Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर एक साथ बनेंगे 3 शुभ योग, जानें सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे अगर इस एक एकादशी का व्रत कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करते हैं। जैसा कि इस एकादशी का नाम है, यह व्रत निर्जला किया जाता है और इसकी शुरुआत एकादशी तिथि पर सुबह व्रत का संकल्प के साथ होती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत करते हैं, रात्रि जागरण करने के बाद अगले दिन हरि वासर के बाद व्रत का पारण करते हैं और उसके बाद अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब यह व्रत किया जाता है। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून को किया जाएगा। इस दिन गुरुवार है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, साथ ही 3 अन्य शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है।

निर्जला एकादशी व्रत की तारीख

एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 25 जून की रात 8:10 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जून को की जाएगी। संयोग से यह व्रत बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

एकादशी व्रत पारण

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे। पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे ये तीन शुभ योग

रवि योग : 25 जून सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक।

शिव योग : 24 जून सुबह 10:24 से 25 जून सुबह 10:54 बजे तक।

सिद्ध योग : 25 जून सुबह 10:55 से 26 जून सुबह 11:39 बजे तक।

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए।
  • इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
  • इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है।

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TCS Results Update: 9 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी TCS, डिविडेंड देने पर होगा भी विचार

TCS Results Update: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने बताया है कि उसके बोर्ड की बैठक 9 जुलाई 2026 को होगी। इस बैठक में जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनी अंतरिम डिविडेंड पर भी फैसला कर सकती है।

टाटा ग्रुप की इस कंपनी ने कहा है कि बोर्ड 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के ऑडिटेड स्टैंडअलोन वित्तीय नतीजों पर विचार करेगा और उन्हें मंजूरी देगा।

डिविडेंड का भी हो सकता है ऐलान

तिमाही नतीजों के साथ निवेशकों की नजर डिविडेंड पर भी रहेगी। TCS का बोर्ड अंतरिम डिविडेंड पर विचार करेगा। अगर डिविडेंड का ऐलान होता है तो उसका फायदा उन शेयरधारकों को मिलेगा जिनका नाम 15 जुलाई 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होगा। कंपनी ने इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

पिछली तिमाही में कैसा था प्रदर्शन?

मार्च 2026 तिमाही में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर नतीजे दिए थे। कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर कंपनी का रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 1.2% बढ़ा था। खास बात यह रही कि पिछले सात क्वार्टर में यह कंपनी की सबसे तेज ग्रोथ थी।

एनालिस्टों को औसतन 1% ग्रोथ की उम्मीद थी। कुछ ब्रोकरेज हाउस ने 0.6% से 1.4% तक का अनुमान लगाया था, लेकिन कंपनी इन अनुमानों के ऊपरी स्तर के करीब पहुंचने में सफल रही।

29% उछला था TCS का मुनाफा

मार्च तिमाही में TCS का शुद्ध लाभ बढ़कर ₹13,718 करोड़ पहुंच गया था। दिसंबर तिमाही में यह ₹10,657 करोड़ था। यानी कंपनी के मुनाफे में करीब 29% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़कर ₹70,698 करोड़ हो गया, जो पिछली तिमाही में ₹67,087 करोड़ था। यह आंकड़ा भी बाजार के अनुमान से बेहतर रहा।

मार्जिन में सुधार, बड़े ऑर्डर भी मिले

TCS की कमाई की ताकत दिखाने वाला EBIT बढ़कर ₹17,870 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 6% ज्यादा है। वहीं EBIT मार्जिन 25.3% रहा, जो दिसंबर तिमाही के 25.2% से थोड़ा बेहतर है।

मार्च तिमाही में TCS ने 12 अरब डॉलर के नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए थे। यह कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर बुकिंग स्तरों में से एक है। इसमें तीन बड़े मेगा डील भी शामिल थीं।

पहले भी दे चुकी है ₹31 का डिविडेंड

TCS ने हाल ही में अपने शेयरधारकों के लिए ₹31 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड को मंजूरी दी थी। हालांकि उसकी रिकॉर्ड डेट का ऐलान अभी बाकी है।

अब निवेशकों की नजर 9 जुलाई पर रहेगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच TCS की ग्रोथ कितनी मजबूत बनी हुई है और कंपनी डिविडेंड को लेकर क्या फैसला करती है।

