‘तीन संजय की ताकत और ऑपरेशन टाइगर…’, 4 साल में दूसरी बार टूटी शिवसेना UBT, अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल देखने को मिली है। सोमवार 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। एकनाथ शिंदे ने इन नेताओं के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि करते हुए इसे वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक बदलाव का दूसरा चरण बताया। शिंदे की शिवसेना में शामिल होने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय पाटिल, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर शामिल हैं। इन सांसदों के जाने से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका माना जा रहा है। लोकसभा में पार्टी के कुल नौ सांसद थे, जिनमें से अब छह सांसद शिंदे गुट के साथ चले गए हैं।

अब 6 सांसदों ने छोड़ा साथ

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के लिए पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी था। 17 जून को दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय दल की बैठक हुई थी, लेकिन इसमें ये छह सांसद शामिल नहीं हुए थे। तभी से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उस बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे के साथ राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद थे। रविवार को नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश निंबालकर ने भी सार्वजनिक रूप से यह साफ कर दिया था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने जा रहे हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने इन छह सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी और उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया था।

‘यही असली शिवसेना…’

अपने साथ आए छह सांसदों के साथ एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज उनके साथ छह मजबूत नेता खड़े हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इन छह सांसदों में से तीन का नाम संजय है, इसलिए इसे “तीन संजय की ताकत” कहा जा सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा और कहा कि जब उनके साथ इतने संजय मौजूद हैं, तो किसी दूसरे संजय की चर्चा करने की जरूरत नहीं है। शिंदे ने इस राजनीतिक घटनाक्रम की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि उनकी टीम ने अब “छक्का” लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उद्धव ठाकरे गुट से अलग होने का फैसला बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा, “जहां शिवसेना की मूल विचारधारा है, वहीं असली शिवसेना है।”

चला ऑपरेशन टाइगर

शिंदे गुट ने छह सांसदों को अपने साथ जोड़ने के अभियान को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया था। यह नाम शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पार्टी के पुराने चुनाव चिह्न ‘बाघ’ से प्रेरित था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अभियान की सफलता पर कहा कि इससे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर नेताओं का बढ़ता विश्वास दिखाई देता है। उन्होंने इस राजनीतिक स्थिति के लिए उद्धव ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, रविवार को भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उन्होंने भरोसा जताया कि वह आगे भी अपनी पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे। ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी ही असली शिवसेना है और वह उसे मजबूत बनाने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।

साल 2022 में हुई शिवसेना की टूट का बचाव करते हुए शिंदे ने कहा कि उस समय कई लोगों ने दावा किया था कि उनके साथ आने वाले 40 विधायक दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने बताया कि तब उन्होंने कहा था कि अगर ये विधायक चुनाव नहीं जीतते हैं, तो वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर अपने गांव लौट जाएंगे और खेती करेंगे। शिंदे ने कहा कि बाद में हुए चुनाव में उनके साथ जुड़े 60 नेता दोबारा जीतकर आए, जिससे यह साबित हुआ कि जनता ने उनके फैसले और नेतृत्व पर भरोसा जताया।

‘अब सिर्फ एक ही शिवसेना है’, महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच अमित शाह का बड़ा बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि अब महाराष्ट्र में सिर्फ एक ही शिवसेना है, कोई दूसरा गुट नहीं है। उनका यह बयान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

“पहले गुट कहा जाता था, अब सिर्फ शिवसेना है”

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “पहले एकनाथ शिंदे को गुट कहा जाता था, लेकिन अब सिर्फ एक ही शिवसेना है। कोई दूसरा गुट नहीं है।”

शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र की राजनीति में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?

हाल के दिनों में शिवसेना नेताओं की ओर से “ऑपरेशन टाइगर” का जिक्र किया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के संभावित पाला बदलने और NDA में शामिल होने की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

चर्चा है कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद सत्तारूढ़ गठबंधन के संपर्क में हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शिंदे गुट के लिए बड़ा संदेश

अमित शाह का बयान शिंदे गुट के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। चुनाव आयोग पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले दल को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता दे चुका है।

शिंदे गुट लगातार दावा करता रहा है कि वही शिवसेना संस्थापक Bal Thackeray की असली विचारधारा और विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

“ये तो सिर्फ ट्रेलर है…”

हाल ही में एकनाथ शिंदे ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था, “ये तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।”

उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों और दल-बदल की अटकलें और तेज हो गई थीं।

शिंदे ने अपने सांसदों और विधायकों को पार्टी की “अनमोल पूंजी” बताते हुए कहा था कि शिवसेना मराठी अस्मिता के मुद्दे पर मजबूती से खड़ी है।

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

फिलहाल महाराष्ट्र में भाजपा, शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट की महायुति सरकार सत्ता में है।

ऐसे में अमित शाह के बयान को केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती सियासी तस्वीर और विपक्ष के भविष्य को लेकर बड़ा संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट और अन्य विपक्षी दलों की ओर से अमित शाह के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Sanjay Raut: ‘कुछ लोग कुत्ते होते हैं, लेकिन वफादार नहीं’… ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के बीच संजय राउत ने शेयर किया पोस्ट

 

Sanjay Raut: ‘कुछ लोग कुत्ते होते हैं, लेकिन वफादार नहीं’… ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा के बीच संजय राउत ने शेयर किया पोस्ट

Sanjay Raut: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने शनिवार को पार्टी में चल रही सियासी हलचल के बीच सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर किया है। यह पोस्ट पार्टी के भीतर बढ़ते उस उथल-पुथल के बीच आई है, जब चर्चा है कि पार्टी के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।

संजय राउत ने एक तस्वीर साझा की, जिस पर लिखा था, “कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं, लेकिन वफादार नहीं होते।” इसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, “जय महाराष्ट्र!”

यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब उद्धव बालासाहेब ठाकरे के गुट को पार्टी में दूसरी बड़ी फूट का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले 2022 में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी।

गुरुवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसद नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही पहुंचे।

गैर-मौजूद सांसदों में नागेश आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल थे।

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने सांसदों पर पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जो लोग खुद को शिवसैनिक मानते थे, वे डरपोक हैं। शिवसैनिक इतने डरपोक नहीं होते। ये लोग खुद को शिवसैनिक कहते हैं, लेकिन छिपने के लिए कहां गए हैं? जयपुर में।”

उन्होंने आगे कहा कि इन सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और पार्टी उनकी सदस्यता रद्द कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

राउत ने कहा, “कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम उन्हें अयोग्य घोषित कराने की पूरी कोशिश करेंगे। अगर लोकसभा अध्यक्ष नियमों, कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक काम करते हैं, तो इन लोगों की सदस्यता रद्द हो जाएगी।”

‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा

शिवसेना (यूबीटी) में बड़े पैमाने पर टूट की अटकलें, जिसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया जा रहा है, उस समय और तेज हो गईं जब शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जता चुके हैं और वे उनके गुट के साथ जा चुके हैं।

इस झटके के बावजूद, राउत ने जोर देकर कहा कि पार्टी बालासाहेब ठाकरे की विरासत के प्रति प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “शिवसेना के 60 साल पूरे हो गए हैं और बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी मनाई जा रही है। हमें हमेशा बालासाहेब ठाकरे से प्रेरणा मिलती है। हम बुराई के खत्म होने तक लड़ते रहेंगे।”

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