El Nino update: 40% कम बारिश और अल नीनो का डबल अटैक! 11 साल पुराना रिकॉर्ड टूटेगा क्या? समझिए खेती पर असर कितना

भारत इस साल मौसम की बड़ी चुनौती का सामना करने जा रहा है। प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है और यह साल के अंत तक बनी रह सकती है। इस बार अलनीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। ऐसे में इस बार ज्यादा पानी चाहने वाली फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है. पानी की कमी से उत्पादन पर भी काफी असर पड़ सकता है। ऐसे में देश में सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं। वहीं मंगलवार को कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने कहा कि भारत ने मानसून में देरी या संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली है। इसके तहत जिला स्तर पर विशेष आपातकालीन योजनाएं बनाई गई हैं और देश में पर्याप्त मात्रा में अनाज का भंडार भी मौजूद है।

फलसों पर क्या पड़ेगा असर?

फसलों पर मानसून के असर को लेकर पी.के. सिंह ने बताया कि मौसम विभाग से मिले आंकड़ों और पूर्वानुमानों के आधार पर हर जिले के लिए अलग-अलग आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य कम बारिश या सूखे जैसी परिस्थितियों में किसानों और खेती को नुकसान से बचाना है। उन्होंने कहा कि जहां और जब बारिश की स्थिति के अनुसार जरूरत महसूस होगी, वहां इन योजनाओं को तुरंत लागू किया जाएगा। सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर समय रहते जरूरी कदम उठाएगी।

कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि मौजूदा मौसम की स्थिति काफी हद तक वर्ष 2015 के अल नीनो जैसी दिखाई दे रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश के सिंचाई ढांचे में काफी सुधार हुआ है, जिससे अब हालात पहले की तुलना में बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी कर रखी है। देश में अनाज का भंडार सुरक्षित और मजबूत स्थिति में है। खासकर चावल और गेहूं का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है।

पी.के. सिंह ने भरोसा दिलाया कि यदि किसी कारण से किसी खाद्यान्न की कमी होती है, तो सरकार उसे पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। जरूरत पड़ने पर विदेशों से आयात भी किया जाएगा, ताकि आम लोगों पर किसी तरह का असर न पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

40% कम बारिश और अल नीनो का डबल अटैक!

कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने कहा कि जब मानसून में देरी होती है या सूखे जैसी स्थिति बनती है, तो किसान आमतौर पर दालों की खेती की ओर रुख करते हैं। इसकी वजह यह है कि दालों की फसलों को कम पानी की जरूरत होती है और ये कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे हालात में किसान उन फसलों को प्राथमिकता देते हैं, जिनकी खेती कम लागत और कम पानी में हो सकती है। इससे मौसम की अनिश्चितता का असर खेती पर कुछ हद तक कम हो जाता है। पी.के. सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में बारिश सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसके बावजूद किसानों का दालों जैसी कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ता रुझान एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि फसल उत्पादन पर ज्यादा असर न पड़े।

मुंबई पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि 23 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने और रफ्तार पकड़ी और कई नए इलाकों तक पहुंच गया। इसके तहत मध्य अरब सागर के बाकी हिस्से, महाराष्ट्र के कुछ और क्षेत्र, जिनमें मुंबई भी शामिल है, तेलंगाना और ओडिशा के शेष भाग तथा छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ इलाकों में मानसून पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मानसून के उत्तर अरब सागर और गुजरात के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कुछ और क्षेत्रों में भी मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। आईएमडी ने यह भी कहा है कि अगले 3 से 4 दिनों में झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी मानसून पहुंच सकता है।

पहले किया कत्ल फिर सोशल मीडिया पर डाला इमोशनल मैसेज… केतन अग्रवाल केस में वायरल हो रही मंगेतर सिया की पुरानी पोस्ट

पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले में युवा बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत हो गई थी। पहले ये मामला एक एक्सीडेंट माना गया था। इस घटना के कुछ देर बाद उनकी मंगेतर सिया गोयल ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर शोक व्यक्त किया था। वहीं पुलिस की जांच में जब ये मामला आगे बढ़ा तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये कोई हादसा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित हत्या का मामला था।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में सिया गोयल और उनके कथित साथी चेतन चौधरी की भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं इसी बीच केतन अग्रवाल की मौत के बाद सोशल मीडिया पर शेयर किया गया सिया का एक पुराना पोस्ट अब फिर से चर्चा में है।

