड चार बेसिस पॉइंट गिरकर 4.70% हो गई।

ट्रेडर्स ने बढ़ते जियोपॉलिटिकल रिस्क और इस हफ़्ते आने वाले ढेर सारे इकोनॉमिक डेटा और कॉर्पोरेट नतीजों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। व्यापक मार्केट सेंटीमेंट के लिए टेक्नोलॉजी सेक्टर की चाल को अहम माना जा रहा है। लगातार महंगाई और फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटे) की चिंताओं के कारण यील्ड ऊंचे बने रहे, और बाजार फेड चेयर केविन वॉर्श से इस साल के बाकी समय के लिए फेडरल रिजर्व की संभावित राह के बारे में स्पष्ट गाइडेंस का इंतजार कर रहे थे।

CNBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेजरी को भी सपोर्ट मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि US ट्रेजरी डिपार्टमेंट उधार लेने की लागत को कम करने में मदद के लिए पुराने, अधिक यील्ड वाले सिक्योरिटीज़ को वापस खरीदने (बायबैक) के लिए अपने कैश रिजर्व का इस्तेमाल कर सकता है।

हालांकि, ब्लूमबर्ग के अनुसार, बेसेंट ने सोमवार को एक भाषण के दौरान कर्ज प्रबंधन रणनीति में किसी भी बदलाव की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। बायबैक बढ़ाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा कि विभाग ने “अभी तक एक भी बॉन्ड नहीं खरीदा है”।

दूसरी ओर, जापानी येन 159.11 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.7201 प्रति डॉलर पर लगभग अपरिवर्तित रहा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Rashifal Today: इन मूलांक वालों को मिलेगा आज आर्थिक लाभ! जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। यह न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें, खासकर उन जगहों पर जहां पहले नुकसान हो चुका है। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सुधार देखने को मिल सकता है। पैसों से जुड़े फैसले लेते समय आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। अगर निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो समय आपके पक्ष में रह सकता है। किसी करीबी व्यक्ति की सलाह भी आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। छोटी आर्थिक खुशी मिल सकती है, लेकिन बिना सोचे पैसे खर्च करने से बचें। बजट बनाकर चलना बेहतर रहेगा।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में थोड़ी परेशानी हो सकती है। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है, इसलिए बजट का ध्यान रखें। आज निवेश करते समय जल्दबाजी न करें और किसी भी योजना को अच्छी तरह समझने के बाद ही फैसला लें। गैर-जरूरी खरीदारी से बचना आपके लिए बेहतर होगा।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो संभावना आज आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की संभावना है। पुराने निवेश से फायदा मिल सकता है, लेकिन अभी ज्यादा जोखिम वाले निवेश से दूर रहना बेहतर होगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें और भविष्य के लिए बचत करें। पैसों से जुड़ा कोई फैसला लेने से पहले परिवार के लोगों से सलाह करना भी फायदेमंद रहेगा।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं। कारोबार से जुड़े किसी सौदे में नुकसान होने की आशंका है। इसलिए खर्चों पर नियंत्रण रखें और बचत को प्राथमिकता दें। निवेश करने से पहले पूरी जानकारी हासिल करें। अपने पुराने वित्तीय फैसलों और योजनाओं की समीक्षा करने का भी यह सही समय है। धैर्य से काम लेना आपके लिए जरूरी रहेगा।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों से जुड़े मामलों में सावधानी बरतनी होगी। किसी निवेश या बड़े आर्थिक फैसले में नुकसान की संभावना हो सकती है। कारोबार करने वालों के सामने अचानक खर्च आ सकता है। इसलिए सिर्फ जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें और अपनी बचत को सुरक्षित रखें।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में अच्छे मौके मिल सकते हैं। अगर आप लंबे समय से किसी निवेश की योजना बना रहे हैं तो उस पर आगे बढ़ने का विचार कर सकते हैं। सही वित्तीय फैसलों से आपका बजट बेहतर हो सकता है और बचत का लक्ष्य पूरा होने की संभावना है।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में दिन अच्छा रह सकता है। आर्थिक फैसलों को लेकर आपको ज्यादा स्पष्टता और आत्मविश्वास महसूस होगा। निवेश के नए मौके मिल सकते हैं और पुराने निवेश से भी फायदा हो सकता है। अगर कोई बड़ा आर्थिक फैसला लेने की सोच रहे हैं तो आज का दिन अनुकूल रह सकता है।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें, खासकर उन जगहों पर जहां पहले नुकसान हो चुका है। पुराने निवेश को लेकर चिंता हो सकती है, इसलिए जल्दबाजी में कोई फैसला न करें। गैर-जरूरी खरीदारी से बचें और अपने खर्चों पर नजर रखें। धैर्य और समझदारी से आप आर्थिक स्थिति को संतुलित रख सकते हैं।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आपको पैसों के मामले में सतर्क रहना होगा। कुछ आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, इसलिए बेवजह खर्च करने से बचें। किसी बड़े निवेश से पहले पूरी जानकारी जरूर लें। पार्टनरशिप में काम करने वालों को आर्थिक मामलों में थोड़ी परेशानी हो सकती है। ऐसे में हर फैसला सोच-समझकर लें।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 15% घटी:सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच 2025-26 में कमी; पिछले साल 3.63 लाख स्टूडेंट गए थे

