Lucknow fire update: हाथ से उतर गई चमड़ी… लखनऊ में आग लगी तो दूसरी मंजिल से कूदने वाले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर को किया बयान

Lucknow fire tragedy update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार 22 जून को एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 लोगों की जान ही नहीं ली। बल्कि उनके साथ जुड़े अनगिनत सपनों, उम्मीदों को भी हमेशा के लिए राख कर दिया। कोई अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, तो कोई बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देख रहा था। कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था, तो कोई छुट्टियां बिताने की तैयारी में जुटा था। लेकिन इस भीषण अग्निकांड ने उनके जीवन के साथ-साथ उनके सपनों को भी निगल लिया।

लखनऊ के आशियाना निवासी 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ उस भयावह अग्निकांड के चश्मदीद और पीड़ित हैं, जो अलीगंज स्थित बिल्डिंग में हुआ। आसिफ दूसरी मंजिल पर मौजूद गेमिंग स्टूडियो में काम करते थे। उन्होंने News18 को बताया बताया कि हादसे के वक्त सब कुछ सामान्य था। लेकिन कुछ ही पलों में माहौल मौत के मंजर में बदल गया। आसिफ के बताया, “हम लोग बैठे हुए थे और मस्ती कर रहे थे। अचानक सब कुछ एक दर्दनाक हादसे में बदल गया। धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।”

उन्होंने आशंका जताई कि बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में मौजूद पेट स्टोर में बड़ी मात्रा में रखा सामान आग को तेजी से फैलाने का कारण बना। जान बचाने के लिए आसिफ को दूसरी मंजिल से छलांग लगानी पड़ी। उन्होंने बताया, “मैं हाईटेंशन वायर के सहारे नीचे कूदा। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि तार भी पिघल चुका था। उसे पकड़ने के दौरान मेरे हाथों की चमड़ी तक उधड़ गई। अगर मैं 10-15 सेकंड और देर करता तो शायद मेरी भी मौत हो जाती।”

आसिफ ने राहत और उचित इलाज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी काफी देर तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने बताया कि उनके एक दोस्त ने भी जान बचाने के लिए छलांग लगाई थी। लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। आसिफ ने कहा, “वह काफी देर तक सड़क पर ही पड़ा रहा, मदद समय पर नहीं पहुंची।”

आसिफ के अनुसार हादसे के दौरान इमारत में सुरक्षा व्यवस्थाएं भी नाकाम साबित हुईं। उन्होंने आगे कहा, “टेरेस का दरवाजा बंद था, वाटर स्प्रिंकलर काम नहीं कर रहे थे और बायोमेट्रिक दरवाजे लॉक थे। इसी वजह से कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया।” इस हादसे ने इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 लोगों की गई जान

अलीगंज स्थित तीन मंजिला बिल्डिंग में सोमवार दोपहर लगी आग में 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है और पीछे छूट गए हैं बूढ़े माता-पिता, भाई-बहन और वे अधूरे सपने, जो अब कभी पूरे नहीं हो सकेंगे।

मृतकों में 22 वर्षीय आईटी तकनीशियन अब्दुल रहमान भी शामिल हैं। वह पिछले एक वर्ष से ‘एरिया स्टूडियो’ में कार्यरत थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता अफजल कई वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। रहमान की मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

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इस भीषण अग्निकांड में मोहम्मद इमरान के इकलौते बेटे शाहजान (18) की भी मौत हो गई। जानकीपुरम निवासी शाहजान एक छोटे कारोबारी परिवार से थे। पिछले कुछ समय से कंप्यूटर की ट्रेनिंग ले रहे थे। परिजनों के अनुसार, वह बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाने की योजना बना रहे थे। सुखमनी सिंह (22) भी इस हादसे का शिकार हो गईं। उनके परिवार में पिता प्रभजोत सिंह, मां और एक छोटा भाई हैं। प्रभजोत सिंह सिविल डिफेंस में कार्यरत हैं।

Rakhigarhi Human Skeletal Remains: 3 पूरे कंकाल और कब्रों से मिले कुछ इंसानी कंकाल के टुकड़े! राखीगढ़ी के इस रहस्य की पड़ताल अब AnSI करेगी

Rakhigarhi Human Skeletal Remains: हरियाणा के ऐतिहासिक सिंधु-सरस्वती सभ्यता स्थल राखीगढ़ी (Rakhigarhi) से हाल ही में मिले मानव कंकालों ने इतिहासकारों और वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। राखीगढ़ी के इस प्राचीन रहस्य से पर्दा उठाने के लिए अब देश की दो बड़ी राष्ट्रीय संस्थाएं एक साथ आई हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने विस्तृत वैज्ञानिक जांच और उन्नत अनुसंधान के लिए इन मानव अवशेषों को भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) को सौंप दिया है। दोनों संस्थाओं के बीच हुए एक MoU के तहत इस ऐतिहासिक शोध को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मलबे और कब्रों से क्या मिला?

