Personal Loan: अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए कैसे चुनें सही पर्सनल लोन? ये 5 फैक्टर करेंगे आपकी मदद

Personal Loan: -पर्सनल लोन जरूरत के समय बड़ी राहत दे सकता है। मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह, घर की मरम्मत या पुराने कर्जों को चुकाने जैसे कई कामों के लिए लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, बिना योजना के लिया गया लोन बाद में आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी जरूरत, चुकाने की क्षमता और लोन की शर्तों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

1. सबसे पहले तय करें कितनी रकम चाहिए

लोन के लिए आवेदन करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आपको कितनी रकम की जरूरत है और उसका इस्तेमाल किस काम के लिए होना है। कई बार लोग जरूरत से ज्यादा लोन ले लेते हैं, जिससे EMI और ब्याज दोनों का बोझ बढ़ जाता है।

जरूरत के हिसाब से लोन लेने का फायदा यह है कि कुल ब्याज कम चुकाना पड़ता है और लोन चुकाना भी आसान रहता है। इससे आपकी वित्तीय स्थिति पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।

2. ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी

पर्सनल लोन चुनते समय सबसे अहम ब्याज दर है। अलग-अलग बैंक अलग-अलग दरों पर लोन देते हैं। जून 2026 में Axis Bank 8.95% सालाना की शुरुआती ब्याज दर पर पर्सनल लोन ऑफर कर रहा है। वहीं HDFC Bank और कई अन्य बैंक 9.99% से शुरू होने वाली दरों पर लोन दे रहे हैं।

ब्याज दर में छोटा-सा अंतर भी लंबे समय में बड़ी रकम का फर्क पैदा कर सकता है। इसलिए किसी एक बैंक के ऑफर को देखकर फैसला करने की बजाय कई बैंकों की दरों की तुलना करना बेहतर रहता है।

3. छिपे हुए शुल्कों को नजरअंदाज न करें

सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेना सही फैसला नहीं होता। कई बार प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज, पार्ट-पेमेंट फीस, लेट पेमेंट पेनाल्टी और दूसरे शुल्क लोन की कुल लागत को काफी बढ़ा देते हैं।

यही वजह है कि आवेदन करने से पहले सभी नियम और शुल्कों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। इससे बाद में किसी तरह की परेशानी या अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है।

4. सही टेन्योर चुनना भी उतना ही अहम

लोन का टेन्योर आपकी EMI और कुल ब्याज लागत दोनों को प्रभावित करता है। कम अवधि वाला लोन चुनने पर EMI ज्यादा आती है, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ता है। वहीं लंबी अवधि चुनने पर EMI कम हो जाती है, लेकिन ब्याज का कुल बोझ बढ़ जाता है।

इसलिए ऐसा टेन्योर चुनना चाहिए, जो आपकी आय और मासिक बजट के हिसाब से संतुलित हो। EMI इतनी होनी चाहिए कि बाकी जरूरी खर्चों पर असर न पड़े।

5. बैंक की साख और सेवा भी देखें

लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि बैंक या वित्तीय संस्था की साख भी देखनी चाहिए। ग्राहक सेवा, शिकायत निपटान व्यवस्था, लोन प्रोसेसिंग की पारदर्शिता और रकम मिलने में लगने वाला समय जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। एक अच्छी संस्था से लिया गया लोन पूरी प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बना सकता है।

सोच-समझकर लें पर्सनल लोन का फैसला

पर्सनल लोन एक वित्तीय जिम्मेदारी है। बैंक आपको तय शर्तों पर रकम देता है और बदले में आपको हर महीने EMI चुकानी होती है। इसलिए लोन लेने से पहले अपनी आय, खर्च, मौजूदा कर्ज और भविष्य की जरूरतों का आकलन जरूर करें।

ब्याज दर, टेन्योर, अतिरिक्त शुल्क और चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला आपको आर्थिक दबाव से बचा सकता है। जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की राय लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। कोई भी वित्तीय फैसला लेने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gayatri Jayanti 2026 Date: 3 शुभ योग और भद्रा के साये में मनाई जाएगी गायत्री जयंती, जानें गायत्री जयंति की तारीख और पूजा का मुहूर्त

Gayatri Jayanti 2026 Date: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गायत्री माता की उत्पत्ति ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को हुई थी। इसलिए गायत्री जयंती का पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन निर्जला एकादशी का भी व्रत किया जाता है। गायत्री माता से ही 4 वेदों की उत्पत्ति हुई है। यही वजह है कि इन्हें वेदों की माता कहा जाता है। इनके शक्तिशाली मंत्र में चारों वेदों का सार है। माना जाता है कि गायत्री माता की पूजा स्वयं त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल गायत्री जयंती का पर्व 25 जून 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं, लेकिन भद्र का भी प्रभाव रहेगा।