अमेरिका में 2025-26 सेशन में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 15% घट गई है। यह जानकारी 1,100 से ज्यादा संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-लाभकारी संगठन की रिपोर्ट में सामने आई है। कॉमन ऐप की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में अंडरग्रेजुएट दाखिले के लिए कुल आवेदन बढ़े हैं। हालांकि, 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय आवेदकों की संख्या 10% घट गई, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। रिपोर्ट में भारत से आने वाले आवेदकों की संख्या में 15% कमी दर्ज की गई है। अमेरिका में सबसे ज्यादा भारत से स्टूडेंट पढ़ने जाते हैं। अमेरिकी कॉलेजों में छात्रों के रजिस्ट्रेशन घट सकते हैं इससे पहले शिक्षकों के एक संगठन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सख्त वीजा नियमों और नीतियों को लेकर अनिश्चितता के कारण Fall 2026 में अमेरिकी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रजिस्ट्रेशन 1.1 लाख तक घट सकते हैं। NAFSA और रिसर्च फर्म JB International की रिपोर्ट के मुताबिक, Fall 2025-26 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का रजिस्ट्रेशन अनुमानित 11.69 लाख था। इस साल यह घटकर 10.57 लाख रह गया है। अमेरिका में विदेशी छात्रों का 41.77 अरब डॉलर का योगदान 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में भारत से 3.63 लाख से ज्यादा छात्रों ने अलग-अलग कोर्स में दाखिला लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था में 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया। 2026-27 में यह आंकड़ा 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। छात्र और विजिटर वीजा के नए नियम जुलाई में अमेरिकी सरकार ने नए नियमों की जानकारी दी थी। इन नियमों के तहत छात्र और विजिटर वीजा के लिए स्टेटस की पारंपरिक अवधि खत्म कर दी गई है और रहने की अवधि चार साल तय की गई है। चार साल की अवधि आमतौर पर किसी अकादमिक कोर्स की अवधि के बराबर होती है। अमेरिका उन विदेशी छात्रों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने पर भी विचार कर रहा है, जो ग्रेजुएशन के बाद देश में काम करने के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल करना चाहते हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका H-1B वीजा पर ₹98 लाख वसूलेगा: भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने सोमवार को H-1B वीजा के लिए नया प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को हर वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर (करीब 98 लाख रुपए) की एक्सट्रा फीस देनी होगी। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 15% घटी:सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच 2025-26 में कमी; पिछले साल 3.63 लाख स्टूडेंट गए थे