TCS का शेयर सोमवार को 0.21% की बढ़त के साथ 2,129.50 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, बीते 6 महीने में शेयर 35% से ज्यादा टूट चुका है।

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Lucknow: कोचिंग सेंटर या मौत का जाल? लखनऊ अग्निकांड का दर्दनाक वीडियो आया सामने…उठे ये सवाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सोमवार को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ है, जिसे पूरे शहर की आंखे नम हो गई हैं। लखनऊ के अलीगंज इलाके में मौजूद एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 14 छात्रों की मौत हो गई।  मृतकों की उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर कोचिंग और शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है और लोगों में गहरा दुख और नाराजगी है।

पल भर में पूरी इमारत में फैली आग

जानकारी के अनुसार, सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक व्यावसायिक भवन में आग लग गई। इस इमारत में छात्रों के लिए प्रशिक्षण और कोचिंग केंद्र संचालित किया जा रहा था। आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्र अंदर ही फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में कुछ ही देर में घना धुआं भर गया, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया। बाहर निकलने के रास्ते भी बाधित हो गए थे। जान बचाने के लिए कई छात्रों को खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े, जबकि कुछ छात्रों ने पहली मंजिल से छलांग लगाकर बाहर निकलने की कोशिश की।

सामने आए हादसे के दर्दनाक वीडियो

घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें हादसे की भयावह तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। एक वीडियो में एक व्यक्ति टूटे हुए शीशे के पास बने छज्जे से लटका हुआ दिखाई देता है। कुछ देर तक वह खुद को संभालने की कोशिश करता है, लेकिन पकड़ छूटने के बाद नीचे गिर जाता है। हादसे के बाद राहत और बचाव दल, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का पालन कितना प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।

पिछले हादसों से कोई सबक नहीं

लखनऊ में हुआ यह दर्दनाक हादसा कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देश के कई शहरों में आग और अन्य सुरक्षा संबंधी हादसे सामने आए हैं, जिनमें कई लोगों की जान गई है। दिल्ली, मुखर्जी नगर और सूरत जैसे शहरों में भी शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। हर बड़े हादसे के बाद लोगों में दुख और गुस्सा देखने को मिलता है। इस बार भी जैसे ही लखनऊ की घटना की खबर सोशल मीडिया पर फैली, लोगों ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी और व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई लोगों का कहना है कि ऐसे हादसे अक्सर लापरवाही और सुरक्षा मानकों का ठीक से पालन न होने की वजह से होते हैं।

सोशल मीडिया पर लोग जता रहे हैं नाराजगी

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता की कमी दिखाई देती है। एक वायरल टिप्पणी में एक व्यक्ति ने आम नागरिकों की परेशानियों और बेबसी का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार ऐसा महसूस होता है कि आम लोगों की जान और सुरक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। इस हादसे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक इमारतों, कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल आग लगने की असली वजह का पता नहीं चल पाया है। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार आग पर काबू पाने में दमकल विभाग को एक घंटे से अधिक समय लगा। इस दौरान आग लगातार फैलती रही और इमारत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों का कहना है कि कई व्यावसायिक इमारतों और कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है।

उठ रहे हैं ये सवाल

वहीं सोशल मीडिया यूज़र्स ने इमारतों के बाहरी हिस्सों में इस्तेमाल होने वाली कुछ निर्माण सामग्री पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कुछ प्रकार के प्लास्टिक आधारित पैनल और सजावटी सामग्री आग लगने पर बहुत तेजी से जलती हैं, जिससे आग तेजी से फैल सकती है। लोगों ने मांग की है कि ऐसी सामग्री के इस्तेमाल की समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उन पर सख्त नियम लागू किए जाएं। लोगों का यह भी कहना है कि देश के कई बड़े व्यावसायिक क्षेत्रों में एक जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई इमारतों में संकरी सीढ़ियां, उलझी हुई बिजली की तारें, अव्यवस्थित निर्माण और सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसी खामियां मौजूद हैं। ऐसे हालात किसी भी हादसे को और गंभीर बना सकते हैं।

Shubman Gill: टी20 टीम में हो सकती है शुभमन गिल की वापसी! रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