राखीगढ़ी को सिंधु-सरस्वती सभ्यता का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात स्थल माना जाता है। यह हरियाणा में लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां प्रारंभिक हड़प्पा काल से लेकर परिपक्व हड़प्पा काल तक के निरंतर निवास के प्रमाण मिले हैं। हाल ही में एएसआई (ASI) की उत्खनन शाखा-II द्वारा फील्ड सीजन 2025-26 के दौरान राखीगढ़ी के टीला नंबर 7 में खुदाई की गई थी।

यह इलाका पहले से ही एक कब्रिस्तान के रूप में चिन्हित है। इस खुदाई के दौरान कुल आठ कब्रों का पता चला। इन कब्रों से 3 पूरे मानव कंकाल बरामद किए गए। दूसरे कब्रों से मानव कंकालों के कई महत्वपूर्ण टुकड़े भी मिले हैं। इन सभी अवशेषों को विस्तृत जांच के लिए कोलकाता स्थित AnSI की प्राचीन मानव कंकाल प्रयोगशाला और रिपोजिटरी में स्थानांतरित कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक इस साइट से मिले बाकी अवशेषों को भी अगले कुछ दिनों में सौंप दिया जाएगा।

आधुनिक तकनीक से खुलेंगे इतिहास के पन्ने

AnSI के महानिदेशक प्रो बीवी शर्मा के मुताबिक इस ट्रांसफर से सिंधु-सरस्वती सभ्यता के इस महत्वपूर्ण शहरी केंद्र के बहु-विषयक अनुसंधान को बड़ी गति मिलेगी। वैज्ञानिक इन कंकालों पर कई आधुनिक और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे। कंकालों के जेनेटिक्स और जीनोमिक इतिहास की पड़ताल की जाएगी।

स्थिर आइसोटोप अध्ययन से उस दौर के लोगों के खान-पान और गतिशीलता को समझने की कोशिश होगी। ऑस्टियोलॉजिकल और पैलियोपैथोलॉजिकल जांच से कंकालों की शारीरिक बनावट, बीमारियों के प्रसार और स्वास्थ्य के स्तर को जानने का प्रयास किया जाएगा। पर्यावरण पुनर्निर्माण से हड़प्पा काल के दौरान मानव और पर्यावरण के बीच के संबंधों को समझने की कोशिश की जाएगी।

देश-विदेश के बड़े संस्थान मिलकर करेंगे रिसर्च

इस ऐतिहासिक खोज के रहस्यों को सुलझाने के लिए AnSI अकेले काम नहीं कर रही है, बल्कि वह देश और दुनिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी करेगी। इस रिसर्च टीम में शामिल होंगे। इसमें बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), ब्रिटेन का यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) शामिल हैं।

सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB), हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ कुमारस्वामी थनगराज ने बताया कि इन अवशेषों पर ‘एंशिएंट डीएनए टेक्नोलॉजी’ के इस्तेमाल से ईसा पूर्व 3000 (3000 BCE) के समय से मानव जीनोम के विकास, अनुकूलन और प्राकृतिक चयन को समझने में मदद मिलेगी। वहीं बीएचयू के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि इससे हड़प्पा आबादी के वंश, स्वास्थ्य और जीवन शैली के पुख्ता सबूत मिलेंगे।

4। सालों बाद AnSI के इस गौरवशाली शोध का पुनरुद्धार

अधिकारियों ने बताया कि साल 1945 में अपनी स्थापना के समय से ही AnSI के पास सिंधु-सरस्वती स्थलों से मिले अवशेषों पर ऑस्टियोलॉजिकल शोध की एक लंबी परंपरा रही है। विभिन्न चुनौतियों की वजह से बीते वर्षों में यह काम धीमा पड़ गया था। अब संस्थान ने विशेष अनुसंधान टीमों का गठन कर और वैज्ञानिकों को विशेष प्रशिक्षण देकर ‘पैलियोएंथ्रोपोलॉजिकल रिसर्च’ (पुरामानवविज्ञानी अनुसंधान) को पुनर्जीवित करने के प्रयास शुरू किए हैं।