अमेरिका में 2025-26 सेशन में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 15% घट गई है। यह जानकारी 1,100 से ज्यादा संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-लाभकारी संगठन की रिपोर्ट में सामने आई है। कॉमन ऐप की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में अंडरग्रेजुएट दाखिले के लिए कुल आवेदन बढ़े हैं। हालांकि, 1 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय आवेदकों की संख्या 10% घट गई, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। रिपोर्ट में भारत से आने वाले आवेदकों की संख्या में 15% कमी दर्ज की गई है। अमेरिका में सबसे ज्यादा भारत से स्टूडेंट पढ़ने जाते हैं। अमेरिकी कॉलेजों में छात्रों के रजिस्ट्रेशन घट सकते हैं इससे पहले शिक्षकों के एक संगठन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सख्त वीजा नियमों और नीतियों को लेकर अनिश्चितता के कारण Fall 2026 में अमेरिकी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रजिस्ट्रेशन 1.1 लाख तक घट सकते हैं। NAFSA और रिसर्च फर्म JB International की रिपोर्ट के मुताबिक, Fall 2025-26 में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का रजिस्ट्रेशन अनुमानित 11.69 लाख था। इस साल यह घटकर 10.57 लाख रह गया है। अमेरिका में विदेशी छात्रों का 41.77 अरब डॉलर का योगदान 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में भारत से 3.63 लाख से ज्यादा छात्रों ने अलग-अलग कोर्स में दाखिला लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था में 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया। 2026-27 में यह आंकड़ा 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। छात्र और विजिटर वीजा के नए नियम जुलाई में अमेरिकी सरकार ने नए नियमों की जानकारी दी थी। इन नियमों के तहत छात्र और विजिटर वीजा के लिए स्टेटस की पारंपरिक अवधि खत्म कर दी गई है और रहने की अवधि चार साल तय की गई है। चार साल की अवधि आमतौर पर किसी अकादमिक कोर्स की अवधि के बराबर होती है। अमेरिका उन विदेशी छात्रों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने पर भी विचार कर रहा है, जो ग्रेजुएशन के बाद देश में काम करने के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल करना चाहते हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका H-1B वीजा पर ₹98 लाख वसूलेगा: भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने सोमवार को H-1B वीजा के लिए नया प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को हर वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर (करीब 98 लाख रुपए) की एक्सट्रा फीस देनी होगी। पूरी खबर पढ़ें…

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर से अधिक की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) की ओर से जारी प्रस्ताव के तहत यह फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर की जा सकती है। सोमवार को Federal Register में प्रकाशित नोटिस के मुताबिक, यह फीस उन सभी H-1B वीजा कैप-सब्जेक्ट आवेदनों पर लागू होगी, जिनमें एडवांस्ड डिग्री यानी उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध छूट वाली श्रेणी भी शामिल है।

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H-1B फीस बढ़ाने का नया प्रस्ताव

 

DHS का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब H-1B वीजा फीस को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी विवाद चल रहा है। करीब एक महीने पहले एक संघीय अपीलीय अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला जज के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसने ट्रंप प्रशासन की 1 लाख डॉलर H-1B फीस लगाने की योजना को पलट दिया था।

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सितंबर 2025 में ट्रंप ने एक व्यापक घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत H-1B वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रावधान किया गया था। इसी दौरान अमीर लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह के तौर पर 10 लाख डॉलर के ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा की योजना भी पेश की गई थी।

 

हालांकि, बाद में एक संघीय अदालत ने 1 लाख डॉलर की H-1B फीस को रद्द कर दिया था। वहीं, ‘गोल्ड कार्ड’ कार्यक्रम एक अलग पहल है।

 

भारतीय प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

नई प्रस्तावित फीस का सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि H-1B वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है। H-1B वीजा मुख्य रूप से ऐसे विशेषज्ञ पेशों (Specialty Occupations) के लिए जारी किया जाता है, जिनमें आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है।

 

यह वीजा लंबे समय से अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों और IT सर्विसेज कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने का प्रमुख माध्यम रहा है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए करती हैं।

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H-1B वीजा के लिए होता है लॉटरी सिस्टम

 

परंपरागत रूप से जब H-1B वीजा के लिए आवेदन वार्षिक सीमा से अधिक हो जाते थे, तो कैप-सब्जेक्ट वीजा आवेदनों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता था। हालांकि, हाल के वर्षों में H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं।

 