मौत के बाद मंगेतर ने शेयर की वीडियो

केतन की मौत के बाद शेयर की गई एक इंस्टाग्राम स्टोरी में सिया ने लिखा था, “तुम मेरे जन्मदिन के दिन ही मुझे छोड़कर चले गए। हमारी शादी होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही तुम हमेशा के लिए दूर हो गए। मुझे अब तक समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों हुआ। मेरे मन में कई सपने थे और कुछ ऐसे सवाल भी, जिनके जवाब शायद मुझे कभी नहीं मिल पाएंगे। जब मैं तुमसे इतना प्यार करती थी, तो तुम मुझे अकेला छोड़कर क्यों चले गए? भगवान तुम्हारी आत्मा को शांति दे।”

मंगेतर और उसके प्रेमी ने रची साजिश

ये मामला तब सुर्खियों में आया जब पुणे रुलर पुलिस ने जांच के आधार पर दावा किया कि 18 जून को हुई मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अपराध था। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आए तथ्यों से संकेत मिले हैं कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच पहले से पहचान थी और दोनों पर केतन की मौत की साजिश रचने का आरोप है। बताया जा रहा है कि केतन अग्रवाल और सिया गोयल की इसी साल फरवरी में सगाई हुई थी और दोनों परिवार उनकी भव्य शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे।

2 बार फेल हुई योजना

पुलिस के अनुसार, केतन अग्रवाल और सिया गोयल पहली बार 31 मई को लोहागढ़ किले में ट्रेकिंग के लिए गए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी दौरान कथित तौर पर एक ऐसी योजना बनाई गई, जिसमें घटना को हादसे का रूप देने की कोशिश की जा सकती थी। इसके बाद 14 जून को दोनों फिर किले पहुंचे, जहां उनके साथ चेतन चौधरी भी मौजूद था। पुलिस के मुताबिक, उस समय कथित योजना सफल नहीं हो सकी। जांच में यहे भी कहा गया है कि 18 जून को लोहागढ़ किले की एक और यात्रा के दौरान कथित तौर पर इस साजिश को अंजाम दिया गया।

केतन के पिता ने क्या कहा

केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने इस मामले पर रिएक्शन देते हुए कहा कि अगर सिया गोयल इस रिश्ते से खुश नहीं थीं, तो वह सीधे शादी से इनकार कर सकती थीं। उन्होंने कहा, “अगर वह शादी नहीं करना चाहती थीं, तो सिर्फ मना कर देतीं। हम तुरंत शादी रद्द कर देते। लेकिन इतना बड़ा कदम उठाने की जरूरत क्यों पड़ी? किसी 26 साल के युवक की जान लेना बेहद दर्दनाक और क्रूर बात है। समाज को ये समझने की जरूरत है कि ऐसी सोच आखिर पैदा कैसे होती है। यह परिवार, परवरिश और सामाजिक माहौल से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े करती है।”

Ketan Agarwal: एक हुडी ने खोल दिया सारा राज, कैसे सिया ने प्रेमी संग रची होने वाले पति के कत्‍ल की साजिश?

महाराष्ट्र के पुणे से सामने आई एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। एक खुशहाल भविष्य के सपने देख रहे 26 वर्षीय केतन विशाल अग्रवाल की मौत की कहानी अब एक ऐसे खौफनाक सच में बदल चुकी है, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया है। जैसे-जैसे इस मामले की परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि भरोसे, रिश्तों और प्यार के नाम पर रची गई कथित साजिश की कहानी बनती जा रही है। पुलिस के अनुसार, जिस लड़की के साथ केतन अपनी नई जिंदगी शुरू करने का सपना देख रहे थे, उसी मंगेतर सिया गोयल पर उनकी हत्या की साजिश रचने का आरोप है।

पुणे के एक बड़े कारोबारी परिवार से जुड़े 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में एक हादसा माना गया था। बताया गया था कि लोहागढ़ किले पर घूमने के दौरान वह गिर गए, जिससे उनकी जान चली गई। लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो मामला एक खौफनाक साजिश में बदल गया। पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान एक युवक पर शक हुआ, जो तेज गर्मी के बावजूद हुडी पहनकर घूम रहा था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की। बाद में उसकी पहचान 22 वर्षीय चेतन चौधरी के रूप में हुई।

जांच में सामने आया कि चेतन चौधरी का कथित तौर पर केतन की मंगेतर सिया गोयल से संबंध था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। पूछताछ और जुटाए गए सबूतों के आधार पर पुलिस को शक हुआ कि केतन की मौत कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि पहले से रची गई साजिश का हिस्सा हो सकती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनसे हत्या की साजिश के संकेत मिले। इसके बाद पुलिस ने मामले को हादसे के बजाय संदिग्ध मौत मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी शुरू कर दीं।