गायत्री जयंती 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, 24 जून बुधवार को शाम 6:12 बजे से ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है। यह तिथि 25 जूर गुरुवार को रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, गायत्री जयंती 25 जून गुरुवार को है।

3 शुभ योग में गायत्री जयंती 2026

इस साल की गायत्री जयंती पर रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग बनेंगे। उस दिन स्वाति नक्षत्र है। गायत्री जयंती पर शिव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10 बजकर 54 मिनट तक है, उसके बाद से सिद्ध योग है। ये दोनों ही योग जप, तप, साधना के लिए श्रेष्ठ हैं। गायत्री जयंती पर रवि योग सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर बनेगा और इसका समापन शाम को 04 बजकर 29 मिनट पर होगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, इससे इस योग में सभी दोष मिट जाते हैं। गायत्री जयंती पर गुरुवार का दिन और एकादशी तिथि भगवान विष्णु से संबंधित हैं, हरि कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गायत्री जयंती 2026 मुहूर्त

गायत्री जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से लेकर 04:45 ए एम तक है. इस समय में स्नान करें। फिर सूर्योदय 05:25 ए एम पर सूर्य देव को अर्घ्य दें। शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से लेकर सुबह 07:10 ए एम तक है। इस मुहूर्त में गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री जयंती पर अभिजीत मुहूर्त 11:56 ए एम से दोपहर 12:52 पी एम तक है।

गायत्री जयंती पर भद्रा काल

गायत्री जयंती के दिन भद्रा सुबह 07:08 ए एम से लगेगी और इसका समापन रात में 08:09 पी एम पर होगा। इस भद्रा का वास पाताल लोक में होगा। इससे धरती पर पूजा, जप-तप पर कोई असर नहीं होगा।

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

Nirjala Ekadashi 2026: इस दिन किया जाएगा निर्जला एकाशी का व्रत, अभी नोट करें पूजा के लिए ये जरूरी व्रत सामग्री

एक्सीडेंट नहीं थी केतन अग्रवाल की मौत…प्रेमी के लिए मंगेतर ने दिया गहरी खाई में धक्का, पुणे हत्याकांड में बड़ा खुलासा

पुणे के युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, केतन की मंगेतर सिया गोयल पर अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। शुरुआत में ये घटना एक एक्सीडेंट माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने इसे हत्या का मामला बताया है। शादी से पहले हुई इस घटना ने दोनों परिवारों की खुशियों को गहरे सदमे में बदल दिया है। लोनावाला रूरल पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल और सिया गोयल की फरवरी में सगाई हुई थी और दोनों इसी साल नवंबर में शादी करने वाले थे। 18 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग करने गए थे।

सिया ने पुलिस को बताया था कि, सुबह करीब 10:30 बजे फोटो खिंचवाने के दौरान केतन का पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं, मामले की गहराई से जांच करने के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि ये कोई हादसा नहीं था, बल्कि पहले से बनाई गई योजना के तहत की गई हत्या थी।

पुलिस जांच में सामने आया ये सच

पुलिस जांच में सामने आया कि, सिया गोयल कथित तौर पर केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी। अधिकारियों का दावा है कि इसी वजह से उसने चेतन चौधरी के साथ मिलकर एक योजना बनाई। पुणे रूरल के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने कहा, “18 जून 2026 को सिया गोयल और केतन अग्रवाल, जिनकी फरवरी में सगाई हुई थी, ट्रेकिंग के लिए लोहागढ़ किले गए थे। सुबह करीब 10:30 से 10:45 बजे के बीच सिया गोयल ने फोन कर जानकारी दी कि केतन अग्रवाल किले से फिसलकर नीचे गिर गए हैं, जिससे उनकी मौत हो गई।”

उन्होंने आगे कहा, “गोपनीय सूचनाओं, गवाहों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच में पता चला कि सिया गोयल और उसके दोस्त चेतन चौधरी, जो करीब एक साल से एक-दूसरे को जानते थे ने कथित तौर पर इस घटना की योजना बनाई थी। पुलिस का मानना है कि दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले से धक्का दिया, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।”

पांच दिन पहले रची थी हत्या की साजिश

पुणे रूरल पुलिस सूत्रों के अनुसार, “केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश पांच दिन पहले भी रची गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। सिया गोयल और चेतन चौधरी पहले भी केतन की मौत को हादसे का रूप देने की कोशिश कर चुके थे। 31 मई को जब सिया और केतन पहली बार लोहागढ़ किले गए थे, तभी कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई थी। इसके बाद 14 जून को सिया और उसके सहयोगी केतन को फिर लोहागढ़ ले गए और सांप के हमले का डर दिखाकर उसे घाटी में धक्का देने की कोशिश की, लेकिन ये प्रयास भी नाकाम रहा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद दोनों ने 19 जून के लिए एक नई योजना तैयार की थी।