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डेक्कन कॉलेज (पुणे) के पूर्व प्रोफेसर सुभाष वालिंबे और राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर किशोर के। बासा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शहरीकरण ने मानव जीवविज्ञान को कैसे प्रभावित किया, यह समझने के लिए गहन नृवंशविज्ञान परीक्षा बेहद जरूरी है।

Lucknow fire tragedy update: अब तक 15 लोगों की मौत, 4 आरोपी गिरफ्तार, चार अधिकारी निलंबित… लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में अब तक क्या हुआ?

Lucknow fire tragedy update:  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार (22 जून) को तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने के कारण झुलसने से 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि 9 लोग घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में बिल्डिंग के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। इस बिल्डिंग में एक एनिमेशन सेंटर था जहां छात्र मौजूद थे। साथ ही निचली मंजिलों पर एक पेट शॉप और एक क्लिनिक भी था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

पॉश रिहायशी इलाके में है कोचिंग सेंटर

घटना अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में दोपहर करीब तीन बजे हुई। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह बिल्डिंग अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कई कोचिंग सेंटर और कैफे मौजूद हैं।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के जनसंपर्क अधिकारी के.के. सिंह ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि बचाव दल ने इस घटना में घायल कुल 22 लोगों को केजीएमयू पहुंचाया, जिनमें से 15 को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मतृकों की हुई पहचान

अस्पताल द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार हादसे में मरने वालों की शिनाख्त सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुछा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, शाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या के रूप में हुई है। के.के. सिंह ने बताया कि हादसे में घायल हुए नौ लोगों में से सात को छुट्टी दे दी गई है। जबकि दो अन्य का इलाज किया जा रहा है। एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।

SIT में कौन-कौन अधिकारी शामिल?

बयान के अनुसार एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। उसे सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस मामले में पुलिस ने देर रात चार लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, चार अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है।

चार अरेस्ट, 4 सस्पेंड

लखनऊ पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल बिल्डिंग के संयुक्त रूप से मालिक हैं।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर जानकीपुरम में बिजली विभाग के अधिकारी गौरव कुमार, अग्निशमन विभाग की इंदिरा नगर शाखा के अधिकारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सहायक अभियंता अनिल कुमार और कनिष्ठ अभियंता प्रमोद पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

घायलों से मिले सीएम योगी, पीएम मोदी ने जताया दुख

घटना की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री अलीगढ का अपना दौरा बीच में ही छोडकर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। वह अस्पताल भी पहुंचे और घायल पीड़ितों से मुलाकात करके संवेदना प्रकट की। रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह भी देर रात घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। बाद में उन्होंने केजीएमयू के ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना और मुख्यमंत्री को फोन करके घटना की जानकारी ली।

मुआवजे की घोषणा

प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। इसके अलावा सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजन को पांच-पांच लाख तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है।

अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री शाम करीब छह बजकर 15 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचे। फिर हादसे की शिकार इमारत की स्थिति का जायजा लिया और इमारत की ऊपरी मंजिलों का भी दौरा किया। अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल का मुआयना करने के बाद आदित्यनाथ केजीएमयू पहुंचे, दुर्घटना में घायल हुए लोगों से मुलाकात करके उनका हाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

कैसे लगी आग?

घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे नगर विकास और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने आग लगने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि आग शायद इमारत के एसी डक्ट से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि बाहर निकलने का सही रास्ता न होने के कारण धुएं से दम घुटने से मौतें हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। स्थानीय बीजेपी विधायक नीरज बोरा ने पीटीआई को बताया कि इस हादसे में मरने वाले लोगों में से आधे स्थानीय निवासी थे।

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Lucknow Fire: बचने के लिए बाथरूम में छिपे, छत से लगाई छलांग…लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड अब तक 14 छात्रों की मौत