सिया के साथ थे लोग फिर खुला ये राज

पुणे पुलिस के अधीक्षक संदीप गिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस ने इस कथित हत्या की साजिश का खुलासा कैसे किया। न्होंने कहा कि शुरुआत में इस मामले को एक दुर्घटना माना गया था और आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया गया था। उस समय लोगों की सहानुभूति 26 वर्षीय सिया गोयल के साथ थी, क्योंकि उनके मंगेतर केतन अग्रवाल की शादी से कुछ दिन पहले लोहागढ़ किले पर फोटो खिंचवाने के दौरान खाई में गिरने से मौत हो गई थी।

लेकिन जांच के दौरान पुलिस को सिया के बयानों में कई विरोधाभास और गड़बड़ियां नजर आईं। इससे अधिकारियों को शक हुआ और मामले की गहराई से जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने किले तक जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक युवक लगातार केतन और सिया की गाड़ी के पीछे-पीछे जाता दिखाई दिया। यह बात पुलिस को संदिग्ध लगी और इसी सुराग के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। बाद में पुलिस ने उस युवक की पहचान की और उससे जुड़े तथ्यों की जांच शुरू की, जिसके बाद मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे होने लगे।

एक हुडी बिगाड़ा सारा खेल

पुलिस अधिकारियों को उस युवक की मौजूदगी शुरू से ही संदिग्ध लगी। सबसे ज्यादा शक इस बात पर हुआ कि भीषण गर्मी के बावजूद उसने हुडी पहन रखी थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखनी शुरू कर दी। जांच के दौरान किले और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में वही युवक उस जगह के आसपास भी दिखाई दिया, जहां केतन अग्रवाल की मौत हुई थी। इससे पुलिस का शक और गहरा हो गया।

पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि उस युवक और सिया गोयल के बीच संपर्क था। इस सुराग के मिलने के बाद जांच टीम ने दोनों से गहन पूछताछ शुरू की। पूछताछ और जुटाए गए सबूतों के आधार पर पुलिस का दावा है कि सिया गोयल ने इस मामले में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है। जांच अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज और हुडी पहने युवक की संदिग्ध गतिविधियां ही इस कथित हत्या की साजिश का खुलासा करने में सबसे अहम सबूत साबित हुईं। पुलिस का कहना है कि इन्हीं सुरागों की मदद से मामले की परतें खुलती गईं और एक कथित दुर्घटना के पीछे छिपी साजिश का पर्दाफाश हो सका।

शादी को लेकर सिया नहीं थी खुश

पुलिस जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और केतन अग्रवाल की शादी परिवारों की सहमति से तय हुई थी। शुरुआत में दोनों इस रिश्ते के लिए तैयार भी थे। शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। मेहमानों के लिए विशेष फ्लाइट्स बुक की गई थीं और राजस्थान के जयपुर में शादी का भव्य आयोजन तय किया गया था। हालांकि, जांच अधिकारियों का दावा है कि सिया का किसी दूसरे युवक के साथ प्रेम संबंध था। पुलिस के मुताबिक, समय के साथ वह इस शादी को लेकर असहज हो गई थी और शादी नहीं करना चाहती थी।

जांच में जुटी टीम का कहना है कि सिया अपने प्रेम संबंध को जारी रखना चाहती थी और केतन के साथ होने वाली शादी को अपने रास्ते की सबसे बड़ी बाधा मानने लगी थी। पुलिस के अनुसार, इसी वजह से उसने कथित तौर पर एक ऐसी साजिश रची, जिससे यह बाधा हमेशा के लिए खत्म हो जाए।

Stocks to Watch: 24 जून को फोकस में रहेंगे ये 11 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार 24 जून के कारोबार में कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहने वाली है। कुछ कंपनियों ने बड़े अधिग्रहण और साझेदारी की घोषणा की है। वहीं, कुछ पर नियामकीय कार्रवाई, हिस्सेदारी बिक्री, फंड जुटाने और साइबर हमले जैसे अहम अपडेट आए हैं। ऐसे में इन 11 शेयरों में कारोबार के दौरान बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

Bajaj Auto

ऑटो सेक्टर की कंपनी Bajaj Auto Ltd ने बताया कि 23 जून की सुबह उस पर रैनसमवेयर साइबर हमला हुआ। इसका असर कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी Bajaj Auto Technology Ltd के कुछ सिस्टम्स पर पड़ा। कंपनी ने कहा कि हमले के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से जरूरी सुरक्षा कदम उठाए गए हैं।

Infosys

आईटी कंपनी Infosys ने सेमीकंडक्टर निर्माता GlobalFoundries के साथ अपनी मल्टी-ईयर पार्टनरशिप का विस्तार किया है। इस समझौते के तहत Infosys, GlobalFoundries के लिए AI बेस्ड मैनेज्ड सर्विसेज उपलब्ध कराएगी। कंपनी एप्लिकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा और सर्विस डेस्क ऑपरेशंस संभालेगी।