सिया के जन्मदिन को खास बनाना चाहते थे केतन

परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि, शादी से पहले केतन अग्रवाल और सिया गोयल बाली घूमने जाने वाले थे, लेकिन सिया ने कथित तौर पर ये कहकर ट्रिप कैंसिल कर दी कि उसका पासपोर्ट खो गया है। पुलिस जांच में ये भी सामने आया कि केतन ने सिया के जन्मदिन को खास बनाने के लिए महाबलेश्वर के एक लग्जरी रिजॉर्ट में कार्यक्रम की योजना बनाई थी और इसके लिए करीब 40 कमरे बुक किए थे। वहीं, सिया ने लोहागढ़ किले में प्री-वेडिंग फोटोशूट कराने की योजना बनाई थी। पुलिस को ये भी संदेह है कि सिया ने नाश्ते के लिए एक होटल में रुकने के दौरान वहां के वॉशरूम में अपना पासपोर्ट फाड़कर फेंक दिया था।

नंवबर में होने वाली थी शादी

केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में धूमधाम से होने वाली थी। दोनों परिवार इस आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए थे और इसे बेहद भव्य बनाने की योजना बनाई गई थी। जानकारी के अनुसार, शादी के लिए जयपुर में करीब 17 करोड़ रुपये की लागत वाला एक आलीशान पैलेस बुक किया गया था। इसके अलावा मेहमानों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए 2 निजी विमानों की भी व्यवस्था की गई थी।

Nirjala Ekadashi 2026: इस दिन किया जाएगा निर्जला एकाशी का व्रत, अभी नोट करें पूजा के लिए ये जरूरी व्रत सामग्री

Nirjala Ekadashi 2026: पूरे साल में हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत किया जाता है। इस तरह साल में 24 एकादशी व्रत होते हैं। इन सभी में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को सबसे अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एक व्रत को करने से पूरे साल की सभी एकादशी तिथियों का फल मिल जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। एकादशी के दिन श्रद्धा भाव से और विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फल की प्रप्ति होती है। श्री हरि की कृपा से सभी परेशानियां दूर होती हैं और जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास का दुर्लभ संयोग बना था, जिसका समापन 15 जून 2026 को हुआ है। इसके बाद से शुद्ध ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ। अब ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि भीम से भी इस एकादशी का व्रत किया था। जैसा कि नाम से ज्ञात होता है कि इस व्रत में भक्त अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। इसलिए इसे साल की सबसे कठिन एकादशी व्रत माना जाता है। इस व्रत में पूजा के लिए कुछ जरूरी सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसके बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए जानें निर्जला एकादशी व्रत की तारीख और पूजा सामग्री की लिस्ट।

निर्जला एकादशी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि का समय इस प्रकार है—

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जून 2026, शाम 06:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जून 2026, रात 08:09 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत : 25 जून 2026 (गुरुवार)

व्रत पारण का समय : 26 जून 2026, सुबह 05:25 बजे से 08:13 बजे के बीच

पूजा सामग्री

मुख्य आवश्यक सामग्री

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर
  • चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा
  • लकड़ी की चौकी
  • अभिषेक और तिलक के लिए
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • पंचामृत
  • रोली
  • गोपी चंदन या पीला चंदन

अर्पण हेतु सामग्री

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • फूलों की माला
  • मौली
  • धूप-दीप के लिए
  • शुद्ध घी
  • मिट्टी या पीतल का दीपक
  • रुई की बत्ती
  • धूपबत्ती
  • माचिस
  • प्रसाद और भोग
  • मौसमी फल
  • मिठाई
  • घर का बना हुआ हलवा

निर्जला एकादशी 2026 पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उसे फूलों से सजाएं। भगवान विष्णु की मूर्ति का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक करें तथा उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं, चंदन का तिलक लगाएं और भगवान विष्णु को पीले फूल तथा तुलसी दल अर्पित करें। तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में भगवान की आरती करें और जाने-अनजाने में हुई सभी भूलों के लिए क्षमा याचना करें।

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Samsung Galaxy Z Fold 8 और Z Flip 8 होंगे पहले से ज्यादा महंगे! डिटेल्स हुई लीक

Samsung का अगला Galaxy Unpacked इवेंट इस साल के सबसे चर्चित स्मार्टफोन लॉन्च इवेंट्स में से एक माना जा रहा है। इस इवेंट में कंपनी अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करेगी। अगर सामने आई लीक्स सही साबित होती हैं, तो इस बार ग्राहकों को इन नए फोल्डेबल फोन्स के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung इस इवेंट में सिर्फ Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Flip 8 ही नहीं, बल्कि Galaxy Z Fold 8 Ultra या Tri Fold वेरिएंट भी पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी यह डिवाइस Apple के आने वाले iPhone Fold को टक्कर देने के लिए लॉन्च करेगी।