यूपी की राजधानी लखनऊ में सोमवार को एक बेहद ही दर्दनाक घटना घटी है। लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में भीषण आग लग गई। कुछ ही देर में लपटें विकराल हो गई। आसपास के लोगों ने सूचना दमकल को दी। हादसे में अब तक 14 छात्रों की मौत हो गई है। वहीं कई स्टूडेंट्स घायल बताए जा रहे हैं। आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दूसरे फ्लोर पर चल रही कोचिंग में छात्रों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। एक बच्चे ने पहले फ्लोर से कूद कर जान बचाई। आग की भयावहता इतनी अधिक थी कि कई लोग इमारत से बाहर निकलने के लिए छज्जों और अन्य हिस्सों का सहारा लेते नजर आए।

13 छात्रों का किया गया रेस्क्यू

इस भयानक अग्निकांड की त्रासदी और इसमें जान गंवाने वाले मासूमों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बेहद भावुक हो गए।  उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि अब तक 13 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। सभी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर और दुखद घटना है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इमारत के अंदर काफी धुआं भरा हुआ है, जिससे बचाव कार्य में कठिनाई हो रही है। भवन के हर हिस्से और हर कमरे की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए। उन्होंने कहा कि इमारत में बड़ी मात्रा में लकड़ी का फर्नीचर था, जिसके जलने से घना धुआं फैल गया और कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

घटना को लेकर जांच के आदेश

उन्होंने बताया कि दमकल विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। इसके साथ ही एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर मौजूद है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह एक एनिमेशन प्रशिक्षण केंद्र था, जहां छात्र कार्टून और ग्राफिक्स से जुड़ी पढ़ाई करने आते थे। ब्रजेश पाठक ने कहा कि फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। घायल छात्रों को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। उनकी उम्र लगभग 16 से 17 वर्ष बताई जा रही है। घटना को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्रमुख सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक को मौके पर बुलाया गया है। उन्हें आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

सीएम योगी ने रद्द किया अपना कार्यक्रम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ अग्निकांड की सूचना मिलने पर अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रद कर दिया। अलीगढ़ में CM योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ की घटना पर कहा कि मुझे अभी लखनऊ में हुए हादसे की जानकारी मिली है। आग की घटना में कुछ बच्चों की दुखद मौत हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है। इस दुखद घटना के चलते मैं तुरंत लखनऊ लौट रहा हूं।

Lucknow: लखनऊ की कोचिंग सेंटर में आग, 14 स्टूडेंट की मौत…मचा हड़कंप

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला बिल्डिंग में आग लग गई। इस हादसे में अबतक 14 लोगों की मौत हो गई है। वहीं कई स्टूडेंट्स घायल बताए जा रहे हैं। लखनऊ के अलीगंज इलाके में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया। इस घटना पर पीएम मोदी और सीएम योगी ने खेद जताया है।

अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे उषा मेहता मार्ग स्थित एक कोचिंग संस्थान में आग लगने की सूचना मिली थी। इसके बाद दमकल कर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी।

 फायर ब्रिगेड के लोग अंदर मौजूद

लखनऊ कोचिंग इंस्टीट्यूट में आग लगने की घटना पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने कहा, “कुल तेरह बच्चों को अभी बाहर निकाला गया है। उन सभी को हॉस्पिटल भेज दिया गया है। ये एक बड़ी घटना है। अंदर धुआं है और हर एक चीज को हटाकर चेक किया जा रहा है। हर कमरे की जांच की जा रही है।” डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने आगे कहा, “अंदर बहुत सारा लकड़ी का फर्नीचर था और उस फर्नीचर से निकलने वाले धुएं से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। फायर ब्रिगेड के लोग अंदर हैं। NDRF की टीमें मौके पर हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग एक एनिमेशन सेंटर में लगी, जहां बच्चे कार्टून और एनिमेशन से जुड़े कोर्स सीखने आते थे।”

कैसे लगी घटना अभी इसकी जानकारी नहीं

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने आगे कहा, ” मुझे अभी तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है कि ये घटना कैसे शुरू हुई… घायलों को KGMC ट्रॉमा सेंटर भेजा जा रहा है। वे लगभग 16-17 साल के थे… घटना की हाई-लेवल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रिंसिपल सेक्रेटरी (होम) और DGP को मौके पर बुलाया गया है और उन्हें कारणों की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। मैंने अपनी आंखों से 14 लाशें देखीं”

फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आग पर नियंत्रण पाने के लिए 14 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया, जिनमें 1 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म वाहन भी शामिल है। दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने में जुटे हुए हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मामले से जुड़ी अन्य जानकारियों का इंतजार किया जा रहा है।