भारतीय टीम अपने टी20 इंटरनेशनल अभियान की शुरुआत 26 जून से आयरलैंड के खिलाफ होने वाली 2 मैचों की सीरीज से करेगी। इस सीरीज के साथ टीम एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। टी20 टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है, इससे पहले टी20 की कमान सूर्यकुमार यादव के हाथों में थी। कप्तानी में बदलाव के बाद सभी की नजरें अय्यर के प्रदर्शन और नेतृत्व पर रहेंगी। वहीं टीम में शामिल 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी चर्चा में बने हुए हैं।

भारतीय टी20 टीम में ओपनिंग स्थान के लिए मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी दावेदारों में शामिल हैं। ऐसे में आने वाले मैचों में टीम का बल्लेबाजी कॉबिनेशन चर्चा का विषय रहेगा। इसी बीच खबर है कि शुभमन गिल की टी20 टीमें वापसी हो सकती है।

टी20 में हो सकती है वापसी

RevSportz की एक रिपोर्ट के अनुसार, “टी20 विश्व कप के बाद चयनकर्ताओं ने शुभमन गिल को दोबारा भारतीय टी20 टीम की योजनाओं में शामिल करने पर विचार किया था। रिपोर्ट में दावा किया कि, कप्तानी को लेकर भी गिल का नाम चर्चा में था, खासकर उस समय जब टीम नए नेतृत्व की तलाश कर रही थी। लेकिन अंत में कप्तानी की दौड़ मुख्य रूप से 2 खिलाड़ियों श्रेयस अय्यर और शुभमन गिल के बीच सिमट गई थी। वहीं टीम प्रबंधन का मानना था कि संजू सैमसन में भी कप्तानी संभालने की क्षमता और लीडरशीप के गुण मौजूद हैं।” सेलेक्टर्स ने श्रेयस अय्यर पर भरोसा जताया और उन्हें भारतीय टी20 टीम की कप्तानी सौंपने का फैसला किया।

ओलंपिक-टी20 विश्व कप है लक्ष्य

इससे पहले चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने टीम चयन के दौरान बताया था कि आईपीएल में श्रेयस का कप्तानी रिकॉर्ड और उनकी नेतृत्व क्षमता इस फैसले की बड़ी वजह रही। चयन समिति का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों में टीम को आगे ले जाने के लिए श्रेयस एक मजबूत विकल्प साबित हो सकते हैं। भारतीय टी20 टीम के सामने आने वाले वर्षों में कई बड़े लक्ष्य हैं। भारतीय टीम का नया टी20 सफर 2028 ओलंपिक और अगले टी20 विश्व कप को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। इसी वजह से टीम प्रबंधन अभी से युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और मजबूत टीम बनाने पर फोकस कर रहा है।

चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर पर भरोसा जताया और उन्हें कम से कम सितंबर-अक्टूबर में होने वाले एशियन गेम्स तक भारतीय टी20 टीम की कप्तानी सौंपने का फैसला किया।

ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड परिस्थितियों में मिलेगी मदद

RevSportz की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी परिस्थितियों में जहां तेज गेंदबाजों को अधिक मदद मिलती है। ऐसी पिच पर भारतीय टीम को एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत पड़ सकती है जो पारी को संभालकर आगे बढ़ा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, शुभमन गिल इस भूमिका के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं। फिलहाल टीम का पूरा फोकस नए कप्तान श्रेयस अय्यर पर है, जबकि सेलेक्टर्स को भविष्य के लिए मजबूत नेतृत्व योजना भी तैयार करनी होगी।

जुकरबर्क की Meta का CRED में ₹8550 करोड़ निवेश, फाउंडर कुणाल शाह को बनाएगी WhatsApp का नया ग्लोबल CEO

Meta Investment In CRED: फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने भारतीय फिनटेक स्टार्टअप CRED में करीब 90 करोड़ डॉलर (लगभग ₹8,550 करोड़) निवेश करने का ऐलान किया है। दोनों कंपनियों ने 22 जून को इस डील की घोषणा की। इससे पहले Moneycontrol ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि Meta, CRED में 4 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर निवेश को लेकर बातचीत कर रही है।

WhatsApp की कमान संभालेंगे कुणाल शाह

इस निवेश के साथ CRED के फाउंडर कुणाल शाह Meta में शामिल होंगे और वह WhatsApp के नए ग्लोबल CEO बनेंगे। कुणाल मौजूदा विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने सात साल तक WhatsApp को लीड करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।

Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कुणाल शाह ने CRED को भारत की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियों में से एक बनाया है। उनके पास बिजनेस बनाने का अनुभव और वैश्विक नजरिया है। यह दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

जुकरबर्ग ने विल कैथकार्ट की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कैथकार्ट के नेतृत्व में WhatsApp 3 अरब से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचा और उन्होंने यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता दी। अब वह Meta में नई भूमिका संभालेंगे और नए प्रोडक्ट्स पर काम करेंगे।

CRED की कमान किसके हाथ में होगी?