आइए जानते हैं Samsung के इन नए फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की संभावित लॉन्च डेट, कीमत, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स के बारे में।

Samsung Galaxy Z Fold 8, Z Flip 8 के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

लीक हुई जानकारी के अनुसार, Galaxy Z Fold 8 में 8-इंच का फोल्डेबल AMOLED डिस्प्ले हो सकता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 2,600 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिलेगी। डिवाइस के अंदर, कोरियाई टेक कंपनी Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दे सकती है, साथ ही इसमें 16GB तक RAM और 1TB तक की इंटरनल स्टोरेज भी मिल सकती है।

फोटोग्राफी के लिए, इस फोल्डेबल फोन में 200MP का प्राइमरी कैमरा, 50MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर और 3x ऑप्टिकल जूम वाला 10MP का टेलीफोटो लेंस होने की चर्चा है। साथ ही, इसमें 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5000mAh की बैटरी होने की भी उम्मीद है।

वहीं, Galaxy Z Flip 8 में 6.9-इंच का फोल्डेबल डिस्प्ले और साथ ही 4.1-इंच की बड़ी कवर स्क्रीन हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung इस क्लैमशेल फोल्डेबल फोन के लिए अपने आने वाले Exynos 2600 प्रोसेसर का इस्तेमाल कर सकता है। इसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 12MP का अल्ट्रा-वाइड लेंस हो सकता है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 10MP का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। साथ ही, ऐसी भी चर्चा है कि Galaxy Z Flip 8 में 25W चार्जिंग सपोर्ट के साथ 4300 mAh की बैटरी मिल सकती है।

Samsung Galaxy Z Fold 8, Z Flip 8 की लॉन्च डेट और कीमत में बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung अपना अगला Galaxy Unpacked इवेंट 22 जुलाई को लंदन में आयोजित कर सकता है। हालांकि, इस बार सबसे ज्यादा चर्चा इन फोन्स की बढ़ी हुई कीमत को लेकर हो रही है। कई रिपोर्ट्स का दावा है कि 2026 में Samsung अपने फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ा सकता है।

अनुमानित कीमत की बात करें तो Galaxy Z Fold 8 की शुरुआती कीमत भारत में करीब 1,89,999 रुपये हो सकती है। वहीं, इसके हाई-स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 2,20,000 रुपये से ज्यादा जा सकती है।

दूसरी ओर, Galaxy Z Flip 8 की शुरुआती कीमत करीब 1,24,999 रुपये रहने की उम्मीद है। बता दें कि इसके पिछले मॉडल Galaxy Z Flip 7 को 1,09,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था।

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बागी गुट ने TMC चेयरपर्सन पद से हटाया पर उससे पहले ही ममता बनर्जी चल चुकी थीं अपनी चाल! इनसाइड स्टोरी अब सामने आई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अब ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गंवाने के खतरे से जूझ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी फाउंडर ममता बनर्जी के लिए स्थितियां और विकट तब हो गईं जब पार्टी के बागी खेमे ने उन्हें चेयरपर्सन के पद से ही हटा दिया। एक बारगी ऐसा लगा कि क्या अब टीएमसी ममता बनर्जी के हाथों से पूरी तरह फिसल गई। पर अब एक नई जानकारी सामने आ रही है।

ममता बनर्जी के खेमे ने एक बड़ा खुलासा किया है। कोलकाता में बागी गुट द्वारा एक बैठक में पार्टी संस्थापक और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद ममता बनर्जी की ओर से एक बड़ा जवाबी दांव चला गया है।

सामने आई इनसाइड स्टोरी के मुताबिक बागी गुट द्वारा उन्हें पद से हटाए जाने से पहले ही ममता बनर्जी अपनी चाल चल चुकी थीं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की एक नई पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची तैयार कर भारतीय चुनाव आयोग को सौंप दी थी। इसमें खुद ममता बनर्जी को ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन बताया गया है।

बागी गुट के कदम से पहले ही ममता ने सुरक्षित किया दावा

न्यूज एजेंसी पीटीआई और दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक जब बागी नेता पार्टी के भीतर संगठनात्मक तख्तापलट की तैयारी कर रहे थे ठीक उसी समय ममता बनर्जी ने 1998 में अपने द्वारा स्थापित की गई पार्टी के तंत्र पर अपना नियंत्रण सुरक्षित करने के लिए कदम उठा दिया था। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने बताया कि शनिवार को ही पार्टी के नए नेतृत्व ढांचे और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को अंतिम रूप दे दिया गया था।

सोमवार दोपहर को ही इस सूची को चुनाव आयोग के पास जमा कर दिया गया था। यह सब तब हुआ जब कोलकाता में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे ने अपना विशेष सत्र भी आयोजित नहीं किया था।

ममता खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि जब बागी खेमा अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने की तैयारियां कर रहा था, तब ममता बनर्जी ने पहले ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दे दिया था और टीएमसी की चेयरपर्सन के रूप में यह सूची चुनाव आयोग को भेज दी थी।

ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग भेजी गई लिस्ट में कौन-कौन?