Rajesh Exports

गोल्ड ज्वेलरी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी Rajesh Exports Limited पर जांच का दायरा बढ़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी से जुड़े बेंगलुरु और मुंबई के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत की गई है।

NLC India

सरकारी पावर और माइनिंग कंपनी NLC India Ltd ने Indian Oil Corporation (IOCL) के साथ एक MoU साइन किया है। दोनों कंपनियां तमिलनाडु में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए जॉइंट वेंचर बनाएंगी। यह सोलर, विंड, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन फ्यूल, ई-मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में काम करेगा।

Delhivery

लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery में निवेशक Nexus Venture Partners ने अपनी 0.6% हिस्सेदारी बेच दी है। ब्लॉक डील के जरिए 43.2 लाख शेयर करीब ₹208 करोड़ में बेचे गए। यह सौदा ₹481 प्रति शेयर के औसत भाव पर हुआ। मार्च 2026 तक Nexus Ventures के पास कंपनी में 4.5% हिस्सेदारी थी।

IRFC

सरकारी रेलवे कंपनी Indian Railway Finance Corporation (IRFC) में केंद्र सरकार ने OFS लॉन्च किया है। सरकार 1% हिस्सेदारी बेचेगी और 1% अतिरिक्त हिस्सेदारी के लिए ग्रीनशू ऑप्शन भी रखा गया है। नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए OFS 24 जून को खुलेगा, जबकि रिटेल निवेशक 25 जून को बोली लगा सकेंगे।

YES Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक YES Bank का बोर्ड 29 जून को फंड जुटाने के प्रस्तावों पर विचार करेगा। बैंक इक्विटी शेयर और डेट सिक्योरिटीज जारी करके पूंजी जुटाने की संभावनाओं पर फैसला ले सकता है।

Honasa Consumer

Mamaearth और The Derma Co की पैरेंट कंपनी Honasa Consumer ने Fluence Pharma में 58% हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी है। यह सौदा करीब ₹135 करोड़ के एंटरप्राइज वैल्यू पर होगा। कंपनी अगले 5 से 7 वर्षों में बाकी 42% हिस्सेदारी भी चरणबद्ध तरीके से खरीदेगी।

Satin Creditcare Network

माइक्रोफाइनेंस कंपनी Satin Creditcare Network ने निजी प्लेसमेंट के जरिए NCD जारी कर ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। कंपनी अगले एक साल में एक या अधिक चरणों में यह फंड जुटा सकती है। इसके लिए AGM में शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।

City Union Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक City Union Bank ने 14 अगस्त 2026 को AGM बुलाने का फैसला किया है। बैठक में बैंक QIP के जरिए ₹5,500 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव पर शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगा। बैंक ने 14 अगस्त को ही डिविडेंड भुगतान की तारीख भी तय की है।

Rashi Peripherals

आईटी और कम्युनिकेशन प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार से जुड़ी कंपनी Rashi Peripherals Ltd ने VDA Infosolutions Private Ltd में 67% हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दे दी है। यह सौदा ₹368.50 करोड़ नकद भुगतान के जरिए किया जाएगा।

Textile Stocks: Motilal Oswal ने Gokaldas समेत 5 स्टॉक्स को दी खरीदने की सलाह, लेकिन 8 में से 3 को न्यूट्रल रेटिंग

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इंग्लैंड दौरे से पहले रोहित शर्मा को मिला बड़ा सम्मान, राष्ट्रपति ने दिया पद्म श्री अवॉर्ड , देखें वीडियो

भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को आज देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्म श्री से सम्मानित किया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रोहित शर्मा को पद्म श्री से सम्मानित किया। रोहित शर्मा को भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल और प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिना जाता है। रोहित की कप्तानी में भारत ने टी-20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जैसे बड़े खिताब अपने नाम किए। रोहित शर्मा अगले महीने 3 मैचों की वनडे सीरीज के लिए इंग्लैंड दौरे पर जाएंगे।

वहीं, भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज को उनके खेल जगत में लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कई अन्य हस्तियों को भी सम्मानित किया गया।

रोहित को मिला पद्म श्री 

सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले रोहित ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 हजार से अधिक रन बनाए हैं और उनके नाम 50 शतक भी दर्ज हैं। लंबे समय से भारतीय टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ रहे रोहित ने अपनी शानदार पारियों और नेतृत्व क्षमता से क्रिकेट जगत में खास पहचान बनाई है। रोहित शर्मा टेस्ट और टी20 से रियायरमेंट ले चुके हैं। रोहित अब केवल वनडे मैच खलते हैं।