कुणाल शाह के Meta में जाने के बाद CRED के ऑपरेशनल कामकाज की जिम्मेदारी मितेन संपत संभालेंगे। वह फिलहाल कंपनी में दूसरे सबसे सीनियर एग्जीक्यूटिव हैं।

मितेन संपत ने कहा कि 1.7 करोड़ से ज्यादा भरोसेमंद भारतीय CRED का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक कंपनी के पास मजबूत टीम, स्पष्ट विजन और लंबी अवधि की रणनीति है। उन्होंने कहा कि CRED के अगले चरण का लक्ष्य कंपनी को पब्लिक मार्केट तक ले जाना है।

कुणाल शाह ने क्या कहा?

कुणाल शाह ने कहा कि उन्होंने 2018 में CRED की शुरुआत इस भरोसे के साथ की थी कि अच्छी क्रेडिट स्कोर को सम्मान मिलना चाहिए। आठ साल से भी कम समय में कंपनी लाखों सदस्यों, लगभग ₹3,200 करोड़ रेवेन्यू, मुनाफे में कारोबार, कई लाइसेंस और मजबूत ब्रांड के साथ एक नई कैटेगरी बनाने में सफल रही है।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पूंजी और प्रतिभाशाली टीम के साथ CRED आने वाले दशकों तक एक मजबूत संस्था बन सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि टीम भविष्य में भी नए मानक स्थापित करेगी।

भारतीय स्टार्टअप जगत का बड़ा नाम हैं कुणाल शाह

यह दूसरा स्टार्टअप है जिससे कुणाल शाह बाहर निकल रहे हैं। इससे पहले उन्होंने डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म Freecharge की स्थापना की थी, जिसे बाद में बेच दिया गया था।

वर्षों के दौरान वह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हो गए। CRED बनाने के अलावा उन्होंने सैकड़ों शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश किया है और देश के सबसे सक्रिय एंजेल इनवेस्टर्स में उनकी गिनती होती है।

1 अरब डॉलर जुटा चुकी है CRED

2018 में शुरू हुई CRED अब तक करीब 1 अरब डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी में Tiger Global, Ribbit Capital, Peak XV Partners, Greenoaks Capital और DST Global जैसे बड़े निवेशकों ने निवेश किया है।

Peak XV Partners के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि CRED का सफर काफी शानदार रहा है। उनके मुताबिक कंपनी ने एक नई कैटेगरी बनाई, लाखों सक्रिय यूजर्स जोड़े और मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में CRED और मजबूत होकर उभरेगी।

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Monsoon Rain crisis: 18 जून तक इस इलाके में हुई सिर्फ 2% बुवाई, बारिश का ये आंकड़ा तो डरा रहा है!

Monsoon Rain Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्ती और बारिश में हो रही देरी ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। पानी की कमी और रूठे मानसून की वजह से इस क्षेत्र के आठ जिलों में खरीफ की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक मराठवाड़ा में बुवाई का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले महज 2 प्रतिशत रह गया है। सूखे की मार झेलने वाले इस इलाके के किसानों और प्रशासन के लिए बारिश और बुवाई का यह आंकड़ा बेहद डराने वाला है।

बुवाई के आंकड़े: 10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर

मराठवाड़ा मध्य महाराष्ट्र का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है। यहां की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पीटीआई ने एक रिपोर्ट को कोट करते हुए बताया है कि यहां बारिश में देरी से बुवाई के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट आई है। इस साल 18 जून तक पूरे क्षेत्र में अब तक केवल 1.07 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर ही बुवाई हो पाई है। पिछले साल इसी दिन तक यह आंकड़ा 10.77 लाख हेक्टेयर था। पिछले पांच वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में औसतन लगभग 49.72 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलें बोई जाती रही हैं। आंकड़ों से साफ है कि पिछले साल 18 जून तक जितनी बुवाई हुई थी, उसकी तुलना में इस साल अब तक केवल 2 प्रतिशत ही बुवाई हो सकी है।