चुनाव आयोग को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेज पर खुद ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं। इस नई सूची में निम्नलिखित नेताओं को प्रमुख पदाधिकारी बनाया गया है-

चेयरपर्सन: ममता बनर्जी

उपाध्यक्ष: सुब्रत बख्शी

राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता: अभिषेक बनर्जी

संयुक्त सचिव और राज्यसभा नेता: डेरेक ओ’ब्रायन

संयुक्त सचिव: डोला सेन

कोषाध्यक्ष: सुभाशीष चक्रवर्ती

ममता के करीबी नेताओं ने बताया कि चुनाव आयोग को भेजी गई इस नई कमेटी का ढांचा पुराने संगठनात्मक प्रबंधों से बिल्कुल अलग है। इस लिस्ट से असंतुष्ट और बागी खेमे से जुड़े कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। यहां तक कि इस महीने की शुरुआत में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा रहे अरूप बिस्वास को भी इस संशोधित सूची से बाहर कर दिया गया है।

दूसरी तरफ बागी गुट ने अरूप रॉय को चुना नया चेयरपर्सन

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में हुए विशेष सत्र के बाद पार्टी में संगठनात्मक विभाजन को और गहरा कर दिया। बागी खेमे ने घोषणा की कि उन्होंने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया है और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की। बागी खेमे का दावा है कि यह विशेष सत्र तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुसार ही बुलाया गया था और इस सत्र में लिए गए सभी फैसलों की जानकारी औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को दी जाएगी।

ममता खेमे का पलटवार- यह सिर्फ एक कॉमेडी शो और सर्कस है

ममता बनर्जी खेमे ने बागियों के इस पूरे सत्र और अभ्यास को पूरी तरह से अमान्य और खारिज कर दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि असंतुष्ट नेताओं के पास न तो ऐसा सत्र बुलाने का कोई अधिकार था और न ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई जनादेश था।

कुणाल घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि, ‘यह एक कॉमेडी शो है। एक व्यक्ति जिसे टीएमसी से निष्कासित किया जा चुका है, वह विशेष सत्र आयोजित कर रहा है। यह मामला कोर्ट में है और हमें विश्वास है कि न्याय होगा। हम इस तरह के हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते हैं। टीएमसी का मतलब ही ममता बनर्जी है, बाकी सब एक सर्कस है।’

कई बड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी

पार्टी के भीतर बगावत पर कड़ा रुख अपनाते हुए ममता बनर्जी खेमे की अनुशासन समिति ने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लव मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मिन के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

ममता बनर्जी के लिए आगे क्या? लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के आसार

कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग किस संगठनात्मक ढांचे को वैध और असली टीएमसी के रूप में मान्यता देगा। दोनों गुटों द्वारा किए जा रहे परस्पर विरोधी दावों ने टीएमसी के भीतर संकट को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां दोनों धड़े अब पार्टी की विधायी और संगठनात्मक दोनों शाखाओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

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ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि यह विवाद चुनाव आयोग के सामने लड़ा जाएगा और अंततः अदालतों तक भी पहुंच सकता है। इससे एक बात तो साफ है कि ममता बनर्जी द्वारा 1998 में स्थापित की गई इस पार्टी पर नियंत्रण के लिए एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का मंच तैयार हो गया है।

CSM Technologies IPO: 24 जून को खुल रहा सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ, क्या निवेश करना चाहिए?

CSM Technologies IPO: सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 24 जून यानी बुधवार को खुल रहा है। कंपनी इस इश्यू के तहत 146 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। वह करीब 1.29 करोड़ शेयर जारी करेगी। आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कारोबार के विस्तार और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी।

ई-गवर्नेंस, सिस्टम इंटिग्रेशन में विशेषज्ञता

CSM Technologies एक प्रमुख GovTech और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी है। इसे सरकार के डिपार्टमेंट्स, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स और एंटरप्राइजेज को टेक्नोलॉजी एनेबल्ड सॉल्यूशंस ऑफर करने का 27 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसे ई-गवर्नेंस, सिस्टम इंटिग्रेशन, अप्लिकेशन डेवलपमेंट, क्लाउड सॉल्यूशंस, एनालिटिक्स और एआई में विशेषज्ञता हासिल है।