विजय अमृतराज को मिला पद्म भूषण

वहीं दूसरी ओर विजय अमृतराज भारत के सबसे सम्मानित खेल सितारों में शामिल हैं। टेनिस के अलावा उन्होंने कमेंट्री, एक्टिंग और सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अपने करियर के दौरान वह दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे और एक समय उनकी विश्व रैंकिंग 16वें स्थान तक पहुंची थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में कई एकल और युगल खिताब जीते, जबकि विंबलडन और यूएस ओपन जैसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों में भी शानदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा, उन्होंने भारत को दो बार डेविस कप के फाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

65 लोगों को मिला सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली कई हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। इस चरण में कुल 65 पुरस्कार दिए गए, जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री सम्मान शामिल थे। सम्मान पाने वालों में प्रसिद्ध अभिनेता ममूटी और मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक भी शामिल रहीं। ये पुरस्कार उन 131 पद्म सम्मानों का हिस्सा हैं, जिनकी घोषणा गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर की गई थी। इन सम्मानों के जरिए कला, खेल, संगीत, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया जाता है।

कब शुरू हुआ था अवॉर्ड

पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। इन्हें तीन श्रेणियों पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में प्रदान किया जाता है। ये सम्मान उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, समाज सेवा, उद्योग, लोक प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। वर्ष 1954 में शुरू हुए ये पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को सम्मानित करने के लिए प्रदान किए जाते हैं।

Monsoon : 315 जिलों में कम बारिश की आशंका ने खरीफ की फसलों को लेकर बढ़ाई चिंता! कमजोर मानसून की ये तैयारियां शुरू

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्त रफ्तार ने कृषि क्षेत्र के सामने चिंता खड़ी कर दी है। देश के 315 जिलों में कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है। हालांकि कमजोर मानसून के इस अनुमान को देखते हुए सरकार ने पहले से ही अपनी एडवांस तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि आयुक्त पीके सिंह ने इसे लेकर विस्तार से जानकारी साझा की है।

40 से 43 फीसदी तक कम हुई बारिश, 111 जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मानसून में देरी हुई है और अब तक 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक 2 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक मानसून के कमजोर रहने की संभावना है। सरकार ने 111 जिलों को सबसे ज्यादा संवेदनशील के रूप में चिह्नित किया है, क्योंकि इन जिलों में सिंचाई की सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है। चिंता की बात यह है कि इन 111 सबसे संवेदनशील जिलों में से अकेले 20 जिले महाराष्ट्र में हैं।

जिला स्तर पर मानसून आकस्मिक योजनाएं तैयार

वहीं कृषि आयुक्त पीके सिंह ने बताया कि IMD से मिले इनपुट्स के आधार पर जिला स्तर पर मानसून आकस्मिक योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। इन योजनाओं को वहां और तब लागू किया जाएगा जहां भी और जब भी बारिश की स्थिति के कारण इनकी आवश्यकता होगी। कृषि आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में मौजूदा स्थितियां साल 2015 के सुपर अल नीनो जैसी ही दिख रही हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि साल 2015 की तुलना में आज देश की स्थिति बहुत बेहतर और कम संवेदनशील है क्योंकि तब से लेकर अब तक देश में सिंचाई के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का काफी विस्तार हुआ है।

गेहूं और चावल के भंडार मजबूत

खाद्य सुरक्षा और अनाज के संकट पर कृषि आयुक्त ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के पास अनाज का बफर स्टॉक बिल्कुल सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में है। देश में चावल और गेहूं का भंडार बहुत मजबूत स्थिति में है। इस बार चने की फसल भी बहुत अच्छी हुई है और इसका भंडार भी बेहतरीन है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर कहीं कोई कमी आती है तो उसे देखा जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो अनाज या दालों का आयात भी किया जाएगा। अरहर का आयात पहले भी किया गया है और जरूरत पड़ने पर इस बार भी किया जाएगा।

कम पानी वाली फसलों की तरफ बढ़ रहे किसान, मूंग का रकबा बढ़ा

मानसून में देरी या सूखे जैसी स्थिति का एक सकारात्मक पहलू यह देखा जा रहा है कि देश के किसान अब कम पानी की खपत वाली फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। किसान अब उन दालों और तिलहन की बुवाई की ओर बढ़ रहे हैं जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल दालों और तिलहन का रकबा बढ़ा है। विशेषकर मूंग का रकबा इस बार काफी ज्यादा बढ़ गया है।

अब तक कुल खरीफ क्षेत्र के 10 प्रतिशत हिस्से को कवर किया जा चुका है। 22 जून 2026 तक सभी खरीफ फसलों का कुल रकबा 11.79 मिलियन हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 11.3 मिलियन हेक्टेयर से अधिक है। पश्चिम एशिया संकट के बीच उर्वरकों की उपलब्धता पर कृषि आयुक्त ने कहा कि सरकार का ध्यान एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और उर्वरकों के अत्यधिक डायवर्जन को रोकने पर है। सॉइल हेल्थ कार्ड के जरिए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का सीमित और सही इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।