जिलावार बुवाई का हाल (बीड सबसे आगे, लातूर सबसे पीछे)

मराठवाड़ा के कुल आठ जिले (छत्रपति संभाजीनगर, जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, परभणी, हिंगोली और नांदेड़) बारिश की इस देरी का सीधा खामियाजा भुगत रहे हैं। इन 1.07 लाख हेक्टेयर में से आधी से ज्यादा बुवाई (68,572 हेक्टेयर) अकेले बीड जिले में हुई है। दूसरे जिले अपने ऐतिहासिक स्तर से मीलों पीछे हैं। उदाहरण के तौर पर छत्रपति संभाजीनगर में पिछले साल इसी अवधि में 1.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी जबकि इस साल यहां सिर्फ 3072 हेक्टेयर में ही फसल बोई जा सकी है।

बारिश और जलाशयों का गहराता संकट

बुवाई में इस भयंकर गिरावट का सीधा कारण बारिश का न होना और जलाशयों में पानी की कमी है। एक अधिकारी के मुताबिक, जून महीने में मराठवाड़ा में औसतन 98.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन 18 जून तक इस क्षेत्र में अपने सामान्य कोटे की मात्र 42.7% बारिश (यानी सिर्फ 42.7 मिमी) ही दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में मौजूद 11 प्रमुख मेगा प्रोजेक्ट्स (बांधों) में जल स्तर लगातार गिर रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 18 जून तक इन बांधों में सिर्फ 60.84 टीएमसी (Thousand Million Cubic Feet – tmc) पानी बचा था, जबकि पिछले साल इसी दिन यह 67.35 टीएमसी था।

Railway Stocks: बंगाल में ₹1 लाख करोड़ से बनेगा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, इन 4 स्टॉक्स पर रखें नजर

Railway Stocks: पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप देने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी योजना सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि अगले 4-5 साल में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की ट्रेनें लाई जाएंगी। इसके साथ ही दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। इन घोषणाओं के बाद रेलवे सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं।

Titagarh Rail

अगर कोलकाता मेट्रो के विस्तार की बात करें तो टीटागढ़ रेल का नाम सबसे आगे नजर आता है। कंपनी मेट्रो कोच और रेलवे रोलिंग स्टॉक बनाने में माहिर है। इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी पश्चिम बंगाल में हैं। अभी तक नए ऑर्डर का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन मेट्रो के लिए बड़ी संख्या में नई ट्रेनें खरीदी जानी हैं। इसलिए टीटागढ़ को मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

कंपनी पहले अहमदाबाद मेट्रो के लिए स्टेनलेस स्टील मेट्रो कोच बना चुकी है। इस प्रोजेक्ट की वैल्यू करीब 350 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा पुणे मेट्रो के लिए 34 ट्रेनसेट की डिलीवरी पूरी करने के बाद उसे 12 और एल्युमीनियम ट्रेनसेट का 430 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी मिला था। FY26 में कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 27,540 करोड़ रुपये रही, जिसमें 10,600 करोड़ रुपये का हिस्सा पैसेंजर रेल बिजनेस से जुड़ा है।

RVNL

रेलवे की बड़ी-बड़ी घोषणाएं तभी हकीकत बनती हैं जब जमीन पर काम शुरू होता है। यही काम सरकारी रेल कंपनी RVNL करती है। कंपनी ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग, स्टेशन री-डेवलपमेंट और दूसरी रेलवे परियोजनाओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है।

पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, RVNL को नए काम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। कंपनी की ऑर्डर बुक फिलहाल करीब 1 लाख करोड़ रुपये की है। FY26 में उसका रेवेन्यू 20,412 करोड़ रुपये रहा। हालांकि बढ़ती लागत की वजह से मुनाफा 32.6% घटकर 871 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कंपनी ने FY27 में 15-20% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया है और हाल में कई नए कॉन्ट्रैक्ट भी हासिल किए हैं।

IRFC

सरकारी कंपनी IRFC रेलवे सेक्टर की फाइनेंसिंग करने वाली सबसे अहम सरकारी कंपनी है। रेलवे जितना ज्यादा खर्च करेगा, उतनी ही ज्यादा फंडिंग की जरूरत होगी और इसका फायदा IRFC को मिल सकता है।

FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 7.8% बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कंपनी ने 35,000 करोड़ रुपये के लोन वितरित किए, जो उसके लक्ष्य से ज्यादा थे। इसका AUM बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। फरवरी 2026 में सरकार ने OFS के जरिए अपनी 1.7% हिस्सेदारी बेची थी। वहीं कंपनी के बोर्ड ने FY27 में 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी भी दी है, जिससे रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंडिंग जारी रखी जा सके।

IRCON

दिल्ली-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा के बाद IRCON भी चर्चा में है। कंपनी रेलवे, हाईवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण का लंबा अनुभव रखती है। अगर यह हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है तो बड़े पैमाने पर पुल, वायाडक्ट और स्टेशन बनाने का काम होगा। इसमें IRCON जैसी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं।

कंपनी की ऑर्डर बुक 24,984 करोड़ रुपये की है, जिसमें रेलवे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा सबसे बड़ा है। FY26 में उसका रेवेन्यू 9,071 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध लाभ 592 करोड़ रुपये था। खास बात यह है कि कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त है। इससे उसे भविष्य की बड़ी परियोजनाओं में भाग लेने की वित्तीय ताकत मिलती है।

आपको इन शेयरों पर क्यों रखनी चाहिए नजर

अगर आप रेलवे सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो इन शेयरों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। पश्चिम बंगाल में मेट्रो विस्तार, स्टेशन पुनर्विकास और हाई-स्पीड रेल जैसे बड़े प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं से रेलवे वैल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि अभी ज्यादातर परियोजनाएं शुरुआती चरण में हैं। इसलिए ऑर्डर और कमाई पर असर दिखने में समय लग सकता है। ऐसे में Titagarh Rail, RVNL, IRFC और IRCON जैसे शेयरों पर आगे होने वाले घटनाक्रमों के साथ नजर रखना बेहतर हो सकता है।

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EPFO: लगातार 10 साल तक सर्विस की है तो आपको मिलेंगी पेंशन, ऐसे कर सकते हैं मंथली पेंशन का कैलकुलेशन

ईपीएफओ अपने सब्सक्राइबर्स के लिए ईपीएफ के साथ ही एक रेगुलर पेंशन स्कीम भी चलाता है। इसका नाम एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। इस स्कीम के तहत सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। इसकी शुरुआत 16 नवंबर, 1995 को हुई थी। इस स्कीम ने फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 की जगह ली थी। इसका मकसद सब्सक्राइबर्स को सोशल सिक्योरिटी देना है।

हर महीने ईपीएस में भी होता है कंट्रिब्यूशन

ईपीएफ के सब्सक्राइबर्स अपनी बेसिक मंथली सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करते हैं। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करता है। लेकिन उसका कंट्रिब्यूशन दो हिस्सों में बंटा होता है। 8.33 फीसदी कंट्रिब्यूशन ईपीएफ में जाता है और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएस अकाउंट में जाता है।

ईपीएस में हर महीने पेशन का प्रावधान

फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 के तहत सब्सक्राइबर की मौत के बाद परिवार को बेनेफिट्स मिलते थे। लेकिन, ईपीएस में सब्सक्राइबर्स को पेंशन की सुविधा भी देने की शुरुआत हुई। इतना ही नहीं, सब्सक्राइबर के परिवार को भी पेंशन का प्रावधान इस स्कीम में है। इससे रिटायरमेंट के बाद सब्सक्राइबर और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा हासिल होती है।

ईपीएस के बेनेफिट्स के लिए ये हैं शर्तें

ईपीएस का हिस्सा बनने के लिए सब्सक्राइबर्स के लिए कुछ शर्तें तय हैं। पहला, सब्सक्राइबर की नौकरी कम से कम 10 साल पूरी होनी चाहिए। इस दौरान पेंशन स्कीम में उसकी तरफ से रेगुलर कंट्रिब्यूशन किया गया होना चाहिए। सब्सक्राइबर 58 साल की उम्र में रिटायर करने के बाद ईपीएफए की तरफ से मंथली पेंशन का हकदार होगा।