Amazon, Infosys और TCS समेत ये कंपनियां बड़ी नियोक्ता

H-1B कार्यक्रम के तहत Amazon लगातार सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल रही है। इसके अलावा Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Microsoft और Google जैसी कंपनियां भी H-1B वीजा के प्रमुख नियोक्ताओं में शामिल हैं। अमेरिका का California राज्य भी H-1B मंजूरियों के मामले में प्रमुख राज्यों में बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह राज्य में टेक्नोलॉजी कंपनियों की भारी मौजूदगी है।

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नए प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने पर अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे विदेशी कुशल कर्मचारियों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है। भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिकी टेक कंपनियां इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा प्रभावित पक्षों में शामिल हो सकती हैं।

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

jharkhand student protest

युवा किसी भी राष्ट्र का वर्तमान और भविष्य होते हैं। किसी देश का युवा उसके भविष्य का निर्माता होता है। विश्व का इतिहास बताता है कि हर दौर में युवा वर्ग ने समाज को दिशा देने और व्यवस्था को चुनौती देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। जब कहीं भी सामाजिक बदलाव की कोई हवा चलती है उसमें युवा वर्ग हमेशा ही आगे रहता है। वह सत्ता के एकाधिकार, सामाजिक विषमता और नीतिगत जड़ता के विरुद्ध एक सशक्त प्रतिरोध दर्ज करता है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब समाज में असमानता, अन्याय या दिशाहीनता बढ़ती है, तब-तब युवाओं की ऊर्जा ने नए आंदोलनों की नींव रखी है। युवा आंदोलनों ने समाज को एक नई दिशा देने का काम भी किया है।

 

किसी भी देश की तरुणाई जिस ओर चलती है, जमाना उसी तरफ मुड़ जाता है। इस वर्ग में वह शक्ति होती है कि वह हवा का रूख मोड़ सकता है। ऐसे में इस वर्ग के साथ सतत सकारात्मक संवाद बहुत आवश्यक हो जाता है। युवा वर्ग के सवालों, उनकी समस्याओं और विचारों पर मंथन बहुत आवश्यक है। अगर उसके मन में कोई बात है तो उसे सुनना बहुत जरूरी हो जाता है। कहते भी हैं कि किसी भी समूह के भीतर अगर किसी बात को लेकर कोई सवाल या दबाव है तो उसे तुरंत राहत देना जरूरी है। उसके भीतर के तनाव या दबाव को समाप्त करना जरूरी होता है। व्यवस्था और नेतृत्व उससे संवाद कर उसे सामान्य कर सकते हैं।

 

किसी भी समूह के साथ अगर सकारात्मक संवाद किया जाए तो परिस्थितियों को परिवर्तित किया जा सकता है। दुनियाभर में अलग-अलग ट्रेंडस पर नजर रखने वाली कंपनी स्टैटिस्टा के आंकड़े बताते हैं कि बीते दो बरसों में दुनियाभर के लगभग 10 देशों में युवाओं के प्रदर्शन हुए हैं। कुछ सालों पहले सोशल मीडिया के प्रभाव से ही अरब जगत के कई देशों में अनेकों आंदोलन हुए। वहां तख्तापलट भी हुए। युवाओं के इन आंदोलनों के कारण अलग-अलग जगहों पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, लेकिन उनमें कुछ बातें, कुछ मांगें अपने मूलस्वभाव में लगभग एक जैसी लगती हैं। और वो हैं, रोजगार के अवसर, बेहतर शिक्षा, भ्रष्टाचारमुक्त शासन व्यवस्था। जब उन्हें लगता है कि उनकी आवाज सुनी ही नहीं जा रही है तो वे सड़कों पर आंदोलित होकर उतर रहे हैं।

 

हाल ही में जेनजी प्रोटेस्ट के बाद आरएसएस प्रमुख ने एक संवाद कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कहा कि जेन-जी की जो भी शिकायतें थीं, वो जायज थीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक माध्यम है और संवाद से एक सहमति का निर्माण होता है। सीजेपी के नेतृत्व वाला वह आंदोलन दिल्ली में तो खत्म हो गया। दूसरी ओर, रांची का प्रदर्शन भी सरकार के आश्वासन के बाद फिलहाल समाप्त हो गया। दरअसल, छात्र अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं। 