फसलों के विविधीकरण से उर्वरकों की मांग अपने आप कम हो जाती है। जैसे अगर मक्के में 125 किलोग्राम नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है तो वहीं सोयाबीन में केवल 12.5 या 25 किलोग्राम की ही जरूरत होती है। सरकार दालों, तिलहन और कपास के विशेष मिशनों के जरिए किसानों को कम लागत और कम इनपुट वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रही है। अत्यधिक पानी और पोषक तत्वों की मांग करने वाले चावल (धान) के क्षेत्रों की समीक्षा की जा रही है ताकि वहां फसलों को डायवर्ट किया जा सके।

होर्मुज संकट के बीच पीएम मोदी का फॉर्मूला, 1973 की गलती दोहराने से कैसे बचा भारत?

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद अब दुनिया का ध्यान लड़ाई से हटकर उसके बड़े असर पर केंद्रित हो गया है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आने वाले तेल की सप्लाई को लेकर है। अगर इस अहम समुद्री मार्ग में कोई रुकावट आती है तो इसका असर भारत समेत कई देशों की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। इस स्थिति ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि भारत ने पिछले कई दशकों में पश्चिम एशिया के बड़े संकटों से कैसे निपटा है। 1973 के योम किप्पुर युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रवैया और हाल के इज़राइल-ईरान तनाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया, भारत की विदेश नीति के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को दिखाती है।

एक ओर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का रुख राजनीतिक और वैचारिक समर्थन पर आधारित था, जबकि दूसरी ओर नरेंद्र मोदी की सरकार ने रणनीतिक और व्यावहारिक नीति को प्राथमिकता दी है। आज भारत अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। योम किप्पुर युद्ध अक्टूबर 1973 में शुरू हुआ था। उस समय मिस्र और सीरिया ने अचानक इजरायल पर हमला कर दिया था। इसके बाद यह संघर्ष तेजी से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल गया। इस टकराव में अमेरिका, सोवियत संघ और अरब देशों के प्रमुख तेल उत्पादक राष्ट्र भी शामिल हो गए थे, जिससे पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई थी।

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का रुख

1973 के युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुलकर अरब देशों का समर्थन किया था। भारत ने इस संघर्ष के लिए इज़रायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उसकी सख्त और अड़ियल नीतियां ही क्षेत्र में तनाव और दुश्मनी की मुख्य वजह हैं। भारत ने अरब देशों और फिलिस्तीन के मुद्दे का मजबूती से समर्थन किया। उस समय भारत की विदेश नीति भी काफी हद तक इसी दिशा में थी। हालांकि, राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देने के बावजूद भारत को इसका कोई खास आर्थिक फायदा नहीं मिला।

युद्ध के बाद दुनिया तेल संकट की चपेट में आ गई। कई अरब देशों ने तेल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर सख्त कदम उठाए, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। रिपोर्टों के मुताबिक, कच्चे तेल का दाम करीब 3 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का असर भारत पर भी पड़ा। देश को तेल आयात करने के लिए पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा खर्च करना पड़ा, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया।

हालांकि युद्ध खत्म होने के बाद भी भारत का फिलिस्तीन के प्रति समर्थन जारी रहा। वर्ष 1974 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) को पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने की कोशिश का समर्थन किया। इसके एक साल बाद भारत पीएलओ को आधिकारिक मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश बन गया। भारत ने नई दिल्ली में पीएलओ का कार्यालय खोलने की भी अनुमति दी। इसके अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव का भी समर्थन किया था, जिसमें ज़ायोनीवाद को नस्लवाद के समान बताया गया था।

इन फैसलों से साफ होता है कि उस समय भारत के अरब देशों और फिलिस्तीन के साथ काफी करीबी संबंध थे। भारत का मानना था कि इस क्षेत्र के साथ मजबूत राजनीतिक रिश्ते उसके रणनीतिक और आर्थिक हितों को भी फायदा पहुंचाएंगे। उस दौर में भारत की मध्य पूर्व के तेल पर निर्भरता लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में सरकार को उम्मीद थी कि अरब देशों के साथ अच्छे संबंध देश की ऊर्जा सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे।

मोदी सरकार का रुख

योम किप्पुर युद्ध के लगभग 50 साल बाद पश्चिम एशिया में एक और बड़ा तनाव देखने को मिला। इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने दुनिया भर की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी, जो दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। अगर इस रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल कारोबार पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह चिंता और भी बड़ी है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किए गए तेल से पूरा करता है।

दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल भारत के लिए इस तरह का तनाव आर्थिक जोखिम पैदा कर सकता है। खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक संकट रहने पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, आयात पर खर्च बढ़ सकता है और महंगाई में तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे देश की आर्थिक विकास दर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, 1973 के मुकाबले इस बार भारत का रुख काफी अलग रहा। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को भारत ने किसी राजनीतिक पक्ष के नजरिए से नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता के आधार पर देखा। भारत ने किसी एक देश का खुलकर समर्थन करने के बजाय शांति, बातचीत और तनाव कम करने पर जोर दिया। मोदी सरकार लगातार यह कहती रही कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालें और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखें।

नई दिल्ली ने इज़रायल, ईरान और खाड़ी देशों समेत पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखे। भारत ने किसी एक खेमे में शामिल होने के बजाय संतुलित नीति अपनाई, ताकि हर परिस्थिति में उसके राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें। इस सोच को अक्सर “भारत पहले” नीति कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चाहे क्षेत्रीय संघर्ष किसी भी दिशा में जाए, भारत की ऊर्जा जरूरतें, आर्थिक हित और कूटनीतिक संबंध प्रभावित न हों।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख इस पूरे संकट के दौरान व्यावहारिक और स्पष्ट रहा। भारत ने हालात बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए। केंद्र सरकार ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए नए और अलग-अलग स्रोतों पर ध्यान दिया, ताकि किसी एक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता न रहे। साथ ही, तेल भंडार को मजबूत करने और रिफाइनरियों का काम लगातार जारी रखने पर भी जोर दिया गया, जिससे देश में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित न हो।

भारत ने यह भी सुनिश्चित किया कि ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर किसी तरह का असर कम से कम पड़े। इसके लिए सरकार ने क्षेत्र के सभी प्रमुख देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में रहने और काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई। भारत ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों के साथ अपने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखे, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीयों की मदद की जा सके और देश के आर्थिक हित सुरक्षित रहें। इस तरह भारत ने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया।

Aliya Riaz: टी-20 विश्व कप से बाहर हुई पाकिस्तान टीम, स्टार क्रिकेटर आलिया रियाज क्यों हो रही हैं ट्रोल?

टी-20 विश्व कप 2026 में पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम का सफर काफी निराशाजनक रहा। टीम अपने शुरुआती तीनों मैच हार कर टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। इस खराब प्रदर्शन के बाद खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर अनुभवी क्रिकेटर आलिया रियाज चर्चा में हैं। महिला टी-20 विश्व कप 2026 में आलिया रियाज अब तक अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं रही हैं। टूर्नामेंट के शुरुआती तीन मैचों में उनका प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा, जहां वह बल्ले और गेंद दोनों से बड़ी भूमिका नहीं निभा सकीं। टीम के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है

सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और प्रदर्शन को लेकर कई तरह की रिएक्शन सामने आ रही हैं। आइए जानते हैं कौन है पाकिस्तान की आलिया रियाज

अब तक आलिया का प्रदर्शन

आलिया रियाज पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। आलिया रियाज ने पाकिस्तान के लिए वनडे और टी-20 दोनों प्रारूपों में लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर बनाया है। वनडे क्रिकेट में वह 80 से अधिक मैच खेल चुकी हैं और बल्ले से 1600 से ज्यादा रन बना चुकी हैं। इस दौरान 39 पारियों में 12 विकेट हासिल की है। वहीं, टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी आलिया 100 से ज्यादा मुकाबलों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने 1300 से अधिक रन बनाने के साथ-साथ गेंद से भी 20 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए हैं, जिससे वह टीम की प्रमुख ऑलराउंडर खिलाड़ियों में शामिल हैं।

साल 2024 में हुई था निकाह

आलिया रियाज का जन्म 24 सितंबर 1992 को रावलपिंडी में हुआ था। आलिया साल 2014 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और तब से लगातार टीम के लिए खेल रही हैं। आलिया दाएं हाथ से बल्लेबाजी करने के साथ-साथ मीडियम गति की गेंदबाजी भी करती हैं। आलिया कई वर्षों से पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं और सीमित ओवरों के दोनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। आलिया रियाज सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी तस्वीरें शेयर करती हैं। आलिया ने साल 2024 में पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वकार यूनिस के छोटे भाई यूनिस अली से निकाह किया था। दोनों समय-समय पर अपनी साथ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं।

Monsoon 2026: मौसम विभाग ने बताया किन 5 बड़े कारण से थमी मानसून की रफ्तार, क्या किसानों के लिए है ये चिंता की बात?