आईपीओ में 29 जून तक लगाई जा सकती है बोली

कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 107-113 रुपये तय किया है। इस आईपीओ में 29 जून तक निवेश किया जा सकता है। इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। इसका मतलब है कि कंपनी इश्यू में सिर्फ नए शेयर इनवेस्टर्स को इश्यू करेगी।

1998 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

सीएसएम टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसका मुख्यालय भुवनेश्वर है। बीते सालों में खुद को सॉफ्टवेयर सर्विसेज प्रोवाइडर से एंड-टू-एंड टेक्नोलॉलीज सॉल्यूशंस पार्टनर के रूप में बदला है। आईपीओ में शेयर के अपर प्राइस बैंड पर FY25 के अर्निंग्स के मुकाबले कीमत 41.6 गुनी है। यह ज्यादा नहीं है, क्योंकि कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड और फाइनेंशियल मीट्रिक्स बेहतर रहे हैं।

आनंदराठी ने दी बोली लगाने की सलाह

ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने इस आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है। कंपनी ने इश्यू में 50 फीसदी शेयर क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रखा है। 15 फीसदी शेयर नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व होंगे। बाकी 35 फीसदी शेयर रिटेल इनवेस्टर्स के लिए होंगे।

कम से कम 14,916 रुपये से अप्लाई करना होगा

इनवेस्टर्स को इश्यू में कम से कम शेयरों के एक लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 132 शेयरों का है। इसका मतलब है कि शेयर के अपर प्राइस बैंड पर अप्लाई करने के लिए रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम 14,916 रुपये की बोली लगानी होगी।

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आईटी कंपनियों को लेकर मार्केट सेंटिमेंट कमजोर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब आईटी शेयरों पर बिकवाली का दबाव है। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल का असर पड़ा है। 23 जून को भी शेयर बाजार में गिरावट में आईटी कंपनियों में बिकवाली का बड़ा हाथ रहा। करीब सभी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा।

Lucknow fire update: हाथ से उतर गई चमड़ी… लखनऊ में आग लगी तो दूसरी मंजिल से कूदने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को किया बयान

Lucknow fire tragedy update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार 22 जून को एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 लोगों की जान ही नहीं ली। बल्कि उनके साथ जुड़े अनगिनत सपनों, उम्मीदों को भी हमेशा के लिए राख कर दिया। कोई अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, तो कोई बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देख रहा था। कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था, तो कोई छुट्टियां बिताने की तैयारी में जुटा था। लेकिन इस भीषण अग्निकांड ने उनके जीवन के साथ-साथ उनके सपनों को भी निगल लिया।

लखनऊ के आशियाना निवासी 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ उस भयावह अग्निकांड के चश्मदीद और पीड़ित हैं, जो अलीगंज स्थित बिल्डिंग में हुआ। आसिफ दूसरी मंजिल पर मौजूद गेमिंग स्टूडियो में काम करते थे। उन्होंने News18 को बताया बताया कि हादसे के वक्त सब कुछ सामान्य था। लेकिन कुछ ही पलों में माहौल मौत के मंजर में बदल गया। आसिफ के बताया, “हम लोग बैठे हुए थे और मस्ती कर रहे थे। अचानक सब कुछ एक दर्दनाक हादसे में बदल गया। धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।”

उन्होंने आशंका जताई कि बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में मौजूद पेट स्टोर में बड़ी मात्रा में रखा सामान आग को तेजी से फैलाने का कारण बना। जान बचाने के लिए आसिफ को दूसरी मंजिल से छलांग लगानी पड़ी। उन्होंने बताया, “मैं हाईटेंशन वायर के सहारे नीचे कूदा। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि तार भी पिघल चुका था। उसे पकड़ने के दौरान मेरे हाथों की चमड़ी तक उधड़ गई। अगर मैं 10-15 सेकंड और देर करता तो शायद मेरी भी मौत हो जाती।”

आसिफ ने राहत और उचित इलाज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी काफी देर तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त ने भी जान बचाने के लिए छलांग लगाई थी। लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। आसिफ ने कहा, “वह काफी देर तक सड़क पर ही पड़ा रहा, मदद समय पर नहीं पहुंची।”

आसिफ के अनुसार हादसे के दौरान इमारत में सुरक्षा व्यवस्थाएं भी नाकाम साबित हुईं। उन्होंने आगे कहा, “टेरेस का दरवाजा बंद था, वाटर स्प्रिंकलर काम नहीं कर रहे थे और बायोमेट्रिक दरवाजे लॉक थे। इसी वजह से कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया।” इस हादसे ने इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 लोगों की गई जान

अलीगंज स्थित तीन मंजिला बिल्डिंग में सोमवार दोपहर लगी आग में 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है और पीछे छूट गए हैं बूढ़े माता-पिता, भाई-बहन और वे अधूरे सपने, जो अब कभी पूरे नहीं हो सकेंगे।