 

भारत में दुनिया की बहुत बड़ी युवा आबादी है। देश में युवाओं के आंदोलनों का इतिहास भी अत्यंत समृद्ध रहा है। आजादी के आंदोलन के दौरान भी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नायकों ने जनमानस को भी बड़े पैमाने पर आंदोलित किया। उनके विचार युवा चेतना की प्रमुख प्रेरणा बने। आजाद भारत में भी युवाओं ने समाज में अपने आंदोलनो से सुधार की मांगे रखीं। 70 के दशक में गुजरात का नवनिर्माण वाला छात्र आंदोलन हो या फिर 1974 में हुआ जेपी आंदोलन, सभी में नेतृत्व करने वाला आम छात्र अपने आंदोलन से  सत्ता में सुधार, उसमें परिवर्तन और व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग करता दिखता है।

 

पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम ने कहा था कि युवा ही वह शक्ति है जो दुनिया को बदल सकती है। आज युवा दुनियाभर में व्यवस्थाओं को बदलने की बात पर सड़कों पर उतर रहा है। आज के युवाओं की बेहतर बात यह है कि उनके पास ग्लोबल इन्फरमेशन का नेटवर्क है। वे हर क्षण सूचनाओं से अपडेट होते रहते हैं। मौजूदा वक्त सूचना क्रांति का है। आज का युवा हर तरह के स्मार्ट गैजेट्स और डिजिटल प्लेटफामर्स से जुड़ा हुआ है। पल-पल की जानकारी उसे स्क्रीन पर मिलती रहती है। समाज में भी व्यापक स्तर पर इस तकनीक के चलते बदलाव आए हैं।

 

आमजन अपनी राय इन डिजिटल माध्यमों में खुलकर रखते हैं। ऐसे  में युवा भी सत्ता से सवाल हो या उसके किसी काम की तारीफ करनी हो, वे खुलकर डिजिटल प्लेटफार्म पर अपनी अभिव्यक्ति देते हैं। अगर किसी तरह उनकी आवाज को दबाने का प्रयास हो या युवाओं को लगता है कि उनका दमन हो रहा है तो वे डरने के बजाय सोशल मीडिया पर धूम मचा देते हैं। रील्स, मीम्स, व्यंग्य चित्रों और गीतों के माध्यम से वे जनता और सरकार के बीच अपनी बात रखते हैं। डिजिटल सूचना के माध्यम से त्वरित प्रसार बिना किसी औपचारिक केंद्रीय नेता के भी आंदोलन बहुत तेजी से बड़े आकार में सामने आ रहे हैं। शिक्षा, रोजगार या पर्यावरण जैसे स्थानीय मुद्दे तुरंत वैश्विक संवाद का हिस्सा बन रहे हैं। 

 

अब जहां आधुनिक युवा आंदोलन लचीले और तात्कालिक प्रभाव वाले दिख रहे हैं, वहीं उनके सामने कुछ गंभीर चुनौतियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। इस दौर में साफ दिखता है कि कई आंदोलन सोशल मीडिया पर जितनी तेजी से उभार ले रहे हैं,  उतनी ही तेजी से वे बिखर भी जाते हैं। जानकार मानते हैं कि आभासी मीडिया पर विमर्श से उठ खड़े होने वाले आंदोलनों में ठोस नीतिगत बदलाव के लिए जिस तरह की निरंतरता और वैचारिक गहराई की आवश्यक होती है, उसकी अक्सर इनमें कमी पाई जाती है।

यदि युवा आंदोलनों की ऊर्जा को सकारात्मकता के साथ जोड़ा जा सके, उसमें गंभीरता, ठहराव और वैचारिक परिपक्वता, संवैधानिक मूल्यों की समझ के दायरे में रहकर अभिव्यक्ति करने जैसी बातें जुड़ सकें तो युवाओं की आवाज सत्ता को जवाबदेह बना सकती। युवा अपनी सकारात्मकता के साथ राष्ट्र के समावेशी और न्यायपूर्ण भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इसके लिए उनसे सतत प्रभावी संवाद आवश्यक है।