न्यूनतम पेंशन हर महीने 1000 रुपये

केंद्र सरकार के 2014 के नियम के मुताबिक, ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये है। हालांकि, इसे बढ़ाकर हर महीने 7,500 रुपये करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। किसी सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट पर हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी, इसका कैलकुलेशन उसकी पेंशनएबल सर्विस और रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों की एवरेज सैलरी के आधार पर होता है।

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ऐसे कर सकते हैं पेंशन का कैलकुलेशन 

इसके लिए पहले से एक फॉर्मूला है। इसमें पेंशनएबल सैलरी को पेंशनएबल सर्विस से गुणा किया जाता है। फिर जो संख्या आती है, उसमें 70 से भाग दिया जाता है। पेंशनएबल सैलरी का मतलब अंतिम 60 महीनों की एवरेज सैलरी से है। अगर किसी एंप्लॉयी की पेंशनएबल सैलरी 15,000 रुपये है और उसने 10 साल की सर्विस पूरी की है तो उसकी हर महीने की पेंशन करीब 2,143 रुपये बनेगी।

Viral Post: 35 KM के लिए मांगे 3000 रुपए…बेंगलुरु में 2 युवकों से ऑटो चालक ने की बदसलूकी! वायरल हुआ पोस्ट

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बेंगलुरु शहर की एक कहानी तेजी से वायरल हो रही है। बेंगलुरु में एक ऑटो चालक पर 2 युवकों के साथ मारपीट करने और उनसे जबरन पैसे लेने के आरोप लगे हैं। इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि दोनों युवक हाल ही में शहर आए थे और इसी दौरान उनके साथ ये घटना हुई। मामला सामने आने के बाद बेंगलुरु में नए आने वाले लोगों की सेफ्टी को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

ये मामला तब चर्चा में आया जब सानू नाम के एक इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट शेयर किया। उन्होंने दावा किया कि “बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT) रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के कुछ ही समय बाद गांव से आए 2 युवा लड़कों को निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में दावा किया गया कि गांव से आए 2 युवा रोजगार की तलाश में शहर पहुंचे थे। वे SMVT रेलवे स्टेशन से होसुर जाने के लिए अट्टीबेले तक ऑटो में बैठे थे। करीब 35 किलोमीटर की यात्रा के बाद ऑटो चालक ने उनसे 3,000 रुपये की मांग की।”

 

पोस्ट के अनुसार, “युवक घबराकर मदद के लिए फोन करने लगे, लेकिन चालक ने कथित तौर पर उनका मोबाइल फोन छीन लिया। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस और शहर पुलिस से मदद की अपील भी की गई।

पहली बार आए थे बेंगलुरु

सानू द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, “2 युवा पहली बार बेंगलुरु पहुंचे थे और उन्हें होसुर जाने के लिए सही रास्ते की जानकारी नहीं थी। इसी दौरान रेलवे स्टेशन के बाहर एक ऑटो चालक ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वह उन्हें बस स्टैंड तक पहुंचा देगा। आरोप है कि ऑटो चालक ने दोनों युवकों को बताया कि इस सफर के लिए 50 रुपये प्रति व्यक्ति किराया देना होगा, जिसके बाद वे उसके साथ चले गए।” पोस्ट में आगे कहा गया कि, जब ऑटो चालक को पता चला कि दोनों युवक शहर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं, तो उसने रास्ते में एक अन्य व्यक्ति को भी अपने साथ शामिल कर लिया।

छिन लिए युवक के फोन

इसके बाद 2 युवकों को लेकर ऑटो शहर से बाहर अट्टीबेले की दिशा में बढ़ा। कुछ समय बाद ऑटो एक सुनसान इलाके में जाकर रुका, जिससे दोनों युवक घबरा गए। आरोपों के अनुसार, ऑटो चालक और उसके साथी ने दोनों किशोरों से सफर के बदले 3,000 रुपये की मांग की। जब युवकों ने बताया कि उनके पास इतनी रकम नहीं है, तो दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर उनके मोबाइल फोन छीन लिए। इतना ही नहीं, आरोप है कि उन्होंने दोनों युवकों के साथ मारपीट भी की और उन पर पैसे देने का दबाव बनाया। घटना के दौरान 2 पीड़ित किशोर किसी तरह उनसे संपर्क करने में सफल हो गए थे।