Monsoon 2026: इस साल मानसून की शुरुआत तो अच्छी रही, लेकिन अब इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 22 जून तक देश में सामान्य से करीब 43% कम बारिश हुई है। मानसून फिलहाल दक्षिण महाराष्ट्र के आसपास अटका हुआ है। इसका असर मध्य भारत, पूर्वोत्तर, दक्षिण भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में दिख रहा है, जहां बारिश उम्मीद से काफी कम हुई है।

यह स्थिति किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का यही सबसे अहम समय होता है। अगर बारिश में ज्यादा देरी होती है, तो खेती और पानी की उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

कितनी कम हुई है बारिश?

IMD के मुताबिक, 20 जून तक देश में सिर्फ 45.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस समय तक सामान्य तौर पर 84.4 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी बारिश करीब 46% कम रही। 22 जून तक यह कमी थोड़ी घटकर 43% पर पहुंची।

यह तुलना लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) से की जाती है। आसान भाषा में कहें तो यह कई दशकों की औसत बारिश का आंकड़ा होता है।

आखिर मानसून आगे क्यों नहीं बढ़ रहा?

मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल मानसून के लिए जरूरी सही हालात नहीं बन रहे हैं। इसी वजह से मानसून की चाल धीमी पड़ गई है। IMD ने इसके पीछे पांच बड़ी वजहें बताई हैं।

1. अरब सागर से नमी कम आ रही है

मानसून को आगे बढ़ाने में अरब सागर की बड़ी भूमिका होती है। यहां से आने वाली नम हवाएं देश के अलग-अलग हिस्सों तक पानी पहुंचाती हैं और बारिश कराती हैं।

लेकिन इस समय अरब सागर से वैसी मजबूत नम हवाएं नहीं आ रही हैं। नतीजा यह है कि बादल कम बन रहे हैं और बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं।

2. मानसूनी हवाएं कमजोर हो गई हैं

मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर के ऊपर चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं की ताकत कम हो गई है।

इसी वजह से महाराष्ट्र और उसके आसपास के अंदरूनी इलाकों तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच रही। जब नमी कम पहुंचेगी तो बादल भी कम बनेंगे और बारिश भी कम होगी।

3. हिंद महासागर से भी कम मिल रही मदद

मानसून को नमी पहुंचाने में हिंद महासागर की भी अहम भूमिका होती है। भूमध्य रेखा पार करके आने वाली हवाएं काफी मात्रा में नमी लेकर आती हैं।

लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में ये हवाएं भी कमजोर पड़ गई हैं। इसका असर पूरे देश की मानसूनी गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।

4. बारिश कराने वाले बड़े सिस्टम नहीं बन रहे

आमतौर पर कम दबाव का क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण और दूसरे मौसमीय सिस्टम बनते हैं, जो मानसून को आगे बढ़ाने और अच्छी बारिश कराने में मदद करते हैं।

लेकिन फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं बना है। यही वजह है कि मानसून की चाल थम सी गई है।

5. MJO भी कमजोर पड़ गया है

मेडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) नाम का एक मौसमीय सिस्टम भी बारिश को प्रभावित करता है। जब यह सक्रिय रहता है तो दक्षिण भारत के ऊपर ज्यादा बादल बनते हैं और बाद में ये बादल मानसूनी हवाओं के साथ उत्तर भारत की तरफ बढ़ते हैं।

लेकिन फिलहाल MJO कमजोर स्थिति में है। इसका असर भी बारिश पर पड़ रहा है।

क्या अल नीनो भी बारिश कम कर रहा है?

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर भी दिख रहा है। IMD ने कहा है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और मानसून के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है।

अल नीनो के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इतिहास बताता है कि ऐसे समय भारत में मानसून अक्सर कमजोर पड़ जाता है। इसी वजह से बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है।

IOD से भी नहीं मिल रही मदद

भारतीय महासागर द्विध्रुव यानी IOD फिलहाल तटस्थ स्थिति में है। इसका मतलब है कि यह न तो मानसून को मजबूत कर रहा है और न ही उसे कमजोर कर रहा है।

कई बार सकारात्मक IOD, अल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार फिलहाल ऐसी कोई मदद नहीं मिल रही है।

किसानों की क्यों बढ़ रही परेशानी?

मानसून का रुकना ऐसे समय हुआ है, जब किसान धान, सोयाबीन, कपास, मक्का जैसी खरीफ फसलों की बुआई कर रहे हैं। इन फसलों को शुरुआती दौर में अच्छी बारिश की जरूरत होती है।

अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं बढ़ती, तो बुआई प्रभावित हो सकती है। जलाशयों में पानी कम जमा होगा और आगे चलकर सिंचाई पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि किसान, मौसम वैज्ञानिक और सरकार सभी आने वाले हफ्तों की बारिश पर नजर बनाए हुए हैं।

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