मृतकों में 22 वर्षीय आईटी तकनीशियन अब्दुल रहमान भी शामिल हैं। वह पिछले एक वर्ष से ‘एरिया स्टूडियो’ में कार्यरत थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता अफजल कई वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। रहमान की मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

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इस भीषण अग्निकांड में मोहम्मद इमरान के इकलौते बेटे शाहजान (18) की भी मौत हो गई। जानकीपुरम निवासी शाहजान एक छोटे कारोबारी परिवार से थे। पिछले कुछ समय से कंप्यूटर की ट्रेनिंग ले रहे थे। परिजनों के अनुसार, वह बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाने की योजना बना रहे थे। सुखमनी सिंह (22) भी इस हादसे का शिकार हो गईं। उनके परिवार में पिता प्रभजोत सिंह, मां और एक छोटा भाई हैं। प्रभजोत सिंह सिविल डिफेंस में कार्यरत हैं।

दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच हुई ट्रेड, ऋषभ पंत को हुआ करोड़ों का नुकसान

आईपीएल की दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जाएंटस के बीच सबसे बड़ा ट्रेड हो चुका है। इस ट्रेड के साथ ऋषभ पंत और कुलदीप यादव की टीमें अब बदल चुकी है। आईपीएल ने एक पोस्ट में बताया, लखनऊ सुपर जायंट्स ने ऋषभ पंत को दिल्ली कैपिटल्स को ट्रांसफर कर दिया है, वहीं उनके बदले में दिल्ली ने स्टार स्पिनर कुलदीप यादव को लखनऊ सुपर जायंट्स में भेज दिया है। पंत ने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत दिल्ली फ्रेंचाइजी से की थी और अब वह दोबारा अपनी पुरानी टीम में लौट आए हैं। कुछ दिनों पहले ऋषभ पंत ने लखनऊ की कप्तानी छोड़ी थी।

लखनऊ-दिल्ली के बीच हुआ ट्रेड

आईपीएल 2025 के ऑक्शन में ऋषभ पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर अपनी टीम में शामिल किया था। ये आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी बोली मानी गई थी। अब दिल्ली ने पंत को 15 करोड़ की कीमत पर साइन किया है। वहीं लखनऊ ने कुलदीप यादव एलएसजी ने 13.5 करोड़ की कीमत पर साइन किया है। आईपीएल के इतिहास के सबसे मंहगे खिलाड़ी ऋषभ पंत को आईपीएल 2027 से पहले बड़ा नुकसान हुआ है। इस डील से पंत को 12 करोड़ का नुकसान हुआ है।

दिल्ली के लिए 43 मैचों में की कप्तानी

ऋषभ पंत की दिल्ली कैपिटल्स में वापसी उनके आईपीएल सफर को एक बार फिर पुराने पड़ाव पर ले आई है। पंत ने 2016 से 2024 तक दिल्ली की टीम के लिए लगातार 9 सीजन खेले और इस दौरान 111 मैचों में हिस्सा लिया, जो फ्रेंचाइजी के लिए किसी भी खिलाड़ी द्वारा खेले गए सबसे ज्यादा मुकाबले हैं। वह लंबे समय तक टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे और 2021 से 2024 के बीच 4 सीजन में 43 मैचों में कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली। अब हालिया ट्रेड के बाद पंत एक बार फिर दिल्ली कैपिटल्स में लौट आए हैं। इस बार उनका अनुबंध 15 करोड़ रुपये का होगा। यानी रिकॉर्ड कीमत पर खरीदे जाने के बाद अब वह बदले हुए कॉन्ट्रैक्ट के साथ अपनी पुरानी फ्रेंचाइजी के लिए खेलते नजर आएंगे।

लखनऊ में शामिल हुए कुलदीप

कुलदीप यादव ने दिल्ली कैपिटल्स के साथ शानदार प्रदर्शन करने के बाद अब लखनऊ सुपर जायंट्स में शामिल हुए है। साल 2022 में दिल्ली से जुड़ने के बाद उन्होंने टीम के लिए लगातार बेहतरीन गेंदबाजी की और 65 मैचों में 72 विकेट अपने नाम किए। इसी प्रदर्शन की बदौलत वह आईपीएल के सबसे प्रभावी स्पिन गेंदबाजों में गिने जाने लगे। भारतीय सीमित ओवर टीम के प्रमुख गेंदबाजों में शामिल कुलदीप अब 13.5 करोड़ रुपये की मौजूदा सैलरी के साथ लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा बनेंगे। उनकी एंट्री से लखनऊ की गेंदबाजी और मजबूत होने की उम्मीद है।