उनके अनुसार, बातचीत के दौरान फोन पर घबराहट और शोर-शराबे की आवाजें सुनाई दे रही थीं। हालांकि कुछ ही देर बाद कॉल अचानक कट गई। इसके बाद जब उन्होंने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो कोई जवाब नहीं मिला। आरोप है कि उस समय तक दोनों युवकों के मोबाइल फोन उनसे छीन लिए गए थे, जिससे उनसे संपर्क पूरी तरह टूट गया।

शेयर किया स्क्रीनशॉट

सानू ने बाद में सोशल मीडिया पर एक नई जानकारी साझा करते हुए बताया कि 2 किशोरों को उनके मोबाइल फोन वापस मिल गए, लेकिन इसके लिए उन्हें पैसे देने पड़े। उनके अनुसार, पहले 2,000 रुपये देने की बात सामने आई थी, जबकि बाद में उन्होंने दावा किया कि कुल 2,400 रुपये का भुगतान किया गया था। आरोप है कि युवकों के पास पर्याप्त नकदी नहीं थी, इसलिए यह रकम UPI के जरिए भेजी गई। सानू ने कथित लेनदेन का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया और बेंगलुरु पुलिस को टैग करते हुए मामले की जांच की मांग की। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड से आरोपियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

X पर साझा की गई ये पोस्ट कुछ ही समय में तेजी से वायरल हो गईं। इस कथित घटना को लेकर कई यूजर्स ने हैरानी जताई और नाराजगी व्यक्त की। बड़ी संख्या में लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

‘तीन संजय की ताकत और ऑपरेशन टाइगर…’, 4 साल में दूसरी बार टूटी शिवसेना UBT, अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल देखने को मिली है। सोमवार 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। एकनाथ शिंदे ने इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि करते हुए इसे वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक बदलाव का दूसरा चरण बताया। शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर शामिल हैं। इन सांसदों के जाने से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका माना जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के कुल नौ सांसद थे, जिनमें से अब छह सांसद शिंदे गुट के साथ चले गए हैं।

अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के लिए पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी था। 17 जून को दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय दल की बैठक हुई थी, लेकिन इसमें ये छह सांसद शामिल नहीं हुए थे। तभी से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उस बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे। रविवार को नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर ने भी सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने जा रहे हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने इन छह सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी और उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया था।

‘यही असली शिवसेना…’

अपने साथ आए छह सांसदों के साथ एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज उनके साथ छह मजबूत नेता खड़े हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इन छह सांसदों में से तीन का नाम संजय है, इसलिए इसे “तीन संजय की ताकत” कहा जा सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा और कहा कि जब उनके साथ इतने संजय मौजूद हैं, तो किसी दूसरे संजय की चर्चा करने की जरूरत नहीं है। शिंदे ने इस राजनीतिक घटनाक्रम की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि उनकी टीम ने अब “छक्का” लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उद्धव ठाकरे गुट से अलग होने का फैसला बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा, “जहां शिवसेना की मूल विचारधारा है, वहीं असली शिवसेना है।”

चला ऑपरेशन टाइगर

शिंदे गुट ने छह सांसदों को अपने साथ जोड़ने के अभियान को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया था। यह नाम शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पार्टी के पुराने चुनाव चिह्न ‘बाघ’ से प्रेरित था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अभियान की सफलता पर कहा कि इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर नेताओं का बढ़ता विश्वास दिखाई देता है। उन्होंने इस राजनीतिक स्थिति के लिए उद्धव ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, रविवार को भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उन्होंने भरोसा जताया कि वह आगे भी अपनी पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे। ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी ही असली शिवसेना है और वह उसे मजबूत बनाने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।

साल 2022 में हुई शिवसेना की टूट का बचाव करते हुए शिंदे ने कहा कि उस समय कई लोगों ने दावा किया था कि उनके साथ आने वाले 40 विधायक दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने बताया कि तब उन्होंने कहा था कि अगर ये विधायक चुनाव नहीं जीतते हैं, तो वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर अपने गांव लौट जाएंगे और खेती करेंगे। शिंदे ने कहा कि बाद में हुए चुनाव में उनके साथ जुड़े 60 नेता दोबारा जीतकर आए, जिससे यह साबित हुआ कि जनता ने उनके फैसले और नेतृत्व पर भरोसा जताया।