पिछले कुछ वर्षो में लखनऊ का प्रदर्शन

ऋषभ पंत की कप्तानी में लखनऊ सुपर जायंट्स का प्रदर्शन पिछले दो सीजन में उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। आईपीएल 2025 में टीम ने 14 मैचों में सिर्फ 6 जीत दर्ज की और 8 मुकाबले गंवाकर अंक तालिका में 7वें स्थान पर रही। इसके बाद आईपीएल 2026 में टीम का प्रदर्शन और खराब हो गया, जहां लखनऊ ने 14 में से केवल 4 मैच जीते और 10 हार के साथ 8 अंक हासिल कर तालिका में सबसे निचले पायदान पर रही। बल्लेबाजी में भी पंत का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। उन्होंने 2025 सीजन में 14 मैचों में 269 रन बनाए, जबकि 2026 में उनके बल्ले से 312 रन निकले, जिसमें सिर्फ 1 अर्धशतक शामिल था। यही वजह रही कि टीम और खिलाड़ी दोनों के लिए यह दौर निराशाजनक माना गया।

Railway Stocks: रेलवे का ₹50000 करोड़ का कवच प्रोजेक्ट, इन 3 कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

Railway Stocks: भारतीय रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कवच (Kavach) सिस्टम को तेजी से लागू कर रहा है। यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो सिग्नल तोड़ने या तय रफ्तार से ज्यादा गति होने पर ट्रेन को खुद रोक सकता है। मार्च 2026 तक यह 3,103 रूट किलोमीटर पर शुरू हो चुका है। 24,427 रूट किलोमीटर पर काम जारी है। सरकार अगले दो वर्षों में 9,000 रूट किलोमीटर और जोड़ने की तैयारी में है।

Concord Control Systems के मुताबिक, कवच से जुड़ा कुल बाजार अवसर करीब ₹50,000 करोड़ का हो सकता है। यही वजह है कि रेलवे सेक्टर की कई कंपनियां इस अवसर का फायदा उठाने की दौड़ में हैं।

Kernex Microsystems

Kernex रेलवे सुरक्षा और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कवच 4.0 इसका प्रमुख प्रोडक्ट है। कंपनी हर महीने 450 कवच यूनिट बनाने की क्षमता रखती है और मार्च 2026 में BHEL के साथ एक जॉइंट वेंचर भी बना चुकी है।

29 मई 2026 तक कंपनी के पास ₹4,150 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जो FY26 के रेवेन्यू के आधार पर करीब 10 साल की कमाई का नजरिया देता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 127% बढ़कर ₹430 करोड़ पहुंच गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹149 करोड़ रहा। हालांकि, तेजी से बढ़ते ऑर्डर के साथ वर्किंग कैपिटल पर दबाव भी बढ़ा है।

Concord Control Systems

Concord Control Systems कवच 4.0 के लिए जरूरी तकनीक और कई अहम कंपोनेंट बनाती है। कंपनी को RDSO की प्रोटोटाइप मंजूरी मिल चुकी है और फील्ड ट्रायल शुरू हो चुके हैं।

31 मार्च 2026 तक कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹697 करोड़ था। इसके बाद मई 2026 में उसे ₹279.9 करोड़ का नया कवच ऑर्डर मिला। कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स के साथ 15 साल तक मेंटेनेंस से भी कमाई होगी। इससे लंबी अवधि की कमाई का रास्ता बनता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 69% बढ़कर ₹210.5 करोड़ और नेट प्रॉफिट 88% बढ़कर ₹42.7 करोड़ रहा।

HBL Engineering

HBL Engineering को कवच का शुरुआती खिलाड़ी माना जाता है। कंपनी 2005 से इस तकनीक पर काम कर रही है। यह Kavach 4.0 का सर्टिफिकेशन हासिल करने वाली पहली कंपनी रही है।

22 जून 2026 तक HBL का ऑर्डर बुक ₹5,748 करोड़ था। कंपनी का अनुमान है कि FY26 से FY28 तक कवच से हर साल ₹1,300-1,500 करोड़ की बिक्री हो सकती है। साथ ही कंपनी ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य रेल सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ा रही है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

कवच भारत के रेलवे सेक्टर में लंबे समय तक चलने वाली बड़ी थीम बन चुका है। इन तीनों कंपनियों ने इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई है। लेकिन सिर्फ बड़े ऑर्डर मिलना ही काफी नहीं होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां समय पर प्रोजेक्ट पूरे कर पाती हैं या नहीं, वर्किंग कैपिटल को कैसे संभालती हैं और कवच के अलावा नए रेलवे सॉल्यूशंस में कितनी तेजी से विस्तार करती हैं।

फिलहाल, रेलवे सुरक्षा सेक्टर में दिलचस्पी रखने वाले निवेशको इन तीनों कंपनियों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। इससे सही समय पर एंट्री लेने में मदद मिल सकती है।

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